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  • करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात

    करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात


    शिवपुरी जिले: 
    के करैरा स्थित बगीचा सरकार मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कलयुग में राक्षसी प्रवृत्तियों के बदलते स्वरूप पर अपनी बात रखी। उन्होंने त्रेतायुग के राक्षसों और वर्तमान समय के नकारात्मक व्यवहार की तुलना करते हुए श्रद्धालुओं से सवाल किया कि पहले राक्षस किस तरह के काम करते थे और आज उनके व्यवहार तथा गतिविधियों में क्या बदलाव आया है। कथा के दौरान उन्होंने जीवन, कर्म और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार साझा किए।

    पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से कथा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहले के समय में राक्षस यज्ञ और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में हड्डियां डालकर बाधा उत्पन्न करते थे। वहीं, आज के दौर में राक्षसी प्रवृत्तियां अलग रूप में दिखाई देती हैं। उनके अनुसार, वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर भ्रामक और नकारात्मक पोस्ट के जरिए लोगों के बीच गलत संदेश फैलाना भी ऐसी प्रवृत्ति का उदाहरण है।

    कथा के दौरान उन्होंने परमात्मा की सर्वव्यापकता का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर को पाने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध और पाप रूपी तृष्णा का त्याग करना चाहिए। उन्होंने जीवन में सुधार के लिए रामायण के विभिन्न पात्रों और प्रसंगों से सीख लेने की बात कही। उनके मुताबिक, रामायण व्यक्ति को सामान्य अवस्था से महान बनने की प्रेरणा देती है, जबकि केवट और शबरी जैसे पात्र विनम्रता और विशिष्टता का संदेश देते हैं।

    उन्होंने सुग्रीव और विभीषण के प्रसंगों के माध्यम से प्रभु की शरण में जाने के महत्व को समझाया। साथ ही हनुमानजी के जीवन और समर्पण का उदाहरण देते हुए साधारण जीवात्मा से आध्यात्मिक रूप से ऊंचे स्तर तक पहुंचने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सुधार के लिए रामकथा, कर्मों को बेहतर बनाने के लिए गीता और मृत्यु के विषय को समझने के लिए भागवत का श्रवण महत्वपूर्ण है।

    पंडित शास्त्री ने कथा में एक पौराणिक प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने हनुमानजी को रामचरितमानस का वास्तविक रचयिता बताते हुए कहा कि हनुमानजी ने अपने नाखूनों से पत्थरों पर रामकथा लिखी थी। उनके अनुसार, महर्षि वाल्मीकि के मन में द्वेष उत्पन्न होने की आशंका से हनुमानजी ने उस रचना को समुद्र में विसर्जित कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानजी के वचन के कारण वाल्मीकि ने कलयुग में गोस्वामी तुलसीदास के रूप में अवतार लेकर रामचरितमानस को जनभाषा में लोगों तक पहुंचाया। यह प्रसंग उन्होंने रामकथा के महत्व को समझाने के लिए सुनाया।

    कथा में श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर चर्चा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रैलियों में भीड़ जुटाई जाती है, जबकि कथा में सच्चे भक्त पहुंचते हैं। उन्होंने अपने प्रति आकर्षण का श्रेय हनुमानजी को देते हुए कहा कि उनका क्रेज नहीं, बल्कि हनुमानजी का प्रभाव है, जो कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने अधिक भीड़ देखने के इच्छुक लोगों को 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित होने वाले दिव्य दरबार में आने के लिए कहा।

    करैरा में रामकथा के साथ दिव्य दरबार को लेकर भी लोगों की रुचि बनी हुई है। 27 और 28 अक्टूबर को होने वाले आयोजन का उल्लेख करते हुए पंडित शास्त्री ने श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। कथा के दौरान उनके प्रवचनों में धार्मिक आस्था, जीवन सुधार, कर्म और आधुनिक समय में नकारात्मकता जैसे विषय प्रमुख रहे।

  • उज्जैन में 48 दिनों से टेंट में विराजमान खड़े हनुमान जी, 450 आवेदन मिलने के बाद अब 25 अक्टूबर की बैठक पर नजर

    उज्जैन में 48 दिनों से टेंट में विराजमान खड़े हनुमान जी, 450 आवेदन मिलने के बाद अब 25 अक्टूबर की बैठक पर नजर

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर का विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है। छत्री चौक क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्राचीन मंदिर को हटाए जाने के बाद हनुमान जी की प्रतिमा पिछले 48 दिनों से टेंट में विराजमान है। श्रद्धालु लगातार मांग कर रहे हैं कि प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया जाए। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है। अब 25 अक्टूबर के आसपास प्रशासन और संबंधित कमेटी के बीच संभावित बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।

    उज्जैन में कंठल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी दौरान खड़े हनुमान जी के प्राचीन मंदिर को हटाया गया था, लेकिन प्रतिमा अब भी उसी स्थान पर टेंट के नीचे रखी हुई है। रोजाना श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर को लेकर भक्तों की मांग है कि प्रतिमा को उचित स्थान और मंदिर में स्थापित किया जाए, ताकि पूजा-अर्चना पहले की तरह हो सके।

    इस मुद्दे को लेकर श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। भक्तों का कहना है कि भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद उनके परम भक्त हनुमान जी को भी मंदिर में स्थान मिलना चाहिए। उनका मानना है कि प्रतिमा का लंबे समय तक टेंट में रहना उनकी आस्था को प्रभावित कर रहा है। इसी मांग को लेकर क्षेत्र में हवन, यज्ञ और सुंदरकांड जैसे धार्मिक आयोजन भी किए गए। इनमें श्रद्धालुओं के साथ साधु-संत और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजनों के दौरान प्रतिमा को मौजूदा स्थान पर ही बनाए रखने की मांग उठाई गई।

    विश्व हिंदू परिषद के उज्जैन जिलाध्यक्ष राजेश आंजना के मुताबिक, मामले की स्थिति अब भी पहले दिन जैसी बनी हुई है। उनका कहना है कि प्रशासन की तरफ से अब तक कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। संगठन को इस मुद्दे पर अब तक 450 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आंजना के अनुसार, इन आवेदनों के साथ करीब 45 हजार हस्ताक्षर होने की बात कही गई है। इसके अलावा 150 पंचायतों, व्यापारियों और 50 समाजों की ओर से भी प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की गई है। ये आंकड़े संगठन की ओर से बताए गए हैं।

    मंदिर के आकार और निर्माण को लेकर भी चर्चा हो रही है। आंजना ने कहा कि शासन-प्रशासन को मंदिर के लिए स्पष्ट मापदंड तय करने चाहिए। उन्होंने मंदिर के लिए उपलब्ध जगह और उसके निर्माण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। हालांकि, अब तक प्रशासन की ओर से किसी प्रस्ताव या अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस बीच खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है। पुजारी महेश बैरागी के अनुसार, रोजाना लगभग पांच से दस हजार लोग दर्शन करने आते हैं। उनके मुताबिक, इस सप्ताह झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, मिजोरम और पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। इस तरह मंदिर से जुड़ा मामला स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा और दूर-दराज से लोग दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं।

    अब 25 अक्टूबर के आसपास प्रशासन और कमेटी के बीच संभावित बैठक को अहम माना जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद इस मामले में प्रशासन से बातचीत कर समाधान चाहता है। फिलहाल प्रतिमा टेंट में ही विराजमान है और श्रद्धालुओं की प्रमुख मांग यही है कि खड़े हनुमान जी को उनके स्थान पर मंदिर में स्थापित किया जाए। बैठक में कोई सहमति बनती है या नहीं, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।

  • ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद भक्ति फिल्मों का बढ़ा सिलसिला, खाटु श्याम से तुलसीदास और साई बाबा तक कई घोषणाएं

    ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद भक्ति फिल्मों का बढ़ा सिलसिला, खाटु श्याम से तुलसीदास और साई बाबा तक कई घोषणाएं

    नई दिल्ली ।‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस सफलता के बाद भक्ति और धार्मिक कथाओं पर आधारित फिल्मों को लेकर फिल्म जगत में गतिविधियां बढ़ी हैं। हाल के दिनों में कई नए प्रोजेक्ट की घोषणा हुई है। इन फिल्मों में अलग-अलग धार्मिक व्यक्तित्वों और कथाओं को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की तैयारी है। खाटु श्याम बाबा, महाकवि तुलसीदास, साई बाबा और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कहानियों पर आधारित प्रोजेक्ट इनमें प्रमुख हैं।

    सबसे पहले ‘हारे के सहारे खाटु श्याम हमारे’ नाम की फिल्म की घोषणा हुई है। यह फिल्म खाटु श्याम बाबा की जिंदगी पर आधारित होगी। फिल्म में उनकी महिमा और उनके प्रति लोगों की आस्था को कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा। खाटु श्याम बाबा की भक्ति से जुड़े पहलुओं को बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी इस प्रोजेक्ट में की जा रही है।

    इसके बाद ‘राबोला’ नाम की फिल्म की घोषणा हुई। इस फिल्म का निर्माण डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी करेंगे। वह इससे पहले अक्षय कुमार की फिल्म ‘पृथ्वीराज चौहान’ बना चुके हैं। ‘राबोला’ में महाकवि तुलसीदास की कहानी को दिखाया जाएगा। तुलसीदास भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा से जुड़े प्रमुख नामों में शामिल हैं और उनके जीवन पर आधारित यह प्रोजेक्ट इसी पृष्ठभूमि को पर्दे पर पेश करेगा।

    महाकवि तुलसीदास पर एक अन्य फिल्म की भी घोषणा हुई है। यह प्रोजेक्ट ‘हनुमान अंश’ बनाने वाले विशाल चतुर्वेदी का नया प्रोजेक्ट बताया गया है। इस फिल्म को लेकर भी दर्शकों की रुचि बनी हुई है। एक ही विषय पर अलग-अलग फिल्म परियोजनाओं की घोषणा होने से तुलसीदास के जीवन और उनकी भक्ति परंपरा को लेकर फिल्म जगत में नया ध्यान देखने को मिल रहा है।

    अगले साल ‘तेरा साई’ नाम से भी एक फिल्म आने की तैयारी है। इसमें संजय मिश्रा और पलाश मुच्छल जुड़े हैं। फिल्म में साई बाबा की जिंदगी को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाएगा। साई बाबा के जीवन पर पहले भी फिल्में और धारावाहिक बन चुके हैं, लेकिन इस नए प्रोजेक्ट में उनकी कहानी को नए सिनेमा के माध्यम से दिखाने की तैयारी है।

    इसके अलावा ‘श्रीमद्भागवतम्’ नाम से भी एक बड़े फिल्म प्रोजेक्ट की घोषणा हुई है। इसे सात हिस्सों में बनाए जाने की योजना है। फिल्म के ‘श्रीमद्भागवतम् पार्ट I: विष्णुरत’ का पहला टीजर पोस्टर भी जारी किया गया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के हाथ की झलक दिखाई गई है। सात भागों में बनने वाली यह फिल्म धार्मिक ग्रंथ से जुड़ी कथा को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने की योजना का हिस्सा है।

    इन सभी घोषणाओं को ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद सामने आए नए प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इन फिल्मों की रिलीज और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन अलग-अलग समय पर सामने आएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि धार्मिक और भक्ति कथाओं पर आधारित कई नए प्रोजेक्ट एक साथ चर्चा में आ गए हैं। आने वाले समय में इन फिल्मों की कहानी, कलाकारों और निर्माण से जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।

  • ‘हनुमान अंश’ की कमाई ने 31वें दिन पकड़ी रफ्तार, 22.75 करोड़ कलेक्शन के साथ फिल्म ने बनाए कई बड़े रिकॉर्ड

    ‘हनुमान अंश’ की कमाई ने 31वें दिन पकड़ी रफ्तार, 22.75 करोड़ कलेक्शन के साथ फिल्म ने बनाए कई बड़े रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। फिल्म की कमाई में हर गुजरते दिन के साथ तेजी देखने को मिल रही है। रिलीज के 31वें दिन फिल्म ने ऐसा कलेक्शन किया, जिसने कई बड़ी फिल्मों के 31वें दिन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। फिल्म अब तक 120 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर चुकी है और बॉक्स ऑफिस पर इसकी पकड़ मजबूत बनी हुई है।

    31वें दिन फिल्म ने 22.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इस दौरान फिल्म को 7077 शोज मिले और इसकी ऑक्यूपेंसी 73 प्रतिशत रही। 31वें दिन की कमाई के मामले में फिल्म ने ‘धुरंधर’, ‘छावा’, ‘उरी’, ‘स्त्री 2’, ‘धुरंधर 2’, ‘महावतार नरसिम्हा’, ‘पुष्पा 2’, ‘तान्हाजी’ और ‘बाहुबली 2’ जैसी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया।

    इन फिल्मों की 31वें दिन की कमाई की बात करें तो ‘धुरंधर’ ने 12.75 करोड़ रुपये, ‘छावा’ ने 8 करोड़ रुपये, ‘उरी’ ने 5.66 करोड़ रुपये और ‘स्त्री 2’ ने 5.40 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। वहीं ‘धुरंधर 2’ ने 4.65 करोड़ रुपये, ‘महावतार नरसिम्हा’ ने 6.15 करोड़ रुपये, ‘पुष्पा 2’ ने 5.50 करोड़ रुपये, ‘तान्हाजी’ ने 3.45 करोड़ रुपये और ‘बाहुबली 2’ ने 3.16 करोड़ रुपये की कमाई की थी।

    ‘हनुमान अंश’ के अब तक के कुल कारोबार पर नजर डालें तो फिल्म ने 122.13 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया है। वहीं इसका ग्रॉस कलेक्शन 144.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि फिल्म की शुरुआत बेहद धीमी रही थी। रिलीज के पहले दिन फिल्म ने केवल 10 लाख रुपये कमाए थे। पहले सप्ताह में भी फिल्म का कारोबार सिर्फ 1.08 करोड़ रुपये रहा था। उस समय फिल्म को लगभग 300 से 400 शोज ही मिले थे।

    दूसरे सप्ताह में फिल्म के शोज की संख्या और घट गई थी। उस दौरान इसे सिर्फ 25 से 30 शोज मिले और फिल्म ने महज 40 लाख रुपये का कारोबार किया। इसके बाद तीसरे सप्ताह में फिल्म की स्थिति पूरी तरह बदल गई। दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया का असर बॉक्स ऑफिस पर दिखाई दिया और फिल्म ने तीसरे सप्ताह में 10.40 करोड़ रुपये की कमाई कर ली।

    चौथे सप्ताह में फिल्म ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए 61 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके बाद फिल्म की कमाई लगातार बढ़ती गई। 29वें दिन फिल्म ने 10 करोड़ रुपये, 30वें दिन 16.50 करोड़ रुपये और 31वें दिन 22.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया।

    फिल्म के शोज की संख्या भी अब बढ़कर करीब सात हजार तक पहुंच गई है। धीमी शुरुआत के बाद ‘हनुमान अंश’ का इस तरह तेजी से आगे बढ़ना बॉक्स ऑफिस पर इसकी मजबूत होती पकड़ को दिखाता है। 31वें दिन की कमाई ने फिल्म के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी है।

  • रामायणम् ट्रेलर में नहीं दिखे हनुमान, सनी देओल ने खुद बताई वजह, बोले- किरदार निभाने के लिए अभी बाकी है लंबा सफर

    रामायणम् ट्रेलर में नहीं दिखे हनुमान, सनी देओल ने खुद बताई वजह, बोले- किरदार निभाने के लिए अभी बाकी है लंबा सफर

    नई दिल्ली । बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायणम् का ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्साह बढ़ गया है। नितेश तिवारी के निर्देशन और नमित मल्होत्रा के निर्माण में बन रही इस फिल्म में भारतीय पौराणिक कथा को बड़े स्तर पर पेश करने की तैयारी की जा रही है। ट्रेलर में भगवान राम, माता सीता और रावण समेत कई प्रमुख किरदारों की झलक दिखाई गई, लेकिन राम भक्त हनुमान के किरदार में नजर आने वाले सनी देओल की अनुपस्थिति ने दर्शकों का ध्यान खींच लिया।

    ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर कई प्रशंसकों ने सवाल उठाया कि आखिर हनुमान के महत्वपूर्ण किरदार को दिखाया क्यों नहीं गया। फिल्म में हनुमान की भूमिका सनी देओल निभा रहे हैं, लेकिन ट्रेलर के चार मिनट से ज्यादा लंबे वीडियो में उनकी कोई झलक नहीं दिखाई गई। हालांकि इसके पीछे की वजह खुद सनी देओल पहले ही बता चुके हैं।

    ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान सनी देओल ने हनुमान के किरदार को लेकर अपनी तैयारी और अनुभव के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अभी तक फिल्म के लिए बहुत कम काम किया है और इस किरदार के लिए अभी काफी लंबा सफर तय करना बाकी है। अभिनेता ने यह भी कहा था कि हनुमान जी का किरदार निभाना उनके लिए सम्मान की बात है और इसे निभाना आसान नहीं होगा।

    सनी देओल ने बताया था कि हनुमान का व्यक्तित्व बेहद खास है। वह एक साथ सरल, मासूम, शक्तिशाली और समर्पित चरित्र हैं। ऐसे किरदार को पर्दे पर सही तरीके से प्रस्तुत करना बड़ी जिम्मेदारी है। अभिनेता ने इस भूमिका के अवसर के लिए आभार भी जताया था और कहा था कि यह उनके करियर का एक अलग और यादगार अनुभव हो सकता है।

    रामायणम् के ट्रेलर में भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर, माता सीता के रूप में साई पल्लवी और रावण के रूप में यश दिखाई दिए। इसके अलावा अरुण गोविल, लारा दत्ता, रवि दुबे, रकुल प्रीत सिंह और विवेक ओबेरॉय जैसे कलाकारों की झलक भी देखने को मिली। ट्रेलर की शुरुआत रावण के प्रभावशाली किरदार से होती है, जिसमें उसकी शक्ति और साम्राज्य को दिखाया गया है।

    फिल्म की कहानी भारतीय महाकाव्य रामायण पर आधारित है, जिसे आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर प्रस्तुत करने की तैयारी है। फिल्म का संगीत एआर रहमान और हांस जिमर तैयार कर रहे हैं। रामायणम् को दो भागों में रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पहला भाग दीपावली 2026 और दूसरा भाग दीपावली 2027 में दर्शकों के सामने आने की योजना है।

    4000 करोड़ रुपये के बड़े बजट वाली इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। निर्माताओं की कोशिश है कि फिल्म के हर किरदार को प्रभावशाली तरीके से पेश किया जाए। यही वजह है कि हनुमान जैसे महत्वपूर्ण पात्र को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है।

    सनी देओल की लोकप्रियता और उनके दमदार अभिनय को देखते हुए दर्शकों को अब फिल्म में उनके हनुमान रूप की पहली झलक का इंतजार है। हालांकि ट्रेलर में उनकी अनुपस्थिति ने उत्सुकता बढ़ा दी है और आने वाले समय में उनके किरदार को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • ट्रेलर में 'श्रीराम' और 'रावण' का दिखा भव्य अवतार, लेकिन 'बजरंगबली' की झलक न मिलने से प्रशंसक हुए उत्सुक

    ट्रेलर में 'श्रीराम' और 'रावण' का दिखा भव्य अवतार, लेकिन 'बजरंगबली' की झलक न मिलने से प्रशंसक हुए उत्सुक

    नई दिल्ली । सहित देशभर के सिनेमा प्रेमियों के बीच बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ का पहला आधिकारिक ट्रेलर आते ही चर्चा में आ गया है। इस भव्य फिल्म के ट्रेलर में मुख्य पात्रों के अवतार ने दर्शकों को प्रभावित किया है, लेकिन प्रशंसकों को सबसे बड़ा कौतूहल तब हुआ जब ‘हनुमान’ का किरदार निभा रहे वरिष्ठ अभिनेता सनी देओल स्क्रीन पर कहीं नजर नहीं आए। ट्रेलर की समाप्ति के बाद से ही सोशल मीडिया पर उनके लुक को लेकर विविध अटकलों का दौर शुरू हो चुका है।

    फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित किरदार के लुक को पहले ही प्रोमो से छिपाकर रखना मेकर्स की एक सुपरियोजित विपणन रणनीति का हिस्सा है। बड़े बजट की पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों में अक्सर सबसे शक्तिशाली पात्रों के दृश्यों को प्राथमिक प्रचार सामग्री से दूर रखा जाता है, ताकि दर्शकों के बीच उत्सुकता और रहस्य का माहौल बना रहे। सनी देओल की सशक्त स्क्रीन प्रेजेंस और आवाज को देखते हुए उनके प्रवेश दृश्य को थिएटर के लिए सरप्राइज एलिमेंट के रूप में सुरक्षित रखा गया माना जा रहा है।

    प्रचार के नजरिए से भी यह कदम बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। पहले ट्रेलर के बाद जब दर्शकों के बीच उत्सुकता चरम पर होगी, तब मेकर्स उनके लुक का एक पृथक टीजर या पोस्टर जारी कर सकते हैं। इससे फिल्म को रिलीज से पहले दोबारा बड़ा पब्लिसिटी बज मिलेगा और सोशल मीडिया पर इस विषय पर चर्चा लंबे समय तक बनी रहेगी।

    कहानी के अनुसार हनुमान जी का किरदार अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय प्रभाव रखने वाला है। मेकर्स का उद्देश्य सीधे सिनेमाघरों में दर्शकों को एक भव्य अनुभव देना या आगामी प्रचार चरणों में विशेष सरप्राइज प्रस्तुत करना हो सकता है। फिलहाल दर्शक फिल्म के दूसरे ट्रेलर और इसके विशेष प्रचार अभियानों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • कर्ज से परेशान लोगों के लिए मंगलवार का विशेष उपाय, ज्योतिष में बताए गए सरल धार्मिक उपायों से आर्थिक बाधाएं कम होने की मान्यता

    कर्ज से परेशान लोगों के लिए मंगलवार का विशेष उपाय, ज्योतिष में बताए गए सरल धार्मिक उपायों से आर्थिक बाधाएं कम होने की मान्यता

    नई दिल्ली । बढ़ती महंगाई, ऋण, ईएमआई और आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण बड़ी संख्या में लोग वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। कई बार लगातार आय होने और मेहनत करने के बावजूद कर्ज का बोझ कम नहीं हो पाता, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ने लगता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी परिस्थितियों के लिए कुछ धार्मिक उपायों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें आस्था और नियमितता के साथ करने से सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है। हालांकि इन उपायों के साथ विवेकपूर्ण वित्तीय योजना, आय-व्यय का संतुलन और निरंतर प्रयास को भी समान रूप से महत्वपूर्ण माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल ग्रह को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष में मंगल ग्रह को साहस, भूमि, ऊर्जा और ऋण का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल कमजोर या प्रतिकूल स्थिति में हो तो उसे आर्थिक कठिनाइयों, बढ़ते कर्ज या धन संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण मंगलवार को मंगल ग्रह और भगवान हनुमान की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।

    ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार मंगलवार की सुबह स्नान के बाद भगवान हनुमान की पूजा कर ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से मानसिक दृढ़ता बढ़ती है और आर्थिक चुनौतियों से बाहर निकलने के लिए नए अवसर बनने लगते हैं। इसके साथ ही श्रद्धालु हनुमान मंदिर में सिंदूर और चमेली के तेल का चोला अर्पित करते हैं तथा मीठा पान चढ़ाने की भी परंपरा निभाते हैं।

    शाम के समय गाय के घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर सुंदरकांड का पाठ करने की भी मान्यता है। यदि समय की कमी हो तो हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जा सकता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इससे मनोबल मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में मंगलवार के दिन नया कर्ज लेने से बचने की सलाह भी दी जाती है। वहीं कुछ परंपराओं में यह माना जाता है कि यदि पुराने ऋण की पहली किस्त मंगलवार को चुकाई जाए तो ऋण समाप्त करने की दिशा में शुभ शुरुआत मानी जाती है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाता है।

    दान-पुण्य को भी आर्थिक और आध्यात्मिक संतुलन से जोड़ा गया है। मंगलवार के दिन गुड़ और चने का दान या जरूरतमंद लोगों की सहायता करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त भगवान श्रीगणेश, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की नियमित पूजा तथा श्रीसूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ भी समृद्धि की कामना से किया जाता है।

    कुछ ज्योतिषाचार्य मंगलवार को लाल चंदन की माला से विशेष मंत्र का जप करने की भी सलाह देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना अधिक धैर्य के साथ कर पाता है। हालांकि यह समझना आवश्यक है कि धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय आस्था का विषय हैं और इनके परिणामों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति कर्ज की समस्या से जूझ रहा है तो धार्मिक आस्था के साथ-साथ खर्चों पर नियंत्रण, नियमित बचत, समय पर ऋण भुगतान और सही वित्तीय योजना अपनाना सबसे प्रभावी उपाय है। आस्था मानसिक संबल दे सकती है, जबकि आर्थिक अनुशासन ही दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता का वास्तविक आधार बनता है।

  • जब अजेय बजरंगबली की शक्ति भी पड़ गई थी कम; जानिए उन तीन महायोद्धाओं की गाथा जिनके सामने वीर हनुमान को स्वीकार करनी पड़ी थी हार

    जब अजेय बजरंगबली की शक्ति भी पड़ गई थी कम; जानिए उन तीन महायोद्धाओं की गाथा जिनके सामने वीर हनुमान को स्वीकार करनी पड़ी थी हार

    नई दिल्ली । सनातन धर्म और पौराणिक ग्रंथों में पवनपुत्र हनुमान जी को असीम बल, बुद्धि और अजेय शक्ति का प्रतीक माना गया है। रामायण काल से लेकर महाभारत काल तक उनके पराक्रम की अनगिनत गाथाएं प्रचलित हैं, जहां बड़े से बड़े मायावी राक्षस और योद्धा उनके सामने टिक नहीं सके। लेकिन धार्मिक इतिहास में कुछ ऐसे अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट प्रसंगों का भी वर्णन मिलता है, जब अप्रतिहत शक्तियों के स्वामी बजरंगबली को भी विशेष परिस्थितियों के कारण झुकना पड़ा या अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी। पौराणिक वृत्तांतों के अनुसार, ऐसे तीन प्रमुख अवसर आए जब हनुमान जी की शक्ति भी काम नहीं आई और उन्हें पराजय का वधु स्वीकार करना पड़ा।

    ऐसी ही पहली घटना महान संत और सिद्ध तपस्वी मच्छिंद्रनाथ जी से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार मच्छिंद्रनाथ जी भगवान श्रीराम की भक्ति में पूरी तरह लीन होकर रामेश्वरम के समीप समुद्र में स्नान कर रहे थे। उसी समय वहां मौजूद हनुमान जी ने एक साधारण वानर का रूप धारण कर उनकी परीक्षा लेने का विचार किया। हनुमान जी ने अपनी मायावी शक्ति से वहां मूसलाधार बारिश शुरू कर दी और स्वयं को बचाने के लिए एक कृत्रिम गुफा बनाने का उपक्रम करने लगे। जब मच्छिंद्रनाथ जी ने उन्हें इस कृत्य पर टोकते हुए ज्ञान दिया, तो हनुमान जी ने उनकी आध्यात्मिक क्षमता पर प्रश्न उठाते हुए उन्हें युद्ध की सीधी चुनौती दे दी। इसके बाद दोनों के मध्य एक भीषण युद्ध छिड़ गया, परंतु मच्छिंद्रनाथ जी की मंत्र शक्ति और योग बल के सामने हनुमान जी का प्रत्येक प्रहार निष्फल साबित हुआ। अंततः वायुदेव के हस्तक्षेप के बाद इस युद्ध को विराम दिया गया और हनुमान जी ने सहर्ष अपनी हार स्वीकार की।

    द्वितीय प्रसंग रामायण काल के सबसे विनाशकारी युद्ध के दौरान का है, जो रावण के परम पराक्रमी पुत्र मेघनाद यानी इंद्रजीत से संबद्ध है। माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान जी ने जब अशोक वाटिका को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया और रावण के छोटे पुत्र अक्षय कुमार का वध कर दिया, तब लंकाधिपति ने क्रोधित होकर मेघनाद को रणभूमि में भेजा। युद्ध क्षेत्र में जब मेघनाद के सभी दिव्य अस्त्र-शस्त्र हनुमान जी के सामने विफल हो गए, तब उसने अत्यंत विवश होकर पवनपुत्र पर सीधे ब्रह्मास्त्र का संधान कर दिया। यद्यपि हनुमान जी को स्वयं ब्रह्मा जी से यह वरदान प्राप्त था कि कोई भी अस्त्र उनका अनिष्ट नहीं कर सकता, परंतु सृष्टि के रचयिता और ब्रह्मास्त्र की मर्यादा एवं मान रखने के लिए हनुमान जी ने स्वेच्छा से स्वयं को उस बंधन में बंधने दिया। तकनीकी दृष्टिकोण से इस प्रसंग में मेघनाद हनुमान जी की गति को रोकने और उन्हें बंदी बनाने में सफल रहा था।

    तृतीय और सर्वाधिक भावुक कर देने वाला वृत्तांत भगवान श्रीराम के आत्मज लव और कुश से जुड़ा हुआ है। लंका विजय के पश्चात जब अयोध्या में प्रभु श्रीराम द्वारा अश्वमेध यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया, तो यज्ञ का अश्व देश के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण कर रहा था। इसी दौरान महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में निवास कर रहे बालक लव और कुश ने उस अश्व को बंदी बना लिया। अश्व को मुक्त कराने हेतु जब श्रीराम की चतुरंगिणी सेना वहां पहुंची, तो दोनों बालकों के अभूतपूर्व युद्ध कौशल के सम्मुख लक्ष्मण और शत्रुघ्न जैसे महारथी भी परास्त हो गए। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होते देख स्वयं हनुमान जी, भरत और सुग्रीव के साथ युद्ध के मैदान में उतरे।

    रणभूमि में जब हनुमान जी ने इन दो अत्यंत छोटे बालकों के अलौकिक शौर्य और पराक्रम को देखा, तो वे विस्मय में पड़ गए। वास्तविकता का पता लगाने के लिए जब उन्होंने नेत्र बंद कर ध्यान लगाया, तो उन्हें तुरंत यह बोध हो गया कि ये दोनों बालक कोई साधारण क्षत्रिय नहीं, बल्कि उनके आराध्य प्रभु श्रीराम और माता सीता के ही अंश हैं। इस सत्य से अवगत होने के पश्चात हनुमान जी के लिए अपने ही स्वामी की संतानों पर अस्त्र उठाना सर्वथा असंभव हो गया। उन्होंने तुरंत युद्ध न करने का नीतिगत निर्णय लिया और अस्त्र त्याग कर शांत खड़े हो गए। इसके बाद लव और कुश ने उन पर निरंतर कई तीखे प्रहार किए, किंतु हनुमान जी ने बिना किसी प्रतिरोध या पलटवार के सब कुछ अत्यंत शांत भाव से सहन किया और प्रेम पूर्वक अपनी पराजय स्वीकार कर ली।

  • ना बड़े स्टार, ना भारी बजट, सिर्फ दमदार कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

    ना बड़े स्टार, ना भारी बजट, सिर्फ दमदार कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास



    नई दिल्ली। बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में अक्सर माना जाता है कि बड़ी फिल्में सिर्फ बड़े स्टार्स और भारी बजट से चलती हैं, लेकिन कई ऐसी फिल्में भी रही हैं जिन्होंने इस धारणा को पूरी तरह तोड़ दिया है। इन फिल्मों ने साबित किया कि अगर कहानी मजबूत हो तो कम बजट में भी रिकॉर्ड तोड़े जा सकते हैं।

    कंतारा
    ऋषभ शेट्टी द्वारा निर्देशित और अभिनीत फिल्म कंतारा (2022) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लगभग 16 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में करीब 411 करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म की कहानी, लोक संस्कृति और दमदार प्रस्तुति ने इसे ब्लॉकबस्टर बना दिया।

    777 चार्ली
    यह फिल्म एक इंसान और एक कुत्ते की भावनात्मक कहानी पर आधारित थी। धीरे-धीरे यह फिल्म दर्शकों के दिलों में उतर गई और इसे बेहद सराहा गया। कम बजट में बनी इस फिल्म ने भी शानदार प्रदर्शन किया।

    द केरल स्टोरी
    अदा शर्मा स्टारर द केरल स्टोरी ने 15 करोड़ के बजट में करीब 303 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। विवादों के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई।

    12वीं फेल
    विक्रांत मैसी की यह फिल्म सच्ची कहानी पर आधारित थी। लगभग 20 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 70 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों का दिल जीत लिया।

    सीता रामम
    दुलकर सलमान और मृणाल ठाकुर स्टारर यह रोमांटिक ड्रामा फिल्म भी कम बजट में बनी लेकिन अपनी कहानी और इमोशन की वजह से दर्शकों को खूब पसंद आई।

    हनुमान
    तेजा सज्जा स्टारर हनुमान (2024) ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। लगभग 30 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 220 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और सुपरहीरो जॉनर में बड़ी पहचान बनाई।

    महावतार नरसिम्हा
    यह एनिमेटेड फिल्म भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एनिमेटेड फिल्मों में शामिल हो गई। लगभग 15 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 300 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया।

    इन सभी फिल्मों ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में दर्शक सिर्फ स्टार पावर नहीं, बल्कि मजबूत कहानी और कंटेंट को ज्यादा महत्व देते हैं। यही वजह है कि कम बजट की ये फिल्में भी बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को टक्कर देने में सफल रहीं।

  • बड़ा मंगल: भक्ति, सेवा और आस्था का पावन पर्व

    बड़ा मंगल: भक्ति, सेवा और आस्था का पावन पर्व



    नई दिल्ली। बड़ा मंगल हिंदू धर्म में भगवान हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय पर्व है। यह विशेष रूप से ज्येष्ठ माह के मंगलवारों को मनाया जाता है। उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में इस पर्व को बड़े उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिलता है और जगह-जगह भंडारों का आयोजन होता है।

    बड़ा मंगल क्यों मनाया जाता है?
    बड़ा मंगल मनाने का मुख्य उद्देश्य भगवान Hanuman जी की आराधना करना और उनके आशीर्वाद से जीवन में शक्ति, साहस और संकटों से मुक्ति प्राप्त करना है।

    मान्यता है कि हनुमान जी संकटमोचक हैं और उनकी पूजा करने से:

    जीवन के कष्ट दूर होते हैं

    भय और नकारात्मकता समाप्त होती है

    आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है

    मंगल ग्रह से जुड़े दोषों का प्रभाव कम होता है

    जीवन में सुख, शांति और सफलता मिलती है

    बड़ा मंगल की शुरुआत और इतिहास
    बड़ा मंगल की परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है, हालांकि इसका कोई एक निश्चित ऐतिहासिक प्रमाणित आरंभ नहीं मिलता। यह परंपरा मुख्य रूप से अवध क्षेत्र से जुड़ी हुई है।

    ऐसा माना जाता है कि, यह परंपरा कई सौ वर्ष पुरानी हैमुगल काल और अवध के नवाबों के समय में यह परंपरा और अधिक लोकप्रिय हुईलखनऊ में हनुमान मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा का आयोजन शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे उत्तर भारत में फैल गई। समय के साथ यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सेवा का भी प्रतीक बन गया।

    बड़ा मंगल की परंपराएं और आयोजन
    बड़ा मंगल के दिन देशभर में विशेष धार्मिक और सामाजिक आयोजन किए जाते हैं:

    1. विशेष पूजा और आरती
    हनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगती है। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और आरती का पाठ किया जाता है।

    2. भंडारे और लंगर
    इस दिन सबसे खास परंपरा भंडारे की होती है, जिसमें हजारों लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है। यह सेवा भावना का प्रतीक है।

    3. सेवा कार्य
    भक्त गरीबों, जरूरतमंदों और राहगीरों की सेवा करते हैं, जो इस पर्व की सबसे सुंदर विशेषता है।

    4. भक्ति और जुलूस
    कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक जुलूस निकाले जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

    बड़ा मंगल का सामाजिक महत्व
    बड़ा मंगल केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा भावना का भी प्रतीक है। यह दिन लोगों को जोड़ने का कार्य करता है और समाज में दया, करुणा और सहयोग की भावना को बढ़ाता है।इस दिन अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है और सभी लोग एक साथ सेवा और भक्ति में शामिल होते हैं।

    बड़ा मंगल का आधुनिक महत्व
    आज के समय में भी बड़ा मंगल की परंपरा उतनी ही मजबूत है। बदलते समय के साथ डिजिटल माध्यमों से भी भक्ति कार्यक्रम साझा किए जाते हैंबड़े स्तर पर भंडारों का आयोजन होता हैयुवा पीढ़ी भी इस परंपरा से जुड़ रही हैयह पर्व आधुनिक समाज में भी आस्था और सेवा का संतुलन बनाए हुए है।बड़ा मंगल हमें यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और मानवता में निहित है। हनुमान जी की आराधना हमें जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मकता प्रदान करती है।यह पर्व हर साल भक्तों को यह याद दिलाता है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानवता की सेवा ही सच्ची पूजा है।