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  • ग्वालियर बाजार में होली की धूम, स्मोक शॉट और इलेक्ट्रिक पिचकारियों ने बच्चों और युवाओं को किया मंत्रमुग्ध

    ग्वालियर बाजार में होली की धूम, स्मोक शॉट और इलेक्ट्रिक पिचकारियों ने बच्चों और युवाओं को किया मंत्रमुग्ध



    ग्वालियर ग्वालियर में होली का त्योहार करीब आते ही बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। हर्बल रंग, अबीर-गुलाल और नई डिज़ाइन की पिचकारियों की लंबी रेंज दुकानों पर सज चुकी है। ग्राहक परिवार के साथ खरीदारी करने पहुंच रहे हैं और दुकानों पर भीड़ लगातार बढ़ रही है।

    दुकानदार विकास गुप्ता के मुताबिक इस बार बाजार में कई नए और आकर्षक आइटम आए हैं। ग्राहक इन नए कलेक्शन को काफी पसंद कर रहे हैं।

    स्मोक शॉट और इलेक्ट्रिक पिचकारियां इस बार सबसे बड़ा आकर्षण हैं। स्मोक शॉट से रंग आसमान में फैलते हैं, वहीं इलेक्ट्रिक शॉट गन पानी में डालते ही रंगीन पानी भर देती है। इसके अलावा हनुमान जी की गदा, परशुराम का फरसा और भगवान राम के धनुष-बाण की डिजाइन वाली पिचकारियां भी बच्चों और युवाओं में खास लोकप्रिय हो रही हैं।

    बाजार में रंग-बिरंगी ड्रेस की भी मांग बढ़ी है। सफेद शर्ट, कुर्ती, कुर्ता-पायजामा, जयपुरी जूती, पगड़ी और ब्लैक गॉगल की बिक्री में इजाफा हुआ है। छोटे बच्चे रंग-बिरंगे कपड़ों और एक्सेसरीज़ के साथ खरीदारी कर रहे हैं।

    शहर की कई कॉलोनियों और सोसायटियों में होली के दिन सामूहिक कार्यक्रम होंगे। लोग निर्धारित समय पर डीजे और पारंपरिक पकवानों के साथ त्योहार का आनंद लेंगे।

    कलेक्टर रुचिका चौहान ने होली के अवसर पर 4 मार्च को जिले में शासकीय अवकाश घोषित किया है। सभी सरकारी कार्यालय 5 मार्च से फिर से खुलेंगे।

  • होली 2026: रंगों का त्योहार सुरक्षित और खुशहाल बनाने के लिए जरूरी सावधानियाँ

    होली 2026: रंगों का त्योहार सुरक्षित और खुशहाल बनाने के लिए जरूरी सावधानियाँ


    नई दिल्ली। होली का त्योहार उमंग, उत्साह और रंगों के मेलजोल का प्रतीक है, लेकिन बिना तैयारी के खेली गई होली स्वास्थ्य के लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस बार होली खेलने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां अपनाई जाएँ ताकि त्योहार सुरक्षित और खुशहाल रहे।

    सबसे पहले त्वचा की सुरक्षा का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार होली खेलने से पहले चेहरे और शरीर पर नारियल तेल या मॉइस्चराइज़र लगाना चाहिए। यह एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है और रंगों को सीधे त्वचा से संपर्क करने से रोकता है। बाद में रंग आसानी से साफ भी हो जाते हैं। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है, उन्हें हर्बल या प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करना चाहिए। केमिकल युक्त रंगों से त्वचा में जलन, एलर्जी और रैशेज जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

    आंखों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि होली खेलते समय चश्मा पहनना या आंखों को रंग से बचाना चाहिए। यदि रंग आंखों में चला जाए तो तुरंत साफ पानी से धोएं और जलन बनी रहने पर चिकित्सक से सलाह लें। बच्चों के साथ होली खेलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है क्योंकि उनकी त्वचा और आंखें संवेदनशील होती हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ पानी और भोजन की सुरक्षा पर भी जोर देते हैं। होली के दौरान शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना जरूरी है। बाहर मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। स्वच्छ और घर का बना भोजन ही प्राथमिकता होनी चाहिए। यह न केवल पेट को सुरक्षित रखता है बल्कि संक्रमण के जोखिम को भी कम करता है।

    इसके अलावा, सुरक्षित होली खेलने के लिए कपड़ों और पर्यावरण का भी ध्यान रखना आवश्यक है। पुराने कपड़े पहनें जिन्हें रंग लगने पर फेंका जा सके। प्राकृतिक और इको-फ्रेंडली रंगों का इस्तेमाल करें ताकि त्वचा और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहें। पानी का अत्यधिक उपयोग न करें और आसपास के लोगों की सहमति के बिना रंग न डालें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी और संयम के साथ खेली गई होली ही सबसे आनंददायक होती है। थोड़ी सी तैयारी और सुरक्षा के उपाय अपनाकर लोग त्योहार का भरपूर मज़ा ले सकते हैं। घर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें और उन्हें हर्बल रंगों के महत्व के बारे में बताएं।

    इस तरह होली न केवल उमंग और उत्साह का त्योहार बनी रहती है बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी सुरक्षित और सुखद अनुभव बनती है। इस बार त्योहार के रंगों में सुरक्षा और आनंद दोनों का संगम सुनिश्चित करें और सभी के लिए खुशियाँ और उत्साह फैलाएं।