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  • सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    नई दिल्ली ।कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुड्डा सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने के दौरान की गई अपनी कथित टिप्पणी को लेकर विवाद में घिरने के बाद सफाई दी है। हुड्डा ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उनकी मंशा सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बिल्कुल नहीं थी। उन्होंने कहा कि सिख समाज के साथ उनका रिश्ता परिवार जैसा है और जरूरत के समय दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।

    सज्जन कुमार का हाल ही में निधन हुआ था। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व नेता थे। उनके निधन के बाद श्रद्धांजलि देते हुए हुड्डा की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने सज्जन कुमार के सार्वजनिक जीवन और लोगों से जुड़ाव की प्रशंसा की।

    इस टिप्पणी के बाद हुड्डा पर सवाल उठने लगे। मामला इतना बढ़ा कि हरियाणा कांग्रेस के नेता कुलदीप शर्मा ने भी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई। इसके बाद हुड्डा ने अपने बयान को लेकर विस्तृत सफाई सामने रखी और कहा कि उनकी बात का अर्थ उस तरह नहीं था, जिस तरह उसे सार्वजनिक चर्चा में पेश किया जा रहा है।

    हुड्डा ने कहा कि पिछले दो दिनों से वह देख रहे हैं कि उनके बयान को अलग संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके बयान में एक ऐसा अंग्रेजी शब्द भी जोड़ा गया, जिसका उन्होंने इस्तेमाल नहीं किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कोई भी भावना सिख समाज के किसी व्यक्ति को ठेस पहुंचाने वाली नहीं थी।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि सिख समाज देश का गौरवशाली समाज है और उसके बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि उनकी किसी बात से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समुदाय के साथ उनके परिवार और राजनीतिक जीवन का पुराना संबंध रहा है।

    हुड्डा ने अपने परिवार के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके परदादा चौधरी मातूराम का संबंध पंजाब के पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन से रहा था। उन्होंने शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह के साथ उनके परदादा के संघर्ष का जिक्र किया और कहा कि यह इतिहास दोनों समुदायों के बीच पुराने संबंधों को दर्शाता है।

    उन्होंने किसान आंदोलन का भी उल्लेख किया। हुड्डा के मुताबिक, जब पंजाब से किसान आंदोलन के दौरान किसान हरियाणा पहुंचे तो उन्होंने उनके साथ खड़े होकर समर्थन दिया था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच यह सहयोग किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बना हुआ है।

    1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी हुड्डा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई में वह सिख समाज के साथ हैं और दंगों के मामलों में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी दोषी को बचाया नहीं जाना चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है।

    इस सफाई के बाद हुड्डा ने विवादित टिप्पणी को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। अब राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर आगे क्या प्रतिक्रिया होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

  • चरखी दादरी में दिनदहाड़े 30 राउंड फायरिंग से सनसनी, स्कॉर्पियो सवार सात लोग घायल, सीसीटीवी से आरोपियों की तलाश

    चरखी दादरी में दिनदहाड़े 30 राउंड फायरिंग से सनसनी, स्कॉर्पियो सवार सात लोग घायल, सीसीटीवी से आरोपियों की तलाश

    नई दिल्ली । हरियाणा के चरखी दादरी में दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। सिटी थाने के सामने एक काली स्कॉर्पियो को निशाना बनाकर अज्ञात हमलावरों ने लगातार गोलियां चलाईं, जिससे वाहन में सवार सात लोग घायल हो गए। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमलावर एक बाइक पर सवार होकर आए थे। उन्होंने स्कॉर्पियो को बीच रास्ते में रुकवाया और अचानक फायरिंग शुरू कर दी। कुछ ही क्षणों में वाहन गोलियों से छलनी हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर दी और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी।

    हमले में घायल हुए लोगों की पहचान अंकित, कीर्तिमान, सूरज, सनी, कृष्ण, अमित और एक अन्य अंकित के रूप में हुई है। सभी घायलों को पहले स्थानीय सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रोहतक स्थित पीजीआई रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है और पुलिस लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, डीएसपी और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया और गोलियों के खोखे सहित अन्य महत्वपूर्ण सुराग एकत्र किए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और हर पहलू की गहन पड़ताल की जाएगी।

    हमलावरों की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के साथ प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि आरोपियों की गतिविधियों और उनके भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके। इसके अलावा आसपास के थाना क्षेत्रों को भी सतर्क कर दिया गया है और संदिग्ध वाहनों की जांच तेज कर दी गई है।

    घटना के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि आपसी रंजिश, पुराना विवाद और अन्य संभावित कारणों सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों तक जल्द पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके और लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम रहे।

  • री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    नई दिल्ली । री-नीट परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल चर्चा का केंद्र बन गए हैं। दोनों अभ्यर्थियों ने 720 में से 715 अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद मेरिट सूची में आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग रैंक मिलने से अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर ऐसी स्थिति में रैंक किस आधार पर तय की जाती है।

    दरअसल, मेडिकल प्रवेश परीक्षा में केवल कुल अंक ही अंतिम रैंक का आधार नहीं होते। जब दो या अधिक अभ्यर्थियों के कुल अंक समान होते हैं, तब एनटीए की निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया लागू की जाती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य समान अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के बीच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मेरिट तय करना होता है। इसी नियम के कारण समान अंक होने के बावजूद दोनों अभ्यर्थियों की ऑल इंडिया रैंक अलग-अलग निर्धारित की गई।

    टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया के पहले चरण में अभ्यर्थियों के बायोलॉजी विषय के अंक देखे जाते हैं। इसमें बॉटनी और जूलॉजी दोनों के संयुक्त प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। जिस उम्मीदवार के बायोलॉजी में अधिक अंक होते हैं, उसे बेहतर रैंक दी जाती है। यदि इस स्तर पर भी दोनों के अंक समान हों, तो अगले चरण में केमिस्ट्री के अंकों की तुलना की जाती है। यदि केमिस्ट्री में भी बराबरी बनी रहती है, तब फिजिक्स के अंकों के आधार पर रैंक तय की जाती है।

    यदि तीनों प्रमुख विषयों में भी दोनों अभ्यर्थियों का प्रदर्शन समान हो, तो आगे उत्तर देने के पैटर्न का विश्लेषण किया जाता है। इसमें सही और गलत उत्तरों के अनुपात को देखा जाता है। जिस अभ्यर्थी ने अपेक्षाकृत कम गलत उत्तर दिए होते हैं या जिसका गलत उत्तरों का अनुपात बेहतर होता है, उसे मेरिट सूची में प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था परीक्षा की गुणवत्ता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

    इसके बाद भी यदि बराबरी बनी रहती है, तो अंतिम निर्णय एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की निगरानी में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। यही कारण है कि समान अंक प्राप्त करने वाले सभी उम्मीदवारों की रैंक हमेशा एक जैसी नहीं होती।

    आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के मामले में भी यही प्रक्रिया लागू की गई। दोनों के कुल अंक 715 रहे, लेकिन विषयवार प्रदर्शन और टाई-ब्रेकिंग के शुरुआती चरणों में आर्यन गुप्ता का प्रदर्शन बेहतर पाया गया। इसी आधार पर उन्हें ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। यह निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार लिया गया और मेरिट सूची उसी आधार पर तैयार की गई।

    गौरतलब है कि पहले समान अंक की स्थिति में अभ्यर्थियों की आयु को भी रैंक निर्धारण का आधार बनाया जाता था। अधिक आयु वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती थी। हालांकि बाद में इस नियम को लेकर विवाद सामने आने के बाद इसे समाप्त कर दिया गया। वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह विषयवार प्रदर्शन और निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया पर आधारित है, जिससे मेरिट सूची अधिक पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत के अनुरूप तैयार की जा सके।

  • रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें

    रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें


    नई दिल्ली ।
    भारतीय रेलवे हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित ट्रेन हरियाणा के जींद से अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके साथ ही भारतीय रेलवे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएगा। यह ट्रेन शुरुआती चरण में जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी और इसे भारतीय रेलवे की भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल परिवहन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की तस्वीरें साझा करते हुए इसे भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा से अपनी यात्रा शुरू करने जा रही है। इस घोषणा के बाद देशभर में इस परियोजना को लेकर उत्साह बढ़ गया है। रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित तकनीक भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    यह ट्रेन भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत विकसित की गई है। इस योजना का उद्देश्य उन रेल मार्गों पर डीजल इंजनों का विकल्प तैयार करना है, जहां विद्युतीकरण करना कठिन या अत्यधिक खर्चीला है। रेलवे आने वाले समय में देशभर में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनों को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इन ट्रेनों के माध्यम से विरासत और ग्रामीण रेल मार्गों पर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ परिचालन लागत में भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

    नई हाइड्रोजन ट्रेन को 10 कोच वाले डीईएमयू सेट के रूप में तैयार किया गया है। इसमें 682 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि कुल लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। नियमित परिचालन के दौरान इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी, लेकिन सुरक्षा और परिचालन मानकों को ध्यान में रखते हुए शुरुआती चरण में नियंत्रित गति पर संचालन किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना फिलहाल पायलट आधार पर शुरू की जा रही है, जिसके अनुभव के आधार पर भविष्य में इसका विस्तार किया जाएगा।

    हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वच्छ ऊर्जा तकनीक है। इसमें हाइड्रोजन गैस और वातावरण से प्राप्त ऑक्सीजन को फ्यूल सेल में रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से मिलाया जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को संचालित करती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसके स्थान पर केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, जिससे यह तकनीक पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेलवे को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त देंगी। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां ओवरहेड बिजली लाइनें बिछाना व्यावहारिक नहीं है, वहां यह तकनीक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है। कम समय में ईंधन भरने की सुविधा, स्वच्छ संचालन और बेहतर ऊर्जा दक्षता जैसी विशेषताएं इसे भविष्य के रेल परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बना सकती हैं। भारतीय रेलवे की यह पहल देश में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ टिकाऊ विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

  • यमुना के पानी पर हरियाणा-राजस्थान में बनी सहमति, लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी, तीन दशक पुरानी समस्या खत्म

    यमुना के पानी पर हरियाणा-राजस्थान में बनी सहमति, लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी, तीन दशक पुरानी समस्या खत्म

    नई दिल्ली। हरियाणा और राजस्थान के बीच लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों राज्यों ने यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते की मौजूदगी में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस समझौते को जल प्रबंधन और सहकारी संघवाद की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

    समझौते के तहत मानसून के दौरान जुलाई से अक्टूबर के बीच हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान को उसके हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के अनुसार लगभग 580 एमसीएम पानी तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा, जिससे पानी की सुरक्षित और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

    सरकार का कहना है कि इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे इन इलाकों में इस परियोजना से लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा जल संरक्षण और भूजल स्तर में सुधार की दिशा में भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    समझौते में लागत साझा करने, वित्तीय जिम्मेदारियों, जल आवंटन, जल छोड़ने की प्रक्रिया, रखरखाव और निगरानी तंत्र से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने और भविष्य में किसी भी विवाद के समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था भी तय की गई है। सरकार का दावा है कि वैज्ञानिक आधार पर तैयार यह मॉडल आने वाले वर्षों में भी प्रभावी ढंग से काम करेगा।

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता सहकारी संघवाद की भावना का मजबूत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य आपसी सहयोग और संवाद की भावना से कार्य करें तो वर्षों पुराने विवादों का भी स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने परियोजना को दोनों राज्यों के लिए लाभकारी बताते हुए इसे जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    सरकार के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से राजस्थान के हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पहुंचाना है, ताकि वर्ष 1994 के जल बंटवारा समझौते के तहत मिले पानी का प्रभावी उपयोग किया जा सके। इससे विशेष रूप से सूखे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी और सामाजिक व आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना के पूरा होने के बाद जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। साथ ही यह मॉडल भविष्य में राज्यों के बीच जल प्रबंधन से जुड़े अन्य मामलों के समाधान के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है। सरकार का विश्वास है कि सभी संबंधित एजेंसियों के सहयोग से इस परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लाखों लोगों को इसका लाभ पहुंचाया जाएगा।

  • आईडीएफसी बैंक फंड दुरुपयोग मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रकरणों में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    आईडीएफसी बैंक फंड दुरुपयोग मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रकरणों में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    नई दिल्ली । हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने जांच को आगे बढ़ाते हुए नौ आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालतों में चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी के अनुसार इन मामलों में सरकारी अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की कथित मिलीभगत के जरिए सरकारी धन के अनुचित उपयोग और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।

    सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्रों के अनुसार हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में अवैध बैंकिंग लेन-देन के कारण लगभग 504 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। वहीं चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में करीब 153 करोड़ रुपये की धनराशि प्रभावित होने का दावा किया गया है। दोनों मामलों को मिलाकर कथित अनियमितताओं का आंकड़ा 650 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचता है।

    जांच एजेंसी ने कहा है कि आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं को भी आरोपपत्र में शामिल किया गया है। एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया गया है और आगे की जांच भी जारी रहेगी।

    हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में दाखिल चार्जशीट पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में प्रस्तुत की गई है। इस मामले में दो निजी व्यक्तियों को कथित रूप से अपराध से अर्जित धन का लाभार्थी बताते हुए आरोपी बनाया गया है। यह इस प्रकरण में दाखिल दूसरी चार्जशीट है। इससे पहले एजेंसी 15 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिनमें सरकारी कर्मचारी, बैंक अधिकारी, निजी कंपनियां और अन्य व्यक्ति शामिल थे।

    दूसरी ओर चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में पहली बार आरोपपत्र दाखिल किया गया है। चंडीगढ़ स्थित विशेष अदालत में प्रस्तुत इस चार्जशीट में सात आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें पांच बैंक अधिकारी, स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ा एक अधिकारी तथा एक निजी व्यक्ति शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन करते हुए सरकारी धन को अनुचित तरीके से स्थानांतरित किया गया।

    सीबीआई के अनुसार इन मामलों की जांच विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त शिकायतों और प्राथमिक जांच रिपोर्टों के आधार पर शुरू की गई थी। हरियाणा के कई सरकारी विभागों से जुड़े मामलों की जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र से सीबीआई को सौंपी गई थी। वहीं चंडीगढ़ में आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों की जांच भी बाद में केंद्रीय एजेंसी के हवाले की गई।

    जांच के दौरान एजेंसी ने हाल ही में चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इन छापों के दौरान कुछ सरकारी अधिकारियों के आवासों, निजी कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों के परिसरों की जांच की गई। एजेंसी का उद्देश्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन के प्रवाह की जानकारी जुटाना था।

    सीबीआई का दावा है कि जांच में ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि कुछ सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों ने आपसी समन्वय के साथ खातों के संचालन, धन हस्तांतरण और रकम को विभिन्न माध्यमों से आगे भेजने में भूमिका निभाई। एजेंसी अब वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला को खंगाल रही है ताकि कथित अनियमितताओं के सभी पहलुओं को सामने लाया जा सके।

    जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भविष्य में अतिरिक्त आरोपपत्र भी दाखिल किए जा सकते हैं। मामले की सुनवाई विशेष अदालतों में आगे बढ़ेगी, जहां प्रस्तुत साक्ष्यों और आरोपों की न्यायिक जांच की जाएगी।

  • पंचकुला के रामगढ़ रेंज में DRDO का हाई-पावर बम परीक्षण, 2 किमी क्षेत्र ‘स्प्लिंटर डेंजर जोन’ घोषित

    पंचकुला के रामगढ़ रेंज में DRDO का हाई-पावर बम परीक्षण, 2 किमी क्षेत्र ‘स्प्लिंटर डेंजर जोन’ घोषित

    नई दिल्ली । हरियाणा के पंचकुला जिले में सुरक्षा और वैज्ञानिक परीक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण गतिविधि के तहत रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) 31 मई को रामगढ़ रेंज में हाई-पावर बम का परीक्षण करने जा रहा है। इस परीक्षण को लेकर स्थानीय प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है और आसपास के गांवों के लिए विशेष सुरक्षा एडवाइजरी जारी की गई है। यह परीक्षण DRDO की प्रतिष्ठित प्रयोगशाला टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला द्वारा किया जा रहा है, जो देश में हथियारों, विस्फोटकों और गोला-बारूद की जांच एवं विकास से जुड़ी प्रमुख इकाई मानी जाती है।

    प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह परीक्षण पूरी तरह से नियंत्रित परिस्थितियों में किया जाएगा और इसका उद्देश्य रक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत एवं सुरक्षित बनाना है। परीक्षण के दौरान संभावित खतरे को देखते हुए रामगढ़ रेंज के आसपास के लगभग दो किलोमीटर के दायरे को ‘स्प्लिंटर डेंजर जोन’ घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि इस क्षेत्र में बम विस्फोट के दौरान निकलने वाले टुकड़े और प्रभावी दबाव से किसी भी तरह की जनहानि या नुकसान से बचाव के लिए प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

    स्थानीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षण के दौरान बम के टुकड़े लगभग 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकते हैं, इसलिए सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इस वजह से प्रभावित क्षेत्र के सभी गांवों को अलर्ट पर रखा गया है और लोगों से अपील की गई है कि परीक्षण के निर्धारित समय के दौरान वे अपने घरों के अंदर ही रहें और किसी भी प्रकार की खुले स्थानों पर आवाजाही से बचें। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह एक नियमित और वैज्ञानिक परीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

    सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी की जाएगी और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी इस परीक्षण की मॉनिटरिंग के लिए मौजूद रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

    प्रशासन ने विशेष रूप से भानू और बिल्ला गांवों के निवासियों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा आसरेवाली, नाग्गल, मोगीनंद, किशनगढ़ और रामगढ़ नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अन्य गांवों के लोगों को भी सतर्क रहने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह परीक्षण देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है और इसमें सभी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

    स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई है ताकि परीक्षण प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके।

  • हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप

    हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप


    पंचकूला।
    हरियाणा (Haryana) में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) में 590 करोड़ रुपये (590 Crore Rupees) के घोटाले के बाद अब एक और बैंक में स्कैम किया गया है. पंचकूला (Panchkula) के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) की शाखा में हरियाणा सरकार (Haryana Government) के करीब 160 करोड़ रुपये गायब मिले हैं. इसमें पंचकूला नगर निगम की पांच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का रिकॉर्ड नहीं मिलने से हड़कंप मच गया है. फिलहाल, जांच के आदेश दिए गए हैं. उधर, विजिलेंस ने इस संंबंध में केस दर्ज कर लिया है. बैंक कर्मचारियों और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने इस बैंक शाखा में कुल 16 एफडी करवाई थीं, जिन्हें पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ट्रांसफर किया गया था. हाल ही में जब निगम ने एफडी मैच्योर होने पर राशि वापसी के लिए पत्र लिखा, तो बैंक ने जवाब दिया कि संबंधित एफडी का कोई रिकॉर्ड उनके पास मौजूद नहीं है।

    इस खुलासे के बाद नगर निगम ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू की. अकाउंट अधिकारियों, कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर की टीम ने दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सरकार और बैंक को भेजी. शुरुआती जांच में सामने आया कि फर्जी तरीके से समान दस्तावेजों पर अतिरिक्त खाते खोलकर रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर की गई. मामले में एक महिला खाते में बड़ी राशि ट्रांसफर होने की भी आशंका जताई जा रही है. अहम बात है कि पैसा शैल कंपनियों के खाते में जमा किया गया था।

    घोटाले को छिपाने के लिए कथित तौर पर एफडी के रिन्यूअल दस्तावेज नियमित रूप से निगम को भेजे जाते रहे, जिससे अधिकारियों को संदेह नहीं हुआ. हालांकि, जब हालिया घोटालों के बाद राशि वापस मांगी गई, तब पूरा मामला उजागर हुआ. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (इकोनॉमिक्स विंग) को जांच सौंपी गई है. साथ ही बैंक प्रबंधन ने भी शिकायत दर्ज कराई है. यह मामला करीब 590 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें पहले ही अन्य बैंकों के नाम सामने आ चुके हैं. अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।


    महिला के खाते में ट्रांसफर हुआ पैसा

    अब तक मिली जानकारी के अनुसार, एफडी के नाम पर बैंक में जमा कराई गई राशि को बैंक ने विभिन्न फर्जी खातों में ट्रांसफर किया है. मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये और 102 करोड़ की एफडी की मैच्योरिटी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा और फिर बैंक ने स्टेटमेंट में राशि ट्रांसफर दिखाई और बताया कि वास्तविक खाते में पैसा नहीं पहुंचा. जांच में पता चला कि स्टेटमेंट भी फर्जी थी और रकम गायब है. सूत्रों के अनुसार एक महिला के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है. बताया जा रहा है कि उसके परिवार में कुछ IAS -IPS अधिकारी हैं।


    पहले हुआ था 590 करोड़ रुपये का स्कैम

    गौर रहे कि इसके पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू बैंक में भी पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपये का गबन किया गया था. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कुल 590 करोड़ रुपये की राशि का फ्रॉड हुआ था, हरियाणा सरकार का यह पैसा हालांकि, बैंक ने बाद में लौटा दिया था, लेकिन इस मामले में अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

  • Haryana: IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ का घोटाला…. मास्टरमाइंड सहित 4 गिरफ्तार

    Haryana: IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ का घोटाला…. मास्टरमाइंड सहित 4 गिरफ्तार


    चंडीगढ़।
    हरियाणा (Haryana) में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) में 590 करोड़ रुपये के घोटाला में बड़ी खबर है. इस मामले में एसीबी की टीम ने घोटाला के मास्टर मांइड (Master Mind) रिभव समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. फर्जीवाड़े में शामिल अभिषेक सिंगला, अभय और महिला स्वाति की गिरफ्तारी हुई है।

    देर रात पंचकूला के सेक्टर 6 हॉस्पिटल में सभी आरोपियों का मेडिकल करवाया गयया है. मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से मामला दर्ज किया गया है.गौर रहे है कि आरोपी रिषभ बैंक में पूर्व मैनेजर था, जिसे नौकरी से निकाल दिया गया था. हरियाणा सरकार के पंचायत विभाग के पैसों का गबन किया गया था।

    बताया जा रहा है कि मास्टरमाइंड रिषभ मोहाली का रहने वाला है और वह बैंक में मैनेजर के पद पर तैनात रहा था. गौरतलब है कि बैंक की तरफ से अब तक 578 करोड़ रुपये हरियाणा सरकार को लौटा दिए गए हैं. इस पूरे घोटाले में प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 180 करोड़ रुपये थे।


    आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये के मास्टरमाइंड कौन

    दरअसल, हरियाणा सरकार के 18 विभागों के खातों से कुल 590 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई थी. आरोपी मास्टरमाइंड चंडीगढ़ में आईडीएफसी ब्रांच में तैनात था. 19 फरवरी को बैंक के हैडक्वार्टर में इस बारे में पता चला था. पिछले साल बैंक ने इंटर ऑडिट करवाया था और हेराफेरी की बात सामने आने पर मास्टरमाइंड पूर्व मैनेजर को नौकरी से निकाल लिया था. आरोपी ने दोस्तों और जानकारों के नाम पर कागजों में फर्जी कंपनियां बनाईं थी और सरकारी पैसे को इन खातों में ट्रांसफर किया. ये पैसा एफडी के रूप में दिया गया था. उधर, मामले को लेकर मंगलवार को बजट सत्र के दौरान हंगामा भी देखने को मिला था और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर सवाल उठाए थे. इस सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा था कि सारा पैसा वापस आ गया है और जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है।


    बैंक की प्रतिक्रिया भी आई

    आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया कि हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों के खातों में मूलधन एवं ब्याज समेत पूरी राशि जमा करा दी है जो कुल मिलाकर 583 करोड़ रुपये है. बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, “मामले की जांच जारी होने के बावजूद बैंक ने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों की ओर से दावा की गई मूलधन और ब्याज की समूची राशि का भुगतान कर दिया है, जो शुद्ध रूप से 583 करोड़ रुपये है.” बैंक ने कहा कि वह कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और राज्य सरकार के विभागों के साथ मिलकर इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा और अपनी देनदारियों की वसूली के लिए प्रयासरत रहेगा. बैंक ने चंडीगढ़ की एक शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का रविवार को खुलासा किया था।

    सीएम सैनी को सदन में देना पड़ा जवाब
    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले पर विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक मामले में करीब 556 करोड़ रुपये की राशि वापस हासिल कर ली है. मुख्यमंत्री ने कहा, “लगभग 22 करोड़ रुपये के ब्याज समेत करीब 556 करोड़ रुपये 24 घंटे के भीतर ही वापस आ गए.” उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार के विभागों से संबंधित पूरी राशि दोबारा खातों में जमा करा दी गई है और यह वसूली 24 घंटे के भीतर हुई है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, बैंक ने सरकार को सूचित किया है कि मामला चंडीगढ़ की एक शाखा से जुड़ा है, जिसमें मध्य और निचले स्तर के चार-पांच बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है. उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे बैंक कर्मचारी हों, निजी व्यक्ति हों या सरकारी कर्मचारी हों. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने पहले कहा था कि यह धोखाधड़ी हरियाणा सरकार से जुड़े सीमित खातों तक ही सीमित है और चंडीगढ़ शाखा के अन्य ग्राहकों पर इसका कोई प्रभाव नहीं है. मामला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ एयू स्माल फाइनेंस बैंक को भी सरकारी कामकाज की सूची से हटाने का निर्णय लिया है।

  • महाराष्ट्र, बंगाल, बिहार और हरियाणा समेत 10 राज्यों के लिए राज्यसभा चुनाव की घोषणा, 16 मार्च को होगा मतदान

    महाराष्ट्र, बंगाल, बिहार और हरियाणा समेत 10 राज्यों के लिए राज्यसभा चुनाव की घोषणा, 16 मार्च को होगा मतदान


    नई दिल्ली । चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। यह चुनाव उन सदस्यों की जगह भरे जाने के लिए कराया जा रहा है, जिनका कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। कुल 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होंगे। आयोग के अनुसार 26 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन दाखिल करने, जांच और नाम वापस लेने की प्रक्रिया तय समय सीमा के अनुसार पूरी की जाएगी। सभी सीटों के लिए मतदान और मतगणना 16 मार्च 2026 को ही होंगे।

    मतदान और मतगणना का कार्यक्रम

    26 फरवरी 2026 को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च 2026 है, जबकि 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 मार्च 2026 तय की गई है। मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी। चुनाव प्रक्रिया 20 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी।

    कौन से राज्यों की सीटों पर चुनाव
    इस चुनाव में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश की सीटों के लिए चुनाव होगा। राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है और राज्यों में चुनावी हलचल बढ़ गई है।

    रिटायर हो रहे सदस्य

    महाराष्ट्र: डॉ. भगवत किशनराव कराड, डॉ. फौजिया तहसीन अहमद खान, प्रियंका विक्रम चतुर्वेदी, शरदचंद्र गोविंदराव पवार, धैर्यशील मोहन पाटिल, रजनी अशोकराव पाटिल, रामदास बंदू अठावले।

    ओडिशा: ममता मोहंता, मुजीबुल्ला खान, सुजीत कुमार, निरंजन बिशी।

    तमिलनाडु: एन आर एलंगो, पी सेल्वारासु, एम थम्बिदुरई, तिरुची सिवा, डॉ. कनिमोझी एन वी एन सोमू, जी के वासन।

    पश्चिम बंगाल: साकेत गोखले, ऋतब्रत बनर्जी, बिकाश रंजन भट्टाचार्य, मौसम नूर, सुब्रत बक्शी।

    असम: रामेश्वर तेली, भुवनेश्वर कलिता, अजीत कुमार भुइयां।

    बिहार: अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेम चंद गुप्ता, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा, हरिवंश नारायण सिंह।

    छत्तीसगढ़: कवि तेजपाल सिंह तुलसी, फूलो देवी नेताम।

    हरियाणा: किरण चौधरी, राम चंदर जांगड़ा।

    हिमाचल प्रदेश: इंदु बाला गोस्वामी।

    तेलंगाना: डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, के आर सुरेश रेड्डी।

    राजनीतिक दल अब अपने उम्मीदवार तय कर रहे हैं और 16 मार्च 2026 को इन सभी सीटों के लिए मतदान होगा।