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  • 32 IAS अफसरों का फेरबदल, चर्चित नामों को मिली नई कमान; सृष्टि देशमुख रीवा तो अभिषेक चौधरी ग्वालियर पहुंचे

    32 IAS अफसरों का फेरबदल, चर्चित नामों को मिली नई कमान; सृष्टि देशमुख रीवा तो अभिषेक चौधरी ग्वालियर पहुंचे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में शुक्रवार 21 अगस्त को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के 32 अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस प्रशासनिक बदलाव में जिला पंचायत CEO नगर निगम आयुक्त अपर कलेक्टर और SDM स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। लंबे समय से अलग अलग मैदानी पदों पर काम कर रहे कई अधिकारियों को अब नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं जिससे प्रदेश के कई जिलों और नगर निगमों में प्रशासनिक नेतृत्व का चेहरा बदल गया है।

    इस तबादला सूची में कुछ चर्चित IAS अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। 2019 बैच की IAS सृष्टि देशमुख गौड़ा को खंडवा के अपर कलेक्टर पद से हटाकर जिला पंचायत रीवा का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। उनके सामने अब ग्रामीण विकास और पंचायत स्तर की योजनाओं के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। इसी फेरबदल में उनके पति IAS डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा को भी खंडवा से स्थानांतरित किया गया है। उन्हें जिला पंचायत खंडवा के CEO पद से हटाकर नगर निगम सतना का आयुक्त बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें सतना स्मार्ट सिटी के CEO का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

    ग्वालियर नगर निगम में भी बड़ा बदलाव हुआ है। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय को अब ग्वालियर से हटाकर जिला पंचायत सिंगरौली का CEO बनाया गया है। वहीं 2018 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक चौधरी को जिला पंचायत धार के CEO पद से स्थानांतरित कर ग्वालियर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है। इस बदलाव के बाद ग्वालियर नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में नया नेतृत्व देखने को मिलेगा। ग्वालियर में नगर निगम से जुड़ी विकास योजनाओं शहर की व्यवस्थाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी अब अभिषेक चौधरी के पास होगी।

    इंदौर नगर निगम को भी नया आयुक्त मिला है। 2022 बैच के IAS अधिकारी विशाल धाकड़ को कुक्षी में SDM के पद से स्थानांतरित कर नगर पालिक निगम इंदौर का आयुक्त बनाया गया है। वहीं अक्षय कुमार तेम्रवाल को जिला पंचायत दतिया के CEO पद से हटाकर भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। इन बदलावों से प्रदेश के प्रमुख नगरीय निकायों में भी प्रशासनिक स्तर पर नई टीम सामने आएगी।

    जिला पंचायत CEO स्तर पर भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। जगदीश कुमार गोमे को सिंगरौली से हटाकर सागर जिला पंचायत का CEO बनाया गया है। नवीत कुमार धुर्वे को टीकमगढ़ से स्थानांतरित कर देवास जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी दी गई है। ऐश्वर्य वर्मा को डिंडोरी के शहपुरा में SDM पद से हटाकर सीधी जिला पंचायत CEO बनाया गया है। आशीष को सेंधवा से हटाकर खंडवा जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी दी गई है। कार्तिकेय जायसवाल को वारासिवनी से श्योपुर जिला पंचायत CEO बनाया गया है। वहीं अर्पित गुप्ता और तनुश्री मीणा को भी क्रमशः बड़वानी और बालाघाट जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी मिली है।

    इस तबादला सूची में 2024 बैच के प्रशिक्षु IAS अधिकारियों को भी मैदानी प्रशासन में नई जिम्मेदारी दी गई है। इन अधिकारियों को सहायक कलेक्टर पद से हटाकर अलग अलग क्षेत्रों में SDM बनाया गया है। आशीष कुमार को बीना अनिकेत शांडिल्य को बैहर आकाश अग्रवाल को मझौली पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी सुशिर श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर कुलदीप पटेल को बिछिया जामदार फरहान इरफान को शहपुरा ठाकरे ऋषिकेष विजय को बिजावर और नवकिरण कौर को डबरा SDM की जिम्मेदारी दी गई है।

    सरकार के इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल से प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और नगर निकायों में अधिकारियों की भूमिका बदल गई है। अब नई पदस्थापना के बाद अधिकारियों के सामने अपने अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं को गति देने और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की चुनौती होगी। खास तौर पर ग्वालियर सतना इंदौर भोपाल रीवा सिंगरौली और खंडवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए बदलाव पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। नई जिम्मेदारियों के साथ इन अधिकारियों का कामकाज आने वाले समय में इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के असर को तय करेगा।

  • बिना काम के मिलता रहा वेतन: नगर निगम में फर्जी उपस्थिति पर जांच शुरू

    बिना काम के मिलता रहा वेतन: नगर निगम में फर्जी उपस्थिति पर जांच शुरू


    नई दिल्ली। ग्वालियर नगर निगम में सफाई व्यवस्था से जुड़ी बड़ी अनियमितता सामने आई है। बिना उपस्थिति दर्ज किए एक कर्मचारी को वेतन भुगतान किए जाने के मामले में निगमायुक्त संघप्रिय ने कड़ा रुख अपनाते हुए नोटिस, स्थानांतरण और जांच के आदेश जारी किए हैं।

    लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारी को मिलता रहा वेतन
    मामला वार्ड क्रमांक-65 का है, जहां पदस्थ सफाई संरक्षक शीला लंबे समय से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं थीं। इसके बावजूद उनकी हाजिरी ऑफलाइन दर्ज कर वेतन जारी किया जाता रहा। इस खुलासे के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।

    पोर्टल पर नाम नहीं, फिर भी दर्ज होती रही उपस्थिति
    जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कर्मचारी का नगर निगम के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन तक नहीं था, फिर भी नियमित रूप से उनकी उपस्थिति दर्ज की जाती रही। यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

    दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
    निगमायुक्त ने वार्ड हेल्थ ऑफिसर रवि चिंडालिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर 20 अप्रैल शाम 6 बजे तक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। वहीं जोन क्रमांक-25 के प्रभारी जोनल हेल्थ ऑफिसर अर्जुन दास को भी नोटिस थमाया गया है। उन पर फर्जी हाजिरी दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने और भ्रामक शिकायत करने के आरोप हैं।

    तत्काल स्थानांतरण, नई जिम्मेदारी सौंपी गई
    कार्रवाई के तहत रवि चिंडालिया का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया है। उन्हें वार्ड 39 में उनके मूल पद विनियमित सफाई कर्मी के रूप में पदस्थ किया गया है। वहीं वार्ड 65 का अतिरिक्त प्रभार अस्थायी रूप से दिनेश गौहर को सौंपा गया है।

    तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
    पूरे मामले की प्राथमिक जांच स्वच्छता अधिकारी दीपेन्द्र सेंगर को सौंपी गई है। उन्हें तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जिम्मेदारों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जा सके।

    भ्रष्टाचार पर सख्त रुख, प्रशासन का संदेश
    नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।