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  • हाइपरटेंशन से बचाव जरूरी, लाइफस्टाइल में बदलाव से ऐसे करें हाई बीपी को नियंत्रित

    हाइपरटेंशन से बचाव जरूरी, लाइफस्टाइल में बदलाव से ऐसे करें हाई बीपी को नियंत्रित

    नई दिल्ली ।
    आज की तेज रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। अनियमित दिनचर्या, गलत खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। शुरुआत में यह समस्या सामान्य लग सकती है, लेकिन समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो यह दिल, किडनी और दिमाग जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर असर डाल सकती है। यही वजह है कि डॉक्टर इसे एक “साइलेंट किलर” भी कहते हैं, क्योंकि कई बार इसके लक्षण देर से सामने आते हैं और तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है।

    जब ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ता है तो व्यक्ति को सिरदर्द, घबराहट, चक्कर आना, थकान और बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। ऐसे में केवल दवाइयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जीवनशैली में सुधार करना भी उतना ही जरूरी होता है। कुछ सरल घरेलू उपायों को अपनाकर ब्लड प्रेशर को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है और शरीर को स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

    सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है नमक का सेवन कम करना। अधिक नमक शरीर में पानी को रोकता है, जिससे रक्तचाप बढ़ने लगता है। ऐसे में पैकेज्ड फूड, चिप्स, फास्ट फूड और ज्यादा नमक वाली चीजों से दूरी बनाना जरूरी होता है। भोजन में संतुलन बनाए रखना ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने में मदद करता है।

    तनाव को कम करना भी हाई बीपी को नियंत्रित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। मानसिक दबाव शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जिससे ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है। रोजाना कुछ समय योग, ध्यान और प्राणायाम करने से मन शांत रहता है और शरीर रिलैक्स महसूस करता है। अनुलोम-विलोम और गहरी सांस लेने की तकनीकें विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती हैं।

    इसके साथ ही पोटैशियम से भरपूर आहार लेना भी फायदेमंद होता है। केला, पालक, टमाटर, दही और नारियल पानी जैसे खाद्य पदार्थ शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि शरीर में डिहाइड्रेशन होने पर ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है और बीपी बढ़ सकता है।

    नियमित शारीरिक गतिविधि भी हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाती है। रोजाना 30 मिनट की वॉक, हल्की एक्सरसाइज या साइकलिंग करने से दिल मजबूत होता है और रक्त संचार बेहतर होता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना भी ब्लड प्रेशर बढ़ने का कारण बन सकता है, इसलिए सक्रिय रहना जरूरी है।

    अगर ब्लड प्रेशर बार-बार 140/90 से ऊपर जाता है या इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और तेज सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। घरेलू उपाय शुरुआती स्तर पर मदद कर सकते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में चिकित्सा उपचार ही सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

  • योग का आसान उपाय: शवासन से दूर हो सकता है तनाव और हाई ब्लडप्रेशर की समस्या

    योग का आसान उपाय: शवासन से दूर हो सकता है तनाव और हाई ब्लडप्रेशर की समस्या


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लडप्रेशर यानी Hypertension तेजी से आम समस्या बनता जा रहा है। पहले यह बीमारी बढ़ती उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। लगातार तनाव, खराब खानपान, नींद की कमी और घंटों बैठकर काम करना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। ऐसे में योग और मेडिटेशन को बेहतर जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जा रहा है। योग के कई आसनों में शवासन एक ऐसा आसान और प्रभावी योगासन है, जो मानसिक और शारीरिक दोनों स्तर पर राहत देने का काम करता है।
    आयुष मंत्रालय भी हाई ब्लडप्रेशर और तनाव से राहत पाने के लिए योग को अपनाने की सलाह देता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शवासन शरीर और दिमाग को गहरी शांति देने वाला आसन है। इसमें व्यक्ति पीठ के बल सीधा लेटकर शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ देता है और सांसों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह प्रक्रिया शरीर के तनाव को कम करने में मदद करती है।
    दरअसल, मानसिक तनाव हाई ब्लडप्रेशर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। जब व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है, तो शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। इससे दिल की धड़कन तेज होती है और ब्लडप्रेशर बढ़ने लगता है। शवासन दिमाग को शांत कर शरीर की नसों और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। इससे तंत्रिका तंत्र धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आने लगता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, शवासन के दौरान ली जाने वाली धीमी और गहरी सांसें शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बेहतर बनाती हैं। इससे रक्त प्रवाह संतुलित रहता है और ब्लडप्रेशर नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव, चिंता और बेचैनी भी कम होने लगती है।
    शवासन सिर्फ हाई ब्लडप्रेशर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर की थकान दूर करने में भी असरदार माना जाता है। दिनभर काम करने के बाद शरीर में जो भारीपन और कमजोरी महसूस होती है, यह आसन उसे कम करने में मदद करता है। मांसपेशियों को पूरा आराम मिलने से शरीर फिर से ऊर्जा महसूस करता है।
    नींद की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी शवासन फायदेमंद माना जाता है। यह दिमाग को शांत कर नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है। इसके अलावा पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में राहत देने तथा ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने में भी यह योगासन उपयोगी माना जाता है।
    हालांकि, किसी भी बीमारी में योग को इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को गंभीर हाई ब्लडप्रेशर या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
    Disclaimer: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य और योग संबंधी मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
  • सुबह की ये ड्रिंक्स कंट्रोल कर सकती हैं हाई BP, दिल की सेहत को मिल सकता है सपोर्ट

    सुबह की ये ड्रिंक्स कंट्रोल कर सकती हैं हाई BP, दिल की सेहत को मिल सकता है सपोर्ट

    नई दिल्ली।
    हाई ब्लड प्रेशर आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो जीवनशैली और खानपान से सीधे जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति को नियंत्रित रखने में दवाओं के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतों का भी बड़ा योगदान होता है। खासकर सुबह की दिनचर्या इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    सुबह की शुरुआत अगर सही और संतुलित ड्रिंक के साथ की जाए तो शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक पेय पदार्थों को नियमित रूप से सेवन करने की सलाह दी जाती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं।

    सुबह हल्का गर्म नींबू पानी एक सरल और उपयोगी विकल्प माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक हो सकते हैं। यह शरीर को ताजगी देने के साथ दिन की अच्छी शुरुआत करने में मदद करता है।

    इसके अलावा नारियल पानी को भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। संतुलित इलेक्ट्रोलाइट्स रक्तचाप को स्थिर रखने में सहायक माने जाते हैं।

    चुकंदर का जूस भी उन ड्रिंक्स में शामिल है, जिन्हें अक्सर हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करने में मदद कर सकते हैं। इसे बिना अतिरिक्त चीनी के सेवन करने की सलाह दी जाती है ताकि इसका प्राकृतिक लाभ बना रहे।

    ग्रीन टी भी एक लोकप्रिय विकल्प है, जिसे हल्के रूप में सेवन करने पर शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने और तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    आंवला जूस को भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ हृदय पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

    इन ड्रिंक्स के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि कुछ आदतों से बचा जाए। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक कैफीन वाले पेय, शुगर युक्त ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस का अधिक सेवन ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है।

    कुल मिलाकर, सुबह की सही आदतें और प्राकृतिक पेय पदार्थों का संतुलित सेवन जीवनशैली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।

  • कम उम्र में बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा खराब लाइफस्टाइल और अनकंट्रोल शुगर जिम्मेदार

    कम उम्र में बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा खराब लाइफस्टाइल और अनकंट्रोल शुगर जिम्मेदार


    नई दिल्ली:आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें किडनी की बीमारियां सबसे चिंताजनक मानी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किडनी से जुड़ी कई बीमारियां शरीर में बिना किसी स्पष्ट संकेत के धीरे धीरे विकसित होती रहती हैं। यही वजह है कि इन्हें साइलेंट किलर भी कहा जाता है। जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं तब तक कई बार बीमारी काफी गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी होती है।

    देश में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और ये दोनों ही समस्याएं किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण मानी जाती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक शुगर या ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है तो उसे नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए। समय पर जांच से बीमारी को शुरुआती अवस्था में पकड़ा जा सकता है और गंभीर स्थिति से बचाव संभव हो सकता है।

    नोएडा एक्सटेंशन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर उपेंद्र सिंह के अनुसार पिछले दो से तीन वर्षों में किडनी से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब 30 से 45 वर्ष की आयु के लोगों में भी किडनी की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसके पीछे सेडेंटरी लाइफस्टाइल अत्यधिक तनाव शरीर में पानी की कमी और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

    डॉक्टरों के मुताबिक क्रॉनिक किडनी डिजीज और किडनी स्टोन के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। क्रॉनिक किडनी डिजीज एक ऐसी बीमारी है जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे धीरे शरीर को प्रभावित करती है। कई मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब यह बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है और किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर आज भी किडनी रोग के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं। अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीजों में इन दोनों में से एक या दोनों समस्याएं मौजूद होती हैं। इसके अलावा दर्द निवारक दवाओं का अधिक उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के जिम सप्लीमेंट या स्टेरॉयड लेना शरीर में पानी की कमी और खराब जीवनशैली भी किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण बन रहे हैं।

    कई मामलों में बीमारी की देर से पहचान होने के कारण मरीजों को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ जाती है जिससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। हालांकि समय रहते सावधानी बरती जाए तो किडनी की बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पैरों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे पेशाब में झाग आए पेशाब की मात्रा या रंग में बदलाव महसूस हो या लगातार थकान और भूख में कमी महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा उल्टी आना जी मिचलाना या अचानक ब्लड प्रेशर का बढ़ जाना भी किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट क्रिएटिनिन टेस्ट और यूरिन टेस्ट करवाते रहना चाहिए। इसके साथ ही रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना नमक का सेवन सीमित करना धूम्रपान से दूर रहना और वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है और किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

  • हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार

    हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार


    नई दिल्ली । हाई ब्लड प्रेशर को अब तक हम केवल ज्यादा नमक खाने, तला-भुना भोजन मोटापा और मानसिक तनाव के साथ जोड़कर देखते आए हैं। लेकिन ऑकलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक ताज़ा स्टडी ने चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि हाई बीपी के पीछे केवल हमारा खानपान ही नहीं, बल्कि हमारे दिमाग की वायरिंग और उससे निकलने वाले सिग्नल भी एक बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    क्या है दिमाग का वह हिस्सा जो बढ़ाता है बीपी

    वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग के निचले हिस्से में एक विशेष क्षेत्र होता है जिसे लैटरल पैराफेशियल रीजन कहा जाता है। आमतौर पर यह हिस्सा शरीर की उन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है जो अपने आप होती हैं, जैसे सांस लेना, दिल का धड़कना और पाचन क्रिया। स्टडी में खुलासा हुआ है कि इसी क्षेत्र में मौजूद कुछ विशेष नसें ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। जब ये नसें जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, तो वे रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने के संकेत भेजती हैं। वाहिकाओं के सिकुड़ने से रक्त का प्रवाह बाधित होता है और दबाव बढ़ जाता है, जिसे हम मेडिकल भाषा में हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं।

    अब तक की थ्योरी से कैसे अलग है यह रिसर्च

    अब तक डॉक्टरों का मानना था कि बीपी बढ़ने का मुख्य कारण किडनी की कार्यक्षमता में कमी या आर्टरीज में फैट का जमना है। लेकिन यह नई रिसर्च बताती है कि दिमागी नियंत्रण यदि दिमाग का लैटरल पैराफेशियल रीजन गलत सिग्नल भेज रहा है, तो स्वस्थ खानपान के बावजूद व्यक्ति का बीपी बढ़ सकता है। ऑटोमैटिक रिस्पॉन्स: कई बार शरीर बिना किसी बाहरी कारण जैसे नमक या गुस्सा के भी आंतरिक दिमागी संकेतों की वजह से हाइपरटेंशन का शिकार हो जाता है।

    एक्सपर्ट की सलाह: खुद को कैसे रखें सुरक्षित

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई रिसर्च के बाद अब बीपी के इलाज के तरीकों में बदलाव आ सकता है। केवल दवाएं ही नहीं बल्कि ‘न्यूरोलॉजिकल कंट्रोल पर भी ध्यान देना होगा। वर्तमान में खुद को सुरक्षित रखने के लिए आप ये कदम उठा सकते हैं ब्रीदिंग एक्सरसाइज: चूंकि यह हिस्सा सांस लेने को भी नियंत्रित करता है, इसलिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम दिमाग को शांत कर बीपी कम करने में मदद कर सकते हैं। माइंडफुलनेस योग और ध्यान के जरिए दिमाग के निचले हिस्से को रिलैक्स रखा जा सकता है। नियमित चेकअप: यदि खानपान सही होने के बाद भी बीपी बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से न्यूरोलॉजिकल कारणों पर चर्चा करें।