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  • शिवपुरी में छात्रा से सरेराह अभद्रता और मारपीट, बाल पकड़कर पीटा, विरोध पर बचाने आई युवती से भी बदसलूकी

    शिवपुरी में छात्रा से सरेराह अभद्रता और मारपीट, बाल पकड़कर पीटा, विरोध पर बचाने आई युवती से भी बदसलूकी

    शिवपुरी: में रविवार शाम एक छात्रा के साथ सरेराह अभद्रता और मारपीट का मामला सामने आया है। शहर के फिजिकल थाना क्षेत्र में विष्णु मंदिर के सामने कार सवार चार युवकों पर 17 वर्षीय छात्रा को परेशान करने, अश्लील टिप्पणियां करने और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट करने के आरोप हैं। छात्रा को बचाने के लिए पहुंची एक अन्य युवती के साथ भी आरोपियों ने कथित तौर पर झूमाझटकी की। घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप किया और एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। बाकी तीन आरोपी मौके से फरार हो गए।

    जानकारी के अनुसार, छात्रा रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे अपनी स्कूटी से पुरानी शिवपुरी में एक दोस्त के यहां पढ़ने जा रही थी। इसी दौरान सिद्धेश्वर मेला ग्राउंड की ओर से एक कार में सवार चार युवक वहां पहुंचे। आरोप है कि युवकों ने छात्रा की स्कूटी का पीछा किया और लगातार हॉर्न बजाकर उसे परेशान करने लगे। इसके बाद उन्होंने उसकी स्कूटी के सामने वाहन लाकर रास्ता रोकने जैसी हरकत की और अश्लील टिप्पणियां कीं।

    छात्रा ने युवकों की हरकतों का विरोध किया और विष्णु मंदिर के सामने अपनी स्कूटी रोक दी। आरोप है कि इसके बाद कार से उतरे चारों युवकों ने उसके साथ बदसलूकी की और उसकी चोटी पकड़कर मारपीट शुरू कर दी। व्यस्त सड़क पर हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंच गए। जब एक युवती ने छात्रा को बचाने के लिए हस्तक्षेप किया, तो आरोपियों ने उसके बाल पकड़कर उसे भी घसीटा और उसके साथ अभद्र व्यवहार किया।

    घटना देख रहे लोगों ने विरोध करते हुए आरोपियों को रोकने की कोशिश की। इस दौरान एक युवक को पकड़ लिया गया, जबकि तीन अन्य युवक कार लेकर वहां से भाग निकले। स्थानीय लोगों ने पकड़े गए युवक को फिजिकल थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।

    पकड़े गए युवक की पहचान पुराना अमोला निवासी बृजेंद्र गुर्जर के रूप में बताई गई है। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर अपने तीन साथियों के नाम बृजमोहन गुर्जर, मोनू चंदेल और विक्रम बुंदेला बताए। घटना में इस्तेमाल की गई कार विक्रम बुंदेला की बताई जा रही है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश के साथ वाहन का भी पता लगाने में जुटी है।

    पीड़ित छात्रा की मां ने घटना पर नाराजगी जताते हुए पुलिस अधीक्षक से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी बेटी कोचिंग और पढ़ाई से जुड़े काम के लिए घर से निकली थी, लेकिन रास्ते में उसे इस तरह की घटना का सामना करना पड़ा। उन्होंने चिंता जताई कि यदि सार्वजनिक स्थानों पर छात्राओं के साथ ऐसी घटनाएं होती रहेंगी, तो उनकी पढ़ाई और रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित होगी।

    मामले में पुलिस के अनुसार, छात्रा की शिकायत पर चारों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य की तलाश जारी है। पुलिस घटना में इस्तेमाल की गई कार को भी तलाश रही है। थाना प्रभारी अविनाश राठौड़ के मुताबिक, फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की जाएगी।

  • पूर्व डीएसपी की पुत्रवधु ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और संपत्ति हड़पने के आरोप लगाए, छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

    पूर्व डीएसपी की पुत्रवधु ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और संपत्ति हड़पने के आरोप लगाए, छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी में पूर्व ट्रैफिक डीएसपी हरिवंश कन्हौआ के परिवार से जुड़ा विवाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। उनकी पुत्रवधु प्रियांशु शर्मा ने ससुराल पक्ष के छह सदस्यों के खिलाफ शिकायत देकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना, संपत्ति हड़पने की कोशिश तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए हैं। प्रियांशु ने पुलिस से मामले में कार्रवाई करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। मामले में पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    प्रियांशु शर्मा ने अपने आवेदन में बताया कि उनकी शादी जनवरी 2022 में आकाश कन्हौआ के साथ हुई थी। शिकायत के मुताबिक, 23 दिसंबर 2025 को आकाश 14 लाख रुपये की व्यवस्था करने के लिए घर से निकले थे। इसके अगले दिन प्रियांशु को जबलपुर में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने की सूचना मिली। पति की मौत के हालात को लेकर शिकायत में चिंता जताई गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनकी मौत के कारणों और उससे संबंधित जांच के अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

    प्रियांशु का आरोप है कि पति की मौत के लगभग सवा महीने बाद भोपाल स्थित मकान से 23 लाख रुपये की चोरी के मामले में उन पर आरोप लगाया गया। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में पुलिस जांच और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल की जांच में उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस मामले में जांच से संबंधित दस्तावेजों और निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सास-ससुर और जेठ की ओर से उन पर दूसरी शादी करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, बेटी सान्वी को अपने पास से छोड़ने के लिए भी दबाव बनाया गया। प्रियांशु ने दावा किया कि पति के नाम पर मौजूद संपत्ति अपने नाम कराने के लिए भी उनसे लगातार दबावपूर्वक बातचीत की जाती रही। इन आरोपों के संबंध में दूसरे पक्ष का बयान उपलब्ध नहीं है।

    प्रियांशु ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उन्हें इंदौर में नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उनका आरोप है कि अक्टूबर 2026 में अपने पिता के साथ बातचीत के दौरान उनसे जबरन समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें घर से निकालने की बात कही गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन परिस्थितियों के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा और अब उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है।

    प्रियांशु शर्मा ने जिन छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, उनमें उनके ससुर हरिवंश कन्हौआ, सास सरोज कन्हौआ, जेठ विकास कन्हौआ, जेठानी भावना कन्हौआ, ननद ऋतु अवस्थी और नंदोई सौरभ अवस्थी के नाम शामिल हैं। उन्होंने पुलिस से शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने, संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

    मामले में अब पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। पति की संदिग्ध मौत, चोरी के आरोप, संपत्ति को लेकर विवाद और कथित प्रताड़ना से जुड़े पहलुओं की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों, बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • शिवपुरी के अकाझिरी गांव में बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर भाई को पीटा, बाइक से घसीटने का आरोप

    शिवपुरी के अकाझिरी गांव में बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर भाई को पीटा, बाइक से घसीटने का आरोप

    शिवपुरी जिले के कोलारस अनुविभाग के रन्नौद थाना क्षेत्र के अकाझिरी गांव में बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर एक युवक के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि चार युवकों ने पीड़ित के साथ गाली-गलौज की, लाठी-डंडों से हमला किया और उसे बाइक से घसीटते हुए बस स्टैंड तक ले गए। घटना में युवक घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घटना 20 अक्टूबर 2026 की रात करीब आठ बजे की बताई गई है। अकाझिरी गांव का रहने वाला युवक अपनी बड़ी बहन के साथ रामलीला देखने जा रहा था। इसी दौरान पानी की टंकी के पास गांव के ही राम गुप्ता, मोनू ओझा, कृष्णा ओझा और ज्योतिष ओझा मिल गए। शिकायत के अनुसार, चारों ने युवक की बहन के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ शुरू कर दी।

    बहन के साथ हो रही इस हरकत का युवक ने विरोध किया। आरोप है कि विरोध करने पर चारों युवक नाराज हो गए और उन्होंने पीड़ित के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद लाठी-डंडों से उसकी पिटाई की गई। घटना के दौरान युवक को गंभीर चोटें आईं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हमलावर उसे राम गुप्ता की बाइक से घसीटते हुए बस स्टैंड तक ले गए, जिससे उसकी चोटें और बढ़ गईं।

    पीड़ित के मुताबिक, मारपीट के बाद आरोपियों ने उसे पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। मामले में बहन के साथ कथित छेड़छाड़ और भाई के साथ मारपीट, दोनों आरोपों को लेकर पुलिस कार्रवाई कर रही है।

    पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने राम गुप्ता, मोनू ओझा, कृष्णा ओझा और ज्योतिष ओझा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। घटना में शामिल लोगों की भूमिका, मारपीट की परिस्थितियों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    अकाझिरी गांव में हुई इस घटना के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में है। फिलहाल पुलिस की जांच शिकायत में दर्ज आरोपों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होना जांच की शुरुआती कार्रवाई है। मामले में आरोपों की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

  • जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

    जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

    नई दिल्ली ।दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। क्राइम ब्रांच अब संबंधित महिला पत्रकारों के बयान दर्ज करेगी और पूरे मामले की जांच करेगी। आरोप उस समय से जुड़ा है, जब प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की जा रही थी। महिला पत्रकारों में से एक ने दावा किया है कि मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।

    एक महिला पत्रकार के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पकड़ा जा रहा था। इसी दौरान उसने ACP विवेक भगत पर उसके सीने पर हाथ मारने और धक्का देकर वहां से चले जाने का आरोप लगाया। महिला पत्रकार का दावा है कि घटना के समय वहां महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। आरोप सामने आने के बाद मामले को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, जो अब संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगी और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।

    मामले को लेकर CJP की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। CJP ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार किया। संगठन के अनुसार, पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज करने से पहले CCTV फुटेज की जांच की जाएगी। CJP ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस गंभीर शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित ACP को बचाने की कोशिश कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने रविवार को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन भी किया।

    इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि जंतर-मंतर पर लगातार दो दिनों तक हुए प्रदर्शनों से जुड़ी है। 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचे थे। इनमें AISA समेत छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग शामिल थे। इस दौरान करीब 200 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इससे एक दिन पहले 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास हुए प्रदर्शन के दौरान करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में इनमें से कई लोगों को छोड़ दिया गया। दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर कम से कम तीन FIR भी दर्ज की थीं।

    इन प्रदर्शनों के पीछे चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद भी बताया गया है। SIR को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कहा था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। इसके बाद SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए गए। आयोग ने कहा कि किसी संस्था में चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामान्य हैं। आयोग के अनुसार उसके सभी आदेशों को कानूनी आधार हासिल है और वे तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं।

  • समस्तीपुर में लड़की से बदसलूकी का वीडियो वायरल, बांध बाइपास रोड पर घटना के बाद युवकों की पहचान में जुटी पुलिस

    समस्तीपुर में लड़की से बदसलूकी का वीडियो वायरल, बांध बाइपास रोड पर घटना के बाद युवकों की पहचान में जुटी पुलिस

    नई दिल्ली /बिहार के समस्तीपुर में लड़की के साथ कथित बदसलूकी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में कुछ युवक एक लड़की के साथ गाली-गलौज और कथित तौर पर गलत व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। लड़की से छेड़खानी और बैड टच करने का आरोप भी लगाया गया है।

    बताया गया है कि बुधवार शाम लड़की एक परिचित लड़के के साथ बांध बाइपास रोड से गुजर रही थी। रास्ते में वह कुछ देर के लिए रुकी और वहां फोटो लेने लगी। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंच गए। आरोप है कि युवकों ने लड़की के साथ बदसलूकी और छेड़खानी शुरू कर दी।

    घटना के दौरान किसी व्यक्ति ने मोबाइल फोन से वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची और पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी।

    जानकारी के मुताबिक, लड़की अपने एक परिचित युवक के साथ रास्ते से गुजर रही थी और कुछ समय के लिए वहां रुककर फोटो खींच रही थी। इसी दौरान कुछ युवक उसके पास पहुंचे और कथित तौर पर उसके साथ गाली-गलौज करने लगे। वीडियो में युवकों का व्यवहार भी दिखाई दे रहा है, जिसके आधार पर पुलिस मामले की जानकारी जुटा रही है।

    वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इसमें दिखाई दे रहे युवकों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस घटना से जुड़े वीडियो की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं।

    स्थानीय लोगों की ओर से यह बात सामने आई है कि वीडियो में नजर आ रहे युवक इसी गांव के रहने वाले हो सकते हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी इस जानकारी की पुष्टि नहीं की है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही युवकों की पहचान और घटना से जुड़ी अन्य जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।

    पुलिस घटना वाली जगह के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना किस परिस्थिति में हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

    समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने मामले को गंभीर बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और उसमें दिखाई दे रहे युवकों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस वीडियो और घटना से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। युवकों की पहचान और मामले में उनकी भूमिका जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

  • उन्नाव के स्कूल में हेड मास्टर पर बच्चों की पिटाई और निजी काम कराने के गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    उन्नाव के स्कूल में हेड मास्टर पर बच्चों की पिटाई और निजी काम कराने के गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. पुरवा तहसील के मदारपुर जूनियर स्कूल के हेड मास्टर पर स्कूली बच्चों को बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है. साथ ही, उनका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने का भी गंभीर आरोप लगा है. इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यशैली और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

    छोटी-छोटी बातों पर बर्बरता के आरोप

    पीड़ित बच्चों के परिजनों के अनुसार, स्कूल के हेड मास्टर मासूम बच्चों से अपने व्यक्तिगत और गैर-शैक्षणिक काम करवाते थे. आरोप है कि अगर कोई स्टूडेंट उन्हें ‘गुड मॉर्निंग’ बोलना भूल जाता था, तो उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी. इसके अलावा, हेड मास्टर बच्चों से अपनी निजी गाड़ी धुलवाता और टॉयलेट में पानी डालने जैसे काम भी जबरन करवाते थे. इन कामों को करने में जरा सी भी चूक होने पर बच्चों को बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता था.

    परिजनों ने एसडीएम से की शिकायत

    जब बच्चों ने अपने साथ हो रही इस बर्बरता की जानकारी घर पर दी, तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. घटना से आक्रोशित परिजनों ने एसडीएम पुरवा से मुलाकात कर आरोपी हेड मास्टर के खिलाफ शिकायत की. परिजनों ने वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोपी हेड मास्टर के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाने की मांग की है. एसडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

    शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मदारपुर जूनियर स्कूल की इस घटना ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है. स्कूल में शिक्षा लेने जाने वाले मासूमों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है, बल्कि उनके मन में शिक्षा के प्रति खौफ भी पैदा करता है. फिलहाल, इस वायरल वीडियो और परिजनों की शिकायत के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) स्तर पर क्या कार्रवाई होती है ये देखने वाली बात होगी.

  • यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी एक गंभीर घटनाक्रम के कारण सुर्खियों में आ गए हैं। इस दंपति ने अपनी इंसानियत और सतर्कता का परिचय देते हुए एक युवती को बंधक बनाए जाने और प्रताड़ित किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपनी घरेलू सहायिका की बहन की जान बचाने के लिए इस दंपति को पूरी रात मुंबई के पुलिस स्टेशन में बितानी पड़ी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

    पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अभिनेत्री की घरेलू सहायिका ने रोते हुए अपनी बहन के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी दी। उसने बताया कि उसकी बहन को मुंबई के खारघर इलाके में स्थित एक मकान में एक एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था। वहां उसे दर्जनों पालतू जानवरों की देखभाल के लिए रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे उस पर काम का अत्यधिक बोझ डाल दिया गया। जब युवती ने काम करने में असमर्थता जताई, तो आरोपी दंपत्ति ने उसे घर में ही बंधक बना लिया। आरोप है कि युवती को खाना देना बंद कर दिया गया, उसके पहचान पत्र और कपड़े छीन लिए गए और लगातार जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभिनेत्री और उनके पति तुरंत हरकत में आए। उन्होंने पहले फोन के माध्यम से संबंधित पक्षों से संपर्क कर युवती को छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से बेहद मशक्कत के बाद पीड़िता को उस घर से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जब पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर लाया गया, तो उसकी मानसिक स्थिति काफी दयनीय थी और वह अत्यधिक डरी-सहमी हुई थी।

    मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी पक्ष ने खुद को बचाने और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पीड़िता पर ही झूठे आरोप लगाने की कोशिश की। इसके बाद अभिनेत्री और उनके पति स्वयं आधी रात को मुंबई के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन पहुंचे। दोनों ने पूरी रात पुलिस स्टेशन में रुककर अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। काफी मशक्कत और सबूत पेश किए जाने के बाद सुबह पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की।

    इस पूरी घटना का विवरण दंपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। घरेलू सहायिका और उसके परिवार ने अभिनेत्री और उनके पति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वे समय पर ढाल बनकर नहीं खड़े होते, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है और पीड़िता को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।

  • कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं

    कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई से जुड़ा एक अलग तरह का मामला सामने आया है। आमतौर पर महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ या उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई करने वाली एंटी रोमियो टीम ने इस बार दो युवतियों को पुरुषों से कथित छेड़छाड़, अभद्र टिप्पणियां और अश्लील इशारे करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    यह घटना वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र की बताई गई है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब पांच बजे चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के नीचे दो युवतियों के राह चलते पुरुषों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों राहगीरों की ओर अश्लील टिप्पणियां कर रही थीं और आपत्तिजनक इशारे कर रही थीं। सूचना मिलते ही एंटी रोमियो स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मौके पर पहुंचने पर दोनों युवतियों ने अपना चेहरा ढका हुआ था। प्रारंभिक पूछताछ और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी लेने के बाद उन्हें थाने लाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर कथित अश्लील हरकतों और अभद्र व्यवहार से जुड़े आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएं बिहार की रहने वाली हैं। हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एंटी रोमियो स्क्वॉड का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अभद्रता या उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना है। कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है और शिकायत मिलने पर आरोपी के महिला या पुरुष होने के आधार पर कार्रवाई में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार या किसी व्यक्ति को असहज करने वाली गतिविधियों के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

    वाराणसी की यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई इस बार महिलाओं के खिलाफ हुई है। हालांकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में लगाए गए आरोपों की जांच विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन ने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित व्यवहार बनाए रखने और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की है, ताकि सभी नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

  • टीवी इंडस्ट्री में नए विवाद की एंट्री, सान्वी तलवार के आरोपों पर करण कुंद्रा की चुप्पी बरकरार

    टीवी इंडस्ट्री में नए विवाद की एंट्री, सान्वी तलवार के आरोपों पर करण कुंद्रा की चुप्पी बरकरार

    नई दिल्ली । टेलीविजन अभिनेत्री सान्वी तलवार ने अपने पूर्व सह-कलाकार करण कुंद्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए मनोरंजन जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। एक हालिया इंटरव्यू में सान्वी ने दावा किया कि वर्ष 2015 में एक टीवी धारावाहिक की शूटिंग के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक दृश्य की तैयारी के दौरान बिना उनकी सहमति के उन्हें किस किया गया, जिसके बाद सेट पर विवाद की स्थिति बन गई।

    सान्वी तलवार के अनुसार, जिस दृश्य की शूटिंग होनी थी, उसके लिए निर्देशक ने अभी शूट शुरू करने का संकेत भी नहीं दिया था। उनका दावा है कि इसी दौरान करण कुंद्रा ने बिना अनुमति उन्हें किस किया। अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके बाद कुछ समय पश्चात कथित रूप से करण कुंद्रा ने भी उन्हें थप्पड़ मारा। सान्वी का कहना है कि इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    अभिनेत्री ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय सेट पर मौजूद अधिकांश लोगों ने उनका खुलकर समर्थन नहीं किया। उनके अनुसार, विवाद के दौरान उन्हें अपशब्द भी कहे गए और वे गिर पड़ीं। सान्वी ने कहा कि बाद में निर्माता एकता कपूर ने उनसे बातचीत की, उनका पक्ष सुना और स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि एकता कपूर ने करण कुंद्रा की ओर से उनसे माफी भी मांगी थी, जिससे काम का माहौल कुछ हद तक सहज हो सका।

    सान्वी ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि उस समय उन्हें लगा था कि करण कुंद्रा का व्यवहार सामान्य पेशेवर सीमाओं से अलग है। इसी वजह से उन्होंने एक साझा परिचित के माध्यम से उस समय करण की कथित गर्लफ्रेंड रहीं अनुषा दांडेकर को अपनी चिंता से अवगत कराया। अभिनेत्री का आरोप है कि इसके बाद उनके लिए सेट का माहौल और अधिक असहज हो गया तथा उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

    यह विवाद उस टीवी धारावाहिक से जुड़ा बताया जा रहा है जिसमें करण कुंद्रा और सान्वी तलवार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। उस समय यह शो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा था। हालांकि अभिनेत्री द्वारा लगाए गए आरोप कई वर्ष बाद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं, जिससे एक बार फिर पुराने घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिलहाल करण कुंद्रा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले पर उनका पक्ष आना बाकी है। किसी भी विवाद में सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकलना उचित माना जाता है। मनोरंजन जगत में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी हैं और अब सभी की नजर करण कुंद्रा की संभावित प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

  • कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई

    कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शोधार्थियों के उत्पीड़न के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद समाज कार्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को मंजूरी दे दी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार जांच में लगाए गए आरोप सही पाए गए, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के मामले में एक प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

    विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्य परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान महिला और पुरुष शोधार्थियों द्वारा डॉ. मोहम्मद नईम के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित जांच रिपोर्ट परिषद के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसके अलावा शिक्षक आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामले की रिपोर्ट पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    कार्य परिषद ने उपलब्ध तथ्यों और जांच समिति की रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद मामले को गंभीर मानते हुए डॉ. नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकृति प्रदान की। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान में सुरक्षित, पारदर्शी और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या उत्पीड़न के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    बैठक में विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से संबंधित एक अन्य जांच रिपोर्ट भी रखी गई। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी पुष्पा गौतम के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी एक वर्ष की वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। परिषद ने माना कि संस्थान की गरिमा और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।

    कार्य परिषद की बैठक में आगामी दीक्षांत समारोह से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। परिषद ने 13 अगस्त को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में प्रसिद्ध चित्रकार दिनेश सोनी को मानद डी.लिट. उपाधि प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए कुलाधिपति के पास भेजा जाएगा।

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और जांच रिपोर्ट के आधार पर लिए गए हैं। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने बताया कि कार्य परिषद के समक्ष प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में डॉ. मोहम्मद नईम के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकार किया गया। वहीं प्रशासनिक अधिकारी के मामले में भी जांच रिपोर्ट के आधार पर वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया।

    विश्वविद्यालय का कहना है कि संस्थान में छात्रों और शोधार्थियों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन ने संकेत दिया कि भविष्य में भी किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय को विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन, जवाबदेही और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।