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  • हेमा मालिनी संग सीन देने में हुई झिझक! नसीरुद्दीन शाह के इनकार के बाद मेकर्स ने निकाला अनोखा रास्ता

    हेमा मालिनी संग सीन देने में हुई झिझक! नसीरुद्दीन शाह के इनकार के बाद मेकर्स ने निकाला अनोखा रास्ता


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई बार ऐसे किस्से सामने आते हैं जो फिल्मों से ज्यादा उनकी शूटिंग के दौरान घटी घटनाओं की वजह से चर्चा में रहते हैं। कलाकार अक्सर अपने किरदार की जरूरत के अनुसार चुनौतीपूर्ण दृश्य निभाते हैं लेकिन कुछ मौके ऐसे भी आए जब कलाकारों ने व्यक्तिगत असहजता के कारण कुछ दृश्यों को करने से परहेज किया। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म रिहाई से जुड़ा है जिसमें हेमा मालिनी और नसीरुद्दीन शाह अहम भूमिकाओं में नजर आए थे।

    बताया जाता है कि फिल्म की कहानी के अनुसार नसीरुद्दीन शाह और हेमा मालिनी के बीच एक रोमांटिक दृश्य फिल्माया जाना था। जब अभिनेता को इस दृश्य के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने इसे करने में असहजता जताई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नसीरुद्दीन शाह का मानना था कि हेमा मालिनी जैसी वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अभिनेत्री के साथ इस तरह का दृश्य करना उनके लिए सहज नहीं था। उन्होंने निर्देशक से अपनी झिझक भी साझा की।

    कहा जाता है कि फिल्म की निर्देशक अरुणा राजे और स्वयं हेमा मालिनी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया ताकि दृश्य कहानी की जरूरत के अनुसार पूरा किया जा सके। हालांकि अभिनेता अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद फिल्म की टीम ने वैकल्पिक तरीका अपनाते हुए संबंधित दृश्य को बॉडी डबल की मदद से फिल्माने का निर्णय लिया। इस तरह फिल्म की शूटिंग पूरी की गई और कहानी के प्रवाह को भी बनाए रखा गया।

    फिल्म रिहाई अपने समय की अलग विषयवस्तु वाली फिल्मों में गिनी जाती है। इसमें ग्रामीण समाज महिलाओं के अकेलेपन सामाजिक बदलाव और रिश्तों की जटिलताओं को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया था। फिल्म में हेमा मालिनी के अलावा विनोद खन्ना नसीरुद्दीन शाह और नीना गुप्ता जैसे कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। समीक्षकों ने इसकी कहानी और अभिनय की सराहना की थी।

    रिपोर्टों के मुताबिक इस फिल्म के लिए शुरुआत में अभिनेत्री स्मिता पाटिल पर भी विचार किया गया था। बाद में यह भूमिका हेमा मालिनी को मिली और उन्होंने मजबूत कहानी तथा महिला निर्देशक के साथ काम करने की इच्छा के चलते फिल्म स्वीकार की। एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने भी बताया था कि अरुणा राजे के निर्देशन में काम करना उनके लिए एक विशेष अनुभव था और यही वजह थी कि उन्होंने यह फिल्म करने का फैसला लिया।

    आज भी रिहाई केवल अपनी कहानी के लिए ही नहीं बल्कि शूटिंग से जुड़े इन दिलचस्प किस्सों के कारण भी याद की जाती है। यह घटना इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कलाकारों की व्यक्तिगत सहजता और पेशेवर जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए फिल्म निर्माण के दौरान कई बार अलग-अलग समाधान तलाशने पड़ते हैं।

  • 2 घंटा 41 मिनट की फिल्म जिसने बदली किस्मत प्रोड्यूसर की नींद बनी सुपरहिट का राज

    2 घंटा 41 मिनट की फिल्म जिसने बदली किस्मत प्रोड्यूसर की नींद बनी सुपरहिट का राज


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में बनी हैं जिनकी सफलता के पीछे दिलचस्प और हैरान करने वाली कहानियां छिपी हुई हैं लेकिन साल 1970 में रिलीज हुई जॉनी मेरा नाम का किस्सा उन सब में सबसे अलग माना जाता है यह फिल्म करीब 2 घंटा 41 मिनट लंबी थी और जब इसका ट्रायल शो रखा गया तो एक ऐसी घटना हुई जिसने आगे चलकर इसे ब्लॉकबस्टर बना दिया

    इस फिल्म में देव आनंद और हेमा मालिनी मुख्य भूमिका में नजर आए थे दोनों की जोड़ी ने पर्दे पर ऐसा जादू चलाया कि दर्शक दीवाने हो गए फिल्म का निर्देशन विजय आनंद ने किया था जबकि इसके निर्माता गुलशन राय थे

    अब इस फिल्म की सफलता का सबसे दिलचस्प पहलू सामने आता है बताया जाता है कि जब इस फिल्म का ट्रायल शो चल रहा था तब निर्माता गुलशन राय उसे देखते हुए सो गए थे आम तौर पर यह किसी भी निर्माता के लिए चिंता की बात हो सकती है क्योंकि इसका मतलब यह निकाला जाता है कि फिल्म दर्शकों को बांध नहीं पा रही है लेकिन यहां मामला बिल्कुल उल्टा निकला

    उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में यह धारणा बन चुकी थी कि अगर गुलशन राय किसी फिल्म के ट्रायल के दौरान सो जाते हैं तो वह फिल्म जरूर हिट होती है और अगर वह पूरी फिल्म जागकर देख लेते हैं तो उसके फ्लॉप होने की संभावना बढ़ जाती है दिलचस्प बात यह है कि यह मान्यता सिर्फ एक बार नहीं बल्कि कई बार सही साबित हुई

    ज्वेल थीफ और जॉनी मेरा नाम दोनों के ट्रायल में गुलशन राय सो गए थे और दोनों ही फिल्में सुपरहिट साबित हुईं वहीं जब वह जोशीला के ट्रायल में नहीं सोए तो वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही इस वजह से यह किस्सा और भी ज्यादा चर्चित हो गया

    जॉनी मेरा नाम एक क्राइम एक्शन ड्रामा फिल्म थी जिसमें रोमांच सस्पेंस और म्यूजिक का शानदार मेल देखने को मिला फिल्म के गाने भी बेहद लोकप्रिय हुए खास तौर पर पल भर के लिए हमें कोई प्यार कर ले आज भी लोगों की जुबान पर रहता है इस फिल्म ने हेमा मालिनी को रातोंरात स्टार बना दिया और वह दर्शकों के दिलों में बस गईं

    बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने जबरदस्त कमाई की और यह साल 1970 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई यह देव आनंद और हेमा मालिनी की पहली फिल्म थी और उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब पसंद किया इसके बाद दोनों ने कई और फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी हिट मानी जाने लगी

    इस पूरी कहानी से यह साफ होता है कि कभी कभी फिल्म की सफलता सिर्फ उसकी कहानी या स्टारकास्ट पर ही निर्भर नहीं होती बल्कि उससे जुड़े किस्से और विश्वास भी उसे खास बना देते हैं जॉनी मेरा नाम सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा के इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय है जहां एक प्रोड्यूसर की नींद ने सफलता की नई परिभाषा लिख दी

  • धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म 'Ikkis' देखने से क्यों कतरा रही हैं हेमा मालिनी? वजह जानकर आपकी आंखें भी हो जाएंगी नम

    धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म 'Ikkis' देखने से क्यों कतरा रही हैं हेमा मालिनी? वजह जानकर आपकी आंखें भी हो जाएंगी नम


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन को डेढ़ महीना बीत चुका है लेकिन ‘देओल परिवार’ और उनके चाहने वालों के लिए इस खालीपन को भर पाना नामुमकिन साबित हो रहा है। हाल ही में धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई जिसे देख फैंस की आंखें नम हो गईं। धर्मेंद्र के करियर का यह अंतिम अध्याय न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि उनके लाखों प्रशंसकों के लिए भी एक भावुक यात्रा बन गया है।हालांकि एक ताज्जुब की बात यह है कि धर्मेंद्र की पत्नी और बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी ने अब तक यह फिल्म नहीं देखी है। इस सवाल पर जब हेमा मालिनी से बातचीत की गई तो उन्होंने खुलासा किया कि वह इस फिल्म को देखने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं।

    फिल्म न देखने की वजह ‘भावुकता’

    हेमा मालिनी ने कहा “जब यह फिल्म रिलीज हुई तब मैं मथुरा में अपने काम में व्यस्त थी। सच कहूं तो मैंने अभी तक ‘इक्कीस’ नहीं देखी है क्योंकि यह मेरे लिए बहुत भावुक कर देने वाला पल होगा। मेरी बेटी भी मुझसे यही कह रही थी। शायद मैं इसे तब देखूंगी जब मेरे घाव थोड़े भरने लगेंगे। मा मालिनी के लिए यह फिल्म एक भावनात्मक और दर्दनाक अनुभव हो सकती है क्योंकि इसमें उनके पति ने अपनी अंतिम फिल्म में प्रदर्शन किया है। वह शायद इस पल को महसूस करने के लिए और भी मानसिक रूप से तैयार होना चाहती हैं।

    ‘इक्कीस’ की स्क्रीनिंग में नम थीं सबकी आंखें

    1 जनवरी 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म की मुंबई में विशेष स्क्रीनिंग रखी गई थी जहां सनी देओल और सलमान खान समेत बॉलीवुड के तमाम सितारे ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। ट्रेलर लॉन्च के दौरान भी सनी देओल भावुक हो गए थे और अपने पिता को याद करते हुए रो पड़े थे। धर्मेंद्र की यह फिल्म उनके करियर का एक ऐतिहासिक और यादगार विदाई मानी जा रही है।

    धर्मेंद्र और अगस्त्य नंदा का यादगार साथ

    फिल्म ‘इक्कीस’ को श्रीराम राघवन ने निर्देशित किया है और यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:मुख्य भूमिका: अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने शहीद अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है।धर्मेंद्र का रोल: फिल्म में धर्मेंद्र एक बेहद अहम और प्रभावशाली भूमिका में नजर आए हैं जो दर्शकों के दिल को छू लेती है। कहानी: यह 21 साल के सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की वीरता की गाथा है जिन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।सह-कलाकार: फिल्म में जयदीप अहलावत और सिमर भाटिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

    एक युग का अंत

    धर्मेंद्र केवल एक अभिनेता नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के एक युग का नाम थे। उनकी अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ न केवल एक युद्ध की कहानी है बल्कि धर्मेंद्र जैसे महान कलाकार को सिनेमाई जगत की तरफ से एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि भी है। फैंस सोशल मीडिया पर लगातार लिख रहे हैं कि बड़े पर्दे पर उन्हें आखिरी बार देखना एक ऐतिहासिक और हृदयविदारक अनुभव है। हेमा मालिनी के लिए यह फिल्म सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण हिस्से को देखना है और शायद इसलिए वह इसे देखने के लिए अब तक तैयार नहीं हो पाई हैं।

  • धर्मेंद्र की दिल्ली प्रेयर मीट में ईशा देओल के एक्स पति भरत तख्तानी भी होंगे शामिल

    धर्मेंद्र की दिल्ली प्रेयर मीट में ईशा देओल के एक्स पति भरत तख्तानी भी होंगे शामिल


    नई दिल्ली बॉलीवुड के लिजेंडरी एक्टर धर्मेंद्र के निधन के बाद उनका परिवार अभी भी गहरे शोक में डूबा हुआ है। ऐसे में उनकी याद में आयोजित की जा रही प्रेयर मीट में परिवार और दोस्तों की उपस्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गई है। इस बार हेमा मालिनी और उनकी बेटी ईशा देओल ने नई दिल्ली में एक प्रेयर मीट आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह आयोजन 11 दिसंबर को डॉक्टर अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर जनपथ में होने जा रहा है। यह एक इमोशनल अवसर होगा जब परिवार और धर्मेंद्र के शुभचिंतक उनके 90वें जन्मदिन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

    इस प्रेयर मीट की खबरों के अनुसार ईशा देओल के एक्स पति भरत तख्तानी भी इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। भरत और ईशा का तलाक हो चुका है लेकिन फिर भी दोनों के बीच दोस्ती और समझदारी बनी हुई है। उनका रिश्ता अब भले ही शादीशुदा नहीं रहा लेकिन वे एक-दूसरे के हर सुख-दुख में साथ हैं। पिछले साल उनका तलाक हुआ था लेकिन इस कठिन समय में भी भरत अपनी बेटी राध्या और मिराया के लिए ईशा के साथ खड़े हैं।

    यह घटनाक्रम दर्शाता है कि परिवार और रिश्तों की अहमियत जीवन में हमेशा बनी रहती है चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों। ईशा के बुरे वक्त में भरत का समर्थन एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि लोग भले ही अलग हो जाएं लेकिन इंसानियत और मानवीय संबंधों का सम्मान हमेशा महत्वपूर्ण रहता है।

    हेमा मालिनी ने 27 नवंबर को मुंबई में भी धर्मेंद्र की याद में एक प्रेयर मीट का आयोजन किया था जिसमें भरत तख्तानी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। यह मीट भी एक भावुक अवसर था जहां धर्मेंद्र के फैंस और परिवार ने उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त की। इस मीट में भरत के साथ उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हुए थे और ईशा के दुख में उनका साथ दिया था।

    अब दिल्ली में आयोजित होने वाली प्रेयर मीट में ईशा देओल की बहन अहाना देओल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकती हैं। अहाना अपने पति वैभव वोहरा के साथ इस कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस प्रकार यह आयोजन पूरी देओल परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण और भावुक अवसर होगा जहां वे अपने प्रिय धर्मेंद्र की याद में एकजुट होंगे।

    धर्मेंद्र के 90वें जन्मदिन पर आयोजित इस प्रेयर मीट में सनी और बॉबी देओल ने भी भाग लिया था। इस दौरान वे फैंस के साथ मिले और धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि अर्पित की। सनी और बॉबी ने न केवल भारत से बल्कि विदेशों से आए फैंस के साथ भी अपनी भावनाएँ साझा कीं। धर्मेंद्र का योगदान भारतीय सिनेमा में अनमोल रहेगा और उनकी फिल्मों और व्यक्तित्व के प्रति प्रशंसा हमेशा बरकरार रहेगी। इस प्रकार धर्मेंद्र के परिवार द्वारा आयोजित किए गए यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम एक यादगार और भावुक मौका होगा जिसमें उनके साथ बिताए गए समय की यादें और उनके योगदान को सम्मानित किया जाएगा।