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  • कश्मीर और पानी पर भारत को घेरने पहुंचे शहबाज से आतंकवाद पर हुआ सीधा सवाल UN के बाहर चुपचाप आगे बढ़ गए पाक PM

    कश्मीर और पानी पर भारत को घेरने पहुंचे शहबाज से आतंकवाद पर हुआ सीधा सवाल UN के बाहर चुपचाप आगे बढ़ गए पाक PM


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ कई आरोप लगाए और कश्मीर तथा सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया लेकिन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर जब उनसे पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े सवाल पूछे गए तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। 24 सितंबर को UN मुख्यालय में प्रवेश करते समय पत्रकार ने उनसे पूछा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा। शहबाज शरीफ सवाल को अनसुना करते हुए आगे बढ़ गए। बाद में मुख्यालय से निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया। इस बार भी उन्होंने प्रतिक्रिया नहीं दी और आगे निकल गए। इस घटनाक्रम की पुष्टि कई मीडिया रिपोर्टों में हुई है।

    इसके एक दिन बाद 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान शहबाज शरीफ ने भारत पर सिंधु नदी के पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाया और कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने सिंधु नदी प्रणाली को पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए भारत की नीतियों पर सवाल उठाए। साथ ही अपने भाषण में भारत के साथ संघर्ष का संदर्भ भी दिया। उनके संबोधन के बाद भारत ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के दावों का जवाब देते हुए उसके आतंकवाद और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे को लेकर फॉर्म-47 का संदर्भ दिया और कहा कि पाकिस्तान में सत्ता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। गहलोत ने ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में पाए जाने का भी उल्लेख किया और आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर सवाल उठाया।

    भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी गई। गहलोत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लोगों के अधिकारों तथा वहां की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और धार्मिक कट्टरता से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र में यह बयानबाजी ऐसे समय हुई जब दोनों देशों के प्रतिनिधि अपने अपने पक्ष को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने की कोशिश कर रहे थे। शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में भारत की नीतियों पर सवाल उठाए तो भारत ने जवाब के अधिकार के तहत पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड और उसकी आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था को मुद्दा बनाया।

    इस पूरे घटनाक्रम में UN मुख्यालय के बाहर पूछे गए सवाल भी चर्चा में रहे। पत्रकारों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से सीधे आतंकवादियों को कथित तौर पर पनाह देने और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल किया लेकिन शहबाज शरीफ ने दोनों मौकों पर कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया।

  • पाक में भारत विरोधी आतंकियों की हो रही रहस्यमयी मौतें, अब हाफिज सईद के करीबी अफरीदी का खात्मा

    पाक में भारत विरोधी आतंकियों की हो रही रहस्यमयी मौतें, अब हाफिज सईद के करीबी अफरीदी का खात्मा


    नई दिल्ली। पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से भारत में वांटेड आतंकियों और उनके सहयोगियों की लगातार रहस्यमयी हत्याओं का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक बड़े नेता शेख यूसुफ अफरीदी की हत्या ने एक बार फिर सुरक्षा और खुफिया तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मामला 26 अप्रैल 2026 का है, जब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लांडी कोतल क्षेत्र में अज्ञात हमलावरों ने अफरीदी पर गोलियां चला दीं। इस हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हमलावर आसानी से फरार हो गए। अफरीदी को लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख चेहरे और हाफिज सईद का करीबी सहयोगी माना जाता था।

    सूत्रों के अनुसार, अफरीदी संगठन के लिए भर्ती और स्थानीय नेटवर्क संभालने में अहम भूमिका निभाता था। वह खैबर क्षेत्र में लश्कर की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सक्रिय था और प्रतिबंधित संगठन के ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। इससे पहले भी संगठन को बड़ा झटका लगा था, जब लश्कर-ए-तैयबा के सह-संस्थापक अमीर हमजा पर लाहौर में जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। माना जाता है कि वह कई बड़े आतंकी हमलों की रणनीति और प्रचार गतिविधियों से जुड़ा रहा है।

    पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों से भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों और उनके नेटवर्क से जुड़े लोगों की लगातार टारगेटेड हत्याएं हो रही हैं। इनमें कई कमांडर, फाइनेंसर और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाले लोग शामिल हैं। हाल ही में सामने आए मामलों में कराची, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या हुई है। इनमें लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े नाम शामिल बताए जाते हैं।

    इन घटनाओं का पैटर्न लगभग एक जैसा बताया जाता है अज्ञात हमलावर, सटीक निशाना, और वारदात के बाद बिना किसी जिम्मेदारी का दावा किए हमलावरों का फरार हो जाना। इन हत्याओं को लेकर अलग-अलग थ्योरी सामने आती रही हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे आतंकी संगठनों के भीतर की आपसी रंजिश और शक्ति संघर्ष से जोड़ते हैं, जबकि कुछ इसे सुरक्षा एजेंसियों की रणनीतिक कार्रवाई मानते हैं। हालांकि किसी भी थ्योरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह सिलसिला पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है, क्योंकि एक के बाद एक प्रमुख नामों के निशाने पर आने से पूरे ढांचे में अस्थिरता और डर का माहौल देखा जा रहा है।