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  • ड्रग्स बिक्री के शक में स्वास्थ्य विभाग का एक्शन, मेडिकल स्टोर जांच के घेरे में

    ड्रग्स बिक्री के शक में स्वास्थ्य विभाग का एक्शन, मेडिकल स्टोर जांच के घेरे में


    मध्यप्रदेश । सतना जिले के कोटर क्षेत्र के अबेर गांव में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। शुक्रवार को ड्रग विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने क्षेत्र के दो मेडिकल स्टोर्स पर अचानक छापा मारकर जांच की। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं मिलने पर एक मेडिकल स्टोर को तत्काल सील कर दिया गया, जबकि दूसरे स्टोर संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

    संयुक्त कार्रवाई में ड्रग इंस्पेक्टर प्रियंका चौबे, डीएसपी मुख्यालय मनोज दीक्षित और कोटर थाना प्रभारी दिलीप मिश्रा की टीम शामिल रही। अधिकारियों ने अबेर स्थित अनन्या मेडिकल स्टोर और जागृति मेडिकल स्टोर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान दवाओं के स्टॉक, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई।

    जांच के दौरान अनन्या मेडिकल स्टोर में कई गंभीर खामियां सामने आईं। सबसे बड़ी बात यह रही कि निरीक्षण के समय न तो मेडिकल स्टोर का प्रोपराइटर मौजूद था और न ही लाइसेंसधारी फार्मासिस्ट मौके पर मिला। इसके अलावा दवाओं के रखरखाव और रिकॉर्ड में भी गड़बड़ियां पाई गईं। नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने मेडिकल स्टोर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। साथ ही संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

    वहीं जागृति मेडिकल स्टोर की जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। हालांकि यहां स्थिति अपेक्षाकृत कम गंभीर होने के कारण दुकान को सील नहीं किया गया, लेकिन संचालक को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। खासकर युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त अभियान जारी रहेगा।

    पुलिस और ड्रग विभाग अब क्षेत्र के अन्य मेडिकल स्टोर्स की भी निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं अवैध रूप से नशीली दवाओं की बिक्री हो रही हो तो उसकी जानकारी तुरंत प्रशासन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई भिण्ड में अल्ट्रासाउंड मशीन सील

    नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई भिण्ड में अल्ट्रासाउंड मशीन सील


    भिण्ड । मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हाउसिंग कॉलोनी क्षेत्र में संचालित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर दिया है यह कार्रवाई नियमों के उल्लंघन और एक ही डॉक्टर के दो राज्यों में पंजीयन होने की शिकायत के बाद की गई है जिससे पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह अल्ट्रासाउंड सेंटर डॉक्टर धर्मेंद्र धनखड़ के नाम पर संचालित हो रहा था शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि संबंधित डॉक्टर ने न केवल भिण्ड में बल्कि उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिले में भी अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालन के लिए पंजीयन करा रखा था जो कि नियमानुसार गंभीर अनियमितता मानी जा रही है

    स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी चिकित्सक को एक ही समय में दो अलग अलग स्थानों पर अल्ट्रासाउंड सेंटर का संचालन करने की अनुमति नहीं होती खासकर जब दोनों स्थान अलग अलग राज्यों में हों ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निगरानी बनाए रखने के लिए सख्त दिशा निर्देश लागू किए गए हैं ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही या फर्जीवाड़ा न हो सके

    जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया और पूरे सेंटर को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद की गई और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है

    इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अन्य केंद्रों में भी हड़कंप मच गया है क्योंकि विभाग अब अन्य अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भी जांच कर सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा

    स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मामले की जांच केवल पंजीयन तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस सेंटर में किसी प्रकार की अवैध गतिविधियां या मानकों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा था इसके साथ ही दोनों राज्यों में पंजीयन की प्रक्रिया और दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई अनियमितता साबित होती है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे इस मामले को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है

    फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और आने वाले दिनों में इसके कई और पहलू सामने आने की संभावना है इस कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

  • जबलपुर में बड़ी कार्रवाई: 5 अस्पताल और 121 क्लीनिकों का पंजीयन निरस्त, इलाज पर लगी रोक

    जबलपुर में बड़ी कार्रवाई: 5 अस्पताल और 121 क्लीनिकों का पंजीयन निरस्त, इलाज पर लगी रोक


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने निजी चिकित्सा संस्थानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 अस्पतालों और 121 क्लीनिकों का पंजीयन निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद इन सभी संस्थानों को अब मरीजों के उपचार और भर्ती की अनुमति नहीं होगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

    समय सीमा खत्म, फिर भी नहीं कराया नवीनीकरण

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को 1 जनवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच पंजीयन का नवीनीकरण कराना अनिवार्य था। इसके बाद भी कई संस्थानों ने 1 अप्रैल 2026 की अंतिम तिथि तक आवेदन नहीं किया। इसी लापरवाही के चलते यह सख्त कार्रवाई की गई।

    1 अप्रैल से सभी संस्थान अवैध घोषित

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत कोठारी के आदेश के बाद इन सभी अस्पतालों और क्लीनिकों को 1 अप्रैल से अवैध घोषित कर दिया गया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि बिना वैध पंजीयन किसी भी तरह का इलाज या भर्ती पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

    किन अस्पतालों पर गिरी गाज

    जिन प्रमुख अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है उनमें शामिल हैं-

    एस.सी. गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल (स्टाफ की कमी)
    संकल्प हॉस्पिटल (नगर निगम से दस्तावेज सत्यापन नहीं)
    नामदेव नर्सिंग होम (नवीनीकरण नहीं कराया)
    बटालिया आई हॉस्पिटल (स्वयं बंद करने का आवेदन)
    सरकार हॉस्पिटल (स्वयं संस्थान बंद किया)


    क्लीनिकों की स्थिति और भी गंभीर

    जांच में सामने आया कि जिले के कुल 240 क्लीनिकों में से 89 ने नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया, जबकि 32 संस्थानों के दस्तावेज अधूरे पाए गए। इनमें एलोपैथी, आयुर्वेदिक, होम्योपैथी क्लीनिक के साथ कई पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल हैं।

    स्वास्थ्य विभाग के सख्त निर्देश

    स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रभावित संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि–

    किसी भी नए मरीज को भर्ती न किया जाए
    पहले से भर्ती मरीजों का उपचार पूरा कर डिस्चार्ज किया जाए
    संस्थानों के बाहर लगे बोर्ड तुरंत हटाए जाएं

    सख्ती का संदेश साफ

    यह कार्रवाई मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एक्ट के तहत की गई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि बिना वैध पंजीयन के किसी भी संस्थान को संचालित पाए जाने पर आगे भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।