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  • मध्यप्रदेश ने HPV टीकाकरण में देश में पहला स्थान हासिल किया, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य टीम को दी बधाई

    मध्यप्रदेश ने HPV टीकाकरण में देश में पहला स्थान हासिल किया, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य टीम को दी बधाई


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की टीम एएनएम आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को एचपीवी HPV टीकाकरण अभियान में शानदार प्रदर्शन करने पर बधाई दी है। अभियान के तहत मात्र 15 दिनों में प्रदेश की 1 लाख से अधिक बेटियों को वैक्सीन दी गई जिससे मध्यप्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किया गया था ताकि बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित किया जा सके। डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के सफल क्रियान्वयन में स्वास्थ्य विभाग की टीम और स्थानीय कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

    इस पहल से न केवल बेटियों को गंभीर बीमारी से बचाने में मदद मिलेगी बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता और टीकाकरण के प्रति समुदाय में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।

  • रतलाम में 10 बच्चों को खसरा, स्वास्थ्य विभाग सक्रिय; एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन-ए अभियान जारी

    रतलाम में 10 बच्चों को खसरा, स्वास्थ्य विभाग सक्रिय; एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन-ए अभियान जारी


    रतलाम । रतलाम जिले के बाजना विकासखंड में मीजल्स यानी खसरा के 10 मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संध्या बेलसरे ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और बच्चों की हालत का जायजा लिया। विभाग के मुताबिक बच्चों की स्थिति अब नियंत्रण में है।

    मरीजों में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं। होली पर बाहर गए कुछ बच्चे वापस भी पलायन कर गए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांवों में भ्रमण कर बच्चों को आवश्यक उपचार सलाह और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है। मामले में संबंधित एएनएम के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।

    शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. रितेश बजाज जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील बीएमओ बाजना डॉ. जितेंद्र जायसवाल और स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचा। टीम ने ग्राम बोरपाड़ा और रूपाखेड़ा में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को एमआर वैक्सीनेशन के साथ विटामिन ए का घोल भी पिलाया।

    जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि खसरा एक संक्रामक वायरल बीमारी है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार खांसी बहती नाक लाल और पानी भरी आंखें और पूरे शरीर पर लाल भूरे रंग के दाने शामिल हैं। दाने आने से पहले मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे कोप्लिक स्पाट्स भी दिखाई दे सकते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 10 से 14 दिन बाद ये लक्षण प्रकट होते हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार क्षेत्र में नोटिफिकेशन जारी करने घर घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा देने और अतिरिक्त टीकाकरण सत्र आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार कर ली है। बच्चों की हालत अब बेहतर है और विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। मरीजों के इलाज और संक्रमण रोकने के लिए एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन ए अभियान लगातार जारी रहेगा।

  • हरियाणा के छायंसा गांव में 15 दिनों में 12 मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया डेरा

    हरियाणा के छायंसा गांव में 15 दिनों में 12 मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया डेरा


    नई दिल्ली । हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में पिछले 15 दिनों में 12 मौतों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मृतकों में पांच स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। लगातार हो रही मौतों ने गांववासियों को दहशत में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 15 दिन पहले तीन लोगों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद से मौतों का सिलसिला जारी है।

    ग्रामीणों के मुताबिक गांव में लगभग हर घर में मरीज हैं और कई की हालत गंभीर है। परिजन अस्पतालों के चक्कर काटकर भी अपने बीमार परिवारजनों को ठीक नहीं कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कदम उठाते हुए गांव में टीम डेरा डाला है। विभाग की टीम लगातार लोगों की जांच कर रही है और ब्लड सैंपल जुटा रही है। अब तक 300 ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं जबकि 400 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।

    स्वास्थ्य विभाग की डॉ. सतिंदर वशिष्ठ के मुताबिक मृतकों के मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट में 4 मामलों में हेपेटाइटिस B और C का पता चला जबकि 3 मामलों में मल्टीपल ऑर्गन फेलियर और लिवर इंफेक्शन मिले। दो मरीजों को इलाज के लिए पलवल सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया है।

    गांव मुस्लिम बाहुल्य है और करीब 5 हजार आबादी वाले इस गांव में पानी की सप्लाई तीन अलग-अलग स्रोतों से होती है। कुछ घरों में सरकारी पानी आता है जबकि कुछ घरों में अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं जिनमें पानी भरने के लिए टैंकर मंगाए जाते हैं। हथीन शहर से आरओ प्लांट का पानी लेने वाले भी हैं। अब तक लिए गए 107 पानी के सैंपलों में 23 फेल पाए गए हैं जिनमें बैक्टीरिया की वृद्धि और क्लोरीन की कमी देखी गई है।

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए ओपीडी लगाई है और घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही है। डॉ. वशिष्ठ ने बताया कि मृतकों के परिवारजनों और आसपास के लोगों के सैंपल भी लिए गए हैं ताकि बीमारी फैलने से रोकी जा सके। ग्रामीणों की मुख्य चिंता यह है कि यह हेपेटाइटिस B और C जैसी बीमारियां जल्द नियंत्रण में आएं और मौतों का सिलसिला थमे। यह स्थिति गांववासियों और अधिकारियों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और उपचार की प्रक्रिया में लगा हुआ है।

  • इंदौर दूषित पानी कांड: 24 मौतों में से 15 गंदे पानी से. MGM कॉलेज की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा. 5 माह का मासूम भी शिकार

    इंदौर दूषित पानी कांड: 24 मौतों में से 15 गंदे पानी से. MGM कॉलेज की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा. 5 माह का मासूम भी शिकार


    इंदौर । देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी कांड ने प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैले इस जलजनित संक्रमण ने अब तक 24 लोगों की जान ले ली है। इस दर्दनाक सूची में मात्र 5 महीने का एक मासूम बच्चा भी शामिल है. जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।इस मामले में अब एमजीएम मेडिकल कॉलेज की विशेष टीम द्वारा तैयार की गई डेथ एनालिसिस रिपोर्ट सामने आई है. जिसमें चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। टीम ने कुल 21 मौतों का विस्तृत डेथ ऑडिट किया. जबकि बाकी मामलों की जानकारी अलग से संकलित की गई। रिपोर्ट के अनुसार. 15 लोगों की मौत सीधे तौर पर दूषित पानी के सेवन और उससे फैले उल्टी-दस्त जैसे संक्रमण के कारण हुई है। इस तथ्य की पुष्टि खुद शासन स्तर पर भी कर दी गई है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2 मौतें उस समय हुई थीं. जब क्षेत्र में महामारी जैसे हालात शुरू भी नहीं हुए थे। वहीं 4 लोगों की मौत अन्य चिकित्सकीय कारणों से होना सामने आया है। कुछ मामलों में मौत का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका. जिस पर आगे जांच की जरूरत बताई गई है। एमजीएम कॉलेज की यह रिपोर्ट कलेक्टर शिवम वर्मा को सौंप दी गई है. जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार. 29 दिसंबर से अब तक इस दूषित पानी की चपेट में 436 से अधिक लोग आ चुके हैं। इनमें से अधिकांश मरीजों का इलाज कर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। फिलहाल 33 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं. जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। चिंता की बात यह है कि मंगलवार को भी 5 नए मरीज सामने आए हैं. जिससे संक्रमण के पूरी तरह थमने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में पेयजल पाइपलाइन में लंबे समय से लीकेज था. जिसके चलते सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या की शिकायत कई बार संबंधित विभागों से की. लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यदि शुरुआत में ही पाइपलाइन की मरम्मत और जल की जांच कर ली जाती. तो इतनी बड़ी त्रासदी को रोका जा सकता था।यह मामला न सिर्फ इंदौर की स्वच्छता की छवि पर सवाल खड़े करता है. बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगे की कार्रवाई. जिम्मेदारों की जवाबदेही और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।