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  • ग्वालियर में सीजन की सबसे गर्म रात, न्यूनतम तापमान 18.5 डिग्री; अगले 3-4 दिन और बढ़ेगी गर्मी

    ग्वालियर में सीजन की सबसे गर्म रात, न्यूनतम तापमान 18.5 डिग्री; अगले 3-4 दिन और बढ़ेगी गर्मी


    ग्वालियर । ग्वालियर में मौसम लगातार करवट बदल रहा है और गर्मी का असर अब दिन के साथ-साथ रातों में भी साफ महसूस होने लगा है। बुधवार की रात इस सीजन की अब तक की सबसे गर्म रात के रूप में दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार शहर का न्यूनतम तापमान 18.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो इस सीजन में अब तक का सबसे अधिक न्यूनतम तापमान है। इसके साथ ही हवा में नमी की मात्रा भी काफी कम हो गई है, जिससे वातावरण में गर्मी का असर और अधिक महसूस किया जा रहा है।

    दिन के समय भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को ग्वालियर का अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गुरुवार सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को गर्मी का अहसास करा दिया। सुबह 10 बजे के बाद से ही धूप इतनी तीखी हो गई कि लोगों को बाहर निकलने में परेशानी होने लगी। दोपहर होते-होते गर्मी का असर और बढ़ गया, जिसके कारण शहर की सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम आवाजाही दिखाई दी।

    भीषण गर्मी के चलते लोग केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। दोपहर के समय बाजारों और प्रमुख सड़कों पर भी अपेक्षाकृत सन्नाटा देखने को मिला। गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण लोगों को खासा असहज महसूस करना पड़ रहा है। मौसम में आए इस बदलाव का असर दैनिक जीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

    मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले तीन से चार दिनों तक मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही बना रह सकता है। तापमान में ज्यादा राहत मिलने की संभावना फिलहाल कम है। विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से किसानों को भी अपनी फसलों का ध्यान रखने के लिए कहा गया है, क्योंकि तापमान में बढ़ोतरी का असर खेती पर भी पड़ सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने भी लोगों को इस मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए लोगों को अधिक मात्रा में तरल पदार्थ जैसे पानी, नींबू पानी, छाछ और अन्य पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाव किया जा सकेगा।

    इसके अलावा डॉक्टरों ने दोपहर के समय हल्का भोजन करने की सलाह दी है और खाने में ऐसी चीजों को शामिल करने को कहा है जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो। फल, सलाद और दही जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर और शरीर को पूरी तरह ढककर निकलना चाहिए, ताकि सीधे धूप के संपर्क से बचा जा सके।

    ग्वालियर में मार्च के महीने में ही इस तरह की गर्मी लोगों के लिए चिंता का विषय बन रही है। यदि तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में गर्मी और अधिक तीखी हो सकती है। ऐसे में नागरिकों को मौसम के प्रति सतर्क रहते हुए अपनी दिनचर्या और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा।

  • हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार

    हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार


    नई दिल्ली । हाई ब्लड प्रेशर को अब तक हम केवल ज्यादा नमक खाने, तला-भुना भोजन मोटापा और मानसिक तनाव के साथ जोड़कर देखते आए हैं। लेकिन ऑकलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक ताज़ा स्टडी ने चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि हाई बीपी के पीछे केवल हमारा खानपान ही नहीं, बल्कि हमारे दिमाग की वायरिंग और उससे निकलने वाले सिग्नल भी एक बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    क्या है दिमाग का वह हिस्सा जो बढ़ाता है बीपी

    वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग के निचले हिस्से में एक विशेष क्षेत्र होता है जिसे लैटरल पैराफेशियल रीजन कहा जाता है। आमतौर पर यह हिस्सा शरीर की उन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है जो अपने आप होती हैं, जैसे सांस लेना, दिल का धड़कना और पाचन क्रिया। स्टडी में खुलासा हुआ है कि इसी क्षेत्र में मौजूद कुछ विशेष नसें ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। जब ये नसें जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, तो वे रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने के संकेत भेजती हैं। वाहिकाओं के सिकुड़ने से रक्त का प्रवाह बाधित होता है और दबाव बढ़ जाता है, जिसे हम मेडिकल भाषा में हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं।

    अब तक की थ्योरी से कैसे अलग है यह रिसर्च

    अब तक डॉक्टरों का मानना था कि बीपी बढ़ने का मुख्य कारण किडनी की कार्यक्षमता में कमी या आर्टरीज में फैट का जमना है। लेकिन यह नई रिसर्च बताती है कि दिमागी नियंत्रण यदि दिमाग का लैटरल पैराफेशियल रीजन गलत सिग्नल भेज रहा है, तो स्वस्थ खानपान के बावजूद व्यक्ति का बीपी बढ़ सकता है। ऑटोमैटिक रिस्पॉन्स: कई बार शरीर बिना किसी बाहरी कारण जैसे नमक या गुस्सा के भी आंतरिक दिमागी संकेतों की वजह से हाइपरटेंशन का शिकार हो जाता है।

    एक्सपर्ट की सलाह: खुद को कैसे रखें सुरक्षित

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई रिसर्च के बाद अब बीपी के इलाज के तरीकों में बदलाव आ सकता है। केवल दवाएं ही नहीं बल्कि ‘न्यूरोलॉजिकल कंट्रोल पर भी ध्यान देना होगा। वर्तमान में खुद को सुरक्षित रखने के लिए आप ये कदम उठा सकते हैं ब्रीदिंग एक्सरसाइज: चूंकि यह हिस्सा सांस लेने को भी नियंत्रित करता है, इसलिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम दिमाग को शांत कर बीपी कम करने में मदद कर सकते हैं। माइंडफुलनेस योग और ध्यान के जरिए दिमाग के निचले हिस्से को रिलैक्स रखा जा सकता है। नियमित चेकअप: यदि खानपान सही होने के बाद भी बीपी बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से न्यूरोलॉजिकल कारणों पर चर्चा करें।