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  • मध्य प्रदेश में बारिश बनी आफत! नदियां उफान पर, पुल डूबे, सड़कें बंद, आष्टा में दो बच्चों की दर्दनाक मौत

    मध्य प्रदेश में बारिश बनी आफत! नदियां उफान पर, पुल डूबे, सड़कें बंद, आष्टा में दो बच्चों की दर्दनाक मौत


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने अब पूरी तरह रफ्तार पकड़ ली है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में हालात चिंताजनक बना दिए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में तेज से अत्यधिक बारिश दर्ज की गई। लगातार बरसात के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं, कई पुल जलमग्न हो गए हैं, सड़क संपर्क टूट गया है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। सबसे दर्दनाक घटना सीहोर जिले के आष्टा क्षेत्र से सामने आई, जहां पानी में डूबने से दो मासूम बच्चों की जान चली गई। इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

    मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में सबसे अधिक ढाई इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मंडला में लगभग 2.2 इंच, खंडवा में करीब पौने दो इंच, भोपाल में डेढ़ इंच, जबकि दतिया, नौगांव और बालाघाट में सवा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। रतलाम, बैतूल और धार में लगभग एक इंच वर्षा हुई। इसके अलावा खरगोन, पचमढ़ी, दमोह, नर्मदापुरम, जबलपुर और उमरिया सहित कई जिलों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा से प्रदेश के अधिकांश नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है।

    सीहोर जिले के आष्टा क्षेत्र में पार्वती और तप नदी के उफान पर आने से कई गांवों में पानी घरों तक पहुंच गया। बापचा दोनिया गांव में दो मासूम बच्चों के डूबने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। परिजन बच्चों को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रशासन ने लोगों से नदी और तालाबों के आसपास जाने से बचने की अपील की है।

    हरदा जिले में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। लगातार बारिश के कारण कालीमाचक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और ग्राम मांदला के पास पुल के ऊपर लगभग तीन फीट पानी बहने लगा। इसके चलते नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है और ग्रामीणों को आवश्यक सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    खंडवा जिले में भी लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। किल्लौद ब्लॉक के ग्राम गरबड़ी स्थित नाले में आई बाढ़ के कारण खिरकिया मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि तेज बहाव वाले नालों और पुलों को पार करने की कोशिश न करें तथा सुरक्षित स्थानों पर ही रुकें।

    प्रदेश के कई हिस्सों में खेतों में पानी भर गया है जिससे खरीफ फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार बनी हुई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं तथा जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नागरिकों से सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

  • पूरे मध्य प्रदेश में छाया मानसून अब चार दिन भारी बारिश का दौर 13 जिलों में अलर्ट कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

    पूरे मध्य प्रदेश में छाया मानसून अब चार दिन भारी बारिश का दौर 13 जिलों में अलर्ट कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। गुरुवार को मानसून ने प्रदेश के सभी जिलों को कवर कर लिया जिसके साथ ही पूरे राज्य में बारिश का दौर तेज होने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ जिलों के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट घोषित किया गया है जबकि कई क्षेत्रों में जलभराव तेज बहाव और बिजली गिरने जैसी स्थितियों को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

    इस वर्ष प्रदेश में मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी और नौ दिनों के भीतर पूरे मध्य प्रदेश में फैल गया। हालांकि सामान्य स्थिति में मानसून 15 जून तक प्रदेश में पहुंच जाता है इसलिए इस बार इसकी एंट्री करीब नौ दिन देर से हुई। इसके बावजूद अब मानसून तेजी से सक्रिय हो चुका है और अधिकांश जिलों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है।

    मौसम विभाग के अनुसार हरदा नर्मदापुरम रायसेन छिंदवाड़ा पांढुर्णा और बालाघाट जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में अगले चौबीस घंटों के दौरान चार से आठ इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं अशोकनगर देवास खंडवा बैतूल सागर मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का यलो अलर्ट घोषित किया गया है। इसके अलावा भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर जबलपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में गरज चमक के साथ तेज बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है।

    बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून का असर साफ दिखाई दिया। इंदौर में तेज बारिश के कारण कई सड़कें जलमग्न हो गईं और निचले इलाकों में पानी भर गया। एक थार वाहन तेज बहाव में नाले में गिर गया जिसमें पूरा परिवार सवार था। स्थानीय लोगों की सतर्कता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं इंदौर के अहीरखेड़ी काकड़ क्षेत्र में रपटा पार करते समय दो युवक तेज बहाव में बह गए। एक युवक को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि दूसरे की तलाश पुलिस और बचाव दल लगातार कर रहे हैं। महू में भी एक कार पानी के तेज बहाव में फंस गई जिसे ट्रैक्टर की मदद से बाहर निकाला गया।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि पांच जुलाई तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। तीन जुलाई को धार और बड़वानी में रेड अलर्ट जारी किया गया है जबकि चार जुलाई को खरगोन में भी अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में नदी नालों के किनारे रहने वाले लोगों और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

    हालांकि प्रदेश में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। एक जुलाई तक मध्य प्रदेश में लगभग चार इंच वर्षा हुई है जबकि सामान्य औसत इससे काफी अधिक रहता है। इसके बावजूद मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई का महीना प्रदेश के लिए सबसे अधिक वर्षा वाला समय होता है और पूरे मानसून की लगभग चालीस प्रतिशत बारिश इसी महीने में होती है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश का आंकड़ा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है और इससे खेती के साथ जलाशयों में भी पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है।

  • गर्मी से मिलेगी राहत, अगले 2-3 दिन में केरल पहुंचेगा मानसून; दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में अलर्ट

    गर्मी से मिलेगी राहत, अगले 2-3 दिन में केरल पहुंचेगा मानसून; दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में अलर्ट

    नई दिल्ली । देशभर में लंबे समय से पड़ रही भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो से तीन दिनों के भीतर केरल में प्रवेश कर सकता है। मानसून की यह प्रगति देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के स्वरूप को तेजी से बदलने वाली है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्र तक व्यापक स्तर पर वर्षा गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही कई राज्यों में तेज हवाएं, गरज-चमक और आंधी का दौर भी देखने को मिल सकता है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रही अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून को आगे बढ़ने में सहायता मिल रही है। इसी वजह से केरल तट पर मानसून की दस्तक अब बेहद करीब मानी जा रही है। मानसून के सक्रिय होने के बाद दक्षिण भारत के राज्यों में अच्छी बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज हो सकती है। कृषि गतिविधियों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसून की प्रगति पर निर्भर करती है। किसानों की नजरें भी मानसून की आधिकारिक शुरुआत पर टिकी हुई हैं।

    उत्तर भारत के कई राज्यों में भी मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर आंधी की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदल सकता है और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी वर्षा गतिविधियां तेज होने की संभावना है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आगामी दिनों में व्यापक बारिश दर्ज की जा सकती है। वहीं असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में लगातार भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। इन क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर और भूस्खलन जैसी संभावित परिस्थितियों पर भी निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां सामान्य से अधिक सक्रिय रह सकती हैं।

    हालांकि शुरुआती संकेतों के अनुसार इस वर्ष मानसून की कुल वर्षा सामान्य से थोड़ी कम रहने की आशंका जताई गई है। इसके बावजूद फिलहाल देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में गिरावट और गर्मी से राहत देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की आगामी प्रगति कृषि, जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसलिए आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अपडेट पर लगातार नजर रखना आवश्यक होगा।

    मानसून की संभावित एंट्री ने देशभर में राहत की उम्मीद बढ़ा दी है। यदि वर्षा का क्रम अपेक्षित रूप से आगे बढ़ता है तो किसानों, जलाशयों और आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है, जबकि मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी भी अहम रहेगी।

  • MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग ने नया अनुमान जारी किया है। इस बार प्रदेश में मानसून सामान्य समय से 5 से 7 दिन की देरी से पहुंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 20 से 22 जून के बीच होने की संभावना है। वहीं, मानसून आने से पहले प्रदेशभर में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहेगा।

    धार-खरगोन में रेड अलर्ट

    मौसम विभाग ने सोमवार को धार और खरगोन जिलों के लिए ओलावृष्टि और तेज बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में आंधी, गरज-चमक, बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का यही मिजाज बना रहेगा।

    नौतपा की तपिश पर बारिश भारी
    नौतपा के सातवें दिन भी प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। लगातार बदलते मौसम के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को प्रदेश का सर्वाधिक तापमान शाजापुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों में तापमान में गिरावट
    प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी गर्मी का असर कम हुआ है-
    इंदौर – 36.3 डिग्री सेल्सियस
    जबलपुर – 36.4 डिग्री सेल्सियस
    ग्वालियर – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    उज्जैन – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    भोपाल – 38 डिग्री सेल्सियस

    शाजापुर, राजगढ़ और नरसिंहपुर को छोड़ अधिकांश जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

    मई में गर्मी भी रिकॉर्ड, बारिश भी ज्यादा
    मई माह में प्रदेश ने दो तरह के मौसम का अनुभव किया। महीने की शुरुआत आंधी और बारिश से हुई, जबकि 18 मई के बाद भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। इस दौरान खजुराहो में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। 25 मई से शुरू हुए नौतपा के दौरान भी प्रदेश का कोई न कोई जिला आंधी और बारिश से प्रभावित रहा। महीने के अंतिम दिनों में कई जिलों में ओलावृष्टि भी हुई।

    औसत से अधिक हुई मई की बारिश
    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार मई महीने में प्रदेश में करीब सवा इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में लगभग पौन इंच वर्षा होती है। यानी इस बार औसत से करीब 56 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। हालांकि जून में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि इस बार प्रदेश में मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत का करीब 90 प्रतिशत रह सकती है।

    अगले चार दिन कैसा रहेगा मौसम?
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 1 से 4 जून तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहेंगी। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। लगातार बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।

  • तेज हवाएं, बारिश और आंधी का खतरा बढ़ा, 55 किमी की रफ्तार से चल सकती है हवा, कई राज्यों में अलर्ट

    तेज हवाएं, बारिश और आंधी का खतरा बढ़ा, 55 किमी की रफ्तार से चल सकती है हवा, कई राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली। 
    देशभर में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और तूफानी हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 8 मई को उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत तक कई हिस्सों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है। कुछ राज्यों में तेज हवाएं 55 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने की संभावना जताई गई है, जबकि पहाड़ी इलाकों में बारिश के साथ बर्फबारी भी हो सकती है। बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से जारी बारिश और ठंडी हवाओं का असर अब कम होने लगेगा। इसके बाद राजधानी में गर्मी एक बार फिर तेजी से बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने का अनुमान है। 8 मई को अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री रहने की संभावना है। इसके बाद अगले दो से तीन दिनों में गर्मी और ज्यादा बढ़ सकती है।

    उत्तर प्रदेश में 8 और 9 मई के दौरान मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। खासतौर पर पूर्वी जिलों और तराई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। कई इलाकों में बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।

    बिहार में भी मौसम को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के कई जिलों में आंधी और बारिश का खतरा बना हुआ है। किशनगंज, सुपौल, अररिया और खगड़िया समेत कई इलाकों में अगले 48 घंटों तक बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है। बेमौसम बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।

    मध्य प्रदेश में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिल रहा है। कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां जारी हैं। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा समेत कई जिलों में आंधी और बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। वहीं राजस्थान में धूल भरी आंधी और हल्की बारिश के आसार बने हुए हैं। राज्य के कई हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी भी दर्ज की जा सकती है।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में मौसम ज्यादा खराब हो सकता है। उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना जताई गई है। हिमाचल प्रदेश में भी 11 और 12 मई के दौरान गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और सिक्किम में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु में भी कई जिलों में तेज बारिश के आसार हैं। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण कई राज्यों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का यही बदला हुआ रूप देखने को मिल सकता है।

  • देश के इन हिस्सों में जनवरी से मार्च तक तेज बारिश की संभावना.. IMD ने चेताया

    देश के इन हिस्सों में जनवरी से मार्च तक तेज बारिश की संभावना.. IMD ने चेताया


    नई दिल्ली।
    इस साल जनवरी से मार्च तक की अवधि में दक्षिण और मध्य भारत (South and Central India) में अच्छी बारिश (Rain) होने की संभावना है, जबकि पंजाब और हरियाणा (Punjab and Haryana) सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।

    महापात्रा ने हालांकि बताया कि देश के कुछ हिस्सों में औसत से कम बारिश के पूर्वानुमान का रबी की फसल पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है। साथ ही मॉनसून की अच्छी बारिश के कारण जलाशय भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर, बिहार और विदर्भ के कुछ हिस्सों में एक से तीन दिन अतिरिक्त ठंड पड़ने की संभावना है, जबकि राजस्थान में कम ठंड पड़ने का अनुमान है।

    महापात्रा ने कहा कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में जनवरी में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ प्रायद्वीपीय भारत में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है।

    दिसंबर में क्यों रहा सूखे जैसा मौसम
    मौसम विभाग ने दिसंबर महीने में लगभग सूखे मौसम का कारण पश्चिमी विक्षोभों की अनुपस्थिति को बताया, जो आमतौर पर देश के उत्तर-पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में बारिश और गरज के साथ बौछारें लाते हैं। महापात्रा ने कहा, ‘पश्चिमी विक्षोभ या तो उत्तर की ओर बढ़ रहे हैं या बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका कारण जलवायु परिवर्तन है।’ उन्होंने कहा कि दिसंबर से मार्च के दौरान कम बर्फबारी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम में अच्छी बारिश के संकेतकों में से एक है।

    महापात्रा ने कहा कि वर्तमान में ला नीना की स्थिति बनी हुई है – यानी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह ठंडी हो रही है – और वैश्विक पूर्वानुमान ने मार्च तक ईएनएसओ तटस्थ स्थितियों का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा, ‘जून-जुलाई तक ईएनएसओ की तटस्थ परिस्थितियां हावी रहने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह अच्छी मॉनसूनी बारिश का सूचक है।’ महापात्रा ने कहा कि 2025, 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म वर्ष था, जिसमें अखिल भारतीय वार्षिक औसत भूमि सतह वायु तापमान 1991-2020 के दीर्घकालिक औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

    अब तक का सबसे गर्म वर्ष 2024 था, जब पूरे भारत में तापमान दीर्घकालिक औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक था। आईएमडी के महानिदेशक ने कहा कि शीतकालीन (जनवरी-फरवरी) और मॉनसून-पूर्व (मार्च-मई) ऋतुओं के दौरान अखिल भारतीय मौसमी औसत तापमान दीर्घकालिक औसत से अधिक रहा, जिसमें क्रमशः 1.17 डिग्री सेल्सियस और 0.29 डिग्री सेल्सियस की विसंगति देखी गई।