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  • खर्राटे लेने वालों के लिए जरूरी खबर सांस रुकने से लेकर हाई बीपी तक इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    खर्राटे लेने वालों के लिए जरूरी खबर सांस रुकने से लेकर हाई बीपी तक इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    नई दिल्ली । खर्राटे लेना आम समस्या है और बहुत से लोगों को सोते समय इसकी परेशानी होती है लेकिन हर बार खर्राटों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कई बार खर्राटे केवल सोने के दौरान गले और मुंह के आसपास मौजूद ऊतकों में कंपन के कारण आते हैं लेकिन कुछ परिस्थितियों में यही खर्राटे शरीर में चल रही गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। खासतौर पर अगर खर्राटों के साथ सोते समय सांस रुकने लगे हांफते हुए नींद खुले रात में बार बार आंख खुले या सुबह उठने के बाद भी अत्यधिक थकान महसूस हो तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

    दरअसल जब व्यक्ति सोता है तो गले जीभ और मुंह के आसपास के कुछ ऊतक ढीले पड़ जाते हैं। इससे सांस लेने का रास्ता कुछ संकरा हो सकता है। जब हवा इस संकरे रास्ते से गुजरती है तो आसपास के ऊतकों में कंपन पैदा होता है और इसी कंपन की आवाज खर्राटे के रूप में सुनाई देती है। अधिक वजन धूम्रपान शराब का सेवन और सोने की कुछ स्थितियां खर्राटों की समस्या को बढ़ा सकती हैं। हालांकि लगातार और बहुत तेज खर्राटे हमेशा सामान्य कारणों से ही हों यह जरूरी नहीं है।

    सबसे बड़ा खतरा तब माना जाता है जब सोते समय कुछ सेकंड के लिए सांस रुकती है और इसके बाद व्यक्ति अचानक जोर से सांस लेने लगता है। परिवार के किसी सदस्य को अगर ऐसा बार बार दिखाई देता है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में नींद के दौरान सांस की ऊपरी नली बार बार संकरी या बंद हो सकती है जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित होती है और नींद बार बार बाधित होती रहती है। इसका असर यह होता है कि व्यक्ति पर्याप्त समय सोने के बावजूद सुबह उठकर तरोताजा महसूस नहीं करता।

    खर्राटों के साथ हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी है तो विशेष सावधानी जरूरी है। लंबे समय से तेज खर्राटे आने और ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहने की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है क्योंकि नींद में सांस रुकने की समस्या का संबंध हाई ब्लड प्रेशर और हृदय तथा रक्त वाहिकाओं से जुड़ी परेशानियों से हो सकता है। इसलिए केवल खर्राटे कम करने के उपाय करने के बजाय उनके पीछे छिपे कारण को समझना जरूरी है।

    अगर दिन के समय लगातार नींद आती है काम करते समय थकान महसूस होती है एकाग्रता प्रभावित होती है या रात में घुटन और हांफने के कारण बार बार नींद खुलती है तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। समय रहते समस्या की पहचान होने पर उचित उपचार और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिल सकती है।

    खर्राटों की समस्या में वजन को नियंत्रित रखना करवट लेकर सोना धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन सीमित करना मददगार हो सकता है। लेकिन अगर खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसे संकेत दिखाई दे रहे हैं तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा जरूरी है। शरीर रात में जिन संकेतों के जरिए अपनी परेशानी बता रहा हो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते समझना ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में पहला कदम है।

  • आईने में चेहरा गौर से देखिए, कहीं शरीर कोई खतरे का संकेत तो नहीं दे रहा? इन बदलावों पर तुरंत दें ध्यान

    आईने में चेहरा गौर से देखिए, कहीं शरीर कोई खतरे का संकेत तो नहीं दे रहा? इन बदलावों पर तुरंत दें ध्यान


    नई दिल्ली । चेहरा सिर्फ हमारी पहचान और खूबसूरती का हिस्सा नहीं है बल्कि कई बार यह शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के संकेत भी दे सकता है। आंखों का रंग बदलना हो या त्वचा का असामान्य रूप से पीला पड़ना होंठों का नीला दिखना या आंखों के आसपास लगातार सूजन रहना इन बदलावों को हमेशा केवल कॉस्मेटिक समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में होने वाले कई बदलाव चेहरे और आंखों पर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि केवल चेहरे के लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती लेकिन ऐसे बदलाव लगातार बने रहें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

    सबसे पहले बात आंखों और त्वचा के पीले पड़ने की करें तो यह पीलिया का संकेत हो सकता है। शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने पर आंखों का सफेद हिस्सा और त्वचा पीली दिखाई देने लगती है। इसके पीछे हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी बीमारी पित्त की पथरी या पित्त की नलियों से जुड़ी समस्या समेत कई कारण हो सकते हैं। कई मामलों में इसके साथ पेशाब का रंग गहरा और मल का रंग सामान्य से हल्का भी दिखाई दे सकता है। इसलिए आंखों में अचानक पीलापन नजर आए तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।

    इसी तरह चेहरे या त्वचा का रंग सामान्य से ज्यादा फीका या पीला नजर आना भी शरीर में आयरन की कमी से जुड़े एनीमिया का संकेत हो सकता है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी होता है और हीमोग्लोबिन शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर त्वचा के रंग में बदलाव के साथ लगातार थकान कमजोरी या थोड़ी मेहनत में सांस फूलने जैसी समस्या हो रही है तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

    चेहरे और होंठों का नीला पड़ना भी गंभीर संकेत हो सकता है। होंठ जीभ या चेहरे का अचानक नीला दिखना सायनोसिस कहलाता है और यह रक्त में ऑक्सीजन की कमी या रक्त संचार से जुड़ी परेशानी की ओर इशारा कर सकता है। फेफड़ों की बीमारी वायुमार्ग में रुकावट कुछ हृदय संबंधी समस्याएं या रक्त प्रवाह में बाधा इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं। ऐसा बदलाव अचानक दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

    आंखों की पलकों के आसपास छोटे पीले या पीले-सफेद उभार भी ध्यान देने लायक होते हैं। इन्हें जैंथेलाज्मा कहा जाता है और ये कुछ लोगों में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे संकेत दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह से लिपिड प्रोफाइल जैसी जांच कराई जा सकती है।

    चेहरे पर लगातार सूजन भी शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकती है। आंखों के आसपास सूजन कई कारणों से हो सकती है और कुछ मामलों में यह किडनी से जुड़ी समस्याओं में भी देखी जाती है। वहीं चेहरे का फूला हुआ दिखना अंडरएक्टिव थायरॉयड जैसी स्थितियों से जुड़ा हो सकता है। दूसरी ओर एलर्जी या किसी दवा की प्रतिक्रिया के कारण भी चेहरे और आंखों के आसपास सूजन आ सकती है।

    खास बात यह है कि चेहरे में दिखने वाले हर बदलाव का मतलब किसी गंभीर बीमारी से नहीं होता। मौसम त्वचा की सामान्य स्थिति एलर्जी खानपान या दूसरी वजहों से भी बदलाव हो सकते हैं। लेकिन अगर कोई असामान्य बदलाव अचानक दिखाई दे लगातार बना रहे या उसके साथ कमजोरी सांस लेने में परेशानी दर्द अथवा अन्य लक्षण भी मौजूद हों तो खुद से बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है। आईना बीमारी की पुष्टि नहीं करता लेकिन शरीर के संकेतों पर समय रहते ध्यान देने में जरूर मदद कर सकता है।

  • कम उम्र में भी बढ़ रहा ब्लड क्लॉट का खतरा, पानी की कमी से लेकर मोटापा-धूम्रपान तक हो सकते हैं कारण; ऐसे रखें खून को स्वस्थ

    कम उम्र में भी बढ़ रहा ब्लड क्लॉट का खतरा, पानी की कमी से लेकर मोटापा-धूम्रपान तक हो सकते हैं कारण; ऐसे रखें खून को स्वस्थ


    नई दिल्ली । खून हमारे शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने का काम करता है लेकिन जब रक्त का प्रवाह सामान्य से प्रभावित होने लगे या खून में थक्का बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आम बोलचाल में इसे खून गाढ़ा होना कहा जाता है। मेडिकल तौर पर कुछ स्थितियों में इसे हाइपरकोएगुलेबिलिटी या हाइपरविस्कॉसिटी से जोड़ा जाता है। हालांकि हर बार खून गाढ़ा होने का मतलब एक ही बीमारी नहीं होता और इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी खून के तरल हिस्से को कम कर सकती है। इससे रक्त अधिक कंसंट्रेटेड दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या असामान्य रूप से बढ़ने पर भी रक्त अधिक गाढ़ा हो सकता है। एरिथ्रोसाइटोसिस जैसी स्थितियां इसके उदाहरण हैं। लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और धूम्रपान भी ब्लड क्लॉट बनने के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।

    कुछ परिस्थितियों में शरीर में खून के थक्के बनने की संभावना सामान्य से अधिक हो सकती है। सर्जरी के बाद लंबे समय तक आराम करना, गंभीर चोट, लंबी यात्रा या लगातार कई घंटे बैठे रहना ऐसे कारण हैं जिनमें विशेष सावधानी की जरूरत होती है। गर्भावस्था और प्रसव के आसपास का समय तथा कुछ हार्मोनल दवाएं भी कुछ लोगों में क्लॉटिंग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा कुछ आनुवंशिक स्थितियों के कारण भी किसी व्यक्ति में ब्लड क्लॉट बनने की संभावना अधिक हो सकती है।

    खून में थक्का बनने की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वह शरीर की नस या धमनी में रक्त के सामान्य प्रवाह को रोक सकता है। अगर पैर की किसी गहरी नस में थक्का बनता है तो इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी डीवीटी कहा जाता है। इसमें आमतौर पर पैर में सूजन, दर्द या असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। स्थिति तब गंभीर हो सकती है जब यह थक्का टूटकर रक्त के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाए। ऐसा होने पर पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।

    इसी तरह यदि कोई थक्का मस्तिष्क तक जाने वाली रक्त वाहिका में रक्त प्रवाह को बाधित करता है तो स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। इसलिए शरीर में अचानक दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पैर में अचानक सूजन या दर्द, सांस लेने में अचानक परेशानी, सीने में दर्द या स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

    ब्लड क्लॉट का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं माना जाता। लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोगों, बहुत कम शारीरिक गतिविधि करने वालों, मोटापे से जूझ रहे लोगों और धूम्रपान करने वालों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। लंबी यात्रा करने वाले लोगों को भी लगातार कई घंटे एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचना चाहिए। जिन लोगों में पहले ब्लड क्लॉट की समस्या हो चुकी है या परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास रहा है उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    बचाव के लिए सबसे जरूरी बात लंबे समय तक लगातार निष्क्रिय रहने से बचना है। यदि आपका काम कई घंटे बैठकर करने वाला है तो बीच-बीच में उठकर कुछ देर चलना और पैरों को सक्रिय रखना फायदेमंद हो सकता है। लंबी यात्रा के दौरान भी समय-समय पर चलने-फिरने की कोशिश करनी चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने और शरीर में रक्त संचार को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।

    इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूम्रपान से दूरी बनाना और वजन को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति का खून गाढ़ा है या नहीं। ऐसी स्थिति का कारण जानने के लिए डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के ब्लड थिनर या कोई अन्य दवा लेना उचित नहीं है। अगर आपको ब्लड क्लॉट के लक्षण दिखाई दें या किसी कारण से इसका जोखिम अधिक हो तो समय पर डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

  • झांसी के गुरसराय CHC में मरीजों की भीड़, वायरल फीवर और डायरिया के मामलों में तेजी

    झांसी के गुरसराय CHC में मरीजों की भीड़, वायरल फीवर और डायरिया के मामलों में तेजी


    झांसी। झांसी के गुरसराय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में इन दिनों मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है। खासकर वायरल फीवर, उल्टी-दस्त और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी आई है।

    अस्पताल के पर्चा काउंटर पर कार्यरत नमन और मनोज कुमार के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 300 मरीजों के पर्चे बनाए जा रहे हैं। वहीं ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या भी 300 से अधिक पहुंच रही है, जिससे पूरे केंद्र में भीड़ की स्थिति बनी रहती है।

    CHC के चिकित्सक डॉ. रवि अनुरागी ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रतिदिन 400 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले वायरल फीवर के हैं। इसके अलावा उल्टी, दस्त, टाइफाइड, खुजली, घुटनों में दर्द और दमा (अस्थमा) जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीज भी बड़ी संख्या में इलाज के लिए आ रहे हैं।

    डॉ. अनुरागी ने बताया कि मौसमी बदलाव और संक्रमण के कारण ऐसे मामले बढ़ रहे हैं और लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्होंने सलाह दी कि लोग पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं और आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें ताकि मच्छरों और संक्रमण से बचाव हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या रूमाल से ढकना चाहिए और इस्तेमाल के बाद टिश्यू को तुरंत नष्ट कर देना चाहिए। यदि टिश्यू उपलब्ध न हो तो कोहनी का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है। साथ ही हाथों को नियमित रूप से साबुन से अच्छी तरह धोने की सलाह दी गई है।

    चिकित्सक ने यह भी अपील की कि लोग अपने तौलिये, बर्तन और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं साझा न करें, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। घर और कार्यस्थल पर दरवाजों के हैंडल, मोबाइल फोन और अन्य बार-बार छुई जाने वाली सतहों को नियमित रूप से साफ और कीटाणुरहित करना भी जरूरी है।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच और उपचार कराएं, ताकि बीमारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

  • हंता वायरस से दहशत: क्रूज पर संक्रमण की पुष्टि, 17 अमेरिकी यात्रियों को इमरजेंसी फ्लाइट से अमेरिका शिफ्ट

    हंता वायरस से दहशत: क्रूज पर संक्रमण की पुष्टि, 17 अमेरिकी यात्रियों को इमरजेंसी फ्लाइट से अमेरिका शिफ्ट



    नई दिल्ली। अमेरिका में हंता वायरस को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है, जब डच क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर सवार एक अमेरिकी यात्री में संक्रमण की पुष्टि हुई। एक अन्य यात्री में हल्के लक्षण पाए गए हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के अनुसार स्थिति को देखते हुए जहाज पर मौजूद 17 अमेरिकी नागरिकों को तुरंत विशेष विमान के जरिए अमेरिका वापस लाया जा रहा है।

    सभी यात्रियों को बायोकंटेनमेंट यूनिट में रखा गया है ताकि संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके। प्रोटोकॉल के तहत इन यात्रियों को पहले नेब्रास्का के ओमाहा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का मेडिकल सेंटर के विशेष उपचार केंद्र में ले जाया जाएगा, जहां सभी की विस्तृत जांच होगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार उन्हें दूसरे केंद्रों में शिफ्ट किया जाएगा और उपचार दिया जाएगा।

    जानकारी के मुताबिक शनिवार तक इस प्रकोप से जुड़े 8 संदिग्ध मामले और 3 मौतें भी दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है।

    अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार हंता वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड 1 से 8 सप्ताह तक हो सकता है। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों जैसे रोडेंट्स से फैलता है, हालांकि दुर्लभ मामलों में मानव से मानव संक्रमण भी संभव है। विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित मामलों में मृत्यु दर एक-तिहाई से भी अधिक हो सकती है।

    इसी बीच ब्रिटेन में भी इसी जहाज से निकाले गए 20 यात्रियों को आइसोलेशन में रखा गया है। उन्हें मैनचेस्टर से अस्पताल ले जाकर 72 घंटे की निगरानी में रखा गया है। यदि लक्षण नहीं दिखते हैं तो उन्हें घर भेजा जाएगा, लेकिन 42 दिन तक सेल्फ-आइसोलेशन अनिवार्य रहेगा।

    ब्रिटिश सरकार ने अपने दूरस्थ क्षेत्र ट्रिस्टन दा कुन्हा में भी मेडिकल और सैन्य टीम भेजी है, जहां एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह पहली बार है जब ब्रिटेन ने ऐसे मानवीय मिशन के लिए पैराशूट के जरिए डॉक्टरों को भेजा है।

    हालांकि स्वास्थ्य एजेंसियों ने साफ किया है कि आम जनता के लिए इस वायरस का खतरा बेहद कम है, लेकिन क्रूज और अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य सतर्कता को फिर से बढ़ा दिया है।

  • रोग पंचक 2026: मौसम बदलते ही बढ़ी चिंता! 14 मई तक सेहत पर मंडरा सकता है खतरा, जानें क्या करें और क्या नहीं

    रोग पंचक 2026: मौसम बदलते ही बढ़ी चिंता! 14 मई तक सेहत पर मंडरा सकता है खतरा, जानें क्या करें और क्या नहीं


    नई दिल्ली। Rog Panchak 2026: मई की तेज गर्मी के बीच मौसम लगातार करवट बदल रहा है। कहीं बारिश तो कहीं उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। इसी बीच 10 मई 2026 से रोग पंचक की शुरुआत ने धार्मिक और ज्योतिष मान्यताओं को मानने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ज्योतिष शास्त्र में रोग पंचक को स्वास्थ्य के लिहाज से संवेदनशील समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान संक्रमण, मौसमी बीमारियां और शारीरिक कमजोरी तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में बदलते मौसम और रोग पंचक का यह संयोग लोगों को विशेष सावधानी बरतने का संकेत दे रहा है।

    ज्योतिष गणना के अनुसार रोग पंचक 10 मई 2026 को दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 14 मई 2026 की रात 10 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। पंचक तब बनता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है। वहीं रविवार के दिन शुरू होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल को ऊर्जा परिवर्तन का समय माना गया है। इस दौरान शरीर और मन दोनों को संतुलित रखना बेहद जरूरी बताया गया है। मान्यता है कि इस समय लापरवाही करने पर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर जब मौसम तेजी से बदल रहा हो, तब सर्दी, वायरल, बुखार, एलर्जी और संक्रमण जैसी समस्याएं लोगों को अधिक परेशान कर सकती हैं।

    मौसम विभाग की ओर से कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी भी जारी की गई है। दिन में तेज गर्मी और शाम को अचानक मौसम बदलने से लोगों की इम्यूनिटी पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि रोग पंचक के दौरान स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

    ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार रोग पंचक के समय बाहर का बासी और तला-भुना भोजन खाने से बचना चाहिए। नियमित रूप से हल्दी, तुलसी और गुनगुने पानी का सेवन लाभकारी माना गया है। साथ ही पूजा-पाठ, ध्यान और महामृत्युंजय मंत्र का जाप मानसिक तनाव कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, सगाई, दक्षिण दिशा की यात्रा और घर निर्माण जैसे शुभ कार्यों से भी बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि ज्योतिष और धार्मिक मान्यताएं आस्था का विषय हैं, इसलिए किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी माना जाता है।

  • शान बोले: केके न तो ड्रिंक करते थे, न स्मोक, उनके हार्टअटैक ने सबको हैरान कर दिया

    शान बोले: केके न तो ड्रिंक करते थे, न स्मोक, उनके हार्टअटैक ने सबको हैरान कर दिया




    नई दिल्ली।
    सिंगर शान ने हाल ही में दिवंगत सिंगर केके (कृष्णकुमार कुन्नथ) के बारे में खुलासा किया। साल 2022 में केके का निधन हार्टअटैक से हुआ था, और इस खबर ने शान और उनके परिवार को हैरान कर दिया। शान ने कहा कि केके न तो ड्रिंक करते थे न स्मोक, और उनका जीवनशैली पूरी तरह से स्वस्थ थी। इस वजह से उनके अचानक निधन की खबर सुनकर शान ने खुद अपनी सेहत की जांच के लिए MRI करवाई।

    मनीष पॉल के पॉडकास्ट में शान ने केके के साथ अपने बॉन्ड के बारे में भी बातें साझा कीं। उन्होंने कहा, “केके अपने टॉप फॉर्म में थे।

    हमने लगभग 20 गाने साथ में गाए, जिनमें से आधे सुपरहिट रहे। सिर्फ गाने ही नहीं, हमने कई शोज और ट्रेवल भी साथ में किए। मैं उनका बहुत करीबी था।

    शान ने बताया कि केके ने कभी पार्टी नहीं की और हमेशा अपने परिवार व खुद के लिए समय निकालते थे।

    केके की जीवनशैली इतनी संतुलित थी कि उन्होंने कभी भारी खाना नहीं खाया, कोलेस्ट्रॉल की समस्या नहीं थी, और वे नियमित स्विमिंग और योगा करते थे।

    शान ने यह भी साझा किया कि केके बैक टू बैक शोज नहीं करते थे, लेकिन उस समय हम सभी कॉलेज शोज कर रहे थे। उन्होंने कहा, “हम सभी लगातार शोज और ट्रेवल में लगे रहते थे, लेकिन जब केके का हार्टअटैक हुआ, मेरा परिवार बहुत परेशान हो गया। मैंने तुरंत MRI करवाई। यह खबर सुनकर हम सभी हैरान और स्तब्ध रह गए।”

    शान की यह बातचीत दर्शाती है कि केके केवल एक महान सिंगर ही नहीं, बल्कि अनुकरणीय जीवनशैली वाले व्यक्ति भी थे, जिनकी यादें और संगीत हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।