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  • तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट

    तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट


    पटना।
    कुदरत के कहर से जूझ रहे नेपाल (Nepal) पर शुक्रवार को खतरा तब और बढ़ गया, जब तिब्बत-नेपाल सीमा (Tibet-Nepal border) पर बनी एक और झील फट गई। संभावित खतरे से निबटने के लिए बिहार के सभी तटबंधों की चौकसी बढ़ा दी गई है। सरकार के आदेश पर वाल्मीकिनगर एवं कोसी बराज (Kosi Barrage) पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। विशेषकर गंडक नदी के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव और भारी मात्रा में मलबा के आगमन को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सारण तटबंध सहित सभी महत्वपूर्ण तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी का आदेश दिया गया है।


    पड़ोसी देश में जलप्रलय के बाद कोसी बराज पर बढ़ी सतर्कता

    नेपाल में आई बाढ़ से भारी तबाही के बाद वीरपुर बराज पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। कोसी बराज के 56 में से 17 फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं। सभी स्पर, स्टड एवं अन्य संरचनाओं की स्थिति सामान्य है। कंट्रोल रूम के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे कोसी बराज से घटते क्रम में 1,42,360 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इसी समय बराह क्षेत्र में 90,800 क्यूसेक दर्ज किया गया। दोपहर 12 बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज 1,34,225 क्यूसेक दर्ज हुआ, जबकि बराह में बढ़कर 99,500 क्यूसेक रहा। शाम छह बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज बढ़कर 1,44,775 क्यूसेक पहुंच गया। बराह में डिस्चार्ज 99,500 क्यूसेक रहा। विभाग अलर्ट है। नेपाल के भोटे कोशी से 10 हजार क्यूसेक तक अतिरिक्त पानी आने की संभावना है, जिसका कोसी के प्रवाह पर असर पड़ने की संभावना नहीं है।


    दिन रात काम कर रही इंजीनियरों की टीम

    संभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दे दिया गया है, ताकि बाढ़ आने पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाए। जल संसाधन विभाग ने संबंधित जिलों के पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी अलर्ट मोड में रहने को कहा है। संबंधित जिले के जिलाधिकारी अपने अधीन तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग के मुख्यालय स्तर पर हर आधे घंटे पर गंडक नदी के डिस्चार्ज की जानकारी ली जा रही है। इंजीनियरों की टीम चौबीसो घंटे काम कर रही है।


    क्या बोले डिप्टी सीएम विजय चौधरी?

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि ग्लेशियर फटने से नेपाल में बाढ़ की तबाही हुई है। लेकिन बिहार के वाल्मिकीनगर अवस्थित गंडक बराज से नेपाल के उस केंद्रबिंदु की दूरी लगभग 250-300 किलोमीटर है। इस कारण नेपाल से आने वाले पानी का प्रवाह-प्रभाव नीचे आते-आते कम हो गया है। इसका लाभ बिहार को हुआ। इसके अलावा गंडक के पूरे प्रवाह में पहले से भी सामान्य से कम पानी था। खतरे के निशान से नदी बह रही थी। इसलिए जो भी पानी आया, उससे बहुत भयावह स्थिति नहीं बनी। शुक्रवार को गंडक में वाल्मीकिनगर बराज के समीप लगभग एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता रहा।


    नेपाल की दो दर्जन नदियों से उत्तर बिहार को खतरा

    नेपाल की पहाड़ियों से आने वाली गंडक समेत दो दर्जन से अधिक पहाड़ी नदियों से पश्चिम चंपारण जिले समेत उत्तर बिहार को खतरा है। नेपाल की त्रिशूली नदी जैसा हादसा सीमावर्ती क्षेत्रों में होने पर पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार में गंडक व सिकरहना तबाही मचा सकती हैं। नेपाल से आने वाली नारायणी नदी ही भारत में गंडक के नाम से जानी जाती है। इसमें काली गंडक, मर्स्यांगदी, माड़ी और सेती नदियां आकर मिलती हैं। नेपाल के देवघाट के पास नारायणी में त्रिशूली नदी मिलती है।

    नेपाल डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के समन्वयक डॉ. विवास बहादुर बस्न्यात व नवलपरासी जिले के वरिष्ठ जल विज्ञानी बिनोद पराजुली बताते हैं कि त्रिशूली नदी तिब्बत के क्यिरोंग जिले की पेखु कांगरी पर्वतमाला से निकलती है। त्रिशूली नदी अपने साथ भोटेकोशी, ल्हेन्दे खोला, मैलमंग खोला, चिलीमे खोला, आंखू खोला और बूढ़ी गंडक नदी को लेकर नारायणी में मिलती है। ऊंची पहाड़ियों से निकलने के कारण यह नदी बेहद खतरनाक मानी जाती है। त्रिशूली नदी में ही बाढ़ के कारण नेपाल में भारी तबाही मची है। दोबारा झील टूटने से इसका असर भारतीय क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।


    तिब्बत के नाले से निकली गंडक, नाम जुगूं खोला था

    नदियों के विशेषज्ञ देवी लाल यादव ने बताया कि गंडक तिब्बत के कागबेनी के नाले से निकलती है। यहां उसका नाम जुगूं खोला है। अन्नपूर्णा के पास यह काली गंडकी के नाम से जानी जाती है। इसमें ठाकुर जी मिलती हैं। आगे बढ़ने पर कृष्णा गंडकी और देवघाट में नारायणी के नाम से जानी जाती है। बराज से पूर्व यह गंडक हो जाती है। नेपाल में 123 लेक आउट हैं। इन झीलों पर अवरोधक बने हुए हैं। कभी भी इनमें बर्स्ट आउट हो सकता है। इससे भारी तबाही मच सकती है।

    सिकरहना लाई थी तबाही
    रामनगर और गौनाहा से आने वाली डेढ़ दर्जन पहाड़ी नदियां लौरिया, चनपटिया व सिकटा में आकर सिकरहना से मिलती हैं। 2017 में सिकरहना में बाढ़ आने पर चंपारण, मुजफ्फरपुर समेत बेगूसराय में तबाही मची थी।

    बताते चलें कि 26 अगस्त को नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ आ गई थी। पानी गंडक में प्रवाह होने से गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ आने की संभावना जताई गई थी। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंडक बराज पर मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में एक तकनीकी दल को तैनात कर दिया है। गंडक बराज के सभी 36 गेटों को खोल दिया है, ताकि नेपाल से आने वाला बाढ़ का पानी निकल सके।

  • भारत में इबोला को लेकर हाई अलर्ट…. कांगो से लौटे BSF जवान में दिखे लक्षण

    भारत में इबोला को लेकर हाई अलर्ट…. कांगो से लौटे BSF जवान में दिखे लक्षण


    नई दिल्ली।
    दुनियाभर में इबोला वायरस (Ebola virus) के मंडराते खतरे के बीच भारत (India) भी अलर्ट (Alert) पर है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) से लौटे सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force-BSF) के एक 52 वर्षीय जवान में इबोला के संदिग्ध लक्षण दिखने के बाद हड़कंप मच गया है। एहतियात के तौर पर जवान को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के इबोला आइसोलेशन वॉर्ड में भर्ती कराया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि देश में अभी तक इबोला के एक भी कन्फर्म मामले की पुष्टि नहीं हुई है और सरकार स्थिति पर पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए है।


    क्वारंटीन के 20वें दिन बिगड़ी जवान की तबीयत

    संदिग्ध लक्षणों वाला यह बीएसएफ जवान संयुक्त राष्ट्र (UN) शांति मिशन का हिस्सा था और बीते 11 जुलाई को ही कांगो से भारत लौटा था। इबोला प्रभावित क्षेत्र से आने के कारण नियमों के तहत जवान को एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (APHO) में 21 दिनों के अनिवार्य क्वारंटीन में रखा गया था।

    क्वारंटीन पीरियड के 20वें दिन की शाम को जवान को अचानक तेज बुखार और बदन दर्द की शिकायत हुई, जो इबोला संक्रमण के शुरुआती लक्षण माने जाते हैं। प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए मरीज को तुरंत RML अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, जवान के खून के नमूने जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजे गए हैं। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार है और यह केवल एक संदिग्ध मामला है।


    एक्शन में सरकार, 11 हजार यात्रियों की हो चुकी है स्क्रीनिंग

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा ‘बुंदीबुग्यो इबोला आउटब्रेक’ को अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद से ही भारत सरकार अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में बताया कि 23 मई से अब तक इबोला प्रभावित देशों से भारत आए 10,974 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच की जा चुकी है।


    यात्रा पर बैन नहीं, लेकिन निगरानी सख्त

    कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे इबोला प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी की जा रही है। भारत सरकार ने यात्रा पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन एयर सुविधा 2.0 पोर्टल और ‘सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म’ के जरिए उन सभी यात्रियों की पहचान की जा रही है, जो पिछले 21 दिनों में इन देशों में गए थे।


    इन शहरों के एयरपोर्ट्स पर सबसे ज्यादा जांच

    स्क्रीनिंग के मामले में मुंबई एयरपोर्ट सबसे आगे है, जहां अब तक 7,568 यात्रियों की जांच की गई है। इसके बाद दिल्ली में 1,833, हैदराबाद में 532, चेन्नई में 210, बेंगलुरु में 205 और अहमदाबाद में 200 यात्रियों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।


    इबोला से निपटने के लिए भारत की क्या है तैयारी?

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला के संभावित खतरे से निपटने के लिए नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC), ICMR और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर एक मजबूत रणनीति तैयार की है। देशभर के अस्पतालों में विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं।

    प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अतिरिक्त डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए NCDC का पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर 24×7 काम कर रहा है। इसके अलावा, देश भर के चुनिंदा अस्पतालों में मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध मामले के सामने आने पर बिना देरी के तुरंत एक्शन लिया जा सके।

  • 15 अगस्त से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन और हॉट एयर बैलून उड़ाने पर प्रतिबंध

    15 अगस्त से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन और हॉट एयर बैलून उड़ाने पर प्रतिबंध


    नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस 2026 के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने 2 अगस्त से 16 अगस्त तक राजधानी में ड्रोन सहित सभी छोटे हवाई प्लेटफॉर्म के उड़ान संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है।

    पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। इसके अनुसार प्रतिबंध अवधि के दौरान ड्रोन (UAV/UAS), क्वाडकॉप्टर, पैराग्लाइडर, पैरामोटर, हैंग ग्लाइडर, माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट, रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA), हॉट एयर बैलून, छोटे पावर्ड एयरक्राफ्ट तथा विमान से पैरा जंपिंग जैसी सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी में आशंका जताई गई है कि असामाजिक या आतंकवादी तत्व इन हवाई माध्यमों का इस्तेमाल कर आम नागरिकों, वीआईपी और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए एहतियातन यह फैसला लिया गया है।


    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह प्रतिबंध 2 अगस्त से लागू होकर 16 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा, ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोह शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराया जा सके।

  • पंजाब में हाई अलर्ट…. ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सैन्य ठिकानों पर ब्लास्ट के बाद बढ़ाई सुरक्षा

    पंजाब में हाई अलर्ट…. ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सैन्य ठिकानों पर ब्लास्ट के बाद बढ़ाई सुरक्षा


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की सालगिरह से ठीक पहले पंजाब (Punjab) में दो सैन्य ठिकानों के बाहर हुए धमाकों के बाद पंजाब (Punjab) में हाई अलर्ट (High alert) जारी किया गया है। पूरे पंजाब में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, आर्मी बेस, पैरामिलिट्री कैंप और दूसरे जरूरी आधारभूत संरचना के आसपास पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और चेकपॉइंट बनाए गए हैं। बॉर्डर पर भी बीएसएफ ने चौकसी बढ़ा दी है। मंगलवार शाम को जालंधर के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के पंजाब फ्रंटियर हेडक्वार्टर के पास और इसी रात अमृतसर में आर्मी के खासा कैंप के पास धमाके हुए थे। अब एनआईए, पंजाब पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर यह पता लगा रही है कि क्या धमाके के तार आपस में जुड़े हुए थे?

    धमाकों के समय ने जांच में एक और पहलू जोड़ दिया है और वह है ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह। हालांकि, अधिकारियों ने कोई सीधा कनेक्शन नहीं निकाला है, लेकिन उन्होंने कहा कि इस इत्तेफाक को बड़े सुरक्षा मूल्यांकन में शामिल किया जा रहा है क्योंकि बॉर्डर स्टेट पंजाब पहले भी कई आतंकी हमले झेल चुका है। ऑपरेशन सिंदूर में भी पाकिस्तान ने पंजाब के सरहदी जिलों पठानकोट, अमृतसर, फिरोजपुर, जालंधर के आदमपुर एयरबेस को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया था।


    सेना ने बोर्डर से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया

    खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का में सतर्कता बढ़ाई गई है। फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन और विभिन्न बॉर्डर चौकियों पर पुलिस नाके लगाकर तलाशी अभियान तेज किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से अति संवेदनशील एवं सीमावर्ती जिला पठानकोट में पुलिस ने सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए हैं। पठानकोट के साथ लगते जम्मू-कश्मीर व हिमाचल के इंटर स्टेट नाकों पर पुलिस ने सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए फोर्स बढ़ा दी है। पठानकोट की बड़ी सीमा पाकिस्तान के साथ सटी है।

    बुधवार को पठानकोट पुलिस और सेना की ओर से भारत-पाक सीमा से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जम्मू और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले सभी एंट्री पॉइंट्स पर पुलिस की पैनी नजर है। हर आने-जाने वाले वाहन की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और बिना पहचान पत्र के किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। एसएसपी पठानकोट दलजिंदर सिंह ढिल्लो के दिशा निर्देशों के अनुसार पूरे जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कल रात से ही पठानकोट के साथ लगते जम्मू व हिमाचल से आने वाली हर गाड़ी को चेक किया जा रहा है।


    चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस के मुख्यालय पर हाई सिक्योरिटी

    पंजाब में दोहरे ब्लास्ट के बाद राजधानी चंडीगढ़ में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और आने-जाने वाले हर व्यक्ति की सख्ती से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल बदलाव एहतियात के तौर पर किया गया है, क्योंकि यह इलाका पहले से ही संवेदनशील श्रेणी में आता है।

    मुख्यालय के पास ही चंडीगढ़ पुलिस का दफ्तर और पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का कार्यालय होने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के पीछे लोहे के बड़े बड़े गेट लगाए गए हैं ताकि बाहर से कोई विस्फोटक परिसर में न फैंका जा सके।


    आईएसआई, खालिस्तानी और गैंगस्टरों के गठजोड़ से बढ़ी चिंताएं

    पंजाब में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर गंभीर चिंता सामने आ रही है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क और गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। हाल के घटनाक्रम और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से साफ है कि राज्य को अस्थिर करने की कोशिशें सुनियोजित तरीके से की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा से ड्रोन के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी बड़ी चुनौती बन चुकी है।

    अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में कई बार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से हथियार गिराए जाने के मामले सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि इन गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी आतंकी शामिल हैं। इनमें रंजीत नीटा और लखबीर लंडा जैसे नाम प्रमुख हैं। हालांकि पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता से कई साजिशें नाकाम हुई हैं। इसके बावजूद सीमा पार से मिल रहे समर्थन और स्थानीय नेटवर्क के कारण चुनौती बनी हुई है।

  • काशी में हाई अलर्ट: पीएम मोदी के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद

    काशी में हाई अलर्ट: पीएम मोदी के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद

    नई दिल्ली। वाराणसी में प्रधानमंत्री के आगामी दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। पूरे शहर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण से लेकर वीआईपी मूवमेंट तक के लिए विशेष योजना तैयार की है, ताकि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।

    शहर के प्रमुख आयोजन स्थलों और मार्गों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मियों की भी बड़ी संख्या शामिल है, जिन्हें विशेष रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जिस स्थान पर बड़ा जनसमूह जुटने की संभावना है, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

    पूरे कार्यक्रम क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षा घेरे में रखा गया है। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क सक्रिय किया गया है, जिससे हर गतिविधि पर रियल टाइम नजर रखी जा सके। इसके साथ ही ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाया गया है।

    भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है और यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों की योजना बनाई गई है। इससे आम लोगों को कम से कम असुविधा हो और शहर में आवाजाही सामान्य बनी रहे।

    कार्यक्रम के दौरान एक बड़े महिला सम्मेलन का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, ताकि पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

    इसके अलावा प्रधानमंत्री के धार्मिक कार्यक्रमों को देखते हुए भी विशेष तैयारी की गई है। शहर में उत्साह का माहौल है और लोग उनके स्वागत के लिए तैयार हैं। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि दौरा पूरी तरह सुरक्षित, व्यवस्थित और सफल रहे।

  • बिहार के दरभंगा में 15 दिनों में 10 हजार कौवों की मौत, बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद हाई अलर्ट… शहर में दहशत का माहौल

    बिहार के दरभंगा में 15 दिनों में 10 हजार कौवों की मौत, बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद हाई अलर्ट… शहर में दहशत का माहौल


    दरभंगा।
    बिहार (Bihar) बर्ड फ्लू (Bird flu) पांव पसार रहा है। दरभंगा शहर (Darbhanga city) में पिछले 15 दिनों में हजारों कौवों (Thousands Crows) की मौत हो गई है। डेयरी, मत्स्य व पशु संसाधन विभाग की ओर से कराई गई जांच में इनमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। जिलाधिकारी ने पशुपालन विभाग को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया है। आम लोगों से सतर्क रहने और किसी आशंका पर प्रशासन को सूचित करने की अपील डीएम ने की है। स्वास्थ्य विभाग ने आसपास के जिलो को अलर्ट किया है।

    मरे हुए नगर निगम की ओर से जेसीबी मशीन की मदद से गड्ढा खोदकर वैज्ञानिक तरीके से दफनाया गया। इसमें कबीर सेवा संस्थान ने भी सहयोग किया। इस दौरान स्वास्थ्य व पशुपालन विभाग की टीम भी मौजूद रही। बताया गया है कि मरे हुए कौवों की संख्या करीब 10 हजार है। मौके पर पहुंचे वार्ड पार्षद नफीसुल हक रिंकू और नवीन सिन्हा ने बताया कि जिले में बर्ड फ्लू तेजी से फैल रहा है। दरभंगा जिले के कई इलाकों से मुर्गों और मुर्गियों की मौत होने की सूचना मिल रही है। विभागीय टीम सैंपल लेकर जांच कर रही है।

    जिला प्रशासन ने लोगों से फिलहाल चिकेन और अंडा खाने से परहेज करने की अपील की गई है। साथ ही किसी भी असामान्य स्थिति की सूचना तुरंत प्रशासन को देने को कहा गया है। कबीर सेवा संस्थान के संरक्षक और वार्ड पार्षद नवीन सिन्हा ने कहा कि एक किलोमीटर के दायरे में सभी पॉल्ट्री फार्म व बिक्री केंद्र की निगरानी सहित पक्षियों को रखने वाले पॉल्ट्री फार्म की सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि कोलकाता और भोपाल में कराई गई जांच की रिपोर्ट गुरुवार की देर रात आई है। इसमें इन कौवों की मौत का कारण बर्ड फ्लू बताया गया है। कौवों में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने की खबर से जिले में हड़कंप मच गया है।

    जिला प्रशासन ने भी सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। डीएम कौशल कुमार ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी मृत पक्षी को हाथ न लगाएं। उधर, डीएम कौशल कुमार ने गुरुवार को जिला पशुपालन अधिकारी को पत्र जारी कर कहा है कि शहर के वार्ड 31 में मृत कौवों के नमूने की जांच में एवियन इंफ्लूएंजा की पुष्टि हुई है। अत: नगर आयुक्त व वन प्रमंडल से समन्वय स्थापित कर प्रभावित क्षेत्र में बचाव सं संबधित काम कराएं। साथ ही पूरे जिले में इसकी निगरानी सुनिश्चित अकराएं।

  • सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू

    सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू


    नई दिल्ली । श्रीनगर/जम्मू: गणतंत्र दिवस से पूर्व जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोनों की बढ़ती सक्रियता ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है। पिछले पांच दिनों के भीतर संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की यह तीसरी बड़ी घटना है, जिसके बाद सांबा और पुंछ जिलों में सेना ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। सीमा पार से होने वाली इन संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।

    ताजा घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार शाम सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर और पुंछ के देगवार व मनकोट इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते देखे गए। रामगढ़ के चक बबरल गांव के ऊपर शाम करीब 7:15 बजे एक संदिग्ध वस्तु कुछ मिनटों तक उड़ती दिखी, जबकि पुंछ में शाम 6:25 बजे तैन से टोपा की ओर ड्रोन जैसी वस्तु जाती नजर आई। इन गतिविधियों के तुरंत बाद सेना ने अपने एंटी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम को सक्रिय कर दिया और संबंधित इलाकों की घेराबंदी कर दी।

    इससे पहले 13 जनवरी को राजौरी जिले में दो बार पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए थे, जिन पर जवानों ने फायरिंग की, जिसके बाद वे पाक अधिकृत कश्मीर की ओर लौट गए। वहीं, 11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर में जवानों ने मशीन गन से फायरिंग कर ड्रोन की घुसपैठ को नाकाम किया था। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि पाकिस्तान इन ड्रोनों का उपयोग भारतीय सेना की चौकियों की टोह लेने या फिर आतंकियों के लिए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप गिराने के लिए कर रहा है। उल्लेखनीय है कि 9 जनवरी को सांबा के पालूरा गांव में ड्रोन द्वारा गिराई गई एक खेप बरामद हुई थी, जिसमें पिस्तौल, मैगजीन और ग्रेनेड शामिल थे।

    इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय सेना किसी भी आतंकी या सैन्य दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि सीमा पार अब भी 8 आतंकी कैंप सक्रिय हैं और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सेना हर हरकत पर नजर रख रही है। इसके अतिरिक्त, राजौरी के काकोरा गांव में सेना ने समय रहते 3 किलो वजन का एक संदिग्ध  बरामद कर उसे नष्ट कर दिया, जिससे एक बड़ी आतंकी साजिश विफल हो गई। गणतंत्र दिवस को देखते हुए पूरी घाटी और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

  • तुर्कमान गेट घटनाओं के बाद, जुमे की नमाज में हाई अलर्ट मोड, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई

    तुर्कमान गेट घटनाओं के बाद, जुमे की नमाज में हाई अलर्ट मोड, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई

    नई दिल्‍ली । तुर्कमान गेट इलाके में बीते दिनों पत्थरबाजी और हिंसा की घटना के बाद आज दिल्ली की ऐतिहासिक फैज-ए-इलाही मस्जिद में जुमे की नमाज को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। दिल्ली पुलिस के साथ पैरामिलिट्री फोर्स की भारी तैनाती, ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी तथा कड़े प्रतिबंधों के बीच नमाज अदा कराई जा रही है। प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन दोनों ने लोगों से शांति, संयम और सहयोग बनाए रखने की अपील की है।

    दरअसल तुर्कमान गेट इलाके में हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों की तैनाती की गई है। मस्जिद परिसर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग कर दी गई है, वहीं हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार जुमे की नमाज के बाद भी सुरक्षा बल इलाके में तैनात रहेंगे। ड्रोन कैमरों और अतिरिक्त सीसीटीवी की मदद से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    तुर्कमान गेट हिंसा की पृष्ठभूमि

    गौरतलब है कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की टीम तुर्कमान गेट इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास पहुंची थी। इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों ने पुलिस और एमसीडी कर्मियों पर पथराव किया, जिसमें 10 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग, आंसू गैस और लाठीचार्ज करना पड़ा था। घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा के मद्देनजर सील कर दिया गया था और बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी गई थी, जिसके तहत चार या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई। पुलिस ने इस मामले में दंगा, सरकारी काम में बाधा और हिंसा से जुड़ी धाराओं में कई एफआईआर दर्ज की हैं।

    जांच और कानूनी कार्रवाई

    दिल्ली पुलिस ने हिंसा की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक और तकनीकी जांच शुरू की है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह भी जांच की जा रही है कि कहीं हिंसा किसी संगठित साजिश का हिस्सा तो नहीं थी। अब तक कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शांति भंग करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी दोहराया गया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई थी और इसका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात को सुचारु बनाना था।

    जुमे की नमाज को लेकर मस्जिद की अपील आई सामने

    फैज-ए-इलाही मस्जिद के मुख संरक्षक नजमुद्दीन चौधरी ने हालात की नजाकत को देखते हुए लोगों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो लोग अपने घर या नजदीकी मस्जिद में नमाज अदा करें, ताकि अनावश्यक भीड़ न जुटे। वहीं, दिल्ली पुलिस ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें। अफवाहों पर रोक लगाने के लिए साइबर सेल को विशेष रूप से सक्रिय किया गया है।

    राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

    तुर्कमान गेट हिंसा और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज है। कुछ विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन और सत्तापक्ष का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि तुर्कमान गेट और फैज-ए-इलाही मस्जिद क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी जा रही। जुमे की नमाज को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने दोहराया कि शांति और सौहार्द बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसी सहयोग से इलाके में सामान्य स्थिति बहाल कराए जाने का प्रयास जारी रहेगा।

  • इटारसी आयुध निर्माणी को फिर मिली बम से उड़ाने की धमकी 8 महीने में दूसरी बार आई मेल परिसर में हाई अलर्ट

    इटारसी आयुध निर्माणी को फिर मिली बम से उड़ाने की धमकी 8 महीने में दूसरी बार आई मेल परिसर में हाई अलर्ट


    इटारसी । मंगलवार को मध्य प्रदेश के इटारसी में स्थित रक्षा मंत्रालय के अधीन आयुध निर्माणी परिसर में एक बम से उड़ाने की धमकी भरा मेल मिला जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। यह घटना 8 महीने में दूसरी बार हुई है। पहले 17 अप्रैल को भी इस तरह का मेल आया था लेकिन वह फर्जी साबित हुआ था। इस बार आए मेल को लेकर एक बार फिर अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों में चिंताएं बढ़ गई हैं।

    मंगलवार को मिले धमकी भरे ईमेल के बाद फैक्ट्री प्रबंधन और जिला पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा इस थोटा ने मेल की पुष्टि की और बताया कि इसकी जांच की जा रही है। धमकी भरा मेल सोमवार रात को फैक्ट्री के आधिकारिक ईमेल पते पर आया था जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचित किया गया।

    आयुध निर्माणी एक अत्यधिक संवेदनशील स्थान है जहां भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक हथियार और अन्य सैन्य सामग्री तैयार की जाती है। इस वजह से यहां सुरक्षा को लेकर कड़ी निगरानी रखी जाती है। अब पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमों ने फैक्ट्री परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को लागू किया है और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया है।

    कुल मिलाकर यह धमकी भरा मेल फैक्ट्री प्रशासन के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है और जांच के साथ-साथ सुरक्षा इंतजामों में भी सुधार किए जा रहे हैं। पुलिस द्वारा मामले की पूरी जांच की जा रही है ताकि जल्द से जल्द यह पता चल सके कि धमकी वास्तविक है या फिर किसी शरारत का हिस्सा।