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  • देश के 5 अद्भुत हनुमान मंदिर, जहां अलग-अलग रूपों में मिलते हैं बजरंगबली के दर्शन

    देश के 5 अद्भुत हनुमान मंदिर, जहां अलग-अलग रूपों में मिलते हैं बजरंगबली के दर्शन


    नई दिल्ली । हनुमान जयंती के पावन अवसर पर देशभर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है। इस दिन भक्त भगवान हनुमान के मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। भारत में कई ऐसे प्रसिद्ध और चमत्कारी हनुमान धाम हैं, जहां बजरंगबली अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं और जिनसे जुड़ी मान्यताएं भक्तों की आस्था को और गहरा बनाती हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं लेटे हुए हनुमान मंदिर की, जो प्रयागराज में स्थित है। यहां हनुमान जी की प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में स्थापित है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। मान्यता है कि गंगा नदी हर वर्ष आकर उन्हें स्नान कराती है। संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन करना नहीं भूलते और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं।

    इसके बाद महावीर मंदिर का नाम आता है, जो Patna में स्थित है। यह मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में से एक माना जाता है। यहां हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।

    छत्तीसगढ़ के गिरिजाबंध हनुमान मंदिर की विशेषता इसे और भी अनोखा बनाती है। यहां हनुमान जी को स्त्री स्वरूप में पूजा जाता है, जो पूरे विश्व में अपनी तरह का एकमात्र मंदिर माना जाता है। यह मंदिर आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम है।

    राजधानी Delhi में स्थित हनुमान मंदिर कनॉट प्लेस भी श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। यह मंदिर पांडवकालीन माना जाता है और यहां हनुमान जी के बाल स्वरूप के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि यहां सिंदूर और इत्र चढ़ाने से जीवन के संकट दूर होते हैं।

    उत्तर प्रदेश के Chitrakoot में स्थित हनुमान मंदिर भी भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां प्रतिमा के ऊपर स्थित कुंडों से लगातार जलधारा बहती रहती है, जिसे चमत्कारी माना जाता है। श्रद्धालु इस जल को पवित्र मानकर ग्रहण करते हैं और अपनी समस्याओं से मुक्ति की कामना करते हैं।

    इसके अलावा हनुमानगढ़ी का विशेष महत्व है। Ayodhya में स्थित इस मंदिर को हनुमान जी का प्रमुख धाम माना जाता है। यहां हनुमान जी बाल रूप में विराजमान हैं और उन्हें अयोध्या का रक्षक कहा जाता है। मान्यता है कि रामलला के दर्शन से पहले हनुमानगढ़ी के दर्शन करना आवश्यक होता है।

    इन सभी मंदिरों की विशेषता यही है कि यहां हनुमान जी अलग-अलग रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं। कहीं वे लेटे हुए हैं, तो कहीं बाल स्वरूप में, तो कहीं अनोखे रूप में पूजे जाते हैं। यही विविधता और आस्था इन धामों को खास बनाती है। इस प्रकार भारत के ये प्रसिद्ध हनुमान मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि चमत्कार और विश्वास की अनोखी मिसाल भी पेश करते हैं, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा लेकर पहुंचते हैं।

  • शिवपुरी झांसी लिंक रोड पर हनुमान जयंती के अवसर पर मेले की धूम

    शिवपुरी झांसी लिंक रोड पर हनुमान जयंती के अवसर पर मेले की धूम


    शिवपुरी। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर माधव टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे घने जंगलों में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर पर आज विशाल मेला लगा। यह मेला प्रत्येक वर्ष हनुमान जयंती के दिन आयोजित किया जाता है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के शहरों से भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या इसमे शामिल होती है।

    मंदिर शिवपुरी झांसी लिंक रोड पर स्थित है और इसकी पीछे की ओर सीधे माधव टाइगर रिजर्व का घना जंगल फैला हुआ है। इस प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थल पर मेले का आयोजन हर साल प्राचीन परंपराओं के अनुसार होता आया है। स्थानीय ग्रामीण इस अवसर को बड़े उत्साह से मनाते हैं और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु भी इस पर्व में शामिल होते हैं।

    हनुमान जयंती के मौके पर मंदिर के प्रांगण में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की। भक्तों ने हनुमान जी की प्रतिमा पर फूल, फल और अन्य धार्मिक सामग्री अर्पित की। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की कतारें लगी रही। मेले में पूजा-पाठ के अलावा भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन भी आयोजित किए गए।

    मेला केवल धार्मिक महत्व का ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आसपास के ग्रामीण इस मेले में अपनी स्थानीय हस्तकला, खाद्य और अन्य सामान की दुकानें लगाते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। बच्चों और युवाओं के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद की गतिविधियां भी आयोजित की गईं।

    इस अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मंदिर और मेले के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में नियंत्रण बनाए रखने के लिए ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

    स्थानीय लोगों ने बताया कि यह मेला प्राचीन काल से चल रहा है और इसे लेकर विशेष श्रद्धा भाव रखा जाता है। श्रद्धालु हनुमान जी के आशीर्वाद प्राप्त करने और अपने परिवार के सुख-शांति के लिए दूर-दूर से यहां आते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण यह मेला जिले का एक प्रमुख पर्व बन गया है।

    भक्तों ने बताया कि जंगल की पृष्ठभूमि में स्थित यह मंदिर और मेला का माहौल अत्यंत रमणीय और आध्यात्मिक अनुभव देता है। साथ ही यह आयोजन लोगों को एकजुट होने और धार्मिक चेतना बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करता है।

    इस प्रकार शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व के पास स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर लगने वाला यह विशाल मेला धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक समरसता का अद्वितीय उदाहरण बन गया है।

  • हनुमान जन्मोत्सव और चैत्र पूर्णिमा: घर में आएगी समृद्धि, अपनाएं ये सरल उपाय

    हनुमान जन्मोत्सव और चैत्र पूर्णिमा: घर में आएगी समृद्धि, अपनाएं ये सरल उपाय


    नई दिल्ली । आज यानी 2 अप्रैल 2026 को पूरे देश में चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जन्मोत्सव का पावन पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जन्मोत्सव का महासंयोग बन रहा है जिससे पूजा-अर्चना और उपायों का महत्व और बढ़ गया है।

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। इसलिए इसे हनुमान जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। साथ ही भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने अन्न-धन और अन्य वस्तुओं का दान करने का विशेष विधान है। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि और धन-धान्य की कमी नहीं होती।

    इस पावन अवसर पर कुछ आसान और असरदार उपाय किए जा सकते हैं जो धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के साथ-साथ आर्थिक तंगी से मुक्ति दिलाते हैं।

    घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं

    ज्योतिषियों का मानना है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। दीपक की ज्योति सकारात्मकता का संचार करती है और घर में समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है।

     रसोई घर में दीपक जलाना

    सिर्फ मुख्य द्वार पर ही नहीं बल्कि घर की रसोई में भी दीपक जलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रसोई घर में मां अन्नपूर्णा का वास होता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन रसोई में दीपक जलाने से अन्नपूर्णा की असीम कृपा बनी रहती है जिससे घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती और परिवार में समृद्धि बनी रहती है।

    तुलसी की पूजा करें

    शास्त्रों के अनुसार चैत्र पूर्णिमा की शाम को तुलसी का पूजन करना अत्यंत शुभ होता है। तुलसी के पौधे में श्री हरि और मां लक्ष्मी का वास माना गया है। तुलसी की पूजा करने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है धन-धान्य की कमी नहीं होती और आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलता है। यह उपाय सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन उपायों को श्रद्धा और भक्ति भाव से करने से घर में सुख शांति समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इस चैत्र पूर्णिमा पर इन उपायों को अपनाकर न केवल माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं बल्कि परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और आनंद भी बढ़ता है। तो इस पावन दिन दीपक जलाएं तुलसी की पूजा करें और दान-पुण्य में भाग लें। यह न केवल धार्मिक नियमों का पालन है बल्कि आपके घर में आर्थिक और मानसिक समृद्धि भी सुनिश्चित करता है।

  • हनुमान जन्मोत्सव विशेष : अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता, संकट मोचन हनुमान

    हनुमान जन्मोत्सव विशेष : अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता, संकट मोचन हनुमान


    नई दिल्ली । चैत्र पूर्णिमा यानी गुरुवार 2 अप्रैल को पूरे देश में भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है हनुमान जी त्रेतायुग में वानरराज केसरी और माता अंजना के घर अवतरित हुए थे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी चिरंजीवी हैं और उनकी कृपा कलियुग में भी भक्तों पर बनी रहती है

    गोस्वामी तुलसीदास रचित ‘हनुमान चालीसा’ हनुमान जी की भक्ति का सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम है इसमें कहा गया है “अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता” अर्थात माता सीता ने हनुमान जी को आठ दिव्य शक्तियां और नौ प्रकार की संपत्तियों का वरदान दिया था

    हनुमान जी में इन शक्तियों का अद्भुत प्रयोग करने का सामर्थ्य था यही कारण है कि वे किसी भी रूप में प्रकट हो सकते थे पल में किसी भी स्थान पर पहुंच सकते थे और असंभव कार्यों को भी संभव कर सकते थे हनुमान चालीसा के नियमित पाठ से भक्तों को इन दिव्य शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है संकट मोचन की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं साहस बढ़ता है और जीवन में सफलता मिलती है

    आइए जानते हैं हनुमान जी की अष्ट सिद्धियां और नव निधियां :

    अष्ट सिद्धियां – आठ दिव्य शक्तियां हैं

    अणिमा : बहुत सूक्ष्म रूप धारण करने की शक्ति

    महिमा : इच्छानुसार बहुत बड़ा रूप धारण करने की शक्ति

    गरिमा : शरीर को अत्यंत भारी बनाने की शक्ति

    लघिमा : शरीर को अत्यंत हल्का बनाने की शक्ति

    प्राप्ति : किसी भी वस्तु को तुरंत प्राप्त करने की शक्ति

    प्राकाम्य : इच्छानुसार किसी भी जगह पहुंचने, जल या आकाश में रहने की शक्ति

    ईशित्व : दैवीय शक्तियों का नियंत्रण

    वशित्व : इंद्रियों और मन पर पूर्ण नियंत्रण

    नव निधियां – नौ प्रकार की दिव्य संपत्तियां हैं

    पद्म निधि : स्वर्ण-चांदी का संग्रह और दान करने वाला सात्विक स्वभाव

    महापद्म निधि : धार्मिक कार्यों में धन लगाने वाला स्वभाव

    नील निधि : तीन पीढ़ियों तक चलने वाली संपत्ति

    मुकुंद निधि : राज्य और सत्ता से संबंधित संपत्ति

    नंद निधि : कुल का आधार बनने वाली संपत्ति

    मकर निधि : अस्त्र-शस्त्रों का संग्रह

    कच्छप निधि : स्वयं उपभोग करने योग्य संपत्ति

    शंख निधि : एक पीढ़ी तक रहने वाली संपत्ति

    खर्व निधि : मिश्रित फलों वाली संपत्ति

    हनुमान जन्मोत्सव के दिन इन दिव्य शक्तियों और संपत्तियों का स्मरण भक्तों के जीवन में आध्यात्मिक शक्ति साहस और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है यह पर्व हमें भक्ति और निष्ठा की महत्ता भी याद दिलाता है

  • कल मनाई जाएगी हनुमान जयंती, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

    कल मनाई जाएगी हनुमान जयंती, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली। हनुमान जयंती का पावन पर्व हर वर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। हालांकि देश के कुछ क्षेत्रों में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भी हनुमान जयंती मनाने की परंपरा है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर चैत्र पूर्णिमा को ही यह पर्व मनाया जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान हनुमान को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है। उन्होंने वानर रूप में जन्म लेकर अपना संपूर्ण जीवन भगवान श्रीराम की सेवा में समर्पित किया, इसलिए उन्हें राम भक्तों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इस वर्ष हनुमान जयंती 2 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।

    तिथि का समय

    पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी।

    पूजन के शुभ मुहूर्त

    हनुमान जयंती पर इस बार पूजा के लिए दो विशेष मुहूर्त मिल रहे हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6:10 बजे से 7:44 बजे तक रहेगा, जबकि दूसरा मुहूर्त शाम 6:39 बजे से रात 8:06 बजे तक है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

    शुभ योग का संयोग

    इस बार हनुमान जयंती पर ध्रुव योग और हस्त नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। ध्रुव योग सूर्योदय से दोपहर 2:20 बजे तक रहेगा, इसके बाद व्याघात योग प्रारंभ होगा। वहीं हस्त नक्षत्र शाम 5:38 बजे तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद चित्रा नक्षत्र शुरू हो जाएगा।

    पूजा विधि

    हनुमान जयंती के दिन प्रातः स्नान के बाद घर के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उन्हें विराजमान करें और गंगाजल से स्नान कराकर तिलक व अक्षत अर्पित करें। हनुमान जी को सिंदूर और घी चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके साथ लाल फूल, जनेऊ और माला अर्पित करें। भोग में गुड़-चना और मौसमी फल जैसे केला, सेब या अंगूर चढ़ाएं। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें और संभव हो तो सुंदरकांड का पाठ भी करें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।

    हनुमान जयंती मंत्र
    हनुमान जयंती के दिन पूजा और मंत्र जाप से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। एक प्रसिद्ध मंत्र है
    “मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥”

    इस मंत्र में हनुमान जी के तेज, बल, बुद्धि और श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति का वर्णन किया गया है। मान्यता है कि कलियुग में भी हनुमान जी का अस्तित्व बना हुआ है और जहां राम कथा होती है, वहां उनकी उपस्थिति अवश्य रहती है।

  • चैत्र माह की शुरुआत पूरे महीने रहेंगी धार्मिक पर्वों की धूम नवरात्रि रामनवमी हनुमान जयंती की तिथियां नोट करें

    चैत्र माह की शुरुआत पूरे महीने रहेंगी धार्मिक पर्वों की धूम नवरात्रि रामनवमी हनुमान जयंती की तिथियां नोट करें


    नई दिल्ली:होली के पर्व के साथ हिंदू पंचांग के पहले महीने चैत्र मास की शुरुआत हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इसी समय से हिंदू नववर्ष का आरंभ भी माना जाता है। मान्यता है कि चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही सृष्टि की रचना की शुरुआत हुई थी। इसी कारण यह महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सृष्टि के रचयिता Brahma ने इसी तिथि से सृष्टि निर्माण का कार्य शुरू किया था। इस कारण चैत्र मास को नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। पूरे महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं जिनका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है।

    चैत्र मास के प्रारंभिक दिनों में कई प्रमुख व्रत मनाए जाएंगे। इस क्रम में 6 मार्च को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इसके बाद 8 मार्च को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। 11 मार्च को शीतला अष्टमी का व्रत आएगा जो विशेष रूप से Sheetala Mata की पूजा के लिए जाना जाता है। इसके बाद 15 मार्च को पाप मोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। 16 मार्च को प्रदोष व्रत और 17 मार्च को मासिक Shiva रात्रि यानी मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इसके बाद 18 मार्च को चैत्र अमावस्या होगी।

    चैत्र मास के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों की शुरुआत 19 मार्च से होगी जब चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होगा। इसी दिन Gudi Padwa और Ugadi के साथ हिंदू नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक Durga के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और देशभर में मंदिरों और घरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।

    इसके बाद 21 मार्च को गणगौर पूजा का पर्व मनाया जाएगा जो खास तौर पर महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 24 मार्च को चैती छठ और यमुना छठ का पर्व आएगा। 26 मार्च को भगवान Rama के जन्मोत्सव के रूप में राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। इसके अगले दिन 27 मार्च को चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा।

    महीने के अंतिम दिनों में भी कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व आएंगे। 29 मार्च को कामदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा जबकि 31 मार्च को Mahavira जयंती मनाई जाएगी। इसके बाद 2 अप्रैल को Hanuman जयंती और चैत्र पूर्णिमा का पर्व आएगा जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र माह में कुछ विशेष धार्मिक कार्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस महीने में रोज सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को पंखा घड़ा सूती वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना भी फलदायी माना जाता है।

    इसके अलावा चैत्र मास में देवी उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान Durga Saptashati का पाठ करना और देवी की आराधना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख शांति और समृद्धि का वास होता है।
  • हनुमान अष्टमी 12 दिसंबर: बजरंगबली की पूजा से मिलता है ग्रहदोष और संकटों से छुटकारा

    हनुमान अष्टमी 12 दिसंबर: बजरंगबली की पूजा से मिलता है ग्रहदोष और संकटों से छुटकारा

    पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली हनुमान अष्टमी इस वर्ष 12 दिसंबर को देशभर में धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन हनुमान भक्त विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, आरती और भंडारे का आयोजन करते हैं। कई मंदिरों से चल समारोह भी निकाले जाते हैं।

    हनुमान अष्टमी से जुड़ी प्राचीन मान्यताएँ

    ज्योतिषाचार्य पं. हरिहर पंड्या बताते हैं कि हनुमान अष्टमी से अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं।
    सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, त्रेतायुग में हनुमानजी ने पाताल लोक में अहिरावण का वध किया था और भगवान श्रीराम व लक्ष्मण को बंदीगृह से मुक्त कराया था। इस विजयोत्सव के कारण ही इस दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है।

    एक अन्य मान्यता के अनुसार, अहिरावण का वध करने के बाद हनुमानजी पृथ्वी के नाभि केंद्र उज्जैन लौटे और यहीं विश्राम किया। संयोग से वह दिन पौष कृष्ण अष्टमी का था। तभी से उज्जैन में हनुमान अष्टमी उत्साहपूर्वक मनाई जाती है।

    उज्जैन में विशेष उत्सव और दर्शन का महत्व

    उज्जैन के नानाखेड़ा स्थित चाणक्यपुरी के श्री परशुराम मंदिर में विराजित भजनानंद हनुमानजी के दर्शन का इस दिन विशेष महत्व माना गया है। हर वर्ष बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन, पूजा और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। इस बार भी मंदिर प्रांगण में विशेष अनुष्ठान, आरती और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

    हनुमान पूजा से मिलता है ग्रहों के विपरीत प्रभाव से समाधान

    ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की जन्मपत्री में शनि, मंगल, राहु या अन्य ग्रह प्रतिकूल प्रभाव में हों, उनके लिए हनुमानजी की उपासना अत्यंत फलदायी मानी गई है।

    विशेष रूप से-

    शनि की साढ़ेसाती

    शनि की ढैय्या

    मंगल या राहु के दोष

    से प्रभावित जातकों को हनुमान अष्टमी पर हनुमानजी को तेल और सिंदूर चढ़ाना चाहिए। साथ ही हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक का पाठ करने से संकटों से मुक्ति मिलती है।

    इसके अतिरिक्त, प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को हनुमान मंदिर में दीपक लगाने, प्रसाद चढ़ाने और दर्शन करने से भी जीवन के कष्ट दूर होने की मान्यता है।