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  • डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण, सेवा भावना और मानवीय योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से वेनेजुएला में राहत एवं चिकित्सा सेवाएं दे रहे भारतीय चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्यों को देश के लिए गर्व का विषय बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय डॉक्टर मानवता की सेवा के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय चिकित्सा समुदाय ने हर चुनौतीपूर्ण दौर में अपनी जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन किया है। उनका मानना है कि डॉक्टर केवल मरीजों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि समाज में विश्वास, सुरक्षा और आशा का वातावरण भी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में चिकित्सकों का समर्पण भारत की सेवा संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सशक्त उदाहरण है।

    उन्होंने वेनेजुएला में संचालित राहत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कार्यरत भारतीय चिकित्सा दल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावित लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यह मिशन न केवल मानवीय सहायता का उदाहरण है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका को भी मजबूत करता है। उनके अनुसार, भारतीय डॉक्टरों की विशेषज्ञता और सेवा भावना विश्व समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई प्रदान कर रही है।

    प्रधानमंत्री ने चिकित्सकों के योगदान को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा के कारण करोड़ों नागरिकों का स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने सभी चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका योगदान स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए विस्तार का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और मेडिकल शिक्षा के लिए स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर सीटों का व्यापक विस्तार किया गया है। इससे भविष्य के लिए अधिक प्रशिक्षित चिकित्सक तैयार हो रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच देश के दूरदराज क्षेत्रों तक बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में चिकित्सा समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉक्टर निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने, चिकित्सा अनुसंधान को गति देने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। उनके अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और मानव संसाधन का विस्तार देश की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    वेनेजुएला में चल रहे मानवीय राहत अभियान के तहत भारत ने चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम, पोर्टेबल अस्पताल और बड़ी मात्रा में दवाइयों तथा राहत सामग्री की आपूर्ति की है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे मानवीय प्रयास भारत की वैश्विक जिम्मेदारी और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करते हैं।

    राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश चिकित्सा समुदाय के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सेवा भावना के लिए शुभकामनाएं दीं।

  • फार्मा सेक्टर में दिख रही तेज रफ्तार, एक्सपर्ट्स ने बताए 4 ऐसे शेयर जो लंबी अवधि में बन सकते हैं कमाई के बड़े खिलाड़ी

    फार्मा सेक्टर में दिख रही तेज रफ्तार, एक्सपर्ट्स ने बताए 4 ऐसे शेयर जो लंबी अवधि में बन सकते हैं कमाई के बड़े खिलाड़ी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर एक बार फिर मजबूत चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय तक इस सेक्टर को केवल सुरक्षित और स्थिर निवेश का विकल्प माना जाता रहा, जहां निवेशक बाजार की अनिश्चित परिस्थितियों में अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए रुख करते थे। लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदलती दिखाई दे रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मा सेक्टर की पारंपरिक छवि बदल रही है और यह क्षेत्र अब केवल डिफेंसिव नहीं बल्कि एक मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में उभरता नजर आ रहा है।

    बीते कुछ वर्षों में भारतीय फार्मा उद्योग ने घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत, दवाओं की लगातार बढ़ती मांग और चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते निवेश ने इस उद्योग को नई दिशा दी है। इसके साथ ही भारतीय दवा कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है। यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि फार्मा कंपनियां अब केवल पारंपरिक दवा कारोबार तक सीमित नहीं हैं। नई तकनीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और अनुसंधान आधारित उत्पादों पर लगातार काम हो रहा है। कई कंपनियां रिसर्च और डेवलपमेंट पर पहले से अधिक निवेश कर रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इनके कारोबार के विस्तार की संभावनाएं मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। यही कारण है कि अब इस सेक्टर को लंबे समय की ग्रोथ कहानी के रूप में देखा जाने लगा है।

    विशेषज्ञों द्वारा कुछ चुनिंदा फार्मा कंपनियों पर खास भरोसा जताया गया है। माना जा रहा है कि इन कंपनियों की कारोबारी रणनीति, उत्पाद पोर्टफोलियो और भविष्य की योजनाएं इन्हें अन्य कंपनियों से अलग बना सकती हैं। निवेशकों के बीच ऐसे शेयरों को लेकर उत्साह इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि स्वास्थ्य क्षेत्र की मांग लगातार बनी रहती है और यह उद्योग आर्थिक परिस्थितियों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होता है।

    दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा जरूरतों में बढ़ोतरी ने भी भारतीय फार्मा उद्योग के लिए नए अवसर तैयार किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियां लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के मामले में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति में हैं। इसका लाभ आने वाले वर्षों में कारोबार और निवेश दोनों स्तरों पर देखने को मिल सकता है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शेयर बाजार में निवेश करते समय केवल किसी सेक्टर की लोकप्रियता के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं माना जा सकता। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, बाजार में उसकी स्थिति और भविष्य की विकास योजनाओं का मूल्यांकन करना चाहिए। किसी भी निवेश से पहले जोखिम और अवसर दोनों पक्षों को समझना आवश्यक माना जाता है।

    फिलहाल संकेत यही हैं कि फार्मा सेक्टर अब बदलाव के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिस क्षेत्र को कभी केवल सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता था, वही अब तेज विकास, तकनीकी विस्तार और भविष्य की संभावनाओं के कारण निवेशकों के लिए नए अवसरों का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह सेक्टर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।

  • कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए एक खुशखबरी आई है। भारतीय दवाई नियामक बोर्ड ने कैंसर के लिए 7 मिनट टेंकेट्रिक इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है।

    कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए एक खुशखबरी आई है। भारतीय दवाई नियामक बोर्ड ने कैंसर के लिए 7 मिनट टेंकेट्रिक इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है।


    नई दिल्ली । भारत में हर वर्ष हजारों की संख्या में लोग कैंसर की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा जाते हैं। लाखों भारतीय हर समय इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं जितनी भी रिपोर्ट्स इस बीमारी को लेकर सामने आती हैं, उसमें भारतीयों के ऊपर सबसे बड़ा खतरा कैंसर को ही बताया जाता है। कैंसर को लेकर कई लोगों की आम धारणा है कि बीमारी से पहले इंसान इसके इलाज से ज्यादा कमजोर हो जाता है। अब इस परेशानी को दूर करने के लिए कैंसर की एक नई ‘7 मिनट कैंसर इंजेक्शन’ को मंजूरी मिली है। इससे कैंसर का इलाज काफी आसान और सरल होने की संभावना है।
    मेडीकल के क्षेत्र की बड़ी कंपनी रोश की कैंसर दवा के नए टेंकेट्रिक इंजेक्शन को भारत दवा नियामक संस्था CDSCO ने मंजूरी दे दी है। मुंबई के कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर रमन नारंग के मुताबिक सामान्य तौर पर इम्यूनोथेरेपी में दवाईयां नसों के जरिए दी जाती है, जिसमें 30 मिनट से एक घंटे का वक्त लगता है। लेकिन इस नए इंजेक्शन में सिर्फ सात मिनट का वक्त लगता है। दूसरी बात इसे ड्रिप के जरिए नहीं बल्कि त्वचा के जरिए भी दिया जा सकता है।
    कैसे काम करती है नया 7 मिनट टेकेंट्रिक इंजेक्शन
    सामान्य रूप से कैंसर का इलाज कीमोथैरेपी के जरिए किया जाता है। इस इलाज प्रक्रिया में थैरेपी सीधा कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं। इसकी वजह से शरीर की जो स्वस्थ कोशिकाओं होती हैं, वह भी प्रभावित होती हैं, जिसकी वजह से मरीजों को बाल झड़ना, कमजोरी, उल्टी और थकान जैसी समस्या महसूस होती है। कीमोथैरपी की प्रक्रिया में इंसान बहुत ही ज्यादा कमजोर भी हो जाता है।
    विशेषज्ञों के मुताबिक नई 7 मिनट टेकेंट्रिक इंजेक्शन की इम्यूनोथेरेपी अलग तरीके से काम करती है। डॉक्टर्स के मुताबिक यह इंजेक्शन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। इस इंजेक्शन की दवा शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को छिपने नहीं देती बल्कि प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करके सीधा उस पर हमला करती है। दूसरी बात कैंसर की दवाई को सामान्य तौर पर नसों के जरिए शरीर में भेजा जाता है, लेकिन इस इंजेक्शन को त्वचा के नीचे से सीधा प्रवेशित कराया जा सकता है। इसकी वजह से यह जल्दी काम करती है।
    इस मामले के जानकार लोगों के मुताबिक, 7 मिनट इंजेक्शन भारत में बढ़ते कैंसर मरीजों के लिए एक चमत्कार साबित हो सकता है। इससे लंबी दूरी से अस्पताल आने वाले मरीजों को राहत मिलेगी, दूसरी तरफ अस्पताल में भी उनको कम समय लगेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में हर साल 14 से 15 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। अगर यह दवाई कारगर सिद्द होती है तो इससे इन मरीजों के लिए इलाज थोड़ा आसान साबित होगा।
    दवाई अपने साथ कुछ समस्याएं लेकर भी आई
    हर दवाई के अपने कुछ साइड इफेक्ट भी होते हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक यह इंजेक्शन हर कैंसर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा इसके कुछ साइड इफेक्ट जैसे- बुखार, कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत, स्किन की दिक्कत या फेंफड़ों में सूजन भी आ सकती है। ऐसे में किसी भी तरह के इलाज के लिए डॉक्टर्स की निगरानी बहुत जरूरी है।
    भले ही कंपनी और डॉक्टर्स इस इलाज को कैंसर मरीजों के लिए चमत्कार बता रहे हैं। लेकिन इसकी सबसे बड़ी परेशानी इसकी कीमत है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक कैंसर मरीज को अपना इलाज पूरा करवाने के लिए इस इंजेक्शन के कम से कम 6 डोज की जरूरत होती है। वर्तमान में इस इंजेक्शन के एक डोज की कीमत 3.7 लाख रुपए है। ऐसे में अगर कोई पूरा इलाज लेता है, तो केवल दवाई का खर्च ही 22 लाख रुपए के आसपास पहुंच जाएगा। भारत जैसे मध्यम आय वाली जनता के लिए यह रकम बहुत ज्यादा है।
    भले ही कंपनी और रिपोर्ट्स इस इलाज को बेहतर बता रही हों। लेकिन डॉक्टर्स ने इसको लेकर अपना दूसरा नजरिया भी रखा है। डॉक्टर्स का कहना है कि यह कोई जादुई इलाज नहीं है। लेकिन वर्तमान में कैंसर मरीजों को लंबे इलाज और परेशानी का सामना करना पड़ता है, उससे राहत देने के लिए यह पर्याप्त है।
  • हेपेटाइटिस C इलाज पर भारत का सख्त रुख, पेटेंट विवाद में अमेरिकी कंपनी को झटका

    हेपेटाइटिस C इलाज पर भारत का सख्त रुख, पेटेंट विवाद में अमेरिकी कंपनी को झटका

    नई दिल्ली । भारत ने दवाओं की उपलब्धता और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। भारतीय पेटेंट कार्यालय ने अमेरिकी दवा कंपनी AbbVie को हेपेटाइटिस C के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कॉम्बो थेरेपी पर पेटेंट देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे भविष्य में सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    जिस थेरेपी को लेकर विवाद सामने आया, उसमें glecaprevir और pibrentasvir नामक दवाओं का संयोजन शामिल है। इसे हेपेटाइटिस C जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए प्रभावी माना जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह थेरेपी कई मरीजों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस दवा के जेनेरिक संस्करण की उपलब्धता मरीजों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।

    भारतीय पेटेंट प्रणाली लंबे समय से इस बात पर जोर देती रही है कि किसी भी दवा या चिकित्सा तकनीक को केवल तभी पेटेंट सुरक्षा मिले जब उसमें वास्तविक और महत्वपूर्ण नवाचार हो। इसी नीति के तहत पेटेंट कार्यालय ने कंपनी के आवेदन की समीक्षा की और अंततः पेटेंट देने से इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि इस फैसले से बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और दवाओं की कीमतें नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।

    सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कई संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि इस तरह के पेटेंट आसानी से दिए जाने लगें, तो आवश्यक दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और मरीजों की पहुंच सीमित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत की पेटेंट व्यवस्था में मौजूद सुरक्षा उपाय स्वास्थ्य अधिकारों और दवा पहुंच के बीच संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में शामिल है जो बड़े स्तर पर जेनेरिक दवाओं का उत्पादन करते हैं। कई विकासशील देशों में भारतीय दवाओं पर बड़ी आबादी निर्भर करती है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण इलाज पर एकाधिकार आधारित पेटेंट का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जा सकता है। यही कारण है कि इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    हेपेटाइटिस C एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करता है। समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में यह बीमारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। पिछले कुछ वर्षों में इसके उपचार में आधुनिक दवाओं ने बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन इनकी कीमतें कई देशों में चिंता का विषय रही हैं। ऐसे में जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता उपचार को अधिक सुलभ और किफायती बनाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह फैसला भविष्य में भी दवा उद्योग और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने के उदाहरण के रूप में देखा जाएगा। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि देश की नीतियां केवल व्यावसायिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम मरीजों की पहुंच और स्वास्थ्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता देती हैं।

  • स्वस्थ रहने का राज: गर्मियों में इम्यून सिस्टम मजबूत करने के असरदार तरीके

    स्वस्थ रहने का राज: गर्मियों में इम्यून सिस्टम मजबूत करने के असरदार तरीके


    नई दिल्ली ।  गर्मी का मौसम जहां एक तरफ तेज धूप और गर्म हवाएं लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह शरीर के लिए कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियां भी खड़ा करता है। इस दौरान सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण, पेट की समस्याएं और डिहाइड्रेशन जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण कमजोर इम्यूनिटी यानी शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता का कम होना है।
    हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इम्यून सिस्टम मजबूत हो, तो शरीर कई तरह की बीमारियों से खुद ही लड़ सकता है। इसके लिए दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
    संतुलित आहार से बढ़ाएं शरीर की ताकत
    इम्यूनिटी को मजबूत बनाने की शुरुआत आपकी थाली से होती है। स्वस्थ और संतुलित आहार शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। रोजाना के भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें, अनाज, नट्स और दही को शामिल करना बेहद जरूरी है। ये सभी चीजें विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाती हैं।वहीं, ज्यादा चीनी, जंक फूड और तले-भुने खाने से दूरी बनाना जरूरी है क्योंकि ये चीजें इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकती हैं।

    पूरी नींद है मजबूत इम्यूनिटी की कुंजी
    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद इम्यून सिस्टम को एक्टिव और मजबूत बनाए रखती है। नींद के दौरान शरीर अपनी मरम्मत करता है और नई ऊर्जा तैयार करता है। अगर नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है, जिससे बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

    नियमित व्यायाम से बढ़ेगा स्टैमिना और इम्यून पावर
    हर दिन कम से कम 30 से 45 मिनट तक हल्का व्यायाम, योग या वॉक करना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर में सूजन कम होती है। नियमित शारीरिक गतिविधि न सिर्फ शरीर को फिट रखती है, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।

     तनाव को करें कंट्रोल, इम्यूनिटी रहेगी मजबूत
    ज्यादा तनाव लेना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर सीधा असर डालता है। तनाव हार्मोन शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर कर सकते हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का। ध्यान, प्राणायाम, संगीत सुनना या अपनी पसंदीदा गतिविधियों में समय बिताना तनाव कम करने के बेहतरीन तरीके हैं। शांत मन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है।

     शरीर को हाइड्रेट रखना है बेहद जरूरी
    गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे जरूरी माना जाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और कोशिकाएं बेहतर तरीके से काम करती हैं। इसके साथ ही नींबू पानी, छाछ और हर्बल टी का सेवन भी शरीर को ठंडक देता है और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है।

    छोटी आदतें, बड़ा स्वास्थ्य लाभ
    गर्मी में बीमारियों से बचने के लिए इम्यूनिटी को मजबूत रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, अच्छी नींद, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और पर्याप्त हाइड्रेशन जैसी आदतें अपनाकर शरीर को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। ये आसान उपाय न सिर्फ मौसमी बीमारियों से बचाते हैं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में भी मदद करते हैं।

  • गर्मियों में आंखों को दें तुरंत राहत, ठंडा कॉटन पैड है सबसे आसान और असरदार उपाय

    गर्मियों में आंखों को दें तुरंत राहत, ठंडा कॉटन पैड है सबसे आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम जहां शरीर को थका देता है वहीं आंखों पर भी इसका गहरा असर देखने को मिलता है। तेज धूप गर्म हवा और बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों में जलन सूजन और थकान जैसी समस्याओं को जन्म देता है। मोबाइल कंप्यूटर और लैपटॉप पर घंटों काम करने से आंखें ड्राई हो जाती हैं और उनमें भारीपन महसूस होने लगता है। ऐसे में एक सरल घरेलू उपाय ठंडा कॉटन पैड आंखों को तुरंत राहत देने में बेहद कारगर साबित होता है।

    आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी आंखों की देखभाल के लिए ठंडे सेक को फायदेमंद मानते हैं। आयुष मंत्रालय द्वारा भी आंखों की थकान और जलन से राहत के लिए ठंडे कॉटन पैड के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। यह उपाय पूरी तरह सुरक्षित है और इसे किसी भी उम्र के लोग आसानी से अपना सकते हैं।

    ठंडे कॉटन पैड का उपयोग करना बेहद आसान है। सबसे पहले चेहरे को साफ पानी से धो लें ताकि धूल और पसीना हट जाए। इसके बाद साफ और मुलायम कॉटन पैड लें और उन्हें ठंडे पानी में भिगो दें। हल्का सा निचोड़कर अतिरिक्त पानी निकाल लें ताकि पैड ज्यादा गीला न हो। फिर आराम से लेट जाएं और आंखें बंद करके दोनों आंखों पर कॉटन पैड रख लें। करीब 10 मिनट तक इसी स्थिति में आराम करें और गहरी सांस लेते रहें।

    यह ठंडा सेक आंखों की मांसपेशियों को तुरंत आराम देता है और सूजन को कम करता है। साथ ही आंखों में रक्त संचार बेहतर होता है जिससे थकान और भारीपन दूर होता है। अगर चाहें तो पानी में गुलाब जल की कुछ बूंदें मिलाकर इसका उपयोग कर सकते हैं जिससे आंखों को अतिरिक्त ताजगी और सुकून मिलता है।

    इस उपाय को दिन में एक बार या जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। खासकर तब जब आप लंबे समय तक स्क्रीन पर काम कर चुके हों या धूप में रहने के कारण आंखों में जलन हो रही हो। शाम के समय इसे करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इस समय आंखों को आराम की जरूरत होती है।

    हालांकि यह उपाय सामान्य थकान और जलन के लिए बेहद प्रभावी है लेकिन अगर आंखों में लगातार दर्द धुंधलापन या कोई गंभीर समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इसके अलावा ध्यान रखें कि हमेशा साफ कॉटन पैड का इस्तेमाल करें और पानी बहुत ज्यादा ठंडा न हो।

    इस तरह ठंडा कॉटन पैड एक सरल सस्ता और प्रभावी तरीका है जो गर्मियों में आंखों को राहत देने के साथ उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करता है। नियमित उपयोग से आंखें तरोताजा रहती हैं और दिनभर की थकान आसानी से दूर हो जाती है।

  • MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी

    MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज कराने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म हो गई है। इसमें राजधानी भोपाल के 51, इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। कुल मिलाकर चार प्रमुख शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित हुए हैं।

    जानकारी के अनुसार, NABH सर्टिफिकेट न मिलने के कारण इन अस्पतालों में अब मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं होगा। वहीं, फुल NABH प्रमाणित अस्पताल “डीम्ड इंपैनलमेंट” का लाभ प्राप्त करेंगे और अस्पतालों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। एंट्री लेवल NABH अस्पतालों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। साथ ही मरीजों के फीडबैक से अस्पतालों की निगरानी भी की जाएगी।

    NABH सर्टिफिकेट अस्पतालों की गुणवत्ता और सुरक्षा का प्रमाण होता है। इसमें 600 से अधिक मानकों पर अस्पतालों की जांच की जाती है। ये मानक मरीजों की सुरक्षा, साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी सेवाएं और सर्जरी प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं। सरकार का मानना है कि NABH प्रमाणपत्र मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज की गारंटी देता है।

    इस फैसले के बाद प्रभावित अस्पतालों के मरीजों को अब मुफ्त इलाज के विकल्प सीमित होंगे। मरीजों को अब अपने नजदीकी फुल NABH प्रमाणित अस्पतालों में इलाज कराने की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन अल्पकाल में लोग असुविधा और परेशानियों का सामना कर सकते हैं।

    मंत्रालय ने बताया कि आगामी दिनों में अस्पतालों को NABH मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। वहीं, मरीजों से फीडबैक लेकर अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी की जाएगी ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

    इस बदलाव से मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और मरीजों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, हालांकि फिलहाल लोगों को अस्पतालों के चयन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

  • दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट में विकास और जनकल्याण की बड़ी तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1,03,700 करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए इसे केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राजधानी के भविष्य का रोडमैप बताया। इस बजट में खास बात यह रही कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर जोर देते हुए कुल बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन बजट के रूप में रखा गया है

    सरकार के अनुसार दिल्ली की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और जीएसडीपी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। लोक निर्माण विभाग को 5,921 करोड़ और शहरी विकास विभाग को 7,887 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव है। यमुनापार, अनधिकृत कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए भी अलग से बजट निर्धारित किया गया है

    राजधानी में सड़कों और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 750 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास, नए फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही बारापुल्ला कॉरिडोर को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है

    बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पावर सेक्टर के लिए 3,942 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली लाइनों को भूमिगत करने की योजना शामिल है

    जल और सीवर व्यवस्था को सुधारने के लिए 9,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1,500 एमजीडी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्वच्छता और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी

    स्वास्थ्य क्षेत्र में 12,645 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए सरकार ने अधूरे अस्पतालों को पूरा करने, आईसीयू सुविधाओं के विस्तार और नई स्वास्थ्य योजनाओं की घोषणा की है। आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाया गया है और 750 नए आरोग्य केंद्र खोले जाएंगे। नवजात शिशुओं के लिए नई जांच सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी

    शिक्षा क्षेत्र को भी इस बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। 19,148 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ हजारों स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे, छात्राओं को मुफ्त साइकिल और मेधावी छात्रों को लैपटॉप देने की योजना है। नई आईटीआई, एडुसिटी और खेल विश्वविद्यालय जैसे प्रोजेक्ट्स भी प्रस्तावित हैं

    महिला और बाल विकास के लिए 7,406 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा पर जोर दिया गया है। मुफ्त बस यात्रा, गैस सिलेंडर और नई योजनाएं जारी रहेंगी। साथ ही शहर में 50,000 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और वन स्टॉप सेंटर बनाए जाएंगे

    परिवहन क्षेत्र में 8,374 करोड़ रुपए के बजट के साथ इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाएगा। 2027 तक 7,500 बसें और 2029 तक 12,000 ई बसों का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर पर भी निवेश बढ़ाया जाएगा

    एमएसएमई सेक्टर और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लाई जाएंगी, जिसमें वेयरहाउसिंग, सेमीकंडक्टर और ड्रोन पॉलिसी शामिल हैं। वहीं पर्यटन बजट में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है और पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने की योजना है

    पर्यावरण संरक्षण के लिए 822 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और कार्बन क्रेडिट जैसी योजनाएं शामिल हैं। कचरा निपटान क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य भी तय किया गया है

  • योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिससे प्रदेश आज कई स्वास्थ्य मानकों पर देश में अग्रणी बनकर उभरा है।

    सरकार ने इस दौरान केवल अस्पतालों के निर्माण तक ही ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि डिजिटल हेल्थ, आपातकालीन सेवाएं, मातृ और शिशु देखभाल जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सुधार किए हैं। डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में प्रदेश ने 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल के जरिए रोगों की निगरानी और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया गया है

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड ई-वाउचर की सुविधा दी गई है, जबकि जननी सुरक्षा योजना और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लाखों लोगों को लाभ मिला है। दस्तक अभियान के माध्यम से एईएस और जेई जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ भी सघन अभियान चलाया गया है

    प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हजारों की संख्या में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिला है और लाखों परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को बड़ी राहत मिली है

    स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में भी राज्य ने तेजी से प्रगति की है। जन औषधि केंद्रों की संख्या में वृद्धि के साथ सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वहीं, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन और अस्पतालों के नेटवर्क के मामले में भी प्रदेश देश में अग्रणी बना हुआ है

    आपातकालीन सेवाओं में सुधार करते हुए 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए करोड़ों लोगों को मदद पहुंचाई गई है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाई गई है और उनकी पहुंच को दोगुना किया गया है। इसके अलावा मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए दूरदराज के इलाकों में भी इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है

    योगी सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में निशुल्क डायलिसिस और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं शुरू की हैं। टेलीमेडिसिन और टेली कंसल्टेशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुलभ हुई हैं

    दवाओं की गुणवत्ता और सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है। इसके साथ ही कई स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट भी प्राप्त हुआ है

    खाद्य सुरक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी राज्य ने कदम बढ़ाए हैं। मोबाइल लैब और माइक्रोबायोलॉजी लैब के जरिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। साथ ही फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नई संस्थाओं की स्थापना की गई है

     उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर एक समग्र और आधुनिक सिस्टम विकसित किया है, जो न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करता है बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार है

  • हरियाणा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें

    हरियाणा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें


    हरियाणा। में सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर बुधवार (10 दिसंबर) से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। सरकार की ओर से डॉक्टरों पर ESMA (Essential Services Maintenance Act) लागू किया गया है, साथ ही No Work No Pay का नियम भी लगाया गया, लेकिन डॉक्टर अपनी मांगें मनवाने के लिए हड़ताल जारी रखेंगे।

    इस वजह से सरकारी अस्पतालों में मरीज दवा लेने और इलाज कराने के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं और कई जगहों पर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    डॉक्टरों की मुख्य मांगें

    हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया ने कहा कि सरकार ने पिछले साल लिखित रूप में कहा था कि सरकारी डॉक्टरों की पदोन्नति के लिए Assured Career Progression (ACP) लागू किया जाएगा, लेकिन अब तक यह लागू नहीं हुआ है।
    डॉ. ख्यालिया ने कहा कि सरकार ने हाल ही में 200 SMO (Senior Medical Officer) भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें 160 पद सीधे भरे जाएंगे। उनका कहना है कि यह मौजूदा सरकारी डॉक्टरों के साथ अन्याय है, क्योंकि इन पदों पर उनकी पदोन्नति होनी चाहिए थी।

    खाली पदों की समस्या

    राज्य में लगभग 600 मेडिकल ऑफिसर्स के पद खाली हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पहले इन पदों को भरा जाना चाहिए, न कि हड़ताल करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

    भूख हड़ताल का ऐलान

    डॉ. ख्यालिया ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय पंचकूला में तीन डॉक्टरों ने हड़ताल के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने डॉक्टरों की कुछ मांगें मान ली हैं और शेष पर बातचीत जारी है। इसके बावजूद डॉक्टर अपनी हड़ताल जारी रखेंगे।

    इस हड़ताल के चलते हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी असर पड़ रहा है और मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।