Tag: health awareness

  • योग दिवस पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी, स्वस्थ वृद्धावस्था पर जोर

    योग दिवस पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी, स्वस्थ वृद्धावस्था पर जोर


    मध्यप्रदेश । मंदसौर के नूतन स्टेडियम में रविवार को International Yoga Day 2026 के अवसर पर भव्य जिला स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रखी गई, जिसके तहत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का संदेश दिया।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद सुधीर गुप्ता और कलेक्टर अदिति गर्ग उपस्थित रहे। इनके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा विजय पाटीदार, नगर पालिका अध्यक्ष रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, पूर्व मंत्री कैलाश चावला, पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया सहित कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी योगाभ्यास में भाग लिया।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोलकाता में दिए गए योग दिवस संबोधन का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया, जिसे उपस्थित सभी लोगों ने ध्यानपूर्वक सुना। इसके साथ ही राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के योग कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया।

    इस आयोजन की विशेषता यह रही कि जैन संत प्रणमय सागर ने स्वयं मंच पर योगासन कराए और उपस्थित लोगों को योग के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास कराते हुए बताया कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मिक और मानसिक संतुलन का भी साधन है।

    योगाभ्यास के बाद सभी प्रतिभागियों ने नियमित रूप से योग करने का संकल्प लिया। कलेक्टर अदिति गर्ग ने नागरिकों से अपील की कि वे योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, क्योंकि यह स्वस्थ और संतुलित जीवन की कुंजी है।

    सांसद सुधीर गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की प्राचीन योग परंपरा आज पूरे विश्व के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने बताया कि ऋग्वेद और महर्षि पतंजलि के योग सूत्रों में योग का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसे आधुनिक समय में वैश्विक पहचान मिली है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से वर्ष 2015 के बाद योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और आज करोड़ों लोग इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए योग अत्यंत आवश्यक है।

    सांसद ने किसानों से जैविक खेती अपनाने और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने की भी अपील की, यह कहते हुए कि “जब भूमि स्वस्थ होगी तभी समाज भी स्वस्थ रहेगा।”

    कुल मिलाकर, मंदसौर का यह योग कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य जागरूकता का प्रतीक बना, बल्कि इसमें आध्यात्मिकता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संदेश का भी सुंदर समावेश देखने को मिला।

  • बढ़ती परेशानियों के बीच खाने पर असर, हर निवाले से पहले सोचने को मजबूर लोग

    बढ़ती परेशानियों के बीच खाने पर असर, हर निवाले से पहले सोचने को मजबूर लोग


    नई दिल्ली । आजकल कई लोग ऐसी परेशानी से जूझ रहे हैं, जिसमें खाना खाते ही तुरंत वॉशरूम जाने की जरूरत महसूस होने लगती है। बाहर खाना हो, ऑफिस में लंच करना हो या किसी फंक्शन में बैठना—हर बार मन में यही डर बना रहता है कि कहीं अचानक टॉयलेट न जाना पड़ जाए। डॉक्टरों के मुताबिक यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहे तो बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि इस स्थिति को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स (Gastrocolic Reflex) कहा जाता है। यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें खाना पेट में पहुंचते ही आंतें सक्रिय हो जाती हैं। हालांकि अगर यह प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा होने लगे और हर बार दस्त, पेट दर्द या गैस की समस्या पैदा करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    डॉक्टरों के अनुसार, कई बार पेट ठीक से साफ न होने, खराब खानपान, ज्यादा मसालेदार भोजन, तनाव या कमजोर पाचन तंत्र के कारण यह समस्या बढ़ जाती है। खाना खाते ही पेट में मरोड़, गैस और टॉयलेट जाने की तीव्र इच्छा होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा होना आंतों में संक्रमण या पाचन संबंधी बीमारी की तरफ इशारा कर सकता है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो लिवर और आंतों की जांच करवाना जरूरी हो जाता है। समय रहते इलाज न कराने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी, कमजोरी और गंभीर पाचन समस्याएं हो सकती हैं।

    इस परेशानी से जुड़ी कुछ प्रमुख बीमारियां भी सामने आती हैं। इनमें इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) प्रमुख है, जिसमें खाना खाते ही पेट दर्द और गैस बनने लगती है। वहीं कुछ लोगों को दूध या डेयरी उत्पादों से एलर्जी होती है, जिसे लैक्टोज इंटॉलरेंस कहा जाता है। ऐसे लोगों को दूध पीते ही दस्त या पेट खराब होने लगता है। इसके अलावा सीलिएक डिजीज में गेहूं या ग्लूटेन से बनी चीजें खाने पर आंतें प्रभावित होती हैं और बार-बार दस्त की समस्या हो सकती है।

    डॉक्टरों की सलाह है कि अगर खाना खाते ही बार-बार टॉयलेट जाना पड़ रहा है, पेट में लगातार दर्द रहता है, वजन कम हो रहा है या कमजोरी महसूस हो रही है, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। खानपान में सुधार, पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन और तनाव कम करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

  • World Thalassaemia Day: थकान, कमजोरी और एनीमिया को न करें नजरअंदाज

    World Thalassaemia Day: थकान, कमजोरी और एनीमिया को न करें नजरअंदाज


    नई दिल्ली । हर साल 8 मई को मनाया जाने वाला World Thalassemia Day लोगों को एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार Thalassemia के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण अवसर देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार थकान महसूस होना, कमजोरी आना, शरीर में खून की कमी, पीली त्वचा या बार-बार बीमार पड़ना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। कई बार ये संकेत थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं।

    नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर में ऑक्सीजन का संचार प्रभावित होता है, जिससे मरीज को लगातार कमजोरी, थकान और एनीमिया जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में आनुवंशिक रूप से पहुंचती है, इसलिए इसकी समय पर पहचान बेहद जरूरी मानी जाती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि थैलेसीमिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—थैलेसीमिया माइनर और थैलेसीमिया मेजर। थैलेसीमिया माइनर में व्यक्ति बीमारी का वाहक होता है और सामान्य जीवन जी सकता है। कई मामलों में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं या दिखाई ही नहीं देते। वहीं, थैलेसीमिया मेजर इसका गंभीर रूप है, जिसमें मरीज को नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। लगातार इलाज, दवाओं और चिकित्सकीय निगरानी के बिना मरीज के लिए सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो सकता है।

    विश्व थैलेसीमिया दिवस का सबसे बड़ा उद्देश्य युवाओं को शादी से पहले थैलेसीमिया जांच कराने के लिए प्रेरित करना है। डॉक्टरों के अनुसार अगर पति और पत्नी दोनों थैलेसीमिया माइनर के वाहक हों, तो उनके बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते जांच और जागरूकता इस बीमारी की रोकथाम में अहम भूमिका निभा सकती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि यदि किसी व्यक्ति में लगातार कमजोरी, भूख कम लगना, थकान, पीली त्वचा या बार-बार संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और आवश्यक रक्त जांच कराएं। सही समय पर पहचान और उचित इलाज से बीमारी की जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    थैलेसीमिया मेजर के मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। यही वजह है कि इस अवसर पर स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि एक यूनिट रक्त किसी मरीज के लिए नई जिंदगी साबित हो सकता है।

    हालांकि थैलेसीमिया का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन समय पर जांच, नियमित उपचार, संतुलित देखभाल और जागरूकता के जरिए मरीज सामान्य और बेहतर जीवन जी सकते हैं।

  • नींद की कमी पर अनोखी पहल: सियोल में ‘पावर नैप कॉन्टेस्ट’, 80 साल के बुजुर्ग ने मारी बाजी

    नींद की कमी पर अनोखी पहल: सियोल में ‘पावर नैप कॉन्टेस्ट’, 80 साल के बुजुर्ग ने मारी बाजी


    नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में एक अनोखा और दिलचस्प आयोजन देखने को मिला, जहां लोगों को सोने के लिए आमंत्रित किया गया। ‘पावर नैप कॉन्टेस्ट’ नाम की इस प्रतियोगिता का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि देश में बढ़ती नींद की कमी की गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचना था। सियोल मेट्रोपॉलिटन गवर्नमेंट द्वारा आयोजित इस इवेंट में हजारों युवा हान नदी किनारे स्थित पार्क में पहुंचे और खुले आसमान के नीचे सुकून की नींद लेने की कोशिश की।

    तेज-रफ्तार जिंदगी और काम के भारी दबाव के लिए मशहूर दक्षिण कोरिया में युवाओं के बीच नींद की कमी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। यही वजह है कि इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए प्रतिभागियों को थका हुआ और पेट भरकर आने की शर्त दी गई थी, ताकि वे गहरी नींद ले सकें। कई प्रतिभागी मजेदार वेशभूषा में पहुंचे। कोई ‘स्लीपिंग ब्यूटी’ बना तो कोई ‘स्लीपिंग प्रिंस’।

    प्रतियोगिता में शामिल 20 वर्षीय छात्र पार्क जून-सियोक पारंपरिक शाही पोशाक पहनकर आए और बताया कि पढ़ाई और पार्ट-टाइम जॉब के कारण उन्हें रोजाना सिर्फ 3-4 घंटे ही नींद मिल पाती है। वहीं, अनिद्रा से जूझ रही एक शिक्षिका कोआला की ड्रेस में नजर आईं, ताकि वह इस मौके पर सुकून से सो सकें।

    इस अनोखे मुकाबले में प्रतिभागियों की नींद की गुणवत्ता को मापने के लिए उनकी हार्ट रेट मॉनिटर की गई, जिससे पता चल सके कि कौन सबसे गहरी और शांत नींद ले रहा है। प्रतियोगिता की शुरुआत दोपहर में हुई और कुछ ही देर में पूरे पार्क में सन्नाटा छा गया, मानो शहर की भागदौड़ थम गई हो।

    सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस ‘नींद की जंग’ में 80 वर्षीय बुजुर्ग ने बाजी मार ली, जबकि दूसरे स्थान पर एक 37 वर्षीय ऑफिस वर्कर रहे, जो नाइट शिफ्ट और काम के दबाव से बेहद थके हुए थे।

    यह प्रतियोगिता सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश है कि आधुनिक जीवनशैली में नींद की अनदेखी किस हद तक बढ़ चुकी है। OECD देशों में सबसे कम सोने वाले देशों में शामिल दक्षिण कोरिया अब इस समस्या को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और यह ‘पावर नैप कॉन्टेस्ट’ उसी दिशा में एक अनोखी पहल बनकर सामने आया है।

  • नमिता थापर विवाद ने खड़े किए गंभीर सवाल, क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी का है भारी अभाव?

    नमिता थापर विवाद ने खड़े किए गंभीर सवाल, क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी का है भारी अभाव?


    नई दिल्ली। उद्यमिता और टेलीविजन जगत की जानी मानी हस्ती नमिता थापर हाल ही में सोशल मीडिया पर अपने एक वीडियो को लेकर विवादों में आ गई हैं। नमाज के स्वास्थ्य लाभों पर जानकारी साझा करने के बाद उन्हें ऑनलाइन ट्रोलिंग और अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संवाद की मर्यादा और जिम्मेदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

    मार्च के अंतिम सप्ताह में साझा किए गए एक वीडियो में नमिता थापर ने नमाज को एक शारीरिक गतिविधि के रूप में समझाते हुए उसके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर चर्चा की थी। उन्होंने इसे एक नियमित व्यायाम की तरह बताया जो शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। उनका कहना था कि यह जानकारी पूरी तरह स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई थी और इसका किसी भी धार्मिक भावना से कोई नकारात्मक संबंध नहीं था।

    हालांकि इस वीडियो के बाद उन्हें लगातार कई हफ्तों तक आलोचना और अपमानजनक प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस दौरान न केवल उन्हें बल्कि उनकी मां को भी निशाना बनाया गया और सोशल मीडिया पर असम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई और इस तरह के व्यवहार को गलत ठहराया।

    उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले भी कई सांस्कृतिक और पारंपरिक विषयों पर स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा करती रही हैं, जिनमें योग और सूर्य नमस्कार जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे विषयों पर कभी इस प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिससे उन्होंने यह सवाल उठाया कि अलग अलग परिस्थितियों में लोगों की प्रतिक्रिया इतनी भिन्न क्यों हो जाती है।

    नमिता थापर ने इस पूरे मामले को महिलाओं के प्रति ऑनलाइन व्यवहार से भी जोड़ा और कहा कि समाज में महिलाओं के सम्मान की बात तो की जाती है, लेकिन वास्तविकता में कई बार उन्हें अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे व्यक्त करने का तरीका सभ्य और मर्यादित होना चाहिए।

    अपने बयान में उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाया और कहा कि वे अपने विश्वासों पर गर्व करती हैं। साथ ही उन्होंने यह दोहराया कि उनका उद्देश्य केवल स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा करना था, न कि किसी धर्म या समुदाय को लेकर कोई टिप्पणी करना।

    यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर बढ़ती असहिष्णुता और संवाद के स्तर को लेकर गंभीर चिंताओं को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ साथ जिम्मेदारी और सम्मान बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है, ताकि स्वस्थ और संतुलित संवाद संभव हो सके।

  • राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं

    राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं


    भोपाल । राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही एक समृद्ध और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होते हैं और इस दिशा में टीकाकरण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि माताओं और शिशुओं का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक है। टीकाकरण न केवल बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाता है बल्कि समाज में स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार भी तैयार करता है।

    डॉ. यादव ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित टीकाकरण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे टीकाकरण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने बच्चों का निर्धारित समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं।

    मुख्यमंत्री ने टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में योगदान देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं स्वयंसेवी संस्थाओं और सभी संबंधित टीमों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।

  • होटल में साइलेंट अटैक से मालिक की मौत: थाली में सब्जी रखते ही गिरा, भाई की CPR भी काम नहीं आई

    होटल में साइलेंट अटैक से मालिक की मौत: थाली में सब्जी रखते ही गिरा, भाई की CPR भी काम नहीं आई


    नई दिल्ली। नर्मदापुरम के ग्वालटोली रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में गुरुवार रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें होटल संचालक अशोक नवलानी (60) का साइलेंट अटैक से निधन हो गया। घटना उस समय हुई जब अशोक नवलानी ग्राहकों को खाना परोस रहे थे। जैसे ही उन्होंने एक थाली में सब्जी रखी, अचानक वह जमीन पर गिर पड़े। घटना का सीसीटीवी वीडियो शनिवार सुबह सामने आया, जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि गिरते ही आसपास के लोग समझ नहीं पाए कि क्या हुआ। कुछ ही पलों में अशोक के भाई पप्पन नवलानी और अन्य कर्मचारी दौड़कर उन्हें उठाने पहुंचे और तुरंत सीपीआर देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
     
    अशोक नवलानी गोकुलपुरी की सिंधी कॉलोनी के निवासी थे और अपने भाई पप्पन नवलानी के साथ मिलकर ‘चाचा-भतीजा’ नाम से होटल चला रहे थे। पप्पन ने बताया कि गुरुवार रात दोनों दुकान पर ही थे। वह सब्जी बना रहे थे और अशोक ग्राहकों को टेबल पर खाना परोस रहे थे। थाली में सब्जी रखते ही अचानक गिरने के बाद उन्होंने सीपीआर की कोशिश की, लेकिन अशोक अचेत हो गए। डॉक्टरों ने अस्पताल पहुंचते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पप्पन ने आगे बताया कि अशोक परिवार में सबसे बड़े भाई थे, उनके छह भाई-बहन हैं, और उनकी एक बेटी की शादी हो चुकी है। पिछले तीन साल में गर्मियों में उन्हें दो-तीन बार हल्की घबराहट और बीपी कम होने की समस्या हुई थी, लेकिन हार्ट की कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

    नर्मदापुरम जिला अस्पताल के क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील जैन ने कहा कि आजकल असीमित दिनचर्या, तनाव, बिगड़ा खानपान और व्यायाम की कमी से हार्ट अटैक की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने सभी से कहा कि स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, नियमित रूटीन चेकअप कराएं, 7-8 घंटे की नींद लें और रोजाना व्यायाम या योग से तनाव कम करें।

    होटल में हुए इस हादसे ने स्थानीय लोगों और परिवार में शोक की लहर फैला दी है। अशोक नवलानी का निधन इस बात का भी संदेश देता है कि व्यस्त दिनचर्या और स्वास्थ्य पर ध्यान न देना गंभीर परिणाम ला सकता है।

    इस घटना की वजह से लोगों में चेतना बढ़ी है कि कार्यस्थल पर भी स्वास्थ्य और आराम को महत्व देना जरूरी है, खासकर व्यवसायिक जीवन में तनाव और थकान के बीच।

  • फिटनेस में सफलता पाने के लिए 'मतलबी' बनना है जरूरी जानिए क्यों

    फिटनेस में सफलता पाने के लिए 'मतलबी' बनना है जरूरी जानिए क्यों

    नई दिल्ली । आजकल की तेज़-तर्रार ज़िंदगी में हम अक्सर अपनी सेहत को नज़रअंदाज कर देते हैं लेकिन अगर आप फिट रहना चाहते हैं, तो कुछ आदतें हैं जिन्हें अपनाना जरूरी है। इन्हीं आदतों के बारे में हम बात करेंगे, जो न सिर्फ आपकी शारीरिक स्वास्थ्य को बल्कि मानसिक संतुलन को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं

    खाने की टेबल पर ना कहना सीखें

    हम भारतीय अपनी मेहमाननवाजी के लिए प्रसिद्ध हैं और अक्सर खाना खाने के दौरान हमारे आसपास के लोग हमें कुछ अतिरिक्त खाने के लिए दबाव डालते हैं। अगर आप डाइट पर हैं या आपका पेट भर चुका है तो भी आपको हमेशा ‘ना’ कहना सीखना होगा। इससे लोग भले ही थोड़े नाराज़ हो जाएं, लेकिन जब वे आपकी फिटनेस देखेंगे तो यही वही लोग होंगे जो आपकी तारीफ करेंगे। आपके खाने की प्लेट पर क्या जाएगा, यह पूरी तरह से आपके नियंत्रण में होना चाहिए, न कि किसी और के। अगर आपको सचमुच कुछ नहीं चाहिए तो मुस्कुराते हुए और विनम्रता से मना कर दें। यह छोटी सी आदत आपकी फिटनेस को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करेगी।

    अपने मी टाइम से कोई समझौता न करें

    फिटनेस की दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने वर्कआउट को सबसे पहले अपनी प्राथमिकता बनाएं। अक्सर हम किसी इमरजेंसी या सामाजिक कारणों की वजह से अपने फिटनेस रूटीन को छोड़ देते हैं लेकिन यह आदत धीरे-धीरे हमारी सेहत पर असर डालने लगती है। आपको यह समझना होगा कि जब आप अपने वर्कआउट का समय निकालते हैं, तो वह सिर्फ आपका है। उस समय को दुनिया की किसी भी चीज़ से समझौता न करें। अगर आप दिन में सिर्फ 45 मिनट या 1 घंटा अपने लिए निकालते हैं तो यह समय सिर्फ आपके शरीर और मानसिक स्थिति के लिए है। इस दौरान फोन को साइलेंट पर रखें, दूसरों से दूर रहें और अपने शरीर और मन को फिटनेस में समर्पित करें।

    अपनी ऊर्जा को बचाना सीखें

    फिटनेस का मतलब सिर्फ शारीरिक सेहत नहीं होता, बल्कि मानसिक सेहत भी बहुत मायने रखती है। अगर आप हर समय दूसरों की समस्याओ गॉसिप या नेगेटिव बातों में उलझे रहते हैं तो इसका असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा। ज्यादा मानसिक तनाव का असर सीधे तौर पर आपके शरीर पर भी पड़ता है और यही तनाव पेट की चर्बी बढ़ाने का कारण बनता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपनी ऊर्जा को सिर्फ अपने वर्कआउट और खुश रहने में लगाएं न कि दूसरों की समस्याओं या गॉसिप में। यह एक स्वस्थ मानसिकता अपनाने की आदत बनानी चाहिए। अपनी ऊर्जा को उन चीज़ों पर लगाएं जो आपको अच्छा महसूस कराती हैं न कि उन बातों पर जो आपकी सेहत पर नकारात्मक असर डालती हैं।

    थकान होने पर प्लान कैंसिल करें

    हमारे समाज में अक्सर यह होता है कि हम अपनी सेहत से ज्यादा दूसरों की भावनाओं को प्राथमिकता देते हैं। अगर आपका शरीर थका हुआ है और आपको आराम की जरूरत है तो बिना किसी झिझक के अपने सोशल प्लान्स को कैंसिल कर दें। यह ज़रूरी नहीं कि हर बार दोस्तों को खुश करने के लिए आप बाहर जाएं। कभी-कभी एक दिन घर पर रहकर रेस्ट करना आपके शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। आराम से ही आप सही तरीके से रिकवर हो सकते हैं और फिर अगले दिन बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। अपने शरीर की सुनें क्योंकि जब आप उसे आराम देंगे तो वह आपको वह परिणाम देगा जो आप चाहते हैं।

    फिटनेस एक संजीदा और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक संतुलन भी बनाए रखने में मदद करती है। अपने खाने की आदतों, समय प्रबंधन और मानसिक ऊर्जा को सही दिशा में लगाने से आप अपनी फिटनेस को बेहतर बना सकते हैं। अगर आप इन चार महत्वपूर्ण आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं तो आप न सिर्फ अपने शरीर को फिट रखेंगे बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे। अपनी सेहत का ध्यान रखें क्योंकि यह आपका सबसे बड़ा संपत्ति है।