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  • झारखंड भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, अब सोरेन और राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी

    झारखंड भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, अब सोरेन और राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी

    नई दिल्ली । झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार लंबा होता जा रहा है। प्रदर्शन 23वें दिन में पहुंच गया है और अब आंदोलनकारी छात्रों का निशाना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कांग्रेस और राहुल गांधी भी बन गए हैं। छात्रों ने अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई है।

    आंदोलनकारी छात्रों ने 16 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी का पुतला जलाने का ऐलान किया है। इसके बाद 20 अगस्त को रांची में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर सरकार को स्पष्ट और प्रभावी कदम उठाना चाहिए।

    राहुल गांधी को लेकर छात्रों की नाराजगी की वजह उनके साथ हुई बातचीत के बाद कार्रवाई नहीं होने को बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर भरोसा दिया गया था, लेकिन इसके बाद उनकी मांगों पर कोई बड़ा कदम सामने नहीं आया।

    छात्रों का कहना है कि अब केवल बातचीत और आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि यदि राहुल गांधी वास्तव में उनकी समस्याओं के समर्थन में हैं तो उन्हें आंदोलन के बीच पहुंचकर छात्रों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों के समाधान के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।

    आंदोलनकारियों ने कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि झारखंड सरकार में कांग्रेस के 16 विधायक हैं। यदि सरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो कांग्रेस को अपने समर्थन को लेकर निर्णय लेना चाहिए। छात्रों का तर्क है कि समर्थन वापस लेने से सरकार पर उनकी मांगों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा है कि आंदोलन अब तक शांतिपूर्ण तरीके से चलाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन का तरीका बदला जा सकता है। इससे आने वाले दिनों में प्रदर्शन के और व्यापक होने की संभावना है।

    20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को आंदोलन का अहम चरण माना जा रहा है। छात्रों की मुख्य मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी शिकायतों पर निर्णय करे और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

    इस पूरे घटनाक्रम का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। राज्य विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार इंडिया ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के चार और सीपीआईएमएल के दो विधायक शामिल हैं।

    यदि कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेती है तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 40 विधायक रह जाएंगे, जो बहुमत के आंकड़े से एक कम है। हालांकि, विधानसभा में जेकेएलएम का एक विधायक भी है। उसका समर्थन मिलने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा 41 विधायकों के आंकड़े तक पहुंच सकता है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे से आगे बढ़कर राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित करने वाला विषय बनता जा रहा है।

  • JPSC विवाद के बीच झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन परीक्षाओं पर संकट और जांच को लेकर सामने आया नया अपडेट

    JPSC विवाद के बीच झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन परीक्षाओं पर संकट और जांच को लेकर सामने आया नया अपडेट


    नई दिल्ली । 
    झारखंड में JPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बातचीत के महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गया है। रांची में सरकार और आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच तीसरे दौर की बैठक हुई, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, पुरानी परीक्षाओं और भर्ती व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किए जाने के संकेत मिले हैं।

    बैठक में सबसे अहम मुद्दा परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच का रहा। सरकार वित्तीय लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से कराने के लिए तैयार बताई जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी सामने आई है।

    छात्रों की प्रमुख मांगों में कुछ पुरानी परीक्षाओं को रद्द करना भी शामिल रहा है। बातचीत के दौरान JPSC बैकलॉग 2023, JPSC बैकलॉग 2025 और 14वीं प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करने की बात रखी गई। इन परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बना हुआ है। सरकार की ओर से इन तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति की बात सामने आने के बाद बातचीत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके अलावा परीक्षा आयोजित कराने वाली TDPL एजेंसी की भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से TDPL एजेंसी द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं की जांच करने की बात कही गई है। इससे परीक्षा संचालन की प्रक्रिया, उससे जुड़े निर्णयों और संभावित अनियमितताओं की व्यापक समीक्षा का रास्ता खुल सकता है।

    छात्रों की मांग केवल मौजूदा परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग भी कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार JPSC और JSSC की परीक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में बदलाव की दिशा में भी काम करने की तैयारी में है।

    सरकार की ओर से भर्ती व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसके लिए IIM और XISS जैसे संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग किए जाने की संभावना बताई गई है। इसका उद्देश्य परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, ताकि भविष्य में अभ्यर्थियों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी युवाओं की चिंताओं को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को समझती है और सरकारी व्यवस्था से जुड़ी वजहों के कारण ही युवा आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी को सरकार ने संज्ञान में लिया है और गलत काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे छात्रों से अपनी बात बिना किसी डर के सरकार तक पहुंचाने की अपील की है। सरकार और छात्रों के बीच हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित फैसलों को किस रूप में लागू किया जाता है। तीन परीक्षाओं को रद्द करने, वित्तीय लेनदेन की जांच और भर्ती व्यवस्था में बदलाव को लेकर सरकार की अगली कार्रवाई छात्र आंदोलन की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।

  • JPSC-JSSC विवाद में सरकार का पांच सूत्री फॉर्मूला, 14वीं परीक्षा रद्द होने से लेकर जांच तक क्या बदलेगा?

    JPSC-JSSC विवाद में सरकार का पांच सूत्री फॉर्मूला, 14वीं परीक्षा रद्द होने से लेकर जांच तक क्या बदलेगा?

    नई दिल्ली । रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत का दौर जारी है। सूत्रों के मुताबिक, वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने की संभावना है। हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। बातचीत के बीच 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किए जाने की संभावना भी सामने आई है।

    सरकार और छात्र संगठनों के बीच संभावित सहमति के तहत 2023 और 2025 की बैकलॉग सीटों को नहीं भरने का प्रस्ताव भी शामिल है। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार की ओर से जांच और व्यवस्था में सुधार से जुड़े कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    प्रस्तावित फॉर्मूले में CID जांच को 90 दिनों के भीतर पूरा करने की बात कही गई है। जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित किए जाने की संभावना भी जताई गई है। इससे परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।

    परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों के साथ प्रमुख संस्थानों के इंजीनियरों को शामिल किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए तकनीकी स्तर पर जरूरी बदलावों की पहचान करना होगा।

    इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL की ओर से कराई गई परीक्षाओं से जुड़े पैसों के लेनदेन की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए IIT, IIM और XLRI जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार किया जा सकता है।

    इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के प्रदर्शन और मौजूदा परिस्थितियों को लेकर बयान दिया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सकता है और सरकार युवाओं की समस्याओं को समझती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ज्यादा उम्र के नहीं हैं और युवाओं की परेशानियों को समझते हैं। उन्होंने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमा पर गोलियों की जरूरत हो सकती है, लेकिन यहां उसकी जरूरत नहीं है। उनका संकेत था कि युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए।

    हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि देशभर में अलग-अलग राजनीतिक दल विभिन्न तरीकों से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, सच और झूठ को मिलाकर युवाओं को गुमराह करने की रणनीति अपनाई जा रही है और इस प्रक्रिया में पढ़े-लिखे तथा जानकार लोग भी शामिल हो सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे युवाओं के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि सरकार की कार्रवाई के कारण युवाओं में गलत काम को सामने लाने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस आया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं को न्याय मिलेगा और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल छात्र संगठनों और सरकार के बीच बातचीत जारी है। 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा, बैकलॉग पदों, जांच की समयसीमा और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    नई दिल्ली । झारखंड में प्रतियोगी परीक्षा में कथित धांधली को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई तेज कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच वार्ता के रास्ते तलाशने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। आपराधिक जांच विभाग यानी सीआईडी ने इस प्रकरण में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों का दायरा और बढ़ गया है।

    इस हालिया कार्रवाई में परीक्षा आयोजन से जुड़े एक पूर्व अधिकारी के कार्यालय में तैनात कर्मचारी, कुछ अभ्यर्थी और बिचौलिए पुलिस की गिरफ्त में आए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और जब्त दस्तावेजों के आधार पर यह गिरफ्तारियां की गई हैं। सीआईडी की टीमें पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से लगातार विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आंदोलनकारी छात्रों से संवाद की पेशकश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी जायज मांगों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।

    दूसरी ओर, आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे बंद कमरे में वार्ता के पक्षधर नहीं हैं। छात्रों की मांग है कि बातचीत किसी सार्वजनिक मंच पर हो या फिर पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों के सामने पूरी पारदर्शिता बनी रहे। कुछ छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि मुख्यमंत्री को स्वयं अनशन स्थल पर आकर छात्रों की समस्याएं सुननी चाहिए और तुरंत समाधान की घोषणा करनी चाहिए।

    प्रदर्शन स्थल पर अनशन पर बैठे छात्रों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आंदोलनकारी मुख्य रूप से विवादित परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं के लिए सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के छात्र संगठन भी झारखंड के इस घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन को समर्थन मिल रहा है।

    संभावित विधानसभा घेराव और प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बने इस गतिरोध का नतीजा क्या निकलता है, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।