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  • हरियाणा के 60 साल पूरे होने पर सोनीपत में वैश्विक विचारों का नया मंच तैयार करेगी जिंदल यूनिवर्सिटी

    हरियाणा के 60 साल पूरे होने पर सोनीपत में वैश्विक विचारों का नया मंच तैयार करेगी जिंदल यूनिवर्सिटी

    नई दिल्ली ।हरियाणा के गठन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्य में शिक्षा, नवाचार और वैश्विक विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल की घोषणा की गई है। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी जनवरी 2027 में अपने पहले वर्ल्ड आइडियाज फोरम का आयोजन करेगी। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 23 से 25 जनवरी 2027 तक सोनीपत स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होगा। इसका विषय ‘वियर द वर्ल्ड आइडिया मीट’ रखा गया है, जिसका उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले विचारों और दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाना है।

    इस सम्मेलन में सार्वजनिक जीवन, विश्वविद्यालयों, उद्योग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और नागरिक समाज से जुड़े प्रमुख लोगों के शामिल होने की योजना है। आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे और वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करेंगे। इसे वार्षिक वैश्विक सम्मेलन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है, ताकि प्रत्येक वर्ष नए विषयों और विचारों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संवाद को आगे बढ़ाया जा सके।

    हरियाणा का गठन 1 नवंबर 1966 को हुआ था। राज्य के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह पहल उसकी विकास यात्रा को भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य हरियाणा को शिक्षा, शोध, रचनात्मकता और अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देना है। इसके साथ ही सोनीपत को वैश्विक स्तर पर विचारों और ज्ञान के आदान-प्रदान के प्रमुख स्थान के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

    विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति एवं संरक्षक नवीन जिंदल ने कहा कि हरियाणा की छह दशक की यात्रा उसके लोगों की उद्यमशीलता, दृढ़ संकल्प और आकांक्षाओं को दर्शाती है। कृषि, उद्योग और खेल के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियां उसे शिक्षा, नवाचार और ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में आगे बढ़ने का आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे भी यही सोच थी कि हरियाणा में विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान विकसित हों और उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव मजबूत हो।

    उन्होंने बताया कि वर्ल्ड आइडियाज फोरम के माध्यम से दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख आवाजों को सोनीपत तक लाने और युवाओं को भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विमर्श का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जाएगा।

    फोरम के पहले संस्करण में शासन व्यवस्था, आर्थिक विकास, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सतत विकास, संस्कृति और मानव कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा तकनीकी बदलावों के प्रभाव, सार्वजनिक संस्थाओं की मजबूती, रोजगार और अवसरों के विस्तार तथा आने वाली पीढ़ियों की तैयारी जैसे मुद्दे भी विचार-विमर्श का हिस्सा बनेंगे।

    कार्यक्रम में मुख्य भाषण, नेतृत्व संवाद, सार्वजनिक व्याख्यान, साहित्यिक चर्चाएं, पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित करने की योजना है। इसके साथ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रदर्शनी, छात्र वाद-विवाद, नीति आधारित सिमुलेशन तथा कला, संगीत, रंगमंच और डिजाइन से संबंधित प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ विद्यार्थियों और युवा प्रतिभाओं की भागीदारी पर विशेष जोर रहेगा।

    विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर सी. राज कुमार के अनुसार, इस मंच का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां लोग स्वतंत्र रूप से विचार रख सकें, एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझें और अलग-अलग विषयों के बीच संवाद स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज और भविष्य से जुड़े सवालों पर सार्थक चर्चा के अवसर भी उपलब्ध कराने चाहिए।

    फोरम को दीर्घकालिक संस्थागत पहल के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसके तहत वर्ल्ड आइडियाज लेक्चर, वर्ल्ड आइडियाज अवॉर्ड, वर्ल्ड आइडियाज बुक प्राइज और ग्लोबल यंग आइडियाज फेलोशिप जैसी योजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा इंडिया आइडियाज लेक्चर, फ्यूचर लीडर्स डायलॉग और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज राउंडटेबल के माध्यम से सार्वजनिक नेतृत्व, उच्च शिक्षा और युवा प्रतिभाओं को जोड़ने की योजना है।

    इस पहल के तहत वर्ल्ड आइडियाज डिक्लेरेशन, ग्लोबल फ्यूचर्स रिपोर्ट और वर्ल्ड आइडियाज इंडेक्स भी प्रस्तावित हैं। इनके जरिए सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं को व्यापक सार्वजनिक विमर्श और भविष्य की साझेदारियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    जनवरी 2027 में होने वाला पहला सम्मेलन हरियाणा की 60वीं वर्षगांठ और वर्ष 2047 तक भारत के विकास लक्ष्यों के बीच भविष्य की दिशा पर चर्चा का अवसर बनेगा। आयोजन से सोनीपत में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ने तथा नई संस्थागत साझेदारियों के अवसर बनने की उम्मीद है।

  • सिंगापुर दौरे पर सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में निवेश, उद्योग और इनोवेशन बढ़ाने की प्राथमिकताएं सामने रखीं

    सिंगापुर दौरे पर सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में निवेश, उद्योग और इनोवेशन बढ़ाने की प्राथमिकताएं सामने रखीं

    नई दिल्ली ।हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन सिंगापुर इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ फोरम के तहत आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में सिंगापुर के प्रमुख उद्योगपति, विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य हरियाणा में भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ हरियाणा और सिंगापुर के बीच आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशना रहा।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य हरियाणा को केवल एक औद्योगिक शक्ति तक सीमित नहीं रखना, बल्कि इसे भारत की इनोवेशन कैपिटल के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के जरिए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और साझेदारी को नई दिशा देने के अवसर मिल रहे हैं। सैनी ने उन्हें अपने विचार रखने का अवसर देने के लिए सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन का आभार भी व्यक्त किया।

    सैनी ने कहा कि यह मंच दो ऐसी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संवाद का अवसर उपलब्ध कराता है, जिनके बीच विश्वास, मित्रता और सहयोग का संबंध लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में हरियाणा ने सिंगापुर की कंपनियों और संस्थाओं के साथ पांच बड़े समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे। मुख्यमंत्री ने हरियाणा की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य उत्तर भारत के बड़े उपभोक्ता और विनिर्माण बाजार के बीच स्थित है।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक, हरियाणा में प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और बेहतर फ्रेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है। उनके अनुसार, ये सुविधाएं राज्य में उद्योगों और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम और उसके आसपास इंटीग्रेटेड टाउनशिप, कमर्शियल डेवलपमेंट और आधुनिक शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सिंगापुर की कंपनियों के साथ साझेदारी की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने सिंगापुर की कंपनियों से हरियाणा में अपने टेक्नोलॉजी और प्रोफेशनल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का भी आह्वान किया।

    सैनी ने बताया कि हाल ही में हरियाणा ने सिंगापुर स्थित एक ग्लोबल स्कूल ग्रुप के साथ साझेदारी की है। इसके तहत राज्य में विश्वस्तरीय के-12 शिक्षा का बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जिसमें कारोबार तेजी से आगे बढ़े और उसके साथ रोजगार, निवेश तथा इनोवेशन के नए अवसर भी पैदा हों। उन्होंने कहा कि सिंगापुर के साथ सहयोग हरियाणा के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • हरियाणा के पानीपत में किसानों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने जमीन का मुआवजा 40 से बढ़ाकर 78 लाख किया

    हरियाणा के पानीपत में किसानों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने जमीन का मुआवजा 40 से बढ़ाकर 78 लाख किया


    नई दिल्ली । पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पानीपत के सिवाह गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में जमीन मालिकों को राहत देते हुए अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है। यह जमीन 25 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। पहले भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने इसका मुआवजा 40 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया था।

    भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 2013 में शुरू हुई थी। 28 फरवरी 2013 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद 16 अप्रैल 2013 को धारा छह के तहत अगली अधिसूचना जारी हुई। 26 सितंबर 2013 को भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था।

    मुआवजे की इस राशि से असंतुष्ट जमीन मालिकों ने इसे बढ़ाने की मांग की और मामला अदालत तक पहुंचा। संदर्भ अदालत ने 23 जनवरी 2017 को जमीन का बाजार मूल्य बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। इसके बाद भी मुआवजे को लेकर विवाद जारी रहा और मामला हाई कोर्ट पहुंचा।

    हाई कोर्ट के सामने जमीन मालिकों और राज्य सरकार, दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलों के समर्थन में बिक्री विलेख पेश किए। जमीन मालिकों की ओर से वर्ष 2010 से 2014 के बीच हुए कई जमीन सौदों के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। इनमें कुछ लेन-देन में जमीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक दर्ज थी।

    अदालत ने माना कि संबंधित अवधि के वास्तविक और तुलनीय बिक्री विलेख उपलब्ध होने की स्थिति में पुराने अवार्ड को केवल उसके आधार पर यांत्रिक तरीके से लागू करना उचित नहीं है। जमीन का बाजार मूल्य तय करते समय आसपास की जमीन के वास्तविक लेन-देन, उनकी तुलना और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए कुछ बिक्री विलेखों में जमीन की कीमत 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ के बीच बताई गई थी। वहीं जमीन मालिकों द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में इससे कहीं अधिक कीमत वाले सौदे सामने आए। अदालत ने उपलब्ध बिक्री विलेखों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद जमीन के उचित बाजार मूल्य का निर्धारण किया।

    अदालत ने अंततः अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया। इस तरह भूमि अधिग्रहण कलेक्टर द्वारा निर्धारित 40 लाख रुपये प्रति एकड़ की राशि की तुलना में बाजार मूल्य में 38 लाख रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी हुई।

    फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजा तय करने के लिए किसी पुराने अवार्ड को हर मामले में सीधे आधार नहीं बनाया जा सकता। यदि संबंधित समय और क्षेत्र से जुड़े वास्तविक बिक्री विलेख उपलब्ध हैं, तो उनका उचित मूल्यांकन जरूरी है। इससे अधिग्रहित जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का अधिक उचित आकलन किया जा सकता है।

    इस फैसले के बाद सिवाह गांव की अधिग्रहित जमीन के लिए निर्धारित बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ हो गया है। मामला 25 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के उद्देश्य से की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़ा था।

  • सोनीपत में खेत के कमरे में 32 वर्षीय महिला की हत्या, पति पर शराब के नशे में कस्सी से हमला करने का आरोप

    सोनीपत में खेत के कमरे में 32 वर्षीय महिला की हत्या, पति पर शराब के नशे में कस्सी से हमला करने का आरोप

    नई दिल्ली: हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव रहमाणा में 32 वर्षीय महिला की हत्या का मामला सामने आया है। महिला की पहचान राजवंती के रूप में हुई है। वह अपने पति और करीब 11 साल के बेटे के साथ एक किसान के खेत में बने कमरे में रह रही थी। आरोप है कि घरेलू विवाद के चलते उसके पति नरेश ने शराब के नशे में उस पर धारदार कृषि उपकरण कस्सी से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण महिला की मौत हो गई। घटना के बाद से आरोपी पति की तलाश की जा रही है।

    राजवंती और उसका पति नरेश मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। दोनों अपने बेटे के साथ सोनीपत के रहमाणा गांव में किसान राजेंद्र के खेत में बने कमरे में रह रहे थे। बताया गया है कि पति-पत्नी के बीच अक्सर घरेलू मामलों को लेकर विवाद होता रहता था। ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों शराब पीने के आदी थे और उनके बीच आए दिन कहासुनी होती थी।

    आरोप है कि घटना के समय नरेश शराब के नशे में था। घरेलू विवाद के दौरान उसने कथित तौर पर कस्सी से राजवंती पर हमला कर दिया। महिला के चेहरे, सिर और पेट पर कई वार किए गए। हमले में उसे गंभीर चोटें आईं, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    महिला की हत्या की सूचना मिलने पर मोहाना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और वारदात से जुड़े तथ्यों की पड़ताल के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी बुलाया गया।

    पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे घरेलू विवाद की बात सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर महिला के पति नरेश पर हत्या करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस घटनाक्रम की सभी परिस्थितियों की जांच कर रही है और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

    पुलिस प्रवक्ता रवींद्र कुमार के मुताबिक, गांव रहमाणा से महिला की हत्या की सूचना मिली थी। शुरुआती जांच में महिला के पति पर हत्या का आरोप सामने आया है। महिला पर किसी तेजधार हथियार से हमला किए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी पति की तलाश की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान वारदात से जुड़े तथ्यों, घरेलू विवाद की परिस्थितियों और महिला की मौत के कारणों की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

  • 504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थाओं से जुड़े 504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में छह अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच एजेंसी ने साकेत कुमार, राम कुमार सिंह, पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन पर बैंक अधिकारियों तथा अन्य आरोपियों के साथ कथित आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। चार्जशीट में सरकारी धन को निजी बैंकों में स्थानांतरित कराने, बैंक चयन और एफडी निवेश से जुड़े नियमों की अनदेखी तथा वित्त विभाग की निर्धारित सीमाओं को दरकिनार करने जैसे आरोप शामिल हैं।

    जांच के मुताबिक अधिकारियों पर सरकारी धन के निवेश में प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के साथ-साथ कथित तौर पर रिश्वत या अन्य अनुचित लाभ लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामले में सबूत छिपाने और वित्तीय फैसलों के जरिए कुछ निजी बैंक अधिकारियों को फायदा पहुंचाने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।

    साकेत कुमार के संबंध में आरोप है कि उन्होंने 16 जून 2025 से 10 अप्रैल 2026 के बीच विकास एवं पंचायत विभाग के आयुक्त एवं सचिव के पद पर रहते हुए हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। जांच के अनुसार, एक निजी बैंक के पूर्व अधिकारी की सिफारिश पर एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट से 25 करोड़ रुपये निकाले गए और उन्हें संबंधित बैंक में जमा कराया गया।

    पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राम कुमार सिंह को लेकर भी चार्जशीट में वित्तीय लेनदेन का उल्लेख है। जांच के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को उनके आवास पर 50 लाख रुपये पहुंचाए गए। इसके बाद 22 जनवरी को दिल्ली में उनके बेटे प्रशांत सिंह को तीन अलग-अलग किश्तों में कुल दो करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप है। इन किश्तों में एक करोड़ रुपये, 50 लाख रुपये और 50 लाख रुपये शामिल थे।

    हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष विनीत गर्ग के मामले में भी कथित अनुचित लाभ का उल्लेख किया गया है। जांच में आरोप लगाया गया कि दीपावली से पहले एक बैंक अधिकारी के माध्यम से उनके घर 50-50 ग्राम वजन के दो सोने के सिक्के पहुंचाए गए। चार्जशीट में पंकज अग्रवाल के लिए होटल में पार्टियों और नृत्य कार्यक्रमों के आयोजन का भी उल्लेख है। इन घटनाओं को सरकारी वित्तीय फैसलों से जुड़े कथित अनुचित लाभ के संदर्भ में जांचा गया।

    एचपीजीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष मोहम्मद शाइन पर भी बैंक को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट के मुताबिक नवंबर 2024 में इंडसइंड बैंक में करीब 108.46 करोड़ रुपये की एफडी समय से पहले तुड़वाई गई। इसमें से 50 करोड़ रुपये दूसरे निजी बैंक में जमा कराए गए। जांच एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया से एचपीजीसीएल को करीब 1.66 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ।

    वहीं, प्रदीप कुमार पर ब्याज दरों से संबंधित अनियमितताओं के जरिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है। चार्जशीट के अनुसार इस मामले में बोर्ड को करीब 159.86 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    कुल मिलाकर जांच में सरकारी संस्थाओं के बैंक खातों और सावधि जमा से जुड़े फैसलों, बैंक चयन, धन हस्तांतरण और कथित निजी लाभ के बीच संबंधों की पड़ताल की गई है। छह अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल चार्जशीट में दर्ज आरोप हैं। मामले में इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच होगी और अंतिम जिम्मेदारी अदालत के निर्णय के आधार पर तय होगी।

  • सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    नई दिल्ली ।कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुड्डा सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने के दौरान की गई अपनी कथित टिप्पणी को लेकर विवाद में घिरने के बाद सफाई दी है। हुड्डा ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उनकी मंशा सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बिल्कुल नहीं थी। उन्होंने कहा कि सिख समाज के साथ उनका रिश्ता परिवार जैसा है और जरूरत के समय दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।

    सज्जन कुमार का हाल ही में निधन हुआ था। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व नेता थे। उनके निधन के बाद श्रद्धांजलि देते हुए हुड्डा की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने सज्जन कुमार के सार्वजनिक जीवन और लोगों से जुड़ाव की प्रशंसा की।

    इस टिप्पणी के बाद हुड्डा पर सवाल उठने लगे। मामला इतना बढ़ा कि हरियाणा कांग्रेस के नेता कुलदीप शर्मा ने भी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई। इसके बाद हुड्डा ने अपने बयान को लेकर विस्तृत सफाई सामने रखी और कहा कि उनकी बात का अर्थ उस तरह नहीं था, जिस तरह उसे सार्वजनिक चर्चा में पेश किया जा रहा है।

    हुड्डा ने कहा कि पिछले दो दिनों से वह देख रहे हैं कि उनके बयान को अलग संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके बयान में एक ऐसा अंग्रेजी शब्द भी जोड़ा गया, जिसका उन्होंने इस्तेमाल नहीं किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कोई भी भावना सिख समाज के किसी व्यक्ति को ठेस पहुंचाने वाली नहीं थी।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि सिख समाज देश का गौरवशाली समाज है और उसके बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि उनकी किसी बात से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समुदाय के साथ उनके परिवार और राजनीतिक जीवन का पुराना संबंध रहा है।

    हुड्डा ने अपने परिवार के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके परदादा चौधरी मातूराम का संबंध पंजाब के पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन से रहा था। उन्होंने शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह के साथ उनके परदादा के संघर्ष का जिक्र किया और कहा कि यह इतिहास दोनों समुदायों के बीच पुराने संबंधों को दर्शाता है।

    उन्होंने किसान आंदोलन का भी उल्लेख किया। हुड्डा के मुताबिक, जब पंजाब से किसान आंदोलन के दौरान किसान हरियाणा पहुंचे तो उन्होंने उनके साथ खड़े होकर समर्थन दिया था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच यह सहयोग किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बना हुआ है।

    1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी हुड्डा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई में वह सिख समाज के साथ हैं और दंगों के मामलों में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी दोषी को बचाया नहीं जाना चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है।

    इस सफाई के बाद हुड्डा ने विवादित टिप्पणी को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। अब राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर आगे क्या प्रतिक्रिया होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

  • चरखी दादरी में दिनदहाड़े 30 राउंड फायरिंग से सनसनी, स्कॉर्पियो सवार सात लोग घायल, सीसीटीवी से आरोपियों की तलाश

    चरखी दादरी में दिनदहाड़े 30 राउंड फायरिंग से सनसनी, स्कॉर्पियो सवार सात लोग घायल, सीसीटीवी से आरोपियों की तलाश

    नई दिल्ली । हरियाणा के चरखी दादरी में दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। सिटी थाने के सामने एक काली स्कॉर्पियो को निशाना बनाकर अज्ञात हमलावरों ने लगातार गोलियां चलाईं, जिससे वाहन में सवार सात लोग घायल हो गए। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमलावर एक बाइक पर सवार होकर आए थे। उन्होंने स्कॉर्पियो को बीच रास्ते में रुकवाया और अचानक फायरिंग शुरू कर दी। कुछ ही क्षणों में वाहन गोलियों से छलनी हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर दी और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी।

    हमले में घायल हुए लोगों की पहचान अंकित, कीर्तिमान, सूरज, सनी, कृष्ण, अमित और एक अन्य अंकित के रूप में हुई है। सभी घायलों को पहले स्थानीय सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रोहतक स्थित पीजीआई रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है और पुलिस लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, डीएसपी और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया और गोलियों के खोखे सहित अन्य महत्वपूर्ण सुराग एकत्र किए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और हर पहलू की गहन पड़ताल की जाएगी।

    हमलावरों की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के साथ प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि आरोपियों की गतिविधियों और उनके भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके। इसके अलावा आसपास के थाना क्षेत्रों को भी सतर्क कर दिया गया है और संदिग्ध वाहनों की जांच तेज कर दी गई है।

    घटना के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि आपसी रंजिश, पुराना विवाद और अन्य संभावित कारणों सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों तक जल्द पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके और लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम रहे।

  • री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    नई दिल्ली । री-नीट परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल चर्चा का केंद्र बन गए हैं। दोनों अभ्यर्थियों ने 720 में से 715 अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद मेरिट सूची में आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग रैंक मिलने से अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर ऐसी स्थिति में रैंक किस आधार पर तय की जाती है।

    दरअसल, मेडिकल प्रवेश परीक्षा में केवल कुल अंक ही अंतिम रैंक का आधार नहीं होते। जब दो या अधिक अभ्यर्थियों के कुल अंक समान होते हैं, तब एनटीए की निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया लागू की जाती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य समान अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के बीच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मेरिट तय करना होता है। इसी नियम के कारण समान अंक होने के बावजूद दोनों अभ्यर्थियों की ऑल इंडिया रैंक अलग-अलग निर्धारित की गई।

    टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया के पहले चरण में अभ्यर्थियों के बायोलॉजी विषय के अंक देखे जाते हैं। इसमें बॉटनी और जूलॉजी दोनों के संयुक्त प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। जिस उम्मीदवार के बायोलॉजी में अधिक अंक होते हैं, उसे बेहतर रैंक दी जाती है। यदि इस स्तर पर भी दोनों के अंक समान हों, तो अगले चरण में केमिस्ट्री के अंकों की तुलना की जाती है। यदि केमिस्ट्री में भी बराबरी बनी रहती है, तब फिजिक्स के अंकों के आधार पर रैंक तय की जाती है।

    यदि तीनों प्रमुख विषयों में भी दोनों अभ्यर्थियों का प्रदर्शन समान हो, तो आगे उत्तर देने के पैटर्न का विश्लेषण किया जाता है। इसमें सही और गलत उत्तरों के अनुपात को देखा जाता है। जिस अभ्यर्थी ने अपेक्षाकृत कम गलत उत्तर दिए होते हैं या जिसका गलत उत्तरों का अनुपात बेहतर होता है, उसे मेरिट सूची में प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था परीक्षा की गुणवत्ता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

    इसके बाद भी यदि बराबरी बनी रहती है, तो अंतिम निर्णय एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की निगरानी में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। यही कारण है कि समान अंक प्राप्त करने वाले सभी उम्मीदवारों की रैंक हमेशा एक जैसी नहीं होती।

    आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के मामले में भी यही प्रक्रिया लागू की गई। दोनों के कुल अंक 715 रहे, लेकिन विषयवार प्रदर्शन और टाई-ब्रेकिंग के शुरुआती चरणों में आर्यन गुप्ता का प्रदर्शन बेहतर पाया गया। इसी आधार पर उन्हें ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। यह निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार लिया गया और मेरिट सूची उसी आधार पर तैयार की गई।

    गौरतलब है कि पहले समान अंक की स्थिति में अभ्यर्थियों की आयु को भी रैंक निर्धारण का आधार बनाया जाता था। अधिक आयु वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती थी। हालांकि बाद में इस नियम को लेकर विवाद सामने आने के बाद इसे समाप्त कर दिया गया। वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह विषयवार प्रदर्शन और निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया पर आधारित है, जिससे मेरिट सूची अधिक पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत के अनुरूप तैयार की जा सके।

  • रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें

    रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें


    नई दिल्ली ।
    भारतीय रेलवे हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित ट्रेन हरियाणा के जींद से अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके साथ ही भारतीय रेलवे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएगा। यह ट्रेन शुरुआती चरण में जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी और इसे भारतीय रेलवे की भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल परिवहन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की तस्वीरें साझा करते हुए इसे भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा से अपनी यात्रा शुरू करने जा रही है। इस घोषणा के बाद देशभर में इस परियोजना को लेकर उत्साह बढ़ गया है। रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित तकनीक भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    यह ट्रेन भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत विकसित की गई है। इस योजना का उद्देश्य उन रेल मार्गों पर डीजल इंजनों का विकल्प तैयार करना है, जहां विद्युतीकरण करना कठिन या अत्यधिक खर्चीला है। रेलवे आने वाले समय में देशभर में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनों को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इन ट्रेनों के माध्यम से विरासत और ग्रामीण रेल मार्गों पर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ परिचालन लागत में भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

    नई हाइड्रोजन ट्रेन को 10 कोच वाले डीईएमयू सेट के रूप में तैयार किया गया है। इसमें 682 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि कुल लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। नियमित परिचालन के दौरान इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी, लेकिन सुरक्षा और परिचालन मानकों को ध्यान में रखते हुए शुरुआती चरण में नियंत्रित गति पर संचालन किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना फिलहाल पायलट आधार पर शुरू की जा रही है, जिसके अनुभव के आधार पर भविष्य में इसका विस्तार किया जाएगा।

    हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वच्छ ऊर्जा तकनीक है। इसमें हाइड्रोजन गैस और वातावरण से प्राप्त ऑक्सीजन को फ्यूल सेल में रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से मिलाया जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को संचालित करती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसके स्थान पर केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, जिससे यह तकनीक पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेलवे को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त देंगी। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां ओवरहेड बिजली लाइनें बिछाना व्यावहारिक नहीं है, वहां यह तकनीक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है। कम समय में ईंधन भरने की सुविधा, स्वच्छ संचालन और बेहतर ऊर्जा दक्षता जैसी विशेषताएं इसे भविष्य के रेल परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बना सकती हैं। भारतीय रेलवे की यह पहल देश में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ टिकाऊ विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

  • यमुना के पानी पर हरियाणा-राजस्थान में बनी सहमति, लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी, तीन दशक पुरानी समस्या खत्म

    यमुना के पानी पर हरियाणा-राजस्थान में बनी सहमति, लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी, तीन दशक पुरानी समस्या खत्म

    नई दिल्ली। हरियाणा और राजस्थान के बीच लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों राज्यों ने यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते की मौजूदगी में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस समझौते को जल प्रबंधन और सहकारी संघवाद की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

    समझौते के तहत मानसून के दौरान जुलाई से अक्टूबर के बीच हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान को उसके हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के अनुसार लगभग 580 एमसीएम पानी तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा, जिससे पानी की सुरक्षित और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

    सरकार का कहना है कि इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे इन इलाकों में इस परियोजना से लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा जल संरक्षण और भूजल स्तर में सुधार की दिशा में भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    समझौते में लागत साझा करने, वित्तीय जिम्मेदारियों, जल आवंटन, जल छोड़ने की प्रक्रिया, रखरखाव और निगरानी तंत्र से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने और भविष्य में किसी भी विवाद के समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था भी तय की गई है। सरकार का दावा है कि वैज्ञानिक आधार पर तैयार यह मॉडल आने वाले वर्षों में भी प्रभावी ढंग से काम करेगा।

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता सहकारी संघवाद की भावना का मजबूत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य आपसी सहयोग और संवाद की भावना से कार्य करें तो वर्षों पुराने विवादों का भी स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने परियोजना को दोनों राज्यों के लिए लाभकारी बताते हुए इसे जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    सरकार के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से राजस्थान के हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पहुंचाना है, ताकि वर्ष 1994 के जल बंटवारा समझौते के तहत मिले पानी का प्रभावी उपयोग किया जा सके। इससे विशेष रूप से सूखे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी और सामाजिक व आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना के पूरा होने के बाद जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। साथ ही यह मॉडल भविष्य में राज्यों के बीच जल प्रबंधन से जुड़े अन्य मामलों के समाधान के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है। सरकार का विश्वास है कि सभी संबंधित एजेंसियों के सहयोग से इस परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लाखों लोगों को इसका लाभ पहुंचाया जाएगा।