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  • मेडल से भरी झोली फिर भी नौकरी नहीं, थ्रोबॉल चैंपियन अमरदीप की कहानी ने CM सोरेन का खींचा ध्यान

    मेडल से भरी झोली फिर भी नौकरी नहीं, थ्रोबॉल चैंपियन अमरदीप की कहानी ने CM सोरेन का खींचा ध्यान


    नई दिल्ली। झारखंड के 29 वर्षीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करते हुए चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद उनकी जिंदगी आज भी संघर्षों से गुजर रही है। सरकारी नौकरी और प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने के कारण अमरदीप को परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचनी पड़ रही है। इसके अलावा वह कैब भी चलाते हैं। खिलाड़ी की स्थिति सामने आने के बाद अब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया है और खेल विभाग को इस पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    अमरदीप ने कम उम्र से ही थ्रोबॉल को अपना करियर बनाया। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और लगातार शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2015 में मलेशिया में आयोजित एशियन जूनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप में उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद वर्ष 2017 में काठमांडू में हुई इंडो नेपाल थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी वह स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे। वर्ष 2019 में बेंगलुरु में आयोजित साउथ एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड अपने नाम किया। वर्ष 2026 में रांची में आयोजित प्रतियोगिता में एक बार फिर अमरदीप ने स्वर्ण पदक हासिल किया। इस तरह उनके खाते में देश के लिए चार अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल हैं।

    इतनी बड़ी खेल उपलब्धियों के बावजूद अमरदीप को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि वह वर्ष 2016 से प्रोत्साहन राशि के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। वहीं वर्ष 2020 से नौकरी के लिए कोशिश शुरू की थी लेकिन इसी दौरान कोरोना महामारी के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। वर्ष 2022 के बाद उन्होंने फिर लगातार प्रयास किए लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली। उनका दावा है कि नौकरी और कैश अवॉर्ड से जुड़े उनके आवेदन अभी भी लंबित हैं।

    अमरदीप का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या सरकार के सामने रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह राज्य के पूर्व खेल मंत्री हफीजुल हसन से भी मुलाकात कर चुके हैं। उनका कहना है कि उनके कई साथी खिलाड़ी दूसरे राज्यों से हैं और वहां उन्हें सरकारी नौकरी सहित कई सुविधाएं मिली हैं। इसके मुकाबले झारखंड में उन्हें अब तक अपने आवेदन पर राहत का इंतजार है।

    परिवार की आर्थिक स्थिति भी अमरदीप के संघर्ष को और मुश्किल बना देती है। उनके पिता सब्जी बेचकर परिवार का खर्च चलाते हैं और अमरदीप भी उनके काम में हाथ बंटाते हैं। उनकी मां गृहिणी हैं और वह करीब 35 किलो सब्जी सिर पर रखकर घर-घर बेचती हैं। बड़े भाई फास्ट फूड का स्टॉल चलाकर परिवार की आमदनी में सहयोग करते हैं। अमरदीप खुद भी जरूरत पड़ने पर कैब चलाते हैं। कई बार रात में कैब चलाने के बाद सुबह अभ्यास के लिए पहुंचना उनके लिए चुनौती बन जाता है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए भी अमरदीप को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ा। मलेशिया जाने के दौरान उन्हें करीब 65 हजार रुपये का कर्ज लेना पड़ा था। झारखंड थ्रोबॉल एसोसिएशन ने भी उनके खर्च में मदद की और करीब आधी राशि का भार उठाया। इसके बावजूद आर्थिक कठिनाइयों के बीच अमरदीप ने खेल से नाता नहीं तोड़ा है।

    अब उनकी कहानी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खेल विभाग को मामले को देखने और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद खेल मंत्री सुदिव्य सोनू ने भी कहा कि सरकार मौजूदा खेल नीति के आधार पर अमरदीप को नौकरी देने की संभावनाएं तलाश रही है। साथ ही रोजगार के दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।

    अमरदीप का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। वह अक्टूबर 2026 के आखिर में श्रीलंका में होने वाली प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। एक ओर देश के लिए पदक जीतने का जुनून कायम है तो दूसरी ओर परिवार चलाने की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है। अमरदीप की कहानी उन खिलाड़ियों की चुनौती को सामने लाती है जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक तो जीतते हैं लेकिन अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए उन्हें आज भी संघर्ष करना पड़ता है।

  • गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर आंदोलन… आज हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले जलाएंगे छात्र

    गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर आंदोलन… आज हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले जलाएंगे छात्र


    रांची।
    झारखंड (Jharkhand) में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं (JPSC and JSSC examinations) में कथित अनियमितता के खिलाफ पिछले 21 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को अब और तेज करने की तैयारी है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने आज सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Chief Minister Hemant Soren) के इस्तीफे की मांग की है। मंच ने आंदोलन के अगले चरण के कार्यक्रमों का भी ऐलान किया है। आज छात्रों ने एक बड़ा ऐलान किया है। आइए जानते हैं छात्रों ने क्या-क्या कहा है।


    ‘गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर’

    सरकार की बेरुखी को देखते हुए प्रदर्शन कर रहे छात्र रवींद्र पासवान ने कहा कि अब आंदोलन गांधी के रास्ते पर नहीं, बल्कि भगत सिंह के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। वहीं, मंच के पीयूष कुमार ने सरकार पर छात्रों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार उन्हें ‘कीड़ा-मकोड़ा’ समझ रही है। उन्होंने कहा कि अब छात्र ‘दिशोम गुरु’ के रास्ते पर चलकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।


    आज राहुल गांधी और हेमंत सोरेन का पुतला दहन का प्लान

    मंच के अनुसार, 16 अगस्त को पूरे झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा जबकि 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो उन्हें राज्य सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़े रहने की बात कहकर उन्हें भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।


    10 अगस्त को छात्रों पर पुलिस ने बरसाई थीं लाठियां

    बता दें कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितता के खिलाफ छात्रों का आंदोलन पिछले 21 दिनों से जारी है। 10 अगस्त को राज्य भर से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे थे और विधानसभा घेराव का प्रयास किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई थी। इसके बाद से छात्रों में सरकार के प्रति नाराजगी और बढ़ गई है।

    सदर अस्पताल में 5 दिनों से भर्ती देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल 14वें दिन भी जारी रही. उन्होंने अस्पताल के अपने बेड को छोड़कर कॉरिडोर की जमीन पर लेटकर धरना जारी रखा। देवेंद्र नाथ महतो ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में तिरंगा फहराने और इसके बाद प्रस्तावित तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए सदर अस्पताल से बाहर निकलने का प्रयास किया था।


    धक्का- मुक्की हुई

    इस संबंध में देवेंद्र नाथ महतो ने पहले ही जिला प्रशासन को पत्र देकर अपनी इच्छा से अवगत कराया था.इसके साथ ही, पुलिसकर्मियों की ओर से उनके साथ जाकर वापस अस्पताल लाने की बात भी कही गई थी. सुबह करीब 8 बजे देवेंद्र नाथ महतो सदर अस्पताल से निकलने लगे. लेकिन उन्हें बार-बार लगभग 10-10 मिनट के अंतराल में रोक दिया गया और काफी देर तक बाहर जाने नहीं दिया गया. इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की भी हुई।

    करीब 9 से 10 बजे के बीच मौके पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति और गंभीर हो गई. देवेंद्र नाथ महतो के अनुसार, उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, जिससे उन्हें चोट भी आई. उनके साथ मौजूद साथियों के साथ भी कथित रूप से बल प्रयोग किया गया और कुछ साथियों को उठाकर पटके जाने की बात कही गई. घटना के बाद देवेंद्र नाथ महतो अस्पताल के अपने कमरे के गेट के बाहर बैठ गए और अपना अनशन जारी रखा।


    विधानसभा से जवाब मांगा जाएगा- जयराम महतो

    इसके बाद देवेंद्र नाथ महतो की बातचीत विधायक टाइगर जयराम महतो से हुई. बातचीत के दौरान जयराम महतो ने स्वतंत्रता दिवस के दिन हुई इस घटना को गंभीर और निंदनीय बताया. विधायक टाइगर जयराम महतो ने कहा कि इस पूरे मामले को विधानसभा के माध्यम से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा. इसके बाद करीब 2 से 4 बजे के बीच पुलिसकर्मी अस्पताल परिसर से हट गए, जिसके बाद मीडिया प्रतिनिधियों को अस्पताल के अंदर आने का अवसर मिला और उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।