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  • चश्मे का नंबर बदलने पर बार-बार सिरदर्द और धुंधला दिखना नजरअंदाज न करें, रात में दिखने वाली परेशानी भी हो सकती है संकेत

    चश्मे का नंबर बदलने पर बार-बार सिरदर्द और धुंधला दिखना नजरअंदाज न करें, रात में दिखने वाली परेशानी भी हो सकती है संकेत


    नई दिल्ली ।
    कई लोग वर्षों तक एक ही चश्मे का इस्तेमाल करते रहते हैं और जब तक सामान्य रूप से दिखाई देता है, तब तक आंखों की दोबारा जांच कराने की जरूरत महसूस नहीं करते। हालांकि, समय के साथ आंखों की दृष्टि और चश्मे का नंबर बदल सकता है। ऐसी स्थिति में पुराने नंबर का चश्मा पहनने पर सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, आंखों में थकान और पढ़ने या स्क्रीन देखने के दौरान असहजता जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।

    चश्मे का नंबर बदलने का एक आम संकेत यह हो सकता है कि पहले की तुलना में दूर या पास की चीजें साफ दिखाई न दें। किताब के अक्षर पढ़ने, मोबाइल देखने, कंप्यूटर पर काम करने या दूर लगे बोर्ड को देखने में अतिरिक्त प्रयास करना पड़े तो आंखों की जांच कराना उचित रहता है। हालांकि धुंधली नजर का कारण केवल चश्मे का नंबर बदलना नहीं होता। ड्राई आई, मोतियाबिंद और रेटिना से जुड़ी समस्याएं भी दृष्टि को प्रभावित कर सकती हैं।

    लगातार सिरदर्द भी नजर से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है, खासकर तब जब यह पढ़ने या लंबे समय तक पास की चीजों पर ध्यान केंद्रित करने के बाद बढ़ता हो। आंखों पर लगातार जोर पड़ने से थकान और असहजता महसूस हो सकती है। लेकिन सिरदर्द के कई दूसरे कारण भी होते हैं, इसलिए इसे केवल चश्मे के नंबर से जोड़कर देखना सही नहीं है।

    कुछ लोगों को साफ देखने के लिए आंखें सिकोड़ने की आदत हो जाती है। टीवी देखते समय, सड़क के संकेत पढ़ते हुए या मोबाइल स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करते समय बार-बार आंखें सिकोड़ना दृष्टि में बदलाव का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में आंखों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि समस्या अपवर्तन संबंधी है या किसी अन्य कारण से।

    स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने के बाद आंखों में दर्द, भारीपन, जलन, सूखापन या थकान भी हो सकती है। डिजिटल स्क्रीन का लगातार इस्तेमाल आंखों पर दबाव बढ़ा सकता है और इससे सिरदर्द या अस्थायी धुंधलापन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गलत या अधूरा चश्मा नंबर भी ऐसे लक्षणों को बढ़ा सकता है। इसलिए लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए बीच-बीच में आंखों को आराम देना महत्वपूर्ण है।

    रात में वाहन चलाते समय सामने से आने वाली रोशनी बहुत तेज लगना, सड़क के संकेत स्पष्ट न दिखना या सामान्य परिस्थितियों की तुलना में नजर कमजोर महसूस होना भी जांच कराने का कारण हो सकता है। हालांकि रात में देखने में परेशानी के पीछे सिर्फ चश्मे का नंबर जिम्मेदार नहीं होता। आंखों की दूसरी स्थितियां भी इसका कारण बन सकती हैं।

    आंखों की जांच केवल चश्मे का सही नंबर पता करने तक सीमित नहीं है। नियमित परीक्षण के दौरान आंखों से जुड़ी कई समस्याओं का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में मदद मिल सकती है। उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और पहले से मौजूद आंखों की बीमारी के आधार पर जांच की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। इसलिए जांच का अंतराल व्यक्ति की स्थिति के अनुसार नेत्र विशेषज्ञ से तय करना बेहतर है।

    यदि चश्मा पहनने के बावजूद लगातार धुंधला दिखाई दे रहा है, सिरदर्द बना रहता है, आंखों में दर्द या असामान्य थकान महसूस होती है या नजर में अचानक बदलाव आता है, तो खुद से नया नंबर अनुमान लगाने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। अचानक नजर कम होना, तेज आंख दर्द या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। सही समय पर आंखों की जांच से समस्या का वास्तविक कारण समझने और उचित उपचार या चश्मे का नंबर निर्धारित करने में मदद मिल सकती है।

  • माइग्रेन का दर्द बढ़ा सकती हैं रोजमर्रा की ये पांच गलतियां, समय रहते आदतों में बदलाव से मिल सकती है राहत

    माइग्रेन का दर्द बढ़ा सकती हैं रोजमर्रा की ये पांच गलतियां, समय रहते आदतों में बदलाव से मिल सकती है राहत


    नई दिल्ली ।
    भागदौड़ भरी जीवनशैली में सिरदर्द की समस्या आम हो गई है, लेकिन बार बार होने वाला तेज सिरदर्द हमेशा सामान्य नहीं माना जा सकता। कुछ लोगों में सिरदर्द के साथ रोशनी और तेज आवाज से परेशानी, जी मिचलाना, कमजोरी या असहजता जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति को माइग्रेन से जोड़ा जाता है। यह केवल सिर में दर्द की समस्या नहीं है, बल्कि तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक जटिल स्थिति है।

    माइग्रेन से परेशान लोगों में दर्द की तीव्रता और इसके कारण अलग अलग हो सकते हैं। हालांकि, रोजमर्रा की कुछ आदतें कई लोगों में इसके लक्षणों को बढ़ाने का काम कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखने और व्यक्तिगत ट्रिगर को पहचानने से माइग्रेन की परेशानी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    शरीर में पानी की कमी माइग्रेन के दौरान परेशानी बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हो सकती है। पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं मिलने पर थकान, चक्कर और सिर में भारीपन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। इसलिए पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी पीना जरूरी है। पानी के अलावा नारियल पानी, सूप और पानी से भरपूर फल भी शरीर में तरल पदार्थ की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं।

    नींद की अनदेखी करना भी माइग्रेन से परेशान लोगों के लिए समस्या बढ़ा सकता है। कम सोना या रोज अलग अलग समय पर सोने की आदत शरीर की प्राकृतिक दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सोने और जागने का समय नियमित रखना बेहतर माना जाता है। वयस्कों के लिए सामान्य तौर पर सात से नौ घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है, हालांकि जरूरत व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकती है।

    चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन का असर भी हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। सीमित मात्रा में कैफीन कुछ लोगों को अलग तरह से प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका अधिक सेवन कुछ लोगों में माइग्रेन को बढ़ा सकता है। इसी तरह शराब भी कई लोगों के लिए सिरदर्द का ट्रिगर बन सकती है। यदि किसी विशेष पेय के सेवन के बाद बार बार माइग्रेन शुरू होता है, तो उस व्यक्तिगत ट्रिगर से बचना उपयोगी हो सकता है।

    लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी की स्क्रीन देखते रहना भी कुछ लोगों में सिरदर्द की परेशानी बढ़ा सकता है। खासकर माइग्रेन के दौरान तेज रोशनी और स्क्रीन की चमक असहजता बढ़ा सकती है। ऐसे में स्क्रीन की चमक कम रखना, बीच बीच में आंखों को आराम देना और जरूरत पड़ने पर शांत तथा कम रोशनी वाले वातावरण में रहना मददगार हो सकता है।

    खाने के समय में लगातार बदलाव और लंबे समय तक खाली पेट रहना भी कुछ लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए भोजन को बहुत देर तक टालने के बजाय नियमित अंतराल पर संतुलित भोजन करना बेहतर है। आहार में फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व शामिल किए जा सकते हैं।

    बहुत अधिक तला हुआ भोजन, अत्यधिक मसालेदार चीजें या कोई ऐसा खाद्य पदार्थ जिससे व्यक्ति को बार बार परेशानी होती है, उससे दूरी रखना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, सभी लोगों के लिए माइग्रेन के ट्रिगर समान नहीं होते। इसलिए किस भोजन या आदत के बाद समस्या बढ़ती है, इसका ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

    माइग्रेन को नियंत्रित करने के लिए केवल किसी एक आदत में बदलाव पर्याप्त नहीं हो सकता। नियमित नींद, पर्याप्त पानी, समय पर भोजन, संतुलित जीवनशैली और व्यक्तिगत ट्रिगर की पहचान मिलकर बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। यदि सिरदर्द बार बार हो रहा हो, बहुत तेज हो या उसके साथ असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

  • बार बार होने वाला सिरदर्द हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

    बार बार होने वाला सिरदर्द हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी


    नई दिल्ली । नई दिल्ली से प्राप्त मेडिकल जानकारी के अनुसार सिरदर्द को अक्सर लोग सामान्य समस्या मानकर टाल देते हैं। थकान नींद की कमी तनाव या लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने के बाद होने वाला सिरदर्द आम माना जाता है और आराम करने या पानी पीने से ठीक भी हो जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिरदर्द सामान्य नहीं होता। जब यह समस्या बार बार होने लगे या इसके साथ शरीर में असामान्य बदलाव दिखाई देने लगें तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।

    डॉक्टरों के अनुसार ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर स्थिति के शुरुआती संकेत बहुत साधारण हो सकते हैं। यही कारण है कि कई लोग इन्हें थकान या मानसिक दबाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दिमाग में जब असामान्य कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं तो वे आसपास के हिस्सों पर दबाव डालती हैं। इस दबाव के कारण अलग अलग तरह के लक्षण सामने आ सकते हैं और यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर दिमाग के किस हिस्से में है और कितना बढ़ चुका है।

    अगर यह समस्या सोचने समझने या याददाश्त से जुड़े हिस्से को प्रभावित करती है तो व्यक्ति को भूलने की समस्या होने लगती है। ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत आती है और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। कई लोग इसे उम्र या तनाव का असर मान लेते हैं जबकि यह गंभीर संकेत हो सकता है।

    यदि ट्यूमर दृष्टि से जुड़े हिस्से को प्रभावित करता है तो धुंधला दिखना दोहरी छवि दिखाई देना या नजर कमजोर होना जैसी समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में बोलने में कठिनाई या सही शब्द चुनने में परेशानी भी देखी जा सकती है। ये लक्षण धीरे धीरे बढ़ते हैं इसलिए लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते।

    इसके अलावा दिमाग के संतुलन और मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाले हिस्से पर असर पड़ने से चलने में लड़खड़ाहट हाथ पैरों में कमजोरी और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो सकती है। कुछ मरीजों में व्यवहार में बदलाव चिड़चिड़ापन या सामाजिक दूरी भी बढ़ सकती है जिसे मानसिक तनाव समझ लिया जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिरदर्द खतरनाक नहीं होता लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि सिरदर्द लगातार बढ़ रहा हो बार बार हो रहा हो नींद से जगा रहा हो या पहले से अलग और अधिक तीव्र महसूस हो तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

    यदि सिरदर्द के साथ उल्टी संतुलन बिगड़ना नजर में बदलाव कमजोरी या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण भी दिखें तो स्थिति गंभीर हो सकती है और तुरंत जांच कराना जरूरी हो जाता है। समय पर पहचान और उपचार से कई गंभीर समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है इसलिए लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

  • माइग्रेन का आसान टेस्ट घर पर, समझें 5-4-3-2-1 फॉर्मूला और बचाव..

    माइग्रेन का आसान टेस्ट घर पर, समझें 5-4-3-2-1 फॉर्मूला और बचाव..


    नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में सिरदर्द एक आम समस्या बन चुकी है लेकिन हर सिरदर्द को नजरअंदाज करना सही नहीं होता क्योंकि यह माइग्रेन भी हो सकता है यह एक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसकी समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है

    विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन को पहचानने के लिए 5-4-3-2-1 का एक आसान फॉर्मूला अपनाया जाता है जिसे आम व्यक्ति भी समझ सकता है इस फॉर्मूले के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को जीवन में कम से कम 5 बार तेज सिरदर्द का अटैक आया हो और यह दर्द 4 घंटे से लेकर 3 दिन तक बना रहता हो तो यह एक संकेत हो सकता है

    इसके अलावा दर्द की 4 खासियतों में से कम से कम 2 मौजूद हों जैसे सिर के एक तरफ दर्द होना धड़कन जैसा दर्द होना दर्द बहुत तेज होना या रोजमर्रा के काम में बाधा आना तो माइग्रेन की संभावना बढ़ जाती है साथ ही 2 में से 1 लक्षण जैसे मतली उल्टी या तेज रोशनी और आवाज से परेशानी भी इसका अहम संकेत माना जाता है

    माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले कारण भी काफी अहम होते हैं तेज धूप चमकदार रोशनी और शोर इस समस्या को बढ़ा सकते हैं वहीं कुछ खाने की चीजें जैसे चीज चॉकलेट कॉफी और चाइनीज फूड भी इसे ट्रिगर कर सकते हैं तेज परफ्यूम या गंध भी कई लोगों में माइग्रेन का कारण बनती है महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है खासकर हार्मोनल बदलाव के दौरान

    डॉक्टरों का मानना है कि माइग्रेन को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसका असर याददाश्त और ध्यान क्षमता पर पड़ सकता है लंबे समय में यह स्ट्रेस और डिप्रेशन का कारण बन सकता है और गंभीर मामलों में ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ा सकता है

    इससे बचाव के लिए कुछ आसान आदतें अपनाना जरूरी है रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें स्क्रीन टाइम कम करें और उन फूड्स से दूरी बनाए रखें जो माइग्रेन को बढ़ाते हैं नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल करने में मदद कर सकती है

    अगर सिरदर्द बार बार हो रहा है या ऊपर बताए गए लक्षण दिख रहे हैं तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है क्योंकि सही समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है