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  • अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की पूछताछ तेज, पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से तीन घंटे तक सवाल-जवाब, उर्मिला सनावर पर दिया बयान

    अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की पूछताछ तेज, पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से तीन घंटे तक सवाल-जवाब, उर्मिला सनावर पर दिया बयान

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। अधिकारियों ने उनसे मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए। पूछताछ हरिद्वार के भेल क्षेत्र स्थित शिवालिक गेस्ट हाउस में हुई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई की टीम और पूर्व विधायक वहां से रवाना हो गए। इस पूछताछ के बाद मामले की जांच और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

    पूछताछ के बाद सुरेश राठौड़ ने बाहर आकर अपने बयान में कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। उनके मुताबिक, अधिकारियों ने जो भी सवाल पूछे, उनसे संबंधित बातें उन्होंने सत्यता के साथ बताईं। उन्होंने कहा, “मैंने सीबीआई की जांच में पूरा सहयोग किया है। न इससे कम, न इससे ज्यादा।” पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि वह आगे भी जांच में सहयोग करते रहेंगे।

    वायरल ऑडियो पर सवाल, उर्मिला सनावर से अनभिज्ञता जताई
    पूछताछ के बाद पत्रकारों ने सुरेश राठौड़ से कथित वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग और अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जुड़े संबंधों को लेकर सवाल किए। इस पर पूर्व विधायक ने उर्मिला सनावर के बारे में जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते कि उर्मिला सनावर कौन हैं और उनके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वायरल ऑडियो को लेकर उठे विवाद के संदर्भ में यह सवाल अहम माना जा रहा है, हालांकि पूछताछ में अधिकारियों ने किन-किन विशिष्ट बिंदुओं पर सवाल किए, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।

    अंकिता के परिजनों ने की थी कार्रवाई की मांग

    पिछले कुछ दिनों में अंकिता भंडारी मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था और सीबीआई मुख्यालय जाकर वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। परिजनों ने मामले में जल्द और कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई थी। परिवार की ओर से न्याय की मांग लगातार चर्चा में रही है। इसी बीच सीबीआई की ओर से पूर्व विधायक से पूछताछ किए जाने की घटना जांच की आगे की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के बाद बढ़ा था विवाद
    इससे पहले सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर से जुड़ी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। इस रिकॉर्डिंग को लेकर अलग-अलग सवाल उठे और मामले ने राजनीतिक चर्चा का रूप भी लिया। हालांकि, किसी कथित रिकॉर्डिंग में कही गई बातों और उनकी सत्यता को जांच के निष्कर्ष के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। इसी कारण इस प्रकरण में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित लोगों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    सीबीआई जांच में किन पहलुओं पर नजर?

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीबीआई अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। वायरल ऑडियो से जुड़े सवाल भी इस मामले की चर्चा का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, पूर्व विधायक से पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने किन विशेष जानकारियों की पुष्टि करने की कोशिश की और इस पूछताछ से जांच को क्या निष्कर्ष मिला, इसका आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

    फिलहाल सुरेश राठौड़ ने जांच में सहयोग करने की बात कही है और उर्मिला सनावर को लेकर जानकारी होने से इनकार किया है। सीबीआई की पूछताछ को मामले की जांच की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। आगे की कार्रवाई और जांच से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस घटनाक्रम के व्यापक पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।

  • गंगा स्नान के दो वायरल वीडियो में दिखी समान गतिविधियां, महिला के अलग रूप से AI छेड़छाड़ का शक गहराया

    गंगा स्नान के दो वायरल वीडियो में दिखी समान गतिविधियां, महिला के अलग रूप से AI छेड़छाड़ का शक गहराया

    नई दिल्ली । गंगा स्नान से जुड़े दो वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। दोनों वीडियो में एक महिला गंगा में स्नान करती दिखाई दे रही है, लेकिन महिला के पहनावे और दृश्य में स्पष्ट अंतर नजर आता है। एक वीडियो में महिला बेहद कम कपड़ों में दिखाई दे रही है, जबकि दूसरे वीडियो में वह सलवार सूट पहने हुए गंगा स्नान करती नजर आती है। दोनों वीडियो सामने आने के बाद इनकी वास्तविकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    वायरल वीडियो की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों में महिला के बाद एक युवक गंगा में स्नान करने के लिए जाता दिखाई देता है। इसके बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति भी गंगा की ओर जाता नजर आता है। घटनाओं और गतिविधियों का यह क्रम दोनों वीडियो में काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। महिला के दृश्य में अंतर होने के कारण अब वीडियो के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है।

    पहले वीडियो में महिला गंगा में स्नान करती और डुबकी लगाती दिखाई देती है। इसी दौरान एक युवक भी गंगा स्नान के लिए आगे बढ़ता है। उसके बाद बुजुर्ग व्यक्ति को भी गंगा की ओर जाते हुए दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अलग-अलग दावों के साथ साझा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था, इसे किस स्थान पर बनाया गया और इसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान क्या है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

    इसके बाद सामने आए दूसरे वीडियो में महिला पूरे कपड़ों में सलवार सूट पहने हुए दिखाई देती है। इस वीडियो में भी महिला के स्नान के बाद युवक और बुजुर्ग के गंगा की ओर जाने की गतिविधियां पहले वीडियो से मिलती-जुलती नजर आती हैं। यही समानता दोनों वीडियो की सत्यता को लेकर चर्चा का प्रमुख कारण बनी हुई है।

    दोनों वीडियो में महिला के दृश्य में अंतर और बाकी गतिविधियों की समानता को देखते हुए इनके AI की मदद से तैयार किए जाने या डिजिटल तरीके से बदले जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो वास्तव में AI से बनाए गए हैं या इनमें किसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ की गई है। इसलिए फिलहाल इसे केवल आशंका के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    वीडियो के वायरल होने के बाद श्रीगंगा सभा की ओर से भी चिंता व्यक्त की गई है। संस्था के अध्यक्ष और उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री नितिन गौतम ने कहा कि उन्होंने भी सोशल मीडिया पर ये वीडियो देखे हैं। उनका कहना है कि यदि AI के जरिए महिलाओं के चित्र या वीडियो को इस तरह गंगा के बीच दिखाया जा रहा है तो यह निंदनीय है।

    नितिन गौतम ने ऐसे वीडियो को तीर्थ और महिलाओं को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए शासन-प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन के तहत भी मामला दर्ज किए जाने की मांग रखी।

    उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के कारण इस तरह की सामग्री तैयार करना आसान हो गया है और फिर उसे सोशल मीडिया पर फैलाया जा सकता है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में कार्रवाई जरूरी है।

    फिलहाल दोनों वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इनके रिकॉर्ड होने की तारीख, वास्तविक स्थान और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान भी स्पष्ट नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को सत्य मानने से पहले आधिकारिक या तकनीकी जांच का इंतजार करना जरूरी है। वीडियो में दिखाई देने वाली समान गतिविधियां AI से छेड़छाड़ की आशंका जरूर पैदा करती हैं, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • रामदेव और कंगना रनौत के बीच बढ़ी जुबानी जंग, योगगुरु ने विवाद बढ़ाने से इनकार करते हुए साधा तीखा निशाना

    रामदेव और कंगना रनौत के बीच बढ़ी जुबानी जंग, योगगुरु ने विवाद बढ़ाने से इनकार करते हुए साधा तीखा निशाना

    नई दिल्ली । योगगुरु रामदेव और बीजेपी सांसद कंगना रनौत के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रही जुबानी जंग रविवार को एक बार फिर चर्चा में आ गई। कंगना की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने विवाद को आगे बढ़ाने से इनकार किया, लेकिन उनके बयान में कंगना पर तीखा तंज भी नजर आया। हरिद्वार में जब उनसे कंगना की टिप्पणी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते जिन्हें वह ओछा मानते हैं।

    दोनों के बीच विवाद की शुरुआत कंगना रनौत के Gen-Z को लेकर दिए गए बयान से हुई थी। कंगना ने नई पीढ़ी के लिए ‘गटर जनरेशन’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था। उनके इस बयान पर रामदेव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि युवाओं को इस तरह संबोधित करना उचित नहीं है और ऐसी सोच युवाओं के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है।

    रामदेव की टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने भी पलटवार किया था। उन्होंने रामदेव पर तंज कसते हुए अपनी प्रतिक्रिया में निजी और तीखे अंदाज का इस्तेमाल किया। इसके बाद दोनों के बीच बयानबाजी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

    रविवार को जब रामदेव से कंगना की ताजा टिप्पणी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर उनका नाम लेने से बचते हुए कहा कि वह विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कंगना के लिए ओछे लोगों वाला बयान दिया। रामदेव ने अपने सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश उनके काम और योगदान से परिचित है।

    इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की टिप्पणियां सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मामला किसी औपचारिक राजनीतिक टकराव के बजाय व्यक्तिगत बयानबाजी से जुड़ा दिखाई दे रहा है, लेकिन कंगना बीजेपी की सांसद होने के कारण उनके बयानों और उनसे जुड़े विवादों को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाता है।

    रामदेव ने इसी दौरान एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को संतों का समर्थन मिला है और इससे चुनावी प्रक्रिया को लेकर होने वाली बार-बार की गतिविधियों को कम करने में मदद मिल सकती है। उनका कहना था कि लगातार चुनावी गतिविधियों के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं और एक साथ चुनाव कराने से व्यवस्था में स्थिरता आ सकती है।

    योगगुरु ने शिक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया और कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है। उनके अनुसार, चुनाव सुधारों के जरिए देश में विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

    रामदेव ने सामाजिक सम्मान और संविधान से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों के अपमान को संविधान के खिलाफ माना जाता है, उसी तरह ब्राह्मणों के अपमान को लेकर भी समान दृष्टिकोण होना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों, मरीजों, सैनिकों और किसानों समेत विभिन्न वर्गों के साथ होने वाले अन्याय का उल्लेख करते हुए समान सम्मान और अधिकार की बात कही। उनका कहना था कि किसी भी समुदाय या वर्ग के अपमान को लेकर समान संवेदनशीलता जरूरी है।

    फिलहाल कंगना और रामदेव के बीच विवाद का केंद्र Gen-Z को लेकर हुई बयानबाजी है। रामदेव ने इसे आगे बढ़ाने से बचने की बात कही है, लेकिन उनकी ताजा टिप्पणी के बाद दोनों के बीच चल रहा यह विवाद एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।

  • हरिद्वार के जंगलों में छिपा कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर, जहां शिव बारात और रहस्यमयी पेड़ से जुड़ी है अनोखी मान्यता

    हरिद्वार के जंगलों में छिपा कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर, जहां शिव बारात और रहस्यमयी पेड़ से जुड़ी है अनोखी मान्यता

    नई दिल्ली ।हरिद्वार के आसपास धार्मिक आस्था से जुड़े कई ऐसे स्थल मौजूद हैं, जिनसे पौराणिक कथाएं और स्थानीय लोकमान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इन्हीं में कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर का नाम भी लिया जाता है। श्यामपुर और सज्जनपुर पीली क्षेत्र के पास राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के साथ अपनी रहस्यमयी लोककथाओं के लिए भी जाना जाता है।

    स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर में मौजूद शिवलिंग किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया, बल्कि यह स्वयं जमीन से प्रकट हुआ था। श्रद्धालुओं के बीच इसे स्वयंभू शिवलिंग माना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी आस्था के चलते आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर से भी लोग मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रमुख कथा भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से संबंधित है। लोककथा के अनुसार जब भगवान शिव कैलाश से माता पार्वती से विवाह करने के लिए बारात लेकर निकले थे, तब उनकी बारात इस स्थान पर रुकी थी। शिव की बारात में देवताओं के साथ उनके गण और विभिन्न अलौकिक शक्तियों के शामिल होने की मान्यता बताई जाती है।

    कहा जाता है कि शिव बारात के दौरान उनके गणों ने यहां भांग तैयार करने के लिए कुंडी और सोटे का इस्तेमाल किया था। इसी लोकविश्वास के आधार पर इस स्थान का नाम कुंडी सोटेश्वर पड़ने की कथा प्रचलित है। स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता आज भी सुनाई जाती है और मंदिर की पहचान से इसका विशेष संबंध माना जाता है।

    मंदिर के आसपास मौजूद एक पुराने पेड़ को लेकर भी एक अलग लोककथा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार शिव की बारात में शामिल कुछ भूत-प्रेत और गण यहां रुकने के दौरान बारात से अलग हो गए थे। कहा जाता है कि भांग के नशे में मस्त रहने के कारण वे आगे नहीं जा सके और बाद में इसी पेड़ के आसपास उनका ठिकाना बन गया।

    इसी मान्यता के कारण स्थानीय लोग इस पेड़ को सामान्य पेड़ से अलग धार्मिक और रहस्यमयी नजरिए से देखते हैं। कई लोग इसके बेहद करीब जाने से भी बचते हैं। हालांकि इन कथाओं का आधार धार्मिक लोकविश्वास है और इनके संबंध में किसी वैज्ञानिक प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है।

    इस पेड़ से जुड़ी एक और परंपरा स्थानीय स्तर पर बताई जाती है। मान्यता है कि यहां शिवगणों के लिए भोजन रखा जाता है। स्थानीय विश्वास के अनुसार भोजन रखने की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और माना जाता है कि अदृश्य शक्तियां इसे ग्रहण करती हैं। इसी वजह से मंदिर और पेड़ से जुड़ी कथा श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों के बीच आकर्षण का विषय बनी हुई है।

    कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता इसकी प्राकृतिक स्थिति भी है। जंगलों से घिरे इस क्षेत्र में धार्मिक आस्था और प्रकृति का अलग वातावरण दिखाई देता है। हालांकि मंदिर से जुड़ी शिव बारात, स्वयंभू शिवलिंग और रहस्यमयी पेड़ की कथाएं स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें ऐतिहासिक तथ्य के बजाय लोकपरंपरा के रूप में देखना उचित है।

  • हरिद्वार से दिल्ली तक निकली अनोखी कांवड़ यात्रा, मैकलारेन जैसी डमी कार में भगवान शिव की प्रतिमा ने खींचा सबका ध्यान

    हरिद्वार से दिल्ली तक निकली अनोखी कांवड़ यात्रा, मैकलारेन जैसी डमी कार में भगवान शिव की प्रतिमा ने खींचा सबका ध्यान

    नई दिल्ली । सावन माह में जारी कांवड़ यात्रा के बीच उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक अनोखी कांवड़ ने श्रद्धालुओं और राहगीरों का विशेष ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। मैकलारेन स्पोर्ट्स कार जैसी दिखने वाली विशेष डमी संरचना में भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित कर निकाली गई इस कांवड़ को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे रुकते नजर आए। दूर से देखने पर यह किसी वास्तविक लग्जरी स्पोर्ट्स कार जैसी दिखाई देती थी, लेकिन पास आने पर लोगों को पता चला कि यह श्रद्धालुओं द्वारा विशेष रूप से तैयार कराया गया प्रतिरूप है।

    यह अनोखी कांवड़ दिल्ली के नवादा गांव से आए छह शिवभक्तों द्वारा तैयार कराई गई है। श्रद्धालुओं ने 28 जुलाई को हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी से लगभग 40 लीटर गंगाजल लेकर अपनी यात्रा आरंभ की थी। यात्रा के दौरान गंगाजल को इसी विशेष रूप से डिजाइन की गई कांवड़ के भीतर सुरक्षित रखा गया। श्रद्धालुओं का उद्देश्य दिल्ली पहुंचकर अपने गांव के शिव मंदिर में भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक करना है।

    श्रद्धालुओं के अनुसार, हर वर्ष कांवड़ यात्रा में नई-नई थीम और रचनात्मक डिज़ाइन देखने को मिलते हैं। इसी सोच के साथ इस बार उन्होंने पारंपरिक कांवड़ को आधुनिक स्वरूप देने का निर्णय लिया। सामूहिक चर्चा के बाद स्पोर्ट्स कार की थीम पर कांवड़ तैयार करने का विचार सामने आया और फिर भगवान शिव की प्रतिमा को उसके केंद्र में स्थापित कर इसे अंतिम रूप दिया गया। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल अपनी आस्था को एक अलग और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करना था।

    जानकारी के अनुसार जिस स्पोर्ट्स कार से प्रेरणा लेकर यह मॉडल बनाया गया है, उसकी वास्तविक कीमत करोड़ों रुपये बताई जाती है। हालांकि यात्रा में शामिल वाहन पूरी तरह डमी मॉडल है और इसे केवल धार्मिक यात्रा के लिए तैयार किया गया है। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस विशेष प्रतिरूप को बनाने और सजाने में लगभग सात से आठ लाख रुपये का खर्च आया। आकर्षक रंग-सज्जा, आधुनिक डिज़ाइन और भगवान शिव की प्रतिमा के संयोजन ने इसे पूरी यात्रा का प्रमुख आकर्षण बना दिया।

    मुजफ्फरनगर से गुजरते समय इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई राहगीरों ने पहली नजर में इसे असली स्पोर्ट्स कार समझ लिया। जब उन्हें इसके डमी मॉडल होने की जानकारी मिली तो उत्सुकता और बढ़ गई। बड़ी संख्या में लोगों ने इस अनूठी प्रस्तुति के साथ तस्वीरें और वीडियो बनाए। श्रद्धालुओं ने भी लोगों का अभिवादन करते हुए अपनी यात्रा जारी रखी।

    कांवड़ यात्रा के दौरान हर वर्ष श्रद्धालु अपनी आस्था को अलग-अलग कलात्मक और रचनात्मक स्वरूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। कहीं धार्मिक झांकियां तैयार की जाती हैं तो कहीं विशेष थीम पर आधारित कांवड़ बनाई जाती हैं। इस वर्ष मैकलारेन जैसी स्पोर्ट्स कार के रूप में तैयार की गई यह कांवड़ भी उसी रचनात्मक परंपरा का नया उदाहरण बनकर सामने आई है, जिसने धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक डिज़ाइन का अनोखा मेल प्रस्तुत किया।

    हरिद्वार से गंगाजल लेकर विभिन्न राज्यों और शहरों की ओर बढ़ रहे लाखों शिवभक्तों के बीच यह विशेष कांवड़ चर्चा का विषय बनी हुई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति है, जबकि यह अनूठी प्रस्तुति उसी भावना को अलग अंदाज में व्यक्त करने का माध्यम है। निर्धारित स्थान पर पहुंचकर वे भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और सावन माह की धार्मिक परंपरा का विधिवत पालन करेंगे।

  • हरिद्वार: अचानक धंसी सड़क, पैदल जा रही महिला गड्ढे में गिरी, तत्काल रेस्क्यू से बची जान

    हरिद्वार: अचानक धंसी सड़क, पैदल जा रही महिला गड्ढे में गिरी, तत्काल रेस्क्यू से बची जान


    हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में शुक्रवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब शहर के व्यस्त ललताराव पुल के समीप अचानक सड़क धंस गई। उसी समय वहां से गुजर रही एक महिला देखते ही देखते बने गहरे गड्ढे में गिर गई। पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला सामान्य रूप से सड़क पर चल रही थी और सड़क पूरी तरह सुरक्षित दिखाई दे रही थी। लेकिन जैसे ही वह एक स्थान पर पहुंची, अचानक जमीन धंस गई और वह सीधे गड्ढे में जा गिरी। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते बचाव होने से बड़ा हादसा टल गया।

    नीचे से गुजर रही थीं गैस पाइपलाइन और बिजली की लाइनें
    जानकारी के मुताबिक, जिस स्थान पर सड़क धंसी, उसके नीचे सीवर लाइन, गैस पाइपलाइन और हाई-टेंशन अंडरग्राउंड बिजली की केबलें बिछी हुई हैं। यदि इस घटना के दौरान गैस रिसाव या बिजली से जुड़ी कोई दुर्घटना होती, तो हालात कहीं अधिक गंभीर हो सकते थे।

    कांवड़ मेले के दौरान बढ़ी चिंता
    यह घटना ऐसे समय हुई है जब हरिद्वार में कांवड़ मेले के चलते भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ललताराव पुल का यह मार्ग हर की पौड़ी आने-जाने वाले कांवड़ियों का प्रमुख रास्ता माना जाता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच सड़क धंसने की इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों और सड़क की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन तथा लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • ममता और भक्ति का अद्भुत संगम 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहीं काजल चौधरी

    ममता और भक्ति का अद्भुत संगम 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहीं काजल चौधरी


    नई दिल्ली । सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और कांवड़ यात्रा के लिए विशेष माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस बार भी श्रद्धालुओं का सैलाब सड़कों पर दिखाई दे रहा है लेकिन इन्हीं हजारों कांवड़ियों के बीच एक ऐसी कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है जिसने सेवा समर्पण और पारिवारिक संस्कार की नई मिसाल पेश कर दी है। दिल्ली के शाहदरा की रहने वाली काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चंद्रिदेवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पैदल यात्रा कर रही हैं। यह दृश्य जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं और हर किसी ने उनकी सराहना की।

    काजल चौधरी पेशे से लोक गायिका हैं और अपने भजन तथा देहाती रागनी के कारण सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने इस वर्ष अपनी सास को कंधों पर बैठाकर कांवड़ यात्रा शुरू की है। खास बात यह है कि उनके साथ 71 किलो गंगाजल भी है जिसे वह भगवान शिव को अर्पित करेंगी। पूरी यात्रा के दौरान उनका परिवार भी उनके साथ चल रहा है और सभी मिलकर सेवा और श्रद्धा का संदेश दे रहे हैं।

    यह पहली बार नहीं है जब काजल चौधरी ने ऐसा किया हो। पिछले वर्ष भी उन्होंने अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा पूरी की थी। इसके अलावा इसी वर्ष उन्होंने अपनी सास के साथ 84 कोस की परिक्रमा भी की थी। लगातार दूसरी बार इस तरह की यात्रा कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि बुजुर्गों की सेवा केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि सबसे बड़ा धर्म भी है।

    काजल चौधरी का कहना है कि माता पिता और सास ससुर की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता। उनका मानना है कि जब तक बुजुर्ग हमारे साथ हैं तब तक उनकी हर इच्छा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अपने माता पिता और बुजुर्गों की सेवा पूरे मन से करें ताकि उनका आशीर्वाद जीवनभर साथ बना रहे।

    इस यात्रा के दौरान काजल चौधरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि उनकी सास की इच्छा मुख्यमंत्री से मिलने की है और वे उन्हें अपने हाथों से एक भेंट देना चाहती हैं। काजल ने उम्मीद जताई कि उनकी सास की यह इच्छा भी जल्द पूरी होगी।

    मुजफ्फरनगर से गुजर रही यह अनोखी कांवड़ अब लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। रास्ते में जहां भी यह कांवड़ पहुंचती है लोग रुककर काजल और उनकी सास का अभिवादन करते हैं। कई श्रद्धालु उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं तो कई लोग उन्हें आधुनिक समय का श्रवण कुमार कहकर सम्मान दे रहे हैं। हालांकि काजल कहती हैं कि उन्होंने केवल अपना पारिवारिक कर्तव्य निभाया है और हर बेटे बहू को अपने बुजुर्गों के प्रति यही भावना रखनी चाहिए।

    आज जब भागदौड़ भरी जिंदगी में परिवारों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं तब काजल चौधरी की यह यात्रा समाज को यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिरों में पूजा करने से नहीं बल्कि अपने बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करने से भी पूरी होती है। यही संस्कार भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान हैं और यही भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।

  • हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

    हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई


    देहरादून। ध्वनि प्रदूषण को लेकर हरिद्वार पुलिस ने जिलेभर में विशेष अभियान चलाते हुए धार्मिक स्थलों से 94 लाउडस्पीकर हटाए हैं। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान ये लाउडस्पीकर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित पाए गए थे, जो ध्वनि प्रदूषण नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था।

    पुलिस की टीमों ने अभियान के तहत हरिद्वार जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिला, वहां कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर हटाए गए। अभियान के दौरान शहरी क्षेत्रों से 31 लाउडस्पीकर और ग्रामीण इलाकों से 63 लाउडस्पीकर हटाए गए। इस तरह पूरे जिले में कुल 94 लाउडस्पीकरों पर कार्रवाई की गई।

    नियमों की जानकारी भी दी गई
    हरिद्वार पुलिस ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के प्रति जागरूक करना भी है। इस दौरान धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और संबंधित समितियों को नियमों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकता। वहीं, अनुमति मिलने के बाद भी निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना अनिवार्य है।

    उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति लाउडस्पीकर चलाती है या तय मानकों से अधिक आवाज में इसका इस्तेमाल करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    आगे भी जारी रहेगा अभियान
    दरअसल, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इन्हीं नियमों के तहत स्थानीय प्रशासन और पुलिस सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं।

    हरिद्वार पुलिस के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और जहां भी नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि कार्रवाई विभिन्न धार्मिक स्थलों पर नियमों के उल्लंघन के मामलों में की गई।

  • हर की पौड़ी की सेवा परंपरा को बड़ा झटका, हजारों भूखों तक भोजन पहुंचाने वाले 'भंडारा किंग बाबा' रमाशंकर गुप्ता का निधन, हरिद्वार ने खोई अपनी अनोखी पहचान

    हर की पौड़ी की सेवा परंपरा को बड़ा झटका, हजारों भूखों तक भोजन पहुंचाने वाले 'भंडारा किंग बाबा' रमाशंकर गुप्ता का निधन, हरिद्वार ने खोई अपनी अनोखी पहचान


    नई दिल्ली ।
    हरिद्वार की हर की पौड़ी क्षेत्र से जुड़ी सेवा और मानवता की एक प्रेरणादायक पहचान अब इतिहास का हिस्सा बन गई है। वर्षों तक श्रद्धालुओं और दानदाताओं को जरूरतमंद लोगों से जोड़ने वाले रमाशंकर गुप्ता, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक ‘भंडारा किंग बाबा’ के नाम से जानते थे, का निधन हो गया। उनके जाने से न केवल हरिद्वार बल्कि उन हजारों लोगों के बीच भी शोक का माहौल है, जिनके लिए वह नियमित रूप से भोजन की व्यवस्था कराने का माध्यम बने थे।

    रमाशंकर गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी थे, लेकिन लंबे समय पहले हरिद्वार आकर उन्होंने अपना जीवन सेवा कार्यों को समर्पित कर दिया। हर की पौड़ी के निकट शिवसेतु पर बैठकर वह श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह करते थे कि यदि संभव हो तो भूखे साधुओं, गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए भंडारे में सहयोग करें। उनका यह प्रयास व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्ग तक भोजन पहुंचाने के उद्देश्य से होता था।

    समय के साथ उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बनी, जिस पर श्रद्धालु पूरी तरह भरोसा करते थे। लोग जानते थे कि उनके माध्यम से दिया गया सहयोग वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचेगा। यही विश्वास उन्हें सामान्य व्यक्ति से अलग बनाता था। हरिद्वार आने वाले अनेक श्रद्धालु विशेष रूप से उन्हें खोजते थे और उनके माध्यम से भोजन वितरण की व्यवस्था कराते थे। उनकी सादगी और पारदर्शिता ने समाज में उनकी अलग छवि स्थापित की।

    रमाशंकर गुप्ता हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि भोजन की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं होना चाहिए। उनका मानना था कि जैसा भोजन वह स्वयं ग्रहण करते हैं, वैसा ही भोजन जरूरतमंदों को भी मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ वह भोजन तैयार करवाने और उसके वितरण की व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनका उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक सेवा उपलब्ध कराना था।

    उनके निधन के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह भी सामने आया है कि अब उन लोगों की सहायता किस प्रकार होगी, जिनके लिए वह प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करते थे। वह दान देने वालों और भोजन पाने वालों के बीच एक मजबूत कड़ी थे। उनकी मौजूदगी ने वर्षों तक सेवा कार्यों को सरल और व्यवस्थित बनाए रखा। अब उनकी अनुपस्थिति में इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी समाज और स्थानीय लोगों के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में खड़ी है।

    हरिद्वार जैसे धार्मिक नगरों की पहचान केवल मंदिरों, घाटों और धार्मिक आयोजनों से नहीं बनती, बल्कि ऐसे लोगों से भी बनती है जो निस्वार्थ सेवा को अपना जीवन बना लेते हैं। रमाशंकर गुप्ता ने बिना किसी संस्था, प्रचार या पद के समाज सेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने उन्हें लोगों के बीच विशेष सम्मान दिलाया। उनकी पहचान किसी औपचारिक संगठन से नहीं, बल्कि उनके कार्यों और सेवा भाव से बनी।

    आज जब श्रद्धालु हर की पौड़ी की ओर जाएंगे और शिवसेतु से गुजरेंगे, तो वहां उनकी परिचित आवाज सुनाई नहीं देगी। हालांकि उनका जीवन यह संदेश अवश्य छोड़ गया है कि समाज में छोटे-छोटे प्रयास भी हजारों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। सेवा, विश्वास और मानवता के प्रति उनका समर्पण लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा और हरिद्वार की सामाजिक स्मृतियों में उनकी पहचान हमेशा जीवित रहेगी।

  • प्रतीक यादव की अस्थियां लेकर हरिद्वार रवाना हुआ परिवार, अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से पहुंचीं गंगा घाट

    प्रतीक यादव की अस्थियां लेकर हरिद्वार रवाना हुआ परिवार, अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से पहुंचीं गंगा घाट



    लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की अस्थियां आज हरिद्वार में गंगा में विसर्जित की जाएंगी। इसके लिए पत्नी अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से अस्थि कलश लेकर परिवार के साथ लखनऊ से रवाना हुईं। इस दौरान उनके साथ शिवपाल यादव के सांसद पुत्र आदित्य यादव, बेटियां प्रथमा और पद्मजा, पिता अरविंद बिष्ट और भाई अमन भी मौजूद रहे।

    अमौसी एयरपोर्ट से लेकर जॉलीग्रांट एयरपोर्ट तक पूरे सफर में परिवार के सदस्य अस्थि कलश के साथ रहे। इसके बाद सड़क मार्ग से हरिद्वार पहुंचकर जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर और स्वामी अवधेशानंद गिरि की मौजूदगी में गंगा तट पर विधिवत अस्थि विसर्जन किया जाएगा। सुरक्षा और निजीता को देखते हुए पूरा कार्यक्रम बेहद सीमित और वीवीआईपी स्तर पर आयोजित किया गया है।

    निजी जीवन और अंतिम विदाई की प्रक्रिया
    प्रतीक यादव का 13 मई को 38 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था, जिसके बाद 14 मई को लखनऊ में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने मुखाग्नि दी थी। प्रतीक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे और राजनीति से दूर रहते हुए रियल एस्टेट और फिटनेस व्यवसाय से जुड़े थे।

    पत्नी अपर्णा यादव, जो वर्तमान में भाजपा नेता और यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं, पूरे परिवार के साथ इस अंतिम यात्रा का हिस्सा बनीं। अपर्णा के पैतृक गांव उत्तराखंड में भी शोक का माहौल है, जहां लोग दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।