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  • कभी मौसम तो कभी तकनीकी खराबी बनी हादसों की वजह, चारधाम रूट पर 17 साल में 46 लोगों की गई जान

    कभी मौसम तो कभी तकनीकी खराबी बनी हादसों की वजह, चारधाम रूट पर 17 साल में 46 लोगों की गई जान


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चारधाम यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर हादसों का सिलसिला एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। जोशीमठ के पास हाल ही में हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने पहाड़ी इलाकों में हवाई यात्रा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्घटना के बाद हेलीकॉप्टर का मलबा टुकड़ों में बरामद किया गया और इसमें सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले 17 वर्षों में चारधाम यात्रा और आसपास के क्षेत्रों में 15 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों में कुल 46 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा और उड़ान संचालन की व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत बढ़ा दी है।

    चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल खासतौर पर केदारनाथ जैसे दुर्गम धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए किया जाता है। बुजुर्गों और कम समय में यात्रा पूरी करने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी मानी जाती है। लेकिन हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां हेलीकॉप्टर उड़ानों को चुनौतीपूर्ण बना देती हैं। यहां मौसम तेजी से बदलता है और कुछ ही मिनटों में साफ आसमान कोहरा तथा बादलों से घिर सकता है। बारिश और कम दृश्यता के कारण पायलटों को उड़ान के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

    तेज हवाओं का अचानक रुख बदलना भी हेलीकॉप्टर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा माइक्रोबर्स्ट यानी हवा का अचानक तेज गति से नीचे की ओर बहना उड़ान के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। कुछ दुर्घटनाओं में इंजन रोटर ब्लेड और टेल रोटर से जुड़ी तकनीकी खराबियां भी सामने आई हैं। ऐसे में मौसम की स्थिति और हेलीकॉप्टर की तकनीकी जांच दोनों ही सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

    बीते वर्षों में हुए हादसों पर नजर डालें तो 12 जून 2009 को केदारनाथ हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर के पंखे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई थी। वर्ष 2013 में चारधाम क्षेत्र में कई बड़े हादसे हुए। 21 जून को जंगलचट्टी में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से पायलट की जान गई। 25 जून को गौरीकुंड के पास एमआई-17 हेलीकॉप्टर हादसे में 20 जवानों की मौत हुई थी। इसके तीन दिन बाद गरुड़चट्टी में एक अन्य दुर्घटना में तीन लोगों की जान चली गई।

    इसके बाद भी हादसों का सिलसिला थमा नहीं। 2016 में गुप्तकाशी के पास हवा में हेलीकॉप्टर को नुकसान पहुंचा लेकिन सभी यात्री सुरक्षित बच गए। 2018 में केदारनाथ में एमआई-17 दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसमें कोई जनहानि नहीं हुई। 2019 में तकनीकी खराबी के कारण आपात लैंडिंग करनी पड़ी। अक्टूबर 2022 में गरुड़चट्टी के पास पहाड़ी से टकराने के कारण सात लोगों की मौत हुई। अप्रैल 2023 में हेलीपैड पर टेल रोटर की चपेट में आने से एक अधिकारी की जान चली गई।

    वर्ष 2024 और 2025 में भी कई घटनाएं हुईं। इनमें कुछ मामलों में आपात लैंडिंग और दुर्घटना के बावजूद यात्रियों की जान बच गई जबकि 15 जून 2025 को गौरी माई खर्क के पास हुए हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। अक्टूबर 2026 में नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में तकनीकी खराबी के कारण निजी हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग हुई। इसके बाद 30 अक्टूबर को बदरीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर हाथी पर्वत के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया और छह लोगों की मौत हो गई।

    लगातार हो रही इन घटनाओं के बीच हेलीकॉप्टर संचालन में मौसम की सख्त निगरानी तकनीकी जांच और सुरक्षा नियमों के पालन को प्राथमिकता देना जरूरी है। चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा अवसर है लेकिन इस यात्रा में उनकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

  • उत्तराखंड : जोशीमठ हेलिकॉप्टर हादसे में गई 6 लोगों की जान, कोई वकील तो कोई पुलिस इंस्पेक्टर, जानिए कौन थे मृतक

    उत्तराखंड : जोशीमठ हेलिकॉप्टर हादसे में गई 6 लोगों की जान, कोई वकील तो कोई पुलिस इंस्पेक्टर, जानिए कौन थे मृतक


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास हुए हेलिकॉप्टर हादसे ने छह परिवारों की खुशियां छीन लीं। शुक्रवार को हुए इस दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर में सवार पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। पांच यात्री कर्नाटक के बेंगलुरु के रहने वाले थे, जबकि पायलट दिल्ली का निवासी था। मृतकों में एक वकील और कर्नाटक पुलिस का इंस्पेक्टर भी शामिल था। हादसे की खबर से उनके परिवारों और परिचितों में शोक का माहौल है।

    हेलिकॉप्टर बदरीनाथ धाम से देहरादून के लिए रवाना हुआ था। इसमें सवार यात्रियों की पहचान प्रताप, अरुण सालुंके, शंकर गौड़ा, के. सुधीर और एच.एस. नटराज के रूप में हुई है। वहीं, हादसे में जान गंवाने वाले पायलट दिल्ली के रहने वाले थे।

    शंकर गौड़ा को याद कर भावुक हुए पड़ोसी

    हादसे में जान गंवाने वाले शंकर गौड़ा पेशे से वकील थे। उनके पड़ोसियों के मुताबिक, वह बेहद मिलनसार और मददगार स्वभाव के व्यक्ति थे। काम के सिलसिले में उनका बेंगलुरु आना-जाना लगा रहता था। मोहल्ले में किसी को भी परेशानी होती या मदद की जरूरत पड़ती, तो शंकर गौड़ा हमेशा आगे रहते थे।

    पड़ोसियों ने बताया कि उन्हें ईश्वर में गहरी आस्था थी। नवरात्रि के व्रत से लेकर गणपति पूजा और दिवाली तक, वह हर त्योहार पूरे उत्साह से मनाते थे। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ पूरा मोहल्ला गमगीन है।

    2007 बैच के पुलिस इंस्पेक्टर थे अरुण सालुंके

    हादसे में जान गंवाने वाले अरुण सालुंके कर्नाटक के बेलगावी जिले के अथानी तालुका स्थित अराताला गांव के निवासी थे। वह कर्नाटक पुलिस के 2007 बैच के इंस्पेक्टर थे और बेंगलुरु की सेंट्रल क्राइम ब्रांच में तैनात थे।

    अरुण ने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली में इंटेलिजेंस इंस्पेक्टर के रूप में की थी। पुलिस विभाग में अपनी सेवाओं के दौरान उन्होंने पहचान बनाई थी। जोशीमठ के पास हुआ हेलिकॉप्टर हादसा उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ।

    दर्शन के बाद माना गांव भी पहुंचे थे श्रद्धालु

    जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक से आए श्रद्धालु गुरुवार सुबह करीब 10 बजे बदरीनाथ धाम पहुंचे थे। दर्शन करने के बाद वे भारत के अंतिम गांव के रूप में चर्चित माना गांव भी गए। वहां से लौटने के बाद उन्होंने हेलीपैड पर मौजूद गाइड से पूछा था कि क्या वे उसी दिन वापस लौट सकते हैं।

    हालांकि, मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण उसी दिन उड़ान संभव नहीं हो सकी। तय कार्यक्रम के मुताबिक, यात्रियों को शुक्रवार सुबह लौटना था। लेकिन खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण हेलिकॉप्टर की उड़ान में देरी हुई। आखिरकार दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर हेलिकॉप्टर ने बदरीनाथ धाम से उड़ान भरी।

    उड़ान के 15 मिनट बाद टूटा संपर्क

    उड़ान भरने के करीब 15 मिनट बाद हेलिकॉप्टर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल और बेस से संपर्क टूट गया। इसके बाद दुर्घटना की सूचना सामने आई। हादसे में पायलट और पांचों यात्रियों की जान चली गई।

    कर्नाटक सरकार ने सहायता का दिया भरोसा

    हादसे के बाद कर्नाटक सरकार ने कहा है कि वह उत्तराखंड प्रशासन के लगातार संपर्क में है। दोनों राज्यों के बीच समन्वय कर मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द कर्नाटक लाने की व्यवस्था की जा रही है। राज्य सरकार ने शोकाकुल परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया है।