Tag: health department action

  • शिवपुरी में फर्जी अस्पतालों पर शिकंजा मरीजों के लिए लगाए थे पलंग और इलाज की व्यवस्था पंजीयन के कागज नहीं मिले तो दोनों संस्थान सील

    शिवपुरी में फर्जी अस्पतालों पर शिकंजा मरीजों के लिए लगाए थे पलंग और इलाज की व्यवस्था पंजीयन के कागज नहीं मिले तो दोनों संस्थान सील


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में बिना जरूरी पंजीयन के संचालित किए जा रहे स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी अभियान के तहत कोलारस में शुक्रवार शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो मेडिकल स्टोर और उनसे जुड़े अस्पतालों की जांच की। जांच के दौरान दोनों स्थानों पर मरीजों के इलाज और उन्हें भर्ती करने जैसी व्यवस्थाएं मिलीं। हालांकि जब टीम ने अस्पताल संचालन से संबंधित पंजीयन के दस्तावेज मांगे तो संचालक इन्हें प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद विभाग ने दोनों मेडिकल स्टोर और उनसे जुड़े अस्पतालों को सील कर दिया।

    यह कार्रवाई कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर की गई। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रोहित भदकारिया के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम सबसे पहले फूल राज होटल के सामने स्थित धाकड़ मेडिकल स्टोर पहुंची। टीम ने मेडिकल स्टोर की जांच के साथ उसके पास संचालित किए जा रहे एएस अस्पताल का भी निरीक्षण किया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पताल डॉ. पुष्पेंद्र सिंह के नाम पर बताया गया था लेकिन मौके पर एक ऐसा व्यक्ति मरीजों का इलाज करता मिला जो इसके लिए पात्र नहीं था।

    जांच के दौरान अस्पताल के अंदर मरीजों को भर्ती करने के लिए 10 पलंग भी रखे हुए मिले। इससे स्पष्ट हुआ कि वहां केवल सामान्य मेडिकल स्टोर का संचालन नहीं हो रहा था बल्कि मरीजों के इलाज और भर्ती की व्यवस्था भी बनाई गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संचालक से अस्पताल के पंजीयन सहित अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे लेकिन मौके पर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद विभाग ने एएस अस्पताल के साथ धाकड़ मेडिकल स्टोर को भी सील कर दिया।

    इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम कटरा मोहल्ले में स्थित गोपाल मेडिकल स्टोर पहुंची। यहां भी जांच के दौरान मेडिकल स्टोर के पास बने कमरों में अस्पताल जैसी व्यवस्था दिखाई दी। इन कमरों में मरीजों को भर्ती करने के लिए पलंग मौजूद थे। इसके अलावा मरीजों को बोतल चढ़ाने और इलाज करने की व्यवस्था भी मिली। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में संचालक रंजन अधिकारी से अस्पताल के पंजीयन से जुड़े दस्तावेज मांगे लेकिन वह भी जरूरी कागजात टीम के सामने प्रस्तुत नहीं कर सके।

    दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गोपाल मेडिकल स्टोर और उसके पास संचालित हो रहे अस्पताल को भी सील कर दिया। विभाग की इस कार्रवाई के बाद इलाके में बिना अनुमति या पंजीयन के स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषीश्वर ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर जिले में अवैध स्वास्थ्य संस्थानों की लगातार जांच की जा रही है। विभाग का उद्देश्य ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई करना है जहां नियमों का पालन किए बिना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। कार्रवाई करने वाली टीम में खंड चिकित्सा अधिकारी कोलारस डॉ. संजय राठौड़ और फार्मासिस्ट बालेंदु रघुवंशी भी शामिल रहे।

    स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से यह सवाल भी सामने आया है कि बिना पंजीयन और आवश्यक दस्तावेजों के मरीजों के इलाज तथा भर्ती की व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही थी। विभाग अब जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की जांच जारी रखने की तैयारी में है।

  • गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही: दो सीबीएमओ को नोटिस, 15 दिन का अल्टीमेटम

    गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही: दो सीबीएमओ को नोटिस, 15 दिन का अल्टीमेटम


    नई दिल्ली । राजगढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और स्वास्थ्य केंद्रों की खराब स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत दो सीबीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कई कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नरसिंहगढ़ ब्लॉक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में खराब प्रदर्शन पर सीबीएमओ डॉ. राजेंद्र अहिरवार को नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा खिलचीपुर और राजगढ़ ब्लॉक के सीबीएमओ को बैठक में अनुपस्थित रहने पर कारण बताओ नोटिस दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के वेतन काटने की कार्रवाई की जाएगी।

    स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर गर्भवती महिलाओं का पंजीयन समय पर नहीं हो रहा है और उनकी नियमित जांच में लापरवाही बरती जा रही है। इस पर प्रशासन ने सख्त नाराजगी जताते हुए प्रत्येक ब्लॉक से सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले पांच सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और एएनएम को भी नोटिस जारी किए हैं।

    इसके अलावा ओपीडी सेवाओं और स्वास्थ्य शिविरों में तय लक्ष्य के अनुसार एक्स-रे जांच नहीं होने पर भी संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई है। प्रशासन ने इसे गंभीर सेवा लापरवाही मानते हुए सुधार के निर्देश दिए हैं।

    पोषण पुनर्वास केंद्रों की स्थिति भी समीक्षा में संतोषजनक नहीं पाई गई। यहां बच्चों की कम संख्या और समय से पहले डिस्चार्ज किए जाने के मामलों पर भी कार्रवाई की गई है। इस पर जिले के सभी छह फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. इच्छित गढ़पाले ने स्पष्ट कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों में जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखता है तो और भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • खरगोन अस्पताल में बड़ी लापरवाही प्रसूता के पेट में नैपकिन छूटने पर डॉक्टर नर्स निलंबित

    खरगोन अस्पताल में बड़ी लापरवाही प्रसूता के पेट में नैपकिन छूटने पर डॉक्टर नर्स निलंबित


    खरगोन । मध्यप्रदेश के खरगोन जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई गंभीर लापरवाही के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। जांच के बाद प्रसूता के पेट में सर्जिकल नैपकिन छूट जाने की घटना को गंभीर चिकित्सा चूक मानते हुए संबंधित डॉक्टर और नर्सिंग ऑफिसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

    जानकारी के अनुसार यह मामला जिला अस्पताल खरगोन में डिलीवरी के दौरान सामने आया था, जब प्रसूता के ऑपरेशन के बाद उसके पेट में सर्जिकल नैपकिन रह जाने की बात उजागर हुई। इस घटना के बाद मरीज की हालत को लेकर चिंता बढ़ गई और पूरे मामले की जांच शुरू की गई।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दौलत सिंह चौहान ने बताया कि आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं इंदौर संभाग द्वारा नर्सिंग ऑफिसर दिव्या वर्मा को भी निलंबित किया गया है।

    अधिकारियों के अनुसार यह मामला चिकित्सा प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही का संकेत देता है, जहां ऑपरेशन के दौरान मानक सावधानियों का पालन नहीं किया गया। ऐसी घटनाएं न केवल मरीज की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।

    प्रशासन ने कहा है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यदि आगे किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अस्पतालों में सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा मानकों को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को लेकर एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, जिससे भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत और अधिक बढ़ गई है।