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  • US में सख्त होंगे H-1B वीजा के नियम…. रिपब्लिकन MP ने संसद में पेश किया नया Bill

    US में सख्त होंगे H-1B वीजा के नियम…. रिपब्लिकन MP ने संसद में पेश किया नया Bill


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में एच-1बी वीजा (H-1B Visa) को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) में रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय (Republican Congressman Chip Roy) ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसमें एच-1बी वीजा प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग की गई है। इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर पड़ सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय आईटी और तकनीकी क्षेत्र में इसी वीजा के जरिए अमेरिका जाते हैं। विधेयक में एच-1बी वीजा को ग्रीन कार्ड तक पहुंचने का रास्ता खत्म करने, वीजा अवधि घटाने और विदेशी छात्रों के लिए काम करने वाले ओपीटी कार्यक्रम को बंद करने जैसे बड़े प्रस्ताव शामिल हैं।


    एच-1बी वीजा को लेकर नया प्रस्ताव क्या है?

    रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट नाम से यह विधेयक पेश किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब 40 वर्षों में एच-1बी वीजा प्रणाली का गलत इस्तेमाल हुआ है। उनके मुताबिक, अमेरिकी कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देकर अमेरिकी तकनीकी कर्मचारियों को पीछे कर रही हैं। इस विधेयक में कहा गया है कि अब वीजा प्रणाली को मेरिट यानी योग्यता और ज्यादा वेतन के आधार पर चलाया जाना चाहिए। अभी एच-1बी वीजा का आवंटन लॉटरी सिस्टम के जरिए होता है।


    ग्रीन कार्ड और ओपीटी पर क्या असर पड़ेगा?

    इस विधेयक का सबसे बड़ा प्रस्ताव यह है कि एच-1बी वीजा धारकों के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता लगभग बंद कर दिया जाए। अभी तक एच-1बी वीजा पर काम करने वाले लोग अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे। लेकिन नए प्रस्ताव में ड्यूल इंटेंट नीति खत्म करने की बात कही गई है। यानी वीजा धारक को यह साबित करना होगा कि वह अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का इरादा नहीं रखता। इसके अलावा विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद सीमित समय तक काम करने की अनुमति देने वाले ओपीटी कार्यक्रम को भी खत्म करने का प्रस्ताव है। इसका असर हजारों भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है।


    वीजा अवधि और फीस में क्या बदलाव होंगे?

    प्रस्तावित कानून के तहत एच-1बी वीजा की अधिकतम अवधि छह साल से घटाकर सिर्फ दो साल करने की बात कही गई है। साथ ही अब लॉटरी सिस्टम की जगह ज्यादा वेतन देने वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी जा सकती है। ट्रंप प्रशासन पहले ही कानूनी माइग्रेशन कार्यक्रमों पर सख्ती बढ़ा चुका है। नई एच-1बी याचिकाओं पर एक लाख डॉलर तक की फीस लगाने और सख्त नियम लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं। इस विधेयक को अमेरिकी टेक वर्कर्स और इमिग्रेशन से जुड़े कुछ संगठनों का समर्थन भी मिला है।


    भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर क्या असर होगा?

    भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां से सबसे ज्यादा लोग एच-1बी वीजा पर अमेरिका जाते हैं। आईटी, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले हजारों भारतीय पेशेवर और छात्र इस प्रणाली पर निर्भर हैं। अगर यह विधेयक आगे बढ़ता है तो भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका में नौकरी और स्थायी बसने का रास्ता मुश्किल हो सकता है। हालांकि यह अभी सिर्फ प्रस्तावित कानून है और इसे लागू होने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। फिर भी इस प्रस्ताव ने भारतीय छात्रों और आईटी सेक्टर में चिंता बढ़ा दी है।

  • H-1B वीजा चाहने वाले भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका ने इंटरव्यू डेट अक्टूबर 2026 तक टाली

    H-1B वीजा चाहने वाले भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका ने इंटरव्यू डेट अक्टूबर 2026 तक टाली

    नई दिल्ली
    /अमेरिका में काम करने और अपने परिवार के साथ बसने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों के लिए एक बार फिर निराशाजनक खबर सामने आई है। H-1B और H-4 वीजा के लिए इंटरव्यू का इंतजार कर रहे भारतीय आवेदकों की राह में नई अड़चन आ गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक, इन वीजा कैटेगरी के लिए इंटरव्यू की तारीखें अब आगे बढ़ाकर अक्टूबर 2026 तक कर दी गई हैं। इससे पहले इन्हें फरवरी और मार्च 2026 तक टाल दिया गया था, लेकिन अब देरी और लंबी होती नजर आ रही है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय आवेदकों को अमेरिकी दूतावासों और कांसुलेट्स की ओर से सूचित किया गया है कि पहले से तय कई इंटरव्यू अपॉइंटमेंट्स को रद्द या री-शिड्यूल किया जा रहा है। डेक्कन क्रॉनिकल के साथ-साथ अमेरिकी मीडिया संस्थान द अमेरिकन बाज़ार ने भी दावा किया है कि बड़ी संख्या में वीजा अप्लीकेंट्स की इंटरव्यू डेट्स 2026 की आखिरी तिमाही तक खिसका दी गई हैं।इस लगातार हो रही देरी का असर अब सीधे आवेदकों की योजनाओं पर पड़ने लगा है। जनवरी और फरवरी 2026 में इंटरव्यू के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके कई भारतीय अपनी अपॉइंटमेंट्स कैंसिल कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि दोबारा बुकिंग करने पर शायद पहले की कोई तारीख मिल जाए। हालांकि, इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है।

    हाल के हफ्तों में अमेरिकी कांसुलेट्स ने कई आवेदकों को ईमेल और नोटिस के जरिए बताया कि दिसंबर और जनवरी के लिए निर्धारित इंटरव्यू अब फरवरी या मार्च तक टाल दिए गए हैं। कुछ मामलों में यह देरी और ज्यादा बढ़कर 2026 के अंत तक पहुंच गई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा जांच प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।बताया जा रहा है कि वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दी गई है। आवेदकों के डिजिटल फुटप्रिंट की गहन जांच की जा रही है, जिसके चलते प्रोसेसिंग टाइम बढ़ गया है। इसी अतिरिक्त जांच प्रक्रिया को इंटरव्यू में देरी की मुख्य वजह माना जा रहा है।

    इस स्थिति ने खासकर उन भारतीय प्रोफेशनल्स को ज्यादा प्रभावित किया है, जो पहले से अमेरिका में काम कर रहे हैं और अपने परिवार से अलग रह रहे हैं। H-4 वीजा का इंतजार कर रहे उनके जीवनसाथी और बच्चे महीनों से भारत में फंसे हुए हैं। बार-बार इंटरव्यू टलने से न केवल उनकी निजी जिंदगी प्रभावित हो रही है, बल्कि उनके करियर पर भी खतरा मंडराने लगा है। इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अपॉइंटमेंट्स का एक साथ कैंसिल होना असामान्य है। द अमेरिकन बाज़ार से बातचीत में कई वकीलों ने बताया कि जिन आवेदकों के इंटरव्यू पहले 2026 की शुरुआत में तय थे, उन्हें अब सीधे अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तारीखें दी जा रही हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी वीजा सिस्टम पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जो भारतीय टैलेंट पर काफी हद तक निर्भर हैं। टेक, आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में कुशल पेशेवरों की कमी और बढ़ सकती है।फिलहाल H-1B और H-4 वीजा आवेदकों के सामने अनिश्चितता का दौर बना हुआ है। सभी की नजरें अमेरिकी प्रशासन की अगली घोषणा पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि इंटरव्यू प्रक्रिया में यह देरी अस्थायी है या आने वाले समय में और बढ़ सकती है।