Tag: Hanumangarhi

  • हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर बृज भूषण ने लिया यू-टर्न, दी सफाई, बोले- भावनाएं आहत हुई हों तो क्षमा चाहता हूं

    हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर बृज भूषण ने लिया यू-टर्न, दी सफाई, बोले- भावनाएं आहत हुई हों तो क्षमा चाहता हूं


    गोंडा। हनुमानगढ़ी में नमाज को लेकर दिए गए बयान पर मचे राजनीतिक विवाद के बीच पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए क्षमा मांगने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का खंडन करना या उसका विरोध करना नहीं था।

    मुख्यमंत्री के बयान के बाद शुरू हुआ विवाद
    हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि सपा शासनकाल में हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाई गई थी। इसके बाद 17 जुलाई को गोंडा में मीडिया से बातचीत के दौरान बृज भूषण शरण सिंह ने कहा था कि वहां नमाज नहीं पढ़ी गई थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई।

    सीढ़ियों और परिसर को लेकर दिया स्पष्टीकरण
    विवाद बढ़ने के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि मीडिया ने उनसे विशेष रूप से यह सवाल किया था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी? इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें उसी समय यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं हुई, लेकिन 52 बीघा परिसर, किसी संत के स्थान या परिसर के अन्य हिस्से में नमाज पढ़े जाने की बात अलग विषय है। यदि वह यह बात उसी समय जोड़ देते, तो शायद इतना विवाद पैदा नहीं होता।

    ‘मुख्यमंत्री की बात काटने का सवाल ही नहीं’
    पूर्व सांसद ने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का विरोध करना नहीं था। उन्होंने कहा, “अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो जैसी स्थिति बन गई है। एक तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान भी सही है, अयोध्या के संतों का बयान भी सही है और मेरा बयान भी सही है। मैंने सिर्फ इतना कहा था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी।”

    भावनाएं आहत हुई हों तो मांगी माफी
    बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि यदि किसी को उनके बयान से ठेस पहुंची है या ऐसा लगा कि वह मुख्यमंत्री के बयान का विरोध कर रहे हैं, तो यह उनकी मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह क्षमा मांगने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

  • अयोध्या से विपक्ष पर सीएम योगी का तीखा हमला, हनुमानगढ़ी विवाद का जिक्र कर आस्था और विरासत के मुद्दे पर साधा निशाना

    अयोध्या से विपक्ष पर सीएम योगी का तीखा हमला, हनुमानगढ़ी विवाद का जिक्र कर आस्था और विरासत के मुद्दे पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान धार्मिक आस्था, अयोध्या के विकास और विपक्ष की नीतियों को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की। 432 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 217 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह में संबोधित करते हुए उन्होंने हनुमानगढ़ी से जुड़े एक कथित पुराने विवाद का उल्लेख किया और समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस पर धार्मिक आस्थाओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और हनुमानगढ़ी उसकी प्रमुख धार्मिक पहचान मानी जाती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दूसरे धर्म के धार्मिक अनुष्ठान स्वीकार्य नहीं हैं, तो अयोध्या जैसे पवित्र स्थल पर इस प्रकार की घटनाओं को क्यों होने दिया गया। उन्होंने अपने भाषण में इस मुद्दे को पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल से जोड़ते हुए विपक्षी दलों की भूमिका पर प्रश्न उठाए।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने अयोध्या की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या में आधारभूत ढांचे का तेजी से विकास हुआ है और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की गई हैं। उनके अनुसार, इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण, आधुनिक परिवहन सुविधाओं और शहर के व्यापक विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रही है। उनके अनुसार, हवाई अड्डे, सड़क संपर्क, सार्वजनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से शहर की नई पहचान बनी है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि पूर्व में अयोध्या से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ने की नीति अपनाई है। उनके अनुसार, धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयोध्या से दिया गया यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक और विकास संबंधी मुद्दे राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। मुख्यमंत्री के वक्तव्य को विपक्ष पर राजनीतिक हमला और अपनी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    फिलहाल मुख्यमंत्री के इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। वहीं, अयोध्या में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और धार्मिक विरासत के संरक्षण से जुड़े सरकारी प्रयास भी चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।

  • अयोध्या के संत समाज को बड़ा झटका, हनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास नहीं रहे

    अयोध्या के संत समाज को बड़ा झटका, हनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास नहीं रहे


    अयोध्या। श्रीहनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास का शनिवार को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे महंत ने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही अयोध्या के संत समाज और श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार शाम 4 बजे नया घाट पर पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा।

    महंत संत रामदास लंबे समय से उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। हाल ही में उन्हें इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद वह तीन दिन पहले ही अयोध्या लौटे थे, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और उनका निधन हो गया।

    मुख्यमंत्री योगी ने जताया गहरा शोक

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत संत रामदास के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि संत रामदास का आध्यात्मिक जीवन, धर्म और समाज के प्रति उनका समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करते हुए दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा उनके अनुयायियों और श्रद्धालुओं को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

    संत समाज में था विशेष सम्मान

    महंत संत रामदास अयोध्या के संत समाज के अत्यंत सम्मानित संतों में गिने जाते थे। धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका रही और श्रद्धालुओं के बीच उनका विशेष स्थान था। अयोध्या प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी समय-समय पर उनके आश्रम पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेते रहे थे। उनके निधन को अयोध्या के संत समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और स्थानीय लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंच रहे हैं।
  • राम नवमी पर अयोध्या जाने से पहले जानें भीड़ और सुरक्षा की पूरी जानकारी

    राम नवमी पर अयोध्या जाने से पहले जानें भीड़ और सुरक्षा की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली । राम नवमी 2026 का पावन पर्व 26 मार्च को अयोध्या में मनाया जाएगा और इस बार राम लला के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद यह उत्सव और भी खास होने वाला है। इस मौके पर देश दुनिया से लाखों भक्त अयोध्या पहुँचते हैं, जिससे यात्रा के दौरान भारी भीड़ और व्यवस्थाओं से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

    सबसे पहले दर्शन का सही समय चुनना महत्वपूर्ण है। राम नवमी के दिन मंदिर में कतारें कई किलोमीटर लंबी हो सकती हैं। यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं तो राम नवमी से 2 3 दिन पहले या उत्सव के 2 दिन बाद मंदिर जाने की योजना बनाएं। मुख्य उत्सव के दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मंदिर परिसर में सबसे अधिक भीड़ रहती है क्योंकि इसी समय मध्याह्न की विशेष आरती और सूर्य तिलक होता है।

    ठहरने और खाने पीने का भी सही प्लान बनाना जरूरी है। भीड़ के कारण अयोध्या के होटलों और धर्मशालाओं के दाम बढ़ जाते हैं। यदि मुख्य शहर में कमरे नहीं मिल रहे हैं तो फैजाबाद (अयोध्या कैंट) या गुप्तार घाट के पास ठहरने का विकल्प देखें। यहां से मंदिर तक ई रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं। अयोध्या के प्रमुख मठों और मंदिरों में भंडारा और प्रसाद की व्यवस्था रहती है, और राम पथ के किनारे कई किफायती भोजनालय भी हैं।

    भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के नियमों का पालन करना जरूरी है। प्रशासन ने इस बार ई पास या क्यूआर कोड आधारित प्रवेश व्यवस्था पर जोर दिया है। मंदिर के अंदर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैमरा और चमड़े के सामान ले जाना वर्जित है। भारी भीड़ को देखते हुए बुजुर्गों और छोटे बच्चों को मुख्य उत्सव के दिन मंदिर ले जाने से बचें। राम जन्मभूमि पथ पर लंबी पैदल यात्रा के लिए आरामदायक जूते पहनना न भूलें।

    अयोध्या की यात्रा केवल मुख्य मंदिर तक सीमित न रखें। यात्रा के दौरान हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ मंदिर और सरयू तट की आरती का भी आनंद लें। शाम के समय सरयू घाट पर होने वाला लेजर शो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

    राम नवमी पर अयोध्या की यात्रा आस्था का अनूठा अनुभव है। इसके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना, समय पर बुकिंग करना और धैर्य रखना जरूरी है। सही तैयारी के साथ आप राम लला के दर्शन को आराम से और सफलतापूर्वक कर पाएंगे।