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  • MP: ग्वालियर में छुट्टी के दिन खुलीं LPG एजेंसियां, भोपाल-हरदा में सिलेंडर की किल्लत से हंगामा

    MP: ग्वालियर में छुट्टी के दिन खुलीं LPG एजेंसियां, भोपाल-हरदा में सिलेंडर की किल्लत से हंगामा


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में LPG संकट से थोड़ी राहत मिलने लगी है। सोमवार को ग्वालियर में कलेक्टर रुचिका चौहान के आदेश पर साप्ताहिक छुट्टी के दिन भी गैस एजेंसियां खुलीं और बुकिंग के आधार पर सिलेंडर की डिलिवरी शुरू हुई। गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि बुकिंग की 40% समस्या अब खत्म हो गई है।

    भोपाल में हंगामा
    भोपाल के टीटी नगर दशहरा मैदान में सोमवार सुबह गैस सिलेंडर से भरा एक ट्रक पहुंचा। सिलेंडर बांटने के बाद 50 से अधिक लोग खाली हाथ रह गए, जिससे वहां हंगामा हो गया। ग्राहकों का कहना था कि सिलेंडर यहीं मंगवाए जाएं, जबकि कर्मचारियों ने उन्हें एजेंसी जाने के लिए कहा। एक घंटे के बाद कर्मचारियों ने अतिरिक्त ट्रक की व्यवस्था कर लोगों की समस्या दूर की।

    हरदा में भी लगी लंबी लाइन
    हरदा में एलपीजी एजेंसियों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी। लोग सुबह से ही सिलेंडर भरवाने के लिए लाइन में खड़े हैं।

    होटल इंडस्ट्री में राहत
    एमपी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने कहा, “लगातार 6-7 दिन से प्रदेश के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट को एक भी कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिला। अब सरकार ने हमें भी सिलेंडर देने की बात कही है। यह हमारे लिए ‘ऑक्सीजन’ मिलने जैसा है।”
    सिलेंडर की कमी के कारण प्रदेश में 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर थे। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इंडक्शन, डीज़ल भट्ठी आदि की सुविधा की गई थी, लेकिन यह काफी खर्चीला था।

    भोपाल में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई शुरू
    भोपाल गैस एजेंसियों के मुताबिक, सोमवार से कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई शुरू हो गई है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली ने कहा कि अब होटल संचालक इंडक्शन, इलेक्ट्रिक ग्रिडल और फ्रायर की जगह सिलेंडर का उपयोग कर सकेंगे।

    ग्वालियर में सभी एजेंसियां खुलीं
    ग्वालियर में कलेक्टर रुचिका चौहान के आदेश पर सभी एलपीजी एजेंसियां खुलीं। एजेंसी संचालक धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कि पिछले 3-4 दिन से सॉफ्टवेयर समस्या के कारण बुकिंग नहीं हो पा रही थी। सोमवार से सभी को गैस सिलेंडर मिल रहे हैं और कोई कमी नहीं है।

  • हरदा के आईआईटीयन श्रेयांश ने 2.3 करोड़ का पैकेज ठुकराया, पहले प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर प्रदेश का नाम रोशन

    हरदा के आईआईटीयन श्रेयांश ने 2.3 करोड़ का पैकेज ठुकराया, पहले प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर प्रदेश का नाम रोशन


    हरदा । मध्यप्रदेश के हरदा जिले के आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्र श्रेयांश बड़ोदिया ने अपनी मेहनत और साहस से प्रदेश का नाम रोशन किया है। श्रेयांश ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल की। खास बात यह है कि उन्होंने सालाना 2.3 करोड़ रुपए के पैकेज वाली आईटी नौकरी छोड़कर पहली ही कोशिश में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली।

    श्रेयांश ने बताया कि नौकरी से आर्थिक सुविधा तो मिल रही थी लेकिन मन को संतुष्टि नहीं मिल रही थी। उनका मानना था कि उन्हें समाज और देश के लिए कुछ बेहतर करना चाहिए। उन्होंने कहा जब मैंने जॉब छोड़ने का फैसला किया तो मेरी स्थिति अंग्रेजी कहावत आई वास इन टू माइंड जैसी थी। एक तरफ आराम था दूसरी तरफ संतुष्टि नहीं। मैं चाहता था कि जीवन में ऐसा काम करूं जिससे समाज और देश के लिए योगदान हो।

    श्रेयांश ने वर्ष 2018 में आईआईटी मुंबई से बीटेक पूरी की और गुरुग्राम की कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य करने लगे। नौकरी के दौरान ही उन्हें सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा मिली। अगस्त 2024 में उन्होंने परिवार को सूचित करने के बाद नौकरी छोड़ दी और मुंबई में रहकर पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में जुट गए।

    श्रेयांश ने मई 2025 में प्रीलिम्स अगस्त में मेंस और जनवरी 2026 में इंटरव्यू पास किया। नौ महीने की कड़ी मेहनत और रणनीति से उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई। उन्होंने कहा कि आईटी सेक्टर में कंफर्ट जोन जरूर था लेकिन संतुष्टि नहीं। प्रशासनिक सेवा में जाकर वे अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करना चाहते थे।

    भविष्य में श्रेयांश शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए काम करना चाहते हैं। प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने और स्वास्थ्य क्षेत्र में आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर कम करने पर उनका विशेष ध्यान रहेगा।

    श्रेयांश का परिवार मुंबई में रहता है। उनके पिता जी.डी. बड़ोदिया नर्मदापुरम में जिला कोषालय अधिकारी रह चुके हैं और मेहर गढ़वाल समाज के अध्यक्ष भी रहे। 2023 में उन्होंने विधायक पद के लिए चुनाव भी लड़ा था। परिणाम घोषित होने के बाद श्रेयांश परिवार के साथ मध्यप्रदेश लौटे और अपने गृह जिले हरदा पहुंचे।

    यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम 2025 में कुल 958 उम्मीदवार क्वालिफाई हुए। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया टॉप किया भोपाल के ईशान भटनागर टॉप 5 में रहे जबकि धार जिले के पक्षल सेक्रेटरी ने 8वीं रैंक हासिल की।

  • हरदा के IIT ग्रेजुएट श्रेयांश बड़ोदिया ने 2.3 करोड़ की नौकरी छोड़ यूपीएससी में पहले प्रयास में हासिल की सफलता

    हरदा के IIT ग्रेजुएट श्रेयांश बड़ोदिया ने 2.3 करोड़ की नौकरी छोड़ यूपीएससी में पहले प्रयास में हासिल की सफलता


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के हरदा निवासी श्रेयांश बड़ोदिया ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि उन्होंने 2.3 करोड़ रुपए सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर देश और समाज के लिए खुद को समर्पित किया। श्रेयांश ने बताया कि नौकरी से आर्थिक सुविधा तो मिल रही थी, लेकिन मन को संतुष्टि नहीं मिल रही थी। वे चाहते थे कि उनका काम समाज के लिए लाभकारी हो।

    श्रेयांश ने अपनी स्थिति को इंग्लिश की कहावत “I was in two minds” से जोड़ा, क्योंकि एक तरफ जीवन आरामदायक था, वहीं दूसरी तरफ मन संतुष्ट नहीं था। उन्होंने सोचा कि भविष्य में जब अपने जीवन को देखेंगे तो महसूस हो कि उन्होंने देश और समाज के लिए कुछ किया।

    श्रेयांश ने 2018 में IIT मुंबई से बीटेक की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया। नौकरी के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा की ओर झुकाव महसूस किया। उनके कई मित्र पहले ही सिविल सेवा में थे, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली।

    अगस्त 2024 में श्रेयांश ने नौकरी छोड़कर पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में लग गए। उन्होंने मई 2025 में प्रीलिम्स, अगस्त 2025 में मेंस और जनवरी 2026 में इंटरव्यू सफलतापूर्वक पास किया। करीब नौ माह की मेहनत और फोकस के साथ उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पहले प्रयास में पास कर लिया।

    श्रेयांश का कहना है कि आईटी सेक्टर में उन्हें कंफर्ट जोन जरूर मिला था, लेकिन संतुष्टि नहीं। प्रशासनिक सेवा में जाकर वे अपनी क्षमताओं का सही उपयोग करना चाहते थे। उनका उद्देश्य शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार करना है। खासकर प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाना और स्वास्थ्य सेवा में लोगों को “आउट ऑफ पॉकेट खर्च” कम करना उनका लक्ष्य है।

    श्रेयांश का परिवार फिलहाल मुंबई में रहता है। उनके पिता जीडी बड़ोदिया नर्मदापुरम में जिला कोषालय अधिकारी रह चुके हैं और समाज में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। परिवार ने श्रेयांश के इस फैसले का पूरा समर्थन किया और परिणाम घोषित होने के बाद उनका स्वागत किया।

    UPSC 2025 में कुल 958 उम्मीदवार विभिन्न सेवाओं के लिए क्वालिफाई हुए। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया टॉप किया, जबकि भोपाल और धार से भी कई युवा टॉप 10 में शामिल हुए।

    श्रेयांश की कहानी प्रेरणादायक है क्योंकि उन्होंने आराम और आर्थिक सुविधा को त्याग कर समाज और देश के लिए चुनौतियों से भरा रास्ता चुना। यह साबित करता है कि असली सफलता केवल पैकेज और पद से नहीं, बल्कि समाज के लिए योगदान और संतुष्टि से मापी जाती है।

  • MP: हरदा में 300 स्टूडेंट्स होस्टल की दीवार फांद DM से मिलने के लिए पैदल ही निकले

    MP: हरदा में 300 स्टूडेंट्स होस्टल की दीवार फांद DM से मिलने के लिए पैदल ही निकले


    हरदा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के हरदा जिले (Harda district) में एकलव्य आवासीय विद्यालय (Eklavya Residential School) के 300 से अधिक स्टूडेंट खराब खाने और सुविधाओं से परेशान होकर शनिवार सुबह हॉस्टल की दीवार फांदकर कलेक्टर (Collector) से मिलने निकल पड़े। कड़ाके की ठंड में वे करीब 40 किलोमीटर दूर कलेक्ट्रेट की ओर पैदल ही चल दिए। जब छात्र लगभग 8 से 9 किलोमीटर पैदल चल चुके थे तब जिला प्रशासन को इसकी खबर मिली। इसके बाद जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने हाईवे पर ही छात्रों को रोका और उनकी समस्याओं को सुलझाने का भरोसा देकर उन्हें बसों से वापस स्कूल भेजा।


    डीएम ने बीच में रोका और शिकायतें सुनीं

    अधिकारियों ने बताया कि जब छात्र लगभग 8-9 किलोमीटर पैदल चल चुके थे तब प्रशासन एक्टिव हुआ और जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने सोडलपुर के पास नेशनल हाईवे पर ही उन्हें रोक लिया। उन्होंने छात्रों को उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया और उन्हें बसों के जरिए वापस स्कूल भिजवाया। स्टूडेंट का आरोप है कि स्कूल में काफी समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी है खाने की क्वालिटी बहुत खराब है और वहां साफ-सफाई की हालत भी बहुत बुरी है।


    क्या की शिकायतें?

    छात्रों का आरोप है कि स्कूल में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि वहां न तो खाना अच्छा मिलता है और न ही साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। छात्रों ने यह भी कहा कि जब वे इन समस्याओं की शिकायत करते हैं तो हॉस्टल की प्रिंसिपल उन्हें मानसिक रूप से परेशान करती हैं। एक छात्र ने पत्रकारों को बताया कि बार-बार शिकायत करने पर भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तब उन्हें मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा।


    डीएम ने दिया भरोसा

    स्टूडेंट ने जिलाधिकारी से बातचीत के दौरान प्राचार्य को हटाए जाने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने स्टूडेंट को भरोसा दिया कि खाने की गुणवत्ता जांच करने के लिए एक पालक समिति बनाई जाएगी और छात्रों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक ‘संपर्क समिति’ भी गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राचार्य के खिलाफ भी छात्रों की शिकायतें सामने आई हैं। बच्चों की परेशानी को देखते हुए मैं स्वयं मौके पर पहुंचा।


    मामले की होगी जांच

    जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने कहा कि छात्रों को समझाकर वापस भेज दिया गया है। पूरे मामले की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, कांग्रेस के स्थानीय विधायक अभिजीत शाह ने हास्टल में बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें रसोई में रखी खाद्य सामग्रियों में कई खामियां मिलीं। जब पीने के पानी की टंकी की जांच की गई तो उसके अंदर पेड़ की जड़ें मिलीं। उन्होंने इसका एक वीडियो भी साझा किया। बता दें कि मध्य प्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

  • आधी रात का विद्रोह: हरदा एकलव्य विद्यालय के 400 बच्चों का पैदल मार्च, अधीक्षिका पर मानसिक प्रताड़ना और बदइंतजामी के आरोप

    आधी रात का विद्रोह: हरदा एकलव्य विद्यालय के 400 बच्चों का पैदल मार्च, अधीक्षिका पर मानसिक प्रताड़ना और बदइंतजामी के आरोप


    हरदा । हरदा जिले के रहटगांव तहसील स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में उस समय सनसनी फैल गई, जब सैकड़ों छात्र-छात्राएं आधी रात को हॉस्टल की दीवार फांदकर पैदल मार्च पर निकल पड़े। यह घटना न सिर्फ प्रशासन के लिए चौंकाने वाली थी, बल्कि आवासीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गई। बच्चों का आरोप है कि विद्यालय में लंबे समय से उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी, भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब थी और शिकायत करने पर डराया-धमकाया जाता था।बताया जा रहा है कि विद्यालय में अध्ययनरत करीब 300 से 400 छात्र-छात्राएं तड़के करीब चार बजेअचानक एकजुट हुए और हॉस्टल परिसर की दीवार फांदकर जिला मुख्यालय हरदा की ओर पैदल निकल पड़े। बच्चों का कहना था कि उन्होंने कई बार अधीक्षिका सोनिया आनंद और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से अपनी समस्याएं साझा कीं, लेकिन हर बार उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया गया। मजबूर होकर बच्चों ने यह अनोखा और साहसिक कदम उठाया।
    पैदल मार्च के दौरान बच्चों में गुस्सा और पीड़ा साफ नजर आ रही थी। वे प्राचार्य हाय-हाय मानसिक प्रताड़ना बंद करोऔर ऐसा भोजन नहीं चलेगा जैसे नारे लगाते हुए अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। करीब दस किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद ग्राम सोडलपुर के पास फोरलेन मार्ग पर जिला प्रशासन को इस असाधारण घटना की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और जिला कलेक्टर सिद्धार्थ जैन स्वयं मौके पर पहुंचे। कलेक्टर के पहुंचते ही सभी बच्चे सड़क किनारे बैठ गए और खुलकर अपनी समस्याएं बताईं। बच्चों ने बताया कि उन्हें समय पर पौष्टिक भोजन नहीं दिया जाता, साफ-सफाई की हालत खराब है और अनुशासन के नाम पर अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने वालों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, जिससे वे भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
    कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने बच्चों को शांत करते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने मौके पर ही पालकों की एक निगरानी समिति गठित करने की घोषणा की, जो विद्यालय की व्यवस्थाओं, भोजन और अनुशासन पर नजर रखेगी। कलेक्टर के आश्वासन के बाद बच्चों ने अपना विरोध समाप्त किया। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा बसों की व्यवस्था कर सभी बच्चों को सुरक्षित वापस हॉस्टल पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एकलव्य आवासीय विद्यालयों की कार्यप्रणाली और बच्चों के अधिकारों को लेकर एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आई है, जिस पर समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।