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  • 4800 ग्रेड पे और कैडर निर्माण की मांग पर अड़े CHO, 25 दिन से जारी प्रदर्शन, सरकार को विधानसभा घेराव की चेतावनी

    4800 ग्रेड पे और कैडर निर्माण की मांग पर अड़े CHO, 25 दिन से जारी प्रदर्शन, सरकार को विधानसभा घेराव की चेतावनी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों यानी सीएचओ का आंदोलन लगातार जारी है। नियमितीकरण वेतन विसंगति दूर करने और अलग कैडर बनाने समेत कई मांगों को लेकर प्रदेशभर के स्वास्थ्य अधिकारी इको गार्डन में धरना दे रहे हैं। गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। सीएचओ प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो प्रदेश के करीब 17 हजार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी सामूहिक इस्तीफा देने का कदम उठा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा का घेराव करने की भी चेतावनी दी है।

    प्रदर्शनकारियों के मुताबिक उनका धरना 25वें दिन भी जारी रहा। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रदेश के गांवों और ग्राम सभाओं में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में योगदान दे रहे हैं लेकिन वेतन और सेवा से जुड़ी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हुआ है। सीएचओ संघ के प्रदेश सदस्य सनत सिंह ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में अलग कैडर का निर्माण हरियाणा की तर्ज पर 4800 ग्रेड पे और सातवें वेतनमान का लाभ शामिल है। इसके अलावा पीवीआई को मूल मानदेय में शामिल करने की मांग भी उठाई जा रही है। उनका कहना है कि शासन और विभागीय अधिकारियों के साथ कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।

    सीएचओ की अन्य मांगों में नियमितीकरण स्थानांतरण नीति लागू करना और कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे निर्धारित नियमों के अनुसार अपने अधिकार और सुविधाएं चाहते हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने के बावजूद उन्हें सेवा संबंधी लाभ और वेतनमान को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक महिला सीएचओ ने बताया कि वे 1956 की नियमावली के अनुसार व्यवस्था लागू करने कैडर निर्माण और वेतन विसंगति दूर करने की मांग कर रही हैं। उनके अनुसार दूसरे कैडरों के कर्मचारियों की तुलना में उन्हें लगभग पांच हजार रुपये कम वेतन मिलता है। उन्होंने पीवीआई को मूल मानदेय में शामिल करने की मांग भी दोहराई।

    प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर करीब दस बार मंत्रियों के आवास पर जाकर अपनी बात रख चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संगठन की प्रदेश उपाध्यक्ष रश्मि शर्मा ने कहा कि मांगों को लेकर संगठन पीछे हटने वाला नहीं है। जरूरत पड़ने पर एक से दो महीने तक भी धरना जारी रखा जाएगा। उनका कहना है कि वेतन और सेवा से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है ताकि स्वास्थ्य अधिकारी बिना परेशानी के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।

    धरने में शामिल बदायूं के प्रतीक कुमार और फिरोजाबाद के अमित नायक ने भी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लगातार प्रदर्शन के बावजूद समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। सीएचओ प्रतिनिधियों के अनुसार प्रदेश में करीब 17 हजार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी गांवों और ग्राम सभाओं में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कामकाज पर असर पड़ने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमितीकरण कैडर निर्माण और वेतन विसंगति जैसे मुद्दों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। सामूहिक इस्तीफे और विधानसभा घेराव की चेतावनी के बीच अब निगाहें सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।

  • संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, शाजापुर जिला अस्पताल की सेवाएं प्रभावित

    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, शाजापुर जिला अस्पताल की सेवाएं प्रभावित


    मध्यप्रदेश । शाजापुर जिला अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। कर्मचारियों ने नियमित कार्यों का बहिष्कार करते हुए अस्पताल परिसर में धरना प्रदर्शन किया, जिससे जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर देखने को मिला।

    हड़ताल के कारण खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो गई हैं। मरीजों को इलाज और नियमित स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    टीकाकरण, पंजीयन और दवाइयों पर असर
    कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से एएनसी पंजीयन, टीकाकरण, जन्म प्रमाण पत्र जारी करने और ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हो गए हैं। इसके अलावा एनसीडी, टीबी, हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को नियमित दवाइयां मिलने में भी कठिनाई हो रही है। सीएम हेल्पलाइन से जुड़े मामलों के निराकरण का काम भी बाधित बताया जा रहा है, जिससे आम लोगों की समस्याएं और बढ़ गई हैं।

    आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने बताया कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें नियमितीकरण, एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ, 10 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि, महंगाई भत्ता, समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश जैसी कुल आठ प्रमुख मांगें शामिल हैं। संघ के अनुसार, पहले चरण में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया गया था, जिसके बाद 2 जून से ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई।

    आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें जायज हैं और लंबे समय से लंबित होने के कारण अब आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

    प्रशासन पर बढ़ा दबाव
    हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब सभी की नजरें सरकार और कर्मचारी संघ के बीच होने वाली आगे की बातचीत पर टिकी हैं।