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  • जवायदा और नुसेइरात में इजरायली कार्रवाई से गाजा में फिर बिगड़े हालात, नागरिकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

    जवायदा और नुसेइरात में इजरायली कार्रवाई से गाजा में फिर बिगड़े हालात, नागरिकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल


    नई दिल्ली ।गाजा में इजरायल और हमास के बीच जारी तनाव के बीच ताजा इजरायली सैन्य हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत होने की खबर है। मृतकों में चार साल का एक बच्चा भी शामिल बताया गया है। हमलों में सात अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, घायलों का इलाज अस्पतालों में कराया जा रहा है।

    ताजा घटनाक्रम ने गाजा में लागू युद्धविराम की स्थिति को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, मध्य गाजा के जवायदा शहर में एक इमारत को निशाना बनाया गया, जिससे उसे काफी नुकसान पहुंचा। हमले से पहले इलाके के नागरिकों को अपनी संपत्ति और क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई है।

    स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक, हमले के बाद घटनास्थल से मलबा और छर्रे काफी दूरी तक फैल गए। इस घटना में कई लोग घायल हुए। घायलों में चार वर्षीय मोहम्मद अब्देल सलाम ताहा भी शामिल था। बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना में अन्य घायल लोगों का उपचार जारी रहने की जानकारी है।

    गाजा के स्थानीय निवासी अबू अहमद ने मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जमीन पर हालात युद्धविराम जैसे दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनके मुताबिक, क्षेत्र के लोग ऐसा स्थायी समाधान चाहते हैं जिससे उन्हें लगातार हिंसा और असुरक्षा के बीच जीवन न बिताना पड़े। लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण गाजा में बड़ी संख्या में लोग विस्थापन और मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं।

    स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक अन्य हमले की जानकारी नुसेइरात शरणार्थी शिविर से भी दी है। बताया गया कि यहां भी हवाई हमला हुआ। नुसेइरात शिविर गाजा में लंबे समय से विस्थापित लोगों की आबादी का प्रमुख क्षेत्र रहा है। ऐसे में वहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर आम नागरिकों पर पड़ने की आशंका रहती है।

    ताजा हमलों से पहले भी इजरायली सेना और हमास के बीच युद्धविराम के उल्लंघन को लेकर आरोप लगते रहे हैं। इजरायली पक्ष की ओर से कहा गया है कि हमास से जुड़े लोग सैन्य गतिविधियां जारी रख रहे हैं। दूसरी ओर, फिलिस्तीनी क्षेत्रों में नागरिकों की मौत और विस्थापन को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है।

    इजरायली सेना ने इससे पहले देर अल-बलाह में हमास के एक वरिष्ठ सशस्त्र सदस्य शरीफ अल हसनत को मार गिराने का दावा किया था। सेना के मुताबिक, वह हमास के भूमिगत बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा था। इजरायली पक्ष ने उस पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।

    गाजा में ताजा हिंसा ऐसे समय सामने आई है जब क्षेत्र में संघर्ष को नियंत्रित करने और युद्धविराम को बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। आम नागरिकों की मौत और घायल होने की घटनाओं ने मानवीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रही हिंसा के बीच स्थायी शांति और सुरक्षित माहौल स्थापित करना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • गाजा में युद्धविराम के लिए ट्रंप का कूटनीतिक दांव, जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास नेताओं से की अहम बातचीत

    गाजा में युद्धविराम के लिए ट्रंप का कूटनीतिक दांव, जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास नेताओं से की अहम बातचीत

    नई दिल्ली । गाजा में जारी इजराइल-हमास संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और मध्य पूर्व मामलों के दूत जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास के नेताओं के साथ अहम बातचीत की। इस बैठक का केंद्र गाजा में युद्धविराम, संघर्ष समाप्त करने की प्रक्रिया और युद्ध के बाद क्षेत्र के प्रशासन को लेकर प्रस्तावित अमेरिकी योजना रही। बातचीत को ट्रंप प्रशासन की ओर से तैयार किए जा रहे शांति रोडमैप को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    बैठक में हमास के राजनीतिक नेता खलील अल-हया भी शामिल रहे। अमेरिका की ओर से कुशनर ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी योजना का समर्थन नहीं किया जाएगा, जिसमें गाजा के लोगों को उनकी जमीन से बाहर जाने के लिए मजबूर किया जाए। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तावित व्यवस्था में गाजा की आबादी को वहीं रखते हुए प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे में बदलाव पर जोर दिया जा रहा है।

    बैठक में युद्ध के बाद गाजा के प्रशासन को लेकर भी चर्चा हुई। अमेरिकी प्रस्ताव के तहत एक नई राष्ट्रीय समिति को क्षेत्र की प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही हमास को शासन व्यवस्था से अलग रखने और उसके हथियार तथा सैन्य ढांचा समाप्त करने की मांग सामने रखी गई है। यह मुद्दा बातचीत की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील शर्तों में शामिल है।

    मिस्र में हुई वार्ता में केवल अमेरिका और हमास ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। मिस्र, कतर और तुर्की के अधिकारियों ने बातचीत में हिस्सा लिया। मिस्र के खुफिया प्रमुख हसन रशद, कतर के राजनयिक अली अल-थवादी और तुर्की के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वार्ता में भाग लिया। बोर्ड ऑफ पीस के दूत निकोले म्लादेनोव और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी कुशनर के साथ मौजूद रहे।

    कुशनर की मिस्र और इजराइल यात्रा ऐसे समय हुई है, जब गाजा को लेकर अमेरिकी प्रस्ताव पर वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही प्रस्तावित योजना को इजराइल के लिए स्वीकार्य नहीं बता चुके हैं। ऐसे में हमास और क्षेत्रीय पक्षों के साथ कुशनर की बातचीत को कूटनीतिक सहमति बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    वार्ता के बाद हमास ने ट्रंप की योजना के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने की तैयारी जताई। संगठन ने मध्यस्थ देशों और बोर्ड ऑफ पीस से इजराइल पर समझौते की शर्तें लागू कराने के लिए दबाव बनाने की अपील की। हमास ने युद्धविराम के उल्लंघन रोकने, इजराइली सैन्य कार्रवाई बंद करने और दूसरे चरण के क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग भी रखी।

    गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण युद्धविराम की किसी भी पहल के सामने कई जटिल चुनौतियां बनी हुई हैं। एक तरफ हमास के हथियार और भविष्य की राजनीतिक भूमिका का सवाल है, वहीं दूसरी तरफ इजराइल की सुरक्षा चिंताएं और गाजा के प्रशासन का स्वरूप महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। अमेरिका, मिस्र, कतर और तुर्की की भागीदारी से बातचीत को क्षेत्रीय समर्थन देने की कोशिश हो रही है।

    अब आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष युद्धविराम की शर्तों, गाजा के प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कितनी सहमति बना पाते हैं। कुशनर की यह पहल ट्रंप प्रशासन के लिए गाजा संघर्ष को राजनीतिक समाधान की दिशा में ले जाने की एक अहम कूटनीतिक कोशिश मानी जा रही है।

  • गाजा में युद्धविराम की अमेरिकी पहल को झटका, नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ अभियान रोकने से इनकार किया

    गाजा में युद्धविराम की अमेरिकी पहल को झटका, नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ अभियान रोकने से इनकार किया

    नई दिल्ली ।गाजा में जारी संघर्ष को खत्म करने और स्थायी शांति की दिशा में अमेरिका की कोशिशों को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के रुख से नया झटका लग सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित गाजा फेस-2 योजना को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आने की बात कही जा रही है। नेतन्याहू ने स्पष्ट संकेत दिया है कि हमास के पूरी तरह निरस्त्रीकरण तक इजरायली सैन्य कार्रवाई समाप्त नहीं होगी।

    अमेरिका की पहल के तहत गाजा में युद्ध को रोकने, इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी और हमास के हथियार छोड़ने जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप की प्रस्तावित 15 सूत्रीय योजना का उद्देश्य संघर्ष को एक नए चरण में ले जाना और गाजा में सुरक्षा तथा प्रशासन से जुड़ी व्यवस्था तैयार करना है।

    योजना में हमास के हथियारों को धीरे-धीरे गाजा के लिए प्रस्तावित नए प्रशासनिक ढांचे को सौंपने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही इजरायली सेना को कुछ निर्धारित क्षेत्रों से पीछे हटाने की बात भी शामिल है। इस व्यवस्था में एक तथाकथित येलो लाइन का जिक्र किया गया है, जिसके आसपास सैन्य स्थिति में बदलाव प्रस्तावित है।

    अमेरिकी योजना के तहत इजरायल की सैन्य कार्रवाई को उन लोगों तक सीमित करने की बात भी सामने आई है, जिन्हें तत्काल सुरक्षा खतरा माना जाए। इसका उद्देश्य व्यापक सैन्य अभियान को कम करना और गाजा में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में आगे बढ़ना बताया जा रहा है।

    हालांकि, नेतन्याहू का रुख इन प्रस्तावों से अलग दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा है कि जब तक हमास अपने हथियार पूरी तरह नहीं छोड़ता, तब तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। इस रुख का सीधा अर्थ यह है कि इजरायल हमास के सैन्य ढांचे और हथियारों को पूरी तरह समाप्त करने को अपनी कार्रवाई रोकने की प्रमुख शर्त मान रहा है।

    नेतन्याहू की स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब गाजा में युद्धविराम और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत जारी है। अमेरिका इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इजरायल की सुरक्षा संबंधी शर्तें और हमास के हथियारों का मुद्दा किसी भी समझौते के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं।

    इजरायल का कहना है कि हमास के पास हथियार और सैन्य क्षमता रहने की स्थिति में भविष्य में फिर से हमले का खतरा बना रहेगा। इसी कारण इजरायली नेतृत्व किसी ऐसे समझौते को स्वीकार करने से बच रहा है, जिसमें सैन्य वापसी तो हो लेकिन हमास की हथियारबंद क्षमता पूरी तरह समाप्त न हो।

    दूसरी ओर, गाजा में लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष ने मानवीय संकट को गंभीर बनाया है। युद्धविराम की किसी भी पहल में नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता की पहुंच और भविष्य के प्रशासन का सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका की योजना को लागू कराने के लिए इजरायल और अन्य संबंधित पक्षों के बीच सहमति जरूरी होगी।

    फिलहाल गाजा फेस-2 योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अमेरिका युद्धविराम और सैन्य वापसी की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, जबकि नेतन्याहू हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण को प्राथमिक शर्त मान रहे हैं। दोनों पक्षों के रुख में यह अंतर आने वाले दिनों में बातचीत की दिशा और गाजा में सैन्य गतिविधियों पर असर डाल सकता है।

  • इस्राइल के विदेश मंत्री बोले- 'हमास का लश्कर से संबंध….. भारत इसे आतंकवादी संगठन घोषित करे

    इस्राइल के विदेश मंत्री बोले- 'हमास का लश्कर से संबंध….. भारत इसे आतंकवादी संगठन घोषित करे


    तेल अवीव।
    इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार (Israeli Foreign Minister Gideon Saar) ने कहा कि यरूशलम और नई दिल्ली (Jerusalem and New Delhi) के बीज संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक बदलाव दिख रहा है।

    गिदोन सार ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने एक वैश्विक प्रतिनिधिमंडल के साथ जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि उन्हें दुनिया भर से आए सम्मानित हिंदू नेताओं के एक समूह को जानकारी देने का अवसर मिला। इस बातचीत में उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और इस्राइल से जुड़े संघर्ष की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस्राइल पिछले ढाई साल से इस्लामी चरमपंथ के खिलाफ एक गंभीर युद्ध लड़ रहा है, जिसका लक्ष्य इस्राइल को खत्म करना है। उन्होंने इसे एक ‘बहुत बड़ा खतरा’ बताया।

    सार ने यह भी कहा कि इस्राइल ने कई मोर्चों पर बढ़त हासिल की है और उसने इस्लामी चरमपंथ के ‘आतंकी नेटवर्क’ को काफी कमजोर किया है, जिसका नेतृत्व ईरान करता है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर पश्चिम एशिया से बाहर भी देखने को मिलेगा। भारत के साथ सुरक्षा सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को हमास को एक आतंकवादी संगठन घोषित करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि हमास के संबंध अन्य चरमपंथी संगठनों से हैं, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) भी शामिल है। इस्राइली विदेश मंत्री ने कहा कि इस तरह के संगठनों के बीच वैश्विक स्तर पर जुड़ाव है और ये मिलकर काम करते हैं। इस्राइल पहले ही लश्कर-ए-तैयबा को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है और वह चाहता है कि भारत भी हमास को उसी तरह सूचीबद्ध करे। इस्राइल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत सरकार इन नेटवर्क और उनके संबंधों के बारे में जानकारी रखती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के आईआरजीसी, हमास और हिजबुल्ला जैसे संगठन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क की मदद से हमले करते हैं। अधिकारी ने कहा कि आमतौर पर ईरानी एजेंट सीधे यूरोप में हमला नहीं करते, बल्कि वे किसी स्थानीय आपराधिक समूह के जरिये हमला करवाते हैं।

    एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगर भारत सिर्फ यह घोषणा भी करता है, तो इसका वैश्विक स्तर पर बड़ा असर होगा, क्योंकि बांग्लादेश, पाकिस्तान और मालदीव जैसे देश भारत के रुख को देखते हैं और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे यह संदेश जाएगा कि भारत की जमीन पर ऐसे किसी भी व्यक्ति को काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

  • अल-कायदा और हमास जैसे आतंकी संगठनों की सूची में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स …

    अल-कायदा और हमास जैसे आतंकी संगठनों की सूची में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स …


    वाशिंगटन। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर क्रूर दमन के दौरान 6,373 लोगों की हत्या करने वाले ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को यूरोपीय संघ आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध करने जा रहा है. इस कदम के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के सर्वसम्मत समर्थन की आवश्यकता होगी और उम्मीद है कि इससे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट, दाएश और हमास जैसे आतंकी समूहों के साथ जोड़ा जाएगा.

    कल्लास ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा, “यदि आप आतंकवादी के रूप में कार्य करते हैं, तो आपके साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार भी किया जाना चाहिए.”

    एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री रह चुकीं कल्लास ने कहा कि इससे एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि यदि आप लोगों का दमन कर रहे हैं, तो इसकी कीमत चुकानी होगी और इसके लिए आपको दंडित किया जाएगा.

    फ्रांस पहले विरोध में था, अब किया समर्थन

    पहले फ्रांस ने रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध करने पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि उसे आशंका थी कि इससे ईरान में हिरासत में लिए गए फ्रांसीसी नागरिकों के साथ-साथ राजनयिक मिशनों को भी खतरा हो सकता है. हालांकि, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के कार्यालय ने बुधवार को संकेत दिया कि पेरिस इस निर्णय का समर्थन करता है.

    फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने गुरुवार को ब्रुसेल्स में विदेश मामलों की परिषद के समक्ष कहा कि फ्रांस ईरान पर और प्रतिबंध लगाने और उसे सूचीबद्ध करने का समर्थन करता है, “क्योंकि किए गए अपराधों के लिए किसी को भी छूट नहीं दी जा सकती.” उन्होंने कहा, “ईरान में, ईरानी जनता के शांतिपूर्ण विद्रोह के दमन को अनदेखा नहीं किया जा सकता.”

    इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर, या ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स, ईरान की सेना की सबसे शक्तिशाली शाखा और उसकी राजनीतिक और आर्थिक संरचना का एक प्रमुख स्तंभ है. 1979 में अयातुल्ला खुमैनी द्वारा इस्लामी क्रांति की रक्षा के लिए स्थापित, यह नियमित सेना से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और केवल सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेह है.