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  • हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    नई दिल्ली। सनातन धर्म में हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर महिलाएं पति की लंबी आयु सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। सावन में चारों ओर दिखाई देने वाली हरियाली के कारण इस पर्व को हरियाली तीज कहा जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं हरी चूड़ियां धारण करती हैं मेहंदी लगाती हैं और सोलह श्रृंगार करके झूला झूलने के साथ तीज के लोकगीत गाती हैं।

    इस बार हरियाली तीज की तारीख को लेकर 14 और 15 अगस्त के बीच कंफ्यूजन बना हुआ है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त से शुरू हो रही है लेकिन उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 शनिवार को रखा जाएगा। दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग भी 15 अगस्त को ही हरियाली तीज का पर्व बता रहा है। हालांकि अलग अलग शहरों के पंचांग में तिथि शुरू होने और समाप्त होने के समय में अंतर हो सकता है।

    पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त को सुबह 9 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 15 अगस्त को सुबह 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगी।因此 15 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण इसी दिन व्रत और पर्व मनाया जाएगा। अपने शहर के अनुसार पूजा का सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।

    हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। कुछ परंपराओं में बालू या मिट्टी से शिव पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाने का भी विधान बताया गया है। पूजा में माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है जबकि भगवान शिव को बेलपत्र फल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाई जाती है। इसके बाद धूप दीप जलाकर आरती की जाती है और हरियाली तीज की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार हरियाली तीज का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक तप किया था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी वजह से विवाहित महिलाएं इस दिन शिव और पार्वती की पूजा करके अपने दांपत्य जीवन में प्रेम सुख और स्थिरता की कामना करती हैं।

    इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। हालांकि निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर व्रत की कठोरता से बचना और अपनी सेहत को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है। पूजा के साथ महिलाएं सास या घर की वरिष्ठ महिलाओं को सुहाग सामग्री और उपहार देकर उनका आशीर्वाद भी ले सकती हैं।

    हरियाली तीज पर हरे रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना इस पर्व की पारंपरिक पहचान है। इसके अलावा पौधरोपण को भी इस दिन शुभ माना जाता है। सावन और हरियाली से जुड़े इस पर्व पर एक पौधा लगाकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया जा सकता है।

    इस तरह 14 अगस्त से तृतीया तिथि शुरू होने के बावजूद हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 शनिवार को मनाई जाएगी। इसलिए 14 या 15 अगस्त को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। व्रत रखने वाली महिलाएं 15 अगस्त को अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की विधि पूर्वक पूजा कर सकती हैं।

  • हरियाली तीज 2026 को बनाएं यादगार, शादी के बाद पहली तीज पर कपल्स जरूर करें ये खास काम

    हरियाली तीज 2026 को बनाएं यादगार, शादी के बाद पहली तीज पर कपल्स जरूर करें ये खास काम


    नई दिल्ली । शादी के बाद आने वाला पहला त्योहार हर नवविवाहित कपल के लिए बेहद खास होता है। खासकर हरियाली तीज का उत्सव नई दुल्हन के लिए प्यार, उत्साह और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी कई खूबसूरत यादें लेकर आता है। हरी चूड़ियां, मेहंदी, सोलह श्रृंगार, पारंपरिक कपड़े, झूले और तीज की रस्मों के बीच पहली तीज को लेकर नवविवाहित महिलाओं में अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। अगर शादी के बाद आपकी भी यह पहली तीज है तो इसे केवल पूजा और व्रत तक सीमित रखने के बजाय पति के साथ मिलकर इस दिन को खास और यादगार बनाया जा सकता है।

    पहली तीज को खास बनाने की शुरुआत तैयारियों से ही की जा सकती है। पति-पत्नी मिलकर घर की सजावट से लेकर कपड़ों और पूजा की तैयारियों तक में एक-दूसरे का साथ दें। दुल्हन इस मौके पर हरे रंग की साड़ी, लहंगा या सूट पहन सकती हैं। पति भी पारंपरिक कुर्ता-पायजामा या किसी एथनिक आउटफिट में तैयार होकर पत्नी के साथ ट्विनिंग कर सकते हैं। घर को फूलों, पत्तियों और पारंपरिक सजावट से सजाया जा सकता है। अगर घर में झूले की व्यवस्था हो तो उसे भी फूलों से सजाकर तीज के माहौल को और खूबसूरत बनाया जा सकता है। साथ मिलकर की गई ये छोटी-छोटी तैयारियां पति-पत्नी के बीच अपनापन बढ़ाने का काम कर सकती हैं।

    पहली तीज पर दुल्हन के श्रृंगार का भी खास महत्व होता है। हरी चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी, सिंदूर, पायल और पारंपरिक गहने इस दिन के लुक को और आकर्षक बना सकते हैं। दुल्हन अपनी शादी के गहनों में से किसी खास आभूषण को पहली तीज पर पहन सकती हैं। इससे शादी के बाद के इस पहले बड़े त्योहार की भावनात्मक याद और मजबूत हो सकती है। मेहंदी में पति के नाम या दोनों से जुड़ा कोई छोटा डिजाइन भी शामिल किया जा सकता है।

    तीज की पूजा और पारंपरिक रस्मों में भी पति अपनी पत्नी का साथ दे सकते हैं। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में तीज मनाने की परंपराएं अलग होती हैं इसलिए पूजा और व्रत अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करना बेहतर है। पति पूजा की सामग्री तैयार करने से लेकर अन्य जरूरी कामों में पत्नी की मदद कर सकते हैं। अगर पत्नी व्रत रख रही हैं तो उनकी सुविधा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। व्रत को लेकर अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उचित निर्णय लेना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

    पहली तीज को यादगार बनाने के लिए कपल एक छोटा फोटोशूट भी कर सकते हैं। इसके लिए किसी महंगे स्टूडियो की जरूरत नहीं है। घर की बालकनी, फूलों से सजा झूला, पूजा का स्थान या घर का कोई खूबसूरत कोना ही शानदार बैकग्राउंड बन सकता है। पारंपरिक कपड़ों में कुछ कैंडिड तस्वीरें इस खास दिन की यादों को लंबे समय तक सहेजकर रख सकती हैं।

    इस दिन पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए छोटा सा सरप्राइज भी प्लान कर सकते हैं। इसके लिए महंगा गिफ्ट जरूरी नहीं है। फूल, पसंदीदा मिठाई, चूड़ियां, किताब, छोटी ज्वेलरी या हाथ से लिखा हुआ प्रेम पत्र भी इस दिन को खास बना सकता है। पत्नी भी पति की पसंद की कोई छोटी चीज देकर उन्हें सरप्राइज कर सकती हैं। पूजा और व्रत के बाद समय मिले तो दोनों मिलकर घर पर पारंपरिक भोजन तैयार कर सकते हैं और परिवार के साथ त्योहार का आनंद ले सकते हैं।

    सबसे जरूरी बात यह है कि पहली हरियाली तीज को केवल एक धार्मिक रस्म की तरह न मनाएं बल्कि इसे एक-दूसरे के साथ समय बिताने और नई यादें बनाने का अवसर बनाएं। पारिवारिक परंपराओं का सम्मान करते हुए स्वास्थ्य का ध्यान रखें और महंगे उपहारों के बजाय साथ, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता दें। कुछ साल बाद जब पहली तीज की तस्वीरें और यादें सामने आएंगी तो यही छोटी-छोटी खुशियां इस त्योहार को सबसे खास बना देंगी।