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  • डाइट कम करने के बाद भी नहीं रुक रहा वजन कहीं आप रोजाना ये गलतियां तो नहीं कर रहे

    डाइट कम करने के बाद भी नहीं रुक रहा वजन कहीं आप रोजाना ये गलतियां तो नहीं कर रहे


    नई दिल्ली। वजन कम करने की कोशिश करने वाले कई लोगों की शिकायत होती है कि वे पहले की तुलना में काफी कम खाना खा रहे हैं फिर भी वजन घटने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अक्सर लोग सिर्फ अपनी प्लेट में मौजूद रोटी चावल या खाने की मात्रा को देखते हैं जबकि वजन बढ़ने की पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा बड़ी होती है। पूरे दिन में खाई जाने वाली छोटी छोटी चीजें शारीरिक गतिविधि नींद तनाव और कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी वजन पर असर डाल सकती हैं। इसलिए अगर कम खाने के बावजूद वजन बढ़ रहा है तो अपनी पूरी दिनचर्या पर नजर डालना जरूरी है।

    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि केवल दो रोटी खाना कम भोजन करने का प्रमाण नहीं है। रोटी के साथ सब्जी में इस्तेमाल होने वाला तेल दाल में घी दही अचार मिठाई और दूसरी चीजें भी दिनभर की कुल कैलोरी बढ़ा सकती हैं। इसी तरह भोजन की मात्रा कम करने के बावजूद अगर चाय में ज्यादा चीनी बिस्किट नमकीन जूस सॉफ्ट ड्रिंक या दूसरे छोटे स्नैक्स बार बार लिए जा रहे हैं तो इनकी कुल कैलोरी वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। इसलिए कुछ दिनों तक अपनी पूरी डाइट को नोट करना उपयोगी हो सकता है। इससे यह पता चल सकता है कि वास्तव में पूरे दिन में क्या और कितना खाया जा रहा है।

    दूसरी बड़ी वजह शारीरिक गतिविधि की कमी हो सकती है। अगर व्यक्ति कम खाना खाता है लेकिन दिनभर ऑफिस की कुर्सी पर बैठा रहता है मोबाइल या टीवी देखता है और पैदल चलना या व्यायाम बहुत कम करता है तो शरीर की कैलोरी खर्च करने की मात्रा भी कम हो सकती है। वजन को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित भोजन के साथ रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। छोटी दूरी पर पैदल चलना सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और नियमित व्यायाम जैसी आदतें दिनचर्या में शामिल की जा सकती हैं।

    नींद की कमी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार कम सोने से भूख और पेट भरे होने से जुड़े संकेत प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण कुछ लोगों में ज्यादा खाने की इच्छा और मीठे या अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की क्रेविंग बढ़ सकती है। इसलिए वजन नियंत्रित करने की कोशिश में केवल डाइट पर ध्यान देने के बजाय पर्याप्त और नियमित नींद लेना भी जरूरी है।

    लगातार तनाव भी वजन बढ़ने की वजह बन सकता है। तनाव की स्थिति में कई लोगों को मीठा तला हुआ या जंक फूड खाने की इच्छा अधिक होती है। अगर तनाव के दौरान बार बार कुछ खाने की आदत बन जाए तो इसका असर धीरे धीरे वजन पर दिखाई दे सकता है। ऐसे में तनाव को नियंत्रित करने के लिए नियमित दिनचर्या पर्याप्त नींद शारीरिक गतिविधि और अपनी पसंद की आरामदायक गतिविधियों को समय देना मददगार हो सकता है।

    इसके अलावा कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी वजन बढ़ने से जुड़ी हो सकती हैं। अगर वजन बिना किसी स्पष्ट कारण के बढ़ रहा है और साथ में लगातार थकान ठंड ज्यादा लगना कब्ज त्वचा का रूखा होना या बाल झड़ने जैसी समस्याएं भी हैं तो थायरॉयड की जांच के लिए डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। इसी तरह अगर वजन लगातार बढ़ रहा है या इसके साथ सूजन सांस फूलना अथवा दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। वजन कम करने के लिए भोजन बहुत कम कर देना हमेशा सही तरीका नहीं होता। संतुलित डाइट पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है।

  • केला कब खाएं और किस तरह? नाश्ते से लेकर रात तक जानिए सही समय, फायदे और जरूरी सावधानियां

    केला कब खाएं और किस तरह? नाश्ते से लेकर रात तक जानिए सही समय, फायदे और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। केला ऐसा फल है जो स्वादिष्ट होने के साथ आसानी से उपलब्ध भी होता है। यही वजह है कि इसे लोग नाश्ते से लेकर वर्कआउट के पहले और बाद तक अलग अलग समय पर खाते हैं। लेकिन केला खाने के सही समय को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि सुबह खाली पेट केला खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद है जबकि कुछ लोग रात में केला खाने से बचने की सलाह देते हैं। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो केले को खाने का कोई एक तय समय नहीं है। इसे व्यक्ति अपनी दिनचर्या और शरीर की जरूरत के अनुसार खा सकता है।

    केला कार्बोहाइड्रेट फाइबर पोटैशियम और विटामिन बी6 जैसे जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है और यही कारण है कि इसे वर्कआउट से पहले या बाद में भी स्नैक के तौर पर खाया जाता है। पोटैशियम मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के साथ शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं विटामिन बी6 शरीर की कई जरूरी जैविक प्रक्रियाओं में मदद करता है। हालांकि केवल केला खाने से शरीर की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होतीं इसलिए इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना बेहतर माना जाता है।

    सुबह खाली पेट केला खाने की बात करें तो अगर किसी व्यक्ति को इससे पेट में परेशानी नहीं होती है तो वह इसे नाश्ते में शामिल कर सकता है। लेकिन कुछ लोगों को खाली पेट फल खाने के बाद पेट फूलने भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है। ऐसे लोगों के लिए केले को अकेले खाने के बजाय ओट्स दही या किसी अन्य संतुलित नाश्ते के साथ लेना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे भोजन में दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी शामिल हो जाते हैं।

    केला और दूध का शेक या स्मूदी भी काफी लोकप्रिय है। केला शरीर को कार्बोहाइड्रेट देता है जबकि दूध से प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व मिल सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को दूध और केला दोनों आसानी से पचते हैं तो यह संयोजन सामान्य डाइट का हिस्सा हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को दूध में मौजूद लैक्टोज से परेशानी होती है उन्हें गैस या पेट फूलने जैसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में परेशानी का कारण केवल केला मानना सही नहीं होगा।

    अब सवाल आता है कि क्या रात में केला खाना नुकसानदायक है। सामान्य तौर पर रात में केला खाने पर कोई सार्वभौमिक रोक नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को रात में केला खाने से पेट भारी या असहज महसूस नहीं होता तो वह इसे खा सकता है। लेकिन अगर सोने से पहले केला खाने के बाद पाचन संबंधी परेशानी महसूस होती है तो इसे दिन के समय लेना बेहतर रहेगा।

    कुछ लोगों को केला खाते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए। डायबिटीज वाले लोगों को केले की मात्रा और अपनी पूरी डाइट का ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि इसमें प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं। वहीं किडनी की बीमारी वाले लोगों को पोटैशियम की मात्रा को लेकर डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेनी चाहिए। कुल मिलाकर केला किसी एक खास समय का फल नहीं है। अपनी पाचन क्षमता और जरूरत के अनुसार इसे नाश्ते वर्कआउट के आसपास या दिन के किसी अन्य समय लिया जा सकता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए केले के साथ दूसरे फलों सब्जियों साबुत अनाज दाल और प्रोटीन स्रोतों को भी डाइट में शामिल करना जरूरी है।

  • फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर

    फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना अनियमित खानपान कम नींद और लगातार तनाव जैसी आदतें धीरे धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। स्वस्थ रहने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ अच्छी आदतों को शामिल करना ज्यादा जरूरी है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए।

    सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। भोजन में अलग अलग तरह की सब्जियां फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। भोजन की मात्रा और समय का भी ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या बार बार जरूरत से ज्यादा खाने की आदत से बचना चाहिए।

    शरीर को स्वस्थ रखने में पानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। गर्मी या अधिक शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पानी की जरूरत और बढ़ सकती है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना स्ट्रेचिंग करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। अगर आपका काम लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर करने वाला है तो बीच बीच में उठकर थोड़ा चलना भी उपयोगी आदत हो सकती है। किसी नई या कठिन एक्सरसाइज की शुरुआत धीरे धीरे करना बेहतर रहता है।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को आराम देने के साथ मानसिक ताजगी बनाए रखने में मदद करती है। रात में देर तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने की आदत कम करने और सोने का नियमित समय तय करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है लेकिन लगातार नींद की कमी को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। लगातार तनाव महसूस होने पर काम के बीच आराम लेना परिवार और दोस्तों से बातचीत करना संगीत पढ़ने या पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करे तो विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

    इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर आंखों और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। किसी बीमारी के लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की मेहनत से नहीं बल्कि रोज की छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश और समय समय पर स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • हेल्दी कुकिंग का सीक्रेट कौन सा तेल है सबसे फायदेमंद, जानिए नारियल एवोकाडो और सामान्य तेलों का पूरा सच

    हेल्दी कुकिंग का सीक्रेट कौन सा तेल है सबसे फायदेमंद, जानिए नारियल एवोकाडो और सामान्य तेलों का पूरा सच


    नई दिल्ली । आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की चाहत रखने वाले लोग सिर्फ खाने पर ही नहीं बल्कि खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेल पर भी खास ध्यान देने लगे हैं। सोशल मीडिया और फिटनेस ट्रेंड्स के कारण नारियल ऑयल और एवोकाडो ऑयल को सुपर हेल्दी विकल्प के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ये तेल वास्तव में सामान्य कुकिंग ऑयल से बेहतर हैं या फिर यह केवल एक नया ट्रेंड है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक तेल को हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा नहीं कहा जा सकता क्योंकि हर तेल की अपनी अलग पोषण संरचना और उपयोगिता होती है।

    नारियल तेल लंबे समय से भारतीय रसोई का हिस्सा रहा है। इसमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है जिससे यह तेज आंच पर भी स्थिर रहता है और जल्दी खराब नहीं होता। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि नारियल तेल अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल को बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि जिन लोगों का खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल पहले से अधिक है या जिन्हें हृदय रोग का खतरा है उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। इसलिए इसे पूरी तरह स्वास्थ्यवर्धक मानकर अधिक मात्रा में उपयोग करना सही नहीं होगा।

    दूसरी ओर एवोकाडो ऑयल को दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ई और कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। यह सलाद ड्रेसिंग हल्की कुकिंग और मध्यम से तेज आंच पर खाना बनाने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। हालांकि भारतीय बाजार में इसकी कीमत सामान्य तेलों की तुलना में काफी अधिक होती है इसलिए हर परिवार के लिए इसका नियमित उपयोग आसान नहीं है।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि सरसों मूंगफली तिल सूरजमुखी सोयाबीन और राइस ब्रान जैसे पारंपरिक कुकिंग ऑयल भी किसी तरह से कम नहीं हैं। यदि इनका संतुलित मात्रा में उपयोग किया जाए तो ये शरीर को आवश्यक फैटी एसिड और पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। कई पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबे समय तक केवल एक ही प्रकार का तेल इस्तेमाल करने के बजाय समय समय पर अलग अलग हेल्दी तेलों का संतुलित उपयोग करना बेहतर रहता है। इससे शरीर को विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं।

    तेल का चुनाव जितना महत्वपूर्ण है उससे कहीं ज्यादा जरूरी उसकी मात्रा पर नियंत्रण रखना है। चाहे नारियल तेल हो एवोकाडो ऑयल हो या कोई भी सामान्य कुकिंग ऑयल जरूरत से ज्यादा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके साथ ही एक ही तेल को बार बार गर्म करके इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे हानिकारक तत्व बनने लगते हैं जो स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं।

    यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं तो अपनी जरूरत बजट और खानपान के अनुसार अलग अलग हेल्दी तेलों का संतुलित उपयोग कर सकते हैं। वहीं यदि आपको हृदय रोग हाई कोलेस्ट्रॉल डायबिटीज या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं तो तेल बदलने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लें। आखिरकार सबसे अच्छा तेल वही है जो आपकी सेहत जीवनशैली और भोजन की जरूरतों के अनुसार सही मात्रा में इस्तेमाल किया जाए।

  • हर सुबह पेट रहेगा पूरी तरह साफ डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड पाचन होगा मजबूत और दिनभर रहेंगे ऊर्जावान

    हर सुबह पेट रहेगा पूरी तरह साफ डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड पाचन होगा मजबूत और दिनभर रहेंगे ऊर्जावान


    नई दिल्ली । सुबह पेट साफ न होना आज के समय में बड़ी संख्या में लोगों की आम समस्या बन गई है। इसके कारण दिनभर भारीपन गैस पेट फूलना और थकान जैसी परेशानियां बनी रहती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय यदि खानपान और जीवनशैली में सही बदलाव किए जाएं तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। संतुलित आहार पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार कब्ज या सुबह पेट साफ न होने का सबसे बड़ा कारण भोजन में फाइबर की कमी है। फाइबर आंतों की गति को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है और मल को आसानी से बाहर निकालने में सहायक होता है। इसके अलावा पर्याप्त पानी न पीना लंबे समय तक बैठे रहना शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित खानपान भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। इसलिए सबसे पहले इन कारणों को समझना और उन्हें सुधारना जरूरी है।

    सुबह उठने के बाद एक से दो गिलास गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को सक्रिय करने का आसान तरीका माना जाता है। इससे आंतों की गतिविधि बढ़ सकती है और मल त्याग में सहायता मिल सकती है। कई विशेषज्ञ रात में मुनक्का या सूखे अंजीर को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाने की सलाह भी देते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

    पपीता भी पाचन के लिए लाभकारी फलों में माना जाता है। इसमें फाइबर के साथ पपेन नामक एंजाइम पाया जाता है जो भोजन को पचाने में सहायता करता है। इसके अलावा नाश्ते में ओट्स या गेहूं का दलिया शामिल करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि इनमें घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक मेथी और बथुआ को नियमित भोजन का हिस्सा बनाना भी फायदेमंद माना जाता है। इनमें फाइबर के साथ पानी की मात्रा भी अच्छी होती है जिससे कब्ज की समस्या कम हो सकती है। दोपहर के भोजन के साथ दही या छाछ का सेवन भी लाभकारी माना जाता है क्योंकि इनमें मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया आंतों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं और पाचन प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं।

    सिर्फ खानपान ही नहीं बल्कि नियमित शारीरिक गतिविधि भी बेहद जरूरी है। रोजाना कम से कम तीस मिनट पैदल चलना हल्का व्यायाम करना या योग का अभ्यास करना आंतों की प्राकृतिक गति को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही समय पर भोजन करना और पर्याप्त नींद लेना भी पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    हालांकि यदि कब्ज की समस्या लंबे समय तक बनी रहे लगातार पेट दर्द हो मल में खून आए अचानक वजन कम होने लगे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही खानपान पर्याप्त पानी नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश लोग पाचन संबंधी समस्याओं से राहत पा सकते हैं और हर सुबह बेहतर महसूस कर सकते हैं।

  • Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड

    Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, पसीना और शरीर में पानी की कमी जैसी कई परेशानियां लेकर आता है। ऐसे समय में सिर्फ ज्यादा पानी पीना ही काफी नहीं होता, बल्कि खानपान में भी ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना जरूरी होता है जो शरीर को ठंडक दें और जरूरी पोषक तत्व भी पहुंचाएं। मौसमी फल और प्राकृतिक पेय पदार्थ शरीर में पानी की कमी को दूर करने के साथ-साथ ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करते हैं। अगर आप भी गर्मी में खुद को फिट और तरोताजा रखना चाहते हैं तो अपनी डाइट में कुछ खास चीजों को जरूर शामिल करें।

    तरबूज बनाए शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड
    गर्मी के मौसम में तरबूज सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में से एक है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके अलावा तरबूज में विटामिन A, विटामिन C और लाइकोपीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। दोपहर या शाम के समय ताजा तरबूज खाना शरीर को ठंडक देने का आसान और स्वादिष्ट तरीका है।

    खरबूजा देगा पोषण और ताजगी
    खरबूजा भी गर्मियों का एक बेहतरीन फल है। इसमें पानी के साथ फाइबर, पोटैशियम और कई जरूरी विटामिन मौजूद होते हैं। इसे खाने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बेहतर बना रहता है और पाचन भी ठीक रहता है। अगर आपको गर्मी में थकान या कमजोरी महसूस होती है तो नाश्ते या शाम के स्नैक में खरबूजा शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

    खीरा रखें रोज की डाइट का हिस्सा
    खीरा गर्मी के मौसम में सबसे आसान और हेल्दी विकल्पों में से एक है। इसमें भरपूर मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और पेट भी हल्का महसूस करता है। सलाद के रूप में या हल्के मसालों के साथ खीरा खाने से पाचन बेहतर रहता है और गर्मी की वजह से होने वाली बेचैनी भी कम महसूस होती है। नियमित रूप से खीरा खाने से त्वचा में भी प्राकृतिक निखार बना रहता है।

    आम का स्वाद लें, लेकिन सीमित मात्रा में
    गर्मी का मौसम आम के बिना अधूरा माना जाता है। आम में विटामिन A, विटामिन C और कई जरूरी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। हालांकि इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर रहता है। दिन में एक मध्यम आकार का आम या सीमित मात्रा में आम खाना पर्याप्त माना जाता है। खासतौर पर मधुमेह या वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों को डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही आम का सेवन करना चाहिए।

    नारियल पानी से मिलेगी प्राकृतिक ऊर्जा
    गर्मी में शरीर से पसीने के साथ कई जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में नारियल पानी एक प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। तेज धूप से लौटने के बाद या सुबह के समय नारियल पानी पीना शरीर को ताजगी और ऊर्जा देने का आसान तरीका है।

    गर्मी में रखें खानपान का खास ध्यान
    गर्मी के मौसम में सही खानपान अपनाने से कई मौसमी समस्याओं से बचा जा सकता है। अपनी रोज की डाइट में तरबूज, खरबूजा, खीरा, सीमित मात्रा में आम और नारियल पानी शामिल करके आप शरीर को हाइड्रेटेड, ऊर्जावान और स्वस्थ रख सकते हैं। इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजों से बचें और ताजे मौसमी फलों को प्राथमिकता दें। छोटी-छोटी अच्छी आदतें गर्मियों को आरामदायक और सेहतमंद बना सकती हैं।

  • बारिश के मौसम में ये फल जरूर करें अपनी डाइट में शामिल संक्रमण से बचेंगे और शरीर रहेगा ऊर्जा से भरपूर

    बारिश के मौसम में ये फल जरूर करें अपनी डाइट में शामिल संक्रमण से बचेंगे और शरीर रहेगा ऊर्जा से भरपूर


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है। इस दौरान नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं जिससे सर्दी जुकाम वायरल बुखार और पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय संतुलित आहार और सही फलों का सेवन शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पोषण विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि मानसून के दौरान ऐसे फल खाएं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाए रखें।

    सेब बरसात के मौसम में सबसे सुरक्षित और लाभकारी फलों में गिना जाता है। इसमें फाइबर एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं जो पाचन को बेहतर बनाने के साथ शरीर को ऊर्जा भी देते हैं। रोज एक सेब का सेवन शरीर को लंबे समय तक सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।

    अनार भी मानसून के लिए बेहतरीन फल माना जाता है। इसमें आयरन विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं जो खून की कमी दूर करने के साथ इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक होते हैं। अनार का नियमित सेवन शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है।

    नाशपाती भी इस मौसम में अच्छा विकल्प है। इसमें पानी और फाइबर की मात्रा अधिक होती है जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है। यह कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी मददगार मानी जाती है।

    पपीता भी मानसून के दौरान खाने योग्य फलों में शामिल है। इसमें मौजूद पपेन एंजाइम भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है। इसके अलावा यह विटामिन ए और विटामिन सी का अच्छा स्रोत है जो त्वचा और आंखों के साथ इम्युनिटी के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

    केला भी इस मौसम में ऊर्जा देने वाला फल है। इसमें पोटैशियम और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में होते हैं जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं। यदि बरसात के दिनों में कमजोरी महसूस हो रही हो तो केला एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

    जामुन और आलूबुखारा जैसे मौसमी फल भी सीमित मात्रा में खाए जा सकते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन भरपूर होते हैं जो शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। हालांकि इन फलों को खाने से पहले अच्छी तरह साफ पानी से धोना बेहद जरूरी है।

    बरसात के मौसम में कटे हुए फल लंबे समय तक खुले में नहीं रखने चाहिए। सड़क किनारे बिकने वाले पहले से कटे फल खाने से बचना चाहिए क्योंकि उनमें संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। फल हमेशा ताजे खरीदें और घर लाकर अच्छी तरह धोकर ही सेवन करें।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इस मौसम में अत्यधिक खट्टे या बहुत ज्यादा पके हुए फलों का सेवन सीमित मात्रा में करें यदि आपको पेट की कोई समस्या रहती है। जिन लोगों को मधुमेह या अन्य गंभीर बीमारी है उन्हें अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेकर ही फलों का चुनाव करना चाहिए।

    बरसात के दिनों में सही फल सही मात्रा में और स्वच्छ तरीके से खाने की आदत न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है बल्कि मौसम बदलने के कारण होने वाली कई बीमारियों से भी बचाव करने में मदद करती है। यदि संतुलित आहार के साथ पर्याप्त पानी और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए तो मानसून का मौसम पूरी तरह स्वस्थ और आनंददायक बनाया जा सकता है।

  • मीठा खाने का भी होता है सही समय वरना बढ़ सकता है ब्लड शुगर और वजन का खतरा जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स

    मीठा खाने का भी होता है सही समय वरना बढ़ सकता है ब्लड शुगर और वजन का खतरा जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स


    नई दिल्ली । त्योहार हो जन्मदिन हो शादी का जश्न हो या फिर कोई छोटी सी खुशी भारत में हर खास मौके की शुरुआत मीठे से होती है। मिठाई हमारे खानपान और संस्कृति का अहम हिस्सा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि मीठा सिर्फ कितनी मात्रा में खाया जाए यह ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उसे किस समय खाया जाए यह भी आपकी सेहत पर बड़ा असर डालता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गलत समय पर मीठा खाने की आदत धीरे धीरे ब्लड शुगर बढ़ने वजन बढ़ने और भविष्य में डायबिटीज जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है।

    अक्सर लोग सुबह उठते ही चाय के साथ बिस्कुट मिठाई चॉकलेट या अन्य मीठी चीजें खा लेते हैं। कुछ लोग खाली पेट ही मीठे से दिन की शुरुआत करते हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह आदत शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। खाली पेट मीठा खाने पर उसमें मौजूद शुगर तेजी से खून में पहुंचती है जिससे ब्लड ग्लूकोज का स्तर अचानक बढ़ जाता है। इसके कुछ समय बाद शुगर तेजी से नीचे भी आ जाती है जिससे कमजोरी थकान और बार बार भूख लगने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि दिनभर मीठा खाने की इच्छा भी बढ़ जाती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि मीठा खाना ही है तो उसे मुख्य भोजन के बाद सीमित मात्रा में खाना ज्यादा बेहतर विकल्प माना जाता है। जब हम पहले दाल रोटी सब्जी चावल सलाद या अन्य पौष्टिक भोजन खाते हैं तब शरीर को फाइबर प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व मिल जाते हैं। ये तत्व मीठे में मौजूद चीनी को धीरे धीरे अवशोषित होने में मदद करते हैं जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और शरीर पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता। यही कारण है कि डॉक्टर भोजन के तुरंत बाद थोड़ी मात्रा में मिठाई खाने की सलाह देते हैं।

    दिन और रात के समय का अंतर भी इस मामले में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। रात में शरीर आराम की अवस्था में पहुंचने लगता है और ऊर्जा की जरूरत भी कम हो जाती है। ऐसे समय अधिक मात्रा में मीठा खाने से अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जमा होने लगती है जिससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। लगातार रात में मीठा खाने की आदत भविष्य में मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज जैसी समस्याओं की आशंका को भी बढ़ा सकती है।

    यदि मीठा खाना हो तो दोपहर के भोजन के बाद सीमित मात्रा में खाना अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है क्योंकि दिन के समय शरीर अधिक सक्रिय रहता है और अतिरिक्त ऊर्जा का उपयोग आसानी से कर लेता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि दिनभर मनचाहा मीठा खाया जाए। मात्रा पर नियंत्रण रखना हर स्थिति में जरूरी है।

    डॉक्टर यह भी कहते हैं कि केवल केक पेस्ट्री चॉकलेट या मीठे पेय पदार्थों के सहारे भूख मिटाना सही आदत नहीं है। इससे शरीर को आवश्यक विटामिन मिनरल्स और प्रोटीन नहीं मिल पाते। संतुलित भोजन के साथ ही मीठे का सेवन करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

    जिन लोगों को डायबिटीज प्री डायबिटीज मोटापा या ब्लड शुगर से जुड़ी कोई समस्या है उन्हें मीठा खाने से पहले अपने डॉक्टर या डाइट विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। सही समय सही मात्रा और संतुलित खानपान अपनाकर मीठे का आनंद भी लिया जा सकता है और स्वास्थ्य भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

  • स्वस्थ रहने का आसान मंत्र: घरेलू चीजें, संतुलित भोजन और अच्छी दिनचर्या से रखें खुद को फिट

    स्वस्थ रहने का आसान मंत्र: घरेलू चीजें, संतुलित भोजन और अच्छी दिनचर्या से रखें खुद को फिट


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में स्वस्थ रहना हर किसी की प्राथमिकता है। लेकिन तनाव, अनियमित दिनचर्या, जंक फूड और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कई लोग छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। अच्छी बात यह है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए हमेशा महंगी दवाइयों या सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती। यदि हम अपनी रोजमर्रा की आदतों में कुछ सकारात्मक बदलाव करें, तो लंबे समय तक शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

    दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें
    सुबह उठने के बाद एक या दो गिलास गुनगुना पानी पीने से शरीर हाइड्रेट होता है और पाचन तंत्र सक्रिय होने में मदद मिलती है। जिन लोगों को एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या रहती है, उन्हें केवल सादा गुनगुना पानी ही पीना चाहिए।

    घर का संतुलित भोजन है सबसे बड़ी दवा

    अच्छे स्वास्थ्य की नींव संतुलित और पौष्टिक भोजन है। अपने दैनिक आहार में हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज, दूध, दही, पनीर और अंकुरित अनाज शामिल करें। ये शरीर को आवश्यक विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और फाइबर प्रदान करते हैं।

    वहीं तला-भुना भोजन, जंक फूड, अत्यधिक मीठे और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें, क्योंकि इनका अधिक सेवन मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।

    रसोई की ये चीजें हैं सेहत की साथी

    भारतीय रसोई में कई ऐसी प्राकृतिक चीजें मौजूद हैं जो सामान्य स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती हैं।

    हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं।

    अदरक पाचन को बेहतर बनाने और गले की हल्की परेशानी में राहत देने में सहायक हो सकती है।

    सीमित मात्रा में लहसुन का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

    तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता को समर्थन देती है।

    जीरा, सौंफ और अजवाइन भोजन के बाद गैस और अपच जैसी समस्याओं में राहत पहुंचा सकते हैं।

    हालांकि, ये घरेलू उपाय सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं, लेकिन किसी गंभीर बीमारी का विकल्प नहीं हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।

    पर्याप्त पानी पीना न भूलें

    शरीर के लगभग सभी अंगों के सुचारु संचालन के लिए पर्याप्त पानी जरूरी है। सही मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है, त्वचा स्वस्थ रहती है और पाचन क्रिया भी बेहतर बनी रहती है।

    रोज करें योग और व्यायाम
    स्वस्थ रहने के लिए केवल अच्छा भोजन ही पर्याप्त नहीं है। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलना, योग, स्ट्रेचिंग या हल्का व्यायाम करना फायदेमंद होता है।

    योग और प्राणायाम शरीर को लचीला बनाने, तनाव कम करने, श्वसन क्षमता बढ़ाने और हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।

    अच्छी नींद भी है जरूरी

    स्वस्थ जीवन के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना आवश्यक है। पर्याप्त नींद शरीर की मरम्मत प्रक्रिया को बेहतर बनाती है, मानसिक एकाग्रता बढ़ाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है।

    मानसिक स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
    स्वस्थ जीवन केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन कुछ मिनट ध्यान, प्राणायाम या गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, सकारात्मक सोच रखना और तनाव को नियंत्रित करना मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।

    मौसमी फल और सब्जियां खाएं
    हर मौसम में मिलने वाले फल और सब्जियां शरीर की जरूरत के अनुसार पोषण प्रदान करते हैं। पपीता, सेब, अमरूद, संतरा, तरबूज, पालक, गाजर, चुकंदर, लौकी और तोरी जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन, मिनरल और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।

    चीनी और नमक का सीमित सेवन करें

    अधिक चीनी और नमक का सेवन उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए मीठे पेय पदार्थ, अधिक मिठाइयों और प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित रखें।

    धूप और साफ-सफाई का रखें ध्यान

    सुबह की हल्की धूप शरीर में विटामिन D बनने में मदद करती है, जो हड्डियों और मांसपेशियों के लिए जरूरी है। इसके साथ ही भोजन से पहले हाथ धोना, साफ पानी पीना और रसोई की स्वच्छता बनाए रखना संक्रमण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    छोटी आदतें, बड़ा बदलाव

    समय पर भोजन करना, भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाना, देर रात भारी भोजन से बचना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना तथा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना लंबे समय तक स्वस्थ रहने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि परिवार में मधुमेह, उच्च रक्तचाप या हृदय रोग का इतिहास है, तो नियमित मेडिकल चेकअप जरूर कराएं।
  • गुड़ और चीनी में कौन ज्यादा हेल्दी? जानिए शरीर पर दोनों का असर और एक्सपर्ट राय

    गुड़ और चीनी में कौन ज्यादा हेल्दी? जानिए शरीर पर दोनों का असर और एक्सपर्ट राय

    नई दिल्ली। मीठा खाने की चाहत हर किसी में होती है, लेकिन जब बात सेहत की आती है तो सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि चीनी और गुड़ में से कौन ज्यादा बेहतर विकल्प है। दोनों ही खाने में मिठास जोड़ते हैं, लेकिन शरीर पर इनका असर अलग-अलग होता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि रोजमर्रा की जिंदगी में किसका सेवन ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है।

    चीनी को आमतौर पर रिफाइंड प्रक्रिया से तैयार किया जाता है, जिसमें इसके प्राकृतिक पोषक तत्व लगभग खत्म हो जाते हैं और केवल शुद्ध कैलोरी बचती है। यही कारण है कि इसे खाली कैलोरी का स्रोत भी कहा जाता है। दूसरी ओर गुड़ कम प्रोसेस्ड होता है और इसमें कुछ प्राकृतिक खनिज जैसे आयरन, पोटैशियम और कैल्शियम मौजूद रहते हैं, जो शरीर के लिए कुछ हद तक लाभकारी माने जाते हैं।

    गुड़ को पारंपरिक रूप से एक प्राकृतिक मिठास के रूप में देखा जाता है। कई लोग इसे सर्दी-जुकाम में राहत पाने, पाचन सुधारने और शरीर को ऊर्जा देने के लिए उपयोग करते हैं। भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में गुड़ खाने की परंपरा भी इसलिए रही है क्योंकि यह डाइजेशन को बेहतर करने में मदद करता है। इसके अलावा महिलाओं में आयरन की कमी को पूरा करने में भी इसे उपयोगी माना जाता है।

    हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि गुड़ पूरी तरह से बिना नुकसान वाला विकल्प है। किसी भी चीज का अत्यधिक सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। गुड़ में भी प्राकृतिक शुगर मौजूद होती है, जो अधिक मात्रा में लेने पर कैलोरी बढ़ा सकती है और वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। इसलिए संतुलन बेहद जरूरी है।

    वहीं दूसरी ओर सफेद चीनी का अधिक सेवन कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हुआ है। यह शरीर में ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाती है, जिससे तुरंत ऊर्जा तो मिलती है लेकिन वह जल्दी खत्म भी हो जाती है। लंबे समय तक अधिक चीनी का सेवन मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और दांतों की समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा यह त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी तेज कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार अगर मीठे का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए तो गुड़ चीनी की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकता है। रोजाना लगभग 10 से 15 ग्राम गुड़ को सुरक्षित मात्रा माना जाता है, लेकिन यह व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर भी निर्भर करता है। सुबह गुनगुने पानी के साथ थोड़ा गुड़ लेना या चाय में चीनी की जगह सीमित मात्रा में गुड़ का उपयोग करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

    डायबिटीज से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि गुड़ और चीनी दोनों में प्राकृतिक शुगर होती है जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में किसी भी मीठे पदार्थ का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।