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  • सुबह का नाश्ता छोड़ना और देर रात खाना पड़ सकता है भारी, जानिए भोजन का सही समय क्यों है जरूरी

    सुबह का नाश्ता छोड़ना और देर रात खाना पड़ सकता है भारी, जानिए भोजन का सही समय क्यों है जरूरी


    नई दिल्ली। सेहतमंद रहने के लिए लोग अक्सर अपनी डाइट पर खास ध्यान देते हैं। खाने में फल सब्जियां दालें साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल करना अच्छी आदत मानी जाती है। हालांकि केवल पौष्टिक भोजन खाना ही पर्याप्त नहीं होता। भोजन किस समय किया जा रहा है इसका भी शरीर पर असर पड़ सकता है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार खाने का समय शरीर के मेटाबॉलिज्म पाचन प्रक्रिया हार्मोन और नींद जैसी कई प्रक्रियाओं से जुड़ा हो सकता है। यही वजह है कि सही खान-पान के साथ नियमित भोजन का समय बनाए रखना भी जरूरी माना जाता है।

    हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है जिसे बायोलॉजिकल क्लॉक कहा जाता है। यह शरीर की कई प्रक्रियाओं को दिन और रात के अनुसार नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है। नींद जागने की प्रक्रिया से लेकर हार्मोन के स्तर और पाचन तक कई गतिविधियां इसी प्राकृतिक लय से जुड़ी होती हैं। भोजन का समय भी इस व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। यदि व्यक्ति रोजाना अलग-अलग समय पर खाना खाता है या लंबे समय तक भूखा रहता है तो उसकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।

    सुबह का नाश्ता छोड़ना भी कई लोगों की आदत बन चुकी है। व्यस्तता के कारण कुछ लोग सीधे दोपहर का भोजन करते हैं। वहीं कुछ लोग दिनभर कम खाने के बाद रात में एक साथ ज्यादा भोजन कर लेते हैं। ऐसी आदतें पाचन संबंधी परेशानी बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद अचानक भारी भोजन करने से पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए दिनभर भोजन के बीच बहुत लंबा अंतर रखने से बचना बेहतर माना जाता है।

    रात के खाने को लेकर भी सावधानी जरूरी है। देर रात भारी भोजन करने से पेट को भोजन पचाने के लिए अधिक समय लग सकता है। इससे कुछ लोगों को गैस एसिडिटी या पेट में भारीपन जैसी समस्या महसूस हो सकती है। देर से खाना और तुरंत सो जाना नींद की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है। कुछ शोधों में देर से भोजन करने और वजन ब्लड शुगर तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के बीच संबंध की ओर भी संकेत मिले हैं।

    डिनर को बहुत देर तक टालने के बजाय अपनी दिनचर्या के अनुसार समय पर भोजन करना बेहतर विकल्प हो सकता है। आम तौर पर रात का भोजन सोने से कुछ घंटे पहले कर लेना सुविधाजनक माना जाता है। भोजन के बाद थोड़ी देर हल्की वॉक भी दिनचर्या का हिस्सा बनाई जा सकती है। करीब 10 से 15 मिनट की सामान्य चाल से टहलना पाचन के लिए मददगार हो सकता है और भोजन के बाद होने वाली सुस्ती को कम करने में भी सहायता कर सकता है।

    हालांकि हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है। उम्र काम करने का समय शारीरिक गतिविधि नींद की दिनचर्या और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार भोजन का समय बदल सकता है। किसी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति को अपनी डाइट और भोजन की टाइमिंग को लेकर डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि भोजन पौष्टिक होने के साथ नियमित और संतुलित समय पर लिया जाए। सही खान-पान की आदतें लंबे समय तक स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

  • नाक बंद गले में खराश और लगातार छींक से हैं परेशान तो जानिए सर्दी जुकाम में राहत पाने के असरदार उपाय

    नाक बंद गले में खराश और लगातार छींक से हैं परेशान तो जानिए सर्दी जुकाम में राहत पाने के असरदार उपाय


    नई दिल्ली। बदलते मौसम में सर्दी जुकाम की समस्या आम हो जाती है। मौसम में बदलाव तापमान का उतार चढ़ाव धूल धुआं और वायरल संक्रमण जैसी वजहों से नाक बहना छींक आना गले में खराश खांसी और हल्का बुखार जैसी परेशानियां हो सकती हैं। सामान्य सर्दी जुकाम अक्सर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है लेकिन इस दौरान सही देखभाल करने से असहजता और लक्षणों से राहत मिल सकती है। इसके लिए सबसे पहले शरीर को पर्याप्त आराम और पानी देना जरूरी है।

    सर्दी जुकाम के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना फायदेमंद हो सकता है। पानी गुनगुने तरल पदार्थ और सूप जैसे विकल्प शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और गले को आराम पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। बहुत गर्म पेय लेने से बचना चाहिए क्योंकि इससे मुंह या गले में जलन हो सकती है। गले में खराश होने पर गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे भी किए जा सकते हैं। छोटे बच्चों को गरारे कराते समय विशेष सावधानी जरूरी है।

    नाक बंद होने की समस्या में कमरे की हवा में पर्याप्त नमी बनाए रखना मददगार हो सकता है। गर्म पानी से भाप लेने की सलाह आमतौर पर दी जाती है लेकिन बहुत गर्म भाप से त्वचा या सांस की नली जलने का खतरा रहता है। खासकर बच्चों को सीधे गर्म पानी की भाप देने से बचना चाहिए। आरामदायक तापमान पर नम हवा या सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया गया ह्यूमिडिफायर बेहतर विकल्प हो सकता है।

    सर्दी जुकाम में नींद और आराम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शरीर संक्रमण से लड़ने के दौरान अधिक आराम चाहता है इसलिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। साथ ही हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत फेंकना संक्रमण फैलने की संभावना कम करने में मदद कर सकता है। घर में किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमण होने से बचाने के लिए व्यक्तिगत सामान साझा करने से भी बचना बेहतर है।

    दवाओं के मामले में खुद से एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है। सामान्य सर्दी जुकाम अक्सर वायरस के कारण होता है और एंटीबायोटिक वायरल संक्रमण पर काम नहीं करते। बुखार या दर्द जैसी परेशानी होने पर दवा लेने से पहले उम्र स्वास्थ्य स्थिति और पहले से चल रही दवाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। बच्चों के लिए किसी भी दवा की खुराक डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह के अनुसार ही होनी चाहिए।

    अगर सर्दी जुकाम के लक्षण लगातार बढ़ रहे हों तेज या लंबे समय तक बुखार बना रहे सांस लेने में परेशानी हो सीने में दर्द हो अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या लक्षण कुछ समय बाद भी बेहतर न हों तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। छोटे बच्चों बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में लक्षणों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। सही आराम पर्याप्त तरल पदार्थ और साफ सफाई की आदतें सामान्य सर्दी जुकाम के दौरान राहत पाने और संक्रमण फैलने से रोकने में मदद कर सकती हैं।

  • सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके

    सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अपनी सेहत का ध्यान रखना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। काम का दबाव अनियमित खानपान कम नींद और शारीरिक गतिविधियों की कमी धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकती है। ऐसे में Health Care को केवल बीमारी होने के बाद इलाज तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है। अच्छी सेहत के लिए सबसे पहले संतुलित खानपान पर ध्यान देना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और जरूरत से ज्यादा नमक लेने से बचना भी जरूरी है।

    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना भी महत्वपूर्ण है। पानी की जरूरत उम्र मौसम शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग अलग हो सकती है। इसलिए पूरे दिन शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसके साथ ही रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना चाहिए। तेज चलना योग हल्की एक्सरसाइज साइकिलिंग या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने वालों को बीच बीच में उठकर चलना भी चाहिए।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर तथा दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। सोने और जागने का समय लगभग निश्चित रखने की कोशिश करें। रात में सोने से पहले मोबाइल या अन्य स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल कम करना भी नींद की गुणवत्ता के लिए मददगार हो सकता है।

    मानसिक स्वास्थ्य भी Health Care का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार तनाव महसूस होने पर अपनी दिनचर्या में आराम मनोरंजन परिवार के साथ समय और पसंदीदा गतिविधियों के लिए जगह बनाएं। जरूरत महसूस होने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना उचित कदम हो सकता है।

    इसके अलावा समय समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी उपयोगी है। खासकर यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या परिवार में किसी बीमारी का इतिहास रहा है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करानी चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो खुद से दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की कोशिश से नहीं बल्कि रोजाना अपनाई गई छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश और समय पर स्वास्थ्य सलाह लेने जैसी आदतें स्वस्थ जीवनशैली का आधार बन सकती हैं।

  • बीमारी से बचना है तो आज से बदलें अपनी दिनचर्या: सही खानपान नियमित एक्सरसाइज पर्याप्त नींद और तनाव पर काबू रखने से ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल

    बीमारी से बचना है तो आज से बदलें अपनी दिनचर्या: सही खानपान नियमित एक्सरसाइज पर्याप्त नींद और तनाव पर काबू रखने से ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना अनियमित खानपान नींद की कमी तनाव और शारीरिक गतिविधि का कम होना धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकता है। अच्छी सेहत के लिए किसी एक दिन की मेहनत काफी नहीं होती बल्कि रोजमर्रा की आदतों में छोटे और लगातार बदलाव जरूरी होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वस्थ खानपान नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद तंबाकू से दूरी और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल खुद की सेहत संभालने के अहम हिस्से हैं।

    स्वास्थ्य देखभाल की शुरुआत सबसे पहले भोजन से होती है। रोज के खाने में अलग अलग प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है। साबुत अनाज दालें फल सब्जियां और जरूरत के अनुसार प्रोटीन के अच्छे स्रोत भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। दूसरी तरफ बहुत ज्यादा नमक चीनी अस्वास्थ्यकर वसा और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। WHO के अनुसार स्वस्थ आहार पर्याप्तता संतुलन संयम और विविधता जैसे सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

    इसके साथ शारीरिक गतिविधि को रोज की दिनचर्या में जगह देना बेहद जरूरी है। इसके लिए जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जिम जाए। तेज चाल से चलना साइकिल चलाना तैरना योग करना खेलना या रोजमर्रा के कामों में सक्रिय रहना भी शारीरिक गतिविधि का हिस्सा हो सकता है। WHO के अनुसार वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि या उसके बराबर अधिक तीव्र गतिविधि करने की सलाह दी जाती है। जो लोग लंबे समय से सक्रिय नहीं हैं उन्हें अचानक बहुत ज्यादा व्यायाम करने के बजाय धीरे धीरे शुरुआत करनी चाहिए।

    स्वास्थ्य देखभाल में नींद को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए। देर रात तक मोबाइल चलाना लगातार काम करना और सोने का समय बदलते रहना शरीर की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें। सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और शांत वातावरण बनाना भी बेहतर नींद की आदत विकसित करने में मदद कर सकता है। अगर लंबे समय तक नींद से जुड़ी समस्या बनी रहती है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शरीर की सेहत से अलग नहीं है। लगातार तनाव चिंता चिड़चिड़ापन या थकान महसूस होने पर व्यक्ति को अपने काम के बीच आराम और सामाजिक जुड़ाव के लिए समय निकालना चाहिए। परिवार और दोस्तों से बातचीत करना पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना स्वास्थ्य देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खुद की देखभाल का मतलब यह नहीं है कि बीमारी होने पर डॉक्टर की जरूरत नहीं है। WHO भी स्पष्ट करता है कि self care स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मियों की जगह नहीं लेती बल्कि उनकी देखभाल को बेहतर तरीके से पूरा करती है।

    तंबाकू से दूरी बनाना भी स्वास्थ्य सुरक्षा का बेहद महत्वपूर्ण कदम है। इसी तरह शराब के सेवन से बचना या उसे सीमित करना कई स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर डायबिटीज या अन्य पुरानी बीमारी है उन्हें नियमित जांच और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए। WHO की सलाह के मुताबिक जीवनशैली में बदलाव कई बीमारियों के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं लेकिन कई स्थितियों में दवा और चिकित्सकीय निगरानी भी जरूरी रहती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि स्वस्थ रहने के लिए किसी बड़े बदलाव का इंतजार न करें। रोज थोड़ी शारीरिक गतिविधि पौष्टिक भोजन पर्याप्त आराम तनाव को संभालने की कोशिश और समय पर चिकित्सकीय सलाह जैसी छोटी आदतें लंबे समय में बड़ा अंतर ला सकती हैं। अपने शरीर के संकेतों को समझना और लगातार बनी रहने वाली परेशानी को नजरअंदाज न करना भी उतना ही जरूरी है। स्वास्थ्य की सही देखभाल बीमारी के बाद शुरू नहीं होती बल्कि बीमारी से बचाव और बेहतर जीवनशैली की आदतों से पहले ही शुरू हो जाती है।

  • बारिश के मौसम में स्वास्थ्य को रखना है सुरक्षित तो अपनाएं ये आसान उपाय छोटी सी सावधानी बचाएगी बड़ी बीमारियों से

    बारिश के मौसम में स्वास्थ्य को रखना है सुरक्षित तो अपनाएं ये आसान उपाय छोटी सी सावधानी बचाएगी बड़ी बीमारियों से


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा भी साथ लेकर आता है। बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया वायरस और मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। ऐसे में यदि खानपान स्वच्छता और दिनचर्या पर ध्यान न दिया जाए तो वायरल बुखार डेंगू मलेरिया टाइफाइड फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़ी कई समस्याएं आसानी से घेर सकती हैं। इसलिए इस मौसम में स्वास्थ्य की देखभाल को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो जाता है।

    बारिश के दिनों में सबसे पहले स्वच्छ भोजन और साफ पानी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना बेहतर माना जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और कटे हुए फल खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। घर का ताजा और गर्म भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

    मानसून के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना बेहद आवश्यक है। इसके लिए संतुलित आहार का सेवन करें जिसमें हरी सब्जियां मौसमी फल दालें सूखे मेवे और पर्याप्त प्रोटीन शामिल हो। विटामिन सी से भरपूर फल शरीर को संक्रमण से लड़ने में सहायता करते हैं। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेटेड बना रहे।

    बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए। घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। गीले जूते और मोजे पहनकर रहने से फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें और उन्हें पूरी तरह सुखाकर ही जूते पहनें।

    मच्छरों से बचाव मानसून में सबसे जरूरी सावधानियों में से एक है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि यही मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण बनता है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले सुरक्षित उत्पादों का इस्तेमाल करें। यदि तेज बुखार शरीर दर्द या लगातार कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    बारिश के मौसम में नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बाहर निकलना संभव न हो तो घर के अंदर हल्का व्यायाम योग या प्राणायाम किया जा सकता है। इससे शरीर सक्रिय रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। मानसिक तनाव कम करने के लिए भी नियमित दिनचर्या बनाए रखना लाभदायक होता है।

    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। उन्हें बारिश में भीगने से बचाएं और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना साफ कपड़े पहनना और आसपास सफाई बनाए रखना संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। उन्हें बारिश में भीगने से बचाएं और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना साफ कपड़े पहनना और आसपास सफाई बनाए रखना संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    मानसून का मौसम आनंद और ताजगी लेकर आता है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। यदि संतुलित आहार स्वच्छता नियमित व्यायाम और समय पर चिकित्सा सलाह को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो बारिश के पूरे मौसम का आनंद बिना किसी बीमारी के लिया जा सकता है। सावधानी ही इस मौसम में स्वस्थ रहने की सबसे बड़ी कुंजी है।

  • खाने में तेल की बढ़ती मात्रा से बढ़ रहा मोटापा, एक्सपर्ट्स ने बताए बचाव के आसान तरीके

    खाने में तेल की बढ़ती मात्रा से बढ़ रहा मोटापा, एक्सपर्ट्स ने बताए बचाव के आसान तरीके


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में खानपान की गलत आदतें स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण है भोजन में अत्यधिक तेल का इस्तेमाल। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन धीरे-धीरे मोटापे और कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकता है। यह न केवल शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाता है, बल्कि हृदय, लीवर और पाचन तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
    नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, संतुलित मात्रा में तेल का उपयोग स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन जब इसकी मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है, तो यह शरीर में फैट बढ़ाने लगता है। समय के साथ यह मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए खानपान में छोटे-छोटे बदलाव करके बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।
    हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे पहले हमें अपने रोजमर्रा के खाने में तेल की मात्रा को नियंत्रित करना चाहिए। खाना बनाते समय सीधे बर्तन में तेल डालने की बजाय मापने वाली छोटी चम्मच का उपयोग करना एक प्रभावी तरीका है। इससे अनजाने में ज्यादा तेल डालने की आदत पर रोक लगती है और कैलोरी इनटेक नियंत्रित रहता है।
    इसके अलावा तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन भी सीमित करना जरूरी है। समोसा, पकौड़ी, पूड़ी और फास्ट फूड जैसे भोजन में तेल की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो शरीर में फैट बढ़ाने का काम करता है। इसकी जगह भाप में पका हुआ, ग्रिल्ड या हल्का भुना हुआ भोजन अधिक फायदेमंद होता है। ऐसे भोजन में पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और तेल की मात्रा भी कम होती है।
    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि घर पर खाना बनाते समय हल्के और स्वस्थ तेलों का चयन किया जाए, साथ ही उनकी मात्रा पर विशेष ध्यान दिया जाए। बार-बार तेल गर्म करने से भी उसमें हानिकारक तत्व बन जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए और अधिक नुकसानदायक होते हैं। इसलिए ताजा और सीमित मात्रा में तेल का उपयोग करना बेहतर विकल्प है।
    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मोटापा कई बीमारियों की जड़ है और इसका एक प्रमुख कारण असंतुलित खानपान है। जब शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने लगती है, तो यह न केवल शारीरिक सक्रियता को कम करती है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। इसलिए समय रहते खानपान में सुधार करना बेहद जरूरी है।
    अगर हम अपने दैनिक जीवन में कुछ छोटे बदलाव अपनाएं, जैसे कम तेल का उपयोग, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम, तो न केवल मोटापे से बचा जा सकता है बल्कि जीवनशैली भी बेहतर बन सकती है। सही खानपान और अनुशासन ही स्वस्थ जीवन की असली कुंजी है।