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  • दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोज अपनाएं ये 7 आसान आदतें, डाइट के साथ नींद और तनाव पर भी दें ध्यान

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोज अपनाएं ये 7 आसान आदतें, डाइट के साथ नींद और तनाव पर भी दें ध्यान

    नई दिल्ली ।दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल एक्सरसाइज करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। रोजमर्रा की जीवनशैली में खानपान, शारीरिक गतिविधि, नींद, तनाव और कुछ आदतों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नाश्ता छोड़ देते हैं, लंबे समय तक बैठे रहते हैं, पैकेज्ड फूड का अधिक सेवन करते हैं या देर रात तक जागते हैं। इन आदतों में सुधार करके दिल की सेहत का बेहतर ध्यान रखा जा सकता है।

    दिन की शुरुआत संतुलित नाश्ते से करना अच्छी आदत हो सकती है। भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स, बीज और प्रोटीन के बेहतर स्रोत शामिल किए जा सकते हैं। वहीं बहुत अधिक नमक, मीठे पेय, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और अनहेल्दी फैट वाली चीजों का सेवन सीमित रखना बेहतर है।

    अगर काम के कारण लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना पड़ता है तो बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना जरूरी है। फोन पर बात करते समय चलना, जहां संभव हो सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और नियमित वॉक जैसी छोटी गतिविधियां दिनभर की शारीरिक सक्रियता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

    खाने के बीच बार-बार पैकेज्ड स्नैक्स लेने की आदत पर भी ध्यान देना चाहिए। भोजन की मात्रा संतुलित रखना और पर्याप्त पानी पीना रोज की दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या मोटापे जैसी स्थितियों से जूझ रहे लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

    नींद को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। व्यस्त दिनचर्या के कारण देर रात तक जागने की आदत बन सकती है, लेकिन पर्याप्त और नियमित नींद शरीर के लिए जरूरी है। कोशिश करनी चाहिए कि सोने और जागने का समय नियमित रहे। रात में सोने से पहले मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कम करना भी नींद की दिनचर्या को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

    तनाव को नियंत्रित करने के लिए दिन में कुछ समय खुद के लिए निकालना उपयोगी हो सकता है। शांत बैठना, मेडिटेशन करना या काम के बीच छोटा ब्रेक लेना तनाव संभालने के आसान तरीके हो सकते हैं। लगातार तनावपूर्ण दिनचर्या के बजाय काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    धूम्रपान और तंबाकू का सेवन दिल तथा रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इसलिए हृदय की सेहत को ध्यान में रखते हुए इनसे दूरी बनाना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति तंबाकू का सेवन करता है तो इसे छोड़ने के लिए चिकित्सकीय सलाह और उचित सहायता ली जा सकती है।

    शराब का सेवन भी सीमित रखना जरूरी है। अत्यधिक शराब पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए शराब का सेवन करने वाले लोगों को इसकी मात्रा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।

    दिल की सेहत के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ, एक्सरसाइज या उपाय पर निर्भर रहने के बजाय पूरी जीवनशैली पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और तंबाकू से दूरी जैसी आदतों को लगातार अपनाने से स्वस्थ दिनचर्या बनाने में मदद मिल सकती है।

  • जल्दी बॉडी बनाने की चाहत में खतरनाक स्टेरॉयड ले रहे युवा, किडनी, लिवर और दिल पर बढ़ सकता है गंभीर जोखिम

    जल्दी बॉडी बनाने की चाहत में खतरनाक स्टेरॉयड ले रहे युवा, किडनी, लिवर और दिल पर बढ़ सकता है गंभीर जोखिम

    नई दिल्ली । तेजी से मसल्स बढ़ाने और शरीर को भारी बनाने की चाहत में जिम जाने वाले कुछ युवा अब सामान्य एक्सरसाइज, संतुलित आहार और प्रोटीन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कम समय में ज्यादा मसल्स हासिल करने के लिए कुछ लोग ऐसे स्टेरॉयड इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनका उपयोग पशुओं में किया जाता है। बोल्डेनोन, ट्रेनबोलोन और नैंड्रोलोन जैसे स्टेरॉयड इसी वजह से चिंता का विषय बन रहे हैं।

    बाहर से इन दवाओं का असर मांसपेशियों के आकार और शरीर की बनावट में बदलाव के रूप में दिखाई दे सकता है, लेकिन शरीर के भीतर इनका प्रभाव कहीं अधिक गंभीर हो सकता है। स्टेरॉयड के अनियंत्रित इस्तेमाल से हार्मोनल संतुलन प्रभावित होने के साथ किडनी, लिवर और हृदय से जुड़े जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ बिना चिकित्सकीय सलाह ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल से बचने की सलाह देते हैं।

    चेन्नई स्थित स्टैनले मेडिकल कॉलेज में हुई रिसर्च में 18 से 50 वर्ष की उम्र के 161 पुरुष जिम करने वालों को शामिल किया गया। इनमें 57 लोगों में ऐसे शारीरिक बदलाव पाए गए, जो स्टेरॉयड के इस्तेमाल से जुड़े थे। खास बात यह रही कि प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या 18 से 25 वर्ष की उम्र के युवाओं की थी। इससे कम उम्र में शरीर को तेजी से बदलने की कोशिश को लेकर चिंता बढ़ती है।

    रिसर्च में स्टेरॉयड इस्तेमाल करने वाले लोगों के रक्त परीक्षण में क्रिएटिनिन और लिवर एंजाइम का स्तर अधिक पाया गया। क्रिएटिनिन किडनी की कार्यप्रणाली से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जबकि लिवर एंजाइम में बदलाव शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर संकेत कर सकता है। हालांकि केवल इन परीक्षणों के आधार पर किसी व्यक्ति में स्थायी अंग क्षति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन ऐसे बदलाव चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत जरूर बताते हैं।

    स्टेरॉयड के इस्तेमाल को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका बंद किया जाना है। 79 पुरुषों पर किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि स्टेरॉयड छोड़ने के तीन महीने बाद वजन में उल्लेखनीय कमी देखी गई। इसका मतलब यह है कि स्टेरॉयड के जरिए हासिल किए गए शारीरिक बदलाव हमेशा स्थायी नहीं रहते। इस्तेमाल बंद होने के बाद शरीर में पहले दिखाई देने वाला वजन और मांसपेशियों का आकार कम हो सकता है।

    युवाओं में स्टेरॉयड लेने की प्रवृत्ति के पीछे जल्दी परिणाम पाने की इच्छा एक बड़ी वजह मानी जा रही है। सोशल मीडिया पर तेजी से बदली हुई बॉडी और मसल्स को देखकर कई लोग प्राकृतिक तरीके से मांसपेशियां विकसित करने के बजाय शॉर्टकट तलाशते हैं। समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब बिना सही जानकारी के पशुओं के लिए बनाई गई दवाओं को इंसानों पर इस्तेमाल किया जाता है।

    स्वस्थ तरीके से मसल्स बढ़ाने में समय लगता है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त आराम, संतुलित आहार और शरीर की जरूरत के अनुसार प्रोटीन का सेवन सुरक्षित तरीके से फिटनेस सुधारने में मदद कर सकता है। किसी भी स्टेरॉयड या हार्मोन संबंधी दवा का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं किया जाना चाहिए। तेजी से बदली हुई बॉडी आकर्षक दिखाई दे सकती है, लेकिन उसके पीछे छिपे स्वास्थ्य जोखिम लंबे समय तक परेशानी पैदा कर सकते हैं।

  • हार्ट को रखना है हमेशा हेल्दी? आज ही छोड़ दें ये 5 खराब आदतें, कम होगा दिल की बीमारियों का खतरा

    हार्ट को रखना है हमेशा हेल्दी? आज ही छोड़ दें ये 5 खराब आदतें, कम होगा दिल की बीमारियों का खतरा


    नई दिल्ली।
    स्वस्थ और लंबी जिंदगी के लिए दिल का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण हृदय संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उम्र या आनुवंशिक कारण ही नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कई आदतें भी हार्ट हेल्थ को प्रभावित करती हैं। यदि समय रहते इन आदतों में सुधार कर लिया जाए तो हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    लंबे समय तक लगातार बैठे रहना दिल के लिए नुकसानदायक माना जाता है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर काम करना या घर पर लंबे समय तक मोबाइल और टीवी के सामने बैठे रहना ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है। इससे वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 45 से 60 मिनट के बाद कुछ मिनट टहलें या हल्की स्ट्रेचिंग जरूर करें।

    जरूरत से ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन भी हार्ट हेल्थ के लिए हानिकारक हो सकता है। पैकेज्ड स्नैक्स, चिप्स, इंस्टेंट फूड और प्रोसेस्ड मीट में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके बजाय ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और घर का संतुलित भोजन अधिक लाभकारी माना जाता है।

    पर्याप्त नींद न लेना भी दिल की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। लगातार कम नींद लेने से तनाव हार्मोन बढ़ सकते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। अधिकांश वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की अच्छी गुणवत्ता वाली नींद जरूरी मानी जाती है।

    लगातार तनाव में रहना भी हृदय रोगों का बड़ा कारण बन सकता है। काम का दबाव, आर्थिक समस्याएं या निजी जीवन की परेशानियां लंबे समय तक बनी रहने पर रक्तचाप बढ़ सकता है। तनाव के कारण कई लोग धूम्रपान, अधिक भोजन या अन्य अस्वस्थ आदतों की ओर भी आकर्षित हो जाते हैं। नियमित योग, ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास और व्यायाम तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं।

    धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी हृदय के लिए बेहद नुकसानदायक है। धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है। वहीं अधिक मात्रा में शराब का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ाने के साथ हृदय की कार्यक्षमता पर भी असर डाल सकता है। इन आदतों से दूरी बनाना दिल की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना, वजन और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराना, तनाव को नियंत्रित रखना और किसी भी असामान्य लक्षण जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना या अत्यधिक थकान महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकता है।

  • नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी

    नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में नौतपा की शुरुआत के साथ भीषण गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और तेज धूप लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य लोगों की तुलना में पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी शरीर के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में लापरवाही कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा के दौरान शरीर पर हीट स्ट्रेस तेजी से बढ़ता है। अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। इसका सीधा असर शरीर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। खासतौर पर डायबिटीज, हार्ट, किडनी, अस्थमा और मोटापे से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर इन मरीजों को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    डायबिटीज के मरीजों में गर्मी का असर कई तरह से दिखाई देता है। शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है। कई बार डिहाइड्रेशन के कारण शुगर अचानक बढ़ या घट सकती है, जिससे मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इसके अलावा इंसुलिन की कार्यक्षमता पर भी अधिक तापमान असर डाल सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को समय-समय पर पानी पीने और शुगर की नियमित जांच करते रहने की सलाह दी जा रही है।

    किडनी रोगियों के लिए भी नौतपा का समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिक पसीना निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पहले से मौजूद समस्या गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना ऐसे मरीजों के लिए बेहद जरूरी है।

    हार्ट मरीजों के लिए भी बढ़ती गर्मी चिंता का विषय है। अत्यधिक तापमान शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र पर दबाव डालता है। कई मामलों में हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन की स्थिति बन सकती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसी तरह अस्थमा और सांस संबंधी मरीजों में गर्म हवा और वातावरणीय बदलाव सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकते हैं।

    डॉक्टरों की सलाह है कि नौतपा के दौरान दोपहर में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के और सूती कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने, तला-भुना भोजन कम खाने और शरीर को ठंडा रखने जैसे छोटे उपाय बड़ी समस्याओं से बचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही सावधानी और संतुलित दिनचर्या अपनाकर भीषण गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।