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  • क्या हंता वायरस भारत में पहुंच चुका है? डॉक्टरों ने बताया सच्चाई और सावधानियां..

    क्या हंता वायरस भारत में पहुंच चुका है? डॉक्टरों ने बताया सच्चाई और सावधानियां..


    नई दिल्ली ।
    हाल ही में वैश्विक स्तर पर कुछ संक्रमण मामलों की खबरों के बाद Hantavirus को लेकर आम लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। सोशल मीडिया और विभिन्न चर्चाओं में इस बात को लेकर सवाल उठने लगे कि क्या यह वायरस भारत में भी प्रवेश कर चुका है और क्या यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। हालांकि विशेषज्ञों ने इस विषय पर स्थिति को स्पष्ट करते हुए लोगों को राहत दी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में भारत में हंता वायरस के फैलने जैसी कोई स्थिति नहीं है। न तो देश में इसके बड़े स्तर पर मामले सामने आए हैं और न ही किसी प्रकार की महामारी जैसी स्थिति बनी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस वायरस को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सही जानकारी और सावधानी ही सबसे प्रभावी उपाय है।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यह वायरस नया नहीं है और लंबे समय से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके मामले दर्ज होते रहे हैं। यह मुख्य रूप से उन जानवरों, विशेषकर चूहों और कृंतकों के माध्यम से फैलता है, जो संक्रमण के वाहक माने जाते हैं। इनसे संपर्क या उनके द्वारा दूषित स्थानों के संपर्क में आने पर संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।

    इस वायरस से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाता है कि यह शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में यह फेफड़ों पर असर डाल सकता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई और गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वहीं कुछ परिस्थितियों में यह किडनी को प्रभावित कर सकता है, जिससे शरीर में रक्तचाप और अन्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

    हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि आमतौर पर यह वायरस इंसान से इंसान में बहुत सीमित परिस्थितियों में ही फैलता है, जिससे इसके व्यापक प्रसार की संभावना कम हो जाती है। यही कारण है कि इसे कोविड जैसी तेजी से फैलने वाली बीमारी की श्रेणी में नहीं रखा जाता।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के किसी भी संक्रमण से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम व्यक्तिगत और पर्यावरणीय स्वच्छता है। घरों और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखना, भोजन को सुरक्षित रखना और चूहों जैसे वाहकों से दूरी बनाना आवश्यक है। इसके अलावा हाथ धोने और बुनियादी स्वच्छता आदतों का पालन करने से भी संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    फिलहाल चिकित्सा विशेषज्ञों का एकमत मत है कि भारत में हंता वायरस को लेकर किसी प्रकार का तत्काल खतरा नहीं है। ऐसे में लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय विश्वसनीय स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए और किसी भी तरह की अनावश्यक चिंता से बचना चाहिए।

  • हंता वायरस से दहशत: क्रूज पर संक्रमण की पुष्टि, 17 अमेरिकी यात्रियों को इमरजेंसी फ्लाइट से अमेरिका शिफ्ट

    हंता वायरस से दहशत: क्रूज पर संक्रमण की पुष्टि, 17 अमेरिकी यात्रियों को इमरजेंसी फ्लाइट से अमेरिका शिफ्ट



    नई दिल्ली। अमेरिका में हंता वायरस को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है, जब डच क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर सवार एक अमेरिकी यात्री में संक्रमण की पुष्टि हुई। एक अन्य यात्री में हल्के लक्षण पाए गए हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के अनुसार स्थिति को देखते हुए जहाज पर मौजूद 17 अमेरिकी नागरिकों को तुरंत विशेष विमान के जरिए अमेरिका वापस लाया जा रहा है।

    सभी यात्रियों को बायोकंटेनमेंट यूनिट में रखा गया है ताकि संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके। प्रोटोकॉल के तहत इन यात्रियों को पहले नेब्रास्का के ओमाहा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का मेडिकल सेंटर के विशेष उपचार केंद्र में ले जाया जाएगा, जहां सभी की विस्तृत जांच होगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार उन्हें दूसरे केंद्रों में शिफ्ट किया जाएगा और उपचार दिया जाएगा।

    जानकारी के मुताबिक शनिवार तक इस प्रकोप से जुड़े 8 संदिग्ध मामले और 3 मौतें भी दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है।

    अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार हंता वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड 1 से 8 सप्ताह तक हो सकता है। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों जैसे रोडेंट्स से फैलता है, हालांकि दुर्लभ मामलों में मानव से मानव संक्रमण भी संभव है। विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित मामलों में मृत्यु दर एक-तिहाई से भी अधिक हो सकती है।

    इसी बीच ब्रिटेन में भी इसी जहाज से निकाले गए 20 यात्रियों को आइसोलेशन में रखा गया है। उन्हें मैनचेस्टर से अस्पताल ले जाकर 72 घंटे की निगरानी में रखा गया है। यदि लक्षण नहीं दिखते हैं तो उन्हें घर भेजा जाएगा, लेकिन 42 दिन तक सेल्फ-आइसोलेशन अनिवार्य रहेगा।

    ब्रिटिश सरकार ने अपने दूरस्थ क्षेत्र ट्रिस्टन दा कुन्हा में भी मेडिकल और सैन्य टीम भेजी है, जहां एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह पहली बार है जब ब्रिटेन ने ऐसे मानवीय मिशन के लिए पैराशूट के जरिए डॉक्टरों को भेजा है।

    हालांकि स्वास्थ्य एजेंसियों ने साफ किया है कि आम जनता के लिए इस वायरस का खतरा बेहद कम है, लेकिन क्रूज और अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य सतर्कता को फिर से बढ़ा दिया है।

  • हंतावायरस का खतरा बढ़ा: साधारण बुखार समझने की गलती पड़ सकती है भारी, डॉक्टरों ने दी गंभीर चेतावनी

    हंतावायरस का खतरा बढ़ा: साधारण बुखार समझने की गलती पड़ सकती है भारी, डॉक्टरों ने दी गंभीर चेतावनी


    नई दिल्ली। Hantavirus Infection को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ती जा रही है। हाल के मामलों में कई लोगों की मौत के बाद डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआत में मरीज को बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड लगना, उल्टी और पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि कई लोग इसे डेंगू, फ्लू या सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    अमृता अस्पताल फरीदाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बजाद के मुताबिक यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों के यूरिन, लार और मल के संपर्क से फैलता है। लंबे समय से बंद कमरों, गोदामों या स्टोर रूम की सफाई के दौरान धूल के जरिए वायरस शरीर में पहुंच सकता है।

    डॉक्टरों का कहना है कि असली खतरा तब शुरू होता है जब संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करने लगता है। मरीज को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, सूखी खांसी और ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। गंभीर मामलों में फेफड़ों में पानी भर सकता है और मरीज को ICU या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे खतरनाक रूप Hantavirus Pulmonary Syndrome माना जाता है, जिसकी मृत्यु दर गंभीर मामलों में 35 से 40 प्रतिशत तक बताई गई है।

    डॉक्टरों ने सलाह दी है कि घरों और गोदामों में चूहों की संख्या नियंत्रित रखें, सफाई के दौरान मास्क और दस्ताने पहनें तथा बंद कमरों में उचित वेंटिलेशन बनाए रखें। शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल जांच कराना बेहद जरूरी माना जा रहा है

  • हंता वायरस का बढ़ता खतरा: कैसे फैलता है संक्रमण, किन देशों में पहुंचा और कितना जानलेवा है यह वायरस

    हंता वायरस का बढ़ता खतरा: कैसे फैलता है संक्रमण, किन देशों में पहुंचा और कितना जानलेवा है यह वायरस



    नई दिल्ली। दुनिया एक बार फिर एक नए स्वास्थ्य संकट की आशंका से जूझ रही है। हंता वायरस के ताज़ा मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे एक क्रूज शिप में संक्रमण और मौतों की पुष्टि के बाद यह वायरस फिर सुर्खियों में आ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    WHO की विशेषज्ञ डॉ. मारिया वान केरकोव ने स्पष्ट किया है कि हंता वायरस न तो कोविड-19 जैसा है और न ही सामान्य इन्फ्लूएंजा। यह वायरस अलग तरीके से फैलता है और इसकी प्रकृति भी अलग है। अच्छी बात यह है कि यह व्यक्ति से व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता, जिससे इसका व्यापक प्रसार सीमित रहता है।

    कैसे शुरू हुआ संक्रमण
    ताजा मामला एक डच झंडे वाले क्रूज शिप MV Hondius से जुड़ा है, जो अटलांटिक और दक्षिणी महासागर के मार्ग से गुजर रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यात्रा के दौरान 70 वर्षीय एक यात्री में शुरुआती लक्षण दिखे, जिनमें बुखार, सिरदर्द और कमजोरी शामिल थे। बाद में उनकी मौत हो गई। इसके बाद दो और मौतों की पुष्टि हुई, जिनमें एक दक्षिण अफ्रीका और दूसरी जर्मनी की महिला यात्री शामिल थी।

    जहाज पर लगभग 150 लोग सवार थे, जो अर्जेंटीना से यात्रा पर निकले थे। यात्रा के दौरान सेंट हेलेना और अन्य द्वीपों पर कुछ यात्रियों ने उतरकर संपर्क किया, जिससे संक्रमण के फैलाव की आशंका और जांच तेज कर दी गई।

    किन देशों तक पहुंचा मामला
    WHO और संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों ने कई देशों को अलर्ट किया है, जिनमें शामिल हैं:

    अर्जेंटीना (जहां से यात्रा शुरू हुई)

    सेंट हेलेना

    दक्षिण अफ्रीका

    नीदरलैंड

    ब्रिटेन

    केप वर्डे

    इसके अलावा कनाडा, अमेरिका, जर्मनी, डेनमार्क, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, तुर्की, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देशों को भी जानकारी दी गई है क्योंकि इनके नागरिक इस यात्रा से जुड़े हुए थे या संपर्क में आए थे।

    हंता वायरस कितना खतरनाक है
    हंता वायरस को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाता है।
    पहला “ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस” जो यूरोप और एशिया में पाया जाता है और मुख्य रूप से किडनी पर असर डालता है। इसकी मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम होती है, लगभग 1% से 15% के बीच।

    दूसरा और अधिक खतरनाक “न्यू वर्ल्ड हंता वायरस” है, जो अमेरिका में पाया जाता है। यह हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम का कारण बनता है, जिसमें फेफड़ों में तेजी से तरल भर जाता है और सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है। इसकी मृत्यु दर 35% से 50% तक हो सकती है, जिससे यह बेहद घातक संक्रमणों में शामिल है।

    कैसे फैलता है वायरस
    यह वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित धूल या सतहों को सांस के जरिए शरीर में लेने से संक्रमण हो सकता है। हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इसका संक्रमण दुर्लभ माना जाता है।

    क्या कहती हैं स्वास्थ्य एजेंसियां
    WHO का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और यात्रियों की ट्रैकिंग की जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि समय पर पहचान और सावधानी से इसके फैलाव को नियंत्रित किया जा सकता है।

  • क्रूज शिप पर फैला हंतावायरस, 3 की मौत; जहाज में 2 भारतीय भी मौजूद, WHO अलर्ट पर

    क्रूज शिप पर फैला हंतावायरस, 3 की मौत; जहाज में 2 भारतीय भी मौजूद, WHO अलर्ट पर

    नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे डच क्रूज शिप MV Hondius पर हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। अब तक जहाज पर 5 संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है, जबकि 3 लोगों की मौत हो चुकी है। जहाज में 2 भारतीय नागरिक भी मौजूद बताए जा रहे हैं।

    WHO बोला- गंभीर मामला, लेकिन कोरोना जैसा खतरा नहीं
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घटना को गंभीर बताया है, हालांकि फिलहाल आम लोगों के लिए बड़े खतरे की आशंका कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हंतावायरस कोरोना की तरह तेजी से इंसानों में नहीं फैलता।

    नीदरलैंड के लीडेन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की डॉक्टर करिन एलेन वेल्डकैंप ने कहा कि हंतावायरस का इंसान से इंसान में संक्रमण बेहद सीमित होता है और इसका फैलाव कोविड-19 जितना तेज नहीं है।

    मरीजों को आइसोलेशन में रखा गया
    जहाज पर संक्रमित पाए गए लोगों को अलग आइसोलेशन में रखा गया है। मेडिकल टीम लगातार निगरानी कर रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, मरीजों में लक्षण खत्म होने और रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही आइसोलेशन हटाया जाएगा।

    विशेषज्ञों ने बताया कि हंतावायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड लंबा हो सकता है। कुछ मामलों में लक्षण 6 हफ्ते तक बाद में भी सामने आ सकते हैं। इसी वजह से संक्रमितों और संपर्क में आए लोगों को लंबे समय तक क्वारंटाइन में रखा जा रहा है।

    एंडीज स्ट्रेन का शक
    WHO के अनुसार मौत के मामलों में एंडीज स्ट्रेन होने की आशंका है। यह हंतावायरस का ऐसा प्रकार है, जो कुछ स्थितियों में इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। यह स्ट्रेन मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है।

    जांच में पता चला है कि शुरुआती संक्रमित दंपती यात्रा से पहले अर्जेंटीना, चिली और उरुग्वे में बर्ड वॉचिंग ट्रिप पर गए थे, जहां वायरस फैलाने वाले चूहों की प्रजातियां पाई जाती हैं।

    कई देशों को अलर्ट
    170 यात्रियों और 71 क्रू सदस्यों वाले इस जहाज ने मार्च में अर्जेंटीना से यात्रा शुरू की थी और अब स्पेन के कैनरी आइलैंड की ओर बढ़ रहा है। WHO ने ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और सिंगापुर समेत 12 देशों को अलर्ट जारी किया है।क्रूज कंपनी और स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंता वायरस का कहर: 3 मौतें, भारत के लिए कितना खतरा

    अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंता वायरस का कहर: 3 मौतें, भारत के लिए कितना खतरा


    नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में केप वर्डे के पास एक डच क्रूज शिप पर हंता वायरस के मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जहाज पर इस संक्रमण से अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य यात्री बीमार हैं।

    बताया जा रहा है कि ‘एमवी होंडियस’ नाम का यह जहाज 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया से अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक द्वीपों की यात्रा के लिए रवाना हुआ था। जहाज पर कुल 147 लोग (88 यात्री और 59 क्रू सदस्य) सवार थे। 6 से 28 अप्रैल के बीच संक्रमण के मामले सामने आए। एक मरीज की हालत गंभीर है, जबकि कुछ में हल्के लक्षण पाए गए हैं।

    क्या है हंता वायरस?

    हंता वायरस संक्रमण एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। यह वायरस फेफड़ों को प्रभावित कर गंभीर श्वसन समस्या पैदा कर सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दस्त और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं।

    WHO के मुताबिक, इस घटना में मानव-से-मानव संक्रमण की आशंका भी जताई गई है, जो आमतौर पर बहुत कम देखने को मिलता है, लेकिन दक्षिण अमेरिका के कुछ मामलों में ऐसा पाया गया है।

    जहाज पर हालात और वैश्विक प्रतिक्रिया

    केप वर्डे ने स्वास्थ्य सुरक्षा कारणों से जहाज को अपने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति नहीं दी है। WHO विभिन्न देशों-नीदरलैंड, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन-के साथ मिलकर हालात पर नजर बनाए हुए है। मेडिकल टीमें जहाज पर पहुंचकर जांच और उपचार कर रही हैं।

    यात्रियों और क्रू को आइसोलेशन में रहने, मास्क पहनने, हाथों की सफाई रखने और दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। जहाज को आगे स्पेन के कैनरी द्वीपों की ओर ले जाने पर भी विचार चल रहा है।

    भारत के लिए कितना खतरा?

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हंता वायरस संक्रमण के मामले बेहद दुर्लभ हैं। फिलहाल यह घटना भारत के लिए सीधा खतरा नहीं मानी जा रही, क्योंकि संक्रमण सीमित क्षेत्र और जहाज तक ही केंद्रित है।

    हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्रा को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। स्वास्थ्य एजेंसियों को खासकर दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका से आने वाले यात्रियों की निगरानी बढ़ाने की सलाह दी गई है।

    घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत

    WHO ने इस घटना को लेकर वैश्विक जोखिम को फिलहाल कम बताया है। भारत जैसे देश, जिन्होंने कोविड जैसी महामारी का सामना किया है, ऐसी परिस्थितियों से निपटने में सक्षम माने जाते हैं।

    हंता वायरस गंभीर जरूर है, लेकिन इसका फैलाव सीमित होता है। सही सावधानी, जागरूकता और निगरानी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है-इसलिए घबराने के बजाय सतर्क रहना ज्यादा जरूरी है।

  • क्रूज शिप पर हंतावायरस का अलर्ट: 3 की मौत, कई संदिग्ध; WHO ने दी राहत घबराने की जरूरत नहीं

    क्रूज शिप पर हंतावायरस का अलर्ट: 3 की मौत, कई संदिग्ध; WHO ने दी राहत घबराने की जरूरत नहीं



    नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में चल रहे एमवी होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक ब्रिटिश नागरिक गंभीर हालत में ICU में भर्ती है।

    क्या है स्थिति?
    क्रूज ऑपरेटर के अनुसार, मृतकों में एक डच दंपती और एक जर्मन यात्री शामिल हैं। कुछ मामलों में हंतावायरस की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य संदिग्ध मामलों की जांच जारी है।69 वर्षीय एक ब्रिटिश नागरिक को जोहान्सबर्ग के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है। और कितने लोग जांच के दायरे में
    एक ब्रिटिश क्रू मेंबर समेत 5 अन्य संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है। इसके अलावा दो क्रू मेंबर्स में सांस से जुड़ी समस्या के लक्षण पाए गए हैं, हालांकि उनमें वायरस की पुष्टि नहीं हुई है।

    WHO का बयान
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस मामले को लेकर कहा है कि हंतावायरस एक दुर्लभ संक्रमण है और यह आमतौर पर इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता। इसलिए आम जनता के लिए खतरा फिलहाल कम है और किसी तरह के यात्रा प्रतिबंध की जरूरत नहीं है।

    जहाज पर सतर्कता
    क्रूज शिप पर 23 देशों के 149 यात्री सवार हैं। डच अधिकारी गंभीर मरीजों को निकालने (मेडिकल इवैक्युएशन) की तैयारी कर रहे हैं।पाकिस्तान का बड़ा फैसला: 50 साल बाद फिर शुरू हुआ शराब निर्यात। पाकिस्तान ने करीब पांच दशकों बाद शराब के निर्यात को दोबारा शुरू कर दिया है। देश की एकमात्र स्थानीय ब्रेवरी मरी ब्रेवरी ने अप्रैल से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई शुरू कर दी है।

    किन देशों को भेजी जा रही शराब?
    कंपनी के अनुसार यूनाइटेड किंगडम, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक पेय भेजे जा रहे हैं।हालांकि यह निर्यात केवल उन देशों तक सीमित है जो ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के सदस्य नहीं हैं।

    क्या है इसके पीछे की वजह?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान यह कदम विदेशी मुद्रा अर्जन बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए उठा रहा है।एक ओर जहां स्वास्थ्य को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का यह आर्थिक कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई रणनीति का संकेत दे रहा है।