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  • पैकेट वाली चीजें शरीर के लिए कितनी नुकसानदायक? ज्यादा सेवन से बढ़ सकता है मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा

    पैकेट वाली चीजें शरीर के लिए कितनी नुकसानदायक? ज्यादा सेवन से बढ़ सकता है मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा

    नई दिल्ली: आजकल बच्चों से लेकर वयस्कों तक पैकेट में मिलने वाली चीजों का सेवन बढ़ता जा रहा है। चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड स्नैक्स और कुछ रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बन गए हैं। इन्हें तैयार करना और खाना आसान होता है, साथ ही स्वाद भी लोगों को पसंद आता है। हालांकि, इन चीजों का लगातार और अधिक सेवन सेहत के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है।

    अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ऐसे औद्योगिक तरीके से तैयार खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनमें कई तरह के एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें अक्सर कैलोरी, नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा अधिक हो सकती है, जबकि फाइबर और जरूरी पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम होते हैं। कम उम्र में ही ऐसी चीजें खाने की आदत पड़ने से समय से पहले वजन बढ़ने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। नियमित रूप से अधिक मात्रा में इन खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर में जरूरत से ज्यादा कैलोरी पहुंचा सकता है, जिससे मोटापे की समस्या बढ़ सकती है।

    इन खाद्य पदार्थों में मौजूद अधिक चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट भी चिंता का विषय हो सकते हैं। इन्हें बार-बार खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसी डाइट लेने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह ज्यादा नमक, संतृप्त वसा और कैलोरी का सेवन ब्लड प्रेशर, वजन और कोलेस्ट्रॉल से जुड़े जोखिमों को बढ़ा सकता है। इन कारणों से अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

    फाइबर की कमी भी इन खाद्य पदार्थों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या है। शरीर और आंतों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए फाइबर जरूरी माना जाता है। लंबे समय तक फाइबर वाली चीजों का सेवन कम रहने पर पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। अध्ययनों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन को मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग सहित कई क्रॉनिक बीमारियों के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है। कुछ अध्ययनों में इसके सेवन और कैंसर के खतरे के बीच भी संबंध पाया गया है।

    ऐसे में पैकेट वाली चीजें खरीदते समय उनके लेबल को ध्यान से देखना जरूरी है। नमक, चीनी, संतृप्त वसा और फाइबर की मात्रा की जांच करके बेहतर विकल्प चुना जा सकता है। रोजमर्रा की डाइट में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और नट्स जैसी पौष्टिक चीजों की मात्रा बढ़ाना भी उपयोगी हो सकता है। पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कम करके और संतुलित आहार को प्राथमिकता देकर डाइट को अधिक पौष्टिक बनाया जा सकता है।

  • सुबह का नाश्ता छोड़ना और देर रात खाना पड़ सकता है भारी, जानिए भोजन का सही समय क्यों है जरूरी

    सुबह का नाश्ता छोड़ना और देर रात खाना पड़ सकता है भारी, जानिए भोजन का सही समय क्यों है जरूरी


    नई दिल्ली। सेहतमंद रहने के लिए लोग अक्सर अपनी डाइट पर खास ध्यान देते हैं। खाने में फल सब्जियां दालें साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल करना अच्छी आदत मानी जाती है। हालांकि केवल पौष्टिक भोजन खाना ही पर्याप्त नहीं होता। भोजन किस समय किया जा रहा है इसका भी शरीर पर असर पड़ सकता है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार खाने का समय शरीर के मेटाबॉलिज्म पाचन प्रक्रिया हार्मोन और नींद जैसी कई प्रक्रियाओं से जुड़ा हो सकता है। यही वजह है कि सही खान-पान के साथ नियमित भोजन का समय बनाए रखना भी जरूरी माना जाता है।

    हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है जिसे बायोलॉजिकल क्लॉक कहा जाता है। यह शरीर की कई प्रक्रियाओं को दिन और रात के अनुसार नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है। नींद जागने की प्रक्रिया से लेकर हार्मोन के स्तर और पाचन तक कई गतिविधियां इसी प्राकृतिक लय से जुड़ी होती हैं। भोजन का समय भी इस व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। यदि व्यक्ति रोजाना अलग-अलग समय पर खाना खाता है या लंबे समय तक भूखा रहता है तो उसकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।

    सुबह का नाश्ता छोड़ना भी कई लोगों की आदत बन चुकी है। व्यस्तता के कारण कुछ लोग सीधे दोपहर का भोजन करते हैं। वहीं कुछ लोग दिनभर कम खाने के बाद रात में एक साथ ज्यादा भोजन कर लेते हैं। ऐसी आदतें पाचन संबंधी परेशानी बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद अचानक भारी भोजन करने से पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए दिनभर भोजन के बीच बहुत लंबा अंतर रखने से बचना बेहतर माना जाता है।

    रात के खाने को लेकर भी सावधानी जरूरी है। देर रात भारी भोजन करने से पेट को भोजन पचाने के लिए अधिक समय लग सकता है। इससे कुछ लोगों को गैस एसिडिटी या पेट में भारीपन जैसी समस्या महसूस हो सकती है। देर से खाना और तुरंत सो जाना नींद की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है। कुछ शोधों में देर से भोजन करने और वजन ब्लड शुगर तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के बीच संबंध की ओर भी संकेत मिले हैं।

    डिनर को बहुत देर तक टालने के बजाय अपनी दिनचर्या के अनुसार समय पर भोजन करना बेहतर विकल्प हो सकता है। आम तौर पर रात का भोजन सोने से कुछ घंटे पहले कर लेना सुविधाजनक माना जाता है। भोजन के बाद थोड़ी देर हल्की वॉक भी दिनचर्या का हिस्सा बनाई जा सकती है। करीब 10 से 15 मिनट की सामान्य चाल से टहलना पाचन के लिए मददगार हो सकता है और भोजन के बाद होने वाली सुस्ती को कम करने में भी सहायता कर सकता है।

    हालांकि हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है। उम्र काम करने का समय शारीरिक गतिविधि नींद की दिनचर्या और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार भोजन का समय बदल सकता है। किसी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति को अपनी डाइट और भोजन की टाइमिंग को लेकर डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि भोजन पौष्टिक होने के साथ नियमित और संतुलित समय पर लिया जाए। सही खान-पान की आदतें लंबे समय तक स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

  • Lauki Juice Benefits: लौकी का जूस डाइट में शामिल करने से मिल सकते हैं ये 5 फायदे, लेकिन कड़वी लौकी से रहें सावधान

    Lauki Juice Benefits: लौकी का जूस डाइट में शामिल करने से मिल सकते हैं ये 5 फायदे, लेकिन कड़वी लौकी से रहें सावधान

    Lauki Juice Benefits: लौकी को सेहत के लिए फायदेमंद सब्जियों में शामिल किया जाता है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है और यह कुछ जरूरी पोषक तत्वों का स्रोत भी है। इसी वजह से कई लोग लौकी की सब्जी के अलावा इसका जूस भी अपनी डाइट में शामिल करते हैं। बिना चीनी और अतिरिक्त सामग्री के तैयार किया गया ताजा लौकी का जूस हल्का पेय विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए और न ही किसी एक जूस पर निर्भर रहना सही है। इसे संतुलित खानपान के हिस्से के तौर पर लेना बेहतर है। लौकी के जूस से जुड़े फायदों की बात करें तो इसमें मौजूद पानी और कुछ पोषक तत्व शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ उपलब्ध कराने और डाइट की पोषण गुणवत्ता बेहतर करने में योगदान दे सकते हैं।

    लौकी का जूस शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है। लौकी में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए इससे तैयार ताजा जूस शरीर में तरल पदार्थ की पूर्ति में योगदान दे सकता है। गर्मी या शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है और इस स्थिति में सादा पानी सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इसलिए लौकी के जूस को पानी का विकल्प नहीं समझना चाहिए। इसके अलावा लौकी में मौजूद पानी और यदि जूस में कुछ गूदा शामिल रहे तो थोड़ी मात्रा में फाइबर भी मिल सकता है। संतुलित डाइट में फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, पूरी लौकी खाने की तुलना में जूस में फाइबर की मात्रा कम हो सकती है।

    लौकी को आमतौर पर कम कैलोरी वाली सब्जियों में शामिल किया जाता है। बिना चीनी मिलाया गया लौकी का जूस भी कैलोरी के लिहाज से हल्का पेय हो सकता है। यदि इसे अधिक कैलोरी या मीठे पेय की जगह लिया जाए तो कुल कैलोरी सेवन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, केवल लौकी का जूस पीने से वजन कम करने की उम्मीद करना सही तरीका नहीं है। वजन नियंत्रित रखने के लिए संतुलित खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। इसी तरह लौकी को डाइट में शामिल करने से शरीर को कुछ विटामिन और मिनरल्स भी मिल सकते हैं। अलग-अलग सब्जियों और फलों को उनकी पूरी अवस्था में खाने से शरीर को विविध पोषण और पर्याप्त फाइबर मिल सकता है।

    बिना चीनी और अतिरिक्त सामग्री के तैयार किया गया ताजा लौकी का जूस उन लोगों के लिए हल्का पेय विकल्प हो सकता है, जो मीठे शीतल पेय या अधिक कैलोरी वाले ड्रिंक्स कम करना चाहते हैं। हालांकि, इसे डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह ली जा सकती है। खास तौर पर लौकी का जूस तैयार करते समय एक जरूरी सावधानी का ध्यान रखना चाहिए। यदि लौकी का स्वाद कड़वा हो तो उसका जूस बिल्कुल नहीं पीना चाहिए। कड़वी लौकी में विषैले कुकुर्बिटासिन की मात्रा अधिक हो सकती है। इसलिए जूस बनाने से पहले लौकी का स्वाद जांचना जरूरी है और कड़वी लौकी का सेवन नहीं करना चाहिए।

    कुल मिलाकर, लौकी का ताजा जूस हाइड्रेशन में योगदान देने, संतुलित डाइट में पोषक तत्व शामिल करने और मीठे या अधिक कैलोरी वाले पेय के विकल्प के रूप में उपयोगी हो सकता है। पाचन के लिए भी इसमें मौजूद पानी और कुछ गूदे के कारण थोड़ी मात्रा में फाइबर मिल सकता है। फिर भी जूस की तुलना में पूरी सब्जी खाना अधिक फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि जूस बनाने की प्रक्रिया में फाइबर कम हो जाता है। इसलिए लौकी को संतुलित आहार का हिस्सा बनाना बेहतर है और किसी बीमारी के इलाज या वजन घटाने के लिए केवल इसके जूस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

  • डाइट कम करने के बाद भी नहीं रुक रहा वजन कहीं आप रोजाना ये गलतियां तो नहीं कर रहे

    डाइट कम करने के बाद भी नहीं रुक रहा वजन कहीं आप रोजाना ये गलतियां तो नहीं कर रहे


    नई दिल्ली। वजन कम करने की कोशिश करने वाले कई लोगों की शिकायत होती है कि वे पहले की तुलना में काफी कम खाना खा रहे हैं फिर भी वजन घटने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अक्सर लोग सिर्फ अपनी प्लेट में मौजूद रोटी चावल या खाने की मात्रा को देखते हैं जबकि वजन बढ़ने की पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा बड़ी होती है। पूरे दिन में खाई जाने वाली छोटी छोटी चीजें शारीरिक गतिविधि नींद तनाव और कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी वजन पर असर डाल सकती हैं। इसलिए अगर कम खाने के बावजूद वजन बढ़ रहा है तो अपनी पूरी दिनचर्या पर नजर डालना जरूरी है।

    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि केवल दो रोटी खाना कम भोजन करने का प्रमाण नहीं है। रोटी के साथ सब्जी में इस्तेमाल होने वाला तेल दाल में घी दही अचार मिठाई और दूसरी चीजें भी दिनभर की कुल कैलोरी बढ़ा सकती हैं। इसी तरह भोजन की मात्रा कम करने के बावजूद अगर चाय में ज्यादा चीनी बिस्किट नमकीन जूस सॉफ्ट ड्रिंक या दूसरे छोटे स्नैक्स बार बार लिए जा रहे हैं तो इनकी कुल कैलोरी वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। इसलिए कुछ दिनों तक अपनी पूरी डाइट को नोट करना उपयोगी हो सकता है। इससे यह पता चल सकता है कि वास्तव में पूरे दिन में क्या और कितना खाया जा रहा है।

    दूसरी बड़ी वजह शारीरिक गतिविधि की कमी हो सकती है। अगर व्यक्ति कम खाना खाता है लेकिन दिनभर ऑफिस की कुर्सी पर बैठा रहता है मोबाइल या टीवी देखता है और पैदल चलना या व्यायाम बहुत कम करता है तो शरीर की कैलोरी खर्च करने की मात्रा भी कम हो सकती है। वजन को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित भोजन के साथ रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। छोटी दूरी पर पैदल चलना सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और नियमित व्यायाम जैसी आदतें दिनचर्या में शामिल की जा सकती हैं।

    नींद की कमी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार कम सोने से भूख और पेट भरे होने से जुड़े संकेत प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण कुछ लोगों में ज्यादा खाने की इच्छा और मीठे या अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की क्रेविंग बढ़ सकती है। इसलिए वजन नियंत्रित करने की कोशिश में केवल डाइट पर ध्यान देने के बजाय पर्याप्त और नियमित नींद लेना भी जरूरी है।

    लगातार तनाव भी वजन बढ़ने की वजह बन सकता है। तनाव की स्थिति में कई लोगों को मीठा तला हुआ या जंक फूड खाने की इच्छा अधिक होती है। अगर तनाव के दौरान बार बार कुछ खाने की आदत बन जाए तो इसका असर धीरे धीरे वजन पर दिखाई दे सकता है। ऐसे में तनाव को नियंत्रित करने के लिए नियमित दिनचर्या पर्याप्त नींद शारीरिक गतिविधि और अपनी पसंद की आरामदायक गतिविधियों को समय देना मददगार हो सकता है।

    इसके अलावा कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी वजन बढ़ने से जुड़ी हो सकती हैं। अगर वजन बिना किसी स्पष्ट कारण के बढ़ रहा है और साथ में लगातार थकान ठंड ज्यादा लगना कब्ज त्वचा का रूखा होना या बाल झड़ने जैसी समस्याएं भी हैं तो थायरॉयड की जांच के लिए डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। इसी तरह अगर वजन लगातार बढ़ रहा है या इसके साथ सूजन सांस फूलना अथवा दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। वजन कम करने के लिए भोजन बहुत कम कर देना हमेशा सही तरीका नहीं होता। संतुलित डाइट पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है।

  • केला कब खाएं और किस तरह? नाश्ते से लेकर रात तक जानिए सही समय, फायदे और जरूरी सावधानियां

    केला कब खाएं और किस तरह? नाश्ते से लेकर रात तक जानिए सही समय, फायदे और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। केला ऐसा फल है जो स्वादिष्ट होने के साथ आसानी से उपलब्ध भी होता है। यही वजह है कि इसे लोग नाश्ते से लेकर वर्कआउट के पहले और बाद तक अलग अलग समय पर खाते हैं। लेकिन केला खाने के सही समय को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि सुबह खाली पेट केला खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद है जबकि कुछ लोग रात में केला खाने से बचने की सलाह देते हैं। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो केले को खाने का कोई एक तय समय नहीं है। इसे व्यक्ति अपनी दिनचर्या और शरीर की जरूरत के अनुसार खा सकता है।

    केला कार्बोहाइड्रेट फाइबर पोटैशियम और विटामिन बी6 जैसे जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है और यही कारण है कि इसे वर्कआउट से पहले या बाद में भी स्नैक के तौर पर खाया जाता है। पोटैशियम मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के साथ शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं विटामिन बी6 शरीर की कई जरूरी जैविक प्रक्रियाओं में मदद करता है। हालांकि केवल केला खाने से शरीर की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होतीं इसलिए इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना बेहतर माना जाता है।

    सुबह खाली पेट केला खाने की बात करें तो अगर किसी व्यक्ति को इससे पेट में परेशानी नहीं होती है तो वह इसे नाश्ते में शामिल कर सकता है। लेकिन कुछ लोगों को खाली पेट फल खाने के बाद पेट फूलने भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है। ऐसे लोगों के लिए केले को अकेले खाने के बजाय ओट्स दही या किसी अन्य संतुलित नाश्ते के साथ लेना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे भोजन में दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी शामिल हो जाते हैं।

    केला और दूध का शेक या स्मूदी भी काफी लोकप्रिय है। केला शरीर को कार्बोहाइड्रेट देता है जबकि दूध से प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व मिल सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को दूध और केला दोनों आसानी से पचते हैं तो यह संयोजन सामान्य डाइट का हिस्सा हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को दूध में मौजूद लैक्टोज से परेशानी होती है उन्हें गैस या पेट फूलने जैसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में परेशानी का कारण केवल केला मानना सही नहीं होगा।

    अब सवाल आता है कि क्या रात में केला खाना नुकसानदायक है। सामान्य तौर पर रात में केला खाने पर कोई सार्वभौमिक रोक नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को रात में केला खाने से पेट भारी या असहज महसूस नहीं होता तो वह इसे खा सकता है। लेकिन अगर सोने से पहले केला खाने के बाद पाचन संबंधी परेशानी महसूस होती है तो इसे दिन के समय लेना बेहतर रहेगा।

    कुछ लोगों को केला खाते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए। डायबिटीज वाले लोगों को केले की मात्रा और अपनी पूरी डाइट का ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि इसमें प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं। वहीं किडनी की बीमारी वाले लोगों को पोटैशियम की मात्रा को लेकर डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेनी चाहिए। कुल मिलाकर केला किसी एक खास समय का फल नहीं है। अपनी पाचन क्षमता और जरूरत के अनुसार इसे नाश्ते वर्कआउट के आसपास या दिन के किसी अन्य समय लिया जा सकता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए केले के साथ दूसरे फलों सब्जियों साबुत अनाज दाल और प्रोटीन स्रोतों को भी डाइट में शामिल करना जरूरी है।

  • फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर

    फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना अनियमित खानपान कम नींद और लगातार तनाव जैसी आदतें धीरे धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। स्वस्थ रहने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ अच्छी आदतों को शामिल करना ज्यादा जरूरी है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए।

    सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। भोजन में अलग अलग तरह की सब्जियां फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। भोजन की मात्रा और समय का भी ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या बार बार जरूरत से ज्यादा खाने की आदत से बचना चाहिए।

    शरीर को स्वस्थ रखने में पानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। गर्मी या अधिक शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पानी की जरूरत और बढ़ सकती है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना स्ट्रेचिंग करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। अगर आपका काम लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर करने वाला है तो बीच बीच में उठकर थोड़ा चलना भी उपयोगी आदत हो सकती है। किसी नई या कठिन एक्सरसाइज की शुरुआत धीरे धीरे करना बेहतर रहता है।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को आराम देने के साथ मानसिक ताजगी बनाए रखने में मदद करती है। रात में देर तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने की आदत कम करने और सोने का नियमित समय तय करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है लेकिन लगातार नींद की कमी को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। लगातार तनाव महसूस होने पर काम के बीच आराम लेना परिवार और दोस्तों से बातचीत करना संगीत पढ़ने या पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करे तो विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

    इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर आंखों और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। किसी बीमारी के लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की मेहनत से नहीं बल्कि रोज की छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश और समय समय पर स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • हेल्दी कुकिंग का सीक्रेट कौन सा तेल है सबसे फायदेमंद, जानिए नारियल एवोकाडो और सामान्य तेलों का पूरा सच

    हेल्दी कुकिंग का सीक्रेट कौन सा तेल है सबसे फायदेमंद, जानिए नारियल एवोकाडो और सामान्य तेलों का पूरा सच


    नई दिल्ली । आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की चाहत रखने वाले लोग सिर्फ खाने पर ही नहीं बल्कि खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेल पर भी खास ध्यान देने लगे हैं। सोशल मीडिया और फिटनेस ट्रेंड्स के कारण नारियल ऑयल और एवोकाडो ऑयल को सुपर हेल्दी विकल्प के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ये तेल वास्तव में सामान्य कुकिंग ऑयल से बेहतर हैं या फिर यह केवल एक नया ट्रेंड है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक तेल को हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा नहीं कहा जा सकता क्योंकि हर तेल की अपनी अलग पोषण संरचना और उपयोगिता होती है।

    नारियल तेल लंबे समय से भारतीय रसोई का हिस्सा रहा है। इसमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है जिससे यह तेज आंच पर भी स्थिर रहता है और जल्दी खराब नहीं होता। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि नारियल तेल अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल को बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि जिन लोगों का खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल पहले से अधिक है या जिन्हें हृदय रोग का खतरा है उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। इसलिए इसे पूरी तरह स्वास्थ्यवर्धक मानकर अधिक मात्रा में उपयोग करना सही नहीं होगा।

    दूसरी ओर एवोकाडो ऑयल को दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ई और कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। यह सलाद ड्रेसिंग हल्की कुकिंग और मध्यम से तेज आंच पर खाना बनाने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। हालांकि भारतीय बाजार में इसकी कीमत सामान्य तेलों की तुलना में काफी अधिक होती है इसलिए हर परिवार के लिए इसका नियमित उपयोग आसान नहीं है।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि सरसों मूंगफली तिल सूरजमुखी सोयाबीन और राइस ब्रान जैसे पारंपरिक कुकिंग ऑयल भी किसी तरह से कम नहीं हैं। यदि इनका संतुलित मात्रा में उपयोग किया जाए तो ये शरीर को आवश्यक फैटी एसिड और पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। कई पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबे समय तक केवल एक ही प्रकार का तेल इस्तेमाल करने के बजाय समय समय पर अलग अलग हेल्दी तेलों का संतुलित उपयोग करना बेहतर रहता है। इससे शरीर को विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं।

    तेल का चुनाव जितना महत्वपूर्ण है उससे कहीं ज्यादा जरूरी उसकी मात्रा पर नियंत्रण रखना है। चाहे नारियल तेल हो एवोकाडो ऑयल हो या कोई भी सामान्य कुकिंग ऑयल जरूरत से ज्यादा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके साथ ही एक ही तेल को बार बार गर्म करके इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे हानिकारक तत्व बनने लगते हैं जो स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं।

    यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं तो अपनी जरूरत बजट और खानपान के अनुसार अलग अलग हेल्दी तेलों का संतुलित उपयोग कर सकते हैं। वहीं यदि आपको हृदय रोग हाई कोलेस्ट्रॉल डायबिटीज या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं तो तेल बदलने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लें। आखिरकार सबसे अच्छा तेल वही है जो आपकी सेहत जीवनशैली और भोजन की जरूरतों के अनुसार सही मात्रा में इस्तेमाल किया जाए।

  • हर सुबह पेट रहेगा पूरी तरह साफ डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड पाचन होगा मजबूत और दिनभर रहेंगे ऊर्जावान

    हर सुबह पेट रहेगा पूरी तरह साफ डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड पाचन होगा मजबूत और दिनभर रहेंगे ऊर्जावान


    नई दिल्ली । सुबह पेट साफ न होना आज के समय में बड़ी संख्या में लोगों की आम समस्या बन गई है। इसके कारण दिनभर भारीपन गैस पेट फूलना और थकान जैसी परेशानियां बनी रहती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय यदि खानपान और जीवनशैली में सही बदलाव किए जाएं तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। संतुलित आहार पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार कब्ज या सुबह पेट साफ न होने का सबसे बड़ा कारण भोजन में फाइबर की कमी है। फाइबर आंतों की गति को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है और मल को आसानी से बाहर निकालने में सहायक होता है। इसके अलावा पर्याप्त पानी न पीना लंबे समय तक बैठे रहना शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित खानपान भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। इसलिए सबसे पहले इन कारणों को समझना और उन्हें सुधारना जरूरी है।

    सुबह उठने के बाद एक से दो गिलास गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को सक्रिय करने का आसान तरीका माना जाता है। इससे आंतों की गतिविधि बढ़ सकती है और मल त्याग में सहायता मिल सकती है। कई विशेषज्ञ रात में मुनक्का या सूखे अंजीर को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाने की सलाह भी देते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

    पपीता भी पाचन के लिए लाभकारी फलों में माना जाता है। इसमें फाइबर के साथ पपेन नामक एंजाइम पाया जाता है जो भोजन को पचाने में सहायता करता है। इसके अलावा नाश्ते में ओट्स या गेहूं का दलिया शामिल करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि इनमें घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक मेथी और बथुआ को नियमित भोजन का हिस्सा बनाना भी फायदेमंद माना जाता है। इनमें फाइबर के साथ पानी की मात्रा भी अच्छी होती है जिससे कब्ज की समस्या कम हो सकती है। दोपहर के भोजन के साथ दही या छाछ का सेवन भी लाभकारी माना जाता है क्योंकि इनमें मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया आंतों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं और पाचन प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं।

    सिर्फ खानपान ही नहीं बल्कि नियमित शारीरिक गतिविधि भी बेहद जरूरी है। रोजाना कम से कम तीस मिनट पैदल चलना हल्का व्यायाम करना या योग का अभ्यास करना आंतों की प्राकृतिक गति को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही समय पर भोजन करना और पर्याप्त नींद लेना भी पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    हालांकि यदि कब्ज की समस्या लंबे समय तक बनी रहे लगातार पेट दर्द हो मल में खून आए अचानक वजन कम होने लगे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही खानपान पर्याप्त पानी नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश लोग पाचन संबंधी समस्याओं से राहत पा सकते हैं और हर सुबह बेहतर महसूस कर सकते हैं।

  • Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड

    Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, पसीना और शरीर में पानी की कमी जैसी कई परेशानियां लेकर आता है। ऐसे समय में सिर्फ ज्यादा पानी पीना ही काफी नहीं होता, बल्कि खानपान में भी ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना जरूरी होता है जो शरीर को ठंडक दें और जरूरी पोषक तत्व भी पहुंचाएं। मौसमी फल और प्राकृतिक पेय पदार्थ शरीर में पानी की कमी को दूर करने के साथ-साथ ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करते हैं। अगर आप भी गर्मी में खुद को फिट और तरोताजा रखना चाहते हैं तो अपनी डाइट में कुछ खास चीजों को जरूर शामिल करें।

    तरबूज बनाए शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड
    गर्मी के मौसम में तरबूज सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में से एक है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके अलावा तरबूज में विटामिन A, विटामिन C और लाइकोपीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। दोपहर या शाम के समय ताजा तरबूज खाना शरीर को ठंडक देने का आसान और स्वादिष्ट तरीका है।

    खरबूजा देगा पोषण और ताजगी
    खरबूजा भी गर्मियों का एक बेहतरीन फल है। इसमें पानी के साथ फाइबर, पोटैशियम और कई जरूरी विटामिन मौजूद होते हैं। इसे खाने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बेहतर बना रहता है और पाचन भी ठीक रहता है। अगर आपको गर्मी में थकान या कमजोरी महसूस होती है तो नाश्ते या शाम के स्नैक में खरबूजा शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

    खीरा रखें रोज की डाइट का हिस्सा
    खीरा गर्मी के मौसम में सबसे आसान और हेल्दी विकल्पों में से एक है। इसमें भरपूर मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और पेट भी हल्का महसूस करता है। सलाद के रूप में या हल्के मसालों के साथ खीरा खाने से पाचन बेहतर रहता है और गर्मी की वजह से होने वाली बेचैनी भी कम महसूस होती है। नियमित रूप से खीरा खाने से त्वचा में भी प्राकृतिक निखार बना रहता है।

    आम का स्वाद लें, लेकिन सीमित मात्रा में
    गर्मी का मौसम आम के बिना अधूरा माना जाता है। आम में विटामिन A, विटामिन C और कई जरूरी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। हालांकि इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर रहता है। दिन में एक मध्यम आकार का आम या सीमित मात्रा में आम खाना पर्याप्त माना जाता है। खासतौर पर मधुमेह या वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों को डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही आम का सेवन करना चाहिए।

    नारियल पानी से मिलेगी प्राकृतिक ऊर्जा
    गर्मी में शरीर से पसीने के साथ कई जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में नारियल पानी एक प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। तेज धूप से लौटने के बाद या सुबह के समय नारियल पानी पीना शरीर को ताजगी और ऊर्जा देने का आसान तरीका है।

    गर्मी में रखें खानपान का खास ध्यान
    गर्मी के मौसम में सही खानपान अपनाने से कई मौसमी समस्याओं से बचा जा सकता है। अपनी रोज की डाइट में तरबूज, खरबूजा, खीरा, सीमित मात्रा में आम और नारियल पानी शामिल करके आप शरीर को हाइड्रेटेड, ऊर्जावान और स्वस्थ रख सकते हैं। इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजों से बचें और ताजे मौसमी फलों को प्राथमिकता दें। छोटी-छोटी अच्छी आदतें गर्मियों को आरामदायक और सेहतमंद बना सकती हैं।

  • बारिश के मौसम में ये फल जरूर करें अपनी डाइट में शामिल संक्रमण से बचेंगे और शरीर रहेगा ऊर्जा से भरपूर

    बारिश के मौसम में ये फल जरूर करें अपनी डाइट में शामिल संक्रमण से बचेंगे और शरीर रहेगा ऊर्जा से भरपूर


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है। इस दौरान नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं जिससे सर्दी जुकाम वायरल बुखार और पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय संतुलित आहार और सही फलों का सेवन शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पोषण विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि मानसून के दौरान ऐसे फल खाएं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाए रखें।

    सेब बरसात के मौसम में सबसे सुरक्षित और लाभकारी फलों में गिना जाता है। इसमें फाइबर एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं जो पाचन को बेहतर बनाने के साथ शरीर को ऊर्जा भी देते हैं। रोज एक सेब का सेवन शरीर को लंबे समय तक सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।

    अनार भी मानसून के लिए बेहतरीन फल माना जाता है। इसमें आयरन विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं जो खून की कमी दूर करने के साथ इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक होते हैं। अनार का नियमित सेवन शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है।

    नाशपाती भी इस मौसम में अच्छा विकल्प है। इसमें पानी और फाइबर की मात्रा अधिक होती है जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है। यह कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी मददगार मानी जाती है।

    पपीता भी मानसून के दौरान खाने योग्य फलों में शामिल है। इसमें मौजूद पपेन एंजाइम भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है। इसके अलावा यह विटामिन ए और विटामिन सी का अच्छा स्रोत है जो त्वचा और आंखों के साथ इम्युनिटी के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

    केला भी इस मौसम में ऊर्जा देने वाला फल है। इसमें पोटैशियम और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में होते हैं जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं। यदि बरसात के दिनों में कमजोरी महसूस हो रही हो तो केला एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

    जामुन और आलूबुखारा जैसे मौसमी फल भी सीमित मात्रा में खाए जा सकते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन भरपूर होते हैं जो शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। हालांकि इन फलों को खाने से पहले अच्छी तरह साफ पानी से धोना बेहद जरूरी है।

    बरसात के मौसम में कटे हुए फल लंबे समय तक खुले में नहीं रखने चाहिए। सड़क किनारे बिकने वाले पहले से कटे फल खाने से बचना चाहिए क्योंकि उनमें संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। फल हमेशा ताजे खरीदें और घर लाकर अच्छी तरह धोकर ही सेवन करें।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इस मौसम में अत्यधिक खट्टे या बहुत ज्यादा पके हुए फलों का सेवन सीमित मात्रा में करें यदि आपको पेट की कोई समस्या रहती है। जिन लोगों को मधुमेह या अन्य गंभीर बीमारी है उन्हें अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेकर ही फलों का चुनाव करना चाहिए।

    बरसात के दिनों में सही फल सही मात्रा में और स्वच्छ तरीके से खाने की आदत न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है बल्कि मौसम बदलने के कारण होने वाली कई बीमारियों से भी बचाव करने में मदद करती है। यदि संतुलित आहार के साथ पर्याप्त पानी और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए तो मानसून का मौसम पूरी तरह स्वस्थ और आनंददायक बनाया जा सकता है।