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  • तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो कैल्शियम की कमी भी हो सकती है वजह, जानिए किन संकेतों पर जांच जरूरी

    तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो कैल्शियम की कमी भी हो सकती है वजह, जानिए किन संकेतों पर जांच जरूरी

    नई दिल्ली: बाल झड़ने की समस्या आम होती जा रही है और कम उम्र में भी कई लोग बालों के पतले होने या गंजेपन की परेशानी का सामना कर रहे हैं। लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के अलावा बढ़ते प्रदूषण को भी बालों की सेहत प्रभावित करने वाले कारणों में शामिल किया जाता है। बाल झड़ने की शुरुआत होते ही लोग अक्सर अलग-अलग शैंपू, तेल और हेयर केयर उत्पादों का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं, लेकिन बार-बार उत्पाद बदलना भी समस्या बढ़ा सकता है। कई बार बालों की दिक्कत के पीछे शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ियां भी जिम्मेदार होती हैं।

    बालों के झड़ने की वजह हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। पोषक तत्वों की कमी, लगातार तनाव, नींद की कमी, थायरॉइड की समस्या और आनुवंशिक कारण बालों की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं। आयरन, प्रोटीन, जिंक और बायोटिन की कमी भी बालों के झड़ने को बढ़ावा दे सकती है। ऐसे में कम उम्र में अचानक या लगातार बाल झड़ने लगें तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय इसकी असली वजह समझना जरूरी है। बिना जांच किसी पोषक तत्व की कमी मानकर सप्लीमेंट लेना सही तरीका नहीं माना जाता।

    कैल्शियम को आम तौर पर हड्डियों की सेहत से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसकी कमी बालों की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली कैल्शियम की कमी यानी हाइपोकैल्सीमिया के कारण बालों में बदलाव अधिक देखे जा सकते हैं। कैल्शियम की कमी से बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और केराटिन के उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे बाल रूखे और कमजोर होने के साथ पतले या टूटने वाले हो सकते हैं। इसके अलावा कैल्शियम की कमी के साथ नाखून भी कमजोर होने लग सकते हैं। हालांकि, केवल कैल्शियम की कमी से बाल झड़ने की समस्या होना बहुत आम नहीं माना जाता।

    पोषक तत्वों की कमी के मामले में विशेषज्ञों के अनुसार आयरन, प्रोटीन, जिंक और बायोटिन जैसे तत्वों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को इनके सप्लीमेंट लेने की जरूरत है। जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेना भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए यदि शरीर में किसी विटामिन या पोषक तत्व की कमी की आशंका हो तो डॉक्टर की सलाह पर ही दवा या सप्लीमेंट लेना चाहिए। बालों की समस्या का कारण पता किए बिना केवल किसी एक पोषक तत्व को जिम्मेदार मानकर उपचार शुरू करना उचित नहीं है।

    रोज कुछ बाल गिरना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है और आम तौर पर रोज 30 से 50 बाल गिर सकते हैं। चिंता तब होती है जब बाल लगातार अधिक मात्रा में गिरने लगें, हेयरलाइन पीछे जाने लगे या बालों की घनत्व कम होने लगे। किसी बीमारी या तनाव के बाद होने वाला अत्यधिक हेयर शेडिंग कई बार कुछ महीनों बाद शुरू हो सकता है और कारण खत्म होने के बाद धीरे-धीरे सुधार भी हो सकता है। यदि बाल अचानक गुच्छों में गिर रहे हों, गोल-गोल पैच बन रहे हों या सिर की त्वचा पर लालिमा और सूजन दिखाई दे रही हो, तो सही कारण का पता लगाने के लिए समय रहते जांच और इलाज जरूरी है।

  • पुरुषों में ज्यादा बाल झड़ने की वजह क्या है? जानें वैज्ञानिक कारण

    पुरुषों में ज्यादा बाल झड़ने की वजह क्या है? जानें वैज्ञानिक कारण


    नई दिल्ली। बालों का झड़ना आज एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन पुरुषों और महिलाओं में इसका पैटर्न पूरी तरह अलग होता है। पुरुषों में जहां समय के साथ सिर के आगे और बीच के हिस्से से बाल तेजी से कम होकर गंजापन दिखने लगता है, वहीं महिलाओं में आमतौर पर पूरे सिर में हल्का-हल्का बाल पतला होता है, लेकिन पूरी तरह गंजापन बेहद कम देखा जाता है।

    इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पाए जाने वाले हार्मोन और उनकी कार्यप्रणाली है।
    पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन एक एंजाइम की मदद से DHT (डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) में बदल जाता है। यही DHT बालों की जड़ों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। यह धीरे-धीरे बालों की जड़ों को कमजोर कर देता है, जिससे बाल पतले होते जाते हैं और अंततः गिरने लगते हैं। समय के साथ यह प्रक्रिया इतनी तेज हो जाती है कि सिर के कुछ हिस्सों में पूरी तरह गंजापन दिखाई देने लगता है।

    महिलाओं में क्यों बच जाते हैं बाल?
    महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हार्मोन बालों की जड़ों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है और DHT के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित करता है। इसी कारण महिलाओं में बालों का झड़ना होता तो है, लेकिन वह आमतौर पर “डिफ्यूज थिनिंग” के रूप में होता है यानी पूरे सिर में हल्की-हल्की कमी, न कि पुरुषों जैसा पैच वाला गंजापन। इसके अलावा महिलाओं के हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़ें) हार्मोन के प्रति अपेक्षाकृत कम संवेदनशील होती हैं, जिससे बाल लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।

    जेनेटिक्स भी निभाता है बड़ी भूमिका
    बाल झड़ने की समस्या सिर्फ हार्मोन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें जेनेटिक फैक्टर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे मेडिकल भाषा में Androgenetic Alopecia कहा जाता है। अगर परिवार में पिता या दादा को गंजापन रहा है, तो पुरुषों में इसकी संभावना काफी बढ़ जाती है। महिलाओं में भी यह जेनेटिक प्रभाव होता है, लेकिन उसका असर अपेक्षाकृत धीमा और कम गंभीर होता है।

    उम्र और हार्मोनल बदलाव का अस
    जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे बालों का झड़ना बढ़ सकता है। हालांकि तब भी पुरुषों जैसा पूरा गंजापन दुर्लभ होता है।

    पुरुषों में गंजापन मुख्य रूप से DHT हार्मोन के अधिक प्रभाव और जेनेटिक संवेदनशीलता के कारण होता है, जबकि महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन बालों को सुरक्षा प्रदान करता है। यही वजह है कि पुरुषों में गंजापन ज्यादा दिखाई देता है और महिलाओं में बाल झड़ने के बावजूद पूरा सिर आमतौर पर सुरक्षित रहता है।

  • रोज हेलमेट पहनते हैं? जानिए क्या सच में इससे झड़ते हैं बाल, एक्सपर्ट ने बताया ट्रैक्शन एलोपेसिया का कारण और इलाज

    रोज हेलमेट पहनते हैं? जानिए क्या सच में इससे झड़ते हैं बाल, एक्सपर्ट ने बताया ट्रैक्शन एलोपेसिया का कारण और इलाज


    नई दिल्ली। रोजाना बाइक या स्कूटर चलाने वाले लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या लगातार हेलमेट पहनने से बाल झड़ने लगते हैं। सड़क सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट अनिवार्य है, लेकिन हेयर फॉल की बढ़ती शिकायतों ने कई लोगों को चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हेलमेट खुद समस्या नहीं है, बल्कि उसका गलत उपयोग और साफ-सफाई की कमी बाल झड़ने की वजह बन सकती है।

    Marengo Asia Hospitals की सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका हेमराजानी के अनुसार, लंबे समय तक बहुत टाइट हेलमेट पहनने से ‘ट्रैक्शन एलोपेसिया’ नामक स्थिति विकसित हो सकती है। यह हेयर लॉस का एक प्रकार है, जो बालों की जड़ों पर लगातार खिंचाव और दबाव पड़ने से होता है। जब हेलमेट जरूरत से ज्यादा कसकर पहना जाता है, तो स्कैल्प के कुछ हिस्सों पर लगातार रगड़ और दबाव बनता है, जिससे हेयर फॉलिकल्स कमजोर पड़ सकते हैं।

    इसके अलावा, हेलमेट के अंदर जमा पसीना, गर्मी और प्राकृतिक तेल भी स्कैल्प की सेहत को प्रभावित करते हैं। यदि हेलमेट के अंदरूनी पैड नियमित रूप से साफ नहीं किए जाएं, तो उनमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं, जो डैंड्रफ, खुजली और बाल झड़ने की समस्या को बढ़ा सकते हैं। कई लोग लंबे बालों को कसकर बांधकर हेलमेट पहनते हैं, जिससे जड़ों पर अतिरिक्त खिंचाव पड़ता है और नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।

    हालांकि, इस समस्या से बचाव संभव है। सबसे पहले, सही फिट वाला हेलमेट चुनना जरूरी है, जो सिर पर सुरक्षित बैठे लेकिन अत्यधिक दबाव न डाले। वेंटिलेशन की सुविधा वाला हेलमेट स्कैल्प को सांस लेने का मौका देता है। हेलमेट पहनने से पहले सूती या पसीना सोखने वाली इनर कैप का इस्तेमाल करने से रगड़ और नमी कम होती है। हेलमेट के अंदरूनी पैड को समय-समय पर धोना और पूरी तरह सुखाकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।

    यदि हेयरलाइन पीछे जाने लगे, बाल पतले दिखें या असामान्य रूप से झड़ने लगें, तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। शुरुआती चरण में ट्रैक्शन एलोपेसिया को नियंत्रित किया जा सकता है। टॉपिकल मिनोक्सिडिल, पीआरपी थेरेपी, हेयर पेप्टाइड्स और लो-लेवल लाइट थेरेपी जैसे आधुनिक उपचार उपलब्ध हैं, जो स्कैल्प में रक्त संचार बढ़ाकर नए बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि हेलमेट छोड़ना समाधान नहीं है। सही तरीके से फिट और साफ-सुथरा हेलमेट पहनकर आप अपनी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं और बालों की सेहत भी बनाए रख सकते हैं।

  • अचानक बाल झड़ने लगे? हो सकता है एलोपेशिया जानें लक्षण और इलाज

    अचानक बाल झड़ने लगे? हो सकता है एलोपेशिया जानें लक्षण और इलाज


    नई दिल्ली । क्या आपके सिर या दाढ़ी में अचानक गोल पैच बन रहे हैं और बाल झड़ रहे हैं? यह सिर्फ सामान्य हेयर फॉल नहीं बल्कि एलोपेशिया एरियाटा हो सकता है जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही बालों की जड़ों पर हमला करता है और बाल अचानक झड़ने लगते हैं। एलोपेशिया सिर के साथ साथ दाढ़ी आइब्रो और शरीर के अन्य हिस्सों के बालों को भी प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि एलोपेशिया और सामान्य गंजापन अलग हैं। सामान्य गंजापन धीरे धीरे होता है हॉर्मोन और जेनेटिक कारणों से बाल पतले होने लगते हैं और हेयरलाइन पीछे खिसकती है। वहीं एलोपेशिया में बाल अचानक सिक्के के आकार के पैच में झड़ते हैं लेकिन जड़ें जीवित रहती हैं। इसका मतलब है कि सही समय पर पहचान और इलाज से बाल दोबारा उग सकते हैं।

    नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार पूरी दुनिया में लगभग 2% लोग जीवन में कभी न कभी एलोपेशिया का सामना कर चुके हैं। अमेरिका में करीब 68 लाख लोग इससे प्रभावित हैं। शुरुआती लक्षणों में अचानक बाल झड़ना नहाते या कंघी करते समय बाल गुच्छों में गिरना शामिल है। कुछ लोगों को स्कैल्प पर खुजली हल्की जलन या झुनझुनी महसूस हो सकती है। इसके अलावा नाखूनों पर छोटे गड्ढे या सफेद धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं। शुरुआत में दर्द नहीं होता इसलिए लोग इसे सामान्य हेयर फॉल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    एलोपेशिया का इलाज समय पर पहचान और चिकित्सकीय देखभाल से संभव है। स्टेरॉयड क्रीम हेयर टॉनिक और चिकित्सक द्वारा सुझाई गई दवाइयाँ बालों को फिर से उगाने में मदद कर सकती हैं। साथ ही तनाव कम करना संतुलित आहार और स्कैल्प की सही देखभाल भी लाभकारी होती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि शुरुआती पहचान और उचित उपचार से बालों की रिकवरी की संभावना अधिक रहती है।

    हालांकि यह बीमारी कॉस्मेटिक रूप से परेशान कर सकती है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय पर डॉक्टर से संपर्क और उपचार से बाल दोबारा उग सकते हैं और एलोपेशिया को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए अगर अचानक बाल झड़ना शुरू हो जाए तो इसे नजरअंदाज न करें।

  • महंगे ट्रीटमेंट छोड़िए! किचन में मौजूद इन 5 देसी नुस्खों से बाल बनेंगे घने और मजबूत

    महंगे ट्रीटमेंट छोड़िए! किचन में मौजूद इन 5 देसी नुस्खों से बाल बनेंगे घने और मजबूत


    नई दिल्ली।आज के दौर में प्रदूषण तनाव और गलत लाइफस्टाइल का सबसे पहला असर हमारे बालों पर पड़ता है। बालों का झड़ना रूखापन दोमुंहे बाल और कमजोर जड़ें अब आम समस्या बन चुकी हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगे सैलून ट्रीटमेंट और केमिकल प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं जो कुछ समय के लिए फायदा तो देते हैं लेकिन लंबे समय में बालों को और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ बालों के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं बल्कि प्राकृतिक देखभाल ज्यादा जरूरी है। अच्छी बात यह है कि आपकी रसोई में ही ऐसी कई चीजें मौजूद हैं जो बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें घना मजबूत और चमकदार बना सकती हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 देसी और असरदार हेयर मास्क के बारे में।

    एलोवेरा और नारियल तेल
    एलोवेरा में मौजूद प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम स्कैल्प की डेड स्किन हटाकर उसे स्वस्थ बनाते हैं। नारियल तेल बालों की जड़ों में नमी पहुंचाकर टूटने से बचाता है।कैसे लगाएं: एलोवेरा जेल और नारियल तेल मिलाकर स्कैल्प की मसाज करें और 30 मिनट बाद धो लें।

    अंडा और दही
    बाल केराटिन से बने होते हैं और अंडा प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। दही बालों को कंडीशन करता है और उन्हें सॉफ्ट बनाता है।विधि: एक अंडा और आधा कप दही फेंटकर जड़ों से लेकर बालों की लंबाई तक लगाएं।
    सावधानी: इसे धोने के लिए ठंडे पानी का ही इस्तेमाल करें।

    प्याज का रस और शहद
    प्याज में मौजूद सल्फर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और नए बालों के उगने में मदद करता है। शहद बालों की नमी को लॉक करता है।
    टिप: रुई की मदद से सिर्फ स्कैल्प पर लगाएं और 20–30 मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से धो लें।

    मेथी दाना और सरसों तेल
    मेथी बालों के फॉलिकल्स को मजबूत करती है जबकि सरसों का तेल स्कैल्प को पोषण और गर्माहट देता है।
    प्रयोग: रातभर भीगी मेथी पीसकर उसमें सरसों तेल मिलाएं और 1 घंटे तक लगाकर रखें।

    केला और जैतून का तेल

    दोमुंहे और बेजान बालों के लिए यह मास्क बेहद फायदेमंद है। यह बालों की इलास्टिसिटी बढ़ाता है और टूटने से बचाता है।
    कैसे लगाएं: पका केला मैश कर उसमें जैतून का तेल मिलाएं और 20–25 मिनट बाद धो लें।

    जरूरी सलाह
    किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। बेहतर परिणाम के लिए इनमें से किसी एक मास्क का इस्तेमाल हफ्ते में एक बार नियमित रूप से करें।याद रखें सुंदर और मजबूत बालों के लिए धैर्य और प्राकृतिक देखभाल सबसे बड़ा इलाज है।