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  • सलमान रुश्दी पर हमले के मामले में बड़ा फैसला, हमलावर आतंकवाद से जुड़े आरोपों में भी दोषी करार

    सलमान रुश्दी पर हमले के मामले में बड़ा फैसला, हमलावर आतंकवाद से जुड़े आरोपों में भी दोषी करार

    नई दिल्ली । बुकर पुरस्कार विजेता लेखक सलमान रुश्दी पर वर्ष 2022 में हुए जानलेवा हमले के मामले में अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत की जूरी ने आरोपी हादी मतर को आतंकवाद से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया है। इससे पहले वह न्यूयॉर्क राज्य की अदालत में हत्या के प्रयास के मामले में भी दोषी करार दिया जा चुका है और वर्तमान में सजा काट रहा है। ताजा फैसले के बाद उस पर अतिरिक्त संघीय सजा का रास्ता भी खुल गया है।

    अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि हादी मतर ने सलमान रुश्दी पर हमला अकेले नहीं किया, बल्कि वह ईरान से जुड़े एक संगठन के समर्थन और विचारधारा से प्रभावित होकर काम कर रहा था। अभियोजकों ने अदालत के समक्ष ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनमें आरोपी की तस्वीरें और वीडियो शामिल थे। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी पर लगाए गए आतंकवाद से संबंधित आरोप साबित होते हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि हमला वर्ष 1989 में जारी उस विवादित फतवे की पृष्ठभूमि से जुड़ा था, जिसमें सलमान रुश्दी के खिलाफ कार्रवाई की अपील की गई थी। यह फतवा उनके उपन्यास ‘सैटेनिक वर्सेज’ को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद जारी हुआ था। इसी संदर्भ को अभियोजन ने हमले के संभावित उद्देश्य के रूप में अदालत के सामने रखा।

    दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने यह स्वीकार किया कि हादी मतर ने लेखक पर हमला किया था, लेकिन उसने यह दलील दी कि आरोपी ने यह कृत्य किसी संगठन के निर्देश पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से किया। बचाव पक्ष का कहना था कि मतर अपनी धार्मिक भावनाओं के कारण आक्रोशित था और उसने किसी विदेशी सरकार या संगठन के साथ मिलकर साजिश नहीं रची।

    79 वर्षीय सलमान रुश्दी पर अगस्त 2022 में न्यूयॉर्क राज्य के चौटाक्वा इंस्टीट्यूशन में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हमला हुआ था। विडंबना यह थी कि उस समय वह लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा से जुड़े विषय पर बोलने वाले थे। कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर पहुंचे आरोपी ने उन पर कई बार चाकू से हमला किया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हमले के कारण सलमान रुश्दी की एक आंख की रोशनी चली गई और उनके हाथ तथा शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटें आईं। अदालत में गवाही के दौरान उन्होंने बताया कि हमले के कारण उन्हें स्थायी शारीरिक नुकसान हुआ है और अब वह पहले की तरह सामान्य जीवन नहीं जी सकते। उन्होंने अपने अनुभवों और हमले के बाद के संघर्ष को लेकर एक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का विस्तार से उल्लेख किया है।

    अमेरिकी न्याय व्यवस्था के तहत किसी एक घटना में राज्य और संघीय स्तर पर अलग-अलग कानूनों के आधार पर मुकदमा चलाया जा सकता है। इसी प्रक्रिया के तहत हादी मतर को पहले राज्य अदालत में हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ठहराया गया था, जबकि अब संघीय अदालत ने उसे आतंकवाद से जुड़े आरोपों में भी दोषी माना है। इस मामले में नवंबर में सजा सुनाई जानी है और उसे बिना पैरोल के आजीवन कारावास तक की सजा मिल सकती है।

    यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लेखकों की सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मामलों में अमेरिकी न्याय प्रणाली की कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लंबे समय से नजर बनी हुई थी और अब संघीय अदालत के फैसले के बाद इसकी कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है।

  • 20 वर्षों बाद व्हाइट हाउस पहुंचे लेबनान के राष्ट्रपति, ट्रंप के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य तनाव पर होगी निर्णायक चर्चा

    20 वर्षों बाद व्हाइट हाउस पहुंचे लेबनान के राष्ट्रपति, ट्रंप के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य तनाव पर होगी निर्णायक चर्चा


    नई दिल्ली ।
    लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन आधिकारिक दौरे पर अमेरिका पहुंच गए हैं, जहां वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति, इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव और हिज्बुल्लाह की भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात में क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा सहयोग और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के निमंत्रण पर वॉशिंगटन पहुंचे राष्ट्रपति आउन और उनकी पत्नी नायमा आउन का एंड्रयूज एयर फोर्स बेस पर औपचारिक स्वागत किया गया। स्वागत समारोह में अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, अमेरिका में लेबनान की राजदूत, संयुक्त राष्ट्र में लेबनान के प्रतिनिधि तथा लेबनानी दूतावास के राजनयिक और सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद राष्ट्रपति आउन अपने आधिकारिक आवास पहुंचे, जहां उन्होंने अमेरिका स्थित लेबनानी दूतावास के अधिकारियों से मुलाकात कर वहां के कामकाज और प्रवासी लेबनानी समुदाय से जुड़े मुद्दों की जानकारी प्राप्त की।

    राष्ट्रपति आउन अपने दौरे की शुरुआत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक से करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग, क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। इसके बाद व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनका औपचारिक स्वागत करेंगे। दोनों नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में हिज्बुल्लाह के हथियारों से जुड़े मुद्दे, लेबनान के दक्षिणी क्षेत्र से इजरायली सेना की वापसी तथा संघर्ष विराम व्यवस्था को प्रभावी बनाने जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।

    इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति आउन अमेरिकी सीनेट के कई सदस्यों और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी अलग-अलग बैठक करेंगे। इन बैठकों में लेबनान की आर्थिक स्थिति, सुरक्षा सहयोग, मानवीय सहायता, निवेश और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय कूटनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    जोसेफ आउन पिछले वर्ष लेबनान के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। इससे पहले वह लंबे समय तक लेबनानी सेना के कमांडर रहे और उन्हें अमेरिका समर्थित सैन्य नेतृत्व के रूप में भी देखा जाता रहा है। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनका पहला व्हाइट हाउस दौरा है और पहली बार उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आमने-सामने मुलाकात होगी। लगभग दो दशक बाद किसी लेबनानी राष्ट्रपति का व्हाइट हाउस पहुंचना इस यात्रा को विशेष महत्व प्रदान करता है।

    मध्य पूर्व में लगातार बदलते सुरक्षा परिदृश्य और सीमा पर बनी संवेदनशील स्थिति के बीच इस मुलाकात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजरें टिकी हुई हैं। यदि दोनों पक्ष सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों पर किसी साझा समझ तक पहुंचते हैं तो इससे लेबनान, इजरायल और व्यापक पश्चिम एशियाई क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। साथ ही यह दौरा अमेरिका और लेबनान के बीच भविष्य के सहयोग को नई मजबूती देने का अवसर भी माना जा रहा है।

  • खामेनेई के जनाजे में हमास, हिज्बुल्लाह और हूती की मौजूदगी, ईरान ने दुनिया को दिया 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' की एकजुटता का संदेश

    खामेनेई के जनाजे में हमास, हिज्बुल्लाह और हूती की मौजूदगी, ईरान ने दुनिया को दिया 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' की एकजुटता का संदेश

    नई दिल्ली । ईरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे के दौरान आयोजित अंतिम श्रद्धांजलि समारोह केवल एक धार्मिक और राष्ट्रीय आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पश्चिम एशिया की मौजूदा रणनीतिक और राजनीतिक परिस्थितियों का भी महत्वपूर्ण संदेश लेकर सामने आया। इस अवसर पर हमास, हिज्बुल्लाह और यमन के हूती आंदोलन सहित ईरान के कई क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से चर्चा में रहने वाला ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ अब भी सक्रिय और संगठित बना हुआ है।

    समारोह में शामिल विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने ईरान के नेतृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग और साझा रणनीतिक संबंधों को भी दोहराया। इन संगठनों की उपस्थिति को केवल शोक प्रकट करने तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे पश्चिम एशिया में ईरान के प्रभाव और उसके सहयोगी नेटवर्क की मजबूती के प्रतीक के रूप में भी समझा जा रहा है।

    पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय संघर्ष, इजरायल के साथ बढ़ते तनाव और बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच ईरान और उसके सहयोगी संगठनों की भूमिका लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रही है। ऐसे समय में आयोजित यह अंतिम संस्कार समारोह कई देशों और विश्लेषकों की विशेष निगाहों में रहा, क्योंकि इसमें शामिल प्रतिनिधिमंडलों ने सामूहिक उपस्थिति के माध्यम से राजनीतिक और रणनीतिक संदेश देने का प्रयास किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ केवल एक राजनीतिक अवधारणा नहीं, बल्कि उन संगठनों का साझा मंच है जो क्षेत्रीय मुद्दों पर ईरान के साथ निकट सहयोग बनाए रखते हैं। इनमें लेबनान का हिज्बुल्लाह, फिलिस्तीनी संगठन हमास और यमन का हूती आंदोलन प्रमुख माने जाते हैं। इन संगठनों के बीच वर्षों से वैचारिक और रणनीतिक समन्वय देखने को मिलता रहा है।

    जनाजे के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए नागरिकों ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने भी समारोह में भाग लेकर ईरान के साथ अपने संबंधों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने घरेलू स्तर पर राष्ट्रीय एकजुटता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय साझेदारी दोनों को प्रमुखता से सामने रखा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में लगातार बदलते हालात के बीच इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से कूटनीतिक और रणनीतिक संकेत भी दिए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में सहयोगी देशों और संगठनों की उपस्थिति भविष्य की क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    हाल के वर्षों में इजरायल, गाजा, लेबनान और लाल सागर क्षेत्र में बढ़े तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है। इसी पृष्ठभूमि में ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के बीच समन्वय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। खामेनेई के जनाजे में इन सभी प्रमुख सहयोगियों की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद यह क्षेत्रीय नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है और साझा रणनीतिक उद्देश्यों पर आगे भी सहयोग जारी रखने की मंशा रखता है। समारोह से उभरी यह तस्वीर आने वाले समय में पश्चिम एशिया की राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों पर होने वाली चर्चाओं में महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखी जा रही है।

  • West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने

    West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं। दक्षिणी लेबनान में इस्राइल ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव और गहरा गया है। पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े संघर्ष का खतरा मंडराने लगा है।

    लेबनान के गांव को खाली करने का आदेश
    इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-अब्बासियाह गांव के लोगों को तत्काल इलाका खाली करने का आदेश दिया है। इस्राइल के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर लोगों से गांव छोड़कर कम से कम 1000 मीटर दूर खुले इलाकों में जाने को कहा।

    युद्धविराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में इस्राइली हवाई हमले और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हिजबुल्लाह और इस्राइली सेना के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी जारी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर और पलायन का माहौल बना हुआ है।

    दक्षिण लेबनान में हवाई हमला, 11 लोगों की मौत
    अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल ने नबातियेह जिले के दुएर, हारौफ और हब्बौश कस्बों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। वहीं 36 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान आमने-सामने
    उधर, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के तीन बड़े युद्धपोत सुरक्षित हैं और जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई करेगा।

    ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
    ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन और तेल टैंकरों पर हमला करने का आरोप लगाया है। ईरानी सेना के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलमार्ग और फुजैराह के पास जहाजों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर जवाबी हमला किया। ईरान ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही तेहरान ने साफ कहा कि किसी भी हमले का “बिना हिचकिचाहट करारा जवाब” दिया जाएगा।

    खाड़ी क्षेत्र से 5 भारतीयों की सुरक्षित वापसी
    इस बीच लेबनान स्थित भारतीय दूतावास ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे पांच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। दूतावास ने लेबनानी प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया है।पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका, ईरान और इस्राइल की अगली चाल पर टिकी हुई है।

  • पश्चिम एशिया में फिर भड़की जंग की चिंगारी, बेरूत में हिजबुल्ला कमांडर ढेर; कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला

    पश्चिम एशिया में फिर भड़की जंग की चिंगारी, बेरूत में हिजबुल्ला कमांडर ढेर; कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। युद्धविराम और कूटनीतिक कोशिशों के बीच Israel ने दावा किया है कि बेरूत के दक्षिणी इलाके में किए गए हवाई हमले में हिजबुल्ला के कई शीर्ष कमांडर मारे गए हैं। वहीं कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले से नया संकट खड़ा हो गया है।

    बेरूत हमले में हिजबुल्ला कमांडर मारे जाने का दावा
    इज़राइल रक्षा बल ने दावा किया कि बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हुए हमले में हिजबुल्ला की रदवान यूनिट के कमांडर अहमद बलूत मारे गए। इसके अलावा नासेर यूनिट के इंटेलिजेंस प्रमुख मोहम्मद अली बाजी और एयर डिफेंस अधिकारी हुसैन हसन रोमानि के भी मारे जाने की बात कही गई है।रिपोर्ट्स के अनुसार गाज़ा शहर में अलग कार्रवाई के दौरान हमास नेता खलील अल-हय्या के बेटे अज्जाम अल-हय्या के मारे जाने का भी दावा किया गया है।

    कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला
    कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले के बाद ईंधन टैंक में आग लग गई। अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती जांच में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। दमकल और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर काबू पाने में जुटी हैं।

    ईरान-इस्राइल तनाव जारी
    इस बीच ईरान  और इस्राइल के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। तेल अवीव के पास बनेई बराक में एक इमारत ईरानी मिसाइल हमले की चपेट में आने से ढह गई, जिसमें कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    वहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत जारी है और जल्द समझौता संभव है। दूसरी ओर ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने अमेरिकी रणनीति का मजाक उड़ाते हुए उसे “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” बताया।

    लेबनान और गाजा में बढ़ा संकट
    रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 24 घंटों में लेबनान में इस्राइली हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। वहीं लेबनान की ओर से दागे गए रॉकेट हमलों में उत्तरी इस्राइल में भी हताहत होने की खबरें हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष फिलहाल थमता नहीं दिख रहा और आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

  • ईरान पर फिर वार की आहट! इजरायल सतर्क, ट्रंप–नेतन्याहू रणनीति से मिडिल ईस्ट में बढ़ी हलचल

    ईरान पर फिर वार की आहट! इजरायल सतर्क, ट्रंप–नेतन्याहू रणनीति से मिडिल ईस्ट में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। Israel और Iran के बीच बढ़ती तल्खी ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर वह ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है।इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा है कि उनके देश को ईरान के खिलाफ “फिर से सैन्य कार्रवाई” करनी पड़ सकती है। उनका तर्क है कि यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि ईरान भविष्य में इजरायल, अमेरिका और सहयोगी देशों के लिए खतरा न बन सके।
    काट्ज ने यह भी संकेत दिया कि इस रणनीति पर Donald Trump और Benjamin Netanyahu के साथ समन्वय में काम हो रहा है। इससे साफ है कि यह केवल एक देश की रणनीति नहीं, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का हिस्सा हो सकता है।
    इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को “बहुत जल्द समझदार” बनना होगा और गैर-परमाणु समझौते की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अब इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने के मूड में है।

    लेबनान सीमा पर बढ़ा तनाव
    दूसरी ओर, दक्षिण लेबनान में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। Israel Defense Forces ने स्पष्ट किया है कि Hezbollah के साथ जमीनी स्तर पर कोई युद्धविराम नहीं है।आईडीएफ प्रमुख Eyal Zamir ने सैनिकों को निर्देश दिए हैं कि वे ऑपरेशन जारी रखें और उत्तरी इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जब तक खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक सुरक्षा बफर जोन नहीं हटाया जाएगा।

    हालांकि, अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन सीमा पर झड़पें, ड्रोन हमले और सैन्य गतिविधियां लगातार जारी हैं। इजरायली सेना ने हाल ही में हिज्बुल्लाह के एक रॉकेट लॉन्चर को नष्ट करने और दो ड्रोन मार गिराने का दावा किया है।

    लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां और सख्त बयानबाजी इस बात का संकेत दे रही हैं कि मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ सकते हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यही हैक्या इजरायल ईरान पर फिर हमला करेगा?और यदि ऐसा होता है, तो क्या यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है?

  • इजराइली सेना का लेबनान में बड़ा हमला…. हिजबुल्लाह के 200 ठिकानों पर की बमबारी

    इजराइली सेना का लेबनान में बड़ा हमला…. हिजबुल्लाह के 200 ठिकानों पर की बमबारी


    येरुशलम।
    इजरायली सेना (Israeli army.) ने 24 घंटे के भीतर लेबनान (Lebanon) में हिजबुल्लाह (Hezbollah.) के 200 से अधिक ठिकानों पर हमले का दावा किया है। सेना के मुताबिक, उसके वायुसेना के विमानों ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के अड्डों को निशाना बनाया। एक्स पर जारी आधिकारिक पोस्ट में इजरायली रक्षा बल (Israeli Defense Forces.-IDF) ने कहा कि यह ऑपरेशन जारी रहेगा। आईडीएफ ने दावा किया कि इन हमलों से हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। इस बीच क्षेत्र में तनाव जारी है, क्योंकि इजरायल हिजबुल्लाह को कमजोर करने के लिए निरंतर कार्रवाई कर रहा है।

    इन घटनाओं के बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम अमेरिका के साथ हुई बातचीत का हिस्सा था। पाकिस्तानी पक्ष ने भी इसकी पुष्टि की है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल हिजबुल्लाह के संपर्क में है और स्थिति पर जरूरी फैसले ले रहा है। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, यह जानकारी ईरान-पाकिस्तान-अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के शुरू होने के साथ आई है।


    पाकिस्तानी राजधानी में एक अहम बैठक

    इस्लामाबाद में हो रही ये बातचीत 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच उच्चतम स्तर की चर्चा मानी जा रही है। ईरानी टीम ने औपचारिक वार्ता से पहले पाकिस्तानी राजधानी में रणनीतिक बैठक की। इस्लामाबाद के सेरेना होटल में ये बातचीत हो रही है, जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि पहुंचे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की।

    ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इन वार्ताओं को मेक-ऑर-ब्रेक यानी निर्णायक बताया है। 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम को स्थिर करने और क्षेत्रीय सुरक्षा के भविष्य पर चर्चा का लक्ष्य है। होटल के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम और गतिविधियां दिख रही हैं। ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरेफ ने एक्स पर लिखा कि बातचीत का नतीजा अमेरिकी रुख पर निर्भर करेगा। अगर अमेरिका फर्स्ट की सोच वाले प्रतिनिधि मिले तो दोनों पक्षों और दुनिया के लिए फायदेमंद समझौता संभव है।

  • सरेंडर नहीं सीधा टकराव; ईरान युद्ध के बीच हिजबुल्लाह प्रमुख का बड़ा ऐलान, अब क्या होगा?

    सरेंडर नहीं सीधा टकराव; ईरान युद्ध के बीच हिजबुल्लाह प्रमुख का बड़ा ऐलान, अब क्या होगा?

    तेहरान। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध के बीच हिजबुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि लेबनानी प्रतिरोध आंदोलन ने आत्मसमर्पण के बजाय टकराव का रास्ता चुना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सेनाएं अमेरिका-इजरायल परियोजना का मुकाबला करने के लिए बिना किसी सीमा के बलिदान देने को पूरी तरह तैयार हैं।

    ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, हिजबुल्लाह प्रमुख ने वर्तमान संकट को लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और भविष्य के लिए अस्तित्वगत संघर्ष बताया है।

    बयान में कासिम ने तर्क दिया कि लेबनान इस समय एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। उनके अनुसार, देश के सामने दो विकल्प हैं, या तो आत्मसमर्पण कर अपनी भूमि, गरिमा, संप्रभुता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य त्याग दें, या अपरिहार्य टकराव में शामिल होकर कब्जे का डटकर विरोध करें। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध की सक्रिय नीति ने इजरायली दुश्मन को कोई आश्चर्यचकित करने का मौका नहीं दिया और आगे की घुसपैठ के सभी बहानों को प्रभावी ढंग से खारिज कर दिया है। इस दौरान महासचिव ने अपने योद्धाओं की वीरता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने वीरता, सम्मान, देशभक्ति और गरिमा के सबसे शानदार महाकाव्य लिखे हैं।

    उन्होंने विस्थापित लेबनानी नागरिकों की भी सराहना की, जिन्होंने अपने वतन के सम्मानजनक भविष्य के लिए बलिदान और प्रतिरोध का रास्ता अपनाया है।

    कासिम के बयान का मुख्य मुद्दा कथित ‘ग्रेटर इजरायल’ की विस्तारवादी योजना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह ‘खतरनाक अमेरिकी-इजरायली परियोजना’ यूफ्रेट्स से नील नदी तक क्षेत्रीय नियंत्रण स्थापित करना चाहती है, जिसमें लेबनान भी शामिल है। हिजबुल्लाह नेता के मुताबिक, लेबनानी धरती पर इजरायली आक्रमण 2024 के अंत से लगातार जारी है और इजरायली दुश्मन ने पिछले युद्धविराम समझौतों का बार-बार उल्लंघन किया है।
    घरेलू नीति पर बोलते हुए कासिम ने लेबनानी सरकार से आग्रह किया कि वह उन उपायों को रद्द करे जो प्रतिरोध को अपराध मानते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक देश खतरे में है, हथियारों का एकाधिकार केवल लेबनान के पतन और ‘ग्रेटर इजरायल’ योजना को बढ़ावा देगा। यही कारण है कि उन्होंने सक्रिय संघर्ष के दौरान किसी भी प्रकार की बातचीत को सख्ती से खारिज कर दिया और कहा कि गोलीबारी के बीच इजरायली दुश्मन से बातचीत जबरन आत्मसमर्पण के समान है।
  • जंग की 9वीं सुबह: मासूमों की मौत, शहरों में तबाही और दुनिया में विरोध-समर्थन की लहर

    जंग की 9वीं सुबह: मासूमों की मौत, शहरों में तबाही और दुनिया में विरोध-समर्थन की लहर


    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष का रविवार को नौवां दिन है। इस जंग ने ईरान के कई शहरों को तबाह कर दिया है और अब तक 1,400 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। घरों और मोहल्लों में मलबा सड़कों पर खून और अस्पतालों में घायल लोग इस जंग की भयावहता बयान कर रहे हैं।

    तेहरान में हेल्थ केयर वर्कर्स ने गांधी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया जहां हाल ही में एयर स्ट्राइक हुई थी। अस्पताल परिसर में ईरान का झंडा लहराते हुए लोग घायल मरीजों और खोए हुए लोगों की याद में खड़े थे। इसी बीच जैनब साहेबी नाम की एक मासूम बच्ची की कब्र को फूलों से सजाया गया और उस पर ईरान का झंडा रखा गया। महिलाएं उसकी कब्र तक उसका शव लेकर गईं हर कदम पर मातम और दर्द नजर आ रहा था।

    शहरों में फैली तबाही ने लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। आपातकालीन केंद्रों और राहत शिविरों में लोग पानी भोजन और दवाइयों के लिए इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह से खो दी है कई बच्चों की पढ़ाई और भविष्य अस्थायी तौर पर थम गया है।

    दुनिया भर में इस जंग के खिलाफ और समर्थन में प्रदर्शन हुए। ब्रिटेन में शनिवार को ईरान समर्थक और अमेरिका समर्थक दोनों ही समूहों ने मार्च निकाला। विरोध-समर्थन के ये विरोध मार्च वैश्विक स्तर पर इस जंग के राजनीतिक और सामाजिक असर को दर्शा रहे हैं। साथ ही लेबनान में भी इजराइल और ईरान समर्थक ग्रुप हिज़बुल्लाह के बीच हिंसक टकराव जारी है। शहरों में धमाके हवाई हमले और सड़क संघर्ष ने आम नागरिकों की जिंदगी को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है।

    इन हालातों के बीच बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों की कहानियां सबसे ज्यादा दिल दहला रही हैं। जैनब साहेबी की तस्वीरें घायल मरीज बिखरी हुई सड़कें और मलबे में फंसे लोग इस जंग की भयंकर तस्वीर पेश कर रहे हैं। वैश्विक समुदाय की नजरें ईरान अमेरिका और इजराइल के राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई हैं। राहत कार्य मानवाधिकार संगठन और स्वास्थ्य कर्मचारी लगातार संघर्षरत नागरिकों की मदद में जुटे हैं लेकिन जंग की भयावहता के बीच राहत की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण है।

  • अमेरिका-इजराइल का संयुक्त हमला, ईरान परमाणु विवाद में 742 मौतों के बाद सुरक्षा अलर्ट

    अमेरिका-इजराइल का संयुक्त हमला, ईरान परमाणु विवाद में 742 मौतों के बाद सुरक्षा अलर्ट



    नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के बीच ईरान में संकट गहराता जा रहा है। यह संघर्ष अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका के स्पेशल प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ परमाणु समझौते की अंतिम कोशिश भी नाकाम रही। अमेरिका ने ईरान को प्रस्ताव दिया था कि वह अगले 10 साल तक यूरेनियम इनरिचमेंट पूरी तरह बंद कर दे, और बदले में अमेरिका न्यूक्लियर फ्यूल उपलब्ध कराने को तैयार था। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। बातचीत टूटते ही अमेरिका और इजराइल ने मिलकर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

    इस संघर्ष में अब तक ईरान में 742 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 176 बच्चे शामिल हैं। घायल हुए लोगों की संख्या 750 से अधिक है। इस हिंसा ने पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा की स्थिति पैदा कर दी है। लेबनान के बेरूत में इजराइली सेना ने हिज्बुल्लाह से जुड़े अल-मनार टीवी स्टेशन की इमारत को निशाना बनाया, जिससे प्रसारण कुछ समय के लिए बाधित हुआ। हालांकि, हमले के बाद प्रसारण फिर से शुरू कर दिया गया।

    ईरान के मिनाब शहर में गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में मारी गई 165 लड़कियों का अंतिम संस्कार भी हुआ। इस दौरान हजारों लोग इकट्ठा हुए, और एक मां ने मंच से अमेरिका पर हमले का आरोप लगाया। भीड़ ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजराइल मुर्दाबाद’ और ‘नो सरेंडर’ जैसे नारे लगाए। ईरानी मीडिया ने हमले का आरोप इजराइल पर लगाया, जबकि इजराइली सेना ने इसे नकारा।

    इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध लंबा और अंतहीन नहीं होगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष क्षेत्र में स्थायी शांति लाने का अवसर बन सकता है। उन्होंने पहले हुए अब्राहम अकॉर्ड्स का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर अब और देशों के साथ शांति समझौते भी संभव हैं।

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प अमेरिका को लंबी और अनिश्चित लड़ाई में नहीं फंसने देंगे। उन्होंने कहा कि ईरान पर हमला विशेष रणनीति के तहत किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों। ट्रम्प की अनुमति के बिना कोई युद्ध लंबे समय तक जारी नहीं रहेगा, जिससे अमेरिका को इराक और अफगानिस्तान जैसी लंबी लड़ाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    सुरक्षा के मद्देनजर अमेरिका ने जॉर्डन, बहरीन और इराक से गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। जॉर्डन और बहरीन में ईरान से ड्रोन और मिसाइल हमले का खतरा है, जबकि इराक में हिंसा और अपहरण का भी जोखिम बना हुआ है। अमेरिकी दूतावासों में केवल आवश्यक स्टाफ ही रहेंगे, और फ्लाइट्स रद्द होने के कारण नागरिकों को सुरक्षित निकासी का निर्देश दिया गया है।

    अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति को गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने शांति बहाल करने और संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस बीच अमेरिका और इजराइल की मिलीजुली कार्रवाई, ईरानी नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नए संकट की घंटी साबित हो रही है।