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  • गोपाल भार्गव के सरकारी बंगले में मरीजों का आशियाना: भोपाल में बना प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम

    गोपाल भार्गव के सरकारी बंगले में मरीजों का आशियाना: भोपाल में बना प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम


    भोपाल। भोपाल के 74 बंगला क्षेत्र का बंगला नंबर बी-1, जो सागर जिले के रहली से विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का सरकारी आवास है, अब मरीजों का ठिकाना बन गया है। यह बंगला पहले मंत्री के रूप में भार्गव को आवंटित हुआ था, लेकिन अब यह बीमार बच्चों और मरीजों के लिए विशेष सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
    बच्चों के लिए प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम
    गोपाल भार्गव की पुत्रवधु शिल्पी भार्गव ने इस बंगले में बीमार बच्चों, विशेषकर दिल से जुड़ी बीमारियों वाले बच्चों के लिए एक खास गेस्ट रूम तैयार कराया है। यह कमरे प्ले स्कूल की तरह सजाया गया है, जिसमें झूले, खिलौने और बच्चों के लिए विशेष बिस्तरों की व्यवस्था है। बच्चों का मनोबल बनाए रखने के लिए दीवारों पर रंग-बिरंगे कार्टून और आकर्षक पेंटिंग्स बनाई गई हैं।

    50 बिस्तरों के तीन हॉल
    बंगले में मरीजों के रहने के लिए तीन रेनोवेटेड हॉल बनाए गए हैं, जिनमें कुल 50 बिस्तरों की सुविधा है।

    मरीजों के आने-जाने, रुकने और इलाज के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। साथ ही एम्बुलेंस सेवा, भोजन और अस्पताल में इलाज कराने की पूरी सुविधा भी दी गई है।

    फ्री भोजन और खास मेन्यू
    बंगले में रहने वाले मरीजों के लिए सुबह नाश्ता, चाय और दो टाइम फ्री भोजन की सुविधा है। इस किचन को “गोपाल जी की रसोई” नाम दिया गया है। भोजन में मलाई कोफ्ता, मटर पनीर, पालक पनीर, बैगन भर्ता, आलू टमाटर, दाल मखनी, मूंग दाल, जीरा राइस, हलवा, खिचड़ी, गरम रोटियाँ, अचार, पापड़, चटनी और सलाद जैसी विविध और पौष्टिक डिशेज़ शामिल हैं।

    एम्बुलेंस सेवा और पंजीकरण
    हर रविवार को गढ़ाकोटा स्थित निज निवास गणनायक से तीन एम्बुलेंस भोपाल के लिए मरीजों को लेकर रवाना होती हैं।

    मरीजों का पंजीकरण गढ़ाकोटा में किया जाता है और भोपाल पहुंचते ही कर्मचारी आधार कार्ड, बीमारी की जानकारी और अस्पताल का नाम लेकर मरीजों को भर्ती कराते हैं।

    पूरी सुविधा निशुल्क
    गोपाल भार्गव के क्षेत्र के मरीजों को आने-जाने, रुकने, खाने और इलाज की पूरी सुविधा नि:शुल्क दी जाती है। इलाज आयुष्मान कार्ड या मुख्यमंत्री सहायता योजना के माध्यम से कराया जाता है। यदि इनसे मदद न मिले तो गोपाल भार्गव अपने निजी फंड से इलाज की व्यवस्था करते हैं।

    बच्चों के लिए अनुकूल वातावरण
    शिल्पी भार्गव ने यह व्यवस्था बच्चों के मनोबल को ध्यान में रखकर बनाई है। उनका उद्देश्य था कि जब बच्चे इलाज के लिए आएं तो उन्हें डर या असहजता महसूस न हो। इसलिए गेस्ट रूम को प्ले स्कूल जैसा सजाया गया और वातावरण को अनुकूल बनाया गया।

    लंबे समय से चल रही व्यवस्था
    अभिषेक भार्गव ने बताया कि यह व्यवस्था 2004 से शुरू है, जब गोपाल भार्गव मंत्री थे। उस समय भी मरीजों के आने-जाने, रहने, खाने और इलाज की सुविधा दी जाती थी। अब यह प्रकल्प निजी स्तर पर जारी है।

    जीवन और मृत्यु के लिए भी सुविधा
    गोपाल भार्गव का परिवार न केवल इलाज, बल्कि मृत्यु और अंतिम संस्कार की सुविधा भी प्रदान करता है। मरीज की मृत्यु होने पर शव घर तक पहुंचाने की व्यवस्था, बरमान घाट पर अस्थि विसर्जन और पंडित व नाई की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

    निजी खर्च और धर्म
    इस पूरे प्रकल्प में सरकारी मदद सीमित है। बंगले में साज-सज्जा और मरीजों की सुविधाएं निजी खर्च से ही संचालित होती हैं। गोपाल भार्गव का धर्म और ध्येय वाक्य है, “निरंतर कर्म” और यह दर्शन उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देता है।

    गोपाल भार्गव और उनके परिवार द्वारा स्थापित यह व्यवस्था न केवल बीमार बच्चों और मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है, बल्कि यह मानवता और सेवा का अद्वितीय उदाहरण भी पेश करती है।

  • एम्स भोपाल को मिलेंगी गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी हाईटेक सुविधाएं ट्रांसप्लांट के लिए नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू

    एम्स भोपाल को मिलेंगी गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी हाईटेक सुविधाएं ट्रांसप्लांट के लिए नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू

    भोपाल । नए साल 2026 में मध्य प्रदेश के मरीजों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई उम्मीद सामने आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स भोपाल इस साल अपने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक विस्तार करने जा रहा है। इस विस्तार के तहत एम्स भोपाल में गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को स्थापित किया जाएगा जिससे गंभीर बीमारियों खासकर कैंसर और ट्यूमर के इलाज में बड़े सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    एम्स भोपाल इस वर्ष ‘ट्रांसप्लांट’ के लिए समर्पित एक नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इस ऑपरेशन थिएटर के शुरू होने से हृदय लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट अब एक ही छत के नीचे संक्रमण रहित वातावरण में किए जा सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वेटिंग लिस्ट कम हो सकेगी और अधिक मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा जिससे उनका जीवन बचाया जा सकेगा।

    इसके अलावा गामा नाइफ तकनीक का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर और मस्तिष्क के अन्य जटिल रोगों के इलाज में किया जाएगा। गामा नाइफ के माध्यम से बिना चीरा लगाए सटीक रेडिएशन के जरिए ट्यूमर का इलाज संभव हो सकेगा। यह तकनीक विशेषकर उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी जिन्हें ब्रेन ट्यूमर के इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    एम्स भोपाल के इस नए कदम से अब मरीजों को दिल्ली मुंबई या अन्य बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी क्योंकि यहां उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। संस्थान का पूरा फोकस इस वर्ष डायग्नोस्टिक सेवाओं को और बेहतर बनाने और क्रिटिकल केयर की क्षमता को बढ़ाने पररहेगा।यह पहल न केवल मध्य प्रदेश बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के मरीजों केलिए भी राहत लेकर आएगी क्योंकि अब उन्हें उच्च गुणवत्ता वालेउपचार के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

  • सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर

    सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दो साल जल्द ही पूरे होने वाले हैं। दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में शायद ही किसी ने यह सोचा था कि वह मुख्यमंत्री बनेंगे। उस समय बड़े नाम खासकर शिवराज सिंह चौहान जो 17 साल तक मुख्यमंत्री रहे चर्चा में थे। इस वजह से जब डॉ. यादव ने पद संभाला तो उनके नेतृत्व को लेकर कुछ हिचक और आशंकाएं थीं। लेकिन अब उनके दो साल के कार्यकाल ने उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है और उन्होंने मध्य प्रदेश में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में कई नए बदलाव हुए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश में विकास की नई दिशा दिखाने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की। केन-बेतवा लिंक परियोजना की शुरुआत भी प्रदेश से हुई है जो बुंदेलखंड के पिछड़े इलाकों में विकास की नई राह खोलेगी। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया है जैसे प्रमोटी अधिकारियों को हटाकर युवा अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपना जिससे प्रदेश में बेहतर प्रशासन का माहौल बना है।

    डॉ. यादव ने रोजगार सृजन के मामले में भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने सिर्फ एक साल में 75 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। निजी क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। इसके अलावा सात लाख करोड़ के निवेश से नए उद्योग शुरू किए गए हैं और निजी क्षेत्र में दो लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। वहीं प्रदेश में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी लगातार काम हो रहा है। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने बताया कि 2028 तक एक करोड़ हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई जाएगी जिससे किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी।

    बिजली क्षेत्र में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश अच्छा प्रदर्शन कर रहा है जो राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार हुआ है। प्रदेश में अब मेडिकल कॉलेजों की संख्या 25 से अधिक हो गई है और सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इसके अलावा सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी डॉ. मोहन यादव ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
    श्री महाकाल महालोक के उद्घाटन के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या में 20 गुना वृद्धि हुई है। 2023 में जहां 5 लाख पर्यटक उज्जैन आए थे वहीं 2024 में यह संख्या सात करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। प्रदेश में 12 लोक बन रहे हैं जिससे मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो रही है। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में समग्र विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करना है जिसे वह अपनी सरकार के अगले दो सालों में पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राज्य का विकास निश्चित रूप से एक नए मुकाम पर पहुंचने की ओर अग्रसर है।