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  • खेल से योग तक: मैरी कॉम की सेहतमंद जीवनशैली बनी मिसाल

    खेल से योग तक: मैरी कॉम की सेहतमंद जीवनशैली बनी मिसाल


    नई दिल्ली।  विश्व योग दिवस 21 जून के नजदीक आते ही देशभर में योग को लेकर जागरूकता अभियान तेज हो गया है। इसी कड़ी में आयुष मंत्रालय लगातार लोगों को योग से जोड़ने के प्रयास कर रहा है। मंत्रालय विभिन्न योगासन, उनके फायदे और सही अभ्यास के तरीकों की जानकारी साझा कर लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

    इसी अभियान के तहत भारतीय मुक्केबाज और ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया है, जिसमें वह योग के महत्व पर अपने विचार रखती नजर आ रही हैं। आयुष मंत्रालय के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किए गए इस वीडियो में मैरी कॉम ने लोगों से योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की अपील की है।

    वीडियो में मैरी कॉम कहती हैं कि वह स्वयं प्रतिदिन योग करती हैं और यह उनके जीवन का अहम हिस्सा है। उनके अनुसार योग ने न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया है, बल्कि आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन को भी मजबूत किया है। उन्होंने संदेश दिया कि योग अपनाकर व्यक्ति स्वस्थ, सरल और ऊर्जावान जीवन जी सकता है।

    विश्व स्तरीय खिलाड़ी मैरी कॉम का यह संदेश खासकर युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि व्यस्त खेल जीवन और कठिन प्रशिक्षण के बीच योग उन्हें मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। उनका कहना है कि चाहे हाई-इंटेंसिटी स्पोर्ट्स हों या सामान्य जीवन, योग लंबे समय तक फिट रहने का सबसे प्रभावी साधन है।

    आयुष मंत्रालय भी लगातार यह संदेश दे रहा है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा को संतुलित करने की एक संपूर्ण जीवनशैली है। योग से तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    मंत्रालय इससे पहले भी अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, अनिल कपूर सहित कई हस्तियों और योग विशेषज्ञों के संदेश साझा कर चुका है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्राचीन भारतीय परंपरा से जुड़ सकें।

    21 जून को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं और इस बार भी सरकार का लक्ष्य है कि योग को हर घर तक पहुंचाया जाए और इसे जन-आंदोलन के रूप में स्थापित किया जाए।

  • प्रकृति का साथ, सेहत का विश्वास: बिना दवा के स्वस्थ रहने के आसान तरीके

    प्रकृति का साथ, सेहत का विश्वास: बिना दवा के स्वस्थ रहने के आसान तरीके


    नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई निरोगी काया चाहता है, लेकिन सवाल है कि कैसे निरोगी काया को पाया जा सकता है।

    इस सवाल का एक ही जवाब है अपने शरीर को समझना। हमारे शरीर में इतनी क्षमता होती है कि वह हर बीमारी से लड़ सकता है और बिना दवा के अच्छा जीवन जी सकता है। बिना दवा के जीवन जीना सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि अच्छी जीवनशैली का संकेत है।

    आयुर्वेद के मुताबिक, आज के समय में आधुनिक जीवनशैली और खान-पान ही बीमारियों की जड़ है, और यही कारण है कि अब प्रकृति के पास वापस लौटने का समय आ गया है। जितना आप प्रकृति के पास जाएंगे, बीमारी उतना ही दूर हो जाएगी। बिना दवा के स्वस्थ जीवनशैली जीने के लिए कुछ चीजों को जीवन में वापस लाना होगा।

    पहला स्टेप है स्व निदान, यानी पहले खुद की बीमारी की पहचान करें। हमारा शरीर कभी झूठ नहीं बोलता है, और जब भी शरीर में किसी तरह की कोई परेशानी होती है तो कुछ न कुछ संकेत जरूर मिलता है। इसके लिए शरीर के कुछ मुख्य लक्षण जानने की जरूरत है, जैसे जोड़ों का दर्द, कमजोरी, घटता हुआ वजन, अचानक धुंधला दिखना, बुखार, और कब्ज होना। यह कारण शरीर की आंतरिक गड़बड़ी को दर्शाते हैं।

    दूसरा स्टेप है प्राकृतिक दवाओं का इस्तेमाल। हमारा मतलब किसी दवा से नहीं, बल्कि प्रकृति से करीब रहना और समय ही है। इसके लिए समय पर आहार लेना जरूरी है और जीवनशैली में प्रकृति से मिले ताजे फलों का सेवन करना भी जरूरी है। यही ताजे फल हैं, जो दवा के इस्तेमाल को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, रोज कम से कम आधे घंटे प्रकृति से जुड़ना भी जरूरी है। नंगे पांव घास पर चले और पेड़ों को गले लगाएं। इससे तनाव कम होता है और शरीर मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करता है।

    तीसरा स्टेप है सुधार का चरण। इस समय आप खुद शरीर में बदलाव महसूस करेंगे। जैसे जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा और फल खाने से पेट से संबंधित रोगों में भी आराम मिलेगा। शरीर धीरे-धीरे खुद को हील करना शुरू कर देगा। अगर इसके बाद कभी-कभार बुखार की समस्या होती है तो दवा लेने की बजाय गर्म पानी में पैरों को भिगोकर बैठ जाए, इससे भले ही शरीर का तापमान बढ़ेगा, लेकिन बुखार ठीक होने में मदद मिलेगी। हमारा शरीर का तापमान तभी गर्म होता है, जब शरीर में बैक्टीरिया का हमला होता है। संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर तापमान को बढ़ा देते हैं और एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देते हैं।

    इसके साथ ही कोशिश करें कि रोजाना कुछ पत्ते नीम के जरूर चबाए। यह शरीर के आधे से ज्यादा रोगों को समाप्त कर देगा।

  • इम्युनिटी बढ़ाने के 5 आसान तरीके, रोज अपनाएं और रहें स्वस्थ

    इम्युनिटी बढ़ाने के 5 आसान तरीके, रोज अपनाएं और रहें स्वस्थ


    नई दिल्ली मौसमी मौसम में गर्मी और शुरुआत के साथ बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता अलग-अलग होती है, इसलिए इसे बढ़ाने के लिए कुछ आसान से उपाय अपनाना चाहिए।

    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय इम्युनिटी बढ़ाने के लिए पांच आसान और प्रभावी सलाह देता है, जिसके अनुसार प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए इन पांच इम्यूनिटी को मजबूत बनाया जा सकता है।

    पाठ्यपुस्तक के अनुसार इन पांच प्रयोगों में समानता से न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। ये सुझाव कोई भी उम्र के लोग आसानी से अपना सकते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार इन प्रयोगों को लंबे समय तक जारी रखने से बीमारियां कम होती हैं और शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान रहता है।

    गहरी नींद लेना : अच्छी और गहरी नींद रोग प्रतिरोधक क्षमता का आधार है। रात में कम से कम 7 से 8 घंटे की मीठी नींद लेनी चाहिए। नींद पूरी न होने से शरीर का रक्षा तंत्र ख़राब हो जाता है। सोने से पहले मोबाइल और टीवी से दूर रहें और रात का खाना देखें।

    अच्छा और प्रोफेशनल: बिजनेसमैन और प्लास्टिक आहार इम्युनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। साधारण फल, हरे पत्तेदार मसाला, दालें, अनाज और मेवे रोजमर्रा। आयुर्वेद में हल्दी दूध, अदरक, तुलसी, मिलावट और गिलोय जैसे घरेलू नुस्खों को इम्युनिटी बूस्टर माना जाता है। जंक फूड और अधिकांश ताला-भुना भोजन से जिम्मेदारी लें।

    व्यायाम करें : नियमित व्यायाम या योगासन से शरीर मजबूत होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय रहती है। प्रतिदिन 30 से 45 मिनट व्यायाम, योग, प्राणायाम या व्यायाम करें। व्यायाम से रक्त संचार अच्छा होता है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद होता है।

    तनाव का प्रबंधन करें: तनाव लगातार प्रतिरक्षा को ख़राब करता है। ध्यान, प्राणायाम, संगीत सिद्धांत या हॉबी रखें तनाव कम करने के अच्छे तरीके। आयुर्वेद में तनाव मुक्त जीवन को स्वस्थ जीवन का आधार माना गया है।

    क्लिनिकल लाइव: शरीर में पानी की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। समरस्लैम में एक दिन में पर्याप्त पानी सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही पानी, छाछ, नारियल पानी या प्लांट टी जैसे प्राकृतिक पेय पदार्थ। साबुत पानी शरीर के टॉक्सिन को बाहर निकालने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

  • कीटनाशकों के बढ़ते खतरे पर बोले Sangram Singh, ऑर्गेनिक खेती को बताया जरूरी

    कीटनाशकों के बढ़ते खतरे पर बोले Sangram Singh, ऑर्गेनिक खेती को बताया जरूरी


    नई दिल्ली। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में संग्राम सिंह ने कहा कि आज की तेज रफ्तार शहरी जीवन में लोग प्राकृतिक और उपजाऊ भोजन से दूर होते जा रहे हैं।उन्होंने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि पहले लोग बांस से सीधे फल तोड़कर खाते थे और खेतों से ताजी सब्जियां लाते थे, लेकिन अब यह संस्कृति काफी हद तक खत्म हो गई है।

    फिटनेस और स्वास्थ्य के लिए जरूरी है संतुलित आहार

    संग्राम सिंह ने बताया कि जैविक फल और सब्जियों शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती हैं, जिससे:

    शारीरिक ताकत बढ़ती है

    इम्युनिटी मजबूत होती है

    लंबे समय तक बीमारियों से बचाव होता है

    उन लोगों से अपील की कि वे अपनी डाइट में प्राकृतिक और शुद्ध भोजन को शामिल करें।

    किसानों से बढ़ रहा स्वास्थ्य खतरा

    कार्यक्रम में मौजूद शैलेश जरिया ने कहा कि बाजार में मिलने वाले कई फल-सब्जियों में बहुत ज़्यादा केमिकल वाले कीटनाशक होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।

    उनके अनुसार, यह समस्याएं तेज़ी से बढ़ रही हैं:

    कैंसर

    डायबिटीज़

    हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर)

    दिल की बीमारी

    बीमारियों के पीछे खराब खान-पान और केमिकल युक्त खाद्य पदार्थ एक बड़ी वजह बनते जा रहे हैं।

    किसानों के लिए भी अहम संदेश

    शैलेश जरिया ने किसानों से अपील की कि वे:

    रासायनिक खाद और कीटनाशकों का कम इस्तेमाल करें

    जैविक और पारंपरिक खेती अपनाएं

    मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें

    उनका कहना है कि इससे न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि लोगों को कसरत और सुरक्षित भोजन भी मिलेगा।

    खेल के मैदान में भी वापसी की तैयार
    इस मौके पर संग्राम सिंह ने बताया कि वह जल्द ही अंतरराष्ट्रीय MMA मुकाबले में हिस्सा लेंगे।

    तारीख: 5 अप्रैल

    स्थान: अर्जेंटीना

    इवेंट: समुराई फाइट लीग

    यह साफ है कि जैविक फूड केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और भविष्य की जरूरत बन रहा है। संग्राम सिंह और एथलीटों का संदेश यही है कि अगर हम अभी से अपने खान-पान में बदलाव नहीं करेंगे, तो आने वाले समय में स्वास्थ्य समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

  • स्वस्थ भोजन और फिर भी मोटापा: इन आदतों को बदलकर रखें फिट और तंदुरुस्त

    स्वस्थ भोजन और फिर भी मोटापा: इन आदतों को बदलकर रखें फिट और तंदुरुस्त

    नई दिल्ली। आज के दौर में युवाएं फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर घरों की रसोई तक, हर जगह हेल्दी खाने और व्यायाम की चर्चा होने लगी है। लेकिन इसके बावजूद कई महिलाएं हेल्दी डायट लेने के बावजूद वजन घटने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ता देख रही हैं।

    मेटाबॉलिज्म और पाचन शक्ति का महत्व

    आयुर्वेद के अनुसार शरीर केवल भोजन से नहीं बल्कि ‘अग्नि’ यानी पाचन शक्ति से चलता है। विज्ञान इसे मेटाबॉलिज्म कहता है। अगर यह सिस्टम धीमा या गड़बड़ हो जाए, तो सबसे पौष्टिक खाना भी शरीर में जाकर फैट का रूप ले सकता है। यही कारण है कि हेल्दी खाना और वजन घटाना हमेशा साथ नहीं चलते।

    हेल्दी फूड्स की मात्रा का असर

    एक आम गलतफहमी यह है कि हेल्दी चीजें जितनी चाहें उतनी खाई जा सकती हैं। ड्राई फ्रूट्स, घी, शहद, मूंगफली का मक्खन या एवोकाडो जैसी चीजें पौष्टिक होते हुए भी भारी होती हैं और शरीर को इन्हें पचाने में ज्यादा समय लगता है। कैलोरी की अधिकता होने पर शरीर अतिरिक्त ऊर्जा फैट के रूप में जमा कर देता है।

    छिपी चीनी और प्रोसेस्ड हेल्दी फूड

    आज बाजार में मिलने वाले कई ‘हेल्दी’ प्रोडक्ट भी वजन बढ़ाने में योगदान करते हैं। लो-फैट दही, मल्टीग्रेन बिस्कुट और एनर्जी बार में छिपी शुगर इंसुलिन बढ़ाती है, जिससे शरीर फैट स्टोर करने लगता है। आयुर्वेद में अत्यधिक मीठा कफ दोष बढ़ाने वाला माना गया है।

    हार्मोन और शारीरिक असंतुलन

    कई बार वजन बढ़ने की वजह खाना नहीं बल्कि हार्मोन असंतुलन होता है। थायरॉइड, पीसीओएस या लंबे समय तक तनाव में रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है। आयुर्वेद में इसे दोषों का असंतुलन कहा गया है, खासकर कफ दोष का बढ़ना। ऐसे में शरीर ऊर्जा जलाने के बजाय जमा करने लगता है।

    नींद, मानसिक स्थिति और मांसपेशियों का योगदान

    अधूरी नींद पाचन शक्ति को कमजोर करती है। विज्ञान के अनुसार, कम सोने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ‘घ्रेलिन’ बढ़ता और पेट भरने वाला हार्मोन ‘लेप्टिन’ घट जाता है। साथ ही उम्र बढ़ने या शारीरिक गतिविधि कम होने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है क्योंकि मांसपेशियों की कमी से कैलोरी बर्न कम होती है।

    हेल्दी खाने के बावजूद वजन बढ़ना मेटाबॉलिज्म, हार्मोन असंतुलन, नींद और शारीरिक सक्रियता पर निर्भर करता है, इसलिए सिर्फ डायट से परिणाम नहीं मिलते।