Tag: HealthyLiving

  • घर पर आसानी से बनने वाले नेचुरल और हाइड्रेटिंग समर बेवरेज रेसिपीज़

    घर पर आसानी से बनने वाले नेचुरल और हाइड्रेटिंग समर बेवरेज रेसिपीज़


    नई दिल्ली |  जैसे-जैसे गर्मियों का पारा बढ़ता है, शरीर में पानी की कमी, थकान और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में बाजार के कोल्ड ड्रिंक्स या शुगर-लोडेड पेय पदार्थों की बजाय घर पर बने नेचुरल ड्रिंक्स ज्यादा फायदेमंद होते हैं। ये न सिर्फ शरीर को ठंडक देते हैं बल्कि इम्युनिटी और पाचन को भी बेहतर बनाते हैं।

    खीरा-मिंट कूलर: ताजगी से भरपूर डिटॉक्स ड्रिंक
    खीरा और पुदीना गर्मियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। खीरे का रस, पुदीने की पत्तियां, नींबू का रस और थोड़ा सा काला नमक मिलाकर एक बेहतरीन डिटॉक्स ड्रिंक तैयार किया जा सकता है। यह ड्रिंक शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है और तुरंत ठंडक देता है।

     आम पन्ना: पारंपरिक स्वाद के साथ हेल्दी कूलिंग
    कच्चे आम से बनने वाला आम पन्ना भारतीय घरों में गर्मियों की शान माना जाता है। इसमें कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा निकाला जाता है और फिर इसमें भुना जीरा, काला नमक, पुदीना और पानी मिलाया जाता है। यह न केवल लू से बचाता है बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस भी बनाए रखता है।

     नारियल पानी स्पेशल मिक्स ड्रिंक
    नारियल पानी अपने आप में एक परफेक्ट हाइड्रेटिंग ड्रिंक है, लेकिन इसे और भी स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें नींबू का रस और कुछ मिंट लीव्स मिलाई जा सकती हैं। यह ड्रिंक तुरंत एनर्जी देती है और शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखती है।

     तरबूज कूलर: गर्मी का सबसे मीठा समाधान
    तरबूज में 90% से अधिक पानी होता है, जो इसे एक बेहतरीन समर फ्रूट बनाता है। इसका जूस बनाकर उसमें थोड़ा नींबू और मिंट मिलाने से यह एक रिफ्रेशिंग ड्रिंक बन जाता है। यह शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ स्किन के लिए भी फायदेमंद है।

     नींबू-पानी विद हनी: सिंपल लेकिन असरदार ड्रिंक
    नींबू पानी गर्मियों का सबसे आसान और प्रभावी पेय है। इसमें शहद मिलाने से यह और भी हेल्दी हो जाता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है।

    गर्मियों में शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए नेचुरल और घर पर बने ड्रिंक्स सबसे अच्छा विकल्प हैं। ये न सिर्फ शरीर को ठंडक देते हैं बल्कि लंबे समय तक फिट और एक्टिव रहने में मदद करते हैं। इसलिए इस गर्मी में बाजार के ड्रिंक्स से दूरी बनाएं और इन हेल्दी विकल्पों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

  • मच्छरों और बदबू से परेशान हैं? कूलर में डालें फिटकरी और पाएं ठंडी, साफ और सुरक्षित हवा

    मच्छरों और बदबू से परेशान हैं? कूलर में डालें फिटकरी और पाएं ठंडी, साफ और सुरक्षित हवा


    नई दिल्ली । भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम में एयर कूलर आम लोगों के लिए राहत का सबसे सस्ता और असरदार साधन बन जाता है खासकर मिडिल क्लास परिवारों में कूलर का उपयोग तेजी से बढ़ जाता है लेकिन इसके साथ एक बड़ी समस्या भी सामने आती है और वह है कूलर के टैंक में जमा गंदा पानी और उससे आने वाली बदबू यह समस्या न केवल असहजता पैदा करती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकती है

    दरअसल कूलर में जमा पानी कुछ ही दिनों में गंदा होने लगता है और उसमें बैक्टीरिया तथा सूक्ष्म जीव पनपने लगते हैं यही कारण है कि कूलर चलाने पर कमरे में सीलन और बदबू महसूस होती है इसके अलावा रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल जगह बन जाता है जिससे डेंगू मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है

    ऐसी स्थिति में अगर आप इस समस्या से राहत पाना चाहते हैं तो आपकी रसोई में मौजूद एक साधारण सी चीज फिटकरी बेहद कारगर साबित हो सकती है फिटकरी का उपयोग सदियों से पानी को साफ करने के लिए किया जाता रहा है और इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है जब फिटकरी को पानी में डाला जाता है तो यह उसमें मौजूद गंदगी के सूक्ष्म कणों को आपस में जोड़ देती है जिससे वे भारी होकर टैंक की तली में बैठ जाते हैं और ऊपर का पानी साफ और पारदर्शी हो जाता है

    कूलर के टैंक में फिटकरी का एक छोटा सा टुकड़ा डालने से पानी लंबे समय तक साफ बना रहता है और उसमें गंदगी जल्दी जमा नहीं होती इसके साथ ही यह मच्छरों के लार्वा के पनपने की संभावना को भी कम कर देता है क्योंकि फिटकरी पानी के रासायनिक संतुलन में ऐसा बदलाव लाती है जो मच्छरों के लिए अनुकूल नहीं होता

    इसके अलावा फिटकरी में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं जो पानी में मौजूद बैक्टीरिया और हानिकारक जीवाणुओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं यही वजह है कि कूलर से आने वाली बदबू भी धीरे धीरे खत्म हो जाती है जब पानी साफ और बैक्टीरिया मुक्त होता है तो कूलर से निकलने वाली हवा भी ताजी और ठंडी महसूस होती है

    हालांकि फिटकरी का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है विशेषज्ञों के अनुसार कूलर के टैंक में बहुत अधिक मात्रा में फिटकरी डालना सही नहीं है एक छोटा सा टुकड़ा ही पर्याप्त होता है अधिक मात्रा में उपयोग करने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है

    इसके साथ ही केवल फिटकरी पर निर्भर रहना भी सही नहीं है कूलर की नियमित सफाई बेहद जरूरी है टैंक और पैड्स को समय समय पर साफ करना चाहिए ताकि फंगस और गंदगी जमा न हो सके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हर तीन से चार दिन में कूलर का पानी पूरी तरह बदलना एक अच्छी आदत है

    अगर आप इन आसान घरेलू उपायों को अपनाते हैं तो न केवल कूलर की बदबू और गंदगी से छुटकारा पा सकते हैं बल्कि अपने परिवार को मच्छरों से होने वाली खतरनाक बीमारियों से भी सुरक्षित रख सकते हैं

  • निरोगी काया का सीक्रेट कोड है आयुर्वेदिक दिनचर्या बुढ़ापा थमेगा और बीमारियाँ रहेंगी कोसों दूर

    निरोगी काया का सीक्रेट कोड है आयुर्वेदिक दिनचर्या बुढ़ापा थमेगा और बीमारियाँ रहेंगी कोसों दूर

    नई दिल्ली । धुनिक युग में खराब जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण शरीर समय से पहले बीमारियों का घर बनता जा रहा है। आयुर्वेद के अनुसारहमारा शरीर एक मशीन की तरह है जिसे सुचारू रूप से चलाने के लिए सही ईंधन और समय पर सर्विसिंग की जरूरत होती है। वैज्ञानिक जिसे सर्कैडियन रिदम कहते हैंआयुर्वेद उसे दिनचर्या के रूप में सदियों पहले परिभाषित कर चुका है। यदि इस लय का पालन किया जाएतो बुढ़ापा भी जल्दी दस्तक नहीं देता।

    ब्रह्म मुहूर्त और सुबह की शुरुआत

    दिनचर्या का सबसे पहला नियम है ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पूर्व जागना। सुबह उठकर शरीर से विषाक्त पदार्थों के निष्कासन के बाद तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसारबालों और त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए नाभि में तेल की कुछ बूंदें डालना और आंखों में अंजन लगाना अत्यंत लाभकारी है।

    व्यायाम और अभ्यंग मालिश का महत्व

    दिन की शुरुआत हल्के व्यायाम और सैर से करें। इसके बाद अभ्यंग यानी शरीर की तेल मालिश जरूर करें। अभ्यंग न केवल रक्त संचारको बेहतर बनाता हैबल्कि मांसपेशियों की थकान मिटाकर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है।

    आहार का नियम कब और क्या खाएं

    आयुर्वेद में भोजन को मात्र पेट भरने का साधन नहींबल्कि औषधि माना गया है। दोपहर का भोजन दोपहर 12 से 1 बजे के बीच भोजन कर लेना चाहिए। इस समय शरीर की जठराग्नि पाचन अग्नि सबसे प्रबल होती हैजिससे भोजन आसानी से पच जाता है। त का भोजन रात का खाना हमेशा हल्का होना चाहिए और कोशिश करें कि सूर्यास्त के आसपास ही भोजन कर लें। ज्रासन का लाभ खाना खाने के तुरंत बाद लेटना नहीं चाहिए। या तो कुछ कदम पैदल चलें या कम से कम 10-15 मिनट वज्रासन में बैठें। यह आसन पाचन प्रक्रिया को तेज करता है।

    गहरी नींद और मरम्मत का समय

    नींद शरीर की मरम्मत का समय है। रात को सोने से पहले दूध के साथ हल्दी या त्रिफला का सेवन करें। यह न केवल तनाव कम करता हैबल्कि गहरी नींद लाने में भी सहायक है। सोते समय बाईं करवट लेकर सोना सबसे उत्तम माना गया हैक्योंकि इससे पाचन तंत्र सुचारू रहता है और हृदय पर दबाव कम पड़ता है। युर्वेदिक दिनचर्या कोई कठिन नियम नहींबल्कि प्रकृति के साथ जीने का एक तरीका है। यदि हम अपने शरीर की इस प्राकृतिक लय को पहचान लेंतो हम एक शक्तिशाली और रोगमुक्त जीवन जी सकते हैं।