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  • गर्मियों में फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ा, ये 13 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

    गर्मियों में फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ा, ये 13 गलतियां पड़ सकती हैं भारी


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम जहां राहत और ठंडे फलों का आनंद लेकर आता है वहीं यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है तेज गर्मी और बढ़ता तापमान खाने को जल्दी खराब कर देता है जिससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि केवल बाहर का खाना ही नुकसानदायक होता है लेकिन सच यह है कि घर का खाना भी अगर सही तरीके से न संभाला जाए तो वह बीमारी का कारण बन सकता है

    गर्मी के मौसम में बैक्टीरिया और जर्म्स तेजी से बढ़ते हैं यही कारण है कि थोड़ी सी लापरवाही भी उल्टी दस्त पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है कई बार यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है और अस्पताल तक जाने की नौबत आ जाती है इसलिए जरूरी है कि खाने से जुड़ी छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा जाए

    सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं वह है कटे हुए फल को लंबे समय तक रखना कई लोग आधा फल खाकर बाकी फ्रिज में रख देते हैं लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है कटे हुए फल में जल्दी बैक्टीरिया पनपने लगते हैं इसलिए फलों को हमेशा ताजा काटकर तुरंत खाना चाहिए

    इसी तरह फल और सब्जियों को काटते समय साफ चाकू और साफ हाथों का इस्तेमाल करना जरूरी है गंदे हाथ या गंदे बर्तन से बैक्टीरिया सीधे खाने में पहुंच जाते हैं कटे हुए फलों को नल के पानी से धोना भी सही नहीं माना जाता क्योंकि इससे जर्म्स और बढ़ सकते हैं

    गर्मी में एक और बड़ी गलती है खाना लंबे समय तक बाहर रखना पका हुआ खाना दो घंटे से ज्यादा बाहर रखने पर खराब होने लगता है इसलिए इसे जल्दी फ्रिज में रखना चाहिए लेकिन ध्यान रहे कि एक बार फ्रिज से निकालकर गर्म किया गया खाना दोबारा फ्रिज में नहीं रखना चाहिए इससे उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं

    बासी खाना खाना भी फूड प्वाइजनिंग का बड़ा कारण है कई लोग सुबह का बना खाना रात में या रात का खाना अगले दिन खा लेते हैं जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है बार बार खाना गर्म करना भी नुकसानदायक होता है क्योंकि इससे उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है

    बाजार में खुले में बिकने वाले खाने से भी बचना चाहिए खासकर वह खाना जो लंबे समय से रखा हो ऐसे खाने में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है इसके अलावा अगर खाने में किसी तरह की गंध रंग या स्वाद में बदलाव महसूस हो तो उसे तुरंत फेंक देना ही बेहतर होता है

    गर्मियों में सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है कि हमेशा ताजा और साफ खाना खाएं हाथों की सफाई का ध्यान रखें और खाने को सही तरीके से स्टोर करें छोटी छोटी सावधानियां अपनाकर बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है यह मौसम सतर्क रहने का है ताकि आप और आपका परिवार स्वस्थ रह सके

  • क्या आप भी खा रहे हैं स्टिकर वाला फल? सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है यह छोटा सा लापरवाही

    क्या आप भी खा रहे हैं स्टिकर वाला फल? सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है यह छोटा सा लापरवाही


    नई दिल्ली । बाजार से फल खरीदते समय अक्सर हम उनकी चमक और उन पर लगे आकर्षक स्टिकर्स को देखकर उनकी क्वालिटी का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन यही छोटे-छोटे स्टिकर्स आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। Food Safety and Standards Authority of India ने हाल ही में इसको लेकर चेतावनी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    विशेषज्ञों के अनुसार फलों पर लगे इन स्टिकर्स को चिपकाने के लिए जिस गोंद का इस्तेमाल किया जाता है वह खाने योग्य नहीं होता। जब हम फल खाते समय केवल स्टिकर हटाकर उसे सीधे खा लेते हैं तो कई बार उस गोंद का हिस्सा फल पर ही रह जाता है और अनजाने में हमारे शरीर के अंदर चला जाता है। यह धीरे-धीरे शरीर में केमिकल जमा कर सकता है और लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    स्टिकर के नीचे का हिस्सा और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इस जगह पर धूल मिट्टी और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं जो सामान्य पानी से धोने पर पूरी तरह साफ नहीं होते। इसके अलावा फलों पर छिड़के गए पेस्टिसाइड भी स्टिकर के नीचे फंस जाते हैं और वही हिस्सा सबसे ज्यादा जहरीला बन सकता है।

    कई लोग यह मानते हैं कि स्टिकर लगे फल बेहतर क्वालिटी या एक्सपोर्ट ग्रेड के होते हैं लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। दरअसल इन स्टिकर्स का उपयोग केवल फल की पहचान और बिलिंग के लिए किया जाता है जिसे PLU कोड कहा जाता है। कई बार बाजार में साधारण फलों पर भी नकली स्टिकर्स लगाकर उन्हें महंगा और प्रीमियम दिखाया जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खासकर बच्चों के लिए यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि उनका पाचन तंत्र संवेदनशील होता है। लगातार ऐसे केमिकल्स के संपर्क में आने से इम्युनिटी पर भी असर पड़ सकता है।

    इससे बचने के लिए कुछ आसान सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले केवल स्टिकर हटाना पर्याप्त नहीं है बल्कि जिस जगह स्टिकर लगा था उसे हल्का सा काटकर निकाल देना चाहिए। इसके अलावा फलों को हमेशा बहते पानी में अच्छी तरह रगड़कर धोना चाहिए ताकि उनकी सतह पर मौजूद गंदगी और केमिकल्स हट सकें।

    जहां तक संभव हो सेब या नाशपाती जैसे फलों का छिलका उतारकर खाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। सख्त फलों को साफ करने के लिए मुलायम ब्रश का इस्तेमाल भी किया जा सकता है ताकि उनके कोनों में फंसी गंदगी बाहर निकल सके। हालांकि फलों को साफ करने के लिए साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे और अधिक नुकसान हो सकता है।

    यह छोटी-सी सावधानी आपको और आपके परिवार को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचा सकती है। इसलिए अगली बार जब भी फल खरीदें तो केवल उनकी चमक नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा का भी ध्यान जरूर रखें।

  • Sprouts Health Tips: हर किसी को नहीं सूट करता अंकुरित आहार, ये लोग जरूर बरतें सावधानी

    Sprouts Health Tips: हर किसी को नहीं सूट करता अंकुरित आहार, ये लोग जरूर बरतें सावधानी


    नई दिल्ली:अंकुरित अनाज या स्प्राउट्स आज के समय में सेहत के प्रति जागरूक लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर यह आहार शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मांसपेशियों और कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद करता है। लेकिन क्या यह सभी के लिए समान रूप से फायदेमंद है? आयुर्वेद के अनुसार इसका जवाब है नहीं।

    आयुर्वेद में अंकुरित आहार को संतुलित तरीके से और सही व्यक्ति के लिए ही उपयुक्त माना गया है। अंकुरित आहार पचने में थोड़ा भारी होता है और अगर इसे गलत तरीके से खाया जाए तो यह शरीर में वात दोष को बढ़ा सकता है। इससे गैस, पेट फूलना और शरीर में रूखापन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से खाने की सलाह देते हैं।

    विशेष रूप से उन लोगों को अंकुरित आहार से सावधान रहना चाहिए जिनका पाचन कमजोर है। अगर किसी व्यक्ति को कब्ज, अपच या मंद पाचन की समस्या रहती है, तो उन्हें स्प्राउट्स का सेवन कम या बंद कर देना चाहिए। कमजोर पाचन तंत्र में यह आहार सही तरीके से पच नहीं पाता और इससे शरीर में टॉक्सिन्स बनने लगते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    इसके अलावा, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी अंकुरित आहार देने से बचना चाहिए। इस उम्र में पाचन तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर होता है, जिससे स्प्राउट्स का पाचन कठिन हो सकता है। इसी तरह जिन लोगों का स्वभाव वात प्रधान होता है, उन्हें भी इसका सेवन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि यह वात को और बढ़ा सकता है।

    अंकुरित आहार का सेवन करते समय उसकी सही विधि भी बेहद महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद के अनुसार, स्प्राउट्स को कच्चा खाने से बचना चाहिए। बेहतर है कि उन्हें हल्का उबालकर या पकाकर, घी या तेल के साथ खाया जाए। इससे पाचन आसान होता है और शरीर को अधिकतम पोषण मिल पाता है।

    एक और जरूरी बात यह है कि अंकुरित अनाज को सही समय पर खाया जाए। अंकुरण के तुरंत बाद ही इसका सेवन करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि अधिक समय तक रखने पर इसके पोषक तत्वों में कमी आ सकती है। ताजे स्प्राउट्स शरीर के लिए अधिक लाभकारी होते हैं।

    अंकुरित आहार को अपनी डाइट में शामिल करते समय संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। इसे अपनी संपूर्ण डाइट का एक हिस्सा बनाएं, न कि पूरी डाइट का विकल्प। सही मात्रा, सही तरीका और सही व्यक्ति के अनुसार इसका सेवन करने पर यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
    अंकुरित आहार एक पौष्टिक विकल्प जरूर है, लेकिन यह हर किसी के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं है। अपनी शारीरिक प्रकृति और पाचन क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही इसका सेवन करना चाहिए, ताकि इसका लाभ मिले और कोई नुकसान न हो।