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  • भारतीय पारंपरिक औषधि अमृतधारा सिर दर्द घबराहट और अपच में दे राहत..

    भारतीय पारंपरिक औषधि अमृतधारा सिर दर्द घबराहट और अपच में दे राहत..

    नई दिल्ली में स्वास्थ्य और पारंपरिक उपचार के क्षेत्र में अमृतधारा एक ऐसा नाम है जिसे सदियों से भारतीय घरों में प्रयोग किया जाता रहा है। यह औषधि खासतौर पर सिर दर्द, माइग्रेन, अचानक घबराहट, मतली और अपच जैसी समस्याओं में लाभकारी मानी जाती है। हालांकि आधुनिक जीवनशैली में यह पारंपरिक औषधि धीरे-धीरे भूलती जा रही है।

    अमृतधारा बेहद कम पदार्थों से बनाई जाती है और इसका प्रभाव काफी शक्तिशाली होता है। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन सत्वों का उपयोग किया जाता है -भीमसेनी कपूर, सत अजवाइन और सत पुदीना। ये तीक्ष्ण और सुगंधित द्रव्य मिलकर शरीर को ठंडक पहुँचाते हैं और सिर दर्द, माइग्रेन, बेचैनी, सर्दी-जुकाम और अपच में राहत देते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार जब सिर में दर्द या माइग्रेन होता है, तो शरीर कमजोर महसूस करने लगता है और कभी-कभी घबराहट के कारण बीपी गिरने लगता है। ऐसे में अमृतधारा का प्रयोग सभी उम्र के लोगों के लिए लाभकारी है। यह केवल बाहरी उपयोग ही नहीं, बल्कि थोड़ी मात्रा में सेवन करने पर पेट और अपच की समस्या में भी आराम देता है।

    अमृतधारा बनाने की विधि भी बहुत आसान है। एक कांच की शीशी में कपूर सत्व, अजवाइन सत्व और पुदीना सत्व को मिलाकर शीशी तुरंत बंद कर दें। हल्के हाथ से शीशी को हिलाएं ताकि तीनों तत्व आपस में अच्छी तरह मिल जाएं और औषधि का निर्माण हो। ध्यान रखें कि इसे कान, नाक और आंख में डालने से बचें।

    इस औषधि का स्वाद तीखा लेकिन सुगंधित होता है। इसे लंबे समय तक खुला न रखें क्योंकि यह द्रव वाष्पित हो जाता है। सिर दर्द होने पर इसे सीधे माथे पर लगाएं। दांत दर्द में रुई की सहायता से प्रभावित जगह पर लगाना लाभकारी होता है। पेट या अपच की समस्या होने पर थोड़ी मात्रा में सेवन करें। साथ ही यदि मुख से दुर्गंध आती है तो पानी में मिलाकर कुल्ला करने से आराम मिलता है।

    विशेष सावधानी यह है कि गर्भवती महिलाएं और बच्चे इसे सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें। अगर अमृतधारा लगाने पर जलन महसूस हो, तो इसका उपयोग बंद कर दें। यह पारंपरिक औषधि न केवल शरीर को ठंडक देती है, बल्कि ताजगी और राहत का अनुभव भी कराती है।

    अमृतधारा के नियमित और सही उपयोग से सिर दर्द, माइग्रेन और घबराहट जैसी परेशानियों में राहत पाई जा सकती है और यह भारतीय घरेलू उपचार की एक बहुमूल्य धरोहर है जिसे नई पीढ़ी को भी जानना और अपनाना चाहिए।

  • नींद कम, सिर दर्द ज्यादा: आंखों और भौंहों के बीच दर्द में आयुर्वेद के असरदार नुस्खे

    नींद कम, सिर दर्द ज्यादा: आंखों और भौंहों के बीच दर्द में आयुर्वेद के असरदार नुस्खे


    नई दिल्ली। अक्सर लोग लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने के बाद सिर में दर्द और आंखों में तनाव की शिकायत करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिर दर्द केवल स्क्रीन टाइम की वजह से नहीं होता। कुछ लोगों को सुबह उठते ही भौंहों और आंखों के ऊपर भारीपन और दर्द महसूस होता है। इसका कारण अधूरी नींद और उससे प्रभावित न्यूरो-हॉर्मोनल असंतुलन हो सकता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आंखों के ऊपर भौंहों वाला क्षेत्र frontal sinus और trigeminal nerve से जुड़ा होता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो भौंहों के बीच तेज दर्द होता है। इससे मस्तिष्क में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे सिर दर्द के साथ-साथ आंखों की मांसपेशियों पर भी दबाव बढ़ता है।

    आयुर्वेद में इस स्थिति को शरीर में वात की वृद्धि और नींद की कमी से जोड़ा गया है। वात बढ़ने पर नींद प्रभावित होती है और पूरे तंत्रिका तंत्र में असंतुलन पैदा होता है। इसके चलते सिर में दर्द, आंखों में भारीपन और मानसिक थकान महसूस होती है।

    आयुर्वेद में इसके लिए कई सरल और प्रभावकारी उपाय बताए गए हैं। पहला उपाय है नस्य विधि। रात में सोने से पहले नाक में कुछ बूंदें देसी घी की डालने से नाक का रुखापन कम होता है और सांस लेने में आसानी होती है। इससे सिर और आंखों पर दबाव घटता है और नींद भी अच्छी आती है।

    दूसरा उपाय है तलवों की मालिश। तलवों पर कई प्रेशर पॉइंट्स मौजूद हैं जो शरीर के संतुलन को बनाए रखते हैं और नींद लाने में मदद करते हैं। दिनभर की थकान और शरीर में जमा टॉक्सिन को बाहर निकालने के लिए रात में तलवों की हल्की मालिश लाभकारी है।

    इसके अलावा, सिर दर्द और मानसिक थकान कम करने के लिए ब्राह्मी और जटामांसी का सेवन आयुर्वेद में बहुत प्रभावी माना गया है। ये हर्ब्स मन को शांत करते हैं, नींद में सुधार लाते हैं और मानसिक तनाव कम करते हैं।

    आंखों की थकान कम करने के लिए त्रिफला जल से नेत्र प्रक्षालन भी कारगर है। ठंडे जल में त्रिफला पाउडर मिलाकर आंखें धोने से आंखों की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और आंखों की रोशनी में सुधार होता है।

    रात के समय हल्दी, काली मिर्च और जायफल वाला दूध पीने से भी नींद बेहतर आती है। यह मस्तिष्क को शांत करता है, शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है और नींद की गुणवत्ता बढ़ाता है।

    इस तरह, आयुर्वेद में सुझाए गए ये उपाय न सिर्फ सिर दर्द और आंखों की थकान को कम करते हैं, बल्कि शरीर और मन दोनों को संतुलित रखते हैं। नियमित रूप से इन विधियों को अपनाकर व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में मानसिक और शारीरिक तनाव को काफी हद तक कम कर सकता है।