Tag: Heart Attack

  • सिर्फ सीने में दर्द ही नहीं, हार्ट अटैक से पहले हाथ, गर्दन, जबड़े और पेट के ऊपरी हिस्से में भी हो सकता है दर्द

    सिर्फ सीने में दर्द ही नहीं, हार्ट अटैक से पहले हाथ, गर्दन, जबड़े और पेट के ऊपरी हिस्से में भी हो सकता है दर्द


    नई दिल्ली:
    हार्ट अटैक को आमतौर पर सीने में दर्द या भारीपन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके संकेत केवल सीने तक सीमित नहीं होते। हार्ट अटैक के दौरान शरीर के कुछ दूसरे हिस्सों में भी दर्द या असहजता महसूस हो सकती है। कई बार लोग इसे सामान्य बॉडी पेन, गैस या पाचन संबंधी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हार्ट अटैक का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं माना जाता और कम उम्र के लोगों में भी यह समस्या देखी जा रही है। ऐसे में शरीर में होने वाले असामान्य दर्द और अन्य संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है।

    हार्ट अटैक के दौरान सीने के बीचोंबीच दर्द या किसी तरह का दबाव महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को सीने में भारीपन या जकड़न की शिकायत होती है। यह असहजता कुछ मिनटों से ज्यादा समय तक रह सकती है या थोड़ी देर ठीक होने के बाद दोबारा शुरू हो सकती है। इसके अलावा दर्द बाएं या दाएं हाथ में भी महसूस हो सकता है। यह कंधे से शुरू होकर हाथ और उंगलियों तक फैल सकता है। दर्द कुछ समय बाद कम होकर फिर दोबारा भी हो सकता है। ऐसे दर्द को हमेशा सामान्य मानकर छोड़ना सही नहीं माना जाता।

    गर्दन, जबड़े और पीठ में तेज दर्द भी हार्ट अटैक से जुड़े संकेतों में शामिल हो सकता है। यह दर्द अचानक शुरू होकर लगातार बना रह सकता है या सीने में होने वाली असहजता के साथ दिखाई दे सकता है। खासतौर पर महिलाओं में इस तरह के लक्षण अधिक देखने को मिल सकते हैं। इसी तरह पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाला दर्द भी ध्यान देने योग्य है। पेट में दर्द होने पर कई लोग इसे गैस, ऐंठन, कब्ज या पाचन संबंधी समस्या समझ लेते हैं, लेकिन हर बार इसका कारण सामान्य नहीं होता। हार्ट अटैक से पहले ऊपरी पेट में दर्द महसूस हो सकता है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षणों में कुछ अंतर हो सकते हैं। महिलाओं में भी सीने में दर्द या असहजता सबसे आम लक्षणों में शामिल है, लेकिन इसके साथ ऐसे संकेत भी दिखाई दे सकते हैं जिन्हें आमतौर पर हार्ट अटैक से नहीं जोड़ा जाता। इनमें घबराहट या बेचैनी, सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना, जी मिचलाना या उल्टी, पेट खराब या अपच जैसी समस्या शामिल हो सकती है। महिलाओं को बिना ज्यादा मेहनत के असामान्य थकान और कमजोरी भी महसूस हो सकती है।

    हार्ट अटैक से जुड़े संकेतों को पहचानना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दर्द या असहजता शरीर के अलग-अलग हिस्सों में महसूस हो सकती है। सीने में दबाव या भारीपन के साथ हाथ, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द हो तो इसे सामान्य दर्द मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर जब दर्द अचानक शुरू हो, बना रहे या दोबारा हो, तब इन संकेतों को गंभीरता से लेना जरूरी है। महिलाओं में सांस फूलना, मतली, उल्टी, बेचैनी और असामान्य थकान जैसे लक्षण भी ध्यान देने योग्य हो सकते हैं।

  • मुंबई में प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत, सीने में दर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया

    मुंबई में प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत, सीने में दर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया

    नई दिल्ली: मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की हार्ट अटैक से मौत हो गई। पिल्लई ठाणे के दोस्ती वेस्ट काउंटी के बी विंग में रहते थे और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शाम करीब 4:30 बजे शिवाजी पार्क पहुंचे थे। करीब 5 बजे उन्हें सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद उनके दोस्तों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें पास के अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाई गई आपत्तियों से जुड़ी थी। प्रदर्शन शाम करीब 4 बजे शुरू हुआ और शुरुआत में ही बड़ी संख्या में लोग शिवाजी पार्क के आसपास जमा हो गए। प्रदर्शन में युवाओं, कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया।

    प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और इसके कारण लाखों नागरिकों के मतदान के अधिकार प्रभावित हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने तिरंगा, पोस्टर और बैनर लेकर अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे भी लगाए।

    प्रदर्शन के आयोजकों ने एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने, 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने और पुरानी मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने की मांग की। इसके अलावा नागरिक समाज की भागीदारी के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग भी रखी गई। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग भी की गई। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही।

    प्रदर्शन के दौरान हुई 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की मौत अलग स्वास्थ्य संबंधी घटना के रूप में सामने आई। पिल्लई शाम करीब 4:30 बजे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे और करीब आधे घंटे बाद उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों के इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रदर्शन के दौरान उनकी मौत की खबर से वहां मौजूद लोगों को घटना की जानकारी मिली।

  • होमगार्ड बनने का सपना अधूरा रह गया 4800 मीटर दौड़ के आखिरी दौर में अभ्यर्थी की हार्ट अटैक से मौत

    होमगार्ड बनने का सपना अधूरा रह गया 4800 मीटर दौड़ के आखिरी दौर में अभ्यर्थी की हार्ट अटैक से मौत


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में होमगार्ड भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया। बरेली से भर्ती परीक्षा देने पहुंचे 24 वर्षीय शिवम यादव की दौड़ के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह ट्रैक पर गिर पड़े। शिवम ने 4800 मीटर की दौड़ के 11 राउंड पूरे कर लिए थे और अंतिम राउंड में अपने लक्ष्य से करीब 60 से 70 मीटर की दूरी पर थे। इसी दौरान वह अचानक गश खाकर गिर गए। मौके पर मौजूद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    शिवम बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र के नई बस्ती वंशीनगला बेनीपुर चौधरी के रहने वाले थे। उनके पिता विनोद कुमार पेशे से अधिवक्ता हैं और बरेली बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अस्पताल में शिवम का शव देखकर उनके पिता की भी हालत बिगड़ गई और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। घटना की जानकारी मिलने के बाद मुरादाबाद के एसएसपी सतपाल अंतिल भी जिला अस्पताल पहुंचे।

    शिवम ने होमगार्ड भर्ती की लिखित परीक्षा और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। शुक्रवार को उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होना था। इसके लिए वह गुरुवार रात करीब 11 बजे अपने पिता के साथ बरेली से मुरादाबाद के लिए रवाना हुए थे। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे वह भर्ती स्थल पर पहुंच गए। जांच और बायोमेट्रिक उपस्थिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें 9वीं वाहिनी पीएसी के मैदान में दौड़ के लिए भेजा गया। शिवम के रिश्ते का भाई हिमांशु भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने मुरादाबाद पहुंचा था।

    हिमांशु के मुताबिक शिवम पांचवीं शिफ्ट में दौड़ रहे थे। अभ्यर्थियों को 28 मिनट के भीतर 4800 मीटर की दूरी पूरी करनी थी। शिवम ने शुरुआती 11 राउंड पूरे कर लिए थे और अब केवल आखिरी राउंड बाकी था। सुबह करीब 8 बजकर 16 मिनट पर वह अंतिम राउंड में दौड़ रहे थे। मंजिल करीब नजर आ रही थी लेकिन अचानक उनकी रफ्तार थम गई और वह ट्रैक पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मदद की कोशिश की और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

    पोस्टमार्टम करने वाली टीम में शामिल डॉक्टर राहुल चौधरी के अनुसार प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हार्ट अटैक सामने आया है। डॉक्टर के मुताबिक अचानक बहुत तेज गति से दौड़ने के कारण दिल पर अत्यधिक दबाव पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि ऐसी शारीरिक परीक्षा की तैयारी के दौरान शरीर और दिल को धीरे धीरे बढ़ते अभ्यास के जरिए लंबे समय तक तेज दौड़ के लिए तैयार करना जरूरी है।

    शिवम की शादी वर्ष 2023 में कोमल से हुई थी। उनकी दो साल की बेटी शैली है। पति की मौत की खबर के बाद पत्नी कोमल समेत परिवार के अन्य लोग अस्पताल की मोर्चरी पहुंचे। शव देखते ही पत्नी बेसुध हो गई। जिस नौकरी के जरिए शिवम अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने का सपना लेकर दौड़ रहे थे वह सपना अंतिम राउंड में ही हमेशा के लिए टूट गया। पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।

  • युवाओं में अचानक मौत की वजह क्या? 25 अस्पतालों की स्टडी में सामने आए ये बड़े जोखिम

    युवाओं में अचानक मौत की वजह क्या? 25 अस्पतालों की स्टडी में सामने आए ये बड़े जोखिम


    नई दिल्ली। जिम में कसरत करते हुए या डांस के दौरान अचानक किसी युवा की मौत की खबर अक्सर लोगों को हैरान कर देती है. देखने में पूरी तरह फिट नजर आने वाले व्यक्ति के साथ आखिर ऐसा कैसे हो सकता है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के एक अध्ययन ने इस सवाल से जुड़े कई अहम संकेत दिए हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक कम उम्र में दिल का दौरा और रक्त के थक्के बनने के पीछे कई जोखिम कारक जिम्मेदार हो सकते हैं. इनमें पहले रक्त का थक्का बनना परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास दूसरी बीमारियां और धूम्रपान जैसे कारण प्रमुख हैं.

    यह अध्ययन आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने देश के 25 बड़े अस्पतालों में किया. शोध में 18 से 45 वर्ष की उम्र के 767 मरीजों को शामिल किया गया. खास बात यह रही कि अध्ययन में ऐसे मरीजों को देखा गया जिन्हें समय पर इलाज मिलने के बाद बचा लिया गया था. इसका उद्देश्य यह समझना था कि अपेक्षाकृत कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने या शरीर में रक्त के थक्के बनने के पीछे कौन से कारक भूमिका निभा सकते हैं.

    अध्ययन में सामने आया कि जिन लोगों को पहले भी रक्त का थक्का बनने की समस्या हो चुकी थी उनमें दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बहुत अधिक पाया गया. ऐसे लोगों में यह खतरा करीब 60 गुना तक ज्यादा देखा गया. वहीं जिन मरीजों को पहले से कोई दूसरी बीमारी थी उनमें दिल के दौरे का जोखिम 4.6 गुना अधिक पाया गया.

    धूम्रपान करने वालों के लिए भी अध्ययन में गंभीर चेतावनी सामने आई. ऐसे लोगों में दिल के दौरे का खतरा 3.5 गुना अधिक पाया गया. इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में पहले किसी सदस्य को रक्त का थक्का बनने की समस्या रही थी उनमें भी दिल के दौरे का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में करीब 3.3 गुना ज्यादा पाया गया.

    शोध में कोविड से जुड़ी जानकारी भी सामने आई. जिन लोगों को कोविड संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था उनमें रक्त का थक्का बनने की समस्या देखी गई. हालांकि अध्ययन के मुताबिक कोविड वैक्सीन से लोगों को इस तरह का नुकसान होने का प्रमाण नहीं मिला.

    अध्ययन में शामिल 767 मरीजों में 432 यानी करीब 56.3 प्रतिशत लोगों को दिल का दौरा पड़ा था. वहीं 198 यानी करीब 25.8 प्रतिशत मरीजों में दिमाग की नस में रक्त का प्रवाह रुकने से जुड़ी समस्या सामने आई. दोनों तरह के मामलों को मिलाकर यह संख्या अध्ययन में शामिल मरीजों का बड़ा हिस्सा थी.

    उम्र के लिहाज से भी अध्ययन महत्वपूर्ण है. कुल मरीजों में 614 यानी करीब 80.1 प्रतिशत की उम्र 31 से 45 वर्ष के बीच थी. इसका मतलब यह है कि ऐसे जोखिम केवल बहुत अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं हैं. युवाओं में भी यदि पहले से कोई जोखिम मौजूद है तो उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

    विशेषज्ञों के मुताबिक इसका मतलब यह नहीं है कि जिम जाना या डांस करना अपने आप में खतरनाक है. नियमित शारीरिक गतिविधि सामान्य तौर पर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है. लेकिन जिन लोगों में पहले से हृदय संबंधी जोखिम या रक्त के थक्के से जुड़ी समस्या का इतिहास है उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

    इस अध्ययन से एक अहम संदेश यह मिलता है कि अचानक होने वाली घटनाओं के पीछे कई बार पहले से मौजूद जोखिम छिपे हो सकते हैं. इसलिए शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है. खासकर धूम्रपान करने वालों और परिवार में ऐसी बीमारी का इतिहास रखने वाले लोगों को अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

  • राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम

    राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम


    इंदौर ।  इंदौर के व्यस्त राजबाड़ा बाजार में उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया जब देवास जिले के बागली से खरीदारी करने आए 50 वर्षीय व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई है जबकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगी। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि हृदय संबंधी समस्याएं बिना किसी बड़े संकेत के भी अचानक सामने आ सकती हैं।

    मृतक की पहचान विक्रम पुत्र नाथूलाल चौहान निवासी बागली जिला देवास के रूप में हुई है। बताया गया कि वह अपने एक रिश्तेदार के साथ घरेलू खरीदारी के लिए इंदौर आए थे। दोनों राजबाड़ा क्षेत्र में अलग अलग दुकानों पर सामान खरीद रहे थे। इसी दौरान विक्रम एक दुकान पर बैठे हुए थे तभी उन्हें अचानक घबराहट महसूस हुई। आसपास मौजूद लोगों के अनुसार कुछ ही क्षणों में उनकी तबीयत और बिगड़ गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।

    घटना होते ही वहां मौजूद लोगों ने तुरंत मानवता का परिचय दिया और बिना समय गंवाए उन्हें ऑटो की मदद से महाराजा यशवंतराव अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल जांच की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में मौत की वजह हार्ट अटैक मानी जा रही है हालांकि पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक अंतिम कारण पर कुछ भी कहने से इनकार किया है।

    घटना की सूचना मिलते ही सराफा थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। यदि किसी अन्य चिकित्सकीय कारण का पता चलता है तो उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    परिजनों के अनुसार विक्रम सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए थे और बागली क्षेत्र में एक गैर सरकारी संस्था के साथ काम करते थे। उनका व्यवहार मिलनसार था और समाज सेवा में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। परिवार में पत्नी चार बच्चे और अन्य सदस्य हैं। अचानक हुई इस घटना से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।

    चिकित्सकों का कहना है कि लगातार बढ़ती भागदौड़ तनाव अनियमित दिनचर्या और हृदय रोगों के प्रति लापरवाही के कारण इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। यदि किसी व्यक्ति को अचानक सीने में दर्द घबराहट सांस लेने में तकलीफ अत्यधिक पसीना या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

    यह दुखद घटना एक बार फिर स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत को रेखांकित करती है। नियमित स्वास्थ्य जांच संतुलित जीवनशैली और समय पर चिकित्सा सलाह हृदय संबंधी गंभीर जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकती है। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद लोगों की तत्परता भी आपातकालीन परिस्थितियों में किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • महिलाएं रहें सतर्क पीरियड्स जैसा दर्द भी हो सकता है हार्ट अटैक का शुरुआती लक्षण जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं

    महिलाएं रहें सतर्क पीरियड्स जैसा दर्द भी हो सकता है हार्ट अटैक का शुरुआती लक्षण जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं


    नई दिल्ली। हार्ट अटैक को अक्सर सीने में तेज दर्द और बाएं हाथ में झनझनाहट से जोड़कर देखा जाता है लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में इसके लक्षण पुरुषों से अलग भी हो सकते हैं। कई मामलों में हार्ट अटैक से पहले महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में ऐसा दर्द महसूस होता है जो बिल्कुल पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन जैसा लगता है। यही कारण है कि कई महिलाएं इसे सामान्य मासिक धर्म का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देती हैं और समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं में हार्ट अटैक के दौरान शरीर हमेशा एक जैसे संकेत नहीं देता। कुछ महिलाओं को पेट में भारीपन कमर में दर्द मतली थकान सांस फूलना ठंडा पसीना और कमजोरी जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं। कई बार पेट के निचले हिस्से में होने वाला दर्द इतना सामान्य लगता है कि मरीज उसे गैस बदहजमी या पीरियड्स की समस्या मान लेता है जबकि वास्तव में यह हृदय से जुड़ी गंभीर परेशानी का संकेत हो सकता है।

    डॉक्टरों के अनुसार हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यदि समय रहते उपचार न मिले तो हृदय की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए शरीर के किसी भी असामान्य दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए विशेष रूप से तब जब उसके साथ सांस लेने में तकलीफ अत्यधिक थकान चक्कर या सीने में दबाव जैसा महसूस हो।

    महिलाओं में हार्ट अटैक के कई लक्षण पुरुषों की तुलना में अलग हो सकते हैं। इनमें गर्दन कंधे पीठ या जबड़े में दर्द अत्यधिक पसीना उल्टी जैसा महसूस होना अचानक कमजोरी बेचैनी और बिना किसी कारण सांस फूलना शामिल है। यदि पीरियड्स जैसा दर्द सामान्य समय से अलग महसूस हो रहा हो या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च रक्तचाप मधुमेह मोटापा धूम्रपान तनाव अनियमित जीवनशैली और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक के प्रमुख जोखिम कारक हैं। इसके अलावा रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हृदय रोग का खतरा और बढ़ जाता है क्योंकि इस समय शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराना बेहद जरूरी माना जाता है।

    हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव पर नियंत्रण और धूम्रपान तथा शराब से दूरी बनाए रखना सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच भी करानी चाहिए। यदि परिवार में पहले से हृदय रोग का इतिहास है तो अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

    ध्यान रखें कि हर पेट दर्द या पीरियड्स जैसा दर्द हार्ट अटैक का संकेत नहीं होता लेकिन यदि यह दर्द असामान्य हो और उसके साथ सांस लेने में तकलीफ सीने में दबाव ठंडा पसीना या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर उपचार ही हार्ट अटैक से होने वाले गंभीर नुकसान और जान के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

  • 40 साल से पहले मेनोपॉज बना सकता है दिल का दुश्मन, महिलाओं में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ रहा खतरा

    40 साल से पहले मेनोपॉज बना सकता है दिल का दुश्मन, महिलाओं में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ रहा खतरा


    नई दिल्ली । महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि यह सामान्य उम्र से पहले शुरू हो जाए तो इसके गंभीर स्वास्थ्य परिणाम सामने आ सकते हैं। हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस विषय को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, 40 वर्ष की उम्र से पहले मेनोपॉज का अनुभव करने वाली महिलाओं में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में काफी बढ़ जाता है।

    मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में 26 देशों की 1.11 लाख से अधिक महिलाओं के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि जिन महिलाओं में 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज हुआ, उनमें सामान्य उम्र में मेनोपॉज होने वाली महिलाओं की तुलना में हृदय रोगों का खतरा 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निष्कर्ष महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    भारत की स्थिति इस मामले में और भी चिंताजनक बताई गई है। अध्ययन में शामिल भारतीय महिलाओं के आंकड़ों से पता चला कि बड़ी संख्या में महिलाओं को समय से पहले या अपेक्षाकृत कम उम्र में मेनोपॉज का सामना करना पड़ रहा है। शोध के अनुसार लगभग 18 प्रतिशत महिलाओं में प्रीमैच्योर मेनोपॉज देखा गया, जबकि एक बड़ी संख्या 40 से 44 वर्ष की आयु में ही मेनोपॉज के चरण में पहुंच गई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारतीय महिलाओं को इस समस्या के प्रति अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज से पहले महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है, जो हृदय और रक्त वाहिकाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। लेकिन जैसे-जैसे मेनोपॉज की प्रक्रिया शुरू होती है, एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। यही कारण है कि समय से पहले मेनोपॉज महिलाओं को कम उम्र में ही हृदय संबंधी समस्याओं की ओर धकेल सकता है।

    शोध में यह भी सामने आया कि दक्षिण एशियाई देशों की महिलाओं में मेनोपॉज की औसत उम्र वैश्विक औसत से कम है। विशेषज्ञ इसके पीछे कई कारण बताते हैं, जिनमें लगातार बढ़ता तनाव, धूम्रपान, प्रदूषण, खराब खानपान, नींद की कमी, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी अन्य समस्याएं शामिल हैं। इसके अलावा एनीमिया, पोषण की कमी, कम उम्र में विवाह और बार-बार गर्भधारण जैसे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारक भी महिलाओं में जल्दी मेनोपॉज की वजह बन सकते हैं।

    डॉक्टरों का मानना है कि समय से पहले मेनोपॉज का सामना करने वाली महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। हार्ट हेल्थ, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी के साथ-साथ मेनोपॉज संबंधी स्क्रीनिंग भी जरूरी है। समय रहते पहचान और उचित जीवनशैली अपनाकर हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    विशेषज्ञ महिलाओं को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और धूम्रपान से दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि स्वस्थ जीवनशैली ही समय से पहले मेनोपॉज और उससे जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है।

  • सीने की बेचैनी नहीं मामूली बात: दिल की चेतावनी को समय पर समझना बन सकता है जीवनरक्षक कदम

    सीने की बेचैनी नहीं मामूली बात: दिल की चेतावनी को समय पर समझना बन सकता है जीवनरक्षक कदम

    नई दिल्ली । बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के दौर में हृदय संबंधी बीमारियां तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। पहले जहां दिल की बीमारियां बढ़ती उम्र के साथ जुड़ी मानी जाती थीं, वहीं अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हार्ट अटैक एक ऐसी गंभीर स्थिति है जो कई बार अचानक सामने आती है और मरीज तथा परिवार दोनों को संभलने का मौका तक नहीं देती। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर कई बार पहले ही कुछ संकेत देने लगता है, जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में यह संकेत सामान्य शारीरिक परेशानी की तरह लगते हैं, जिसके कारण लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। सबसे सामान्य और गंभीर संकेत सीने में दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होना माना जाता है। कई बार यह दर्द धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है। दर्द बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े, कोहनी और पीठ तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति को सामान्य दर्द समझकर टालना खतरनाक साबित हो सकता है।

    इसके अलावा अचानक सांस लेने में कठिनाई होना या बिना ज्यादा मेहनत के सांस फूलना भी दिल से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। कई लोगों को अचानक चक्कर आने लगते हैं या शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है। कुछ मामलों में मतली, उल्टी या पेट में असहजता भी देखने को मिलती है, जिसके कारण लोग इसे गैस या पाचन से जुड़ी समस्या मान लेते हैं। अचानक ठंडा पसीना आना और चेहरे की रंगत फीकी पड़ जाना भी ऐसे संकेत हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।

    विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं और बुजुर्गों में कई बार हार्ट अटैक के लक्षण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आते। यही कारण है कि इन वर्गों में अधिक सतर्कता की आवश्यकता होती है। अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण लगातार कुछ मिनटों तक बने रहें या तेजी से बढ़ने लगें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी हो जाता है। देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।

    हृदय रोगों से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव सबसे अहम कदम माना जाता है। रोजाना नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव से दूरी हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फलों, हरी सब्जियों, साबुत अनाज और पौष्टिक भोजन को दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। तला-भुना और अत्यधिक नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर रखना फायदेमंद हो सकता है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन हृदय के लिए गंभीर जोखिम बढ़ाते हैं, इसलिए इन आदतों से बचना जरूरी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच कराना अब आवश्यकता बन चुका है। समय पर जांच और सतर्कता न केवल बीमारियों की पहचान आसान बनाती है, बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की दिशा भी तय करती है।

  • सुरों के सफर में अचानक खामोश हुई धड़कनें: बॉलीवुड के वो 8 दिग्गज गायक जिन्हें दिल का दौरा देकर छीन ले गई मौत

    सुरों के सफर में अचानक खामोश हुई धड़कनें: बॉलीवुड के वो 8 दिग्गज गायक जिन्हें दिल का दौरा देकर छीन ले गई मौत


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की स्वर्णिम यात्रा में संगीत वह रूह है जिसने फिल्मों को अमर बनाया है। लेकिन इस रूह को अपनी आवाज देने वाले कई ऐसे फनकार रहे हैं, जिनका अंतिम सफर बेहद अप्रत्याशित और दुखद रहा। हिंदी फिल्म जगत के इतिहास पर नजर डालें तो एक विचलित करने वाला तथ्य सामने आता है कि हमारे कई सबसे चहेते गायकों का निधन अचानक दिल का दौरा पड़ने से हुआ। इन कलाकारों ने अपनी गायकी से करोड़ों लोगों के दिलों को धड़कना सिखाया, लेकिन अफसोस कि नियति ने उनके अपने ही दिल पर ऐसा प्रहार किया कि संगीत की महफिलें हमेशा के लिए सूनी हो गईं। यह लेख उन 8 महान विभूतियों को समर्पित है जिनकी दुनिया एक झटके में खत्म हो गई, मगर उनके गीत आज भी अमरता की श्रेणी में गिने जाते हैं।

    आधुनिक दौर के सबसे लोकप्रिय गायकों में शुमार केके का जाना संगीत प्रेमियों के लिए किसी बुरे सपने जैसा था। वह अपनी ऊर्जा और मंच पर अपनी जीवंत प्रस्तुति के लिए जाने जाते थे। एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान जब वे अपने प्रशंसकों को झूमने पर मजबूर कर रहे थे, तभी उनकी तबीयत बिगड़ी। किसी को अंदाजा नहीं था कि मंच से उतरने के बाद वे वापस कभी नहीं लौटेंगे। अस्पताल ले जाने के दौरान हुई उनकी मृत्यु ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। इसी तरह, संगीतकार और गायक वाजिद खान के मामले में भी दिल का दौरा ही मौत की अंतिम वजह बना। हालांकि वे पहले से अस्वस्थ चल रहे थे, लेकिन अंततः उनके दिल ने साथ छोड़ दिया। उनके चले जाने से संगीत की एक प्रसिद्ध जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई, जिसने बॉलीवुड को अनगिनत हिट गाने दिए थे।

    पुराने दौर की बात करें तो किशोर कुमार और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों का जाना भारतीय संस्कृति की एक अपूरणीय क्षति थी। किशोर कुमार, जो अपनी हरफनमौला शख्सियत के लिए मशहूर थे, ने अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से ठीक एक दिन पहले उन्होंने एक भविष्य के प्रोजेक्ट के लिए गाना रिकॉर्ड किया था, जो बताता है कि वे अंत तक अपने काम के प्रति समर्पित थे। वहीं, मोहम्मद रफी साहब का जाना तो जैसे संगीत के एक युग का सूर्यास्त था। उन्हें जब दिल का दौरा पड़ा, तो वे अपने परिवार के बीच थे। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। इसी कड़ी में गायक मुकेश का नाम आता है, जिन्हें ‘राज कपूर की आवाज’ कहा जाता था। अमेरिका के एक दौरे पर जब वे पूरी दुनिया को भारतीय संगीत का जादू दिखा रहे थे, तभी हार्ट अटैक ने उनकी जीवनलीला समाप्त कर दी।

    मन्ना डे, महेंद्र कपूर और हेमंत कुमार जैसे शास्त्रीय और गंभीर गायकी के स्तंभों का अंत भी हृदय गति रुकने से हुआ। मन्ना डे ने दशकों तक अपनी आवाज से संगीत के विभिन्न रंगों को संवारा, लेकिन लंबी उम्र के पड़ाव पर दिल के दौरे ने उन्हें मौन कर दिया। महेंद्र कपूर, जिन्होंने अपनी दमदार आवाज से देशभक्ति के गीतों को नई ऊंचाई दी, वे भी किडनी और हृदय संबंधी समस्याओं के चलते शांत हो गए। हेमंत कुमार, जो अपनी जादुई और रूहानी आवाज के लिए जाने जाते थे, उनका सफर भी 69 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से थम गया। इन सभी कलाकारों में एक बात समान थी कि भले ही मौत ने उनके शारीरिक अस्तित्व को मिटा दिया हो, लेकिन जब तक दुनिया में संगीत रहेगा, इन 8 गायकों की आवाज हवाओं में गूंजती रहेगी। इनकी मौत ने हमें यह सिखाया कि जीवन क्षणभंगुर है, लेकिन कला अमर होती है।

  • होटल में साइलेंट अटैक से मालिक की मौत: थाली में सब्जी रखते ही गिरा, भाई की CPR भी काम नहीं आई

    होटल में साइलेंट अटैक से मालिक की मौत: थाली में सब्जी रखते ही गिरा, भाई की CPR भी काम नहीं आई


    नई दिल्ली। नर्मदापुरम के ग्वालटोली रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में गुरुवार रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें होटल संचालक अशोक नवलानी (60) का साइलेंट अटैक से निधन हो गया। घटना उस समय हुई जब अशोक नवलानी ग्राहकों को खाना परोस रहे थे। जैसे ही उन्होंने एक थाली में सब्जी रखी, अचानक वह जमीन पर गिर पड़े। घटना का सीसीटीवी वीडियो शनिवार सुबह सामने आया, जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि गिरते ही आसपास के लोग समझ नहीं पाए कि क्या हुआ। कुछ ही पलों में अशोक के भाई पप्पन नवलानी और अन्य कर्मचारी दौड़कर उन्हें उठाने पहुंचे और तुरंत सीपीआर देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
     
    अशोक नवलानी गोकुलपुरी की सिंधी कॉलोनी के निवासी थे और अपने भाई पप्पन नवलानी के साथ मिलकर ‘चाचा-भतीजा’ नाम से होटल चला रहे थे। पप्पन ने बताया कि गुरुवार रात दोनों दुकान पर ही थे। वह सब्जी बना रहे थे और अशोक ग्राहकों को टेबल पर खाना परोस रहे थे। थाली में सब्जी रखते ही अचानक गिरने के बाद उन्होंने सीपीआर की कोशिश की, लेकिन अशोक अचेत हो गए। डॉक्टरों ने अस्पताल पहुंचते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पप्पन ने आगे बताया कि अशोक परिवार में सबसे बड़े भाई थे, उनके छह भाई-बहन हैं, और उनकी एक बेटी की शादी हो चुकी है। पिछले तीन साल में गर्मियों में उन्हें दो-तीन बार हल्की घबराहट और बीपी कम होने की समस्या हुई थी, लेकिन हार्ट की कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

    नर्मदापुरम जिला अस्पताल के क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील जैन ने कहा कि आजकल असीमित दिनचर्या, तनाव, बिगड़ा खानपान और व्यायाम की कमी से हार्ट अटैक की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने सभी से कहा कि स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, नियमित रूटीन चेकअप कराएं, 7-8 घंटे की नींद लें और रोजाना व्यायाम या योग से तनाव कम करें।

    होटल में हुए इस हादसे ने स्थानीय लोगों और परिवार में शोक की लहर फैला दी है। अशोक नवलानी का निधन इस बात का भी संदेश देता है कि व्यस्त दिनचर्या और स्वास्थ्य पर ध्यान न देना गंभीर परिणाम ला सकता है।

    इस घटना की वजह से लोगों में चेतना बढ़ी है कि कार्यस्थल पर भी स्वास्थ्य और आराम को महत्व देना जरूरी है, खासकर व्यवसायिक जीवन में तनाव और थकान के बीच।