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  • उत्तर प्रदेश में मौसम की दोहरी मार, लखनऊ की कॉलोनियों में भरा पानी, उफान पर नदियां, 15 जिलों में बारिश और ओले गिरने की चेतावनी

    उत्तर प्रदेश में मौसम की दोहरी मार, लखनऊ की कॉलोनियों में भरा पानी, उफान पर नदियां, 15 जिलों में बारिश और ओले गिरने की चेतावनी


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में बाढ़ और बारिश से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। राजधानी लखनऊ में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। शहर के कई इलाकों में लगातार 15वें दिन बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। कॉलोनियों में गर्दन तक पानी भरने की स्थिति बताई जा रही है। हजारों घर अब भी जलमग्न हैं और तीन लाख से अधिक लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है। कई जगह लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। चंद्रिका देवी मंदिर परिसर में भी घुटनों तक पानी भर गया है। शहर के प्रभावित इलाकों में जलभराव के कारण आवागमन और सामान्य जनजीवन बाधित है।
    लखनऊ के अलावा प्रदेश के दूसरे जिलों में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बना हुआ है। उन्नाव में गंगा नदी उफान पर है। कई गली-मोहल्लों में पानी भरने के कारण लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। सोमवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान पर बह रही थी। तरबगंज तहसील के ब्योन्दा और माझा गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत अभियान के तहत एक हजार से अधिक लोगों तक राहत सामग्री और भोजन के पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं।
    पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है। नेपाल के गोरखा जिले में भूस्खलन के बाद बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ आने की खबर है। पानी नारायणी नदी की ओर बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर कुशीनगर क्षेत्र के करीब 50 गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। तरया सुजान इलाके में एपी तटबंध पहले से टूटा होने के कारण चिंता बढ़ गई है। प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रखने और संभावित नुकसान से बचाने की चुनौती है।
    इसी बीच सोमवार सुबह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में मौसम ने करवट ली। नोएडा और गाजियाबाद के साथ बरेली और मथुरा तथा अलीगढ़ में गरज-चमक के साथ बारिश हुई। मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में ओले गिरने की आशंका भी जताई गई है। इससे पहले रविवार को मेरठ और शामली में ओलावृष्टि हुई थी। बिजनौर में तेज आंधी के कारण कई जगह पेड़ उखड़ गए थे। मौसम में अचानक बदलाव से जहां गर्मी और उमस से राहत मिली है वहीं किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ गई है।
    आगरा में सोमवार सुबह बादल छाए रहे और तेज हवाओं के कारण मौसम अपेक्षाकृत ठंडा महसूस हुआ। दिन में बूंदाबांदी की संभावना जताई गई। बरेली में नवरात्रि के दौरान गुलाबी ठंड का एहसास होने लगा है। सुबह आसमान में बादल छाए रहे और कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। अलीगढ़ में भी रात से बादल छाए रहने के बाद सुबह बिजली की कड़कड़ाहट के साथ बूंदाबांदी शुरू हुई। नोएडा में रविवार देर रात से बारिश का दौर जारी रहने की जानकारी सामने आई।
    गोंडा के राजगढ़ अमीनपुर गांव में एक अलग घटना ने लोगों का ध्यान खींचा। शनिवार शाम सर्प मित्र अरुण कुमार बाबा अजगर को पकड़ने पहुंचे थे। इसी दौरान अजगर उनके दाहिने पैर से लिपट गया। करीब आधे घंटे तक चले प्रयास के बाद उन्होंने साथियों की मदद से खुद को छुड़ाया। इसके बाद अजगर को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया गया। घटना का वीडियो रविवार शाम सामने आया।
    लगातार बाढ़ और बारिश के बीच प्रभावित लोगों की सुरक्षा और राहत व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ और खराब मौसम से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए नौ लाख से अधिक किसानों के खातों में 493 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजने की घोषणा की है। ऐसे हालात में प्रशासन की निगरानी और समय पर राहत पहुंचाना जरूरी है ताकि जलभराव और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को जल्द मदद मिल सके।
  • उत्तराखंड में अचानक बदला मौसम, तेज बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान, CM धामी ने हेलिकॉप्टर मोड़कर किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा

    उत्तराखंड में अचानक बदला मौसम, तेज बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान, CM धामी ने हेलिकॉप्टर मोड़कर किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा


    नई दिल्ली । उत्तराखंड में मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदला कि हरिद्वार से लेकर ऊधम सिंह नगर तक लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार 9 अक्टूबर को तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने कई इलाकों में नुकसान पहुंचाया। आसमान से गिरे बड़े-बड़े ओलों की वजह से कई गाड़ियों और मकानों के शीशे टूट गए जबकि सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसलें और कृषि उपज प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अचानक बदले मौसम के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक बढ़ गई। ओलावृष्टि से हुए नुकसान की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को तत्काल सर्वे करने के निर्देश दिए।
    हरिद्वार में शुक्रवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में काले बादल छा गए और बिजली की कड़कड़ाहट के साथ बारिश शुरू हो गई। शुरुआत में बारिश की रफ्तार कम रही लेकिन कुछ ही देर में इसकी तीव्रता बढ़ने लगी। बारिश के साथ बड़े-बड़े ओले गिरने लगे। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी ओलावृष्टि का असर देखने को मिला। अचानक हुई इस मौसमी घटना से लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। कई जगह खड़े वाहनों के शीशे टूट गए जबकि मकानों की खिड़कियों और सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा। तेज बारिश और ओलों के कारण लोगों को काफी परेशानी हुई। मौसम में आए बदलाव के बाद तापमान नीचे जाने से ठंडक भी बढ़ गई।
    हरिद्वार के अलावा ऊधम सिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसका असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है और किसानों की फसलों तथा कृषि उपज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अचानक हुई ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसान चिंतित हैं। फसल को नुकसान होने से उनकी आमदनी पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि प्रभावित खेतों और संपत्तियों को हुए कुल नुकसान की वास्तविक तस्वीर विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द नुकसान का आकलन करने और जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने की चुनौती है।
    ओलावृष्टि से नुकसान की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रभावित क्षेत्र का रुख किया। मुख्यमंत्री शुक्रवार को हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे। इसी दौरान उन्हें ऊधम सिंह नगर के बाजपुर में ओलावृष्टि और उससे हुए नुकसान की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपना हेलिकॉप्टर प्रभावित क्षेत्र की ओर मोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने पहले हवाई सर्वेक्षण के जरिए हालात का जायजा लिया और फिर जमीन पर पहुंचकर प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने नुकसान का सही आकलन कर निर्धारित समय के भीतर किसानों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। धामी ने भरोसा दिलाया कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और प्रभावित लोगों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
    दूसरी ओर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भी ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने हरिद्वार समेत प्रभावित क्षेत्रों में फसलों सब्जियों और संपत्तियों को हुए नुकसान का सही आकलन कराने की मांग की। साथ ही जिन लोगों को अधिक नुकसान हुआ है उन्हें उचित मुआवजा और सहायता देने की अपील की। अब प्रभावित लोगों की नजर प्रशासनिक सर्वेक्षण और राहत संबंधी फैसलों पर है।

  • यूपी में 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने के आसार, 63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 117 मकान क्षतिग्रस्त

    यूपी में 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने के आसार, 63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 117 मकान क्षतिग्रस्त


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार 48 घंटे से हो रही भारी बारिश और खराब मौसम के बीच प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नेपाल में भारी बारिश के चलते सीमावर्ती जिलों में नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 36 घंटे बाद प्रदेश में मौसम के सामान्य होने की संभावना है।

    प्रभावित परिवारों से मिलेंगे अधिकारी
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत और बचाव व्यवस्था सक्रिय रखी गई है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने शनिवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में आमजन की जान-माल की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जिलाधिकारियों को स्वयं फील्ड में रहकर हालात का आकलन करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    नेपाल सीमा पर विशेष सतर्कता
    नेपाल में हो रही भारी बारिश को देखते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और बाढ़ राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने के लिए कहा गया है।

    राहत आयुक्त ने अधिकारियों से कहा है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित इलाकों में टीमें लगातार भ्रमण कर स्थिति की निगरानी करेंगी।

    36 घंटे बाद राहत मिलने की उम्मीद
    भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 36 घंटे बाद प्रदेश में मौसम सामान्य होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहें।

    किसी भी आपदा या आपात स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी 1070 हेल्पलाइन दर्ज है।

    63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    राहत आयुक्त के मुताबिक, प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटे में पूरे प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा हुई। सबसे ज्यादा अंतर फर्रुखाबाद में रहा, जहां सामान्य से 200 गुना अधिक बारिश दर्ज की गई। कानपुर नगर में यह आंकड़ा 160 गुना, जबकि कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में सामान्य से 130 गुना अधिक रहा।

    भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में सामान्य बारिश दर्ज हुई, जबकि गाजीपुर में सबसे कम बारिश हुई। वहीं बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में बारिश दर्ज नहीं हुई।

    117 मकान क्षतिग्रस्त
    पिछले 48 घंटे में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है। राहत आयुक्त ने संबंधित जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों को नियमानुसार अनुमन्य सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    अधिकारियों को बारिश से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे और आकलन कराने को भी कहा गया है, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द राहत दी जा सके। फील्ड अधिकारियों को फसलों को हुए नुकसान का भी त्वरित आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    फायर सर्विस और आपदा मित्रों की मदद लेने के निर्देश
    प्रशासन को जरूरत के अनुसार फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए गए हैं। सभी राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण और निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    जिलाधिकारियों को खुद फील्ड में रहकर स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने भी बारिश प्रभावित जिलों में अधिकारियों को सतर्क रहने और जरूरत के मुताबिक स्थानीय स्तर पर स्कूलों समेत गैर-जरूरी सेवाओं के संबंध में निर्णय लेने को कहा है।

    कच्चे मकानों और जलभराव वाले इलाकों पर नजर
    प्रशासन ने लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों को कच्चे मकानों के आसपास जलभराव की स्थिति पर तत्काल नजर रखने को कहा है। जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

    जरूरत पड़ने पर ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खराब मौसम के दौरान आमजन की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

  • MP में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव, आज 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

    MP में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव, आज 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में तेज बारिश का दौर रहने की संभावना है। जबलपुर समेत 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 16 जिलों में भारी बारिश का अनुमान है। इन इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच से ज्यादा बारिश हो सकती है। सतना में अतिवृष्टि की आशंका को देखते हुए 25 और 26 सितंबर को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। IMD के सतना पूर्वानुमान में भी 25 से 27 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी है।

    13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

    दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के बीच सक्रिय हुए सिस्टम के चलते शुक्रवार को टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, दमोह, उमरिया, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।

    इनके अलावा भिंड, दतिया, निवाड़ी, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल और पांढुर्णा में भारी बारिश होने का अनुमान है।

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी मौसम बदला रहेगा। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    सतना में 25-26 सितंबर को स्कूल बंद

    अतिवृष्टि की संभावना को देखते हुए सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने 25 और 26 सितंबर को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। यह आदेश शासकीय, अशासकीय, केंद्रीय, नवोदय और आईसीएसई समेत सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। IMD के सतना पूर्वानुमान में 25, 26 और 27 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दर्ज है।

    25-26 को ज्यादा असर, 27 को भी बारिश

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ अवदाब अब महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम के रूप में स्ट्रॉन्ग हो गया है। इसके कारण 25 और 26 सितंबर को प्रदेश में सिस्टम का असर ज्यादा रहने की संभावना है। 27 सितंबर को भी कई इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। इसके बाद सिस्टम आगे बढ़ जाएगा।

    मानसून की विदाई में अब सिर्फ 6 दिन

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। यानी मानसून की विदाई में अब छह दिन बाकी हैं। इस बार भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से प्रदेश में मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून विदा हो चुका है।

    सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 873.4 मिमी यानी 34.4 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 935.1 मिमी यानी 36.8 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में अब तक 2.4 इंच कम पानी गिरा है। ओवरऑल बारिश सामान्य से 7% कम है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश 2% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% कम हुई है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश करीब 2% कम है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 23% तक कम बारिश हुई है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़े में काफी सुधार आया है। गुरुवार को भी यह आंकड़ा माइनस 2% था।

    पश्चिमी हिस्से के इन जिलों में ज्यादा कमी

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 8% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    प्रदेश के 23 जिलों में इस सीजन अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

  • मौसम ने फिर ली करवट… बना दमदार वेटर सिस्टम… कई राज्यों में होगी झमाझम बारिश

    मौसम ने फिर ली करवट… बना दमदार वेटर सिस्टम… कई राज्यों में होगी झमाझम बारिश


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में मौसम फिर करवट (Change Weather) लेने वाला है. बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में बना सिस्टम अब मजबूत हो रहा है और इसका असर पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में दिखाई देने लगा है. इस वेदर सिस्टम (Weather system) का ओडिशा (Odisha) में सबसे ज्यादा असर होने का अनुमान है, जहां अगले दो दिनों के लिए बेहद भारी बारिश का अलर्ट है. दूसरी ओर दिल्ली-NCR में मंगलवार को मौसम फिलहाल साफ रहने वाला है, लेकिन सप्ताह के दूसरे हिस्से में बारिश और गरज-चमक का दौर बढ़ सकता है. यूपी के अलग-अलग इलाकों में भी मौसम के इस बदलाव का असर दिखेगा।

    बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र अब डिप्रेशन में बदल चुका है. इसके अगले 24 घंटे में और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना है. इसके बाद यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की शुरुआती घंटों के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तट को पार कर सकता है. इस वेदर सिस्टम का सबसे ज्यादा असर ओडिशा में देखने को मिल सकता है।


    दिल्ली-NCR में आज बारिश से राहत

    दिल्ली-NCR में मंगलवार यानी 22 सितंबर को फिलहाल भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है. आईएमडी के 22 सितंबर के अपडेट में दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के लिए आज से 24 सितंबर तक कोई चेतावनी नहीं है. 25 से 27 सितंबर के लिए गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जरूर जताई गई है. यानी मंगलवार को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में बड़े पैमाने पर बारिश की उम्मीद नहीं है. हालांकि सप्ताह के आखिर में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।


    यूपी में कब बदलेगा मौसम?

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 सितंबर से मौसम की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. मौसम विभाग के मुताबिक 24 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है, जबकि 25 सितंबर से भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है. 26 से 28 सितंबर तक भी पूर्वी यूपी में भारी बारिश और गरज-चमक का अलर्ट है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 सितंबर से मौसम में बदलाव शुरू हो सकता है. यहां 25 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है, जबकि 26 से 28 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है।


    पहाड़ों में होगी सामान्य बारिश

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून समेत चमोली, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, नैनीताल समेत कई जिलों में 22 से 25 सितंबर के दौरान बाारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक 25-26 सितंबर के दौरान बारिश का दायरा बढ़कर कई स्थानों तक पहुंच सकता है. इस दौरान गरज-चमक के साथ कई जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है. वहीं, हिमाचल प्रदेश में आज कुछ जगहों पर हल्की बारिश हो सकती है, जबकि आने वाले दिनों में मौसम सामान्य ही रहेगा।


    ओडिशा में सबसे ज्यादा असर
    मौसम विभाग ने 23 और 24 सितंबर को ओडिशा के कई हिस्सों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी दी है. 25 सितंबर को भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि 26 सितंबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना है. 23 सितंबर को कंधमाल, गजपति, गंजाम और पुरी में 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बेहद भारी बारिश का अलर्ट है. इसके लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है. 24 सितंबर को कालाहांडी, कंधमाल और रायगड़ा में भी बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट है. मौसम का असर अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है. भारी बारिश के साथ कुछ इलाकों में जलभराव और दूसरी परेशानियां बढ़ सकती हैं।


    तेज हवाओं से समुद्र में उठेंगी ल​हरें

    बंगाल की खाड़ी में बने वेदर सिस्टम के मजबूत होने का असर समुद्र पर भी दिखेगा. दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट के आसपास 23 से 24 सितंबर के बीच तेज हवाएं चल सकती हैं. पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 23 सितंबर को हवा की रफ्तार करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. ऐसे में समुद्र में जाने वाले लोगों और मछुआरों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


    केरल समेत इन राज्यों में भी बारिश

    केरल में भी इस सप्ताह मौसम नम रहने का अनुमान है. 21 से 25 सितंबर के बीच कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. पथनमथिट्टा, कोट्टायम, अलप्पुझा, एर्नाकुलम, इडुक्की और त्रिशूर में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. जिन इलाकों में जलभराव या भूस्खलन का खतरा रहता है, वहां लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन की सलाह मानने को कहा गया है।


    बंगाल से पूर्वोत्तरी राज्यों तक बारिश

    असम और मेघालय में 22 सितंबर को गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है. 23 से 25 सितंबर के बीच यहां भारी बारिश हो सकती है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 22 सितंबर को गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं का असर दिख सकता है. 23 और 24 सितंबर को भारी बारिश और 25 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है।

  • शिवपुरी में बारिश बनी आफत: मकान का आधा हिस्सा गिरने से लाखों का नुकसान, हादसे के वक्त घर में नहीं था कोई शख्स

    शिवपुरी में बारिश बनी आफत: मकान का आधा हिस्सा गिरने से लाखों का नुकसान, हादसे के वक्त घर में नहीं था कोई शख्स


    शिवपुरी । शिवपुरी शहर में लगातार चार दिनों तक हुई तेज बारिश के बाद अब इसका असर शहर के कमजोर मकानों पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार शाम नवाब साहब रोड पर उस समय हड़कंप मच गया जब एक मकान का करीब आधा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। मकान का छज्जा बाथरूम और पीछे का बड़ा हिस्सा कुछ ही सेकंड में मलबे में बदल गया। मकान का हिस्सा गिरने के साथ ही वहां खड़ी तीन मोटरसाइकिलें भी मलबे के नीचे दब गईं और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। गनीमत रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय कोई व्यक्ति मलबे की चपेट में नहीं आया और एक बड़ा हादसा टल गया।

    घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों में अफरा तफरी मच गई। मकान का हिस्सा गिरने की आवाज सुनकर बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। देखते ही देखते सड़क और मकान के आसपास मलबा फैल गया था। स्थानीय लोगों ने परिवार की मदद करते हुए मलबा हटाने का काम शुरू किया। मलबे में दबे वाहनों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। इस दौरान सामने आया कि तीनों मोटरसाइकिलों को काफी नुकसान पहुंचा है।

    मकान मालिक सुनील रजक के मुताबिक पिछले चार दिनों से शिवपुरी में लगातार तेज बारिश हो रही थी। बारिश का पानी मकान की दीवारों और निर्माण वाले हिस्सों में लगातार पहुंच रहा था। इससे मकान का पिछला हिस्सा धीरे धीरे कमजोर हो गया। मंगलवार शाम अचानक मकान की संरचना ने जवाब दे दिया और छज्जे के साथ बाथरूम तथा पीछे का हिस्सा भरभराकर गिर गया। हादसा इतनी तेजी से हुआ कि परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हालांकि किस्मत अच्छी रही कि उस समय कोई व्यक्ति उस हिस्से में मौजूद नहीं था।

    मकान का हिस्सा गिरने से केवल भवन को ही नुकसान नहीं हुआ बल्कि वहां खड़ी तीन मोटरसाइकिलें भी मलबे में दब गईं। परिवार के मुताबिक तीनों बाइक की कुल कीमत करीब ढाई लाख रुपए है। इसके अलावा मकान के अंदर रखा सामान भी मलबे में दब गया जिससे नुकसान और बढ़ गया। मकान के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और दोबारा निर्माण में करीब ढाई लाख रुपए का खर्च आने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस तरह मकान और मोटरसाइकिलों को मिलाकर करीब पांच लाख रुपए के नुकसान की आशंका है।

    बारिश के कारण मकान की स्थिति पहले से कमजोर होने की बात सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश के दौरान पुराने और कमजोर मकानों को लेकर खतरा बढ़ जाता है। खासकर ऐसे मकानों में जहां दीवारों में पहले से दरारें हों या पानी लगातार रिस रहा हो वहां अचानक हिस्सा गिरने की आशंका बनी रहती है। नवाब साहब रोड की घटना ने भी इसी खतरे की ओर ध्यान खींचा है।

    हादसे के बाद प्रभावित परिवार ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने की मांग की है। परिवार चाहता है कि राजस्व और नगर प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन करे। इसके साथ ही नियमानुसार राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। परिवार का कहना है कि बारिश के कारण हुए इस नुकसान ने आर्थिक परेशानी बढ़ा दी है और मकान के क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा सुरक्षित बनाने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होगी।

    फिलहाल घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं है। लेकिन जिस तरह मकान का बड़ा हिस्सा अचानक गिरा उसने आसपास रहने वाले लोगों को जरूर डरा दिया है। चार दिन की बारिश के बाद सामने आई इस घटना ने यह भी साफ कर दिया है कि लगातार बारिश के बीच कमजोर भवनों की स्थिति की जांच बेहद जरूरी है ताकि किसी अगले हादसे से पहले जरूरी कदम उठाए जा सकें।

  • 4 सितंबर को भोपाल में जमकर बरसेंगे बादल IMD ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट दिनभर छाए रहेंगे बादल

    4 सितंबर को भोपाल में जमकर बरसेंगे बादल IMD ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट दिनभर छाए रहेंगे बादल


    भोपाल। भोपाल में 4 सितंबर को मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक राजधानी में शुक्रवार को आमतौर पर बादल छाए रहने और भारी बारिश होने की संभावना है। भोपाल एयरपोर्ट के लिए जारी शहर के पूर्वानुमान में 4 सितंबर को न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री और अधिकतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही भारी बारिश की चेतावनी भी दर्ज की गई है।

    मानसून की सक्रियता के बीच भोपाल और आसपास के इलाकों में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी तेज बारिश तो कभी बादलों के बीच हल्की बौछारों का दौर देखने को मिल रहा है। अब 4 सितंबर को बारिश की गतिविधि बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और दिन के दौरान कई हिस्सों में तेज बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में भारी बारिश के साथ स्थानीय स्तर पर गरज चमक की स्थिति बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

    बारिश का असर शहर की सड़कों और निचले इलाकों में भी दिखाई दे सकता है। तेज बारिश होने की स्थिति में कुछ स्थानों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हो सकता है। सड़कों पर फिसलन बढ़ने के कारण दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। बारिश के दौरान खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को भी मौसम के अचानक बदलने पर सुरक्षित स्थान का रुख करना चाहिए।

    मध्य प्रदेश में इस समय मानसूनी गतिविधियां सक्रिय बनी हुई हैं। हालिया मौसम रिपोर्टों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने और अगले दिनों में पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधि बढ़ने की संभावना जताई गई थी। भोपाल भी इस मौसम प्रणाली के प्रभाव वाले इलाकों में शामिल है।

    4 सितंबर के बाद भी भोपाल में मौसम पूरी तरह साफ होने के संकेत नहीं हैं। शहर के लिए उपलब्ध IMD पूर्वानुमान में 5 सितंबर को भी बारिश या गरज चमक की संभावना बताई गई है। इसके बाद 6 और 7 सितंबर को भी बादल और बारिश की गतिविधि बने रहने का अनुमान है। यानी राजधानी में मानसून की सक्रियता आने वाले दिनों में भी दिखाई दे सकती है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए लोगों को बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और जरूरी होने पर ही सावधानी के साथ घर से निकलने की सलाह दी जा सकती है। वाहन चालकों को पानी भरी सड़कों पर धीमी गति से वाहन चलाना चाहिए और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को भी स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

    कुल मिलाकर 4 सितंबर को भोपाल में बारिश का दिन रहने के आसार हैं। बादलों की मौजूदगी के साथ भारी बारिश मौसम को सुहाना जरूर बनाएगी लेकिन कई इलाकों में जलभराव और यातायात जैसी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में राजधानी के लोगों के लिए मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखना और बारिश के दौरान सावधानी बरतना सबसे जरूरी होगा।

  • वाराणसी में बारिश ने बिगाड़े हालात! सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी और पानी में फंसीं कारें

    वाराणसी में बारिश ने बिगाड़े हालात! सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी और पानी में फंसीं कारें

    वाराणसी  । पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून की लगातार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। वाराणसी में करीब 15 घंटे तक हुई झमाझम बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में हालात बिगड़ गए। सड़कें पानी में डूब गईं और गलियां तालाब जैसी नजर आने लगीं। कई निचले इलाकों में बारिश का पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया। जलभराव इतना ज्यादा रहा कि जगह जगह वाहन पानी में फंस गए और लोगों को आने जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    वाराणसी स्थित BHU अस्पताल के आसपास भी भारी जलभराव देखने को मिला। अस्पताल परिसर और मुख्य मार्ग पर घुटनों तक पानी भर गया। मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सामने आई तस्वीरों में कुछ लोग मरीजों को कंधे पर बैठाकर पानी के बीच से अस्पताल की ओर ले जाते दिखाई दिए। वहीं एक महिला भी भारी जलभराव के बीच अपने बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचती नजर आई। अस्पताल जैसे जरूरी स्थान पर पानी भरने से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी और बढ़ गई।

    बारिश का असर केवल वाराणसी तक सीमित नहीं रहा। पूर्वी यूपी के कई शहरों में मंगलवार सुबह से रुक रुककर तेज बारिश का दौर जारी रहा। लखनऊ अयोध्या झांसी जौनपुर और प्रतापगढ़ समेत करीब 25 शहरों में बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। कई इलाकों में दिन के समय भी घने बादलों के कारण अंधेरा जैसा माहौल बना रहा। जौनपुर में भी कई घंटों से लगातार बारिश होने के कारण सड़कें जलमग्न हो गईं।

    लगातार बारिश के कारण प्रदेश में बाढ़ का खतरा भी बढ़ता नजर आ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 19 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। लखीमपुर में शारदा नदी पर बने तमोलिनपुरवा बांध का एक हिस्सा कटने से आसपास के दर्जनों गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं ललितपुर में खेड़ार नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है। सिरसी पुल भी पानी में डूब गया है। बदायूं में रामगंगा नदी का पानी सड़कों के ऊपर से बहने की स्थिति सामने आई है।

    बारिश के कारण हुए अलग अलग हादसों में पांच लोगों की मौत की भी खबर है जबकि दो लोग घायल बताए गए हैं। लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया। जौनपुर गाजीपुर प्रतापगढ़ अमेठी चंदौली और अंबेडकरनगर में कक्षा आठ तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में गरज चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रयागराज समेत 23 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ऐसे मौसम में लोगों को नदी नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। तेज बहाव वाली सड़कों पर वाहन चलाने से बचना और प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। लगातार बारिश के बीच आने वाले घंटों में पूर्वी यूपी के कई इलाकों में हालात पर नजर बनी हुई है।

  • Madhya Pradesh Weather: 27 अगस्त तक बारिश का दौर, डिंडौरी-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट; विदिशा से रीवा तक बारिश बनी मुसीबत

    Madhya Pradesh Weather: 27 अगस्त तक बारिश का दौर, डिंडौरी-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट; विदिशा से रीवा तक बारिश बनी मुसीबत


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मानसून ट्रफ चक्रवाती परिसंचरण और निम्न दबाव क्षेत्र से बने मजबूत मौसम सिस्टम के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। अगले 24 घंटे में खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने डिंडौरी और बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए 4 से 8 इंच तक बारिश की आशंका जताई है। इसके अलावा विदिशा सागर रायसेन नर्मदापुरम बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा नरसिंहपुर दमोह सिवनी जबलपुर मंडला कटनी उमरिया शहडोल अनूपपुर रीवा मऊगंज सीधी और छतरपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

    राजधानी भोपाल में रविवार रात तेज बारिश हुई। वहीं विदिशा जिले के लटेरी में करीब एक घंटे हुई मूसलाधार बारिश के बाद मुख्य बाजार में पानी भर गया। सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अशोकनगर में बारिश ने एक परिवार पर दुखों का पहाड़ गिरा दिया। ईसागढ़ के नरसूखेड़ी गांव के पास पुलिया पार करते समय करीब 30 वर्षीय अजय मराठा बाइक समेत तेज बहाव में बह गया। काफी तलाश के बाद सोमवार सुबह उसका शव झाड़ियों में फंसा मिला।

    सीधी में भी बारिश के दौरान हादसा सामने आया जहां प्रसिद्ध बढ़ौरा शिव मंदिर के पास एक महिला की पुल से गिरने के बाद मौत हो गई। दूसरी ओर रीवा के जवा जनपद की रौली गांव में बाढ़ ने अंतिम यात्रा का रास्ता भी रोक दिया। संजय गांधी अस्पताल रीवा में मोतीलाल तिवारी के निधन के बाद जब उनका शव गांव ले जाया जा रहा था तो रास्ते में तेज बहाव के कारण आगे जाना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों ने दो ड्रमों को आपस में बांधकर उनके ऊपर शव रखा और बाढ़ के पानी को पार कराया। इसके बाद शव गांव पहुंचाया गया और अंतिम संस्कार किया गया।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में 27 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी हिस्से के साथ अब पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जगह तेज बारिश होने की संभावना है। भोपाल सीहोर राजगढ़ इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर सतना सिंगरौली मैहर पन्ना टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक जून में बारिश की कमी के बाद जुलाई में स्थिति कुछ सुधरी थी लेकिन मानसून के दो बार ब्रेक लेने से बारिश का आंकड़ा फिर पीछे चला गया। अब अगस्त के आखिरी सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम ने प्रदेश के कई हिस्सों में राहत दी है। हालांकि लगातार भारी बारिश के कारण नदी नालों के उफान पर आने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और तेज बहाव वाले रास्तों व पुलियाओं को पार करने से बचने की सलाह दी गई है। राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का असर देखने को मिलेगा।
  • यूपी में आसमान से आफत और नदियों का रौद्र रूप: बांध ओवरफ्लो, गांवों में घुसा पानी, आज 71 जिलों में बारिश का अलर्ट

    यूपी में आसमान से आफत और नदियों का रौद्र रूप: बांध ओवरफ्लो, गांवों में घुसा पानी, आज 71 जिलों में बारिश का अलर्ट


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का पानी तेजी से निचले इलाकों में फैल रहा है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के 19 जिले बाढ़ की चपेट में हैं जबकि 92 गांवों में फसलें पानी में डूब गई हैं। 26 गांव ऐसे हैं जो चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो चुके हैं। इन गांवों को आसपास के इलाकों से जोड़ने वाली सड़कें डूब जाने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नाव और मोटर बोट के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

    बाढ़ और बारिश के बीच उन्नाव से सामने आया एक मामला बेहद चिंता बढ़ाने वाला है। गंगाघाट में गंगा स्नान के दौरान दो बच्चियां अचानक नदी में डूबने लगीं। उन्हें बचाने के लिए उनके पिता भी नदी में कूद गए लेकिन तेज बहाव के कारण वह भी मुश्किल में फंस गए। इसी दौरान वहां मौजूद एक पंडा ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी और काफी मशक्कत के बाद पिता और दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना ने एक बार फिर उफनती नदियों में स्नान के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।

    प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। दारागंज घाट की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए लोगों को सड़कों और ऊंचे स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है। वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की स्थिति गंभीर हो गई है। अस्सी घाट पर होने वाला सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम का मंच पानी में डूब गया है। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस चौकी तक पानी पहुंच चुका है और घाट की कई सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। घाट किनारे मौजूद कई मंदिर भी पानी में डूब गए हैं।

    झांसी में बेतवा नदी पर बना बांध इस सीजन में पहली बार ओवरफ्लो हो गया है। करीब 140 साल पुराने पारीछा बांध के गेट भी खोल दिए गए हैं। बाराबंकी में सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है जबकि संतकबीर नगर में 20 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां नौ सरकारी स्कूलों के परिसरों में भी पानी पहुंच गया है। कानपुर के निचले इलाकों में पांडू नदी का पानी घुसने से करीब दो हजार लोग प्रभावित हुए हैं। आजमगढ़ में भी कई प्रमुख इलाकों की गलियां जलभराव से परेशान हैं।

    रविवार को प्रयागराज गोरखपुर मेरठ बहराइच समेत करीब 20 शहरों में तेज बारिश हुई। शाहजहांपुर में सुबह घना कोहरा छाया रहा और दृश्यता 50 मीटर से भी कम हो गई। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक लगातार बारिश के कारण हवा में नमी बढ़ने और रात के तापमान में गिरावट से कोहरे की स्थिति बनी।

    मौसम विभाग के अनुसार आज प्रदेश के 71 जिलों में गरज चमक के साथ बारिश होने का अलर्ट है जबकि 12 जिलों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक मानसूनी सिस्टम के उत्तर की ओर सक्रिय होने और बंगाल की खाड़ी से नमी भरी हवाओं के लगातार आने के कारण अगले एक दो दिन बारिश में तेजी बनी रह सकती है। 25 अगस्त से पश्चिमी हवाओं के प्रभाव में बदलाव आने की संभावना है जिससे पश्चिमी और मध्य यूपी में भारी बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है।

    ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने और उफनती नदियों तथा जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।