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  • सुबह या शाम कब करें वॉकिंग? गर्मियों में हेल्थ एक्सपर्ट्स की अहम सलाह

    सुबह या शाम कब करें वॉकिंग? गर्मियों में हेल्थ एक्सपर्ट्स की अहम सलाह

    नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए वॉकिंग को सबसे आसान और प्रभावी व्यायामों में से एक माना जाता है, लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही समय पर किया जाए। गलत समय पर की गई वॉकिंग शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है और कई बार यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के दौरान दिन के समय तापमान काफी अधिक हो जाता है, जिससे शरीर जल्दी थक जाता है और पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए वॉकिंग के लिए समय का सही चयन बेहद जरूरी माना जाता है। आमतौर पर सुबह और शाम का समय सबसे सुरक्षित और फायदेमंद होता है।

    सुबह के समय, खासकर 5 बजे से 7 बजे के बीच का समय वॉकिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा होता है और हवा भी साफ होती है, जिससे शरीर को ताजगी मिलती है। इस दौरान की गई वॉक न केवल शरीर को ऊर्जा देती है बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करने में मदद करती है। इसके अलावा सुबह के समय प्रदूषण का स्तर भी कम होता है, जिससे सांस लेने में आसानी रहती है और फेफड़ों पर दबाव कम पड़ता है।

    अगर किसी कारणवश सुबह वॉक करना संभव न हो, तो शाम का समय एक अच्छा विकल्प माना जाता है। शाम 6:30 बजे के बाद तापमान धीरे-धीरे कम होने लगता है और धूप का असर भी खत्म हो जाता है। इस समय की गई वॉक शरीर को रिलैक्स करने में मदद करती है और दिनभर की थकान को कम करती है। हालांकि बहुत देर रात तक वॉक करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे नींद का पैटर्न प्रभावित हो सकता है।

    दिन के समय, खासकर 11 बजे से 4 बजे के बीच वॉकिंग करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इस दौरान तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर के तापमान को तेजी से बढ़ा सकती हैं, जिससे हीट स्ट्रोक, सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह समय और भी अधिक खतरनाक माना जाता है, इसलिए इस अवधि में बाहर निकलने से बचना चाहिए।

    गर्मी में वॉकिंग के दौरान शरीर से पसीना अधिक निकलता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए वॉक से पहले और बाद में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। नारियल पानी और नींबू पानी जैसे पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकते हैं और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखते हैं।

    इसके अलावा वॉकिंग के दौरान हल्के और ढीले कपड़े पहनना भी जरूरी माना जाता है। हल्के रंग के कपड़े शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और गर्मी का असर कम महसूस होता है। धूप से बचाव के लिए टोपी और सनग्लासेस का उपयोग भी फायदेमंद हो सकता है।

  • गर्मी बढ़ते ही बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा, जानिए कैसे करें बचाव और रखें सेहत सुरक्षित

    गर्मी बढ़ते ही बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा, जानिए कैसे करें बचाव और रखें सेहत सुरक्षित


    नई दिल्ली। देशभर के कई राज्यों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्म हवाओं (लू) ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और तेज हो सकती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में लापरवाही भारी पड़ सकती है और सेहत पर गंभीर असर देखने को मिल सकता है।

    गर्मी का यह मौसम शरीर को तेजी से डिहाइड्रेट करता है, जिससे थकान, कमजोरी और चक्कर जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में सतर्क रहना और समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

     हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानना जरूरी

    हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉर्शन की स्थिति अचानक गंभीर रूप ले सकती है। इसके शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

    इन लक्षणों पर विशेष ध्यान दें-

    अचानक कमजोरी या अस्वस्थ महसूस होना
    चक्कर आना
    ज्यादा पसीना आना या पसीना अचानक बंद हो जाना
    मांसपेशियों में ऐंठन
    शरीर का तापमान बढ़ना

    यदि ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सावधानी बरतना जरूरी है, वरना स्थिति गंभीर हो सकती है।

     हीट स्ट्रोक से बचाव के जरूरी उपाय

    गर्मी में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं-

    ठंडी जगह पर रहें
    अगर अस्वस्थ महसूस हो तो तुरंत छायादार या ठंडी जगह पर जाएं।
    शरीर को हाइड्रेट रखें
    भरपूर पानी पिएं और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें।
     ORS और घरेलू पेय का सेवन करें

    नींबू पानी, छाछ, नमक-शक्कर का घोल और ओआरएस शरीर में ऊर्जा और पानी की कमी को पूरा करते हैं।

    हल्के कपड़े पहनें

    ढीले और सूती कपड़े शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।

     हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें?

    यदि किसी व्यक्ति को हीट स्ट्रोक हो जाए तो तुरंत ये कदम उठाएं-

    व्यक्ति को ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं
    शरीर को ठंडा करने के उपाय करें
    तरल पदार्थ पिलाएं (अगर होश में हो)
    लक्षण गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

    गर्मी का मौसम जितना सामान्य दिखता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और समय पर सावधानी से इससे बचा जा सकता है। शरीर को हाइड्रेट रखना, धूप से बचाव करना और शुरुआती लक्षणों को पहचानना इस मौसम में सबसे जरूरी कदम हैं।

  • Heatwave Alert: शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है? बढ़ते तापमान में बड़ा सवाल

    Heatwave Alert: शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है? बढ़ते तापमान में बड़ा सवाल


    नई दिल्ली।देश के कई हिस्सों में गर्मी ने एक बार फिर अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई राज्यों में हालात ऐसे हैं कि दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इस बीच लू का असर भी तेज हो गया है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। ऐसे माहौल में सबसे अहम सवाल यह उठता है कि आखिर इंसानी शरीर कितनी गर्मी सह सकता है और कब यह सीमा टूटने लगती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानी शरीर की गर्मी सहने की क्षमता सिर्फ तापमान पर निर्भर नहीं करती, बल्कि हवा में मौजूद नमी भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। इसे समझने के लिए “वेट बल्ब तापमान” की अवधारणा का उपयोग किया जाता है। यह बताता है कि शरीर पसीने के जरिए खुद को कितनी प्रभावी तरह से ठंडा कर सकता है। सामान्य तौर पर पहले माना जाता था कि इंसान लगभग 35 डिग्री सेल्सियस तक के वेट बल्ब तापमान को सहन कर सकता है, लेकिन नई समझ के अनुसार यह सीमा लगभग 30 से 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास मानी जाती है। इससे अधिक होने पर शरीर की प्राकृतिक ठंडा करने की प्रक्रिया कमजोर पड़ने लगती है।

    नमी वाली गर्मी को सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसमें पसीना शरीर से जल्दी वाष्पित नहीं हो पाता। जब पसीना सूख नहीं पाता तो शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और अंदरूनी तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यही कारण है कि कम तापमान होने के बावजूद अधिक नमी वाली जगहों पर गर्मी ज्यादा असहनीय महसूस होती है।

    जब शरीर का तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच जाता है, तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। इस अवस्था को हीट स्ट्रोक कहा जाता है, जिसमें शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला तंत्र पूरी तरह से प्रभावित हो जाता है। इसके शुरुआती संकेतों में चक्कर आना, सिर दर्द, भ्रम की स्थिति, तेज कमजोरी और घबराहट शामिल होते हैं। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।

    तेज गर्मी का असर केवल बाहरी शरीर पर ही नहीं, बल्कि अंदरूनी अंगों पर भी पड़ता है। दिमाग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है, जिससे व्यक्ति मानसिक भ्रम या बेहोशी की स्थिति में जा सकता है। दिल को भी सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर पर तनाव बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर शरीर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।

    ऐसे मौसम में सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है। दोपहर के समय धूप में निकलने से बचना चाहिए, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करनी चाहिए। हल्के कपड़े पहनना, छांव में रहना और शरीर में पानी की कमी न होने देना जरूरी है। साथ ही ज्यादा मेहनत वाले काम गर्मी के समय से बचकर करने चाहिए।

    बढ़ती गर्मी और लू के इस दौर में जागरूक रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। समय पर सावधानी अपनाकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है और शरीर को इस बढ़ते तापमान के खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • बढ़ती गर्मी और हीटवेव के कारण बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे अधिक खतरा है..

    बढ़ती गर्मी और हीटवेव के कारण बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे अधिक खतरा है..


    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और हीटवेव की स्थिति लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ऐसे मौसम में सबसे अधिक जोखिम बच्चों और बुजुर्गों को होता है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को सामान्य रूप से नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होता। इसके कारण वे जल्दी डिहाइड्रेशन और लू जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकते हैं, जो कई बार गंभीर स्थिति भी पैदा कर सकती हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता और उनकी पसीने की ग्रंथियां भी कम सक्रिय होती हैं, जिससे शरीर से गर्मी बाहर निकलने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। दूसरी ओर, बुजुर्गों में उम्र बढ़ने के साथ शरीर की सहनशीलता कम हो जाती है और कई बार स्वास्थ्य समस्याओं या दवाइयों के प्रभाव के कारण भी शरीर तापमान को संतुलित नहीं कर पाता। यही कारण है कि ये दोनों वर्ग गर्मी के मौसम में अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।

    लू लगने की स्थिति में कई शुरुआती संकेत दिखाई देते हैं, जैसे तेज सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी महसूस होना और मतली जैसी समस्या। यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए समय पर सावधानी और इलाज बेहद जरूरी है।

    इस मौसम में सबसे महत्वपूर्ण उपाय पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन है। बच्चों और बुजुर्गों को नियमित अंतराल पर पानी पिलाना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। इसके अलावा नींबू पानी, छाछ और ओआरएस जैसे पेय भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।

    धूप से बचाव भी उतना ही जरूरी है। बाहर निकलते समय हल्के और सूती कपड़े पहनने चाहिए, सिर को ढकना चाहिए और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना चाहिए। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि दोपहर के समय, जब धूप सबसे तेज होती है, बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर ही रखा जाए।

    खानपान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। भारी, तैलीय और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए और हल्का, पौष्टिक तथा आसानी से पचने वाला भोजन लेना चाहिए। ताजे फल, सब्जियां और दही शरीर को ठंडक देने में मदद करते हैं। साथ ही, अत्यधिक कैफीन और शराब जैसे पेय पदार्थों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि ये शरीर को और अधिक डिहाइड्रेट कर सकते हैं।

    घर के वातावरण को ठंडा रखना भी महत्वपूर्ण है। पंखे, कूलर या एसी का उपयोग करके कमरे का तापमान नियंत्रित किया जा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों की नियमित निगरानी आवश्यक है ताकि किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत कदम उठाया जा सके। यदि किसी को लू लगने का संदेह हो तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाकर शरीर को ठंडा करना चाहिए और चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।