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  • आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कडप्पा में बढ़े मामलों के बीच सरकार ने मास्क और निगरानी व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई

    आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कडप्पा में बढ़े मामलों के बीच सरकार ने मास्क और निगरानी व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई

    नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोविड-19 संक्रमण से दो मरीजों की मौत और आठ सक्रिय मामलों की पुष्टि के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सतर्कता बढ़ा दी है। प्रशासन ने संक्रमण की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने, अस्पतालों को तैयार रखने और सार्वजनिक स्थानों पर एहतियाती उपायों को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार हाल के दिनों में कडप्पा जिले में सामने आए मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। अधिकारियों ने बताया कि एक 52 वर्षीय व्यक्ति को तेज बुखार और खांसी की शिकायत के बाद कोविड-19 संक्रमित पाया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। वहीं 43 वर्षीय एक अन्य मरीज, जो पहले से अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, कोविड संक्रमण की पुष्टि के बाद अस्पताल में उपचार के दौरान नहीं बच सके। अधिकारियों के अनुसार दोनों मामलों की विस्तृत चिकित्सीय समीक्षा भी की जा रही है।

    संक्रमण का असर स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों तक भी पहुंचा है। कडप्पा मेडिकल कॉलेज के एक मेडिकल छात्र के संक्रमित मिलने के बाद उसे होम आइसोलेशन में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि ऐसे मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है और निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन कराया जा रहा है ताकि संक्रमण के प्रसार को सीमित रखा जा सके।

    मामलों में वृद्धि के बाद प्रभावित क्षेत्रों में विशेष रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को तैनात किया गया है। संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनके नमूने जांच के लिए लिए जा रहे हैं। कई लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, जबकि शेष नमूनों की जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि संपर्क में आए सभी लोगों पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आइसोलेशन में रखा जाएगा।

    संक्रमण के स्वरूप की जानकारी प्राप्त करने के लिए मरीजों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग हेतु राष्ट्रीय प्रयोगशाला, पुणे भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संक्रमण किस वेरिएंट से जुड़ा है और उसकी प्रकृति क्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीनोम सीक्वेंसिंग के परिणाम आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने अस्पतालों, बस स्टैंडों और भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने की अनिवार्यता लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण वाले लोगों की शीघ्र पहचान, आवश्यक होने पर आइसोलेशन, संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की जांच तथा प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और सैनिटाइजेशन अभियान तेज करने को कहा गया है। सरकारी और निजी अस्पतालों को पर्याप्त बेड, आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन, दवाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय सतर्क रहें और कोविड से बचाव के सामान्य उपायों का पालन करें। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरती जाए, हाथों की स्वच्छता बनाए रखी जाए और यदि बुखार, खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए। अधिकारियों का कहना है कि समय पर जांच, निगरानी और एहतियाती उपाय संक्रमण की रोकथाम में सबसे प्रभावी साधन हैं।

  • महिला कर्मचारियों वाले विभागीय ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट से मचा विवाद, स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद होगी कार्रवाई

    महिला कर्मचारियों वाले विभागीय ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट से मचा विवाद, स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद होगी कार्रवाई

    मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले के चितरंगी स्वास्थ्य विभाग में विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट भेजे जाने के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। महिला कर्मचारियों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया है, जिसके बाद प्राप्त जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    मामला चितरंगी विकासखंड के सेक्टर लमसरई से जुड़ा है, जहां सुपरवाइजर का दायित्व संभाल रहे दुर्गा वैश्य पर विभागीय ग्रुप में कथित रूप से अशोभनीय संदेश साझा करने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि जिस ग्रुप में यह संदेश भेजे गए, उसमें विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। आरोप सामने आने के बाद विभागीय माहौल प्रभावित हुआ और कर्मचारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर असंतोष बढ़ गया।

    महिला कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय संचार के लिए बनाए गए ग्रुप का उपयोग केवल प्रशासनिक कार्यों और आधिकारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए होना चाहिए। ऐसे मंच पर कथित आपत्तिजनक संदेश साझा किए जाने से न केवल उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, बल्कि कार्यस्थल का वातावरण भी प्रभावित हुआ। कर्मचारियों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं सरकारी कार्यालयों की गरिमा और अनुशासन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

    शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने पूरे मामले की प्रारंभिक जानकारी एकत्र करना शुरू कर दिया है। विभाग का कहना है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच पूरी होने और उसका पक्ष सुनने के बाद ही की जाएगी।

    खंड चिकित्सा अधिकारी हरिशंकर वैश्य ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। नोटिस का जवाब प्राप्त होने के बाद विभागीय नियमों के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यदि जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं तो सेवा नियमों के तहत आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में कार्यस्थल पर आचरण और डिजिटल माध्यमों के जिम्मेदार उपयोग को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि आधिकारिक संचार मंचों का उपयोग केवल कार्यालयीन कार्यों तक सीमित रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और विभाग अब संबंधित पक्षों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

  • लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर

    लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर


    जबलपुर । जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर चर्चा में है, जहां करीब 59 लाख रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर विभाग में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

    यह मामला संजीवनी क्लीनिकों के कायाकल्प और NQAS सर्टिफिकेशन की तैयारियों के लिए जारी की गई राशि से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 58 संजीवनी क्लीनिकों को एक-एक लाख रुपये की राशि दी गई थी, ताकि रंगाई-पुताई और आवश्यक सुधार कार्य किए जा सकें, लेकिन आरोप है कि यह काम प्रस्तावित तरीके से पूरा नहीं हुआ।

    मामले के सामने आने के बाद यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्धारित कार्यों के बिना ही पूरी राशि का उपयोग कर लिया गया। इसके चलते संजीवनी अस्पतालों और क्लीनिकों के सुधार कार्य अधूरे रह गए, जबकि सरकारी फंड खर्च हो चुका था।

    इस वित्तीय अनियमितता के उजागर होने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। इनमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी, सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव, जिला क्वालिटी मॉनिटर शिखा गर्ग और लेखा प्रबंधक रेखा साहू शामिल हैं।

    अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगर तय मानकों के अनुसार NQAS सर्टिफिकेशन प्राप्त नहीं हुआ, तो संबंधित राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।