Tag: heavy rain

  • मूसलाधार बारिश के बाद इंदौर में दर्दनाक हादसा नाले में बहे युवक का शव बरामद अहीरखेड़ी का युवक अब भी लापता

    मूसलाधार बारिश के बाद इंदौर में दर्दनाक हादसा नाले में बहे युवक का शव बरामद अहीरखेड़ी का युवक अब भी लापता


    इंदौर । इंदौर में लगातार हो रही तेज बारिश के बीच हुए हादसों ने शहर को झकझोर दिया है। बुधवार शाम हुई मूसलाधार बारिश के दौरान अलग अलग स्थानों पर तेज बहाव में दो युवक बह गए थे। इनमें लसूड़िया क्षेत्र से लापता हुए युवक का शव गुरुवार सुबह बरामद कर लिया गया जबकि अहीरखेड़ी क्षेत्र से बहा युवक अब भी लापता है। पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही है।

    पुलिस के अनुसार लसूड़िया मोरी निवासी 34 वर्षीय गोलू पंवार बुधवार रात करीब नौ बजे अपने पिता के लिए खाना लेकर जा रहा था। रास्ते में वह नाले के किनारे से गुजर रहा था तभी तेज बारिश के कारण बढ़े पानी के बहाव में उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नाले में बह गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने रात में उसकी तलाश शुरू की लेकिन अंधेरा और तेज बहाव के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

    गुरुवार सुबह एसडीईआरएफ की टीम ने दोबारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद गोलू का शव पुल के नीचे कचरे में फंसा मिला। टीम ने शव को बाहर निकालकर पुलिस को सौंप दिया जिसके बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया। गोलू ईंट निर्माण फैक्ट्री में काम करता था। उसके परिवार में माता पिता और छोटा भाई हैं। उसके पिता एक निजी कंपनी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    दूसरी ओर अहीरखेड़ी क्षेत्र में बुधवार को तेज बहाव में बहा युवक महेश चौहान अब भी लापता है। जानकारी के अनुसार महेश अपने दोस्त मनीष के साथ पुल की रपट पार कर रहा था। इसी दौरान दोनों पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए। मनीष किसी तरह खुद को बचाने में सफल रहा लेकिन महेश बह गया और तब से उसका कोई पता नहीं चल सका है।

    पुलिस और राहत दल ने बुधवार रात से ही आसपास के इलाकों में खोज अभियान शुरू कर दिया था। गुरुवार सुबह भी एसडीईआरएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया लेकिन समाचार लिखे जाने तक महेश का कोई सुराग नहीं मिला था। अधिकारियों का कहना है कि पानी का बहाव कम होने के साथ खोज अभियान लगातार जारी रहेगा।

    लगातार हो रही बारिश के कारण शहर के कई नाले और पुलिया उफान पर हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों नालों और रपटों को पार करने का प्रयास न करें तथा मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भी ऐसे मौसम में बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

  • क्रेडिट कार्ड का कर्ज नहीं चुका पाया डिलीवरी बॉय ने उठाया खौफनाक कदम इंदौर में दो युवकों की मौत से सनसनी

    क्रेडिट कार्ड का कर्ज नहीं चुका पाया डिलीवरी बॉय ने उठाया खौफनाक कदम इंदौर में दो युवकों की मौत से सनसनी


    इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच एक युवा डिलीवरी बॉय की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चंदन नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले 25 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वह लंबे समय से आर्थिक परेशानियों और क्रेडिट कार्ड के कर्ज को लेकर तनाव में था। वहीं शहर के आजाद नगर क्षेत्र में भी एक 21 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी। दोनों मामलों की पुलिस जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार चंदन नगर के व्यास नगर निवासी लखन कोटे ने बुधवार को अपने घर में जहरीला पदार्थ खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर उसकी पत्नी ने परिवार के अन्य सदस्यों को सूचना दी जिसके बाद परिजन उसे तत्काल एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन गुरुवार तड़के उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि लखन पार्सल डिलीवरी का काम करने के साथ साथ रेपिडो चलाकर भी परिवार का खर्च उठाता था। पिछले कुछ समय से आमदनी कम हो गई थी जबकि खर्च लगातार बढ़ रहे थे। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कर्ज लिया था। परिजनों के अनुसार वह समय पर भुगतान नहीं कर पा रहा था और इसी कारण मानसिक तनाव में रहने लगा था। हालांकि उसने कितना कर्ज लिया था इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    लखन की शादी करीब डेढ़ वर्ष पहले हुई थी। परिवार में उसके माता पिता पत्नी और बड़ा भाई हैं। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है इसलिए आत्महत्या के कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस आर्थिक लेनदेन और अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

    इधर आजाद नगर थाना क्षेत्र के इदरीश नगर में रहने वाले 21 वर्षीय अनोज एड्रयू ने भी अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। उसका शव कुछ परिचित लोग अस्पताल लेकर पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि शव अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। फिलहाल इस मामले में भी जांच जारी है और आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव की गंभीरता की ओर संकेत करती हैं। पुलिस दोनों मामलों में सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट

    दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) और एनसीआर (NCR) में गुरुवार रात तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश (Strong Winds, Thunderstorms Rain) के साथ मौसम ने अचानक करवट ले ली. दिनभर की भीषण गर्मी (Scorching heat) और उमस के बाद आई बारिश ने लोगों को राहत दी, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रेड अलर्ट जारी कर दिया।

    दिल्ली के कई इलाकों में देर रात तेज हवाएं चलीं, आसमान में घने बादल छा गए और बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है. इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और उनके झोंके 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है.

    IMD ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, कमजोर ढांचों और पेड़ों से दूर रहने तथा खुले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है. विभाग के मुताबिक रेड अलर्ट का मतलब है कि मौसम की स्थिति जान-माल के लिए खतरा पैदा कर सकती है और तत्काल सावधानी बरतना जरूरी है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पाकिस्तान और उससे सटे क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ी है. इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में मौसम तेजी से बदल रहा है.


    दिल्ली समेत इन राज्यों में आज भी बारिश

    शुक्रवार को भी उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम सक्रिय रहेगा. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर राजस्थान में गरज-चमक, तेज हवाओं और धूल भरी आंधी की संभावना है. वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. केरल, तटीय कर्नाटक, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, सिक्किम और पश्चिमी असम में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है।

    हालांकि बारिश के बावजूद राजस्थान और विदर्भ के कुछ हिस्सों में लू का असर जारी रह सकता है. गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि उमस के कारण महसूस किया जाने वाला तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बादल और बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।

  • 36 घंटे में बदलेगा मौसम का मिजाज, 17 राज्यों में भारी बारिश-आंधी का अलर्ट; 90 किमी रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

    36 घंटे में बदलेगा मौसम का मिजाज, 17 राज्यों में भारी बारिश-आंधी का अलर्ट; 90 किमी रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं


    नई दिल्ली ।
    भीषण गर्मी से जूझ रहे देश के कई हिस्सों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। आगामी 36 घंटों के दौरान मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और वज्रपात की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। तेज हवाओं के साथ बारिश का यह दौर कई इलाकों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। किसानों को भी फसलों की सुरक्षा को लेकर सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।

    गर्मी के बीच मौसम ने बदली चाल

    लगातार बढ़ते तापमान और लू के हालात के बीच मौसम में यह बदलाव राहत लेकर आ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण बिहार और आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके साथ ही पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी और आसपास के इलाकों में भी एक मजबूत मौसम प्रणाली विकसित हुई है। इन प्रणालियों के प्रभाव से पूर्वी और उत्तरी भारत में मौसम तेजी से बदलने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिमी मध्य प्रदेश सहित 17 राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका जताई गई है।

    पूर्वी राज्यों में ज्यादा असर की आशंका

    मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार पूर्वी भारत के राज्यों में मौसम का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। इसके साथ ही बिजली गिरने और वज्रपात का भी खतरा बना रहेगा। ऐसे हालात में लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।

    बिहार के कई जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी की संभावना जताई गई है। राजधानी पटना में तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं झारखंड के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश का असर दिखाई दे सकता है। पश्चिम बंगाल के दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में भी मौसम का प्रभाव बना रहेगा।

    दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत पर नजर

    राष्ट्रीय राजधानी और उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी मौसम तेजी से बदल सकता है। दिल्ली में फिलहाल तापमान ऊंचा बना रहेगा, लेकिन आने वाले दिनों में तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी जिलों में बारिश के साथ तेज हवा चलने के संकेत हैं। कई शहरों में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

    उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भी मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। तेज हवाओं और बारिश के चलते यात्रा करने वाले लोगों को मौसम अपडेट देखने के बाद ही सफर करने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस बदलाव से कई क्षेत्रों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है, हालांकि तेज हवाओं और वज्रपात के कारण सतर्कता बेहद जरूरी रहेगी।

  • Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    इस मानसून सत्र (Monsoon Session) में देश के लगभग आधे हिस्से, उत्तर और मध्य भारत (North and Central India) में भीषण सूखा पड़ने की आशंका है। जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश (Monsoon Rains) के भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इसका प्रमुख कारण प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में बन रहा शक्तिशाली अल नीनो है। इसकी वजह से दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में भीषण बाढ़ का खतरा भी है। कृषि प्रधान भारत के लिए मानसून की यह स्थिति बहुत भयावह है, जो बहुत हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है। भारत के लिए अल नीनो हमेशा से ही खराब रहा है। इस बार मजबूत अल नीनो बन रहा है, जिसका भयावह परिणाम हो सकता है। मजबूत अल नीनो दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है। इसका नतीजा यह होता है कि देश के अधिकांश हिस्से में बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाता हैं। इस बार उत्तर और मध्य भारत में कुछ ऐसी ही स्थिति की आशंका है। दूसरी तरफ, तमिनलाडु, आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में तबाही वाली बढ़ आ सकती है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार सामान्य तिथि से करीब चार दिन पहले, यानी 26 मई के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है। शनिवार को यह दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान- निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ा है। इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।


    यूपी, हरियाणा-पंजाब में सबसे ज्यादा असर

    शक्तिशाली अल नीनो का सबसे अधिक उत्तर और मध्य भारत पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर के लिए गर्मी और सूखे के दोहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    मानसूनी बारिश कम होने से प्रमुख फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी मानसून से आता है और लगभग आधी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कम बारिश वाला वर्ष भी व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है।


    आईओडी कम कर सकता है असर

    इस भयावह आशंका के बीच इंडियन ओशन डिपोल’ (आईओडी) के रूप में एक उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है। जलवायु मॉडल के अनुसार मानसून के आखिरी महीनों में आईओडी सकाकात्मक हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। मानसूनी हवाओं को थोड़ी मजबूती मिल सकती है जिससे कुछ इलाकों में बारिश की वापसी संभव है।


    लू घोषित करने के मापदंडों में बदलाव करेगा आईएमडी

    आईएमडी अपने विशेषज्ञों के साथ मिलकर जल्द ही देश में लू की स्थिति घोषित करने के मानदंडों में संशोधन करेगा। मौजूदा मापदंड भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं हैं। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस गर्मी के मौसम में लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा तथा पहली बार कर्नाटक-महाराष्ट्र तट के पास बने चक्रवाती तंत्र के आधार पर मौसम पूर्वानुमान जारी किए गए। इससे पहले कभी भी दक्षिण के इतने करीब कोई चक्रवाती तंत्र नहीं बना था और इस बार हमें इसी के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाना पड़ा।


    870 मिलीमीटर होनी चाहिए औसत बारिश

    आईएमडी के पूर्वानुमान एक अनुसार, इस साल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के केवल 92 फीसदी होने की संभावना है। एलपीए का यह स्तर सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है। साल 1971 से 2020 के डाटा के आधार पर भारत में औसत बारिश 870 मिलीमीटर होनी चाहिए, लेकिन इस बार इससे कम बारिश होने की आशंका है। आंकड़ों के मुताबिक इस बार सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35% है। यह सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। जून या जुलाई में अल नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।


    44.8 डिग्री पर तपा बांदा

    उत्तर प्रदेश में भी भीषण गर्मी पड़ रही है। शनिवार को राज्य में अधिकतम स्थानों पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर ही रहा। बांदा में सबसे अधिक तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, झांसी में 44.1 डिग्री, प्रयागराज में 44 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा। आगरा में 43 डिग्री सेल्सियस, गाजीपुर में 42 डिग्री सेल्सियस और वाराणसी हवाई अड्डे पर 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया।

  • बारिश और ओलावृष्टि के बीच चार धाम यात्रा: आस्था का सफर बना चुनौती, यात्रियों के लिए जारी हुए अहम सुरक्षा संकेत

    बारिश और ओलावृष्टि के बीच चार धाम यात्रा: आस्था का सफर बना चुनौती, यात्रियों के लिए जारी हुए अहम सुरक्षा संकेत

    नई दिल्ली ।  उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में इन दिनों मौसम ने करवट ले ली है और लगातार हो रही भारी बारिश तथा ओलावृष्टि ने चार धाम यात्रा को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यह यात्रा, जो आस्था और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है, अब यात्रियों के लिए सावधानी और तैयारी की परीक्षा बन गई है। पहाड़ी इलाकों में बदलते मौसम ने यात्रा मार्गों पर जोखिम बढ़ा दिया है और प्रशासन लगातार यात्रियों को सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

    चार धाम यात्रा का मार्ग अपने आप में कठिन माना जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में यह और भी संवेदनशील हो जाता है। कई जगहों पर भूस्खलन, सड़क फिसलन और अचानक रास्ता बंद होने जैसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे हालात में बिना तैयारी यात्रा करना खतरनाक साबित हो सकता है और किसी भी समय अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात मौसम की लगातार निगरानी रखना है। पहाड़ों में मौसम बहुत तेजी से बदलता है, जहां कुछ ही घंटों में साफ आसमान अचानक घने बादलों और तेज बारिश में बदल सकता है। इस कारण यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले और यात्रा के दौरान मौसम के अपडेट पर ध्यान देना जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में खराब मौसम या चेतावनी जैसी स्थिति बनी हो तो यात्रा को कुछ समय के लिए रोक देना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

    चार धाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए समय प्रबंधन भी बेहद जरूरी भूमिका निभाता है। सुबह के समय यात्रा शुरू करना अधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि दिन के शुरुआती हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। वहीं शाम के समय पहाड़ी क्षेत्रों में धुंध और बारिश का असर बढ़ जाता है, जिससे दृश्यता कम हो जाती है और दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा दिन के उजाले में ही पूरी करने की कोशिश करें।

    यात्रा के दौरान हल्का और आवश्यक सामान ही साथ रखना समझदारी भरा कदम है। भारी बैग और अनावश्यक वस्तुएं पहाड़ी रास्तों पर चलने में कठिनाई पैदा कर सकती हैं। बारिश से बचाव के लिए रेनकोट और वाटरप्रूफ कपड़े, साथ ही मजबूत पकड़ वाले जूते यात्रा का हिस्सा होना चाहिए। विशेष रूप से ट्रैकिंग मार्गों पर फिसलन का खतरा अधिक होता है, इसलिए सही जूते और सावधानी बेहद जरूरी है।

    स्वास्थ्य सुरक्षा भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड और कम ऑक्सीजन के कारण थकान, सांस लेने में कठिनाई और कमजोरी जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। बुजुर्गों और बच्चों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। जिन लोगों को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें यात्रा से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

    इसके साथ ही यात्रियों को यह भी समझना होगा कि मौसम खराब होने पर धैर्य रखना और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। कई बार यात्रा को रोकना या मार्ग बदलना असुविधाजनक हो सकता है, लेकिन यह निर्णय जीवन सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    कुल मिलाकर कहा जाए तो चार धाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का मार्ग नहीं बल्कि प्रकृति की कठिन परिस्थितियों में धैर्य, तैयारी और सावधानी की परीक्षा भी है। सही योजना, सतर्कता और मौसम के प्रति जागरूकता इस पवित्र यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाने की सबसे बड़ी कुंजी है।

  • उत्तर-पश्चिम भारत में बदला मौसम, आंधी-तूफान के साथ हुई झमाझम बारिश.. आज इन राज्यों में अलर्ट

    उत्तर-पश्चिम भारत में बदला मौसम, आंधी-तूफान के साथ हुई झमाझम बारिश.. आज इन राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) के पहाड़ी इलाकों और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली। आंधी-तूफान (Thunderstorms) के साथ कहीं हल्की तो कहीं झमाझम बारिश (Light to heavy rain) हुई। कुछ क्षेत्रों में धूल भरी आंधी और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को भी उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में छिटपुट से लेकर कई स्थानों पर गरज और चमक के साथ बारिश होने, 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और ओलावृष्टि की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश और ओलावृष्टि हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट स्थानों पर 11-20 सेमी तक वर्षा दर्ज की गई है। कुछ जगहों पर 60-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में ओले गिरे। इसके अलावा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम, ओडिशा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम तथा त्रिपुरा में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम में बदलाव से अधिकतम तापमान में 3-5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल के गंगा किनारे वाले क्षेत्रों, उप-हिमालयी पश्चिमी बंगाल और सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से कम दर्ज किया गया। विदर्भ, तटीय आंध्र प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, राजस्थान में अधिकतम तापमान 36-40 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। सबसे अधिक तेलंगाना के आदिलाबाद में 45.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।


    आज भी आंधी-पानी का अलर्ट

    मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फरबाद और हिमाचल प्रदेश में 6 मई तक और उत्तराखंड में 8 मई तक छिटपुट से लेकर हल्की बारिश और बर्फबारी होने, गरज और बिजली की कड़क के साथ 30-50 किमी प्रति घंटा की गति से हवाएं चलने की संभावना है। मंगलवार को राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और बिहार में भी बारिश हो सकती है। इससे गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है। दिल्ली समेत एनसीआर के गाजियाबाद, नोएडा और हापुड़ में बिजली कड़कने, तेज आंधी और ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

  • भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी

    भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    मौसम के बदलते मिजाज (Changing Weather patterns) और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने इस साल चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ‘अल नीनो’ (Super El Nino) का वह खतरनाक रूप है, जो इस साल पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित कर रहा है। प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का पानी जब असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो उस मौसमी घटना को ‘अल नीनो’ कहते हैं। इसका असर भारत (India) पर अभी से देखने को मिल रहा है।

    हालांकि दक्षिणी राज्य केरल के लिए अच्छी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए अगले 5 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


    इन जिलों में जारी हुआ ‘येलो अलर्ट’

    IMD के 5-दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अप्रैल, 2026 के लिए केरल के चार प्रमुख जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है:- पथानामथिट्टा, इडुक्की, कुन्नूर, कासरगोड।

    मौसम विभाग के अनुसार, ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ है कि लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी के बीच भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।


    ‘सुपर अल नीनो’ क्या है?

    जब समुद्र की सतह का तापमान अपने दीर्घकालिक औसत से 2°C (या उससे अधिक) ऊपर चला जाता है, तो यह एक असाधारण और विनाशकारी रूप ले लेता है, जिसे वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ कहते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और कई ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स ने चेतावनी दी है कि 2026 में मई-जुलाई तक यह स्थिति हावी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ इसे पिछले 140 सालों के सबसे ताकतवर चक्रों में से एक मान रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम के चरम रूप के तौर पर सामने आता है।

    मॉनसून और अल नीनो (El Nino) से इसका संबंध

    गर्मियों के मौसम में अचानक होने वाली यह भारी बारिश जलवायु परिवर्तन और विशेष रूप से अल नीनो प्रभाव का परिणाम है, जिसका सीधा असर भारत के मॉनसून चक्र पर पड़ता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है।

    प्री-मॉनसून गतिविधियां: अल नीनो में प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। भले ही अल नीनो आमतौर पर भारत में मुख्य ‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून’ (जून से सितंबर) को कमजोर कर देता है, लेकिन मॉनसून से ठीक पहले (प्री-मॉनसून) के चरण में यह बहुत ही अस्थिर मौसम उत्पन्न कर सकता है।

    ला नीना से अल नीनो का संक्रमण: साल 2026 की शुरुआत में ‘ला नीना’ का प्रभाव कमजोर हुआ है और यह ‘अल नीनो’ की तरफ बढ़ रहा है। समुद्र के बढ़ते तापमान और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के इस जटिल टकराव के कारण ही केरल में एकाएक बेमौसम भारी बारिश और तूफान देखने को मिल रहे हैं।

    मॉनसून के मौसम पर ‘छाया’: यह अप्रत्याशित बारिश इस बात का संकेत है कि इस साल मुख्य मॉनसून चक्र में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मॉनसून की शुरुआत से पहले ही कहीं अचानक तीव्र बारिश तो कहीं लू (हीटवेव) चलने जैसी स्थितियां बन रही हैं।


    भारत में अभी से इतनी ‘आग’ क्यों बरस रही है?

    अप्रैल 2026 में ही उत्तर प्रदेश (बांदा, फतेहपुर, इटावा जैसे जिले), मध्य प्रदेश और कई अन्य हिस्सों में तापमान 45-46°C को पार कर गया है। इसके पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण एक साथ काम कर रहे हैं। साल की शुरुआत में ला नीना (ठंडा चरण) खत्म हो गया है और पृथ्वी तेजी से ‘अल नीनो’ के गर्म चरण में जा रही है। इससे वायुमंडल में गर्माहट काफी तेजी से बढ़ रही है।

    उत्तर और मध्य भारत के ऊपर बादलों का कोई कवर नहीं है। साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे हवा का एक ‘गर्म गुंबद’ बन गया है जो गर्मी को बाहर नहीं निकलने दे रहा। उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है। हवा में नमी न के बराबर है और वहां से आने वाली सूखी महाद्वीपीय हवाएं तापमान को सीधे बढ़ा रही हैं, जिससे शहरों का माहौल किसी भट्टी जैसा हो गया है।


    इस साल कैसा रहेगा मॉनसून और कब होगी बारिश?

    भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले मॉनसून पर इस साल ‘अल नीनो’ की स्पष्ट छाया मंडरा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने लंबी अवधि के पूर्वानुमान में यह तस्वीर साफ कर दी है। IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून से सितंबर) के “सामान्य से नीचे” रहने की संभावना सबसे अधिक है। देश भर में इस बार औसतन मात्र 92% बारिश (LPA का) होने का अनुमान है।

    कब आएगा मॉनसून?

    आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट से टकराता है। हालांकि मानसून अपने समय पर दस्तक दे सकता है, लेकिन जुलाई-अगस्त तक अल नीनो पूरी तरह हावी हो जाएगा। इससे मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बारिश के वितरण में भारी असमानता देखने को मिल सकती है। बारिश कम होने और तापमान अधिक रहने से धान, दलहन और गन्ने जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो एक बड़ी आर्थिक चिंता का विषय है।

  • Weather: गर्मी के मौसम में तेज बारिश.. ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान… कई राज्यों में आज भी अलर्ट

    Weather: गर्मी के मौसम में तेज बारिश.. ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान… कई राज्यों में आज भी अलर्ट


    नई दिल्ली।
    पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और ऊपरी हवा में बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से देशभर के मौसम (Weather) में बड़ा बदलाव दर्ज किया जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत (North India.) में दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में भारी बारिश (Heavy Rain), तेज आंधी, तूफान और ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी जारी की गई है। 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं, जबकि किसानों को फसलों के नुकसान का खतरा बढ़ गया है।

    देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जहां 64.5 से 115.5 मिमी तक वर्षा होने का अनुमान है। इन इलाकों में ऑरेंज अलर्ट लागू है और कई स्थानों पर पहले से ही बादल छाए हुए हैं तथा बारिश का दौर जारी है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते भूस्खलन जैसी घटनाओं की आशंका भी जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय है। इसके साथ ही ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है और पश्चिमी भारत के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम लगातार सक्रिय है। इन सभी मौसमीय प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से देश के विभिन्न हिस्सों में अस्थिर मौसम की स्थिति बनी हुई है, जिसमें बारिश, तूफान और ओलावृष्टि शामिल हैं।


    राजस्थान के कई जिलों में खेतों में बिछी सफेद चादर

    राजस्थान में शनिवार को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दोपहर बाद मौसम में बदलाव आया। जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर सहित कई जिलों में गरज के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और हल्की से मध्यम बारिश के साथ छिटपुट ओलावृष्टि भी हुई। बीकानेर में शुक्रवार को खेतों में ओले बिछे नजर आए थे। मौसम विभाग ने बताया कि एक नया और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ 6 अप्रैल की दोपहर से जोधपुर और बीकानेर के कुछ हिस्सों में सक्रिय होने की संभावना है।

    इसके प्रभाव से जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा डिवीजनों के कई हिस्सों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने, कुछ जगहों पर भारी बारिश होने और छिटपुट ओलावृष्टि होने की संभावना है।


    बंगाल में उमस भरी गर्मी जारी

    जहां एक ओर उत्तर और पश्चिम भारत में मौसम ठंडा और अस्थिर हो रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय क्षेत्रों में गर्म और उमस भरा मौसम बना हुआ है। इस तरह की उमस शरीर को थकाने वाली होती है और स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है।


    पिछले 24 घंटों में बारिश का असर

    पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई है। जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और कर्नाटक के कुछ इलाकों में अच्छी वर्षा हुई है। जम्मू-कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में 50 मिमी तक बारिश दर्ज की गई, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों, केरल और माहे में 20 मिमी तक हल्की से मध्यम वर्षा हुई।


    अस्थिर रहेगा मौसम, कुछ दिन और जारी रहेगा असर

    आने वाले कुछ दिनों तक बारिश, आंधी, तूफान और ओलावृष्टि की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने उत्तर भारत के लोगों और किसानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। मौसम विभाग ने लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। आंधी और बिजली के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचें और पेड़ों के नीचे खड़े न हों। घर की छत पर रखी ढीली वस्तुओं को सुरक्षित करें और वाहनों को छत के नीचे पार्क करें ताकि ओलों से नुकसान न हो। बिजली गिरने के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।


    तापमान में गिरावट मौसम रहेगा ठंडा

    मौसम के इस बदलाव का असर तापमान पर भी साफ दिखाई देगा। उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है। आने वाले कुछ दिनों तक मौसम ठंडा और अस्थिर बना रह सकता है, हालांकि बाद में तापमान में हल्की बढ़ोतरी के संकेत भी हैं। देश में ओडिशा के झारसुगुड़ा में अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर में 16.2 डिग्री सेल्सियस रहा।


    दक्षिण भारत भी अछूता नहीं, केरल में भारी बारिश के आसार

    उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी मौसम का असर देखा जा रहा है। केरल और माहे में भी 64.5 से 115.5 मिमी तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। यहां गरज के साथ तेज बारिश का पूर्वानुमान है, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात प्रभावित हो सकता है।

  • मध्य भारत से लेकर कश्मीर से तक तेज बारिश का अलर्ट… MP-महाराष्ट्र में होगी ओलावृष्टि!

    मध्य भारत से लेकर कश्मीर से तक तेज बारिश का अलर्ट… MP-महाराष्ट्र में होगी ओलावृष्टि!


    भोपाल।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी भारत (North-Western India.) इस समय दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभों (Strong Western Disturbances) के प्रभाव में है. इसका सीधा असर कश्मीर से लेकर मध्य भारत (Central India) तक देखने को मिलेगा. इस क्षेत्र में ओलावृष्टि होने की संभावना है. शुक्रवार और शनिवार को कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों में भारी बारिश (Heavy Rain) भी हो सकती है.

    IMD ने बताया कि मध्य भारत में 7 अप्रैल तक गरज और बिजली चमकने के साथ बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा, 3 अप्रैल को मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और उससे सटे गुजरात क्षेत्र में और 4 अप्रैल को पूर्वी मध्य प्रदेश समेत छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर ओलावृष्टि हो सकती है. विभाग ने यह भी बताया कि इस हफ्ते देश के ज्यादातार हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने की संभावना है।

    पिछले 24 घंटों में अरुणाचल प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश दर्ज की गई. इस बीच, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश और मध्य महाराष्ट्र में ओलावृष्टि होने की खबरें मिली हैं। मार्च महीने में, देश पर आठ पश्चिमी विक्षोभों का असर पड़ा, जबकि सामान्य तौर पर इनकी संख्या 5 या 6 होती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बारिश लाने वाली हवाओं की एक प्रणाली है जो भूमध्य सागर और ईरान के ऊपर से पैदा होती है. यह ‘सबट्रॉपिकल पछुआ जेट स्ट्रीम’ के सहारे भारत पहुंचती है और हिमालय से टकराकर बारिश व बर्फबारी करती है। इस साल मार्च में सामान्य से कहीं अधिक सक्रिय रहे, जिसका असर अब अप्रैल की शुरुआत में भी दिख रहा है. पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों के महीनों यानी दिसंबर से मार्च के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।