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  • एचडीएफसी बैंक के खिलाफ अमेरिका में निवेशकों की कानूनी जंग ब्याज भुगतान को मार्केटिंग खर्च दिखाने का आरोप

    एचडीएफसी बैंक के खिलाफ अमेरिका में निवेशकों की कानूनी जंग ब्याज भुगतान को मार्केटिंग खर्च दिखाने का आरोप


    नई दिल्ली। एचडीएफसी बैंक के खिलाफ न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया है। शिकायत में एक राज्य सरकार की एजेंसी को कथित अतिरिक्त ब्याज भुगतान को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाने और निवेशकों को गलत जानकारी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बैंक ने मुकदमे को निराधार बताते हुए मजबूती से बचाव करने की बात कही है। गुरुवार को बैंक के शेयर 1.75 प्रतिशत गिरकर 714.45 रुपए पर बंद हुए।

    देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक के सामने अमेरिका में दायर एक क्लास एक्शन मुकदमे के बाद नई कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है। न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में निवेशक ज्वलंत नटवरलाल सोनेजी की ओर से यह मुकदमा दायर किया गया है। मामले में बैंक के साथ उसके सीईओ शशिधर जगदीशन और सीएफओ श्रीनिवासन वैद्यनाथन को भी प्रतिवादी बनाया गया है। मुकदमा उन निवेशकों की ओर से दायर किया गया है जिन्होंने 17 जुलाई 2023 से 26 मई 2026 के बीच एचडीएफसी बैंक के अमेरिकन डिपॉजिटरी शेयर खरीदे थे।

    शिकायत में बैंक पर आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी एमएसआरडीसी से बड़े जमा हासिल करने के लिए उसे सामान्य दर से अधिक ब्याज देने का कथित इंतजाम किया गया। आरोप के मुताबिक एजेंसी को 6.01 प्रतिशत ब्याज देने का वादा किया गया था जबकि आम ग्राहकों के लिए मानक बचत दर 3.5 प्रतिशत थी। शिकायत में दावा किया गया है कि यह व्यवस्था बैंकिंग नियमों के विपरीत थी और इसी वजह से कथित तौर पर भुगतान को दूसरे तरीके से दिखाने का रास्ता अपनाया गया।

    मुकदमे के अनुसार 2023 से 2025 के बीच करीब 45 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज राज्य की एजेंसी को दिया गया। आरोप है कि इस रकम को सीधे ब्याज भुगतान के रूप में दर्ज करने के बजाय मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया गया और सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान की स्पॉन्सरशिप के माध्यम से भुगतान किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि भुगतान तीसरे पक्ष के विक्रेताओं के जरिए किया गया। हालांकि ये सभी आरोप फिलहाल मुकदमे में लगाए गए दावे हैं और अदालत में इनका परीक्षण होना बाकी है।

    मामले में बैंक की कथित आंतरिक सतर्कता जांच का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार जांच में इस तरीके को आरबीआई के मास्टर निर्देशों और बैंक की आंतरिक एंटी ब्राइबरी नीतियों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद वादियों ने आरोप लगाया कि बैंक ने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग के समक्ष दाखिल अपनी रिपोर्टों में निवेशकों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी। वित्त वर्ष 2024 और 2025 की फॉर्म 20 एफ रिपोर्टों में बैंक प्रबंधन ने वित्तीय रिपोर्टिंग से जुड़े आंतरिक नियंत्रणों को प्रभावी बताया था।

    मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित अतिरिक्त भुगतान को मार्केटिंग बजट में दिखाए जाने से बैंक के परिचालन खर्च और शुद्ध ब्याज आय से जुड़े आंकड़ों की वास्तविक तस्वीर प्रभावित हुई। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि इससे निवेशकों को बैंक की वित्तीय और परिचालन स्थिति का सही आकलन करने में परेशानी हुई और शेयर की कीमत पर भी असर पड़ा।

    मामला उस समय और चर्चा में आया जब 18 मार्च 2026 को एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया। उनके इस्तीफे से जुड़ी वजहों में बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाओं और प्रथाओं का उल्लेख किया गया था जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। इसके बाद अमेरिकी बाजार में एचडीएफसी बैंक के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। 27 मई 2026 को एमएसआरडीसी को किए गए कथित भुगतानों से जुड़ी आंतरिक जांच की खबर सामने आने के बाद भी शेयरों पर दबाव बढ़ा।

    शिकायतकर्ता ने अमेरिकी सिक्योरिटी एक्सचेंज एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही क्लास एक्शन के रूप में मामले को प्रमाणित करने मुआवजे और जूरी ट्रायल की मांग भी की गई है। दूसरी ओर एचडीएफसी बैंक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका में शेयर कीमतों में गिरावट के बाद इस तरह के मुकदमे आम हैं। बैंक ने मामले को निराधार बताते हुए अदालत में मजबूती से अपना बचाव करने की बात कही है। इस कानूनी विवाद के बीच गुरुवार को एचडीएफसी बैंक के शेयर 1.75 प्रतिशत गिरकर 714.45 रुपए पर बंद हुए।

  • एमपी पुलिसकर्मियों के सैलरी पैकेज पर संकट, HDFC, Axis और Canara Bank के एग्रीमेंट खत्म; PHQ ने जारी किया अलर्ट

    एमपी पुलिसकर्मियों के सैलरी पैकेज पर संकट, HDFC, Axis और Canara Bank के एग्रीमेंट खत्म; PHQ ने जारी किया अलर्ट


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सूचना सामने आई है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों, पुलिस अधीक्षकों और यूनिट प्रभारी अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे उन पुलिसकर्मियों को तत्काल जानकारी दें, जिनके वेतन खाते एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और केनरा बैंक में संचालित हैं। कारण यह है कि इन बैंकों के साथ पुलिस विभाग के सैलरी पैकेज संबंधी अनुबंध समाप्त हो चुके हैं।

    पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन बैंकों के साथ हुए समझौतों के तहत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को कई विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती थीं। इनमें दुर्घटना बीमा, सामान्य मृत्यु पर आर्थिक सहायता, विशेष बैंकिंग लाभ, प्रीमियम सेवाएं और अन्य वित्तीय सुरक्षा सुविधाएं शामिल थीं। अनुबंध समाप्त होने के बाद इन सुविधाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।

    पुलिस मुख्यालय के कल्याण प्रकोष्ठ द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित बैंक अब पूर्व अनुबंध के आधार पर सुविधाएं प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसलिए कर्मचारियों को इस स्थिति से अवगत कराना जरूरी है ताकि वे भविष्य में किसी भी भ्रम या वित्तीय नुकसान से बच सकें।

    दस्तावेजों के अनुसार एक्सिस बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को किया गया अनुबंध 22 अप्रैल 2023 को समाप्त हो गया था। इसी प्रकार एचडीएफसी बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को हुआ समझौता 22 अप्रैल 2024 तक प्रभावी रहा और उसके बाद समाप्त हो गया। वहीं केनरा बैंक के साथ 19 फरवरी 2024 को हुआ अनुबंध 18 फरवरी 2025 को समाप्त हो चुका है।

    हालांकि पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन बैंकों के साथ समझौतों के नवीनीकरण के प्रयास लगातार जारी हैं। कल्याण शाखा की ओर से बैंक प्रबंधन के साथ संपर्क बनाए रखा गया है और अनुबंधों को दोबारा लागू कराने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। जब तक नए समझौते नहीं हो जाते, तब तक कर्मचारियों को सैलरी पैकेज के अंतर्गत मिलने वाले अतिरिक्त लाभों की उपलब्धता को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    पुलिस मुख्यालय का मानना है कि बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इन बैंकों की सैलरी पैकेज योजनाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अनुबंध समाप्त होने की जानकारी समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि कर्मचारी अपनी बैंकिंग और बीमा संबंधी योजनाओं की समीक्षा कर सकें।

    सूत्रों के अनुसार यदि भविष्य में नए सिरे से समझौते होते हैं तो कर्मचारियों को फिर से विशेष बैंकिंग सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। फिलहाल पुलिस विभाग की सभी इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि वे इस सूचना को संबंधित कर्मचारियों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाएं।

    यह आदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल के कल्याण प्रकोष्ठ की ओर से जारी किया गया है और इसे पूरे प्रदेश की पुलिस इकाइयों में लागू किया जा रहा है।

  • HDFC बैंक का बड़ा बयान, 45 करोड़ की गड़बड़ी के आरोपों से किया इनकार

    HDFC बैंक का बड़ा बयान, 45 करोड़ की गड़बड़ी के आरोपों से किया इनकार


    नई दिल्ली। HDFC Bank ने 45 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बैंक में मजबूत निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं तथा सभी मामलों को तय प्रक्रियाओं के तहत ही संभाला जाता है।

    बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चुनिंदा तथ्यों के आधार पर लगाए जा रहे आरोप भ्रामक हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की अटकलों को पूरी तरह अस्वीकार किया जाता है। बैंक ने स्पष्ट किया कि आंतरिक समीक्षा और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निष्कर्ष निकाला जाता है।

    दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ द बोर्ड (एसीबी) ने वित्त वर्ष 2024 और 2025 के दौरान Maharashtra State Road Development Corporation को किए गए करीब 45 करोड़ रुपए के भुगतान की आंतरिक सतर्कता जांच के निर्देश दिए हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला एमएसआरडीसी द्वारा बैंक में जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज भुगतान से जुड़ा बताया गया। आरोप लगाया गया कि राशि सीधे ब्याज भुगतान के तौर पर जारी करने के बजाय मार्केटिंग विभाग के जरिए चार स्थानीय विक्रेताओं को सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के नाम पर भेजी गई।

    कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर इस व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी, जिसमें बैंक के एमडी और सीईओ Sashidhar Jagdishan की मौजूदगी का भी जिक्र किया गया। हालांकि बैंक ने इन आरोपों पर सीधे तौर पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उसकी सभी प्रक्रियाएं तय नियामकीय मानकों और आंतरिक नियमों के अनुसार संचालित होती हैं।

    इन खबरों के बाद शेयर बाजार में भी असर देखने को मिला। NSE: HDFCBANK के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और कारोबार के दौरान यह करीब 2.69 प्रतिशत टूटकर 757.90 रुपए तक पहुंच गया।

  • भारती एयरटेल ने रचा इतिहास, मार्केट कैप में HDFC बैंक को पीछे छोड़ बनी देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी

    भारती एयरटेल ने रचा इतिहास, मार्केट कैप में HDFC बैंक को पीछे छोड़ बनी देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल ने बाजार पूंजीकरण के मामले में HDFC बैंक को पीछे छोड़ते हुए देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी का स्थान हासिल कर लिया है। इस बदलाव ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों का ध्यान खींचा है, क्योंकि लंबे समय से बैंकिंग सेक्टर की मजबूत उपस्थिति के बीच यह एक महत्वपूर्ण उलटफेर माना जा रहा है।

    18 मई को बाजार में कारोबार के दौरान एयरटेल के शेयरों में तेजी देखने को मिली और कीमतें बढ़कर नए स्तरों के करीब पहुंच गईं। इस तेजी के चलते कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया, जबकि HDFC बैंक का मूल्यांकन इससे थोड़ा नीचे रह गया। हालांकि दिन के अंत में हल्की गिरावट के साथ दोनों कंपनियों के आंकड़ों में अंतर कम जरूर हुआ, लेकिन बाजार की चाल ने यह स्पष्ट कर दिया कि एयरटेल फिलहाल मजबूत स्थिति में है।

    पिछले एक सप्ताह में एयरटेल के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई है, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। इसके विपरीत HDFC बैंक के शेयरों में अपेक्षाकृत सीमित बढ़त देखने को मिली है और पिछले कुछ महीनों में इसमें दबाव भी बना रहा है। बैंक के नेतृत्व और आंतरिक बदलावों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है, जिसके कारण इसके शेयरों पर असर पड़ा है।

    हालांकि एयरटेल ने इस उपलब्धि के साथ भले ही बाजार मूल्यांकन में बढ़त हासिल की हो, लेकिन इसके हालिया वित्तीय नतीजों में मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की तुलना में घटा है, लेकिन इसके बावजूद राजस्व में मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। मोबाइल सेवाओं से होने वाली आय में सुधार और ग्राहकों की बढ़ती संख्या ने कंपनी के कुल कारोबार को मजबूती प्रदान की है। प्रति उपयोगकर्ता औसत आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जो यह संकेत देता है कि कंपनी अपने ग्राहकों से बेहतर रिटर्न हासिल कर रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि एयरटेल का बढ़ता मार्केट कैप केवल टेलीकॉम सेक्टर की मजबूती ही नहीं, बल्कि कंपनी के डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की रणनीति का भी परिणाम है। कंपनी आने वाले समय में डेटा सेंटर नेटवर्क का विस्तार करने की योजना पर काम कर रही है और ऑप्टिकल फाइबर तथा डिजिटल सेवाओं में भी बड़े निवेश की तैयारी में है। इसके साथ ही नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल सेक्टर में भी कंपनी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    वहीं दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज अब भी देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है और बाजार पूंजीकरण के मामले में पहले स्थान पर मजबूती से कायम है। एयरटेल की यह उपलब्धि हालांकि महत्वपूर्ण है, लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे प्रतिस्पर्धी सेक्टरों में बदलते रुझानों का संकेत मान रहे हैं, जहां टेलीकॉम और डिजिटल कंपनियां तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।

    कुल मिलाकर यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार में सेक्टर आधारित शक्ति संतुलन में हो रहे परिवर्तन को दर्शाता है, जहां पारंपरिक बैंकिंग दिग्गजों को अब नई पीढ़ी की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है।

  • कामकाज में कोई समस्या नहीं, RBI ने दिया भरोसा और खत्म की चिंताएं

    कामकाज में कोई समस्या नहीं, RBI ने दिया भरोसा और खत्म की चिंताएं


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank को लेकर उठे सवालों के बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने बड़ा बयान दिया है। आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने बुधवार को साफ कहा कि बैंक के कामकाज में किसी तरह की कोई समस्या सामने नहीं आई है और बैंकिंग सेक्टर पूरी तरह स्थिर है।

    इस्तीफे के बाद उठे थे सवाल

    हाल ही में बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष Atanu Chakraborty के अचानक इस्तीफे ने हलचल पैदा कर दी थी। उन्होंने कुछ नीतियों और कार्यशैली से असहमति जताते हुए पद छोड़ा था, जिसके बाद बैंक की गवर्नेंस पर सवाल उठने लगे थे।

    आरबीआई की निगरानी में सब ठीक

    मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में Sanjay Malhotra ने कहा कि नियामक निगरानी के दौरान बैंक के संचालन में कोई खामी नहीं पाई गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा बैंकिंग कानून पर्याप्त और प्रभावी हैं, और फिलहाल उनमें बदलाव की जरूरत नहीं है।

    “व्यक्तिगत घटनाओं से सिस्टम पर असर नहीं”

    आरबीआई गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी एक बैंक में हुई व्यक्तिगत घटना पूरे सेक्टर की स्थिरता को प्रभावित नहीं करती।
    उन्होंने यह भी जोड़ा कि HDFC Bank की वित्तीय स्थिति और मुनाफे को लेकर कोई प्रणालीगत जोखिम नहीं है।

    बैंक बोर्ड्स के लिए नए दिशा-निर्देश जल्द

    आरबीआई ने संकेत दिए हैं कि वह बैंक बोर्ड्स के लिए नए दिशा-निर्देश लाने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बोर्ड सदस्य रोजमर्रा के कामकाज में उलझने के बजाय नीतिगत और रणनीतिक फैसलों पर ज्यादा ध्यान दें।

    प्रबंधन और बोर्ड की भूमिकाएं होंगी स्पष्ट

    प्रस्तावित बदलावों के तहत बैंकों के प्रबंधन को दैनिक संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि बोर्ड बड़े फैसलों और दीर्घकालिक रणनीति पर फोकस करेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

    बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता का संदेश

    Reserve Bank of India के इस बयान से निवेशकों और ग्राहकों को राहत मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार में फैली अनिश्चितता कम होगी और बैंकिंग सेक्टर में विश्वास मजबूत बना रहेगा।