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  • मंगलवार के इन आसान वास्तु उपायों से दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा घर में आएगी सुख समृद्धि और बजरंगबली की कृपा

    मंगलवार के इन आसान वास्तु उपायों से दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा घर में आएगी सुख समृद्धि और बजरंगबली की कृपा


    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल ग्रह को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के साथ सुख समृद्धि और मानसिक शांति लाने में सहायक माने जाते हैं। मान्यता है कि यदि मंगलवार को घर और आसपास के वातावरण को व्यवस्थित रखते हुए कुछ छोटे लेकिन महत्वपूर्ण नियमों का पालन किया जाए तो जीवन में आने वाली कई परेशानियों को कम किया जा सकता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार मंगलवार की शुरुआत घर की साफ सफाई से करनी चाहिए। मुख्य द्वार को विशेष रूप से स्वच्छ रखना शुभ माना जाता है क्योंकि यही स्थान सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का मार्ग माना जाता है। मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाना या शुभ प्रतीक अंकित करना भी मंगलकारी माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और नकारात्मक प्रभाव कम होने की मान्यता है।

    इस दिन भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और भय तथा मानसिक तनाव दूर होने की मान्यता है। पूजा में सिंदूर चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाने के बाद उनका प्रसाद बांटना भी मंगलकारी माना जाता है।

    वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। इसलिए मंगलवार को इस दिशा की विशेष सफाई करने और यहां किसी प्रकार का कबाड़ या टूटा फूटा सामान न रखने की सलाह दी जाती है। घर में लंबे समय से खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान जंग लगे लोहे के उपकरण या बेकार वस्तुओं को हटाना भी सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाभकारी माना जाता है।

    मंगलवार को जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी शुभ माना गया है। लाल मसूर की दाल लाल वस्त्र या गुड़ का दान करने से मंगल ग्रह की शुभता बढ़ने की मान्यता है। वहीं बंदरों या गाय को भोजन कराना भी कई लोग शुभ मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे कार्यों से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    घर के मंदिर में नियमित रूप से दीपक जलाना और शाम के समय मुख्य द्वार पर दीप प्रज्ज्वलित करना भी वास्तु के अनुसार शुभ माना जाता है। इससे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है। इसके अलावा मंगलवार के दिन क्रोध विवाद और कटु वचन से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि शांत व्यवहार को ही मंगल ग्रह की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय माना गया है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों को किसी अंधविश्वास के बजाय आस्था और सकारात्मक जीवनशैली के रूप में अपनाना चाहिए। नियमित साफ सफाई अनुशासित दिनचर्या पूजा पाठ और सेवा भाव जैसे कार्य न केवल मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं बल्कि परिवार के भीतर सौहार्द और सकारात्मक वातावरण भी मजबूत करते हैं।

  • मंगलवार को क्या नहीं करना चाहिए? (हनुमान जी के दिन के जरूरी नियम)

    मंगलवार को क्या नहीं करना चाहिए? (हनुमान जी के दिन के जरूरी नियम)


    नई दिल्ली।  मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। इस दिन कुछ कामों से बचना जरूरी माना गया है, वरना व्रत और पूजा का फल कम हो सकता है।

     मंगलवार को ये काम भूलकर भी न करें-


    1. नमक का सेवन न करे
    अगर आप व्रत रखते हैं तो इस दिन साधारण नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए। यह व्रत की शुद्धता को प्रभावित करता है।

     2. प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन से बचे
    मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन का सेवन मंगलवार को अशुभ माना जाता है।

     3. क्रोध और झगड़े से दूर रहें
    इस दिन गुस्सा करना या किसी से विवाद करना नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकता है और पूजा का प्रभाव कम करता है।

     4. बाल और नाखून काटने से बचे
    धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगलवार को बाल और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता।

     5. उधार देना या लेना टालें
    इस दिन पैसों का लेन-देन सावधानी से करें। उधार देने या लेने से आर्थिक असंतुलन बढ़ सकता है।

     6. आलस्य और देर तक सोना न करे
    मंगलवार को देर तक सोना या दिन की शुरुआत देर से करना अशुभ माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर पूजा करना शुभ होता है।

    मंगलवार संयम, भक्ति और अनुशासन का दिन माना जाता है। अगर इस दिन नियमों का पालन किया जाए और गलत आदतों से बचा जाए, तो भगवान हनुमान की कृपा जल्दी प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

  • हनुमान जी को मिला था शक्ति भूलने का श्राप, इसके पीछे की पौराणिक कहानी

    हनुमान जी को मिला था शक्ति भूलने का श्राप, इसके पीछे की पौराणिक कहानी


    नई दिल्ली। मंगलवाल का दिन हनुमान जी की पूजा अर्चना के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन व्रत रहने से आपके ऊपर उनकी कृपा बानी रहती है। कहा जाता हैं कि, बचपन से ही हनुमान जी को कई सिद्धियां और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त थीं। उनके पास असीम शक्तियां थीं। वे पहाड़ उठा सकते थे, समुद्र लांघ सकते थे और सूरज को निगल सकते थे।लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि वो अपनी शक्तियां को ही भूल गए तो चलिए इससे जुड़ी कथा जानते हैं।

    हनुमान जी को मिला था ऐसा श्राप
    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली, तेजस्वी और चंचल स्वभाव के थे। वे अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग खेल-खेल में ही करने लगते थे। कभी वे ऋषि-मुनियों के आश्रमों में पहुंच जाते, तो कभी उनकी साधना में बाधा डालते।

    एक बार कई महान ऋषि-मुनि वन में तपस्या कर रहे थे। तभी बाल स्वरूप हनुमान जी वहां पहुंचे और अपनी चंचलता के कारण उन्होंने ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया।ऋषियों ने पहले तो उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने, तब उन्हें क्रोध आ गया।तब ऋषियों ने हनुमान जी को श्राप दिया कि वे अपनी सारी दिव्य शक्तियों को भूल जाएंगे।

    श्राप का ये था तोड़
    यह श्राप पूर्ण रूप से दंड देने के लिए नहीं था, बल्कि उनके हित में ही था। ऋषियों ने यह भी कहा कि जब कोई उन्हें उनकी शक्तियों की याद दिलाएगा, तब वे पुनः अपनी शक्ति को पहचान लेंगे और उसका उपयोग धर्म के कार्यों में करेंगे।

    नारद मुनि और जामवंत ने याद दिलाई थी शक्तियां
    जब भगवान राम की सेवा का समय आया और सीता माता की खोज के लिए समुद्र पार करना था, तब हनुमान जी अपनी शक्ति को भूल चुके थे। उस समय नारद मुनि और जामवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराया। तभी हनुमान जी को अपनी अपार शक्ति का बोध हुआ और उन्होंने विशाल रूप धारण कर समुद्र लांघ लिया। इसके बाद उन्होंने राम भगवान की।

  • संकट मोचन बालाजी: सालासर की दाढ़ी-मूंछ वाली हनुमान जी की रहस्यमयी कहानी

    संकट मोचन बालाजी: सालासर की दाढ़ी-मूंछ वाली हनुमान जी की रहस्यमयी कहानी

    नई दिल्ली । राजस्थान के चुरू जिले में स्थित सालासर बालाजी धाम भारत का एक अनोखा हनुमान मंदिर है यहां विराजमान हनुमान जी की मूर्ति दाढ़ी-मूंछों वाली है जो पूरे देश में एकमात्र है यही वजह है कि लाखों भक्त सालाना यहां दर्शन करने आते हैं और मानते हैं कि सालासर बालाजी अपनी भक्तों की मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी करते हैं सालासर बालाजी धाम जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर आसोटा गांव के पास स्थित है यह मंदिर 19वीं शताब्दी में स्थापित हुआ और आज पूरे देश में प्रसिद्ध है यहाँ रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं खासतौर पर हनुमान जयंती और शरद पूर्णिमा के मेले में मंदिर में भक्तों की भीड़ हमेशा रहती है

    सालासर बालाजी की मूर्ति की खोज की कहानी भी बहुत रोचक है कहा जाता है कि साल 1811 में आसोटा गांव के किसान मोहनदास खेत में हल जोत रहे थे तभी हल किसी नुकीली चीज से टकराया जब उन्होंने खुदाई की तो उन्हें हनुमान जी की मूर्ति मिली मोहनदास उस समय दोपहर का भोजन चूरमा लेकर आए थे उन्होंने उसी चूरमा का भोग अर्पित कर मूर्ति की पूजा की और रात को उन्हें हनुमान जी का सपना आया

    सपने में हनुमान जी मोहनदास को दाढ़ी-मूंछों वाले रूप में दिखाई दिए उन्होंने मोहनदास को निर्देश दिया कि मूर्ति को बैलगाड़ी में रखकर वहीं स्थापित करें जहाँ बैल खुद रुक जाए मोहनदास ने वैसा ही किया और बैलगाड़ी वहीं रुकी जहाँ आज सालासर बालाजी धाम स्थित है चूंकि सपने में हनुमान जी दाढ़ी-मूंछों में दिखाई दिए इसलिए मोहनदास ने मूर्ति का शृंगार उसी रूप में किया यही कारण है कि सालासर बालाजी की मूर्ति पूरे देश में अनोखी मानी जाती है

    भारत के अधिकांश हनुमान मंदिरों में मूर्तियां युवा और बिना दाढ़ी-मूंछ वाली होती हैं लेकिन सालासर बालाजी इस नियम का अपवाद हैं उनकी दाढ़ी-मूंछ उन्हें प्रौढ़, गंभीर और संकट मोचन स्वरूप में प्रस्तुत करती है भक्त मानते हैं कि इस स्वरूप से बालाजी अधिक शक्तिशाली और भक्तों के लिए तुरंत संकट मोचन बन जाते हैं

    सालासर बालाजी धाम में दो प्रमुख मेले लगते हैं पहला मेला हनुमान जयंती पर और दूसरा शरद पूर्णिमा पर इन मेलों में दूर-दूर से भक्त आते हैं यहाँ धार्मिक किताबें हनुमान जी के चित्र चूरमा प्रसाद और पूजा सामग्री उपलब्ध होती है मेले के दौरान मंदिर में भारी भीड़ लगती है

    सालासर बालाजी में नारियल चढ़ाने की अनोखी परंपरा भी है भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर लाल कपड़े में नारियल बांधकर मंदिर परिसर के खेजड़ी पेड़ पर चढ़ाते हैं ये नारियल ना तो फेंके जाते हैं ना जलाए जाते हैं इन्हें मंदिर से करीब 11 किलोमीटर दूर मुरड़ाकिया गांव के खेत में गाड़ दिया जाता है यह परंपरा भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है

    सालासर बालाजी धाम भक्ति और विश्वास का केंद्र है यहाँ की दाढ़ी-मूंछ वाली मूर्ति भक्तों के हर संकट को दूर करती है और चूरमा प्रसाद हर भक्त के मन को शांति और विश्वास देता है यदि आप जीवन में किसी समस्या से गुजर रहे हैं तो सालासर बालाजी के दर्शन अवश्य करें