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  • पन्ना में NHM स्वास्थ्यकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: नियमितीकरण की मांग पर स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज परेशान

    पन्ना में NHM स्वास्थ्यकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: नियमितीकरण की मांग पर स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज परेशान


    मध्य प्रदेश । पन्ना जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के चलते जिलेभर में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और अस्पतालों का ऑनलाइन व ऑफलाइन कामकाज ठप पड़ गया है।

    ऑनलाइन-ऑफलाइन कामकाज पूरी तरह बंद
    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अनुसार, हड़ताल के पहले ही दिन से कर्मचारियों ने सार्थक ऐप पर उपस्थिति दर्ज करना और दैनिक रिपोर्टिंग का कार्य बंद कर दिया है। साथ ही स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े सभी ऑनलाइन डेटा एंट्री कार्य भी पूरी तरह रोक दिए गए हैं। इसके कारण ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्था चरमरा गई है और मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

    मरीजों की परेशानी बढ़ी, CHO और स्टाफ ने रोका काम
    हड़ताल में शामिल CHO, संविदा डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के काम बंद करने से अस्पतालों में आने वाले मरीजों को जांच और उपचार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं बाधित होने से लोगों को दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

    नियमितीकरण की मांग पर अड़ा संघ
    संघ के जिला अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी ने बताया कि कर्मचारियों से लंबे समय से नियमितीकरण का वादा किया जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि जब तक नियमितीकरण की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    चरणबद्ध आंदोलन से अनिश्चितकालीन हड़ताल तक
    कर्मचारियों ने 25 मई को काली पट्टी बांधकर विरोध शुरू किया था और ज्ञापन भी सौंपा था। लेकिन सरकार की ओर से कोई समाधान न मिलने पर अब आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया गया है।

    भोपाल घेराव की चेतावनी
    संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो 8 जून को प्रदेशभर के हजारों कर्मचारी भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे।

  • अशोकनगर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर

    अशोकनगर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर


    मध्य प्रदेश । अशोकनगर जिला अस्पताल में मंगलवार सुबह से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारी अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, जिसके चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो गई हैं।

    धरने के दौरान संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित कर्मचारियों ने अप्रेजल आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया।

    कई महत्वपूर्ण सेवाएं बाधित
    हड़ताल के कारण जिला अस्पताल की कई अहम सेवाएं ठप हो गई हैं। इनमें टीकाकरण, एसएनसीयू, जननी सुरक्षा योजना के भुगतान, ओपीडी सेवाएं, सीएम हेल्पलाइन से जुड़े कार्य, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना और टीबी मरीजों को दवा वितरण जैसी सेवाएं शामिल हैं।
    इसके अलावा ब्लड बैंक का अधिकांश कार्य भी प्रभावित हुआ है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियमितीकरण, स्वास्थ्य बीमा, वेतन वृद्धि और समान कार्य के लिए समान वेतन जैसी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र किया जाएगा।

    आंदोलन की चेतावनी, भोपाल घेराव की तैयारी
    संघ ने यह भी घोषणा की है कि उनका यह आंदोलन 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास घेराव के बाद समाप्त होगा। तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।

    मरीजों पर बढ़ा असर
    हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ा है, जिन्हें इलाज और जरूरी सेवाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में सामान्य कामकाज बाधित होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

  • झाबुआ में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल शुरू

    झाबुआ में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल शुरू


    मध्य प्रदेश । झाबुआ जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदेशभर के करीब 32 हजार संविदा कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. वासुदेव पाटीदार ने बताया कि एनएचएम कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर लगातार अनदेखी की जा रही है।

    मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई का आरोप
    कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री की उपस्थिति में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।

    कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
    हड़ताल पर गए कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं-
    30 जनवरी 2026 की मुख्यमंत्री घोषणा के अनुसार नियमितीकरण
    एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ (2023 सामान्य प्रशासन विभाग नीति के तहत)
    अन्य राज्यों की तरह 10% वार्षिक वेतन वृद्धि
    नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता
    वेतन विसंगति का निराकरण
    समान कार्य के लिए समान वेतन
    नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश
    इसके अलावा कर्मचारियों ने “सार्थक ऐप” के उपयोग को बंद करने का भी निर्णय लिया है।

    चरणबद्ध आंदोलन के बाद अब अनिश्चितकालीन हड़ताल
    कर्मचारी इससे पहले काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं और प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। अब अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 8 जून को प्रदेशभर के कर्मचारी भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की योजना बना रहे हैं।

    स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंक
    हड़ताल के चलते जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे आम मरीजों को परेशानी हो सकती है।

  • मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, ओपीडी बंद; सामान्य ऑपरेशन भी टलेंगे

    मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, ओपीडी बंद; सामान्य ऑपरेशन भी टलेंगे


    भोपाल । मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सोमवार से स्वास्थ्य सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हो गई हैं। लंबित स्टाइपेंड संशोधन और एरियर भुगतान की मांग को लेकर प्रदेशभर के करीब 8 हजार जूनियर डॉक्टर सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न हड़ताल पर चले गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के आह्वान पर सुबह 9 बजे से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण ओपीडी सेवाएं बंद हो गई हैं और सामान्य ऑपरेशन भी फिलहाल टाल दिए गए हैं।

    राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसका सीधा असर मरीजों पर दिखाई दे रहा है। यहां स्त्री रोग विभाग में पीपीटीसीटी काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर फर्टिलिटी क्लिनिक एएनसी रूम सहित कई व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। आमतौर पर इन विभागों की जिम्मेदारी सीनियर डॉक्टरों के साथ जूनियर डॉक्टर भी संभालते हैं लेकिन हड़ताल के कारण मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

    ओपीडी के बाहर सुबह से मरीज अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। इलाज के लिए पहुंचे मरीज अनवर ने बताया कि वह सुबह से अस्पताल में भटक रहे हैं। पैरों में दर्द सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वह काफी परेशान हैं लेकिन डॉक्टरों के हड़ताल पर होने से उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है।

    जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तब तक वे ओपीडी सेवाएं नहीं देंगे। साथ ही ऑपरेशन थिएटर में भी केवल अति गंभीर मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। इसका मतलब है कि हर्निया रॉड इंप्लांट और अन्य सामान्य ऑपरेशन फिलहाल टल सकते हैं जिससे कई मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    JDA के मुताबिक शासन के आदेश के अनुसार सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन एक अप्रैल 2025 से लागू होना था लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है और न ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शासन और संबंधित विभागों को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

    JDA के प्रतिनिधि डॉ. ब्रिजेंद्र ने बताया कि 7 जून 2021 को जारी शासनादेश के अनुसार स्टाइपेंड में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर संशोधन का प्रावधान है। इसके बावजूद निर्धारित समय पर संशोधन लागू नहीं किया गया। इस कारण प्रदेशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    डॉक्टरों ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और विभागाध्यक्षों को पत्र सौंपकर हड़ताल की सूचना दे दी है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टर पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल शासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करना है। यदि सरकार जल्द निर्णय लेती है तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा लेकिन मांगों की अनदेखी होने पर विरोध को और तेज किया जा सकता है।

    उधर JDA जबलपुर के प्रेसिडेंट डॉ. शुभम शर्मा सोमवार दोपहर उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात करेंगे। इस बैठक के बाद ही आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।