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  • लोकसभा से उपराष्ट्रपति चुनाव तक आजमा चुके हैं किस्मत, अब मध्यप्रदेश से राज्यसभा पहुंचना चाहते हैं कांते सायन्ना

    लोकसभा से उपराष्ट्रपति चुनाव तक आजमा चुके हैं किस्मत, अब मध्यप्रदेश से राज्यसभा पहुंचना चाहते हैं कांते सायन्ना


    भोपाल । मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए होने वाला उपचुनाव इस बार दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी उम्मीदवार हैं। वहीं हैदराबाद के कांते सायन्ना ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। खास बात यह है कि सायन्ना कोई नए चुनावी चेहरे नहीं हैं। वे अब तक लोकसभा विधानसभा विधान परिषद और राज्यसभा के चुनावों में कई बार अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। यहां तक कि वे उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी दावेदारी पेश कर चुके हैं। अब उनकी नजर मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट पर है।

    तेलंगाना के हैदराबाद से भोपाल पहुंचे कांते सायन्ना ने विधानसभा से नामांकन फॉर्म लिया है। उनका कहना है कि वे चुनाव लड़ने के लिए जरूरी दस्तावेज और शपथ पत्र लेकर आए हैं। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती नामांकन के लिए जरूरी 10 विधायकों के प्रस्तावकों के हस्ताक्षर जुटाना है। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव लड़ने के लिए प्रस्तावकों का समर्थन अनिवार्य है। सायन्ना के मुताबिक मध्यप्रदेश के कुछ विधायक उनके समर्थन में हस्ताक्षर करने से हिचक रहे हैं। उनका आरोप है कि राजनीतिक दलों के नेताओं को डर है कि उनके समर्थन में हस्ताक्षर करने से उन्हें राजनीतिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    सायन्ना ने उम्मीद जताई है कि सोमवार तक वे जरूरी हस्ताक्षर जुटा लेंगे और नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि कुछ विधायकों ने समर्थन देने की बात कही है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे निर्धारित समय तक सभी 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर जुटा पाएंगे या नहीं। ऐसे में उनकी उम्मीदवारी का भविष्य विधायकों के समर्थन पर निर्भर करेगा।

    कांते सायन्ना ने अपने चुनावी सफर के बारे में बताते हुए कहा कि वे अब तक पांच बार लोकसभा और आठ बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा छह बार विधान परिषद के चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। राज्यसभा के लिए वे 10 से 12 बार प्रयास करने का दावा करते हैं। उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी उन्होंने अपनी दावेदारी पेश की थी। उनका कहना है कि वे किसी एक राजनीतिक दल से बंधे हुए नहीं हैं और चुनाव लड़ने का खर्च भी खुद उठाते हैं।

    यह पहला मौका नहीं है जब सायन्ना को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इसी साल मार्च में तेलंगाना की दो राज्यसभा सीटों के चुनाव के दौरान भी उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। उस समय भी प्रस्तावकों के जरूरी हस्ताक्षर नहीं मिलने के कारण उनकी उम्मीदवारी पर संकट खड़ा हो गया था। अब मध्यप्रदेश में भी उनके सामने वैसी ही स्थिति बनती नजर आ रही है।

    सायन्ना ने 2018 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस चुनाव में वे तीसरे स्थान पर रहे थे। उनके मुताबिक उस चुनाव में केसीआर पहले और वंटेरू प्रताप रेड्डी दूसरे स्थान पर थे। उन्होंने बताया कि वे अलग-अलग राज्यों में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और अपने स्तर पर प्रचार करते हैं।

    अपनी राजनीतिक विचारधारा को लेकर सायन्ना का कहना है कि देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। उनके मुताबिक राजनीतिक दलों के बी-फॉर्म और पार्टी आधारित व्यवस्था का प्रभाव बहुत ज्यादा है। लोकतंत्र में जनता का वोट सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए। वे ऐसी स्वतंत्र राजनीतिक व्यवस्था की वकालत करते हैं जिसमें उम्मीदवारों की पहचान केवल राजनीतिक दलों के आधार पर न हो। उनका दावा है कि इस विषय पर उन्होंने काफी अध्ययन और लेखन भी किया है। अब देखना होगा कि हरदीप सिंह पुरी के सामने चुनाव लड़ने की उनकी कोशिश कितनी आगे बढ़ पाती है और क्या वे जरूरी विधायकों का समर्थन जुटाकर अपनी उम्मीदवारी कायम रख पाते हैं।

  • हरदीप पुरी ने भरा राज्यसभा का पर्चा, नामांकन से पहले कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेने से गरमाई सियासत

    हरदीप पुरी ने भरा राज्यसभा का पर्चा, नामांकन से पहले कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेने से गरमाई सियासत


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को राज्यसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज रही। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भोपाल में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। वह सुबह करीब 11:30 बजे विधानसभा भवन पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नामांकन से पहले हरदीप सिंह पुरी ने गुरुद्वारे में मत्था टेका और करुणा धाम आश्रम पहुंचकर संत सुदेश शांडिल्य महाराज से आशीर्वाद लिया। वहीं दूसरी ओर नामांकन के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने युवा कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।

    भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किया था। यह सीट केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 13 अक्टूबर को अपना इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। अब इस रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने इस चुनाव के लिए पुरी को अपना प्रत्याशी बनाया और उन्होंने शनिवार को औपचारिक रूप से नामांकन दाखिल कर दिया।

    नामांकन की तैयारियां पहले से शुरू हो गई थीं। शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के लिए प्रस्तावक बनने पर सहमति दी थी। उन्होंने भाजपा प्रदेश कार्यालय में इससे संबंधित सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद शनिवार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुरी ने विधानसभा भवन पहुंचकर अपना नामांकन जमा किया।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तथा राजेंद्र शुक्ल मौजूद रहे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय प्रहलाद पटेल और नरेंद्र शिवाजी पटेल सहित कई विधायक और पार्टी पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। विधायक सुरेंद्र पटवा समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी में नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई।

    नामांकन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय चुनाव समिति के फैसले के बाद हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि दिवाली से पहले प्रदेश को पुरी के रूप में एक सांसद का उपहार मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पुरी के संसदीय अनुभव और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके योगदान का भी उल्लेख किया।

    सीएम ने कहा कि हरदीप सिंह पुरी ने मध्य प्रदेश को बीना रिफाइनरी नागरिक उड्डयन स्मार्ट सिटी मेट्रो रेल मेट्रोपॉलिटन सिटी और स्वच्छता अभियान जैसे क्षेत्रों में कई सौगातें दी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी पुरी प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    दूसरी ओर नामांकन के दौरान राजनीतिक विरोध की आशंका भी बनी रही। पुलिस ने युवा कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में लिया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में हिरासत में लिए गए नेताओं की संख्या और कार्रवाई के विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। इस घटनाक्रम ने नामांकन के राजनीतिक माहौल को और चर्चा में ला दिया।

    खास बात यह रही कि नामांकन दाखिल करने से पहले और बाद में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया से बातचीत नहीं की। मीडिया के सामने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी का पक्ष रखा। अब राज्यसभा उपचुनाव की आगे की प्रक्रिया और चुनावी नतीजे पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

  • भोपाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, आज राज्यसभा के लिए भरेंगे पर्चा, CM मोहन यादव समेत भाजपा के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद

    भोपाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, आज राज्यसभा के लिए भरेंगे पर्चा, CM मोहन यादव समेत भाजपा के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी शनिवार को भोपाल में राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। पुरी शुक्रवार देर रात भोपाल पहुंच गए थे। उनके नामांकन को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।

    भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी के नाम पर मुहर लगाई थी। इसके बाद से ही उनके नामांकन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। शनिवार सुबह वे विधानसभा पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। पार्टी की ओर से इस दौरान वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत और एकजुटता प्रदर्शित करने की भी तैयारी है। केंद्रीय मंत्री के नामांकन को राज्यसभा उपचुनाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    दरअसल मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य डॉ. एल. मुरुगन ने 13 अक्टूबर को अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा की यह सीट खाली हो गई और अब इसी सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने इस चुनाव के लिए हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। पुरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं और उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने के फैसले को पार्टी की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    नामांकन की प्रक्रिया में भाजपा ने अपने स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेश सरकार में मंत्री कृष्णा गौर हरदीप सिंह पुरी के नामांकन में प्रस्तावक बनेंगी। उन्होंने शुक्रवार को भाजपा कार्यालय में प्रस्तावक के रूप में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इससे नामांकन की औपचारिक तैयारियों को आगे बढ़ाया गया। शनिवार को विधानसभा में नामांकन दाखिल होने के साथ ही चुनावी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा।

    इस उपचुनाव में विधानसभा का संख्या बल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। हालांकि कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। ऐसे में प्रभावी संख्या बल के आधार पर चुनावी गणित का आकलन किया जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा निर्धारित नियमों के अनुसार तय होगा। विधायकों की वास्तविक संख्या और मतदान की स्थिति चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

    बीना से विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बनी हुई है। वे खुद को कांग्रेस में बताती हैं लेकिन भाजपा के कार्यक्रमों में भी उनकी मौजूदगी देखी गई है। दलबदल से जुड़े मामले के कारण उनकी स्थिति को लेकर राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों दलों के लिए विधायकों के समर्थन का सही आकलन करना अहम होगा।

    नामांकन से पहले हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को भोपाल स्थित करुणा धाम आश्रम पहुंचकर पीठाधीश्वर गुरुदेव सुदेश शांडिल्य महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और विधायक भगवानदास सबनानी सहित पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और आगे होने वाले राज्यसभा उपचुनाव पर टिकी हैं।

  • E20 फ्यूल को लेकर फैली गलत जानकारी पर हरदीप पुरी का जवाब, बोले- 20% से ज्यादा मिश्रण की योजना नहीं

    E20 फ्यूल को लेकर फैली गलत जानकारी पर हरदीप पुरी का जवाब, बोले- 20% से ज्यादा मिश्रण की योजना नहीं


    नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल अपनी नीति में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मौजूदा 20 प्रतिशत सीमा को बढ़ाने की अभी कोई योजना नहीं है। उन्होंने E20 ईंधन को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारी पर भी चिंता जताई और कहा कि सरकार आयातित कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है।

    हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को दक्षिण गोवा में आयोजित 29वें ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान यह बात कही। उनसे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम किया है और फिलहाल इसे 20 प्रतिशत से अधिक करने की योजना नहीं है। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में E20 नीति में किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

    E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य इसके इस्तेमाल के जरिए विदेशों से कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च को कम करना और देश में वैकल्पिक ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा की बचत से जोड़कर देखा जाता है।

    पुरी ने दावा किया कि E20 ईंधन को लेकर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह ईंधन वाहनों के अनुकूल है। हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि वर्ष 2003 से पहले निर्मित कुछ पुराने वाहनों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से संबंधित समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए वाहन की उम्र और निर्माता की ओर से निर्धारित ईंधन संबंधी दिशा निर्देशों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    E20 के इस्तेमाल से इंजन को नुकसान पहुंचने की शिकायतों पर मंत्री ने कहा कि ईंधन के परिवहन और भंडारण से जुड़ी समस्याएं भी चर्चा का विषय रही हैं। उन्होंने बताया कि मिश्रित ईंधन के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले टैंकरों का उपयोग अन्य कामों में भी किया जाता था। इंजन खराब होने के दावों पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बड़े पैमाने पर ऐसी समस्या होती तो इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता। हालांकि वास्तविक प्रभाव वाहन के मॉडल उसकी तकनीकी अनुकूलता और रखरखाव जैसी बातों पर निर्भर कर सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने E20 नीति से देश को 1.60 लाख करोड़ रुपये की बचत होने का दावा भी किया। उनके मुताबिक इसमें से 1.40 लाख करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन से कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिला है और किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने का अवसर मिला है। सरकार का तर्क है कि जैव ईंधन की मांग बढ़ने से कृषि आधारित उद्योगों को बाजार मिल सकता है।

    इसी बीच सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत E100 यानी लगभग पूरी तरह एथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। ऐसे वाहन अलग-अलग अनुपात वाले एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि E100 वाहनों की अनुमति और सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की सीमा दो अलग-अलग नीतिगत विषय हैं।

    फिलहाल सरकार ने E20 से आगे मिश्रण बढ़ाने की योजना से इनकार किया है। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने वाहन की पुस्तिका में दिए गए ईंधन संबंधी निर्देशों का पालन करें और किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में अधिकृत सर्विस सेंटर से सलाह लें।

  • महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई पहली डीपवॉटर ड्रिलिंग भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

    महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई पहली डीपवॉटर ड्रिलिंग भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम


    नई दिल्ली। भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए महानदी ऑफशोर बेसिन में पहले अप्रेजल वेल की ड्रिलिंग शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक नए युग की शुरुआत बताया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह उपलब्धि पिछले एक दशक में किए गए व्यापक नीतिगत सुधारों और ऊर्जा क्षेत्र में अपनाई गई नई रणनीतियों का परिणाम है। उनका कहना है कि इस पहल से न केवल नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज को गति मिलेगी बल्कि भारत की आयातित ऊर्जा पर निर्भरता भी धीरे धीरे कम होगी।

    महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू किया गया एमएन डीडब्ल्यूएन18 1 एचडी अप्रेजल वेल चार प्रस्तावित डीपवॉटर कुओं में पहला है। इन सभी कुओं के जरिए देश के सबसे संभावनाशील अपतटीय क्षेत्रों में मौजूद तेल और गैस संसाधनों का चरणबद्ध आकलन किया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना में अत्याधुनिक डीपवॉटर ड्रिलिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिससे समुद्र की गहराई में छिपे संभावित हाइड्रोकार्बन भंडारों की पहचान और उनका दोहन आसान हो सकेगा।

    हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में सरकार ने एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन क्षेत्र में कई ऐतिहासिक सुधार लागू किए हैं जिनसे इस क्षेत्र की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई ड्रिलिंग केवल समुद्र की तलहटी में खुदाई भर नहीं है बल्कि यह भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत नींव रखने का कार्य है। उनके अनुसार ड्रिलिंग का प्रत्येक मीटर देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाएगा और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    मंत्री ने इस अवसर पर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन ओएनजीसी ऑयल इंडिया लिमिटेड डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स तकनीकी साझेदारों और इस परियोजना से जुड़े सभी विशेषज्ञों को बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई यह पहल भविष्य में भारत के अपतटीय तेल और गैस अन्वेषण को नई गति देगी तथा घरेलू उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।

    हरदीप पुरी ने सरकार द्वारा लागू किए गए प्रमुख सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी लागू होने के बाद ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेश दोनों बढ़े हैं। इसके साथ ही नामांकन आधारित पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम लागू किया गया जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को अधिक अवसर मिले। सरकार ने पारदर्शी रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल अपनाने के साथ पहले प्रतिबंधित रहे लगभग 99 प्रतिशत ऑफशोर नो गो क्षेत्रों को भी अन्वेषण के लिए खोल दिया है। इन कदमों से ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा काफी मजबूत हुआ है।

    मंत्री के अनुसार वर्ष 2014 के बाद देश के कुल सक्रिय एक्सप्लोरेशन क्षेत्र का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया जा चुका है। ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम के तहत अब तक लगभग 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 172 एक्सप्लोरेशन ब्लॉक आवंटित किए गए हैं जिनमें 4.3 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता प्राप्त हुई है। यह दर्शाता है कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

    सरकार के आंकड़ों के अनुसार केवल वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही देश में लगभग 674 वेल की ड्रिलिंग की गई। इसी अवधि में पांच नई हाइड्रोकार्बन खोजें हुईं और सात खोजों का व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू किया गया। इन उपलब्धियों के आधार पर सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में घरेलू तेल और गैस उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में स्वदेशी संसाधनों की भूमिका और मजबूत होगी।

  • भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कोई कमी नहीं होगी : हरदीप सिंह पुरी

    भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कोई कमी नहीं होगी : हरदीप सिंह पुरी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को भरोसा दिलाया कि भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम पदार्थों (पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी) की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

    केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में ये भरोसा दिलाया कि भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वैश्विक तनाव के बावजूद निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया कि भारत में घरेलू कंज्यूमर्स के लिए एनर्जी की कोई कमी नहीं है और घबराने की कोई बात नहीं है। पेट्रोलियम मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का ऊर्जा आयात अलग-अलग सोर्स और रास्तों से लगातार हो रहा है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह पक्का करने के लिए कई कदम उठाए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की 100 फीसदी सप्लाई हो, और पश्चिम एशिया के मौजदा हालात के बावजूद दूसरी इंडस्ट्रीज़ को उनकी सप्लाई का 70 से 80 फीसदी मिलता रहे। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि सरकार देश के घरेलू उपभोक्तओं को सस्ती एनर्जी की बिना रुकावट सप्लाई पक्का करने के लिए कमिटेड है।

    हरदीप सिंह पुरी ने जारी बयान में कहा कि आज मीडिया के लोगों के साथ इनफॉर्मल बातचीत में हमने इस बात पर चर्चा की कि भारत में एनर्जी का इंपोर्ट अलग-अलग सोर्स और रास्तों से लगातार हो रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू कंज्यूमर्स के लिए कोई कमी नहीं है और घबराने की कोई बात नहीं है।

  • शर्म की असली वजह क्या? एपस्टीन फाइल्स और अडानी केस को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा वार

    शर्म की असली वजह क्या? एपस्टीन फाइल्स और अडानी केस को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा वार


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए सियासी बहस को नई धार दे दी है। एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अर्धनग्न प्रदर्शन को प्रधानमंत्री द्वारा शर्मनाक बताए जाने पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया और कहा कि असली शर्म प्रदर्शन नहीं बल्कि उन मामलों पर सरकार की चुप्पी है जिनमें गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री उनके एक मंत्री और एक करीबी सहयोगी का नाम सामने आना चिंता का विषय है और यही वास्तव में शर्म की बात है।

    राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा मोदी जी आप शर्म की बात करते हो? शर्म की बात यह है कि एपस्टीन फाइल्स में आपका आपके मंत्री और आपके मित्र का नाम साथ में आ रहा है। ऐसे घिनौने अपराधी के साथ नाम जुड़ना ही शर्मनाक है। उन्होंने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इस समझौते से देश के किसानों टेक्सटाइल उद्योग और डेटा सुरक्षा को नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक सरकार ने देशहित से समझौता किया है और इन मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    राहुल जिस संदर्भ का जिक्र कर रहे हैं उसमें केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी चर्चा में आया था। हालांकि पुरी ने स्पष्ट किया है कि उनके संबंध केवल आधिकारिक और कार्यगत थे। इसी प्रकरण में प्रधानमंत्री मोदी के एक विदेशी दौरे का उल्लेख भी सामने आने की बात कही गई थी जिस पर संसद में पहले भी हंगामा हो चुका है। अब राहुल गांधी ने उसी मुद्दे को फिर से उठाकर सरकार पर नैतिक जवाबदेही का दबाव बनाने की कोशिश की है।

    इसके साथ ही राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी पर अमेरिका में चल रहे मामलों को लेकर भी प्रधानमंत्री को घेरा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक कारोबारी तक सीमित नहीं है बल्कि सत्ता और पूंजी के रिश्तों से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 महीनों से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई जो अपने आप में कई संदेह पैदा करती है। राहुल ने अनिल अंबानी का नाम लेते हुए भी सरकार और बड़े उद्योगपतियों की नजदीकियों पर सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी तथा देशहित के मुद्दों पर आवाज उठाती रहेगी।

    यह पूरा विवाद नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट से जुड़ा है जहां कांग्रेस यूथ कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री मोदी ने मेरठ की सभा में कड़ी टिप्पणी की थी। उन्होंने इसे कांग्रेस की गंदी और शर्म वाली राजनीति बताते हुए कहा था कि देश की सबसे पुरानी पार्टी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब कर रही है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया।

    कांग्रेस के प्रदर्शन की आलोचना केवल सत्तापक्ष तक सीमित नहीं रही। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस तरह की हरकत से देश की छवि धूमिल होती है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए। इसके बावजूद कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं का समर्थन किया और इसे लोकतांत्रिक विरोध बताया।

    सियासत के इस तीखे दौर में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो चुका है। एक ओर प्रधानमंत्री कांग्रेस की राजनीति को शर्मनाक बता रहे हैं तो दूसरी ओर राहुल गांधी सरकार की नीतियों अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कारोबारी गठजोड़ पर सवाल उठाकर जवाब मांग रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और चुनावी मंचों पर और अधिक गूंजने की संभावना है।

  • वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर

    वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर


    नई दिल्ली।
    ऐतिहासिक व्यापार समझौता भारत-ईयू एफटीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 का उद्घाटन करते हुए वैश्विक मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक जीत की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को करीब लाएगा, बल्कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 25% हिस्सा भी कवर करेगा। पीएम ने कहा कि यह डील भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को विश्व स्तर पर मजबूती देगी और सर्विस सेक्टर के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। साथ ही, यह पिछले साल ब्रिटेन के साथ हुए समझौते को भी और अधिक शक्ति प्रदान करेगा।

    ऊर्जा अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उदय पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आज भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र की एक महाशक्ति बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति दुनिया के लिए मिसाल है। कार्यक्रम में मौजूद संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों और वैश्विक विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में हो रहे निरंतर सुधारों ने निवेश के माहौल को दुनिया में सबसे बेहतर बना दिया है।

    इंडिया एनर्जी वीक 2026: क्या है खास? गोवा में 30 जनवरी तक चलने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम ऊर्जा जगत का सबसे बड़ा आयोजन है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और गोवा के सीएम प्रमोद सावंत की मौजूदगी में शुरू हुए इस सम्मेलन में 75,000 से अधिक एनर्जी प्रोफेशनल्स हिस्सा ले रहे हैं। 700 से अधिक प्रदर्शक और 550 विशेषज्ञ वक्ता शामिल हैं। इसमें तेल, गैस के साथ-साथ AI, डिजिटलाइजेशन और नेट-जीरो पाथवे जैसे 11 थीमेटिक जोन बनाए गए हैं। 12 से ज्यादा देशों के पवेलियन और 120 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन भारत के उस विजन को दर्शाता है जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण नेट-जीरो एक साथ चलते हैं। इस समझौते और समिट से भारत में करोड़ों के विदेशी निवेश और हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।