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  • बिना शराब पिए भी खराब हो सकता है आपका लिवर; जंक फूड और पेनकिलर्स के इस घातक गठजोड़ को पहचानें।

    बिना शराब पिए भी खराब हो सकता है आपका लिवर; जंक फूड और पेनकिलर्स के इस घातक गठजोड़ को पहचानें।

    नई दिल्ली। मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण इंजन कहा जाने वाला ‘लिवर’ आज एक अनचाहे खतरे के साये में है। अक्सर माना जाता है कि लिवर की खराबी का एकमात्र कारण अत्यधिक शराब का सेवन है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि हमारी आधुनिक जीवनशैली की कुछ सामान्य चीजें शराब से भी अधिक तेजी से इस अंग को नष्ट कर रही हैं।

    लिवर न केवल शरीर से जहरीले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालता है, बल्कि यह पाचन के लिए पित्त बनाने और महत्वपूर्ण विटामिन्स को स्टोर करने का कार्य भी करता है। यदि इसमें सूजन या खराबी आती है, तो यह पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को ठप कर सकता है। दुर्भाग्यवश, आजकल हर दूसरा व्यक्ति ‘फैटी लिवर’ की समस्या से जूझ रहा है, जिसका मुख्य कारण वह भोजन है जिसे हम सुरक्षित और सामान्य समझकर खा रहे हैं।

    लिवर को चुपचाप नुकसान पहुँचाने वाली चीजों में सबसे ऊपर प्रोसेस्ड और पैकेट बंद खाद्य पदार्थ आते हैं। इन डिब्बाबंद स्नैक्स में नमक, चीनी और कृत्रिम प्रिजर्वेटिव्स की भारी मात्रा होती है, जो लिवर की कोशिकाओं में सूजन पैदा करती है। इसी श्रेणी में अत्यधिक चीनी वाले आहार भी शामिल हैं। जब हम सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स या बहुत अधिक मीठा खाते हैं, तो लिवर उस अतिरिक्त शुगर को फैट में बदलने लगता है।

    समय के साथ यह फैट लिवर में जमा होकर सिरोसिस और फाइब्रोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों का मार्ग प्रशस्त करता है, जहाँ लिवर पूरी तरह काम करना बंद कर सकता है।

    एक और गंभीर खतरा बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट्स और प्रोटीन पाउडर के सेवन से जुड़ा है। फिटनेस के प्रति बढ़ते जुनून के कारण कई लोग बिना उचित जानकारी के भारी मात्रा में सप्लीमेंट्स लेते हैं, जो लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके साथ ही, मामूली शारीरिक दर्द के लिए बार-बार पेनकिलर्स (दर्द निवारक दवाएं) लेना भी एक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।

    ये दवाएं रक्त के माध्यम से सीधे लिवर तक पहुँचती हैं और उसे अंदर से डैमेज करना शुरू कर देती हैं। वहीं, जंक फूड और डीप फ्राइड आइटम्स जैसे मोमोज, चाऊमीन और फ्रेंच फ्राइज में इस्तेमाल होने वाला तेल लिवर की पाचन शक्ति को नष्ट कर देता है।

    लिवर की सेहत को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है क्योंकि यह विटामिन A, D, E और B12 का मुख्य भंडार है। शराब जहाँ इन पोषक तत्वों को सोख लेती है, वहीं ये पांचों ‘साइलेंट किलर’ लिवर की फिल्टर करने की क्षमता को खत्म कर देते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लिवर की रक्षा के लिए प्राकृतिक और संतुलित आहार ही सबसे उत्तम मार्ग है। यदि आप भी नियमित रूप से बाजार के तले-भुने खाने या बिना जरूरत दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो आज ही संभलने की जरूरत है। स्वस्थ जीवन जीने के लिए लिवर का ‘हैप्पी और हेल्दी’ होना अनिवार्य है।

  • लेटेंट टीबी को न करें नजरअंदाज वरना बन सकती है एक्टिव टीबी का बड़ा खतरा

    लेटेंट टीबी को न करें नजरअंदाज वरना बन सकती है एक्टिव टीबी का बड़ा खतरा


    नई दिल्ली:टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस एक संक्रामक बीमारी है, जो Mycobacterium tuberculosis नामक बैक्टीरिया के कारण होती है और मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि यह दिमाग, हड्डियों, किडनी और शरीर के अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। यह बीमारी हवा के जरिए फैलती है और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है

    लेकिन टीबी की एक स्थिति ऐसी भी होती है, जिसे लेटेंट टीबी कहा जाता है। इस स्थिति में टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद तो रहते हैं, लेकिन निष्क्रिय अवस्था में होते हैं। इसका मतलब यह है कि संक्रमित व्यक्ति को कोई लक्षण महसूस नहीं होते और न ही वह दूसरों में संक्रमण फैलाता है

    हर साल विश्व टीबी दिवस 24 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना है। विशेषज्ञों के अनुसार लेटेंट टीबी को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह छुपी हुई स्थिति कभी भी सक्रिय टीबी में बदल सकती हैजब लेटेंट टीबी सक्रिय हो जाती है, तब इसके लक्षण सामने आने लगते हैं। इनमें लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और थकान जैसे संकेत शामिल हैं। इसलिए अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है

    लेटेंट टीबी का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसमें एचआईवी संक्रमित, डायबिटीज के मरीज, कैंसर से पीड़ित लोग या लंबे समय से स्टेरॉयड दवाएं लेने वाले लोग शामिल हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी इसका जोखिम अधिक होता हैविश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया की बड़ी आबादी लेटेंट टीबी से प्रभावित है और भारत जैसे देशों में इसका खतरा और अधिक है। इसलिए समय रहते इसकी जांच और इलाज बेहद जरूरी है

    लेटेंट टीबी की पहचान के लिए ब्लड टेस्ट या ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट किया जाता है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो डॉक्टर आमतौर पर 3 से 9 महीने तक दवाएं देते हैं, जिससे यह संक्रमण सक्रिय टीबी में बदलने से रोका जा सके

    बचाव के लिए जरूरी है कि अगर परिवार में किसी को लंबे समय तक खांसी, बुखार या अचानक वजन कम होने जैसी समस्या हो, तो तुरंत जांच कराई जाए। सही समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता हैलेटेंट टीबी एक छिपा हुआ खतरा है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय पर जांच और उपचार ही इससे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है

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    Tuberculosis, LatentTB, HealthAwareness, WHO, DiseasePrevention

  • क्या सेक्सुअली एक्टिव लोगों के लिए HPV Vaccine सुरक्षित है? जानें हर महिला के लिए जरूरी बातें

    क्या सेक्सुअली एक्टिव लोगों के लिए HPV Vaccine सुरक्षित है? जानें हर महिला के लिए जरूरी बातें


    नई दिल्ली । HPV ह्यूमन पैपिलोमावायरस एक वायरस है, जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में छुपकर रहता है और बाद में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। यह वायरस दुनियाभर में आम है, और लगभग सभी सेक्शुअली एक्टिव लोग जीवन में कभी न कभी इस वायरस के संपर्क में आते हैं। हालांकि, सही जानकारी और समय पर HPV वैक्सीनेशन से इस वायरस से बचाव किया जा सकता है।

    HPV क्या है और यह कितना आम है

    HPV 200 से अधिक वायरसों का समूह है, जिसमें कुछ वायरस सामान्य होते हैं, जबकि कुछ हाई रिस्क खतरनाक होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लगभग हर सेक्शुअली एक्टिव व्यक्ति जीवन में कभी न कभी HPV से संक्रमित हो सकता है।

    HPV कैसे फैलता है और यह क्यों खतरनाक है

    HPV मुख्य रूप से स्किन-टू-स्किन सेक्शुअल कॉन्टैक्ट से फैलता है। इसमें वेजाइनल, एनल और ओरल सेक्स शामिल होते हैं। यह वायरस अक्सर बिना लक्षण के शरीर में रहता है और कैंसर जैसे गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। विशेष रूप से हाई-रिस्क HPV सर्वाइकल, एनल, गले ओरोफैरिंजियल और पेनाइल कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। HPV से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं HPV का संबंध कई प्रकार के कैंसर से है, जैसे:

    सर्वाइकल गर्भाशय के गले का कैंसरएनल कैंसर

    गले का कैंसर ओरोफैरिंजियल कैंसर, पेनाइल लिंग का कैंसर, वल्वर महिलाओं के प्रजनन अंग का कैंसर, वेजाइनल कैंस इसके अलावा, HPV जेनिटल वॉर्ट्स यौनांगों पर मस्से और कुछ दुर्लभ श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण भी बन सकता है।

    HPV वैक्सीन लगवाने की सही उम्र क्या है

    विशेषज्ञों के अनुसार, HPV वैक्सीनेशन की सही उम्र 9 से 12 साल के बीच है, क्योंकि इस उम्र में टीका वायरस के संपर्क में आने से पहले लगाया जाता है और सबसे प्रभावी होता है। HPV वैक्सीनेशन के लिए कितनी डोज जरूरी हैं 9 से 14 साल की उम्र में दो डोज काफी होती हैं। 15 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को तीन डोज की सलाह दी जाती है।

    क्या सेक्शुअली एक्टिव वयस्कों को भी वैक्सीनेशन से फायदा होता है

    हां, सेक्शुअली एक्टिव वयस्कों को भी HPV वैक्सीन से फायदा हो सकता है। हालांकि, यह वैक्सीन पहले से मौजूद संक्रमण का इलाज नहीं करती, लेकिन यह भविष्य में होने वाले संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करती है। ऐसे वयस्क जिन्हें HPV के सभी खतरनाक प्रकारों से संपर्क नहीं हुआ, उनके लिए यह वैक्सीनेशन बेहद फायदेमंद हो सकती है।

    क्या HPV वैक्सीन सुरक्षित है

    विशेषज्ञों के अनुसार, HPV वैक्सीनेशन पूरी तरह सुरक्षित है। इसके साइड इफेक्ट्स आमतौर पर हल्के होते हैं, जैसे कि इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या हल्का बुखार। गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं बहुत कम होती हैं, लेकिन यदि आप गर्भवती हैं या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से गुजर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    क्या सिर्फ अच्छी हाइजीन से HPV से बचा जा सकता है

    नहीं, HPV मुख्य रूप से स्किन-टू-स्किन सेक्शुअल कॉन्टैक्ट से फैलता है, और इसे केवल अच्छी हाइजीन से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, कंडोम के इस्तेमाल से जोखिम कम हो सकता है, लेकिन यह 100% सुरक्षा नहीं प्रदान करता।

    अगर बचपन में वैक्सीन नहीं लगवाई हो तो क्या करें

    अगर किसी ने बचपन में HPV वैक्सीन नहीं लगवाई है, तो 26 साल तक कैच-अप वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है। कुछ मामलों में डॉक्टर के परामर्श से 45 साल तक भी वैक्सीनेशन कराया जा सकता है। क्या HPV वैक्सीन से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है HPV वैक्सीन का फर्टिलिटी या हार्मोनल स्तर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, यह वैक्सीनेशन कैंसर और प्रजनन स्वास्थ्य को सुरक्षित रखती है, जिससे भविष्य में प्रजनन क्षमता पर सकारात्मक असर पड़ता है। HPV वैक्सीन HPV वायरस से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है। समय पर टीकाकरण और जागरूकता, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव की सबसे मजबूत कड़ी है। यदि आपने पहले वैक्सीनेशन नहीं कराया है, तो डॉक्टर से संपर्क कर इसे प्राप्त करें, क्योंकि यह भविष्य में आपकी सेहत और जीवन को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।