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  • पंचकूला के स्कूल में 6 साल की बच्ची पर खौफनाक हमला, तीसरी के छात्र ने ईंट से सिर पर किए कई वार, स्टाफ पर FIR

    पंचकूला के स्कूल में 6 साल की बच्ची पर खौफनाक हमला, तीसरी के छात्र ने ईंट से सिर पर किए कई वार, स्टाफ पर FIR


    पंचकूला । हरियाणा के पंचकूला के एक प्रसिद्ध स्कूल में छह साल की KG की छात्रा के साथ हुई हिंसक घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले करीब आठ साल के छात्र ने बच्ची पर हमला किया। उसने पहले बच्ची को बेंच पर पटका और फिर बाल पकड़कर जमीन पर घसीटा। इसके बाद ईंट से उसके सिर और चेहरे पर कई वार किए। करीब 96 सेकेंड तक चली यह घटना कक्षा में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। बच्ची को गंभीर हालत में चंडीगढ़ के PGI में भर्ती कराया गया था। परिवार के मुताबिक अब उसकी हालत में सुधार है। घटना के बाद पुलिस ने स्कूल स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज की है और स्कूल प्रबंधन की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।

    यह घटना गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे की बताई जा रही है। मामले का पता उस समय चला जब स्कूल की छुट्टी के बाद बच्ची को लेने ऑटो चालक पहुंचा। बच्ची वहां नहीं मिली तो उसने परिजनों को इसकी जानकारी दी। परिवार के लोग तुरंत स्कूल पहुंचे और बच्ची की तलाश शुरू की। बच्ची के चाचा के मुताबिक जिस छात्र पर हमला करने का आरोप है उसी ने परिवार को बताया कि बच्ची ऊपर कमरे में पड़ी है। परिजन जब वहां पहुंचे तो बच्ची खून से लथपथ हालत में मिली। उसे देखकर उसके पिता की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए।

    परिजन बच्ची को पहले अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चंडीगढ़ PGI रेफर कर दिया। परिवार के अनुसार बच्ची का इलाज जारी है और उसकी स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। 31 अक्टूबर की रात उसने अपनी मां के हाथ से खाना भी खाया। परिवार ने बच्ची के जल्द स्वस्थ होने की कामना करने वाले लोगों का आभार जताया है।

    स्कूल के CCTV फुटेज में हमले की गंभीरता सामने आई है। फुटेज के मुताबिक छात्र ने बच्ची को पकड़कर बेंच पर सिर के बल पटका। इसके बाद उसके बाल पकड़कर नीचे गिराया और सिर तथा पेट पर लात मारी। फिर वह कक्षा के दूसरे हिस्से से ईंट लेकर आया और बच्ची पर हमला करने लगा। वीडियो में वह बार बार ईंट से उसके सिर और चेहरे पर वार करता दिखाई देता है। बच्ची जमीन पर पड़ी दर्द से परेशान होती रही। हमले के दौरान छात्र ने उसे दोबारा बाल पकड़कर घसीटा और जाते समय भी सिर पर लात मारी। घटना के दृश्य बेहद विचलित करने वाले हैं इसलिए उनका प्रदर्शन नहीं किया जा रहा है।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद सेक्टर-20 थाना पुलिस स्कूल पहुंची। थाना प्रभारी यशदीप और जांच अधिकारी प्रदीप कुमार ने स्कूल प्रबंधन से पूछताछ की है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय कक्षा में निगरानी की व्यवस्था कैसी थी और बच्ची पर हमला होने के दौरान स्कूल स्टाफ कहां था। पंचकूला की DCP अदिति सिंह के मुताबिक मामले में स्कूल की लापरवाही सामने आई है और स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हमला करने वाले नाबालिग छात्र की काउंसिलिंग विशेषज्ञों से कराई जा रही है। पुलिस उसके माता-पिता से भी पूछताछ कर रही है ताकि घटना की परिस्थितियों और बच्चे की पारिवारिक पृष्ठभूमि को समझा जा सके।

    हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज देखना तक मुश्किल है। मामले की जांच के लिए मुख्यालय स्तर पर कमेटी बनाई गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जाएंगे। घटना के बाद स्कूल के बाहर अभिभावकों ने भी नाराजगी जताई और प्रबंधन के खिलाफ विरोध किया। अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि इतनी गंभीर घटना स्कूल परिसर में कैसे हुई और बच्ची की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था कहां चूक गई।
  • खाटू श्याम यात्रा पर निकला परिवार हादसे का शिकार, जीजा, ससुर और साली की दर्दनाक मौत

    खाटू श्याम यात्रा पर निकला परिवार हादसे का शिकार, जीजा, ससुर और साली की दर्दनाक मौत


    करनाल/जींद। हरियाणा के जींद में शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां पलभर में छीन लीं। श्री खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए निकला करनाल का एक परिवार रास्ते में हादसे का शिकार हो गया। दुर्घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

    जानकारी के अनुसार, करनाल के सेक्टर-8 निवासी धर्मपाल अपनी पत्नी, सास-ससुर और साली के साथ सुबह घर से खाटू श्याम धाम के लिए रवाना हुए थे। जींद के पास उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भीषण था कि धर्मपाल, उनके ससुर और उनकी साली ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

    कार में कुल पांच लोग सवार थे। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। वहीं, मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

    घर में पसरा मातम

    हादसे की खबर जैसे ही करनाल स्थित परिवार तक पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों के घर पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों का तांता लग गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    बताया जा रहा है कि धर्मपाल के बच्चे विदेश में पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में रहते हैं। हादसे की सूचना उन्हें भी दे दी गई है, जिसके बाद उनके भारत लौटने की तैयारी की जा रही है।

    पुलिस कर रही जांच

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती स्तर पर हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। धार्मिक यात्रा पर निकले इस परिवार के साथ हुई यह दुखद घटना पूरे क्षेत्र के लिए गहरे सदमे का कारण बन गई है।
  • हरियाली बनी बंजर जमीन, सोनीपत में फैक्ट्री के केमिकल ने उजाड़ा जंगल, प्रदूषण विभाग ने की बड़ी कार्रवाई

    हरियाली बनी बंजर जमीन, सोनीपत में फैक्ट्री के केमिकल ने उजाड़ा जंगल, प्रदूषण विभाग ने की बड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली। हरियाणा के सोनीपत जिले से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी ने हजारों पेड़ों को बर्बाद कर दिया। यह मामला मुरथल इलाके के नांगल खुर्द क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां एक बीयर फैक्ट्री से निकला जहरीला पानी वन विभाग की जमीन तक पहुंच गया और देखते ही देखते हरे-भरे पेड़ सूखकर ठूंठ में बदल गए।

    स्थानीय लोगों के अनुसार यह समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण हालात लगातार बिगड़ते गए। क्षेत्र में जहां-जहां फैक्ट्री का दूषित पानी पहुंचा, वहां की हरियाली पूरी तरह खत्म होती नजर आई। पेड़ों की शाखाएं सूख चुकी हैं और जमीन बंजर जैसी दिखाई देने लगी है। वहीं जिन हिस्सों तक यह जहरीला पानी नहीं पहुंच पाया, वहां अब भी हरियाली सामान्य रूप से मौजूद है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पेड़ों के सूखने की मुख्य वजह केमिकल युक्त पानी ही है।

    स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आसपास संचालित फैक्ट्रियों से निकलने वाला दूषित पानी लगातार जमीन में छोड़ा जा रहा था, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा बल्कि भूजल की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी के कारण मवेशियों की तबीयत खराब हो रही है और लोगों में गंभीर बीमारियों को लेकर डर बढ़ता जा रहा है। कई लोगों ने यह भी आशंका जताई कि अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है।

    मामले के सामने आने और पेड़ों के बड़े पैमाने पर सूखने की पुष्टि होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान यह पाया गया कि एक बीयर फैक्ट्री की दीवार के नीचे से केमिकल युक्त पानी वन क्षेत्र की ओर जा रहा था। इसके बाद विभाग ने फैक्ट्री के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उस पर 39 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और इकाई को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।

    इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निरीक्षण और रोकथाम की कार्रवाई होती तो हजारों पेड़ों को बचाया जा सकता था। पर्यावरण विशेषज्ञ भी मानते हैं कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट का सही तरीके से निस्तारण नहीं होने पर इसका असर मिट्टी, जल और जैव विविधता पर लंबे समय तक पड़ता है।

    पूरे मामले ने एक बार फिर औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को सामने ला दिया है। तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों में यदि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया तो आने वाले समय में ऐसे मामले और गंभीर रूप ले सकते हैं। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि क्षेत्र में प्रदूषण पर नियंत्रण होगा और पर्यावरण को दोबारा सुरक्षित बनाने के प्रयास तेज किए जाएंगे।

  • महिला सुरक्षा पर फिर उठा बड़ा सवाल, नूंह की घटना को लेकर कांग्रेस-BJP में तीखी बयानबाजी, जांच की मांग तेज

    महिला सुरक्षा पर फिर उठा बड़ा सवाल, नूंह की घटना को लेकर कांग्रेस-BJP में तीखी बयानबाजी, जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली। हरियाणा के नूंह जिले में सामने आए एक गंभीर मामले ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इसने राजनीतिक माहौल को भी गर्मा दिया है। 19 वर्षीय युवती के साथ कथित गैंगरेप और बाद में आत्महत्या की घटना को लेकर अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे मामले ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गहरी चिंता पैदा कर दी है और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

    घटना के सामने आने के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब एक युवती अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही, तो राज्य और देश में महिलाओं की सुरक्षा के दावों पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और प्रशासनिक तंत्र उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है।

    मामला नूंह के बिछोर थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। पीड़िता के परिवार के अनुसार, 18 मई को कुछ लोग घर में घुसे और युवती के साथ कथित रूप से गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया। आरोप यह भी है कि आरोपियों ने इस दौरान वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी दी और लगातार ब्लैकमेल करते रहे। इस मानसिक प्रताड़ना के कारण युवती गहरे तनाव में चली गई और उसने जहर खा लिया। इलाज के दौरान दिए गए बयान में उसने पूरी घटना का जिक्र किया, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।

    पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जा सके।

    इस बीच कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि मामले की जांच फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत कराई जाए ताकि पीड़िता को जल्द न्याय मिल सके। पार्टी का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में देरी न्याय प्रणाली पर जनता का भरोसा कमजोर करती है। साथ ही कांग्रेस ने यह भी कहा है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाना समय की जरूरत है।

    घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों में रोष देखा जा रहा है। महिला सुरक्षा को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की अपील की है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि आखिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है और क्या इसमें और सुधार की जरूरत है।

    फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और दोषियों तक कानून कितनी तेजी से पहुंचता है।

  • दिल्ली-NCR रेल रूट पर बड़ा बदलाव: फरीदाबाद–पलवल सेक्शन में ट्रेनों का संचालन प्रभावित, 13 मई तक अलर्ट

    दिल्ली-NCR रेल रूट पर बड़ा बदलाव: फरीदाबाद–पलवल सेक्शन में ट्रेनों का संचालन प्रभावित, 13 मई तक अलर्ट


    नई दिल्ली । दिल्ली और एनसीआर के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल द्वारा किशनगंज स्टेशन पर यार्ड पुनर्निर्माण और नई इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) सिग्नल प्रणाली लगाने का कार्य शुरू किया गया है। इस महत्वपूर्ण तकनीकी अपग्रेड के चलते फरीदाबाद, पलवल और बल्लभगढ़ रेल सेक्शन पर 13 मई 2026 तक ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। रेलवे ने इस कार्य के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग ब्लॉक लिया है, जिससे ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा रहा है।

    कई शटल ट्रेनें शॉर्ट टर्मिनेट, नई दिल्ली तक ही सेवा
    रेलवे के अनुसार, इस रूट पर चलने वाली कई प्रमुख शटल ट्रेनें अपने निर्धारित अंतिम स्टेशन तक नहीं पहुंच पाएंगी। इन्हें अस्थायी रूप से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ही समाप्त कर दिया जाएगा।

    प्रभावित प्रमुख ट्रेनें इस प्रकार हैं:

    64012 (शकूरबस्ती–पलवल)
    64013 (पलवल–शकूरबस्ती)
    64015 (पलवल–शकूरबस्ती)
    64016 (शकूरबस्ती–पलवल)
    64071 (बल्लभगढ़–शकूरबस्ती)
    इन ट्रेनों के प्रभावित होने से रोजाना अप-डाउन करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त यात्रा साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    यात्रियों पर बढ़ा बोझ, समय और खर्च दोनों प्रभावित
    इस बदलाव का सबसे अधिक असर उन यात्रियों पर पड़ा है जो फरीदाबाद, पलवल और आसपास के क्षेत्रों से दिल्ली की ओर रोजाना यात्रा करते हैं। अब यात्रियों को नई दिल्ली स्टेशन से आगे मेट्रो, बस, ऑटो या कैब का उपयोग करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ यात्रा का समय बढ़ गया है, बल्कि अतिरिक्त खर्च भी यात्रियों पर बोझ डाल रहा है।

     लंबी दूरी की ट्रेन भी प्रभावित
    सिर्फ लोकल ट्रेनें ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी की ट्रेन Himsagar Express के मार्ग में भी अस्थायी बदलाव किया गया है। रेलवे द्वारा ट्रैफिक को सुरक्षित और सुचारू रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

     क्यों किया जा रहा है यह काम?
    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, किशनगंज स्टेशन पर चल रहा यार्ड रिमॉडलिंग और नई सिग्नलिंग प्रणाली का कार्य भविष्य में ट्रेनों की गति, सुरक्षा और संचालन क्षमता को बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है। इसी कारण इस दौरान अस्थायी ब्लॉक लिया गया है।

     रेलवे की अपील: यात्रा से पहले करें जांच
    Indian Railways ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति NTES ऐप या रेलवे हेल्पलाइन के माध्यम से जरूर जांच लें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके। फिलहाल यह अस्थायी बदलाव यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है, लेकिन आने वाले समय में इससे रेल संचालन अधिक सुरक्षित और तेज होने की उम्मीद है।